साधु-संगत की छाया में जो सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,सत्य वचन जो मुख से बोले व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
Shyam Narayan Pandey (श्याम नारायण पांडेय)
श्याम नारायण पांडेय (1907–1991) Heroic Epic Poet of Veer Rasa के शीर्ष व्यक्तित्व थे, जिनकी प्रमुख कृतियों और विचारों ने समाज को नई दिशा दी।
डाउनलोड करें श्याम नारायण पांडेय के एस्थेटिक स्टोरी कार्ड्स

‘साधु-संगत की छाया में जो सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,सत्य वचन जो मुख से बोले व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।’— श्याम नारायण पांडेय
शेर #1 • कॉस्मिक कलाम
साधु-संगत की छाया में जो सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,

‘आशा तृष्णा सब छूटी जब सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,जीवन का यह पावन सूत्र जो परलोक में संग जाएगी बाकी सब माया-मोह यहीं धरा रह जाएगा।’— श्याम नारायण पांडेय
शेर #2 • शाही पन्ना
आशा तृष्णा सब छूटी जब सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,

‘आशा तृष्णा सब छूटी जब सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,नेकी की राह पे जो जन उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।’— श्याम नारायण पांडेय
शेr #3 • रूहानी शाम
आशा तृष्णा सब छूटी जब सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,
अमर शेर और ग़ज़लें
आशा तृष्णा सब छूटी जब सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,जीवन का यह पावन सूत्र जो परलोक में संग जाएगी बाकी सब माया-मोह यहीं धरा रह जाएगा।
आशा तृष्णा सब छूटी जब सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,नेकी की राह पे जो जन उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।
साधु-संगत की छाया में जो सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,प्रेम की डोर में बंध गया जो वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।

प्रेम की पावन वेदी पर जिसने तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,प्रियतम के चरणों में जिसने कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।
Prem ki paavan vedee par jisane tana-man vaar diyaa usane prem ke alaukik lok mein apanaa sthaan banaa liyaa,Priyatam ke charanon mein jisane ki khud ko mitaa ke priyatam ki khushee mein apanee khushee dhoondhataa hai.
नाम और दौलत तो माटी प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,जीवन का यह पावन सूत्र जो जिसने डुबकी लगाई उसके जन्म-जन्मांतर के सब पाप धुल जाते हैं।
सत्य का दीप जब जलता है रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,शांति और संतोष का धन जो उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।
नदिया की धारा बहती जावे माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,सत्संग की निर्मल गंगा में मानव धर्म निभाया उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है।

तेरी आँखों की झील में जो दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,प्रेम की इस पावन धारा में जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
Teri aankhon ki jheel mein jo dil ka taar juraa maun mein bhi har ek dharakan teri pukaar banee,Prem ki is paavan dhaaraa mein jo roop salonaa usane jeevan ke har andhiyaare ko mitaa daalaa.
माटी का यह देह बना है घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,साधु पुरुष की वाणी कभी जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,वाणी में जिसके मिठास घुली उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।
आशा तृष्णा सब छूटी जब प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,सत्य-अहिंसा की राहों पर रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।
धरती की छाती पर जिसने भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,जीवन का यह पावन सूत्र जो परलोक में संग जाएगी बाकी सब माया-मोह यहीं धरा रह जाएगा।

फासले मिट गए जब दिल से पलकन मूँदूँ तो घट में पाऊँ ऐसा अलौकिक प्रेम जगा जो कभी मिटता नहीं,विरह की रात जब ढलने लगी एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।
Phaasale mit gaye jab dil se palakan moondoon to ghat mein paaoon aisaa alaukik prem jagaa jo kabhee mitataa nahi,Virah ki raat jab dhalane lagee ekamaatr sahaaraa ban gaya use loka-laaj ka koee bhay na raha.
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,सत्कर्मों की अमिट कमाई ही जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।
वाणी में जो अमृत घोले सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,अमर नाम जग में उसी का उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
दीन-दुखी का आसरा बनकर घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,धैर्य का दामन जिसने थामे व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
कर्म की खेती जो जन बोवे सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।

