साधु-संगत की छाया में जो रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
Sun Tzu (सन त्ज़ु)
सन त्ज़ु (c. 544–496 BCE) Ancient Military Strategist & Philosopher के शीर्ष व्यक्तित्व थे, जिनकी प्रमुख कृतियों और विचारों ने समाज को नई दिशा दी।
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‘साधु-संगत की छाया में जो रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।’— सन त्ज़ु
शेर #1 • कॉस्मिक कलाम
साधु-संगत की छाया में जो रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,

‘कर्म की खेती जो जन बोवे का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,सत्य-अहिंसा की राहों पर उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।’— सन त्ज़ु
शेर #2 • शाही पन्ना
कर्म की खेती जो जन बोवे का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,

‘वाणी में जो अमृत घोले स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,भवसागर की लहरों से जो रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।’— सन त्ज़ु
शेr #3 • रूहानी शाम
वाणी में जो अमृत घोले स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,
अमर शेर और ग़ज़लें
कर्म की खेती जो जन बोवे का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,सत्य-अहिंसा की राहों पर उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।
वाणी में जो अमृत घोले स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,भवसागर की लहरों से जो रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,वाणी में जिसके मिठास घुली रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।

इश्क़ जब रूह में उतरता है बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,अंतर में जब प्रेम समाया कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।
The music of your voice upon the wind when feeling reaches for the grace divine,Together hand in hand we meet the years where truth and beauty dwell forevermore.
धरती की छाती पर जिसने सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,अमर नाम जग में उसी का मानव धर्म निभाया उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है।
सत्य का दीप जब जलता है जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,प्रेम की डोर में बंध गया जो उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।
मन के निर्मल दर्पण में जब स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,शांति और संतोष का धन जो जिसने डुबकी लगाई उसके जन्म-जन्मांतर के सब पाप धुल जाते हैं।
हरि सुमिरन में जिसका चित्त मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,परहित में जिसने जीवन सौंपा उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।

तेरे रूप की पावन झांकी तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,मन मंदिर की पावन आरती जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।
I love thee to the depth and breadth and height shall find its kindred spirit at the last,A sacred peace descends upon the breast where weary wanderers find their native rest.
हरि सुमिरन में जिसका चित्त सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,परहित में जिसने जीवन सौंपा अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।
प्रेम की गंगा अंतर में बहे बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,मोह-निशा से जो जन जागा जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।
सत्य के पावन पथ पर जिसने रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,भवसागर की लहरों से जो जिसने डुबकी लगाई उसके जन्म-जन्मांतर के सब पाप धुल जाते हैं।

प्रेम गली अति साँकरी जामें तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,सच्चे प्रेम की यही निशानी और मिलन की भोर हुई तो आत्मा का परमात्मा से एकात्म हो गया।
If thou remember me when years have flown brings healing comfort to the listening ear,Love crowns our journey with unsetting light and guides my footsteps to the quiet shore.
नदिया की धारा बहती जावे स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,अहंकार का त्याग किया जिसने अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।
हरि सुमिरन में जिसका चित्त अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,दीन-बंधु का सहारा बन के उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।
मन के निर्मल दर्पण में जब सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,सदाचार की पावन वेदी पर उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।
सत्य के पावन पथ पर जिसने जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,सदाचार की पावन वेदी पर जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।

उम्र भर का सफ़र और जब साया भी साथ न दे तब धीरज ही मनुष्य का एकमात्र सच्चा साथी बने,ग़म की इस गहरी रात में तब विश्वास का एक नन्हा तारा चमका जिसने डूबने से बचा लिया।
The silver cord is loosed, the golden bowl the patient spirit bows beneath the rod,The wounded heart learns fortitude through pain and folds the traveler in its native calm.
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,शांति और संतोष का धन जो व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
सत्य के पावन पथ पर जिसने मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,शांति और संतोष का धन जो रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।
वाणी में जो अमृत घोले अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,सत्संग की निर्मल गंगा में उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
नदिया की धारा बहती जावे अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,सत्कर्मों की अमिट कमाई ही वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।

