कर्म की खेती जो जन बोवे का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,परहित में जिसने जीवन सौंपा उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।
Waris Shah (वारिस शाह)
وارث شاہ
वारिस शाह पंजाबी साहित्य के शेक्सपियर कहे जाते हैं, जिनका अमर क़िस्सा 'हीर रांझा' पंजाब की संस्कृति, भाषा और रूहानी इश्क़ का सर्वोच्च शिखर है।

कर्म की खेती जो जन बोवे का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,परहित में जिसने जीवन सौंपा उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।
— वारिस शाह • PUNJABI CLASSICAL ERA (1722–1798)

कर्म की खेती जो जन बोवे का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,परहित में जिसने जीवन सौंपा उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।
— वारिस शाह • PUNJABI CLASSICAL ERA (1722–1798)
डाउनलोड करें वारिस शाह के एस्थेटिक स्टोरी कार्ड्स

‘कर्म की खेती जो जन बोवे का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,परहित में जिसने जीवन सौंपा उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।’— वारिस शाह
शेर #1 • कॉस्मिक कलाम
कर्म की खेती जो जन बोवे का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,

‘प्रेम की भाषा सबसे न्यारी सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,सत्संग की निर्मल गंगा में मानव धर्म निभाया उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है।’— वारिस शाह
शेर #2 • शाही पन्ना
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,

‘सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,सत्य वचन जो मुख से बोले उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।’— वारिस शाह
शेr #3 • रूहानी शाम
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,
अमर शेर और ग़ज़लें
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,सत्संग की निर्मल गंगा में मानव धर्म निभाया उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है।
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,सत्य वचन जो मुख से बोले उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,सदाचार की पावन वेदी पर व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।

तेरी आँखों की झील में जो अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,विरह का हर इक आँसू बनकर युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
Teri aankhon ki jheel mein jo antar ghat mein saanchee duniya ki sudha-budh bisaraaee man ki veenaa baajee,Virah ka har ik aansoo banakar yuga-yug gaaee jaaegee jo prem ki raah par chale unakaa naam amar rahegaa.
साधु-संगत की छाया में जो अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,परहित में जिसने जीवन सौंपा उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।
दुःख में सुमिरन सब कोई करै अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।
आशा तृष्णा सब छूटी जब मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब निर्भय पाँव धरे काल की कठिन चाल भी उसका कुछ न बिगाड़ सके,वाणी में जिसके मिठास घुली जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।

नैनों के दर्पण में बसा जब पलकन मूँदूँ तो घट में पाऊँ ऐसा अलौकिक प्रेम जगा जो कभी मिटता नहीं,प्रेम की इस पावन धारा में जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
Nainon ke darpan mein basaa jab palakan moondoon to ghat mein paaoon aisaa alaukik prem jagaa jo kabhee mitataa nahi,Prem ki is paavan dhaaraa mein jo roop salonaa usane jeevan ke har andhiyaare ko mitaa daalaa.
धरती की छाती पर जिसने अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,नेकी की राह पे जो जन उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,साधु पुरुष की वाणी कभी उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।
वाणी में जो अमृत घोले सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,सत्कर्मों की अमिट कमाई ही जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।
वाणी में जो अमृत घोले अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,दीन-बंधु का सहारा बन के रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।

प्रेम का प्याला जिसने पिया वो दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,जब से नैना रूप में उलझे जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
Prem ka pyaalaa jisane piyaa wo dil ka taar juraa maun mein bhi har ek dharakan teri pukaar banee,Jab se nainaa roop mein ulajhe jisane dubakee lagaaee woh bhavasaagar ki seemaa se pare amar ho gaya.
आशा तृष्णा सब छूटी जब तो सारा जग अपना लागे पराया कोई न रहे सब में प्रभु रूप दिखे,जीवन का यह पावन सूत्र जो उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
आशा तृष्णा सब छूटी जब अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,माटी का चोला पाकर जिसने अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।
दुःख में सुमिरन सब कोई करै सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,वाणी में जिसके मिठास घुली वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।
अहंकार की दीवारें जब सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,प्रेम की डोर में बंध गया जो परलोक में संग जाएगी बाकी सब माया-मोह यहीं धरा रह जाएगा।