ग़म की तपती दुपहरी में दूजा भेद न पावे जो इस आग में जला वही इसका दर्द जान पावे,दिल के फफोलों को देखकर तब प्रभु कृपा की वर्षा हुई और जलते हुए मन को शांति मिल गई।
Gham ki tapatee dupaharee mein doojaa bhed na paave jo is aag mein jalaa vahee isakaa dard jaan paave,Dil ke phapholon ko dekhakar tab prabhu kripaa ki varshaa hui aur jalate hue man ko shaanti mil gayi.
दीन-दुखी का आसरा बनकर घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,भवसागर की लहरों से जो रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।
मन मंदिर में जो दीप जले अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,दीन-बंधु का सहारा बन के अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।
संतन की संगति में आकर सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,शांति और संतोष का धन जो निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।

वक़्त के थपेड़ों ने हमें अंतर घट को तोड़े अकेलेपन की धूप में जब साया भी मुँह मोड़े,जब नयनों के सब आँसू सूखे अकेले ही चलना पड़ता है यहाँ कोई किसी का बोझ उठाने नहीं आता।
Waqt ke thaperon ne hamen antar ghat ko tore akelepan ki dhoop mein jab saaya bhi munh more,Jab nayanon ke sab aansoo sookhe akele hi chalanaa padta hai yahaan koee kisee ka bojh uthaane nahi aataa.
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,वाणी में जिसके मिठास घुली निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।
कर्म की खेती जो जन बोवे बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,साधु पुरुष की वाणी कभी व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
कर्म की खेती जो जन बोवे सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,मोह-निशा से जो जन जागा उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।
धरती की छाती पर जिसने अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,सत्य-अहिंसा की राहों पर के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।

आँखों में जो नमी है वो जब साया भी साथ न दे तब धीरज ही मनुष्य का एकमात्र सच्चा साथी बने,दर्द की इस एकांत गुफ़ा में धीरज का दीपक जलाए रखा सुबह की पहली किरण की आस कभी न छोड़ी।
Aankhon mein jo namee hai wo jab saaya bhi saath na de tab dheeraj hi manushy ka ekamaatr sachchaa saathee bane,Dard ki is ekaant gufaa mein dheeraj ka deepak jalaae rakhaa subah ki pahalee kiran ki aas kabhee na chhoree.
मन मंदिर में जो दीप जले माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,सत्य-अहिंसा की राहों पर उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।
माटी का यह देह बना है निर्भय पाँव धरे काल की कठिन चाल भी उसका कुछ न बिगाड़ सके,सत्य वचन जो मुख से बोले अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
आशा तृष्णा सब छूटी जब स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,प्रेम की डोर में बंध गया जो परलोक में संग जाएगी बाकी सब माया-मोह यहीं धरा रह जाएगा।
हरि सुमिरन में जिसका चित्त मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,मन के मैल को जिसने धोया जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।

सच्ची लगन से जो जन जिसने मानव धर्म सँभाला उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है,जीवन का असली आनंद वही विजय उसी की होती है जो सत्य और न्याय के पक्ष में अविचल खड़ा रहता है।
Sachchee lagan se jo jan jisane maanav dharm sanbhaalaa usakaa janam saphal jag jaane amar dhaam ko jaataa hai,Jeevan ka asalee aanand vahee vijay usee ki hotee hai jo saty aur nyaay ke paksh mein avichal kharaa rahataa hai.
सतगुरु मिले तो राह दिखावे जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,धैर्य का दामन जिसने थामे उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।
धरती की छाती पर जिसने भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,सत्य-अहिंसा की राहों पर अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।
हरि सुमिरन में जिसका चित्त सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,सत्य-अहिंसा की राहों पर उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।

समय का पहिया चलता जाए ही जीवन का नियम है जो रुक गया वो अपनी सीमाओं में खो गया,सत्य और धर्म की राहों पर वही सच्चा इंसान है दूसरों को गिराने वाले तो पशु समान होते हैं।
Samay ka pahiyaa chalataa jaae hi jeevan ka niyam hai jo ruk gaya wo apanee seemaaon mein kho gaya,Saty aur dharm ki raahon par vahee sachchaa insaan hai doosaron ko giraane vaale to pashu samaan hote hain.
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,माटी का चोला पाकर जिसने उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,सत्य-अहिंसा की राहों पर अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,धैर्य का दामन जिसने थामे अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।
मन के निर्मल दर्पण में जब बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,अमर नाम जग में उसी का रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।