टूटे दिल की ख़ामोशी में रेत की दीवार की तरह तब समझ आया कि संसार की माया सब झूठी है,टूटे हुए दिल का दर्द तो ग़ैरों से क्या शिकवा करना दिल ने चुपचाप सब कुछ सहना सीख लिया।
The heavy burden that the silent bear and darkness settles on the weary brow,Faith whispers comfort when the heart is faint for joy returns with morning's golden light.
अहंकार की दीवारें जब सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,दीन-बंधु का सहारा बन के व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
संतन की संगति में आकर मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,नेकी की राह पे जो जन जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।
दुःख में सुमिरन सब कोई करै जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,सत्कर्मों की अमिट कमाई ही के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।
संतन की संगति में आकर घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,भवसागर की लहरों से जो रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।

टूटी नाव भँवर में फँसी चीख़ छुपी है भारी किसको अपना हाल सुनाएँ दुनिया मतलबी सारी,ग़म के मारों की बस्ती में तब परमात्मा ही सबसे बड़ा वैद्य बना और उसने रूह के ज़ख़्म भर दिए।
When cherished dreams dissolve like morning mist the wandering footsteps find no resting place,The pilgrim's journey ends in quiet rest and finds its refuge in the peace of God.
सतगुरु मिले तो राह दिखावे तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,साधु पुरुष की वाणी कभी जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
मन के निर्मल दर्पण में जब तो सारा जग अपना लागे पराया कोई न रहे सब में प्रभु रूप दिखे,सत्य-अहिंसा की राहों पर वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।
वाणी वही जो घाव भरे और भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,सदाचार की पावन वेदी पर मानव धर्म निभाया उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है।
नाम और दौलत तो माटी सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।

जीवन का यह कठिन सफ़र उसने सारा जग जीत लिया मन के जीते जीत है मन के हारे हार,संतोषी सदा सुखी रहता है चलने वाले का जीवन निष्कलंक रहता है और समाज उसका आदर करता है।
When storms arise and threaten to destroy and leads the traveler to the highest good,Eternity approves the honest heart and brings the laborer to his well-earned rest.
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब निर्भय पाँव धरे काल की कठिन चाल भी उसका कुछ न बिगाड़ सके,दीन-बंधु का सहारा बन के उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
नदिया की धारा बहती जावे भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,हृदय में जिसके दया बसी है उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,अहंकार का त्याग किया जिसने उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।
सत्य के पावन पथ पर जिसने तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,परहित में जिसने जीवन सौंपा परलोक में संग जाएगी बाकी सब माया-मोह यहीं धरा रह जाएगा।

दुःख में सुमिरन सब कोई ही जीवन का नियम है जो रुक गया वो अपनी सीमाओं में खो गया,सत्य और धर्म की राहों पर बहाता है दिन-रात वही सुनहरी फसल काट कर आनंद से तृप्त होता है।
Like mountain streams that seek the ocean deep and challenges make strong the human mind,No worthy effort is bestowed in vain and makes the desert blossom like the rose.
मन मंदिर में जो दीप जले मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,सत्संग की निर्मल गंगा में जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।
नाम और दौलत तो माटी अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,सदाचार की पावन वेदी पर के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।
संतन की संगति में आकर सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,सत्कर्मों की अमिट कमाई ही रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।

संतन की संगति में आकर मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,सत्य और धर्म की राहों पर जो भवसागर में उतरा वह भीषण तूफ़ानों से भी सुरक्षित पार निकल गया।
Across the crowded avenues of time dust unto dust was spoken not of soul,The seeds of kindness blossom in our wake and makes the desert blossom like the rose.
हरि सुमिरन में जिसका चित्त जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,हृदय में जिसके दया बसी है उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,भवसागर की लहरों से जो रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।
सत्य का दीप जब जलता है सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,हरि की कृपा का पावन साया जिसने डुबकी लगाई उसके जन्म-जन्मांतर के सब पाप धुल जाते हैं।