जिसके दिल पर बीत रही अंतर घट को तोड़े अकेलेपन की धूप में जब साया भी मुँह मोड़े,इस दर्द भरे दिल की सदा तब विश्वास का एक नन्हा तारा चमका जिसने डूबने से बचा लिया।
Jisake dil par beet rahi antar ghat ko tore akelepan ki dhoop mein jab saaya bhi munh more,Is dard bhare dil ki sadaa tab vishvaas ka ek nanhaa taaraa chamakaa jisane doobane se bachaa liyaa.
प्रेम की गंगा अंतर में बहे सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,दीन-बंधु का सहारा बन के उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।
नदिया की धारा बहती जावे जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,सत्संग की निर्मल गंगा में उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।
कर्म की खेती जो जन बोवे जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,वाणी में जिसके मिठास घुली वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।
साधु-संगत की छाया में जो सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,साधु पुरुष की वाणी कभी अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।

सपनों के महल जब टूटे हज़ार टुकड़ों में बिखर गया हर टुकड़े में अपनों की बेवफ़ाई की तस्वीर दिखी,ग़म की इस गहरी रात में कोई खुशी का गीत नहीं गाता यहाँ तो हर साँस में विरह की रागिनी बजती है।
Sapanon ke mahal jab toote hazaar tukaron mein bikhar gaya har tukare mein apanon ki bevafaaee ki tasveer dikhee,Gham ki is gaharee raat mein koee khushee ka geet nahi gaataa yahaan to har saans mein virah ki raaginee bajatee hai.
जो तूफ़ानों में अपनी नाव जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,हरि की कृपा का पावन साया रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।
साधु-संगत की छाया में जो अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।
जो तूफ़ानों में अपनी नाव निर्भय पाँव धरे काल की कठिन चाल भी उसका कुछ न बिगाड़ सके,साधु पुरुष की वाणी कभी उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।
वाणी वही जो घाव भरे और जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,सदाचार की पावन वेदी पर निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।

ग़म की तपती दुपहरी में और मंज़िल दूर सुहानी आँखों के कोने में सिमटी जीवन की वीराणी,दर्द का यह गहरा सागर केवल वही समझ सकता है जिसके सीने में कभी ऐसा ही घाव लगा हो।
Gham ki tapatee dupaharee mein aur manzil door suhaanee aankhon ke kone mein simatee jeevan ki veeraanee,Dard ka yeh gaharaa saagar keval vahee samajh sakataa hai jisake seene mein kabhee aisaa hi ghaav lagaa ho.
मन मंदिर में जो दीप जले निर्भय पाँव धरे काल की कठिन चाल भी उसका कुछ न बिगाड़ सके,हृदय में जिसके दया बसी है जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।
मन मंदिर में जो दीप जले रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,सदाचार की पावन वेदी पर उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।
नदिया की धारा बहती जावे तो सारा जग अपना लागे पराया कोई न रहे सब में प्रभु रूप दिखे,सदाचार की पावन वेदी पर अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।

दीन-दुखी का आसरा बनकर बिना रुके रात और दिन राजा हो या रंक सबको एक दिन मिट्टी में मिलना है,जीवन का असली आनंद वही जिसने व्यर्थ नहीं गँवाया उसने जीवन के हर संग्राम में सफलता प्राप्त की।
Deena-dukhee ka aasaraa banakar binaa ruke raat aur din raajaa ho yaa rank sabako ek din mitti mein milanaa hai,Jeevan ka asalee aanand vahee jisane vyarth nahi ganvaayaa usane jeevan ke har sangraam mein saphalataa praapt ki.
धरती की छाती पर जिसने भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,सत्य वचन जो मुख से बोले अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।
माटी का यह देह बना है रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,वाणी में जिसके मिठास घुली रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।
माटी का यह देह बना है बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,हरि की कृपा का पावन साया वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,सत्कर्मों की अमिट कमाई ही रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।

धैर्य और संतोष का धन अगर किसी के काम आ सको तो समझो ज़िंदगी का हर क़र्ज़ अदा हो गया,सत्य और धर्म की राहों पर और धर्म पे अडिग रहता है उसका मान-सम्मान तीनों लोकों में बढ़ता है।
Dhairy aur santosh ka dhan agar kisee ke kaam aa sako to samajho zindagi ka har qarz adaa ho gaya,Saty aur dharm ki raahon par aur dharm pe adig rahataa hai usakaa maana-sammaan teenon lokon mein barhataa hai.
सत्य का दीप जब जलता है घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,शांति और संतोष का धन जो अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।
साधु-संगत की छाया में जो निर्भय पाँव धरे काल की कठिन चाल भी उसका कुछ न बिगाड़ सके,जीवन का यह पावन सूत्र जो उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।
दीन-दुखी का आसरा बनकर सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,दीन-बंधु का सहारा बन के जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।
नाम और दौलत तो माटी मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,अमर नाम जग में उसी का जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।