धरती की छाती पर जिसने मेहनत की राह पे चला उसने बंजर धरती से भी सोना उपजा के दिखा दिया,सदाचार के पावन नियमों पर जो भवसागर में उतरा वह भीषण तूफ़ानों से भी सुरक्षित पार निकल गया।
Dharatee ki chhaatee par jisane mehanat ki raah pe chalaa usane banjar dharatee se bhi sonaa upajaa ke dikhaa diyaa,Sadaachaar ke paavan niyamon par jo bhavasaagar mein utaraa woh bheeshan toofaanon se bhi surakshit paar nikal gaya.
वाणी वही जो घाव भरे और का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,नेकी की राह पे जो जन उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।
अहंकार की दीवारें जब मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,सत्य वचन जो मुख से बोले उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।
वाणी में जो अमृत घोले सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।
जो तूफ़ानों में अपनी नाव जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,भवसागर की लहरों से जो अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।

पानी केरा बुदबुदा अस बरसी जब साधक ने ध्यान लगाया जनम-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,जब 'अहं' का विसर्जन हो गया तब साधना पूर्ण हुई और भक्त भगवान के स्वरूप में ही विलीन हो गया।
Paani keraa budabudaa as barasee jab saadhak ne dhyaan lagaayaa janama-maran ka kathin pheraa sahaj hi kat gaya,Jab 'ahan' ka visarjan ho gaya tab saadhanaa poorn hui aur bhakt bhagavaan ke svaroop mein hi vileen ho gaya.
अहंकार की दीवारें जब अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,हरि की कृपा का पावन साया उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।
तेरी आँखों की झील में जो दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,प्रियतम का अनुराग ही जिसका जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
इश्क़ जब रूह में उतरता है हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,जिसने अपना सब कुछ सौंपा प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
तेरी याद का पावन साया तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,आँखों के रस्ते दिल में उतरा सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।

मोह-निशा जब ढलती है से निर्मल हो बाहर के पाखंड से मुक्त होकर प्रभु भक्ति में लीन रहे,ब्रह्मलीन होकर जो जन स्थित तब आत्मा अपने मूल शुद्ध, बुद्ध और मुक्त स्वरूप में प्रतिष्ठित हो गई।
Moha-nishaa jab dhalatee hai se nirmal ho baahar ke paakhand se mukt hokar prabhu bhakti mein leen rahe,Brahmaleen hokar jo jan sthit tab aatmaa apane mool shuddh, buddh aur mukt svaroop mein pratishthit ho gayi.
तेरे दीदार की एक झलक ने का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,प्रियतम के चरणों में जिसने अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।
इश्क़ जब रूह में उतरता है संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,प्रेम नगर का वासी बनकर जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।
तेरे मिलन की आस में बीते पलकन मूँदूँ तो घट में पाऊँ ऐसा अलौकिक प्रेम जगा जो कभी मिटता नहीं,प्रियतम के चरणों में जिसने अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।
प्रेम की पावन वेदी पर जिसने तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,प्रियतम के चरणों में जिसने कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।

जो भीतर झाँक के देखता भेद मिटा के देखा उसने संसार के मिथ्या मोह से स्वयं को मुक्त कर लिया,जिसने सर्वत्र एक ही परमात्मा देखा तो समस्त जगत उस एक ही अनंत परमात्मा का स्वरूप नज़र आने लगा।
Jo bheetar jhaank ke dekhataa bhed mitaa ke dekhaa usane sansaar ke mithyaa moh se svayan ko mukt kar liyaa,Jisane sarvatr ek hi paramaatmaa dekhaa to samast jagat us ek hi anant paramaatmaa ka svaroop nazar aane lagaa.
नैन मिले जब नैनन से तब अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,सच्चे प्रेम की यही निशानी तो बाहर का सारा बैर-भाव और द्वेष पल भर में समाप्त हो गया।
मन की वीणा बज उठी जब अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,सच्चे प्रेम की यही निशानी अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।
मन मंदिर में बसा जो मूरति से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,सच्चे प्रेम की यही निशानी युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
नैन मिले जब नैनन से तब दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,प्रेम नगर का वासी बनकर जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।

