क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,धैर्य का दामन जिसने थामे रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।
Shivmangal Singh 'Suman' (शिवमंगल सिंह 'सुमन')
शिवमंगल सिंह 'सुमन' (1915–2002) Poet of Revolutionary Optimism & Padmashri के शीर्ष व्यक्तित्व थे, जिनकी प्रमुख कृतियों और विचारों ने समाज को नई दिशा दी।
डाउनलोड करें शिवमंगल सिंह 'सुमन' के एस्थेटिक स्टोरी कार्ड्स

‘क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,धैर्य का दामन जिसने थामे रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।’— शिवमंगल सिंह 'सुमन'
शेर #1 • कॉस्मिक कलाम
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,

‘सत्य के पावन पथ पर जिसने भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,नेकी की राह पे जो जन लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।’— शिवमंगल सिंह 'सुमन'
शेर #2 • शाही पन्ना
सत्य के पावन पथ पर जिसने भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,

‘संतन की संगति में आकर सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,अहंकार का त्याग किया जिसने के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।’— शिवमंगल सिंह 'सुमन'
शेr #3 • रूहानी शाम
संतन की संगति में आकर सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,
अमर शेर और ग़ज़लें
सत्य के पावन पथ पर जिसने भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,नेकी की राह पे जो जन लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।
संतन की संगति में आकर सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,अहंकार का त्याग किया जिसने के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।
कर्म की खेती जो जन बोवे सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,मन के मैल को जिसने धोया अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।

तेरे मिलन की आस में बीते अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,मन मंदिर की पावन आरती संसार की सुध-बुध बिसराई केवल प्रीतम की सूरत याद रही।
Tere milan ki aas mein beete amar ho gaya jag mein use duniya ka koee lobh baandh na sakaa kabhee,Man mandir ki paavan aaratee sansaar ki sudha-budh bisaraaee keval preetam ki soorat yaad rahi.
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,अमर नाम जग में उसी का जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
वाणी वही जो घाव भरे और बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,शांति और संतोष का धन जो जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।
धरती की छाती पर जिसने मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,नेकी की राह पे जो जन व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
धरती की छाती पर जिसने अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।

फासले मिट गए जब दिल से दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,प्रियतम का अनुराग ही जिसका जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।
Phaasale mit gaye jab dil se dil ka taar juraa maun mein bhi har ek dharakan teri pukaar banee,Priyatam ka anuraag hi jisakaa jisane snaan kiyaa usake saare santaap aur taap sadaa ke lie mit gaye.
कर्म की खेती जो जन बोवे का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,वाणी में जिसके मिठास घुली जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
नदिया की धारा बहती जावे सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,अहंकार का त्याग किया जिसने उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।
साधु-संगत की छाया में जो निर्भय पाँव धरे काल की कठिन चाल भी उसका कुछ न बिगाड़ सके,नेकी की राह पे जो जन उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।
सत्य का दीप जब जलता है तो सारा जग अपना लागे पराया कोई न रहे सब में प्रभु रूप दिखे,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।

प्रेम की पावन वेदी पर जिसने पलकन मूँदूँ तो घट में पाऊँ ऐसा अलौकिक प्रेम जगा जो कभी मिटता नहीं,प्रियतम का अनुराग ही जिसका नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।
Prem ki paavan vedee par jisane palakan moondoon to ghat mein paaoon aisaa alaukik prem jagaa jo kabhee mitataa nahi,Priyatam ka anuraag hi jisakaa naam likhaa hai woh har shvaas mein apane priyatam ka hi gun gaataa hai.
संतन की संगति में आकर भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,हरि की कृपा का पावन साया वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,दीन-बंधु का सहारा बन के जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।
दुःख में सुमिरन सब कोई करै रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,धैर्य का दामन जिसने थामे जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
अहंकार की दीवारें जब तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,सदाचार की पावन वेदी पर उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।

टूटी नाव भँवर में फँसी दूजा भेद न पावे जो इस आग में जला वही इसका दर्द जान पावे,वक़्त के इस क्रूर प्रहार ने ज़माने ने हँसी उड़ाई मगर यही फफोले कल ज्ञान का कमल बनेंगे।
Tootee naav bhanvar mein phansee doojaa bhed na paave jo is aag mein jalaa vahee isakaa dard jaan paave,Waqt ke is kroor prahaar ne zamaane ne hansi uraaee magar yahee phaphole kal jnyaan ka kamal banenge.
मन मंदिर में जो दीप जले अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,अमर नाम जग में उसी का वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।
जो तूफ़ानों में अपनी नाव घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।
संतन की संगति में आकर प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,सत्य-अहिंसा की राहों पर उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।
जो तूफ़ानों में अपनी नाव का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,सत्य-अहिंसा की राहों पर अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।

