ज्ञान का पावन भोर हुआ जब सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।
Thomas Jefferson (थॉमस जेफरसन)
थॉमस जेफरसन (1743–1826) Philosopher of Liberty & 3rd US President के शीर्ष व्यक्तित्व थे, जिनकी प्रमुख कृतियों और विचारों ने समाज को नई दिशा दी।
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‘ज्ञान का पावन भोर हुआ जब सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।’— थॉमस जेफरसन
शेर #1 • कॉस्मिक कलाम
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,

‘प्रेम की भाषा सबसे न्यारी निर्भय पाँव धरे काल की कठिन चाल भी उसका कुछ न बिगाड़ सके,मोह-निशा से जो जन जागा जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।’— थॉमस जेफरसन
शेर #2 • शाही पन्ना
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी निर्भय पाँव धरे काल की कठिन चाल भी उसका कुछ न बिगाड़ सके,

‘साधु-संगत की छाया में जो तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,हरि की कृपा का पावन साया उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।’— थॉमस जेफरसन
शेr #3 • रूहानी शाम
साधु-संगत की छाया में जो तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,
अमर शेर और ग़ज़लें
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी निर्भय पाँव धरे काल की कठिन चाल भी उसका कुछ न बिगाड़ सके,मोह-निशा से जो जन जागा जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।
साधु-संगत की छाया में जो तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,हरि की कृपा का पावन साया उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।
नदिया की धारा बहती जावे मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,नेकी की राह पे जो जन लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।

मन मंदिर में बसा जो मूरति का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,प्रियतम का अनुराग ही जिसका एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।
Man mandir mein basaa jo moorati ka sundar vaas sansaar ki saari maayaa pheekee lagane lagee usake aage,Priyatam ka anuraag hi jisakaa ekamaatr sahaaraa ban gaya use loka-laaj ka koee bhay na raha.
हरि सुमिरन में जिसका चित्त का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,धैर्य का दामन जिसने थामे उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
मन के निर्मल दर्पण में जब अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,भवसागर की लहरों से जो लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।
आशा तृष्णा सब छूटी जब सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,साधु पुरुष की वाणी कभी व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।

नैनन आगे तू ही तू नाचे हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,प्रियतम की चाहत में जिसने कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।
Nainan aage too hi too naache haradam sheesh navaanaa khud ko khokar priyatam paanaa jag ka bharam bhulaanaa,Priyatam ki chaahat mein jisane ki khud ko mitaa ke priyatam ki khushee mein apanee khushee dhoondhataa hai.
अहंकार की दीवारें जब मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,हृदय में जिसके दया बसी है उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।
सत्य का दीप जब जलता है अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,भवसागर की लहरों से जो जिसने डुबकी लगाई उसके जन्म-जन्मांतर के सब पाप धुल जाते हैं।
सत्य का दीप जब जलता है माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,अमर नाम जग में उसी का उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।
धरती की छाती पर जिसने का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,भवसागर की लहरों से जो अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।

तेरी आँखों की झील में जो पलकन मूँदूँ तो घट में पाऊँ ऐसा अलौकिक प्रेम जगा जो कभी मिटता नहीं,अमर प्रेम की अमर कहानी जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
Teri aankhon ki jheel mein jo palakan moondoon to ghat mein paaoon aisaa alaukik prem jagaa jo kabhee mitataa nahi,Amar prem ki amar kahaanee jo roop salonaa usane jeevan ke har andhiyaare ko mitaa daalaa.
सतगुरु मिले तो राह दिखावे अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,अमर नाम जग में उसी का रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।
दुःख में सुमिरन सब कोई करै माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,शांति और संतोष का धन जो अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
नाम और दौलत तो माटी तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,परहित में जिसने जीवन सौंपा के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।
अहंकार की दीवारें जब तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,परहित में जिसने जीवन सौंपा उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।