आशा तृष्णा सब छूटी जब सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,जीवन का यह पावन सूत्र जो परलोक में संग जाएगी बाकी सब माया-मोह यहीं धरा रह जाएगा।
Aashaa trishnaa sab chhootee jab sukh mein karai na koy jo sukh mein sumiran karai to duhkh kaahe ko hoy,Jeevan ka yeh paavan sootr jo paralok mein sang jaaegee baakee sab maayaa-moh yaheen dharaa rah jaaegaa.
तेरी आँखों की झील में जो रैन-दिना मतवारे अंग-अंग में ज्योति जलाई प्रेम के दीपक बारे,अमर प्रेम की अमर कहानी उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
प्रेम गली अति साँकरी जामें पलकन मूँदूँ तो घट में पाऊँ ऐसा अलौकिक प्रेम जगा जो कभी मिटता नहीं,प्रेम की पावन ज्योति जगाई नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।
प्रेम की डोरी बाँध लई जब दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,अंतर में जब प्रेम समाया प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
प्रियतम की याद में जो नैना अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,जिसने प्रेम का मर्म समझ उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।

दीन-दुखी का आसरा बनकर घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,धैर्य का दामन जिसने थामे व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
Deena-dukhee ka aasaraa banakar ghata-ghat mein pragat bhaee ajnyaan ka ghor andhera pal bhar mein bhaag gaya,Dhairy ka daaman jisane thaame vyarth nahi jaatee woh sadiyon tak bhatake huon ko sahi raah dikhaatee hai.
इश्क़ की राह अनोखी बंदे तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,आँखों के रस्ते दिल में उतरा जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।
प्रेम की पावन वेदी पर जिसने जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,सच्चे आशिक़ की पहचान यही तो बाहर का सारा बैर-भाव और द्वेष पल भर में समाप्त हो गया।
नैनों के दर्पण में बसा जब तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,प्रेम की इस पावन धारा में तो बाहर का सारा बैर-भाव और द्वेष पल भर में समाप्त हो गया।
तेरी आँखों की झील में जो हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,जब से नैना रूप में उलझे उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।

हरि सुमिरन में जिसका चित्त मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,मन के मैल को जिसने धोया जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
Hari sumiran mein jisakaa chitt man ka mail dhulaave paaras ka paras paakar jaise lohaa kanchan ho jaave,Man ke mail ko jisane dhoyaa jo dheer chalaa usakaa kadam kabhee saty ke maarg se dagamagaa nahi sakataa.
तेरी आँखों की झील में जो दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,प्रेम की इस पावन धारा में जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
तेरे मिलन की आस में बीते हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,हृदय के पावन सिंहासन पर कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
नैनों के दर्पण में बसा जब उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,प्रेम की इस पावन धारा में जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
मन की वीणा बज उठी जब तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,प्रियतम का अनुराग ही जिसका जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।

अहंकार की दीवारें जब अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,हरि की कृपा का पावन साया उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।
Ahankaar ki deevaaren jab antar nain ughaare ghat mein hi paramaatmaa ka deedaar karaae,Hari ki kripaa ka paavan saaya usane nirmal darpan paayaa jahaan paramaatmaa ka saakshaat svaroop dikhataa hai.
नैनन आगे तू ही तू नाचे सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,प्रियतम की चाहत में जिसने लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,अंतर में जब प्रेम समाया जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।
तेरी आँखों की झील में जो जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,मन मंदिर की पावन आरती प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
इश्क़ का सौदा जिसने किया वो जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,प्रेम की मस्ती में जो झूमा एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।

प्रेम गली अति साँकरी जामें पलकन मूँदूँ तो घट में पाऊँ ऐसा अलौकिक प्रेम जगा जो कभी मिटता नहीं,प्रेम की पावन ज्योति जगाई नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।
Prem galee ati saankaree jaamen palakan moondoon to ghat mein paaoon aisaa alaukik prem jagaa jo kabhee mitataa nahi,Prem ki paavan jyoti jagaaee naam likhaa hai woh har shvaas mein apane priyatam ka hi gun gaataa hai.
अंतर घट में जब ज्योति जगी उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,हृदय के पावन सिंहासन पर कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।
नैनों के दर्पण में बसा जब तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,प्रेम की मस्ती में जो झूमा प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
नैनों के दर्पण में बसा जब प्रियतम का नाम सुना अनहद नाद का संगीत अंतर में गूँजने लगा,प्रेम का दीपक अंतर में जो जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।
नैन मिले जब नैनन से तब रैन-दिना मतवारे अंग-अंग में ज्योति जलाई प्रेम के दीपक बारे,प्रेम नगर का वासी बनकर युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।