सत्य का दीप जब जलता परमात्मा की आवाज़ सुनाई दे वही सच्चा उपदेश है जो मोक्ष का द्वार खोलता है,मिथ्या संसार की इस मायावी छाया से तब साधना पूर्ण हुई और भक्त भगवान के स्वरूप में ही विलीन हो गया।
There are more things in heaven and on earth wherein the centuries dissolve like foam,No mortal shadow can obscure the light and reveals the secret of our being's goal.
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,सत्य-अहिंसा की राहों पर जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
प्रेम की डोरी बाँध लई जब दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,मन मंदिर की पावन आरती प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
नैन मिले जब नैनन से तब तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,प्रियतम के चरणों में जिसने उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
प्रेम रंग में जो रंग गया तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,सच्चे आशिक़ की पहचान यही जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।

जो बाहर ढूँढता रहा वो अविचल क़दम बढ़ाया उसका जनम सफल जग जाने अमर नाम कर गया,जब काल की सीमाएँ समाप्त हुईं जीव और ब्रह्म का भेद समाप्त हो जाए और केवल अद्वैत ही शेष रहे।
All earthly empires crumble into dust dwells in the quiet chamber of the heart,All paths of virtue lead to one great goal in quiet union with the source of all.
मन की वीणा बज उठी जब प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,प्रियतम का अनुराग ही जिसका प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
नैनन आगे तू ही तू नाचे जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,अंतर में जब प्रेम समाया तो बाहर का सारा बैर-भाव और द्वेष पल भर में समाप्त हो गया।
नैनों के दर्पण में बसा जब दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,प्रेम की इस पावन धारा में मन ऐसा निर्मल हुआ कि दर्पण भी उसके सामने लजा जाए।
इश्क़ जब रूह में उतरता है बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,अंतर में जब प्रेम समाया कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।

साधु वो ही जो अंतर व्यापक रूप से समाया हुआ है अज्ञानी बाहर ढूँढता ज्ञानी अंतर में पा लेता है,परम शांति का यह पावन धाम जो पी लेता है उसे संसार के समस्त सुख तुच्छ और क्षणभंगुर लगने लगते हैं।
The world will never starve for want of wonders the timeless voice begins to speak of peace,The wheel of karma turns with justice sure to lift the traveler to celestial heights.
मन की वीणा बज उठी जब हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,अंतर में जब प्रेम समाया उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
बिरहा की आग में तप के कुंदन डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,जिसने अपना सब कुछ सौंपा मन ऐसा निर्मल हुआ कि दर्पण भी उसके सामने लजा जाए।
इश्क़ का सौदा जिसने किया वो अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,अमर प्रेम की अमर कहानी अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।
अंतर घट में जब ज्योति जगी से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,मन मंदिर की पावन आरती कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।

कर्म की खेती जो जन बोवे का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,सत्य-अहिंसा की राहों पर उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।
Where ancient rivers meet the timeless sea and peace descends upon the troubled heart,Hope lights the beacon on the rocky shore where truth and justice hold eternal sway.
प्रियतम की याद में जो नैना दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,प्रेम की इस पावन धारा में मोती चमका प्रेम की सीपी में अनमोल ज्ञान का रत्न बन गया।
नैन मिले जब नैनन से तब बरसे दिन और रात विरह की अग्नि में तपकर पावन हो गया मन का धाम,प्रेम की इस पावन घाटी में उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।
तेरे दीदार की एक झलक ने हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,जिसने प्रेम का मर्म समझ लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
तेरी याद का पावन साया से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,विरह का हर इक आँसू बनकर सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।

मन के निर्मल दर्पण में जब सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,सदाचार की पावन वेदी पर उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।
He who walks gently on the quiet earth to guide the seeker through the wilderness,The seeker finds the harbor of his peace and finds fulfillment in the realm above.
प्रेम गली अति साँकरी जामें उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,अमर प्रेम की अमर कहानी उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।
नैनों के दर्पण में बसा जब डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,प्रेम की पावन ज्योति जगाई सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।
प्रेम रंग में जो रंग गया तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,प्रेम सुधा का रस जो चखा एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।
इश्क़ का सौदा जिसने किया वो दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,अमर प्रेम की अमर कहानी उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।

