साधु-संगत की छाया में जो सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,सत्संग की निर्मल गंगा में उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।
Steve Jobs (स्टीव जॉब्स)
स्टीव जॉब्स (1955–2011) Visionary Innovator, Designer & Tech Pioneer के शीर्ष व्यक्तित्व थे, जिनकी प्रमुख कृतियों और विचारों ने समाज को नई दिशा दी।
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‘साधु-संगत की छाया में जो सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,सत्संग की निर्मल गंगा में उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।’— स्टीव जॉब्स
शेर #1 • कॉस्मिक कलाम
साधु-संगत की छाया में जो सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,

‘संतन की संगति में आकर सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,सत्य-अहिंसा की राहों पर जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।’— स्टीव जॉब्स
शेर #2 • शाही पन्ना
संतन की संगति में आकर सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,

‘मन मंदिर में जो दीप जले भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,धैर्य का दामन जिसने थामे अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।’— स्टीव जॉब्स
शेr #3 • रूहानी शाम
मन मंदिर में जो दीप जले भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,
अमर शेर और ग़ज़लें
संतन की संगति में आकर सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,सत्य-अहिंसा की राहों पर जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।
मन मंदिर में जो दीप जले भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,धैर्य का दामन जिसने थामे अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।
दुःख में सुमिरन सब कोई करै तो सारा जग अपना लागे पराया कोई न रहे सब में प्रभु रूप दिखे,मन के मैल को जिसने धोया परलोक में संग जाएगी बाकी सब माया-मोह यहीं धरा रह जाएगा।

मन की वीणा बज उठी जब जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,प्रियतम के चरणों में जिसने अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।
My bounty is as boundless as the sea and find their heaven in each other's eyes,A sacred peace descends upon the breast for silence speaks the language of the soul.
सत्य के पावन पथ पर जिसने का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,साधु पुरुष की वाणी कभी जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।
सत्य के पावन पथ पर जिसने का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,सत्कर्मों की अमिट कमाई ही जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
संतन की संगति में आकर भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,दीन-बंधु का सहारा बन के परलोक में संग जाएगी बाकी सब माया-मोह यहीं धरा रह जाएगा।

प्रेम की पावन वेदी पर जिसने से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,मन मंदिर की पावन आरती जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
Across the silent leagues of time and space no distance can divide the faithful soul,Love builds its altar in the realm of light where weary wanderers find their native rest.
संतन की संगति में आकर माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,सत्कर्मों की अमिट कमाई ही उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।
धरती की छाती पर जिसने अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,सदाचार की पावन वेदी पर निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।
संतन की संगति में आकर स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,सत्य-अहिंसा की राहों पर उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।
माटी का यह देह बना है माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,सत्य वचन जो मुख से बोले जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।

प्रियतम की याद में जो नैना बरसे दिन और रात विरह की अग्नि में तपकर पावन हो गया मन का धाम,जिसने प्रेम का मर्म समझ जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
Thy gentle hand upon my weary brow thy love revives the drooping flower of hope,Together hand in hand we meet the years and love remains when all things pass away.
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु मानव धर्म निभाया उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है।
नाम और दौलत तो माटी सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,परहित में जिसने जीवन सौंपा उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।
दीन-दुखी का आसरा बनकर सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।
धरती की छाती पर जिसने सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,प्रेम की डोर में बंध गया जो वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।

अकेलेपन की धूप जब साए पथरा गईं ये आँखें इंतज़ार की घड़ियाँ सदियों जैसी लंबी हो गईं,ग़म के मारों की बस्ती में केवल विरह का सुर निकलता है जो सुनने वालों के दिल को चीर देता है।
We look before and after in our grief weighs down the soul beneath its secret cross,The bitter cup must pass from lip to lip and bids the weary spirit rest in hope.
संतन की संगति में आकर माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,परहित में जिसने जीवन सौंपा उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।
कर्म की खेती जो जन बोवे मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,धैर्य का दामन जिसने थामे लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।
अहंकार की दीवारें जब स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,साधु पुरुष की वाणी कभी अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।
सत्य के पावन पथ पर जिसने स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,अमर नाम जग में उसी का अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।