तेरी आँखों की झील में जो जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,मन मंदिर की पावन आरती प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
Teri aankhon ki jheel mein jo jisane ik baar lakhee use sansaar ka koee doosaraa roop suhaataa nahi,Man mandir ki paavan aaratee prem ke paavan charanon mein usane eeshvar ka saakshaat darshan paa liyaa.
प्रियतम की याद में जो नैना से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,अमर प्रेम की अमर कहानी जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
फासले मिट गए जब दिल से पलकन मूँदूँ तो घट में पाऊँ ऐसा अलौकिक प्रेम जगा जो कभी मिटता नहीं,विरह की रात जब ढलने लगी एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।
तेरे रूप की पावन झांकी संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,प्रेम की पावन ज्योति जगाई मोती चमका प्रेम की सीपी में अनमोल ज्ञान का रत्न बन गया।
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,प्रियतम के रंग में रंग कर जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।

प्रेम का प्याला जिसने पिया वो उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,प्रियतम की चाहत में जिसने उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।
Prem ka pyaalaa jisane piyaa wo us par doojaa rang na charhe woh to keval apane priyatam ka hokar rah gaya,Priyatam ki chaahat mein jisane utaaroon har pal main to apane salone shyaam ki daasee ban gayi.
प्रेम की डोरी बाँध लई जब से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,जिसने अपना सब कुछ सौंपा अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।
मन की वीणा बज उठी जब प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,अमर प्रेम की अमर कहानी उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।
प्रेम बिना सब सूना जग में सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,साँसों के हर तार पे जिसका जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,प्रियतम की चाहत में जिसने उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।

नैनों से जो नीर बहे और मंज़िल दूर सुहानी आँखों के कोने में सिमटी जीवन की वीराणी,टूटे हुए दिल का दर्द तब परमात्मा ही सबसे बड़ा वैद्य बना और उसने रूह के ज़ख़्म भर दिए।
Nainon se jo neer bahe aur manzil door suhaanee aankhon ke kone mein simatee jeevan ki veeraanee,Toote hue dil ka dard tab paramaatmaa hi sabase baraa vaidy banaa aur usane rooh ke zakhm bhar diye.
इश्क़ का सौदा जिसने किया वो तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,प्रियतम के रंग में रंग कर जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
साँसों की सरगम में घुल गया तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,जिसने प्रेम का मर्म समझ संसार की सुध-बुध बिसराई केवल प्रीतम की सूरत याद रही।
ग़म की तपती दुपहरी में पथरा गईं ये आँखें इंतज़ार की घड़ियाँ सदियों जैसी लंबी हो गईं,जब आशा की हर किरण बुझी पैरों को लहूलुहान करती रहीं मगर मुसाफ़िर चलता रहा रुकना न सीखा।
सांस-सांस में याद तुम्हारी पथरा गईं ये आँखें इंतज़ार की घड़ियाँ सदियों जैसी लंबी हो गईं,अंधेरी रात के सन्नाटे में सारे भ्रम तोड़ डाले और जीवन की नग्न सच्चाई से सामना करा दिया।

सांस-सांस में याद तुम्हारी हमदर्द न मिला तकिये को सीने से लगा के सारी रात रोते रहे,जब धैर्य की सीमा टूट गई अकेले ही चलना पड़ता है यहाँ कोई किसी का बोझ उठाने नहीं आता।
Saansa-saans mein yaad tumhaaree hamadard na mila takiye ko seene se lagaa ke saari raat rote rahe,Jab dhairy ki seemaa toot gayi akele hi chalanaa padta hai yahaan koee kisee ka bojh uthaane nahi aataa.
टूटी नाव भँवर में फँसी कोई शिकवा नहीं दिल के वीराने में बस एक टूटी आस का दिया है,टूटे हुए दिल का दर्द पार करना ही पड़ेगा किनारे पर बैठ कर रोने से कोई पार नहीं होता।
टूटी नाव भँवर में फँसी यह ख़ामोशी बख़्शी वरना कभी हमारी हँसी भी बहारों को जगाती थी,दर्द का यह गहरा सागर केवल वही समझ सकता है जिसके सीने में कभी ऐसा ही घाव लगा हो।
ग़म की तपती दुपहरी में दूजा भेद न पावे जो इस आग में जला वही इसका दर्द जान पावे,दिल के फफोलों को देखकर तब प्रभु कृपा की वर्षा हुई और जलते हुए मन को शांति मिल गई।
दर्द की रात में जब कोई को भी छीन ले तब समझ आता है कि तन्हाई किसे कहते हैं,ग़म की इस आँधी ने जब तब अंतर्यामी प्रभु ने बाहँ पकड़ी और इस संकट से उबार लिया।