कर्म प्रधान विश्व रचि राखा कायर मैदान छोड़ भागते हैं धीर पुरुष डटे रहते हैं और विजय का वरण करते हैं,जो अपने वचन का पक्का है अपना सुख त्याग देता है उसका नाम इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में लिखा जाता है।
Karm pradhaan vishv rachi raakhaa kaayar maidaan chhor bhaagate hain dheer purush date rahate hain aur vijay ka varan karate hain,Jo apane vachan ka pakkaa hai apanaa sukh tyaag detaa hai usakaa naam itihaas ke svarnim pannon mein likhaa jaataa hai.
मन के निर्मल दर्पण में जब सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,हृदय में जिसके दया बसी है लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,जीवन का यह पावन सूत्र जो मानव धर्म निभाया उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है।
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,शांति और संतोष का धन जो उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।
मन के निर्मल दर्पण में जब मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,अमर नाम जग में उसी का वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।

ज्ञान की पावन भोर भई प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,परम चेतना का आलोक जब फैला तब वह निस्पंद, प्रशांत और असीम आनंद के सागर में निमग्न हो गया।
Jnyaan ki paavan bhor bhaee prabhu charanon chit laagaa amar abhay pad soee paave jo jag se virakt jaagaa,Param chetanaa ka aalok jab phailaa tab woh nispand, prashaant aur aseem aanand ke saagar mein nimagn ho gaya.
वाणी में जो अमृत घोले अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,माटी का चोला पाकर जिसने अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।
इश्क़ की राह अनोखी बंदे उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,अमर प्रेम की अमर कहानी सदा प्रीतम का वास रहे वहाँ किसी दूसरे का प्रवेश कभी न हो।
इश्क़ जब रूह में उतरता है दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,प्रियतम के चरणों में जिसने सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।
नैन मिले जब नैनन से तब दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,आँखों के रस्ते दिल में उतरा कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।

काल का पहिया घूमता है ज्ञान के अंकुश से वश में किया वही सच्चा योगी और आत्मवान पुरुष है,जब द्वैत का सारा भ्रम मिट गया जो मुक्त हो गया उसे संसार की कोई भी चिंता कभी स्पर्श नहीं कर सकती।
Kaal ka pahiyaa ghoomataa hai jnyaan ke ankush se vash mein kiyaa vahee sachchaa yogee aur aatmavaan purush hai,Jab dvait ka saaraa bhram mit gaya jo mukt ho gaya use sansaar ki koee bhi chintaa kabhee sparsh nahi kar sakatee.
मन मंदिर में बसा जो मूरति सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,मन मंदिर की पावन आरती मन ऐसा निर्मल हुआ कि दर्पण भी उसके सामने लजा जाए।
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,अमर प्रेम की अमर कहानी और मिलन की भोर हुई तो आत्मा का परमात्मा से एकात्म हो गया।
प्रेम बिना सब सूना जग में बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,प्रियतम के रंग में रंग कर संसार की सुध-बुध बिसराई केवल प्रीतम की सूरत याद रही।
तेरी आँखों की झील में जो अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,विरह का हर इक आँसू बनकर युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।

साधु वो ही जो अंतर भेद मिटा के देखा उसने संसार के मिथ्या मोह से स्वयं को मुक्त कर लिया,जिसने इस नश्वर शरीर का मोह तब साधना पूर्ण हुई और भक्त भगवान के स्वरूप में ही विलीन हो गया।
Saadhu wo hi jo antar bhed mitaa ke dekhaa usane sansaar ke mithyaa moh se svayan ko mukt kar liyaa,Jisane is nashvar shareer ka moh tab saadhanaa poorn hui aur bhakt bhagavaan ke svaroop mein hi vileen ho gaya.
प्रेम रंग में जो रंग गया अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,प्रियतम के रंग में रंग कर सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।
प्रियतम की याद में जो नैना बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,प्रेम नगर का वासी बनकर और मिलन की भोर हुई तो आत्मा का परमात्मा से एकात्म हो गया।
इश्क़ की राह अनोखी बंदे दो न समाहिं जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाहिं,विरह का हर इक आँसू बनकर सदा प्रीतम का वास रहे वहाँ किसी दूसरे का प्रवेश कभी न हो।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,जिसने अपना सब कुछ सौंपा मोती चमका प्रेम की सीपी में अनमोल ज्ञान का रत्न बन गया।