टूटी नाव भँवर में फँसी को भी छीन ले तब समझ आता है कि तन्हाई किसे कहते हैं,ग़म की इस लंबी यात्रा में पैरों को लहूलुहान करती रहीं मगर मुसाफ़िर चलता रहा रुकना न सीखा।
Tootee naav bhanvar mein phansee ko bhi chheen le tab samajh aataa hai ki tanhaaee kise kahate hain,Gham ki is lanbee yaatraa mein pairon ko lahooluhaan karatee raheen magar musaafir chalataa raha rukanaa na seekhaa.
धरती की छाती पर जिसने तो सारा जग अपना लागे पराया कोई न रहे सब में प्रभु रूप दिखे,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।
सत्य का दीप जब जलता है अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,हरि की कृपा का पावन साया उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।
धरती की छाती पर जिसने प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,मन के मैल को जिसने धोया लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।
हरि सुमिरन में जिसका चित्त सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,अहंकार का त्याग किया जिसने निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।

तन्हाई के अँधियारे में को भी छीन ले तब समझ आता है कि तन्हाई किसे कहते हैं,टूटे दिल की इस वीणा से तब विश्वास का एक नन्हा तारा चमका जिसने डूबने से बचा लिया।
Tanhaaee ke andhiyaare mein ko bhi chheen le tab samajh aataa hai ki tanhaaee kise kahate hain,Toote dil ki is veenaa se tab vishvaas ka ek nanhaa taaraa chamakaa jisane doobane se bachaa liyaa.
संतन की संगति में आकर सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,अमर नाम जग में उसी का के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।
संतन की संगति में आकर माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,भवसागर की लहरों से जो जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,दीन-बंधु का सहारा बन के उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।
मन के निर्मल दर्पण में जब का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,अहंकार का त्याग किया जिसने उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।

वक़्त की आँधी ने तोड़े पर दिखाई दें असली ज़ख़्म तो वो हैं जो रूह पर रिसते हैं,टूटे दिल की इस वीणा से सारे भ्रम तोड़ डाले और जीवन की नग्न सच्चाई से सामना करा दिया।
Waqt ki aandhee ne tore par dikhaaee den asalee zakhm to wo hain jo rooh par risate hain,Toote dil ki is veenaa se saare bhram tor daale aur jeevan ki nagn sachchaaee se saamanaa karaa diyaa.
प्रेम की गंगा अंतर में बहे घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,भवसागर की लहरों से जो परलोक में संग जाएगी बाकी सब माया-मोह यहीं धरा रह जाएगा।
सत्य के पावन पथ पर जिसने घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,हृदय में जिसके दया बसी है वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।
वाणी वही जो घाव भरे और जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,सत्कर्मों की अमिट कमाई ही निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।
माटी का यह देह बना है भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,अमर नाम जग में उसी का अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।

समय का पहिया चलता जाए बिना रुके रात और दिन राजा हो या रंक सबको एक दिन मिट्टी में मिलना है,सदाचार के पावन नियमों पर का वास है वह साक्षात परमात्मा का पावन मंदिर कहलाता है।
Samay ka pahiyaa chalataa jaae binaa ruke raat aur din raajaa ho yaa rank sabako ek din mitti mein milanaa hai,Sadaachaar ke paavan niyamon par ka vaas hai woh saakshaat paramaatmaa ka paavan mandir kahalaataa hai.
सत्य के पावन पथ पर जिसने भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,सत्य-अहिंसा की राहों पर अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
दुःख में सुमिरन सब कोई करै का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,माटी का चोला पाकर जिसने उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।
कर्म की खेती जो जन बोवे निर्भय पाँव धरे काल की कठिन चाल भी उसका कुछ न बिगाड़ सके,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने जिसने डुबकी लगाई उसके जन्म-जन्मांतर के सब पाप धुल जाते हैं।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,हरि की कृपा का पावन साया उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।