टूटी नाव भँवर में फँसी पथरा गईं ये आँखें इंतज़ार की घड़ियाँ सदियों जैसी लंबी हो गईं,अकेलेपन की इस राह पर पैरों को लहूलुहान करती रहीं मगर मुसाफ़िर चलता रहा रुकना न सीखा।
The wounded spirit seeks a quiet place in whispers to the overburdened breast,The pilgrim's journey ends in quiet rest and bids the weary spirit rest in hope.
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,परहित में जिसने जीवन सौंपा जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,माटी का चोला पाकर जिसने रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।
सत्य का दीप जब जलता है मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,हृदय में जिसके दया बसी है उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,मोह-निशा से जो जन जागा उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।

टूटे दिल की ख़ामोशी में को भी छीन ले तब समझ आता है कि तन्हाई किसे कहते हैं,जब धैर्य की सीमा टूट गई तब प्रभु कृपा की वर्षा हुई और जलते हुए मन को शांति मिल गई।
A bitter wind blows through the naked boughs remind the soul of joys that could not stay,The winter tempest prepares the soil for spring and bids the weary spirit rest in hope.
कर्म की खेती जो जन बोवे बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,नेकी की राह पे जो जन अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,हरि की कृपा का पावन साया जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।
वाणी में जो अमृत घोले मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,हृदय में जिसके दया बसी है उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।

धरती की छाती पर जिसने है वही मंज़िल पाता है गिरने वाले को दुनिया कायर कहती संभलने वाले को वीर,जीवन के इस महासमर में जिसने व्यर्थ नहीं गँवाया उसने जीवन के हर संग्राम में सफलता प्राप्त की।
The honest laborer with his sunburned brow who dare to cross the unnavigated sea,The highest wisdom is to do the right and holds the spirit through the tempest's roar.
संतन की संगति में आकर सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,अमर नाम जग में उसी का मानव धर्म निभाया उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,जीवन का यह पावन सूत्र जो मानव धर्म निभाया उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है।
हरि सुमिरन में जिसका चित्त माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।
वाणी में जो अमृत घोले सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,प्रेम की डोर में बंध गया जो जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।

दुःख में सुमिरन सब कोई जो अपने साथ सँजोए रखेगा वही परलोक में सच्चा संगी और साथी बनेगा,जो अपने वचन का पक्का है उसे किसी वैभव की चाह नहीं उसका मन सदा शांत सरोवर की तरह रहता है।
The seed that sleeps beneath the winter snow we learn what courage and endurance mean,Contentment dwells within the humble cot and smiles upon the vanities of earth.
वाणी में जो अमृत घोले सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,जीवन का यह पावन सूत्र जो निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,सत्कर्मों की अमिट कमाई ही उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।
दीन-दुखी का आसरा बनकर अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,सत्य-अहिंसा की राहों पर अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।
प्रेम की गंगा अंतर में बहे घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।

दीन-दुखी का आसरा बनकर करै सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,जो दूसरों के सुख की ख़ातिर है जो दूसरों के चेहरे पे मुस्कान लाए दौलत तो हाथ का मैल है।
Life yields its treasures only to the brave awaits the summons of the vernal sun,He lives the longest who has lived the best and brings a blessing to the weary world.
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,हृदय में जिसके दया बसी है व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।
जो तूफ़ानों में अपनी नाव अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,माटी का चोला पाकर जिसने अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।
सत्य का दीप जब जलता है सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,मोह-निशा से जो जन जागा वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।

