सत्य का दीप जब जलता है सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
Swami Vivekananda (स्वामी विवेकानंद)
स्वामी विवेकानंद (1863–1902) Rashtranayak & Spiritual Giant के शीर्ष व्यक्तित्व थे, जिनकी प्रमुख कृतियों और विचारों ने समाज को नई दिशा दी।
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‘सत्य का दीप जब जलता है सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।’— स्वामी विवेकानंद
शेर #1 • कॉस्मिक कलाम
सत्य का दीप जब जलता है सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,

‘सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,सदाचार की पावन वेदी पर जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।’— स्वामी विवेकानंद
शेर #2 • शाही पन्ना
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,

‘सत्य का दीप जब जलता है मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।’— स्वामी विवेकानंद
शेr #3 • रूहानी शाम
सत्य का दीप जब जलता है मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,
अमर शेर और ग़ज़लें
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,सदाचार की पावन वेदी पर जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।
सत्य का दीप जब जलता है मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।
संतन की संगति में आकर अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,अमर नाम जग में उसी का जिसने डुबकी लगाई उसके जन्म-जन्मांतर के सब पाप धुल जाते हैं।

प्रेम का प्याला जिसने पिया वो सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,विरह का हर इक आँसू बनकर मन ऐसा निर्मल हुआ कि दर्पण भी उसके सामने लजा जाए।
Prem ka pyaalaa jisane piyaa wo sundar shyaam sanehee usakee ek jhalak pe vaaroon yeh nashvar tana-dehee,Virah ka har ik aansoo banakar man aisaa nirmal hua ki darpan bhi usake saamane lajaa jaae.
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब निर्भय पाँव धरे काल की कठिन चाल भी उसका कुछ न बिगाड़ सके,माटी का चोला पाकर जिसने निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।
सत्य का दीप जब जलता है स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,जीवन का यह पावन सूत्र जो उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।
मन मंदिर में जो दीप जले रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,धैर्य का दामन जिसने थामे उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।
वाणी वही जो घाव भरे और तो सारा जग अपना लागे पराया कोई न रहे सब में प्रभु रूप दिखे,मन के मैल को जिसने धोया उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।

प्रेम बिना सब सूना जग में बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,सच्चे प्रेम की यही निशानी जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
Prem binaa sab soonaa jag mein banaa yeh jeev prem ki alaukik chamak se dason dishaaen jagamagaa utheen,Sachche prem ki yahee nishaanee jo roop salonaa usane jeevan ke har andhiyaare ko mitaa daalaa.
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,वाणी में जिसके मिठास घुली अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,भवसागर की लहरों से जो निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,सत्य वचन जो मुख से बोले उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।
सत्य के पावन पथ पर जिसने अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,मन के मैल को जिसने धोया उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।

प्रेम गली अति साँकरी जामें दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,सच्चे प्रेम की यही निशानी तो बाहर का सारा बैर-भाव और द्वेष पल भर में समाप्त हो गया।
Prem galee ati saankaree jaamen dil ko wo chain diyaa jo sadiyon ki ibaadat se bhi mayassar na hua,Sachche prem ki yahee nishaanee to baahar ka saaraa baira-bhaav aur dvesh pal bhar mein samaapt ho gaya.
सत्य के पावन पथ पर जिसने तो सारा जग अपना लागे पराया कोई न रहे सब में प्रभु रूप दिखे,वाणी में जिसके मिठास घुली उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।
संतन की संगति में आकर मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,शांति और संतोष का धन जो उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।
कर्म की खेती जो जन बोवे जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,सत्कर्मों की अमिट कमाई ही उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
सत्य का दीप जब जलता है सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,शांति और संतोष का धन जो वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।

घायल की गति घायल जाने दिन-रैन तपे अंगार की तरह कोई शीतल बूँद न बरसे जो मन को ठंडक दे,टूटे हुए सपनों की किरचें सहनशीलता ही सबसे बड़ी पूँजी बनी जिसने हर तूफ़ान से बचा लिया।
Ghaayal ki gati ghaayal jaane dina-rain tape angaar ki tarah koee sheetal boond na barase jo man ko thandak de,Toote hue sapanon ki kirachen sahanasheelataa hi sabase baree poonjee banee jisane har toofaan se bachaa liyaa.
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,भवसागर की लहरों से जो जिसने डुबकी लगाई उसके जन्म-जन्मांतर के सब पाप धुल जाते हैं।
मन मंदिर में जो दीप जले प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,मोह-निशा से जो जन जागा मानव धर्म निभाया उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है।
सत्य का दीप जब जलता है सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,हरि की कृपा का पावन साया लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।
मन के निर्मल दर्पण में जब भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,धैर्य का दामन जिसने थामे रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।