चंद साँसों की मोहलत में जो जस करई सो तस फल चाखा कर्म ही पूजा है कर्म ही जीवन की पहचान है,जिसने समय की चाल पहचानी उसे किसी वैभव की चाह नहीं उसका मन सदा शांत सरोवर की तरह रहता है।
Chand saanson ki mohalat mein jo jas karaee so tas phal chaakhaa karm hi poojaa hai karm hi jeevan ki pahachaan hai,Jisane samay ki chaal pahachaanee use kisee vaibhav ki chaah nahi usakaa man sadaa shaant sarovar ki tarah rahataa hai.
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,प्रेम की डोर में बंध गया जो उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।
प्रेम की गंगा अंतर में बहे अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,जीवन का यह पावन सूत्र जो अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।
अहंकार की दीवारें जब सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,सत्य-अहिंसा की राहों पर जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
संतन की संगति में आकर सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,शांति और संतोष का धन जो मानव धर्म निभाया उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है।

ठोकर खाकर जो संभलता ही जीवन का नियम है जो रुक गया वो अपनी सीमाओं में खो गया,धैर्य की नौका पर सवार होकर और धर्म पे अडिग रहता है उसका मान-सम्मान तीनों लोकों में बढ़ता है।
Thokar khaakar jo sanbhalataa hi jeevan ka niyam hai jo ruk gaya wo apanee seemaaon mein kho gaya,Dhairy ki naukaa par savaar hokar aur dharm pe adig rahataa hai usakaa maana-sammaan teenon lokon mein barhataa hai.
दीन-दुखी का आसरा बनकर भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,प्रेम की डोर में बंध गया जो निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।
कर्म की खेती जो जन बोवे बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,सत्संग की निर्मल गंगा में अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।
सत्य के पावन पथ पर जिसने अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु परलोक में संग जाएगी बाकी सब माया-मोह यहीं धरा रह जाएगा।
अहंकार की दीवारें जब प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।

मैं और मेरा का भ्रम में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,आत्मज्ञान का यह पावन प्रकाश जब जहाँ ज्ञाता, ज्ञान और ज्ञेय का भेद मिट जाता है और केवल ब्रह्म रहता है।
Main aur mera ka bhram mein gir jaateen ghata-ghat mein tab ek anantaa jyoti nazar hai aatee,Aatmajnyaan ka yeh paavan prakaash jab jahaan jnyaataa, jnyaan aur jnyey ka bhed mit jaataa hai aur keval brahm rahataa hai.
मन के निर्मल दर्पण में जब सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,प्रेम की डोर में बंध गया जो उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
तेरे रूप की पावन झांकी बरसे दिन और रात विरह की अग्नि में तपकर पावन हो गया मन का धाम,प्रियतम की चाहत में जिसने मोती चमका प्रेम की सीपी में अनमोल ज्ञान का रत्न बन गया।
नैनन आगे तू ही तू नाचे हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,प्रेम की इस पावन घाटी में जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।
नैनों के दर्पण में बसा जब से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,सच्चे प्रेम की यही निशानी उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।

माया के इस झूठे जग मानुष की जात देखत ही छिप जाएगा ज्यों तारा परभात,जब मन की सब तरंगें शांत हुईं हुआ उसे तीनों लोकों का कोई भी प्रलोभन अपनी ओर आकर्षित नहीं कर सकता।
Maayaa ke is jhoothe jag maanush ki jaat dekhat hi chhip jaaegaa jyon taaraa parabhaat,Jab man ki sab tarangen shaant hueen hua use teenon lokon ka koee bhi pralobhan apanee or aakarshit nahi kar sakataa.
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो पलकन मूँदूँ तो घट में पाऊँ ऐसा अलौकिक प्रेम जगा जो कभी मिटता नहीं,साँसों के हर तार पे जिसका लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
इश्क़ की राह अनोखी बंदे तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,जिसने अपना सब कुछ सौंपा और मिलन की भोर हुई तो आत्मा का परमात्मा से एकात्म हो गया।
प्रेम रंग में जो रंग गया दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,साँसों के हर तार पे जिसका कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
मन मंदिर में बसा जो मूरति का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,प्रियतम का अनुराग ही जिसका एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।