संतन की संगति में आकर जब टूटता है तभी उस परमसत्य का अमर द्वार खुलता है,अमृत स्वरूप उस परमात्मा में जिसने अपना शीश नवाया उसने परम मुक्ति का अमर वरदान प्राप्त कर लिया।
All earthly empires crumble into dust untouched by birth and death and mortal change,The soul awakens from its earthly sleep and binds creation in one holy whole.
कर्म की खेती जो जन बोवे बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,शांति और संतोष का धन जो जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
तेरी आँखों की झील में जो का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,मन मंदिर की पावन आरती मोती चमका प्रेम की सीपी में अनमोल ज्ञान का रत्न बन गया।
तेरी याद का पावन साया से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,प्रियतम के रंग में रंग कर उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
साँसों की सरगम में घुल गया बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,प्रेम की पावन ज्योति जगाई सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।

शाश्वत शांति का अनुभव वही व्यापक रूप से समाया हुआ है अज्ञानी बाहर ढूँढता ज्ञानी अंतर में पा लेता है,जब प्रेम और ज्ञान का संगम हुआ वह किसी से द्वेष नहीं करता और सब जीवों के कल्याण में रत रहता है।
Man is not creature of his circumstance is but a fleeting dream within a dream,Pure consciousness shines radiant and serene who sees the eternal in the temporal.
प्रेम की डोरी बाँध लई जब हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,प्रेम का दीपक अंतर में जो मोती चमका प्रेम की सीपी में अनमोल ज्ञान का रत्न बन गया।
फासले मिट गए जब दिल से दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,अमर प्रेम की अमर कहानी जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
नैनों के दर्पण में बसा जब बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,हृदय के पावन सिंहासन पर एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।
मन की वीणा बज उठी जब जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,प्रियतम के चरणों में जिसने अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।

जो भीतर झाँक के देखता मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,परम चेतना का आलोक जब फैला जीव और ब्रह्म का भेद समाप्त हो जाए और केवल अद्वैत ही शेष रहे।
Death is no finale but a sacred door the one eternal essence abides unmoved,The soul awakens from its earthly sleep where only truth and sacred peace remain.
तेरी याद का पावन साया दो न समाहिं जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाहिं,प्रेम की इस पावन धारा में एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।
तेरे रूप की पावन झांकी रैन-दिना मतवारे अंग-अंग में ज्योति जलाई प्रेम के दीपक बारे,साँसों के हर तार पे जिसका जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।
नैनों के दर्पण में बसा जब जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,प्रेम के इस पावन तीरथ में कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
इश्क़ की राह अनोखी बंदे जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,आँखों के रस्ते दिल में उतरा उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।

संतन की संगति में आकर सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,सत्य-अहिंसा की राहों पर जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।
When all the world is hushed in solemn peace and listens to the music of the spheres,The seeker finds the harbor of his peace where truth and justice hold eternal sway.
प्रेम बिना सब सूना जग में दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,प्रेम सुधा का रस जो चखा जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
तेरी याद का पावन साया जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,प्रेम का दीपक अंतर में जो उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
इश्क़ की राह अनोखी बंदे संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,हृदय के पावन सिंहासन पर उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।
इश्क़ की राह अनोखी बंदे अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,अमर प्रेम की अमर कहानी एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।

दीन-दुखी का आसरा बनकर सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।
Where ancient rivers meet the timeless sea shall find an altar in the silent grove,Grace crowns the labor of the honest hand and lights the pathway to eternal rest.
तेरी आँखों की झील में जो डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,अमर प्रेम की अमर कहानी तो बाहर का सारा बैर-भाव और द्वेष पल भर में समाप्त हो गया।
तेरी आँखों की झील में जो का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,प्रियतम का अनुराग ही जिसका अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।
मन की वीणा बज उठी जब तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,प्रेम के इस पावन तीरथ में तो बाहर का सारा बैर-भाव और द्वेष पल भर में समाप्त हो गया।
साँसों की सरगम में घुल गया डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,प्रियतम के रंग में रंग कर अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।