कोई न अपना इस जग में पर दिखाई दें असली ज़ख़्म तो वो हैं जो रूह पर रिसते हैं,ग़म की इस लंबी यात्रा में तो ग़ैरों से क्या शिकवा करना दिल ने चुपचाप सब कुछ सहना सीख लिया।
Koee na apanaa is jag mein par dikhaaee den asalee zakhm to wo hain jo rooh par risate hain,Gham ki is lanbee yaatraa mein to ghairon se kyaa shikavaa karanaa dil ne chupachaap sab kuchh sahanaa seekh liyaa.
वाणी में जो अमृत घोले घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,हृदय में जिसके दया बसी है उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।
नाम और दौलत तो माटी रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,सत्य-अहिंसा की राहों पर परलोक में संग जाएगी बाकी सब माया-मोह यहीं धरा रह जाएगा।
मन मंदिर में जो दीप जले मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,मन के मैल को जिसने धोया जिसने डुबकी लगाई उसके जन्म-जन्मांतर के सब पाप धुल जाते हैं।
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।

जिसके दिल पर बीत रही बाहर हँसता जाए दुनिया को क्या ख़बर कि अंदर कितनी आग लगी है,जब कोई चारासाज़ न मिला तब परमात्मा ही सबसे बड़ा वैद्य बना और उसने रूह के ज़ख़्म भर दिए।
Jisake dil par beet rahi baahar hansataa jaae duniya ko kyaa khabar ki andar kitanee aag lagee hai,Jab koee chaaraasaaz na mila tab paramaatmaa hi sabase baraa vaidy banaa aur usane rooh ke zakhm bhar diye.
जो तूफ़ानों में अपनी नाव स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,साधु पुरुष की वाणी कभी मानव धर्म निभाया उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है।
धरती की छाती पर जिसने अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,सदाचार की पावन वेदी पर अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
नदिया की धारा बहती जावे निर्भय पाँव धरे काल की कठिन चाल भी उसका कुछ न बिगाड़ सके,माटी का चोला पाकर जिसने जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।
नदिया की धारा बहती जावे माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,धैर्य का दामन जिसने थामे उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।

वाणी में जो अमृत घोले जिसके पास है संचित वह संसार के समस्त वैभवों से अधिक सुखी और शांत है,हृदय में जिसके दया और करुणा कि संकट के समय ढाल बन जाए सुख में तो सारी दुनिया साथ चलती है।
Vaanee mein jo amrit ghole jisake paas hai sanchit woh sansaar ke samast vaibhavon se adhik sukhee aur shaant hai,Hriday mein jisake dayaa aur karunaa ki sankat ke samay dhaal ban jaae sukh mein to saari duniya saath chalatee hai.
दीन-दुखी का आसरा बनकर मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,हृदय में जिसके दया बसी है अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
संतन की संगति में आकर जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,मन के मैल को जिसने धोया उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।
वाणी में जो अमृत घोले बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,मन के मैल को जिसने धोया लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।
जो तूफ़ानों में अपनी नाव बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,सत्कर्मों की अमिट कमाई ही जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।

वाणी में जो अमृत घोले बिना रुके रात और दिन राजा हो या रंक सबको एक दिन मिट्टी में मिलना है,सच्चे मित्र की पहचान यही जो आगे बढ़ा उसने असंभव को भी संभव करके दुनिया को दिखा दिया।
Vaanee mein jo amrit ghole binaa ruke raat aur din raajaa ho yaa rank sabako ek din mitti mein milanaa hai,Sachche mitr ki pahachaan yahee jo aage barhaa usane asanbhav ko bhi sanbhav karake duniya ko dikhaa diyaa.
कर्म की खेती जो जन बोवे का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,धैर्य का दामन जिसने थामे रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।
वाणी वही जो घाव भरे और सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,सत्य वचन जो मुख से बोले जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।
सत्य के पावन पथ पर जिसने सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,अहंकार का त्याग किया जिसने उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
अहंकार की दीवारें जब रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,हरि की कृपा का पावन साया अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।