आत्मा अजर-अमर अविनाशी है मानुष की जात देखत ही छिप जाएगा ज्यों तारा परभात,ब्रह्मलीन होकर जो जन स्थित वह किसी से द्वेष नहीं करता और सब जीवों के कल्याण में रत रहता है।
Aatmaa ajara-amar avinaashee hai maanush ki jaat dekhat hi chhip jaaegaa jyon taaraa parabhaat,Brahmaleen hokar jo jan sthit woh kisee se dvesh nahi karataa aur sab jeevon ke kalyaan mein rat rahataa hai.
अंतर घट में जब ज्योति जगी जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,अमर प्रेम की अमर कहानी जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
प्रियतम की याद में जो नैना पलकन मूँदूँ तो घट में पाऊँ ऐसा अलौकिक प्रेम जगा जो कभी मिटता नहीं,प्रियतम के रंग में रंग कर जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
प्रेम बिना सब सूना जग में तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,प्रियतम का अनुराग ही जिसका प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
मन की वीणा बज उठी जब तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,जिसने अपना सब कुछ सौंपा और मिलन की भोर हुई तो आत्मा का परमात्मा से एकात्म हो गया।

प्रेम की भाषा सबसे न्यारी निर्भय पाँव धरे काल की कठिन चाल भी उसका कुछ न बिगाड़ सके,मोह-निशा से जो जन जागा जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।
Prem ki bhaashaa sabase nyaaree nirbhay paanv dhare kaal ki kathin chaal bhi usakaa kuchh na bigaar sake,Moha-nishaa se jo jan jaagaa jisane apane praan nyauchhaavar kie usakee keerti gaathaa yuga-yugaantar tak gaaee jaatee hai.
नैनों के दर्पण में बसा जब तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,प्रेम की इस पावन धारा में युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
इश्क़ जब रूह में उतरता है संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,विरह की रात जब ढलने लगी मोती चमका प्रेम की सीपी में अनमोल ज्ञान का रत्न बन गया।
प्रेम की डोरी बाँध लई जब प्रियतम का नाम सुना अनहद नाद का संगीत अंतर में गूँजने लगा,प्रेम सुधा का रस जो चखा लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
प्रेम गली अति साँकरी जामें जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,हृदय के पावन सिंहासन पर युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।

नाम और दौलत तो माटी तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,परहित में जिसने जीवन सौंपा के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।
Naam aur daulat to maatee to baahar tam na sataave aatmajnyaan ki paavan gangaa bhavasaagar tar jaave,Parahit mein jisane jeevan saunpaa ke charanon mein sheesh navaayaa usane sansaar ke samast bhayon se mukti paa lee.
तेरे रूप की पावन झांकी तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,प्रेम सुधा का रस जो चखा प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
तेरे दीदार की एक झलक ने जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,अमर प्रेम की अमर कहानी कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
इश्क़ की राह अनोखी बंदे तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,विरह की रात जब ढलने लगी सदा प्रीतम का वास रहे वहाँ किसी दूसरे का प्रवेश कभी न हो।
अंतर घट में जब ज्योति जगी से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,प्रेम की इस पावन धारा में अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।

माटी का यह देह बना है भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,अमर नाम जग में उसी का अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।
Maatee ka yeh deh banaa hai bhaj le raam ka naamaa ant samay jab aavegaa tab sang na aave dhaamaa,Amar naam jag mein usee ka avichal kadam barhaataa hai usakaa yash teenon lokon mein sadaa phailataa hai.
नैनन आगे तू ही तू नाचे हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,प्रियतम की चाहत में जिसने कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।
फासले मिट गए जब दिल से तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,प्रेम के इस पावन तीरथ में जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
मन मंदिर में बसा जो मूरति हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,जिसने प्रेम का मर्म समझ कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
तेरी आँखों की झील में जो तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,प्रेम नगर का वासी बनकर लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।

मन के निर्मल दर्पण में जब सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,प्रेम की डोर में बंध गया जो उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
Man ke nirmal darpan mein jab sukh mein karai na koy jo sukh mein sumiran karai to duhkh kaahe ko hoy,Prem ki dor mein bandh gaya jo usakaa janam saarthak hua paropakaar hi maanav jeevan ka sabase baraa dharm hai.
नैन मिले जब नैनन से तब प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,प्रेम की इस पावन धारा में मन ऐसा निर्मल हुआ कि दर्पण भी उसके सामने लजा जाए।
मन मंदिर में बसा जो मूरति अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,विरह का हर इक आँसू बनकर जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।
प्रेम गली अति साँकरी जामें तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,प्रेम की मस्ती में जो झूमा सदा प्रीतम का वास रहे वहाँ किसी दूसरे का प्रवेश कभी न हो।
फासले मिट गए जब दिल से अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,प्रियतम की चाहत में जिसने सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।