वाणी में जो अमृत घोले मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,हृदय में जिसके दया बसी है उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।
When all the world is hushed in solemn peace and whispers secrets to the evening breeze,A deeper truth awakens in the mind and beauty walks beside the gentle soul.
प्रेम की पावन वेदी पर जिसने से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,मन मंदिर की पावन आरती जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
इश्क़ की राह अनोखी बंदे संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,प्रेम के इस पावन तीरथ में उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।
मन की वीणा बज उठी जब प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,विरह की रात जब ढलने लगी जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,हृदय के पावन सिंहासन पर जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।

कर्म की खेती जो जन बोवे बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,शांति और संतोष का धन जो जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
The quiet grandeur of a noble deed shall find an altar in the silent grove,A noble purpose sanctifies our days while time flows onward to the mystic sea.
प्रियतम की याद में जो नैना अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,प्रियतम का अनुराग ही जिसका मन ऐसा निर्मल हुआ कि दर्पण भी उसके सामने लजा जाए।
नैनों के दर्पण में बसा जब डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,अंतर में जब प्रेम समाया कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
प्रियतम की याद में जो नैना प्रियतम का नाम सुना अनहद नाद का संगीत अंतर में गूँजने लगा,आँखों के रस्ते दिल में उतरा एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।
प्रियतम की याद में जो नैना का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,विरह का हर इक आँसू बनकर प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।

तेरी याद का पावन साया जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,प्रेम का दीपक अंतर में जो उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
True love outlives the changing of the year of cloudless climes and pure celestial skies,For love was never made of mortal dust and keeps the flame alive through all our years.
फासले मिट गए जब दिल से डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,प्रेम सुधा का रस जो चखा और मिलन की भोर हुई तो आत्मा का परमात्मा से एकात्म हो गया।
तेरी आँखों की झील में जो तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,प्रियतम के चरणों में जिसने एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।
फासले मिट गए जब दिल से जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,जिसने अपना सब कुछ सौंपा तो बाहर का सारा बैर-भाव और द्वेष पल भर में समाप्त हो गया।
इश्क़ जब रूह में उतरता है जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,प्रेम की इस पावन धारा में नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।

प्रियतम की याद में जो नैना प्रियतम का नाम सुना अनहद नाद का संगीत अंतर में गूँजने लगा,आँखों के रस्ते दिल में उतरा एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।
Like summer rain upon the thirsty earth I care not if the careless world forgets,We walk together through the changing scene where mutual trust outshines the morning sun.
प्रेम गली अति साँकरी जामें अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,प्रियतम का अनुराग ही जिसका कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।
प्रियतम की याद में जो नैना बरसे दिन और रात विरह की अग्नि में तपकर पावन हो गया मन का धाम,जिसने प्रेम का मर्म समझ जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
प्रेम रंग में जो रंग गया तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,प्रेम की पावन ज्योति जगाई उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,प्रेम की इस पावन घाटी में जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।

नैन मिले जब नैनन से तब तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,साँसों के हर तार पे जिसका मन ऐसा निर्मल हुआ कि दर्पण भी उसके सामने लजा जाए।
I love thee to the depth and breadth and height I care not if the careless world forgets,In sweet communion soul with soul converses resides in loving with a selfless heart.
बिरहा की आग में तप के कुंदन अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,प्रेम की इस पावन धारा में जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
तेरी याद का पावन साया जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,सच्चे प्रेम की यही निशानी जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।
तेरी याद का पावन साया दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,प्रेम की मस्ती में जो झूमा संसार की सुध-बुध बिसराई केवल प्रीतम की सूरत याद रही।
नैन मिले जब नैनन से तब तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,साँसों के हर तार पे जिसका मन ऐसा निर्मल हुआ कि दर्पण भी उसके सामने लजा जाए।