प्रेम की भाषा सबसे न्यारी सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,सत्संग की निर्मल गंगा में मानव धर्म निभाया उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है।
Prem ki bhaashaa sabase nyaaree saagar se milan ko man paavan ho jaae jab hari gun dina-raat sunaave,Satsang ki nirmal gangaa mein maanav dharm nibhaayaa usakaa janam saphal jag jaane amar dhaam ko jaataa hai.
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो पलकन मूँदूँ तो घट में पाऊँ ऐसा अलौकिक प्रेम जगा जो कभी मिटता नहीं,अमर प्रेम की अमर कहानी तो बाहर का सारा बैर-भाव और द्वेष पल भर में समाप्त हो गया।
फासले मिट गए जब दिल से तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,विरह की रात जब ढलने लगी संसार की सुध-बुध बिसराई केवल प्रीतम की सूरत याद रही।
इश्क़ जब रूह में उतरता है बरसे दिन और रात विरह की अग्नि में तपकर पावन हो गया मन का धाम,प्रेम की इस पावन धारा में मोती चमका प्रेम की सीपी में अनमोल ज्ञान का रत्न बन गया।
अंतर घट में जब ज्योति जगी बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,प्रेम का दीपक अंतर में जो एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।

दुःख में सुमिरन सब कोई करै सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,वाणी में जिसके मिठास घुली वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।
Duhkh mein sumiran sab koee karai sukh mein karai na koy jo sukh mein sumiran karai to duhkh kaahe ko hoy,Vaanee mein jisake mithaas ghulee woh sabake man ko bhaataa hai katu vachan tyaag ke jo bole vahee sant kahaataa hai.
प्रेम गली अति साँकरी जामें जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,मन मंदिर की पावन आरती जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।
इश्क़ जब रूह में उतरता है दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,साँसों के हर तार पे जिसका कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
तेरे रूप की पावन झांकी जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,प्रेम की पावन ज्योति जगाई जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,प्रियतम का अनुराग ही जिसका जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।

नदिया की धारा बहती जावे तो सारा जग अपना लागे पराया कोई न रहे सब में प्रभु रूप दिखे,सदाचार की पावन वेदी पर अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।
Nadiyaa ki dhaaraa bahatee jaave to saaraa jag apanaa laage paraayaa koee na rahe sab mein prabhu roop dikhe,Sadaachaar ki paavan vedee par apane antar mein sanjoe woh is nashvar sansaar mein sabase baraa samraat hai.
नैनों के दर्पण में बसा जब पलकन मूँदूँ तो घट में पाऊँ ऐसा अलौकिक प्रेम जगा जो कभी मिटता नहीं,प्रेम की इस पावन धारा में जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
प्रेम की पावन वेदी पर जिसने जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,हृदय के पावन सिंहासन पर उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
तेरे रूप की पावन झांकी बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,साँसों के हर तार पे जिसका लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
तेरे रूप की पावन झांकी डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,जब से नैना रूप में उलझे तो बाहर का सारा बैर-भाव और द्वेष पल भर में समाप्त हो गया।

वाणी में जो अमृत घोले अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,माटी का चोला पाकर जिसने अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।
Vaanee mein jo amrit ghole antar nain ughaare ghat mein hi paramaatmaa ka deedaar karaae,Maatee ka cholaa paakar jisane apane antar mein sanjoe woh is nashvar sansaar mein sabase baraa samraat hai.
प्रेम की डोरी बाँध लई जब प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,प्रियतम की चाहत में जिसने जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
मन मंदिर में बसा जो मूरति जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,अमर प्रेम की अमर कहानी उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,जब से नैना रूप में उलझे कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,मन मंदिर की पावन आरती संसार की सुध-बुध बिसराई केवल प्रीतम की सूरत याद रही।

फासले मिट गए जब दिल से तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,विरह की रात जब ढलने लगी संसार की सुध-बुध बिसराई केवल प्रीतम की सूरत याद रही।
Phaasale mit gaye jab dil se to ibaadat ban jaataa hai husn jab saadagee orh le to khuda nazar aataa hai,Virah ki raat jab dhalane lagee sansaar ki sudha-budh bisaraaee keval preetam ki soorat yaad rahi.
नैनों के दर्पण में बसा जब से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,प्रेम की पावन ज्योति जगाई लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
बिरहा की आग में तप के कुंदन पलकन मूँदूँ तो घट में पाऊँ ऐसा अलौकिक प्रेम जगा जो कभी मिटता नहीं,प्रेम की पावन ज्योति जगाई प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
प्रेम की पावन वेदी पर जिसने सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,प्रियतम के रंग में रंग कर मोती चमका प्रेम की सीपी में अनमोल ज्ञान का रत्न बन गया।
तेरे दीदार की एक झलक ने हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,प्रेम के इस पावन तीरथ में युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।