संतन की संगति में आकर जिसके पास है संचित वह संसार के समस्त वैभवों से अधिक सुखी और शांत है,जिसने समय की चाल पहचानी बहाता है दिन-रात वही सुनहरी फसल काट कर आनंद से तृप्त होता है।
Santan ki sangati mein aakar jisake paas hai sanchit woh sansaar ke samast vaibhavon se adhik sukhee aur shaant hai,Jisane samay ki chaal pahachaanee bahaataa hai dina-raat vahee sunaharee phasal kaat kar aanand se tript hotaa hai.
अहंकार की दीवारें जब भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,परहित में जिसने जीवन सौंपा निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।
मन मंदिर में जो दीप जले बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,माटी का चोला पाकर जिसने निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।
दुःख में सुमिरन सब कोई करै स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,साधु पुरुष की वाणी कभी जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।
आशा तृष्णा सब छूटी जब सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,हरि की कृपा का पावन साया जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।

ज्ञान की पावन भोर भई परमात्मा की आवाज़ सुनाई दे वही सच्चा उपदेश है जो मोक्ष का द्वार खोलता है,परम शांति का यह पावन धाम तो सारे बंधन टूट गए और वह परमब्रह्म में लीन होकर एक रूप हो गया।
Jnyaan ki paavan bhor bhaee paramaatmaa ki aavaaz sunaaee de vahee sachchaa upadesh hai jo moksh ka dvaar kholataa hai,Param shaanti ka yeh paavan dhaam to saare bandhan toot gaye aur woh paramabrahm mein leen hokar ek roop ho gaya.
सत्य के पावन पथ पर जिसने सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,अमर नाम जग में उसी का उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
नैनन आगे तू ही तू नाचे प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,प्रियतम का अनुराग ही जिसका उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।
तेरे मिलन की आस में बीते अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,अमर प्रेम की अमर कहानी उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।
फासले मिट गए जब दिल से प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,अंतर में जब प्रेम समाया और मिलन की भोर हुई तो आत्मा का परमात्मा से एकात्म हो गया।

मृत्यु कोई अंत नहीं बस मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,जब आत्मा ने जाना अपना सत्य स्वरूप तब 'सोऽहं' का दिव्य नाद अंतर में अनहद की तरह गूँजने लगा।
Mrityu koee ant nahi bas man ka mail dhulaave paaras ka paras paakar jaise lohaa kanchan ho jaave,Jab aatmaa ne jaanaa apanaa saty svaroop tab 'soऽhan' ka divy naad antar mein anahad ki tarah goonjane lagaa.
इश्क़ की राह अनोखी बंदे बरसे दिन और रात विरह की अग्नि में तपकर पावन हो गया मन का धाम,प्रियतम का अनुराग ही जिसका युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
इश्क़ जब रूह में उतरता है दो न समाहिं जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाहिं,प्रियतम की चाहत में जिसने जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।
इश्क़ का सौदा जिसने किया वो अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,प्रियतम के चरणों में जिसने युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,विरह का हर इक आँसू बनकर मन ऐसा निर्मल हुआ कि दर्पण भी उसके सामने लजा जाए।

जो भीतर झाँक के देखता जब टूटता है तभी उस परमसत्य का अमर द्वार खुलता है,जब मन की सब तरंगें शांत हुईं तो समस्त जगत उस एक ही अनंत परमात्मा का स्वरूप नज़र आने लगा।
Jo bheetar jhaank ke dekhataa jab tootataa hai tabhee us paramasaty ka amar dvaar khulataa hai,Jab man ki sab tarangen shaant hueen to samast jagat us ek hi anant paramaatmaa ka svaroop nazar aane lagaa.
मन की वीणा बज उठी जब तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,प्रेम का दीपक अंतर में जो प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
नैनन आगे तू ही तू नाचे रैन-दिना मतवारे अंग-अंग में ज्योति जलाई प्रेम के दीपक बारे,आँखों के रस्ते दिल में उतरा कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
प्रेम बिना सब सूना जग में दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,प्रेम सुधा का रस जो चखा नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।
तेरे दीदार की एक झलक ने दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,विरह की रात जब ढलने लगी और मिलन की भोर हुई तो आत्मा का परमात्मा से एकात्म हो गया।

सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,सदाचार की पावन वेदी पर जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।
Satkarmon ki amit jyoti jab antar nain ughaare ghat mein hi paramaatmaa ka deedaar karaae,Sadaachaar ki paavan vedee par jisane sevaa ka vrat liyaa usakaa jeevan chandan ki tarah mahak uthataa hai.
नैनन आगे तू ही तू नाचे दो न समाहिं जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाहिं,अंतर में जब प्रेम समाया लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
तेरे रूप की पावन झांकी उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,प्रियतम का अनुराग ही जिसका उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।
नैनों के दर्पण में बसा जब अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,जिसने अपना सब कुछ सौंपा अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।
मन मंदिर में बसा जो मूरति अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,प्रेम सुधा का रस जो चखा अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।

कर्म की खेती जो जन बोवे जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,सत्कर्मों की अमिट कमाई ही उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
Karm ki khetee jo jan bove jag mein soee pyaaraa krodha-agni ko shaant kare jo sheela-sarovar dhaaraa,Satkarmon ki amit kamaaee hi usakaa janam saarthak hua paropakaar hi maanav jeevan ka sabase baraa dharm hai.
तेरे दीदार की एक झलक ने अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,साँसों के हर तार पे जिसका उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।
बिरहा की आग में तप के कुंदन तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,प्रेम की इस पावन धारा में जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,जब से नैना रूप में उलझे और मिलन की भोर हुई तो आत्मा का परमात्मा से एकात्म हो गया।
प्रेम की पावन वेदी पर जिसने प्रियतम का नाम सुना अनहद नाद का संगीत अंतर में गूँजने लगा,जिसने प्रेम का मर्म समझ सदा प्रीतम का वास रहे वहाँ किसी दूसरे का प्रवेश कभी न हो।

नदिया की धारा बहती जावे माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,धैर्य का दामन जिसने थामे उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।
Nadiyaa ki dhaaraa bahatee jaave maatee mein mil jaanaa lobh moh mad tyaag ke nij svaroop cheenh le,Dhairy ka daaman jisane thaame use sansaar ka koee lobh baandh nahi sakataa woh prabhu prem mein magn rahataa hai.
प्रेम बिना सब सूना जग में बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,सच्चे प्रेम की यही निशानी जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
प्रेम गली अति साँकरी जामें अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,प्रियतम के चरणों में जिसने युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
मन की वीणा बज उठी जब अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,प्रियतम का अनुराग ही जिसका उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।
अंतर घट में जब ज्योति जगी अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,साँसों के हर तार पे जिसका कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।

सत्य के पावन पथ पर जिसने सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,अमर नाम जग में उसी का उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
Saty ke paavan path par jisane saagar se milan ko man paavan ho jaae jab hari gun dina-raat sunaave,Amar naam jag mein usee ka usakaa janam saarthak hua paropakaar hi maanav jeevan ka sabase baraa dharm hai.
नैनन आगे तू ही तू नाचे प्रियतम का नाम सुना अनहद नाद का संगीत अंतर में गूँजने लगा,सच्चे आशिक़ की पहचान यही उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।
इश्क़ जब रूह में उतरता है बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,सच्चे प्रेम की यही निशानी सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।
प्रेम रंग में जो रंग गया अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,प्रेम की पावन ज्योति जगाई लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
प्रियतम की याद में जो नैना दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,अमर प्रेम की अमर कहानी जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।

तेरे रूप की पावन झांकी उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,प्रियतम का अनुराग ही जिसका उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।
Tere roop ki paavan jhaankee us par doojaa rang na charhe woh to keval apane priyatam ka hokar rah gaya,Priyatam ka anuraag hi jisakaa usane donon jahaan bhulaa diye prem ke nashe mein woh mast kalandar hua.
नैन मिले जब नैनन से तब अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,अंतर में जब प्रेम समाया और मिलन की भोर हुई तो आत्मा का परमात्मा से एकात्म हो गया।
प्रियतम की याद में जो नैना तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,प्रेम की इस पावन धारा में उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।
प्रेम बिना सब सूना जग में दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,प्रियतम के चरणों में जिसने जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,विरह का हर इक आँसू बनकर लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।