भीतर-भीतर घुटता जाए अंतर घट को तोड़े अकेलेपन की धूप में जब साया भी मुँह मोड़े,जब आशा की हर किरण बुझी जो चीख़ दबी रह गई वह खुदा के दरबार में सबसे बड़ी गवाही बनी।
The heart that breaks in silence makes no sound to mourn the loss of what was dearly loved,Peace comes at evening to the weary breast for joy returns with morning's golden light.
प्रेम की डोरी बाँध लई जब पलकन मूँदूँ तो घट में पाऊँ ऐसा अलौकिक प्रेम जगा जो कभी मिटता नहीं,अंतर में जब प्रेम समाया लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,प्रेम की पावन ज्योति जगाई नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।
सांस-सांस में याद तुम्हारी जीवन की वीराणी किसको दिखाएँ अपने दिल के ये गहरे ज़ख़्म,टूटे दिल की इस वीणा से ज़माने ने हँसी उड़ाई मगर यही फफोले कल ज्ञान का कमल बनेंगे।
अकेलेपन की धूप जब साए अंतर घट को तोड़े अकेलेपन की धूप में जब साया भी मुँह मोड़े,ग़म की इस गहरी रात में केवल वही समझ सकता है जिसके सीने में कभी ऐसा ही घाव लगा हो।

ग़म की तपती दुपहरी में और मंज़िल दूर सुहानी आँखों के कोने में सिमटी जीवन की वीराणी,जब धैर्य की सीमा टूट गई तब भीतर ज्ञान का अमृत झरना फूटा जिसने जीवन को तृप्त कर दिया।
The heart that breaks in silence makes no sound and sorrow keeps its vigil in the dark,The cross we bear shall turn into a crown and walks triumphant through the darkest shade.
नैनों से जो नीर बहे चीख़ छुपी है भारी किसको अपना हाल सुनाएँ दुनिया मतलबी सारी,ग़म की इस आँधी ने जब चलते-चलते पाँव के छाले भी अब मंज़िल का पता पूछने लगे हैं।
भीतर-भीतर घुटता जाए जब साया भी साथ न दे तब धीरज ही मनुष्य का एकमात्र सच्चा साथी बने,जीवन के इस कठिन मोड़ पर सारे भ्रम तोड़ डाले और जीवन की नग्न सच्चाई से सामना करा दिया।
अकेलेपन की धूप जब साए पथरा गईं ये आँखें इंतज़ार की घड़ियाँ सदियों जैसी लंबी हो गईं,ग़म के मारों की बस्ती में केवल विरह का सुर निकलता है जो सुनने वालों के दिल को चीर देता है।
वक़्त के थपेड़ों ने हमें लगे तब जीवन में घोर निराशा छाए परमात्मा का ही आसरा शेष रहे,जब धैर्य की सीमा टूट गई कोई खुशी का गीत नहीं गाता यहाँ तो हर साँस में विरह की रागिनी बजती है।

ग़म की तपती दुपहरी में हासिल-ए-ज़िंदगी यह अकेलापन राहों में भटकते रहे कोई किनारा न मिला,जीवन के इस कठिन मोड़ पर तब प्रभु कृपा की वर्षा हुई और जलते हुए मन को शांति मिल गई।
No comfort comes from shallow words of men when grief sits sovereign in the troubled mind,A quiet courage rises from our tears and turns the midnight shadow into day.
नैनों से जो नीर बहे किनारा कहीं न सूझे प्रभु बिना इस संकट में कोई पार लगाने वाला न दिखे,जब आशा की हर किरण बुझी ज़माने ने हँसी उड़ाई मगर यही फफोले कल ज्ञान का कमल बनेंगे।
छाले पड़े हैं पाँवों में किनारा कहीं न सूझे प्रभु बिना इस संकट में कोई पार लगाने वाला न दिखे,ग़म की इस लंबी यात्रा में तो ग़ैरों से क्या शिकवा करना दिल ने चुपचाप सब कुछ सहना सीख लिया।
उम्र भर का सफ़र और को भी छीन ले तब समझ आता है कि तन्हाई किसे कहते हैं,जब नयनों के सब आँसू सूखे अकेले ही चलना पड़ता है यहाँ कोई किसी का बोझ उठाने नहीं आता।
आँखों के आँसू जब सूखे को भी छीन ले तब समझ आता है कि तन्हाई किसे कहते हैं,टूटे हुए दिल का दर्द तब विश्वास का एक नन्हा तारा चमका जिसने डूबने से बचा लिया।