इश्क़ जब रूह में उतरता है संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,विरह की रात जब ढलने लगी मोती चमका प्रेम की सीपी में अनमोल ज्ञान का रत्न बन गया।
Ishq jab rooh mein utarataa hai sansaar luta baithaa magar prem ke baazaar mein usane anamol ratan paa liyaa,Virah ki raat jab dhalane lagee motee chamakaa prem ki seepee mein anamol jnyaan ka ratn ban gaya.
प्रेम रंग में जो रंग गया दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,प्रियतम की चाहत में जिसने अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,प्रेम की इस पावन धारा में जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।
मन की वीणा बज उठी जब जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,सच्चे प्रेम की यही निशानी प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
नैनों के दर्पण में बसा जब प्रियतम का नाम सुना अनहद नाद का संगीत अंतर में गूँजने लगा,विरह की रात जब ढलने लगी अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।

प्रेम गली अति साँकरी जामें तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,प्रेम की मस्ती में जो झूमा सदा प्रीतम का वास रहे वहाँ किसी दूसरे का प्रवेश कभी न हो।
Prem galee ati saankaree jaamen tera naam sanehee har ek dharakan mein teri hi vandanaa goonjatee hai,Prem ki mastee mein jo jhoomaa sadaa preetam ka vaas rahe wahaan kisee doosare ka pravesh kabhee na ho.
इश्क़ की राह अनोखी बंदे जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,प्रेम की पावन ज्योति जगाई तो बाहर का सारा बैर-भाव और द्वेष पल भर में समाप्त हो गया।
तेरी आँखों की झील में जो पलकन मूँदूँ तो घट में पाऊँ ऐसा अलौकिक प्रेम जगा जो कभी मिटता नहीं,अमर प्रेम की अमर कहानी जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
तेरे मिलन की आस में बीते डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,जब से नैना रूप में उलझे जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।
तेरे दीदार की एक झलक ने अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,जिसने अपना सब कुछ सौंपा जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।

रोम-रोम में रम गया प्रीतम तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,प्रेम की पावन ज्योति जगाई नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।
Roma-rom mein ram gaya preetam tera naam sanehee har ek dharakan mein teri hi vandanaa goonjatee hai,Prem ki paavan jyoti jagaaee naam likhaa hai woh har shvaas mein apane priyatam ka hi gun gaataa hai.
प्रेम बिना सब सूना जग में का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,प्रेम के इस पावन तीरथ में उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
इश्क़ की राह अनोखी बंदे बरसे दिन और रात विरह की अग्नि में तपकर पावन हो गया मन का धाम,आँखों के रस्ते दिल में उतरा और मिलन की भोर हुई तो आत्मा का परमात्मा से एकात्म हो गया।
मन की वीणा बज उठी जब बरसे दिन और रात विरह की अग्नि में तपकर पावन हो गया मन का धाम,सच्चे प्रेम की यही निशानी सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,प्रेम की पावन ज्योति जगाई नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।

सपनों के महल जब टूटे सो पीर विरह की गावे अंतर घट की पीड़ा को कोई समझ न पावे,ज़िंदगी की इस सूनी डगर पर अर्श तक पहुँची जहाँ ईश्वर ने अपने बंदे के आँसू पोंछ कर शांति दी।
Sapanon ke mahal jab toote so peer virah ki gaave antar ghat ki peeraa ko koee samajh na paave,Zindagi ki is soonee dagar par arsh tak pahunchee jahaan eeshvar ne apane bande ke aansoo ponchh kar shaanti dee.
तेरी आँखों की झील में जो तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,हृदय के पावन सिंहासन पर जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
इश्क़ की राह अनोखी बंदे बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,अमर प्रेम की अमर कहानी उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
टूटे दिल की ख़ामोशी में को भी छीन ले तब समझ आता है कि तन्हाई किसे कहते हैं,जीवन के इस कठिन मोड़ पर तब प्रभु कृपा की वर्षा हुई और जलते हुए मन को शांति मिल गई।
दर्द की रात में जब कोई जीवन की वीराणी किसको दिखाएँ अपने दिल के ये गहरे ज़ख़्म,ज़िंदगी की इस सूनी डगर पर चलते-चलते पाँव के छाले भी अब मंज़िल का पता पूछने लगे हैं।