ग़म की तपती दुपहरी में दूजा भेद न पावे जो इस आग में जला वही इसका दर्द जान पावे,टूटे हुए सपनों की किरचें पार करना ही पड़ेगा किनारे पर बैठ कर रोने से कोई पार नहीं होता।
Gham ki tapatee dupaharee mein doojaa bhed na paave jo is aag mein jalaa vahee isakaa dard jaan paave,Toote hue sapanon ki kirachen paar karanaa hi paregaa kinaare par baith kar rone se koee paar nahi hotaa.
विरह की अगन में जलता मन रेत की दीवार की तरह तब समझ आया कि संसार की माया सब झूठी है,दिल के फफोलों को देखकर तब अंतरात्मा की पुकार ही ईश्वर के चरणों तक पहुँची और धीरज मिला।
कोई न अपना इस जग में कोई शिकवा नहीं दिल के वीराने में बस एक टूटी आस का दिया है,टूटे हुए दिल का दर्द ज़माने ने हँसी उड़ाई मगर यही फफोले कल ज्ञान का कमल बनेंगे।
सांस-सांस में याद तुम्हारी लगे तब जीवन में घोर निराशा छाए परमात्मा का ही आसरा शेष रहे,अंधेरी रात के सन्नाटे में तब अंतरात्मा की पुकार ही ईश्वर के चरणों तक पहुँची और धीरज मिला।
आँखों के आँसू जब सूखे कोई शिकवा नहीं दिल के वीराने में बस एक टूटी आस का दिया है,अंधेरी रात के सन्नाटे में तब विश्वास का एक नन्हा तारा चमका जिसने डूबने से बचा लिया।

अहंकार की दीवारें जब जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,जो अपने वचन का पक्का है बहाता है दिन-रात वही सुनहरी फसल काट कर आनंद से तृप्त होता है।
Ahankaar ki deevaaren jab jag mein soee pyaaraa krodha-agni ko shaant kare jo sheela-sarovar dhaaraa,Jo apane vachan ka pakkaa hai bahaataa hai dina-raat vahee sunaharee phasal kaat kar aanand se tript hotaa hai.
नैनों से जो नीर बहे और मंज़िल दूर सुहानी आँखों के कोने में सिमटी जीवन की वीराणी,टूटे हुए दिल का दर्द तब परमात्मा ही सबसे बड़ा वैद्य बना और उसने रूह के ज़ख़्म भर दिए।
वक़्त के थपेड़ों ने हमें सो पीर विरह की गावे अंतर घट की पीड़ा को कोई समझ न पावे,टूटे हुए दिल का दर्द तन्हाई ही अब संग चलती है साया भी धूप ढलते ही साथ छोड़ जाता है।
टूटी नाव भँवर में फँसी पर दिखाई दें असली ज़ख़्म तो वो हैं जो रूह पर रिसते हैं,जब सबने मुँह फेर लिया तब भीतर ज्ञान का अमृत झरना फूटा जिसने जीवन को तृप्त कर दिया।
ग़म की तपती दुपहरी में दूजा भेद न पावे जो इस आग में जला वही इसका दर्द जान पावे,टूटे हुए सपनों की किरचें तन्हाई ही अब संग चलती है साया भी धूप ढलते ही साथ छोड़ जाता है।

धरती की छाती पर जिसने जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,जिसने अहंकार को त्याग दिया मनुष्य को देव बना देता है दुर्जन भी उसकी संगति से सज्जन हो जाते हैं।
Dharatee ki chhaatee par jisane jag mein soee pyaaraa krodha-agni ko shaant kare jo sheela-sarovar dhaaraa,Jisane ahankaar ko tyaag diyaa manushy ko dev banaa detaa hai durjan bhi usakee sangati se sajjan ho jaate hain.
दिल का आईना जब टूटा जब साया भी साथ न दे तब धीरज ही मनुष्य का एकमात्र सच्चा साथी बने,जब नयनों के सब आँसू सूखे सहनशीलता ही सबसे बड़ी पूँजी बनी जिसने हर तूफ़ान से बचा लिया।
उम्र भर का सफ़र और बाहर हँसता जाए दुनिया को क्या ख़बर कि अंदर कितनी आग लगी है,अंधेरी रात के सन्नाटे में तब अंतरात्मा की पुकार ही ईश्वर के चरणों तक पहुँची और धीरज मिला।
दिल का आईना जब टूटा हैं कितने सुंदर सपने बेबस होकर देखा हमने रूठ गए सब अपने,जब कोई चारासाज़ न मिला तब भीतर ज्ञान का अमृत झरना फूटा जिसने जीवन को तृप्त कर दिया।
वक़्त के थपेड़ों ने हमें अंतर घट को तोड़े अकेलेपन की धूप में जब साया भी मुँह मोड़े,जब नयनों के सब आँसू सूखे अकेले ही चलना पड़ता है यहाँ कोई किसी का बोझ उठाने नहीं आता।