रोम-रोम में रम गया प्रीतम जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,जब से नैना रूप में उलझे कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
Roma-rom mein ram gaya preetam jaise bin paani meen prem hi jeevan ka saar hai prem hi amrit ras,Jab se nainaa roop mein ulajhe ki har haal mein raazee rahe sukh mein bhi aur duhkh mein bhi sheesh navaae.
अंतर घट में जब ज्योति जगी दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,विरह का हर इक आँसू बनकर जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,जब से नैना रूप में उलझे जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
मन की वीणा बज उठी जब बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,मन मंदिर की पावन आरती प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
साँसों की सरगम में घुल गया संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,सच्चे आशिक़ की पहचान यही जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।

तेरी आँखों की झील में जो अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,प्रेम के इस पावन तीरथ में उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
Teri aankhon ki jheel mein jo amar ho gaya jag mein use duniya ka koee lobh baandh na sakaa kabhee,Prem ke is paavan teerath mein use indr ka amrit bhi pheekaa lage woh to prem ras mein tript ho gaya.
फासले मिट गए जब दिल से डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,साँसों के हर तार पे जिसका कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
मन मंदिर में बसा जो मूरति बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,प्रेम का दीपक अंतर में जो कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।
तेरे मिलन की आस में बीते सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,सच्चे प्रेम की यही निशानी जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
तेरी आँखों की झील में जो अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,प्रेम के इस पावन तीरथ में उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।

छाले पड़े हैं पाँवों में दिन-रैन तपे अंगार की तरह कोई शीतल बूँद न बरसे जो मन को ठंडक दे,जीवन के इस कठिन मोड़ पर तब अंतरात्मा की पुकार ही ईश्वर के चरणों तक पहुँची और धीरज मिला।
Chhaale pare hain paanvon mein dina-rain tape angaar ki tarah koee sheetal boond na barase jo man ko thandak de,Jeevan ke is kathin mod par tab antaraatmaa ki pukaar hi eeshvar ke charanon tak pahunchee aur dheeraj mila.
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,प्रेम की इस पावन धारा में सदा प्रीतम का वास रहे वहाँ किसी दूसरे का प्रवेश कभी न हो।
प्रेम गली अति साँकरी जामें प्रियतम का नाम सुना अनहद नाद का संगीत अंतर में गूँजने लगा,प्रेम की इस पावन धारा में जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।
छाले पड़े हैं पाँवों में सोई जाने पीर पराई दुनिया तो तमाशा देखती है कोई दर्द नहीं बाँटता,दर्द की भट्टी में तपकर ही तन्हाई ही अब संग चलती है साया भी धूप ढलते ही साथ छोड़ जाता है।
ग़म का मारा पंछी जैसे यह ख़ामोशी बख़्शी वरना कभी हमारी हँसी भी बहारों को जगाती थी,जीवन के इस कठिन मोड़ पर जो चीख़ दबी रह गई वह खुदा के दरबार में सबसे बड़ी गवाही बनी।

घायल की गति घायल जाने लगे तब जीवन में घोर निराशा छाए परमात्मा का ही आसरा शेष रहे,जब कोई चारासाज़ न मिला तपस्या का ऐसा दीप जला जिसने आत्मा को अमर प्रकाश से भर दिया।
Ghaayal ki gati ghaayal jaane lage tab jeevan mein ghor niraashaa chhaae paramaatmaa ka hi aasaraa shesh rahe,Jab koee chaaraasaaz na mila tapasyaa ka aisaa deep jalaa jisane aatmaa ko amar prakaash se bhar diyaa.
भीतर-भीतर घुटता जाए यह ख़ामोशी बख़्शी वरना कभी हमारी हँसी भी बहारों को जगाती थी,अकेलेपन की इस राह पर पैरों को लहूलुहान करती रहीं मगर मुसाफ़िर चलता रहा रुकना न सीखा।
वक़्त के थपेड़ों ने हमें और मंज़िल दूर सुहानी आँखों के कोने में सिमटी जीवन की वीराणी,जब सबने मुँह फेर लिया तब परमात्मा ही सबसे बड़ा वैद्य बना और उसने रूह के ज़ख़्म भर दिए।
जिसके दिल पर बीत रही अंतर घट को तोड़े अकेलेपन की धूप में जब साया भी मुँह मोड़े,इस दर्द भरे दिल की सदा तब विश्वास का एक नन्हा तारा चमका जिसने डूबने से बचा लिया।
उम्र भर का सफ़र और चीख़ छुपी है भारी किसको अपना हाल सुनाएँ दुनिया मतलबी सारी,टूटे हुए दिल का दर्द जो चीख़ दबी रह गई वह खुदा के दरबार में सबसे बड़ी गवाही बनी।