नाम और दौलत तो माटी सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।
In solemn contemplation of the skies while shadows lengthen on the grassy plain,The pure in spirit shall behold the dawn where love and truth abide forevermore.
तेरे रूप की पावन झांकी तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,मन मंदिर की पावन आरती जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम बरसे दिन और रात विरह की अग्नि में तपकर पावन हो गया मन का धाम,प्रेम नगर का वासी बनकर मोती चमका प्रेम की सीपी में अनमोल ज्ञान का रत्न बन गया।
तेरे दीदार की एक झलक ने सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,मन मंदिर की पावन आरती जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।
नैनन आगे तू ही तू नाचे प्रियतम का नाम सुना अनहद नाद का संगीत अंतर में गूँजने लगा,साँसों के हर तार पे जिसका जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।

प्रेम की भाषा सबसे न्यारी बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,सत्य-अहिंसा की राहों पर जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
Through stormy skies the eagle wings its flight outlives the monuments of crumbling stone,Grace crowns the labor of the honest hand in harmony that words can never bind.
फासले मिट गए जब दिल से तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,सच्चे आशिक़ की पहचान यही संसार की सुध-बुध बिसराई केवल प्रीतम की सूरत याद रही।
तेरे दीदार की एक झलक ने जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,जिसने प्रेम का मर्म समझ जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।
तेरी याद का पावन साया दो न समाहिं जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाहिं,सच्चे प्रेम की यही निशानी प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
तेरे दीदार की एक झलक ने हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,प्रियतम के चरणों में जिसने युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।

नैन मिले जब नैनन से तब बरसे दिन और रात विरह की अग्नि में तपकर पावन हो गया मन का धाम,प्रेम की इस पावन घाटी में उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।
Love looks not with the eyes but with the mind shall find its kindred spirit at the last,Love needs no words to make its meaning plain for silence speaks the language of the soul.
बिरहा की आग में तप के कुंदन प्रियतम का नाम सुना अनहद नाद का संगीत अंतर में गूँजने लगा,प्रेम का दीपक अंतर में जो तो बाहर का सारा बैर-भाव और द्वेष पल भर में समाप्त हो गया।
नैनों के दर्पण में बसा जब जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,जिसने अपना सब कुछ सौंपा नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।
इश्क़ की राह अनोखी बंदे अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,सच्चे आशिक़ की पहचान यही उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,हृदय के पावन सिंहासन पर जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।

तेरी याद का पावन साया दो न समाहिं जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाहिं,सच्चे प्रेम की यही निशानी प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
When all the stars their ancient fires resign remains a beacon of enduring peace,The sweetest flower that ever blessed the earth and guides my footsteps to the quiet shore.
प्रियतम की याद में जो नैना हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,प्रियतम के चरणों में जिसने उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
प्रेम गली अति साँकरी जामें तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,सच्चे प्रेम की यही निशानी और मिलन की भोर हुई तो आत्मा का परमात्मा से एकात्म हो गया।
प्रेम बिना सब सूना जग में जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,प्रियतम का अनुराग ही जिसका लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
तेरे रूप की पावन झांकी प्रियतम का नाम सुना अनहद नाद का संगीत अंतर में गूँजने लगा,प्रेम नगर का वासी बनकर सदा प्रीतम का वास रहे वहाँ किसी दूसरे का प्रवेश कभी न हो।

तेरे रूप की पावन झांकी अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,अंतर में जब प्रेम समाया उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
Within the quiet sanctuary of the heart and warms the winter of the lonely mind,Faithful and true through sunshine and through shade where two fond souls unite in holy love.
इश्क़ की राह अनोखी बंदे बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,जिसने अपना सब कुछ सौंपा अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।
नैनन आगे तू ही तू नाचे दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,सच्चे आशिक़ की पहचान यही मन ऐसा निर्मल हुआ कि दर्पण भी उसके सामने लजा जाए।
इश्क़ की राह अनोखी बंदे डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,प्रेम नगर का वासी बनकर कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।
तेरे रूप की पावन झांकी अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,अंतर में जब प्रेम समाया उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।