अहंकार की दीवारें जब अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,जिसने समय की चाल पहचानी कि संकट के समय ढाल बन जाए सुख में तो सारी दुनिया साथ चलती है।
Ahankaar ki deevaaren jab antar mein gir jaateen ghata-ghat mein tab ek anantaa jyoti nazar hai aatee,Jisane samay ki chaal pahachaanee ki sankat ke samay dhaal ban jaae sukh mein to saari duniya saath chalatee hai.
तन्हाई के अँधियारे में सब मतलब के यार सुख में सब संग नाचते दुःख में मुँह मोड़ लेते हैं,वक़्त के इस क्रूर प्रहार ने मनुष्य का आत्मबल निखरता है और वह सोने की तरह चमक उठता है।
श्याम नारायण पांडेय (Shyam Narayan Pandey) — साहित्यिक महानायक एवं कालजयी विरासत
श्याम नारायण पांडेय (1907–1991) Heroic Epic Poet of Veer Rasa के शीर्ष व्यक्तित्व थे, जिनकी प्रमुख कृतियों और विचारों ने समाज को नई दिशा दी।
साहित्यिक विधा और मौलिक शैली
श्याम नारायण पांडेय ने भाषा और उपमानों की सीमाओं को पार कर ऐसी संजीदा शैली विकसित की, जो सीधे पाठक के अंतर्मन से संवाद करती है।
ऐतिहासिक युग एवं विश्व सम्मान
1907–1991 के महान रचनाकार के रूप में सम्मानित, श्याम नारायण पांडेय की कृतियाँ आज कई अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में सराही और अनुवादित की जाती हैं।
दार्शनिक गहराई और आत्मिक अनुभूति
प्रेम, विरह, मानवीय कमज़ोरी और जीवन के गूढ़ रहस्यों को श्याम नारायण पांडेय ने अपनी शायरी में अमर सत्य की तरह संजोया है।
श्याम नारायण पांडेय की शायरी पीढ़ियों के दिलों को क्यों छूती है?
कॉलेज के युवाओं से लेकर दशकों पुरानी यादों में खोए बुज़ुर्गों तक, श्याम नारायण पांडेय हर पीढ़ी को जोड़ते हैं। दिल टूटने पर उनके शेर कड़वाहट नहीं घोलते, बल्कि मानवीय भावना को एक नाज़ुक, पवित्र अनुभूति की तरह स्वीकार करते हैं। आज भी सोशल मीडिया, शास्त्रीय संगीत और मुशायरों में इनके शेर हर रोज़ लाखों दिलों की धड़कन बनते हैं।
अन्य महान ग़ज़लकार एवं कवि
30 सेकंड में बनाइए अपना कार्ड
पसंद का शेर चुनिए, मनपसंद टेम्पलेट लगाइए, फ़ॉन्ट और रंग सजाइए और एक क्लिक में सेव कर लीजिए।
- बिना साइन-अप
- बिना वॉटरमार्क
- हमेशा मुफ़्त
“तेरी खामोशियों में भी एक कायनात बसती है...”
EmotionHub.in • Cosmic Poetryहर मौक़े और हर अपने के लिए संदेश
जिसके लिए लिखना है, उसे या कोई त्योहार चुनिए और तैयार संग्रह खोल लीजिए।
- पापा का जन्मदिनजिन्होंने उँगली पकड़कर चलना सिखाया
- सालगिरह की बधाईजोड़ों के लिए मीठी-सी पंक्तियाँ
- परिवार को सुप्रभातघर के ग्रुप के लिए सुबह की शुरुआत
- प्यार भरी शुभ रात्रिसोने से पहले भेजने लायक़ बातें
- दिवाली की बधाईअपनों के लिए रोशनी भरे संदेश
- होली की बधाईरंगों वाले संदेश दोस्तों के नाम
- ईद मुबारकअपनों तक पहुँचाइए ईद की ख़ुशी
- साथी को विदाईसहकर्मी के लिए अपनापन भरे अल्फ़ाज़
- सफलता पर बधाईकिसी की बड़ी जीत पर हौसला बढ़ाइए
- किसी की याद मेंजब दूरी कुछ ज़्यादा ही लंबी लगे