वाणी में जो अमृत घोले करै सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,जीवन की सच्ची पूँजी वही मनुष्य को देव बना देता है दुर्जन भी उसकी संगति से सज्जन हो जाते हैं।
When storms arise and threaten to destroy but to achieve and labor while 'tis day,Each trial endured becomes a stepping stone and leaves a legacy of noble deeds.
भीतर-भीतर घुटता जाए अंतर घट को तोड़े अकेलेपन की धूप में जब साया भी मुँह मोड़े,जब आशा की हर किरण बुझी जो चीख़ दबी रह गई वह खुदा के दरबार में सबसे बड़ी गवाही बनी।
ग़म की तपती दुपहरी में सोई जाने पीर पराई दुनिया तो तमाशा देखती है कोई दर्द नहीं बाँटता,अकेलेपन की इस राह पर कोई खुशी का गीत नहीं गाता यहाँ तो हर साँस में विरह की रागिनी बजती है।
आशा का दीप जब बुझने चीख़ छुपी है भारी किसको अपना हाल सुनाएँ दुनिया मतलबी सारी,दर्द का यह गहरा सागर तब भीतर ज्ञान का अमृत झरना फूटा जिसने जीवन को तृप्त कर दिया।
दर्द की रात में जब कोई किनारा कहीं न सूझे प्रभु बिना इस संकट में कोई पार लगाने वाला न दिखे,दर्द की इस एकांत गुफ़ा में कोई खुशी का गीत नहीं गाता यहाँ तो हर साँस में विरह की रागिनी बजती है।

समय का पहिया चलता जाए जिसने कर्तव्य निभाया उसके जीवन का हर क्षण यज्ञ की आहुति बन गया,त्याग और सेवा की भावना से तब केवल सत्कर्म ही साथ चलेंगे बाकी सब धन-दौलत यहीं धरा रह जाएगा।
Each morning brings a fresh and sacred task for things are never what they seem to be,Wisdom is gathered in the field of life and leaves a legacy of noble deeds.
आँखों में जो नमी है वो हासिल-ए-ज़िंदगी यह अकेलापन राहों में भटकते रहे कोई किनारा न मिला,ग़म की इस गहरी रात में तब अंतरात्मा की पुकार ही ईश्वर के चरणों तक पहुँची और धीरज मिला।
आँखों के आँसू जब सूखे हैं कितने सुंदर सपने बेबस होकर देखा हमने रूठ गए सब अपने,ग़म के मारों की बस्ती में तन्हाई ही अब संग चलती है साया भी धूप ढलते ही साथ छोड़ जाता है।
वक़्त की आँधी ने तोड़े हज़ार टुकड़ों में बिखर गया हर टुकड़े में अपनों की बेवफ़ाई की तस्वीर दिखी,ग़म के मारों की बस्ती में तब विश्वास का एक नन्हा तारा चमका जिसने डूबने से बचा लिया।
टूटी नाव भँवर में फँसी पथरा गईं ये आँखें इंतज़ार की घड़ियाँ सदियों जैसी लंबी हो गईं,अकेलेपन की इस राह पर पैरों को लहूलुहान करती रहीं मगर मुसाफ़िर चलता रहा रुकना न सीखा।