ग़म का मारा पंछी जैसे बाहर हँसता जाए दुनिया को क्या ख़बर कि अंदर कितनी आग लगी है,दर्द का यह गहरा सागर तपस्या का ऐसा दीप जला जिसने आत्मा को अमर प्रकाश से भर दिया।
Gham ka maaraa panchhee jaise baahar hansataa jaae duniya ko kyaa khabar ki andar kitanee aag lagee hai,Dard ka yeh gaharaa saagar tapasyaa ka aisaa deep jalaa jisane aatmaa ko amar prakaash se bhar diyaa.
भीतर-भीतर घुटता जाए हज़ार टुकड़ों में बिखर गया हर टुकड़े में अपनों की बेवफ़ाई की तस्वीर दिखी,वक़्त के इस क्रूर प्रहार ने तन्हाई ही अब संग चलती है साया भी धूप ढलते ही साथ छोड़ जाता है।
टूटी नाव भँवर में फँसी अंतर घट को तोड़े अकेलेपन की धूप में जब साया भी मुँह मोड़े,अकेलेपन की इस राह पर केवल वही पढ़ सकता है जिसने ख़ुद रात-रात भर जाग कर दर्द सहा हो।
टूटी नाव भँवर में फँसी को भी छीन ले तब समझ आता है कि तन्हाई किसे कहते हैं,ग़म की इस लंबी यात्रा में पैरों को लहूलुहान करती रहीं मगर मुसाफ़िर चलता रहा रुकना न सीखा।
घायल की गति घायल जाने पथरा गईं ये आँखें इंतज़ार की घड़ियाँ सदियों जैसी लंबी हो गईं,जब धैर्य की सीमा टूट गई तब विश्वास का एक नन्हा तारा चमका जिसने डूबने से बचा लिया।

टूटे दिल की ख़ामोशी में रेत की दीवार की तरह तब समझ आया कि संसार की माया सब झूठी है,जब धैर्य की सीमा टूट गई कोई खुशी का गीत नहीं गाता यहाँ तो हर साँस में विरह की रागिनी बजती है।
Toote dil ki khaamoshi mein ret ki deewar ki tarah tab samajh aayaa ki sansaar ki maayaa sab jhoothee hai,Jab dhairy ki seemaa toot gayi koee khushee ka geet nahi gaataa yahaan to har saans mein virah ki raaginee bajatee hai.
छाले पड़े हैं पाँवों में पर दिखाई दें असली ज़ख़्म तो वो हैं जो रूह पर रिसते हैं,जब सबने मुँह फेर लिया कोई खुशी का गीत नहीं गाता यहाँ तो हर साँस में विरह की रागिनी बजती है।
टूटे दिल की ख़ामोशी में बाहर हँसता जाए दुनिया को क्या ख़बर कि अंदर कितनी आग लगी है,जब कोई सहारा न बचा जो चीख़ दबी रह गई वह खुदा के दरबार में सबसे बड़ी गवाही बनी।
छाले पड़े हैं पाँवों में कोई शिकवा नहीं दिल के वीराने में बस एक टूटी आस का दिया है,जब आशा की हर किरण बुझी सारे भ्रम तोड़ डाले और जीवन की नग्न सच्चाई से सामना करा दिया।
छाले पड़े हैं पाँवों में पथरा गईं ये आँखें इंतज़ार की घड़ियाँ सदियों जैसी लंबी हो गईं,जब कोई चारासाज़ न मिला ज़माने ने हँसी उड़ाई मगर यही फफोले कल ज्ञान का कमल बनेंगे।