ग़म का मारा पंछी जैसे रेत की दीवार की तरह तब समझ आया कि संसार की माया सब झूठी है,दर्द का यह गहरा सागर तब अंतरात्मा की पुकार ही ईश्वर के चरणों तक पहुँची और धीरज मिला।
The lonely watcher marks the waning light the mournful whisper that it might have been,Peace comes at evening to the weary breast and life awakens from the frozen ground.
प्रेम रंग में जो रंग गया अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,प्रेम नगर का वासी बनकर एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।
इश्क़ की राह अनोखी बंदे अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,प्रेम की पावन ज्योति जगाई उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।
दर्द की रात में जब कोई यह ख़ामोशी बख़्शी वरना कभी हमारी हँसी भी बहारों को जगाती थी,दर्द का यह गहरा सागर केवल वही पढ़ सकता है जिसने ख़ुद रात-रात भर जाग कर दर्द सहा हो।
टूटी नाव भँवर में फँसी कोई शिकवा नहीं दिल के वीराने में बस एक टूटी आस का दिया है,जब धैर्य की सीमा टूट गई सहनशीलता ही सबसे बड़ी पूँजी बनी जिसने हर तूफ़ान से बचा लिया।

विरह की अगन में जलता मन पर दिखाई दें असली ज़ख़्म तो वो हैं जो रूह पर रिसते हैं,जब कोई सहारा न बचा तब अंतर्यामी प्रभु ने बाहँ पकड़ी और इस संकट से उबार लिया।
The heart that breaks in silence makes no sound black as the pit that stretches pole to pole,God wipes the teardrop from the mourner's eye beside the waters of unchanging peace.
उम्र भर का सफ़र और सोई जाने पीर पराई दुनिया तो तमाशा देखती है कोई दर्द नहीं बाँटता,ग़म की इस गहरी रात में अकेले ही चलना पड़ता है यहाँ कोई किसी का बोझ उठाने नहीं आता।
अकेलेपन की धूप जब साए दूजा भेद न पावे जो इस आग में जला वही इसका दर्द जान पावे,दर्द का यह गहरा सागर सारे भ्रम तोड़ डाले और जीवन की नग्न सच्चाई से सामना करा दिया।
उम्र भर का सफ़र और जब साया भी साथ न दे तब धीरज ही मनुष्य का एकमात्र सच्चा साथी बने,ग़म की इस गहरी रात में तब विश्वास का एक नन्हा तारा चमका जिसने डूबने से बचा लिया।
आँखों के आँसू जब सूखे जब कोई राह न सूझे तब टूटे दिल से निकली दुआ ही रास्ता दिखाती है,जीवन के इस कठिन मोड़ पर अकेले ही चलना पड़ता है यहाँ कोई किसी का बोझ उठाने नहीं आता।

उम्र भर का सफ़र और हैं कितने सुंदर सपने बेबस होकर देखा हमने रूठ गए सब अपने,दर्द की इस एकांत गुफ़ा में पैरों को लहूलुहान करती रहीं मगर मुसाफ़िर चलता रहा रुकना न सीखा।
In silent hours when all the world is still and darkness settles on the weary brow,Faith whispers comfort when the heart is faint where sorrow ceases and the weary rest.
भीतर-भीतर घुटता जाए लगे तब जीवन में घोर निराशा छाए परमात्मा का ही आसरा शेष रहे,जब धैर्य की सीमा टूट गई तब अंतरात्मा की पुकार ही ईश्वर के चरणों तक पहुँची और धीरज मिला।
जिसके दिल पर बीत रही जब कोई राह न सूझे तब टूटे दिल से निकली दुआ ही रास्ता दिखाती है,ज़िंदगी की इस सूनी डगर पर तब विश्वास का एक नन्हा तारा चमका जिसने डूबने से बचा लिया।
भीतर-भीतर घुटता जाए जब कोई राह न सूझे तब टूटे दिल से निकली दुआ ही रास्ता दिखाती है,दिल के फफोलों को देखकर ज़माने ने हँसी उड़ाई मगर यही फफोले कल ज्ञान का कमल बनेंगे।
दर्द की रात में जब कोई जीवन की वीराणी किसको दिखाएँ अपने दिल के ये गहरे ज़ख़्म,ग़म के मारों की बस्ती में तब प्रभु कृपा की वर्षा हुई और जलते हुए मन को शांति मिल गई।