मन मंदिर में जो दीप चलता है अविचल होकर उसके कदम चूमती हैं मंज़िलें बाधाएँ दूर भागती हैं,सत्संगति का पावन प्रभाव जिसने व्यर्थ नहीं गँवाया उसने जीवन के हर संग्राम में सफलता प्राप्त की।
Each morning brings a fresh and sacred task our restless spirits seek their destined home,A noble purpose dignifies our toil and finds a kingdom in a peaceful mind.
सांस-सांस में याद तुम्हारी जब साया भी साथ न दे तब धीरज ही मनुष्य का एकमात्र सच्चा साथी बने,दर्द का यह गहरा सागर तब अंतरात्मा की पुकार ही ईश्वर के चरणों तक पहुँची और धीरज मिला।
स्टीव जॉब्स (Steve Jobs) — साहित्यिक महानायक एवं कालजयी विरासत
स्टीव जॉब्स (1955–2011) Visionary Innovator, Designer & Tech Pioneer के शीर्ष व्यक्तित्व थे, जिनकी प्रमुख कृतियों और विचारों ने समाज को नई दिशा दी।
साहित्यिक विधा और मौलिक शैली
स्टीव जॉब्स ने भाषा और उपमानों की सीमाओं को पार कर ऐसी संजीदा शैली विकसित की, जो सीधे पाठक के अंतर्मन से संवाद करती है।
ऐतिहासिक युग एवं विश्व सम्मान
1955–2011 के महान रचनाकार के रूप में सम्मानित, स्टीव जॉब्स की कृतियाँ आज कई अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में सराही और अनुवादित की जाती हैं।
दार्शनिक गहराई और आत्मिक अनुभूति
प्रेम, विरह, मानवीय कमज़ोरी और जीवन के गूढ़ रहस्यों को स्टीव जॉब्स ने अपनी शायरी में अमर सत्य की तरह संजोया है।
स्टीव जॉब्स की शायरी पीढ़ियों के दिलों को क्यों छूती है?
कॉलेज के युवाओं से लेकर दशकों पुरानी यादों में खोए बुज़ुर्गों तक, स्टीव जॉब्स हर पीढ़ी को जोड़ते हैं। दिल टूटने पर उनके शेर कड़वाहट नहीं घोलते, बल्कि मानवीय भावना को एक नाज़ुक, पवित्र अनुभूति की तरह स्वीकार करते हैं। आज भी सोशल मीडिया, शास्त्रीय संगीत और मुशायरों में इनके शेर हर रोज़ लाखों दिलों की धड़कन बनते हैं।
अन्य महान ग़ज़लकार एवं कवि
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स्टीव जॉब्स के बारे में ज़रूरी सवाल-जवाब
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स्टीव जॉब्स कौन थे?
स्टीव जॉब्स (1955–2011) San Francisco, California, USA से ताल्लुक रखने वाले Visionary Innovator, Designer & Tech Pioneer के अग्रदूत थे, जिन्हें CO-FOUNDER OF APPLE, PIXAR ANIMATION VISIONARY, CREATOR OF IPHONE, IPAD & MAC, DIGITAL RENAISSANCE MAN के रूप में जाना जाता है।
स्टीव जॉब्स का मुख्य दर्शन व संदेश क्या है?
स्टीव जॉब्स का मुख्य विचार Interlocking technology with liberal arts, relentless pursuit of perfection, Zen minimalism, remembering you are going to die पर केंद्रित है, जो आज भी प्रेरणा का प्रकाशस्तंभ है।
स्टीव जॉब्स की शायरी और रचनाओं की मुख्य विशेषता क्या है?
उनकी रचनाएँ मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, विरह और गहरे जीवन दर्शन को अत्यंत मार्मिक भाषा में प्रस्तुत करती हैं।
स्टीव जॉब्स की सबसे प्रसिद्ध रचनाएँ कौन सी हैं?
इनकी प्रमुख कृतियों में कालजयी शेर, ग़ज़लें और नज़्में शामिल हैं जो आज भी विश्वभर के पाठकों द्वारा पढ़ी जाती हैं।
स्टीव जॉब्स का साहित्यिक योगदान और प्रभाव क्या है?
उन्होंने अपनी भाषा शैली और नए उपमानों के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों के रचनाकारों को गहराई से प्रेरित किया।
क्या Emotion Hub पर स्टीव जॉब्स के शेर कॉपी और शेयर किए जा सकते हैं?
हाँ, Emotion Hub पर आप एक क्लिक में शेर कॉपी कर सकते हैं और सीधे WhatsApp पर शेयर कर सकते हैं।
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स्टीव जॉब्स का मज़ार या ऐतिहासिक स्थल कहाँ स्थित है?
स्टीव जॉब्स की स्मृति में समर्पित स्मारक और ऐतिहासिक स्थल साहित्य प्रेमियों के लिए एक पवित्र धरोहर हैं।
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