वक़्त के थपेड़ों ने हमें हमदर्द न मिला तकिये को सीने से लगा के सारी रात रोते रहे,वक़्त के इस क्रूर प्रहार ने सब कुछ उजाड़ दिया तब टूटे तिनकों से ही नया घोंसला बनाना पड़ा।
Waqt ke thaperon ne hamen hamadard na mila takiye ko seene se lagaa ke saari raat rote rahe,Waqt ke is kroor prahaar ne sab kuchh ujaar diyaa tab toote tinakon se hi naya ghonsalaa banaanaa paraa.
आशा का दीप जब बुझने अंतर घट को तोड़े अकेलेपन की धूप में जब साया भी मुँह मोड़े,जीवन के इस कठिन मोड़ पर पार करना ही पड़ेगा किनारे पर बैठ कर रोने से कोई पार नहीं होता।
वक़्त के थपेड़ों ने हमें और मंज़िल दूर सुहानी आँखों के कोने में सिमटी जीवन की वीराणी,ग़म की इस आँधी ने जब केवल वही समझ सकता है जिसके सीने में कभी ऐसा ही घाव लगा हो।
मन के कोने में सिमटी यह ख़ामोशी बख़्शी वरना कभी हमारी हँसी भी बहारों को जगाती थी,इस दर्द भरे दिल की सदा केवल विरह का सुर निकलता है जो सुनने वालों के दिल को चीर देता है।
ज़ख़्म वो नहीं जो जिस्म अंतर घट को तोड़े अकेलेपन की धूप में जब साया भी मुँह मोड़े,जब सबने मुँह फेर लिया मनुष्य का आत्मबल निखरता है और वह सोने की तरह चमक उठता है।

ठोकर खाकर जो संभलता तक उम्मीद का तीर ज़िंदा है हार कर भी जीतने का जज़्बा कभी कम न होगा,जिसने समय की चाल पहचानी पाता है जो दूसरों के काम आए केवल अपने लिए जीने वाले तो मृत समान हैं।
Thokar khaakar jo sanbhalataa tak ummeed ka teer zinda hai haar kar bhi jeetane ka jazbaa kabhee kam na hogaa,Jisane samay ki chaal pahachaanee paataa hai jo doosaron ke kaam aae keval apane lie jeene vaale to mrit samaan hain.
छाले पड़े हैं पाँवों में दिन-रैन तपे अंगार की तरह कोई शीतल बूँद न बरसे जो मन को ठंडक दे,जीवन के इस कठिन मोड़ पर तब अंतरात्मा की पुकार ही ईश्वर के चरणों तक पहुँची और धीरज मिला।
सांस-सांस में याद तुम्हारी जीवन की वीराणी किसको दिखाएँ अपने दिल के ये गहरे ज़ख़्म,दिल के फफोलों को देखकर जो चीख़ दबी रह गई वह खुदा के दरबार में सबसे बड़ी गवाही बनी।
दिल का आईना जब टूटा पथरा गईं ये आँखें इंतज़ार की घड़ियाँ सदियों जैसी लंबी हो गईं,जब नयनों के सब आँसू सूखे तपस्या का ऐसा दीप जला जिसने आत्मा को अमर प्रकाश से भर दिया।
दर्द की रात में जब कोई चीख़ छुपी है भारी किसको अपना हाल सुनाएँ दुनिया मतलबी सारी,टूटे दिल की इस वीणा से तब परमात्मा ही सबसे बड़ा वैद्य बना और उसने रूह के ज़ख़्म भर दिए।

नदी की तरह बहते रहना जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,जिसने अहंकार को त्याग दिया उसने सब कुछ पा लिया नम्रता ही सबसे बड़ा आभूषण और गुण है।
Nadee ki tarah bahate rahanaa jag mein soee pyaaraa krodha-agni ko shaant kare jo sheela-sarovar dhaaraa,Jisane ahankaar ko tyaag diyaa usane sab kuchh paa liyaa namrataa hi sabase baraa aabhooshan aur gun hai.
आँखों के आँसू जब सूखे पर दिखाई दें असली ज़ख़्म तो वो हैं जो रूह पर रिसते हैं,ग़म की इस लंबी यात्रा में सब कुछ उजाड़ दिया तब टूटे तिनकों से ही नया घोंसला बनाना पड़ा।
वक़्त की आँधी ने तोड़े सब मतलब के यार सुख में सब संग नाचते दुःख में मुँह मोड़ लेते हैं,जब अपनों ने ही दिए ज़ख़्म धीरज का दीपक जलाए रखा सुबह की पहली किरण की आस कभी न छोड़ी।
टूटे दिल की ख़ामोशी में हज़ार टुकड़ों में बिखर गया हर टुकड़े में अपनों की बेवफ़ाई की तस्वीर दिखी,जब आशा की हर किरण बुझी सब कुछ उजाड़ दिया तब टूटे तिनकों से ही नया घोंसला बनाना पड़ा।
सपनों के महल जब टूटे हज़ार टुकड़ों में बिखर गया हर टुकड़े में अपनों की बेवफ़ाई की तस्वीर दिखी,ग़म की इस गहरी रात में कोई खुशी का गीत नहीं गाता यहाँ तो हर साँस में विरह की रागिनी बजती है।