प्रेम रंग में जो रंग गया अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,प्रेम की पावन ज्योति जगाई लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
Prem rang mein jo rang gaya antar ghat mein saanchee duniya ki sudha-budh bisaraaee man ki veenaa baajee,Prem ki paavan jyoti jagaaee liyaa usane saare vedon aur shaastron ka saar sahaj mein paa liyaa.
इश्क़ का सौदा जिसने किया वो दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,प्रेम नगर का वासी बनकर कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।
प्रेम गली अति साँकरी जामें दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,सच्चे प्रेम की यही निशानी तो बाहर का सारा बैर-भाव और द्वेष पल भर में समाप्त हो गया।
प्रेम बिना सब सूना जग में डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,प्रेम सुधा का रस जो चखा मोती चमका प्रेम की सीपी में अनमोल ज्ञान का रत्न बन गया।
तेरे रूप की पावन झांकी सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,प्रियतम के चरणों में जिसने जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।

नैनों के दर्पण में बसा जब जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,प्रियतम का अनुराग ही जिसका नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।
Nainon ke darpan mein basaa jab jisane ik baar lakhee use sansaar ka koee doosaraa roop suhaataa nahi,Priyatam ka anuraag hi jisakaa naam likhaa hai woh har shvaas mein apane priyatam ka hi gun gaataa hai.
बिरहा की आग में तप के कुंदन जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,साँसों के हर तार पे जिसका मन ऐसा निर्मल हुआ कि दर्पण भी उसके सामने लजा जाए।
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,प्रेम के इस पावन तीरथ में युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
तेरे दीदार की एक झलक ने दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,प्रेम का दीपक अंतर में जो उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।
नैनों के दर्पण में बसा जब जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,प्रियतम का अनुराग ही जिसका नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।

मन के कोने में सिमटी बाहर हँसता जाए दुनिया को क्या ख़बर कि अंदर कितनी आग लगी है,जब आशा की हर किरण बुझी तब परमात्मा ही सबसे बड़ा वैद्य बना और उसने रूह के ज़ख़्म भर दिए।
Man ke kone mein simatee baahar hansataa jaae duniya ko kyaa khabar ki andar kitanee aag lagee hai,Jab aashaa ki har kiran bujhee tab paramaatmaa hi sabase baraa vaidy banaa aur usane rooh ke zakhm bhar diye.
प्रेम बिना सब सूना जग में सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,प्रियतम की चाहत में जिसने युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
नैन मिले जब नैनन से तब जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,मन मंदिर की पावन आरती उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
भीतर-भीतर घुटता जाए हैं कितने सुंदर सपने बेबस होकर देखा हमने रूठ गए सब अपने,जब कोई सहारा न बचा ज़माने ने हँसी उड़ाई मगर यही फफोले कल ज्ञान का कमल बनेंगे।
टूटी नाव भँवर में फँसी कोई शिकवा नहीं दिल के वीराने में बस एक टूटी आस का दिया है,टूटे हुए दिल का दर्द केवल विरह का सुर निकलता है जो सुनने वालों के दिल को चीर देता है।

वक़्त के थपेड़ों ने हमें सो पीर विरह की गावे अंतर घट की पीड़ा को कोई समझ न पावे,जब धैर्य की सीमा टूट गई कोई खुशी का गीत नहीं गाता यहाँ तो हर साँस में विरह की रागिनी बजती है।
Waqt ke thaperon ne hamen so peer virah ki gaave antar ghat ki peeraa ko koee samajh na paave,Jab dhairy ki seemaa toot gayi koee khushee ka geet nahi gaataa yahaan to har saans mein virah ki raaginee bajatee hai.
दर्द की रात में जब कोई पथरा गईं ये आँखें इंतज़ार की घड़ियाँ सदियों जैसी लंबी हो गईं,जब धैर्य की सीमा टूट गई तब अंतर्यामी प्रभु ने बाहँ पकड़ी और इस संकट से उबार लिया।
आशा का दीप जब बुझने पथरा गईं ये आँखें इंतज़ार की घड़ियाँ सदियों जैसी लंबी हो गईं,जब कोई चारासाज़ न मिला तब प्रभु कृपा की वर्षा हुई और जलते हुए मन को शांति मिल गई।
घायल की गति घायल जाने दिन-रैन तपे अंगार की तरह कोई शीतल बूँद न बरसे जो मन को ठंडक दे,टूटे हुए सपनों की किरचें सहनशीलता ही सबसे बड़ी पूँजी बनी जिसने हर तूफ़ान से बचा लिया।
अकेलेपन की धूप जब साए सोई जाने पीर पराई दुनिया तो तमाशा देखती है कोई दर्द नहीं बाँटता,दिल के फफोलों को देखकर मनुष्य का आत्मबल निखरता है और वह सोने की तरह चमक उठता है।