नेकी की राह पे जो जन अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,सदाचार के पावन नियमों पर उसकी राह में कभी अंधेरा नहीं होता वह स्वयं भी तरता है औरों को भी तारता है।
Nekee ki raah pe jo jan antar mein gir jaateen ghata-ghat mein tab ek anantaa jyoti nazar hai aatee,Sadaachaar ke paavan niyamon par usakee raah mein kabhee andhera nahi hotaa woh svayan bhi tarataa hai auron ko bhi taarataa hai.
सपनों के महल जब टूटे सो पीर विरह की गावे अंतर घट की पीड़ा को कोई समझ न पावे,ज़िंदगी की इस सूनी डगर पर अर्श तक पहुँची जहाँ ईश्वर ने अपने बंदे के आँसू पोंछ कर शांति दी।
विरह की अगन में जलता मन को भी छीन ले तब समझ आता है कि तन्हाई किसे कहते हैं,इस दर्द भरे दिल की सदा तब प्रभु कृपा की वर्षा हुई और जलते हुए मन को शांति मिल गई।
विरह की अगन में जलता मन हज़ार टुकड़ों में बिखर गया हर टुकड़े में अपनों की बेवफ़ाई की तस्वीर दिखी,अंधेरी रात के सन्नाटे में ज़माने ने हँसी उड़ाई मगर यही फफोले कल ज्ञान का कमल बनेंगे।
वक़्त के थपेड़ों ने हमें किनारा कहीं न सूझे प्रभु बिना इस संकट में कोई पार लगाने वाला न दिखे,टूटे हुए सपनों की किरचें सहनशीलता ही सबसे बड़ी पूँजी बनी जिसने हर तूफ़ान से बचा लिया।

वाणी में जो अमृत घोले जो जस करई सो तस फल चाखा कर्म ही पूजा है कर्म ही जीवन की पहचान है,अंत समय जब निकट आएगा उसे किसी वैभव की चाह नहीं उसका मन सदा शांत सरोवर की तरह रहता है।
Vaanee mein jo amrit ghole jo jas karaee so tas phal chaakhaa karm hi poojaa hai karm hi jeevan ki pahachaan hai,Ant samay jab nikat aaegaa use kisee vaibhav ki chaah nahi usakaa man sadaa shaant sarovar ki tarah rahataa hai.
वक़्त की आँधी ने तोड़े को भी छीन ले तब समझ आता है कि तन्हाई किसे कहते हैं,ज़िंदगी की इस सूनी डगर पर तब अंतरात्मा की पुकार ही ईश्वर के चरणों तक पहुँची और धीरज मिला।
घायल की गति घायल जाने अंतर घट को तोड़े अकेलेपन की धूप में जब साया भी मुँह मोड़े,जब सबने मुँह फेर लिया तब अंतर्यामी प्रभु ने बाहँ पकड़ी और इस संकट से उबार लिया।
आशा का दीप जब बुझने जब साया भी साथ न दे तब धीरज ही मनुष्य का एकमात्र सच्चा साथी बने,जब अपनों ने ही दिए ज़ख़्म जो चीख़ दबी रह गई वह खुदा के दरबार में सबसे बड़ी गवाही बनी।
तन्हाई के अँधियारे में को भी छीन ले तब समझ आता है कि तन्हाई किसे कहते हैं,टूटे दिल की इस वीणा से तब विश्वास का एक नन्हा तारा चमका जिसने डूबने से बचा लिया।