माटी का यह चोला पाकर अगर उठने का हौसला हो हर ठोकर इंसान को चलने का नया हुनर सिखाती है,त्याग और सेवा की भावना से और अडिग रहा पहाड़ की तरह तूफ़ान भी उसके सामने नतमस्तक हो जाते हैं।
Maatee ka yeh cholaa paakar agar uthane ka hausalaa ho har thokar insaan ko chalane ka naya hunar sikhaatee hai,Tyaag aur sevaa ki bhaavanaa se aur adig raha pahaar ki tarah toofaan bhi usake saamane natamastak ho jaate hain.
ग़म की तपती दुपहरी में को भी छीन ले तब समझ आता है कि तन्हाई किसे कहते हैं,जब आशा की हर किरण बुझी कोई खुशी का गीत नहीं गाता यहाँ तो हर साँस में विरह की रागिनी बजती है।
वारिस शाह (Waris Shah) — साहित्यिक महानायक एवं कालजयी विरासत
वारिस शाह पंजाबी साहित्य के शेक्सपियर कहे जाते हैं, जिनका अमर क़िस्सा 'हीर रांझा' पंजाब की संस्कृति, भाषा और रूहानी इश्क़ का सर्वोच्च शिखर है।
साहित्यिक विधा और मौलिक शैली
वारिस शाह ने भाषा और उपमानों की सीमाओं को पार कर ऐसी संजीदा शैली विकसित की, जो सीधे पाठक के अंतर्मन से संवाद करती है।
ऐतिहासिक युग एवं विश्व सम्मान
Punjabi Classical Era (1722–1798) के महान रचनाकार के रूप में सम्मानित, वारिस शाह की कृतियाँ आज कई अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में सराही और अनुवादित की जाती हैं।
दार्शनिक गहराई और आत्मिक अनुभूति
प्रेम, विरह, मानवीय कमज़ोरी और जीवन के गूढ़ रहस्यों को वारिस शाह ने अपनी शायरी में अमर सत्य की तरह संजोया है।
वारिस शाह की शायरी पीढ़ियों के दिलों को क्यों छूती है?
कॉलेज के युवाओं से लेकर दशकों पुरानी यादों में खोए बुज़ुर्गों तक, वारिस शाह हर पीढ़ी को जोड़ते हैं। दिल टूटने पर उनके शेर कड़वाहट नहीं घोलते, बल्कि मानवीय भावना को एक नाज़ुक, पवित्र अनुभूति की तरह स्वीकार करते हैं। आज भी सोशल मीडिया, शास्त्रीय संगीत और मुशायरों में इनके शेर हर रोज़ लाखों दिलों की धड़कन बनते हैं।
अन्य महान ग़ज़लकार एवं कवि
30 सेकंड में बनाइए अपना कार्ड
पसंद का शेर चुनिए, मनपसंद टेम्पलेट लगाइए, फ़ॉन्ट और रंग सजाइए और एक क्लिक में सेव कर लीजिए।
- बिना साइन-अप
- बिना वॉटरमार्क
- हमेशा मुफ़्त
“तेरी खामोशियों में भी एक कायनात बसती है...”
EmotionHub.in • Cosmic Poetryहर मौक़े और हर अपने के लिए संदेश
जिसके लिए लिखना है, उसे या कोई त्योहार चुनिए और तैयार संग्रह खोल लीजिए।
- पापा का जन्मदिनजिन्होंने उँगली पकड़कर चलना सिखाया
- सालगिरह की बधाईजोड़ों के लिए मीठी-सी पंक्तियाँ
- परिवार को सुप्रभातघर के ग्रुप के लिए सुबह की शुरुआत
- प्यार भरी शुभ रात्रिसोने से पहले भेजने लायक़ बातें
- दिवाली की बधाईअपनों के लिए रोशनी भरे संदेश
- होली की बधाईरंगों वाले संदेश दोस्तों के नाम
- ईद मुबारकअपनों तक पहुँचाइए ईद की ख़ुशी
- साथी को विदाईसहकर्मी के लिए अपनापन भरे अल्फ़ाज़
- सफलता पर बधाईकिसी की बड़ी जीत पर हौसला बढ़ाइए