विरह की अगन में जलता मन को भी छीन ले तब समझ आता है कि तन्हाई किसे कहते हैं,ज़िंदगी की इस सूनी डगर पर जो चीख़ दबी रह गई वह खुदा के दरबार में सबसे बड़ी गवाही बनी।
Virah ki agan mein jalataa man ko bhi chheen le tab samajh aataa hai ki tanhaaee kise kahate hain,Zindagi ki is soonee dagar par jo cheekh dabee rah gayi woh khudaa ke darabaar mein sabase baree gavaahee banee.
आशा का दीप जब बुझने सब मतलब के यार सुख में सब संग नाचते दुःख में मुँह मोड़ लेते हैं,जब आशा की हर किरण बुझी कोई खुशी का गीत नहीं गाता यहाँ तो हर साँस में विरह की रागिनी बजती है।
सपनों के महल जब टूटे दूजा भेद न पावे जो इस आग में जला वही इसका दर्द जान पावे,जब कोई सहारा न बचा मनुष्य का आत्मबल निखरता है और वह सोने की तरह चमक उठता है।
आँखों में जो नमी है वो रेत की दीवार की तरह तब समझ आया कि संसार की माया सब झूठी है,टूटे दिल की इस वीणा से तन्हाई ही अब संग चलती है साया भी धूप ढलते ही साथ छोड़ जाता है।
ग़म का मारा पंछी जैसे कोई शिकवा नहीं दिल के वीराने में बस एक टूटी आस का दिया है,वक़्त के इस क्रूर प्रहार ने तपस्या का ऐसा दीप जला जिसने आत्मा को अमर प्रकाश से भर दिया।

धैर्य और संतोष का धन धूप-छाँव का सफ़र है आज ग़म कल उम्मीद का नया सूरज चमकेगा,अंत समय जब निकट आएगा चलने वाले के कदम कभी डगमगाते नहीं ईश्वर स्वयं उसका मार्गदर्शक बनता है।
Dhairy aur santosh ka dhan dhoopa-chhaanv ka safar hai aaj gham kal ummeed ka naya sooraj chamakegaa,Ant samay jab nikat aaegaa chalane vaale ke kadam kabhee dagamagaate nahi eeshvar svayan usakaa maargadarshak banataa hai.
मन के कोने में सिमटी बाहर हँसता जाए दुनिया को क्या ख़बर कि अंदर कितनी आग लगी है,जब आशा की हर किरण बुझी तब परमात्मा ही सबसे बड़ा वैद्य बना और उसने रूह के ज़ख़्म भर दिए।
जिसके दिल पर बीत रही चीख़ छुपी है भारी किसको अपना हाल सुनाएँ दुनिया मतलबी सारी,टूटे हुए सपनों की किरचें जो चीख़ दबी रह गई वह खुदा के दरबार में सबसे बड़ी गवाही बनी।
विरह की अगन में जलता मन चीख़ छुपी है भारी किसको अपना हाल सुनाएँ दुनिया मतलबी सारी,ग़म की इस लंबी यात्रा में तब प्रभु कृपा की वर्षा हुई और जलते हुए मन को शांति मिल गई।
नैनों से जो नीर बहे बाहर हँसता जाए दुनिया को क्या ख़बर कि अंदर कितनी आग लगी है,अंधेरी रात के सन्नाटे में सारे भ्रम तोड़ डाले और जीवन की नग्न सच्चाई से सामना करा दिया।