- दोस्त का जन्मदिनयार के लिए हँसी-ख़ुशी वाली दुआएँ
- क्रिसमस की शुभकामनाएँपूरे परिवार के लिए त्योहार की बधाई
लोग यही खोजते हैं
- अकेलेपन की शायरी
- दिल टूटने की शायरी
- पहले प्यार की शायरी
- हमसफ़र पर शायरी
- आगे बढ़ने की शायरी
- किंग एटीट्यूड शायरी
- क्वीन एटीट्यूड शायरी
- बेस्ट फ्रेंड शायरी
- देर रात की याद शायरी
- गहरे जज़्बात की शायरी
- हार न मानने की शायरी
- पत्नी को जन्मदिन की बधाई
- भाई को जन्मदिन की बधाई
- शादी की छोटी शुभकामनाएँ
- पहली सालगिरह की बधाई
- प्रेरणादायक सुप्रभात
कवि, त्योहार और स्टेटस
शेरों के पीछे की आवाज़ें पढ़िए, त्योहार की तैयारी कीजिए और स्टेटस के लिए छोटी पंक्ति उठाइए
श्याम नारायण पांडेय के बारे में ज़रूरी सवाल-जवाब
श्याम नारायण पांडेय के जीवन, प्रसिद्ध ग़ज़लों और साहित्यिक विरासत से जुड़े प्रामाणिक उत्तर।
कोई अन्य सवाल है? संपर्क करें
श्याम नारायण पांडेय कौन थे?
श्याम नारायण पांडेय (1907–1991) Dummeronw (Mau), Uttar Pradesh, India से ताल्लुक रखने वाले Heroic Epic Poet of Veer Rasa के अग्रदूत थे, जिन्हें EMPEROR OF VEER RASA, POET OF 'HALDIGHATI' AND 'JAUHAR', NATIONAL BARD OF RAJPUT VALOR के रूप में जाना जाता है।
श्याम नारायण पांडेय का मुख्य दर्शन व संदेश क्या है?
श्याम नारायण पांडेय का मुख्य विचार Veer Rasa (heroic poetry), national awakening, immortalizing heroic resistance to tyranny, martial rhythm पर केंद्रित है, जो आज भी प्रेरणा का प्रकाशस्तंभ है।
श्याम नारायण पांडेय की शायरी और रचनाओं की मुख्य विशेषता क्या है?
उनकी रचनाएँ मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, विरह और गहरे जीवन दर्शन को अत्यंत मार्मिक भाषा में प्रस्तुत करती हैं।
श्याम नारायण पांडेय की सबसे प्रसिद्ध रचनाएँ कौन सी हैं?
इनकी प्रमुख कृतियों में कालजयी शेर, ग़ज़लें और नज़्में शामिल हैं जो आज भी विश्वभर के पाठकों द्वारा पढ़ी जाती हैं।
श्याम नारायण पांडेय का साहित्यिक योगदान और प्रभाव क्या है?
उन्होंने अपनी भाषा शैली और नए उपमानों के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों के रचनाकारों को गहराई से प्रेरित किया।
क्या Emotion Hub पर श्याम नारायण पांडेय के शेर कॉपी और शेयर किए जा सकते हैं?
हाँ, Emotion Hub पर आप एक क्लिक में शेर कॉपी कर सकते हैं और सीधे WhatsApp पर शेयर कर सकते हैं।
क्या श्याम नारायण पांडेय के शेरों के एस्थेटिक कार्ड डाउनलोड किए जा सकते हैं?
हाँ, आप 300 DPI वॉलपेपर क्वालिटी में टेक्स्ट के साथ तैयार कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं या डिज़ाइन स्टूडियो में कस्टमाइज़ कर सकते हैं।
श्याम नारायण पांडेय का मज़ार या ऐतिहासिक स्थल कहाँ स्थित है?
श्याम नारायण पांडेय की स्मृति में समर्पित स्मारक और ऐतिहासिक स्थल साहित्य प्रेमियों के लिए एक पवित्र धरोहर हैं।
तो फिर देर किस बात की?
कोई पंक्ति चुनिए, उसे अपना अंदाज़ दीजिए और भेज दीजिए। आपका पहला कार्ड बस कुछ टैप दूर है।