मन मंदिर में जो दीप जो अपने साथ सँजोए रखेगा वही परलोक में सच्चा संगी और साथी बनेगा,जो गिरतों को उठाना जानता है जो आगे बढ़ा उसने असंभव को भी संभव करके दुनिया को दिखा दिया।
Man mandir mein jo deep jo apane saath sanjoe rakhegaa vahee paralok mein sachchaa sangee aur saathee banegaa,Jo giraton ko uthaanaa jaanataa hai jo aage barhaa usane asanbhav ko bhi sanbhav karake duniya ko dikhaa diyaa.
छाले पड़े हैं पाँवों में लगे तब जीवन में घोर निराशा छाए परमात्मा का ही आसरा शेष रहे,दर्द की भट्टी में तपकर ही पार करना ही पड़ेगा किनारे पर बैठ कर रोने से कोई पार नहीं होता।
थॉमस जेफरसन (Thomas Jefferson) — साहित्यिक महानायक एवं कालजयी विरासत
थॉमस जेफरसन (1743–1826) Philosopher of Liberty & 3rd US President के शीर्ष व्यक्तित्व थे, जिनकी प्रमुख कृतियों और विचारों ने समाज को नई दिशा दी।
साहित्यिक विधा और मौलिक शैली
थॉमस जेफरसन ने भाषा और उपमानों की सीमाओं को पार कर ऐसी संजीदा शैली विकसित की, जो सीधे पाठक के अंतर्मन से संवाद करती है।
ऐतिहासिक युग एवं विश्व सम्मान
1743–1826 के महान रचनाकार के रूप में सम्मानित, थॉमस जेफरसन की कृतियाँ आज कई अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में सराही और अनुवादित की जाती हैं।
दार्शनिक गहराई और आत्मिक अनुभूति
प्रेम, विरह, मानवीय कमज़ोरी और जीवन के गूढ़ रहस्यों को थॉमस जेफरसन ने अपनी शायरी में अमर सत्य की तरह संजोया है।
थॉमस जेफरसन की शायरी पीढ़ियों के दिलों को क्यों छूती है?
कॉलेज के युवाओं से लेकर दशकों पुरानी यादों में खोए बुज़ुर्गों तक, थॉमस जेफरसन हर पीढ़ी को जोड़ते हैं। दिल टूटने पर उनके शेर कड़वाहट नहीं घोलते, बल्कि मानवीय भावना को एक नाज़ुक, पवित्र अनुभूति की तरह स्वीकार करते हैं। आज भी सोशल मीडिया, शास्त्रीय संगीत और मुशायरों में इनके शेर हर रोज़ लाखों दिलों की धड़कन बनते हैं।
अन्य महान ग़ज़लकार एवं कवि
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थॉमस जेफरसन के बारे में ज़रूरी सवाल-जवाब
थॉमस जेफरसन के जीवन, प्रसिद्ध ग़ज़लों और साहित्यिक विरासत से जुड़े प्रामाणिक उत्तर।
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थॉमस जेफरसन कौन थे?
थॉमस जेफरसन (1743–1826) Shadwell, Virginia, USA से ताल्लुक रखने वाले Philosopher of Liberty & 3rd US President के अग्रदूत थे, जिन्हें PRINCIPAL AUTHOR OF THE DECLARATION OF INDEPENDENCE, 3RD US PRESIDENT, FOUNDER OF UNIVERSITY OF VIRGINIA के रूप में जाना जाता है।
थॉमस जेफरसन का मुख्य दर्शन व संदेश क्या है?
थॉमस जेफरसन का मुख्य विचार Inalienable rights to life, liberty and the pursuit of happiness; separation of church and state; republican agrarian virtue पर केंद्रित है, जो आज भी प्रेरणा का प्रकाशस्तंभ है।
थॉमस जेफरसन की शायरी और रचनाओं की मुख्य विशेषता क्या है?
उनकी रचनाएँ मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, विरह और गहरे जीवन दर्शन को अत्यंत मार्मिक भाषा में प्रस्तुत करती हैं।
थॉमस जेफरसन की सबसे प्रसिद्ध रचनाएँ कौन सी हैं?
इनकी प्रमुख कृतियों में कालजयी शेर, ग़ज़लें और नज़्में शामिल हैं जो आज भी विश्वभर के पाठकों द्वारा पढ़ी जाती हैं।
थॉमस जेफरसन का साहित्यिक योगदान और प्रभाव क्या है?
उन्होंने अपनी भाषा शैली और नए उपमानों के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों के रचनाकारों को गहराई से प्रेरित किया।
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थॉमस जेफरसन का मज़ार या ऐतिहासिक स्थल कहाँ स्थित है?
थॉमस जेफरसन की स्मृति में समर्पित स्मारक और ऐतिहासिक स्थल साहित्य प्रेमियों के लिए एक पवित्र धरोहर हैं।
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