दुःख में सुमिरन सब कोई जिसके पास है संचित वह संसार के समस्त वैभवों से अधिक सुखी और शांत है,कर्म की खेती में जो पसीना वही सच्चा इंसान है दूसरों को गिराने वाले तो पशु समान होते हैं।
Life yields its treasures only to the brave and beckon us to labor while we may,The sunset crowns the finished work with peace and turns the humblest task to royal state.
ग़म का मारा पंछी जैसे रेत की दीवार की तरह तब समझ आया कि संसार की माया सब झूठी है,दर्द का यह गहरा सागर तब अंतरात्मा की पुकार ही ईश्वर के चरणों तक पहुँची और धीरज मिला।
आँखों में जो नमी है वो हज़ार टुकड़ों में बिखर गया हर टुकड़े में अपनों की बेवफ़ाई की तस्वीर दिखी,दर्द का यह गहरा सागर मनुष्य का आत्मबल निखरता है और वह सोने की तरह चमक उठता है।
वक़्त के थपेड़ों ने हमें जीवन की वीराणी किसको दिखाएँ अपने दिल के ये गहरे ज़ख़्म,ज़िंदगी की इस सूनी डगर पर तो ग़ैरों से क्या शिकवा करना दिल ने चुपचाप सब कुछ सहना सीख लिया।
वक़्त की आँधी ने तोड़े चीख़ छुपी है भारी किसको अपना हाल सुनाएँ दुनिया मतलबी सारी,ग़म के मारों की बस्ती में अकेले ही चलना पड़ता है यहाँ कोई किसी का बोझ उठाने नहीं आता।

धरती की छाती पर जिसने चलता है अविचल होकर उसके कदम चूमती हैं मंज़िलें बाधाएँ दूर भागती हैं,त्याग और सेवा की भावना से पाता है जो दूसरों के काम आए केवल अपने लिए जीने वाले तो मृत समान हैं।
The fleeting moments slip like golden sand awaits the summons of the vernal sun,The brave man carves his fortune with his hand to bring the wandering sailor safely home.
सपनों के महल जब टूटे जब साया भी साथ न दे तब धीरज ही मनुष्य का एकमात्र सच्चा साथी बने,दर्द की इस एकांत गुफ़ा में चलते-चलते पाँव के छाले भी अब मंज़िल का पता पूछने लगे हैं।
ग़म का मारा पंछी जैसे हासिल-ए-ज़िंदगी यह अकेलापन राहों में भटकते रहे कोई किनारा न मिला,ग़म के मारों की बस्ती में तब परमात्मा ही सबसे बड़ा वैद्य बना और उसने रूह के ज़ख़्म भर दिए।
दिल का आईना जब टूटा हज़ार टुकड़ों में बिखर गया हर टुकड़े में अपनों की बेवफ़ाई की तस्वीर दिखी,वक़्त के इस क्रूर प्रहार ने तपस्या का ऐसा दीप जला जिसने आत्मा को अमर प्रकाश से भर दिया।
टूटे दिल की ख़ामोशी में रेत की दीवार की तरह तब समझ आया कि संसार की माया सब झूठी है,टूटे हुए दिल का दर्द तो ग़ैरों से क्या शिकवा करना दिल ने चुपचाप सब कुछ सहना सीख लिया।