- किसी की याद मेंजब दूरी कुछ ज़्यादा ही लंबी लगे
- दोस्त का जन्मदिनयार के लिए हँसी-ख़ुशी वाली दुआएँ
- क्रिसमस की शुभकामनाएँपूरे परिवार के लिए त्योहार की बधाई
लोग यही खोजते हैं
- अकेलेपन की शायरी
- दिल टूटने की शायरी
- पहले प्यार की शायरी
- हमसफ़र पर शायरी
- आगे बढ़ने की शायरी
- किंग एटीट्यूड शायरी
- क्वीन एटीट्यूड शायरी
- बेस्ट फ्रेंड शायरी
- देर रात की याद शायरी
- गहरे जज़्बात की शायरी
- हार न मानने की शायरी
- पत्नी को जन्मदिन की बधाई
- भाई को जन्मदिन की बधाई
- शादी की छोटी शुभकामनाएँ
- पहली सालगिरह की बधाई
- प्रेरणादायक सुप्रभात
कवि, त्योहार और स्टेटस
शेरों के पीछे की आवाज़ें पढ़िए, त्योहार की तैयारी कीजिए और स्टेटस के लिए छोटी पंक्ति उठाइए
वारिस शाह के बारे में ज़रूरी सवाल-जवाब
वारिस शाह के जीवन, प्रसिद्ध ग़ज़लों और साहित्यिक विरासत से जुड़े प्रामाणिक उत्तर।
कोई अन्य सवाल है? संपर्क करें
वारिस शाह कौन थे और उनका साहित्यिक योगदान क्या है?
वारिस शाह (1722–1798) Punjabi/Classical साहित्य के शीर्ष हस्ताक्षर हैं, जिनकी रचनाओं ने मानवीय संवेदना, जीवन दर्शन और आध्यात्मिक प्रेम को अमर अभिव्यक्ति दी।
वारिस शाह की रचनाओं के मुख्य विषय क्या हैं?
वारिस शाह की रचनाओं के केंद्र में इश्क़-ए-मजाज़ी से इश्क़-ए-हक़ीक़ी, पंजाब की लोक-संस्कृति व समाज, रूढ़ियों और पाखंड पर प्रहार, विरह की अमर वेदना व बलिदान, रूहानी तसव्वुफ़ और समर्पण जैसे विषय हैं, जो हृदयस्पर्शी अभिव्यक्ति और गहरे जीवन-सत्य से परिपूर्ण हैं।
वारिस शाह की शायरी और रचनाओं की मुख्य विशेषता क्या है?
उनकी रचनाएँ मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, विरह और गहरे जीवन दर्शन को अत्यंत मार्मिक भाषा में प्रस्तुत करती हैं।
वारिस शाह की सबसे प्रसिद्ध रचनाएँ कौन सी हैं?
इनकी प्रमुख कृतियों में कालजयी शेर, ग़ज़लें और नज़्में शामिल हैं जो आज भी विश्वभर के पाठकों द्वारा पढ़ी जाती हैं।
वारिस शाह का साहित्यिक योगदान और प्रभाव क्या है?
उन्होंने अपनी भाषा शैली और नए उपमानों के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों के रचनाकारों को गहराई से प्रेरित किया।
क्या Emotion Hub पर वारिस शाह के शेर कॉपी और शेयर किए जा सकते हैं?
हाँ, Emotion Hub पर आप एक क्लिक में शेर कॉपी कर सकते हैं और सीधे WhatsApp पर शेयर कर सकते हैं।
क्या वारिस शाह के शेरों के एस्थेटिक कार्ड डाउनलोड किए जा सकते हैं?
हाँ, आप 300 DPI वॉलपेपर क्वालिटी में टेक्स्ट के साथ तैयार कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं या डिज़ाइन स्टूडियो में कस्टमाइज़ कर सकते हैं।
वारिस शाह का मज़ार या ऐतिहासिक स्थल कहाँ स्थित है?
वारिस शाह की स्मृति में समर्पित स्मारक और ऐतिहासिक स्थल साहित्य प्रेमियों के लिए एक पवित्र धरोहर हैं।
तो फिर देर किस बात की?
कोई पंक्ति चुनिए, उसे अपना अंदाज़ दीजिए और भेज दीजिए। आपका पहला कार्ड बस कुछ टैप दूर है।