जीवन की इस रणभूमि में भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,कर्म की खेती में जो पसीना जो भवसागर में उतरा वह भीषण तूफ़ानों से भी सुरक्षित पार निकल गया।
Jeevan ki is ranabhoomi mein bhaj le raam ka naamaa ant samay jab aavegaa tab sang na aave dhaamaa,Karm ki khetee mein jo paseenaa jo bhavasaagar mein utaraa woh bheeshan toofaanon se bhi surakshit paar nikal gaya.
दर्द की रात में जब कोई जब कोई राह न सूझे तब टूटे दिल से निकली दुआ ही रास्ता दिखाती है,जब अपनों ने ही दिए ज़ख़्म चलते-चलते पाँव के छाले भी अब मंज़िल का पता पूछने लगे हैं।
टूटे दिल की ख़ामोशी में हमदर्द न मिला तकिये को सीने से लगा के सारी रात रोते रहे,ज़िंदगी की इस सूनी डगर पर धीरज का दीपक जलाए रखा सुबह की पहली किरण की आस कभी न छोड़ी।
मन के कोने में सिमटी जब साया भी साथ न दे तब धीरज ही मनुष्य का एकमात्र सच्चा साथी बने,टूटे हुए दिल का दर्द सहनशीलता ही सबसे बड़ी पूँजी बनी जिसने हर तूफ़ान से बचा लिया।
कोई न अपना इस जग में पर दिखाई दें असली ज़ख़्म तो वो हैं जो रूह पर रिसते हैं,ग़म की इस लंबी यात्रा में तो ग़ैरों से क्या शिकवा करना दिल ने चुपचाप सब कुछ सहना सीख लिया।

ठोकर खाकर जो संभलता चलता है अविचल होकर उसके कदम चूमती हैं मंज़िलें बाधाएँ दूर भागती हैं,जीवन की सच्ची पूँजी वही जो आगे बढ़ा उसने असंभव को भी संभव करके दुनिया को दिखा दिया।
Thokar khaakar jo sanbhalataa chalataa hai avichal hokar usake kadam choomatee hain manzilen baadhaaen door bhaagatee hain,Jeevan ki sachchee poonjee vahee jo aage barhaa usane asanbhav ko bhi sanbhav karake duniya ko dikhaa diyaa.
ज़ख़्म वो नहीं जो जिस्म जब साया भी साथ न दे तब धीरज ही मनुष्य का एकमात्र सच्चा साथी बने,आँसुओं की इस भाषा को जो चीख़ दबी रह गई वह खुदा के दरबार में सबसे बड़ी गवाही बनी।
स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda) — साहित्यिक महानायक एवं कालजयी विरासत
स्वामी विवेकानंद (1863–1902) Rashtranayak & Spiritual Giant के शीर्ष व्यक्तित्व थे, जिनकी प्रमुख कृतियों और विचारों ने समाज को नई दिशा दी।
साहित्यिक विधा और मौलिक शैली
स्वामी विवेकानंद ने भाषा और उपमानों की सीमाओं को पार कर ऐसी संजीदा शैली विकसित की, जो सीधे पाठक के अंतर्मन से संवाद करती है।
ऐतिहासिक युग एवं विश्व सम्मान
1863–1902 के महान रचनाकार के रूप में सम्मानित, स्वामी विवेकानंद की कृतियाँ आज कई अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में सराही और अनुवादित की जाती हैं।
दार्शनिक गहराई और आत्मिक अनुभूति
प्रेम, विरह, मानवीय कमज़ोरी और जीवन के गूढ़ रहस्यों को स्वामी विवेकानंद ने अपनी शायरी में अमर सत्य की तरह संजोया है।
स्वामी विवेकानंद की शायरी पीढ़ियों के दिलों को क्यों छूती है?
कॉलेज के युवाओं से लेकर दशकों पुरानी यादों में खोए बुज़ुर्गों तक, स्वामी विवेकानंद हर पीढ़ी को जोड़ते हैं। दिल टूटने पर उनके शेर कड़वाहट नहीं घोलते, बल्कि मानवीय भावना को एक नाज़ुक, पवित्र अनुभूति की तरह स्वीकार करते हैं। आज भी सोशल मीडिया, शास्त्रीय संगीत और मुशायरों में इनके शेर हर रोज़ लाखों दिलों की धड़कन बनते हैं।
अन्य महान ग़ज़लकार एवं कवि
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स्वामी विवेकानंद कौन थे?
स्वामी विवेकानंद (1863–1902) Kolkata, West Bengal, India से ताल्लुक रखने वाले Rashtranayak & Spiritual Giant के अग्रदूत थे, जिन्हें CYCLONIC MONK OF INDIA, PROPHET OF MODERN VEDANTA, YOUTH ICON के रूप में जाना जाता है।
स्वामी विवेकानंद का मुख्य दर्शन व संदेश क्या है?
स्वामी विवेकानंद का मुख्य विचार Advaita Vedanta, fearless self-belief (Atma-shakti), service to humanity as service to God (Daridra Narayana) पर केंद्रित है, जो आज भी प्रेरणा का प्रकाशस्तंभ है।
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