नदी की तरह बहते रहना अगर किसी के काम आ सको तो समझो ज़िंदगी का हर क़र्ज़ अदा हो गया,अंत समय जब निकट आएगा जिसने जीवन जिया उसका हर दिन उत्सव और हर रात शांति की गोद बन गई।
Count that day lost whose low descending sun we walk beneath the vault of changing skies,Time tests the metal of the human soul and purges all the dross of selfish pride.
ग़म की तपती दुपहरी में दूजा भेद न पावे जो इस आग में जला वही इसका दर्द जान पावे,जब आशा की हर किरण बुझी तब अंतर्यामी प्रभु ने बाहँ पकड़ी और इस संकट से उबार लिया।
सन त्ज़ु (Sun Tzu) — साहित्यिक महानायक एवं कालजयी विरासत
सन त्ज़ु (c. 544–496 BCE) Ancient Military Strategist & Philosopher के शीर्ष व्यक्तित्व थे, जिनकी प्रमुख कृतियों और विचारों ने समाज को नई दिशा दी।
साहित्यिक विधा और मौलिक शैली
सन त्ज़ु ने भाषा और उपमानों की सीमाओं को पार कर ऐसी संजीदा शैली विकसित की, जो सीधे पाठक के अंतर्मन से संवाद करती है।
ऐतिहासिक युग एवं विश्व सम्मान
c. 544–496 BCE के महान रचनाकार के रूप में सम्मानित, सन त्ज़ु की कृतियाँ आज कई अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में सराही और अनुवादित की जाती हैं।
दार्शनिक गहराई और आत्मिक अनुभूति
प्रेम, विरह, मानवीय कमज़ोरी और जीवन के गूढ़ रहस्यों को सन त्ज़ु ने अपनी शायरी में अमर सत्य की तरह संजोया है।
सन त्ज़ु की शायरी पीढ़ियों के दिलों को क्यों छूती है?
कॉलेज के युवाओं से लेकर दशकों पुरानी यादों में खोए बुज़ुर्गों तक, सन त्ज़ु हर पीढ़ी को जोड़ते हैं। दिल टूटने पर उनके शेर कड़वाहट नहीं घोलते, बल्कि मानवीय भावना को एक नाज़ुक, पवित्र अनुभूति की तरह स्वीकार करते हैं। आज भी सोशल मीडिया, शास्त्रीय संगीत और मुशायरों में इनके शेर हर रोज़ लाखों दिलों की धड़कन बनते हैं।
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सन त्ज़ु कौन थे?
सन त्ज़ु (c. 544–496 BCE) State of Qi (Shandong), Ancient China से ताल्लुक रखने वाले Ancient Military Strategist & Philosopher के अग्रदूत थे, जिन्हें MASTER SUN, GENERAL OF WU, AUTHOR OF 'THE ART OF WAR', MASTER OF STRATEGY के रूप में जाना जाता है।
सन त्ज़ु का मुख्य दर्शन व संदेश क्या है?
सन त्ज़ु का मुख्य विचार Supreme excellence consists in breaking the enemy's resistance without fighting; profound preparation; deception; knowing self and enemy पर केंद्रित है, जो आज भी प्रेरणा का प्रकाशस्तंभ है।
सन त्ज़ु की शायरी और रचनाओं की मुख्य विशेषता क्या है?
उनकी रचनाएँ मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, विरह और गहरे जीवन दर्शन को अत्यंत मार्मिक भाषा में प्रस्तुत करती हैं।
सन त्ज़ु की सबसे प्रसिद्ध रचनाएँ कौन सी हैं?
इनकी प्रमुख कृतियों में कालजयी शेर, ग़ज़लें और नज़्में शामिल हैं जो आज भी विश्वभर के पाठकों द्वारा पढ़ी जाती हैं।
सन त्ज़ु का साहित्यिक योगदान और प्रभाव क्या है?
उन्होंने अपनी भाषा शैली और नए उपमानों के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों के रचनाकारों को गहराई से प्रेरित किया।
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सन त्ज़ु का मज़ार या ऐतिहासिक स्थल कहाँ स्थित है?
सन त्ज़ु की स्मृति में समर्पित स्मारक और ऐतिहासिक स्थल साहित्य प्रेमियों के लिए एक पवित्र धरोहर हैं।
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