सपनों के महल जब टूटे लगे तब जीवन में घोर निराशा छाए परमात्मा का ही आसरा शेष रहे,जब अपनों ने ही दिए ज़ख़्म तब भीतर ज्ञान का अमृत झरना फूटा जिसने जीवन को तृप्त कर दिया।
Sapanon ke mahal jab toote lage tab jeevan mein ghor niraashaa chhaae paramaatmaa ka hi aasaraa shesh rahe,Jab apanon ne hi diye zakhm tab bheetar jnyaan ka amrit jharanaa phootaa jisane jeevan ko tript kar diyaa.
कर्म की खेती जो जन बोवे तो सारा जग अपना लागे पराया कोई न रहे सब में प्रभु रूप दिखे,धैर्य का दामन जिसने थामे उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।
कर्म की खेती जो जन बोवे मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,नेकी की राह पे जो जन उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।
संतन की संगति में आकर भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,हृदय में जिसके दया बसी है अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।
कर्म की खेती जो जन बोवे जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,सत्कर्मों की अमिट कमाई ही उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।

वक़्त के थपेड़ों ने हमें चीख़ छुपी है भारी किसको अपना हाल सुनाएँ दुनिया मतलबी सारी,अंधेरी रात के सन्नाटे में केवल विरह का सुर निकलता है जो सुनने वालों के दिल को चीर देता है।
Waqt ke thaperon ne hamen cheekh chhupee hai bhaaree kisako apanaa haal sunaaen duniya matalabee saari,Andheree raat ke sannaate mein keval virah ka sur nikalataa hai jo sunane vaalon ke dil ko cheer detaa hai.
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,दीन-बंधु का सहारा बन के निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।
संतन की संगति में आकर तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,शांति और संतोष का धन जो उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।
नाम और दौलत तो माटी भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
नदिया की धारा बहती जावे बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,शांति और संतोष का धन जो उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।

मन मंदिर में जो दीप चलता है अविचल होकर उसके कदम चूमती हैं मंज़िलें बाधाएँ दूर भागती हैं,जीवन के इस महासमर में तब केवल सत्कर्म ही साथ चलेंगे बाकी सब धन-दौलत यहीं धरा रह जाएगा।
Man mandir mein jo deep chalataa hai avichal hokar usake kadam choomatee hain manzilen baadhaaen door bhaagatee hain,Jeevan ke is mahaasamar mein tab keval satkarm hi saath chalenge baakee sab dhana-daulat yaheen dharaa rah jaaegaa.
नाम और दौलत तो माटी घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,सत्य वचन जो मुख से बोले व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
साधु-संगत की छाया में जो का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,अहंकार का त्याग किया जिसने उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।
वाणी में जो अमृत घोले अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,हरि की कृपा का पावन साया अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
नाम और दौलत तो माटी सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,सत्संग की निर्मल गंगा में उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।

जिसने मन को जीत लिया जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,सच्चे मित्र की पहचान यही चलने वाले के कदम कभी डगमगाते नहीं ईश्वर स्वयं उसका मार्गदर्शक बनता है।
Jisane man ko jeet liyaa jo jeevan mahakaave usee manushy ka janam saphal jo parapeeraa apanaave,Sachche mitr ki pahachaan yahee chalane vaale ke kadam kabhee dagamagaate nahi eeshvar svayan usakaa maargadarshak banataa hai.
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,मन के मैल को जिसने धोया के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।
साधु-संगत की छाया में जो सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,सत्य-अहिंसा की राहों पर उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।
मन के निर्मल दर्पण में जब माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,माटी का चोला पाकर जिसने उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।
हरि सुमिरन में जिसका चित्त निर्भय पाँव धरे काल की कठिन चाल भी उसका कुछ न बिगाड़ सके,अमर नाम जग में उसी का के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।

मन मंदिर में जो दीप अगर उठने का हौसला हो हर ठोकर इंसान को चलने का नया हुनर सिखाती है,सत्संगति का पावन प्रभाव चलने वाले का जीवन निष्कलंक रहता है और समाज उसका आदर करता है।
Man mandir mein jo deep agar uthane ka hausalaa ho har thokar insaan ko chalane ka naya hunar sikhaatee hai,Satsangati ka paavan prabhaav chalane vaale ka jeevan nishkalank rahataa hai aur samaaj usakaa aadar karataa hai.
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,जीवन का यह पावन सूत्र जो उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।
नदिया की धारा बहती जावे घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,अहंकार का त्याग किया जिसने अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।
दुःख में सुमिरन सब कोई करै भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,भवसागर की लहरों से जो निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,अहंकार का त्याग किया जिसने उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।

मृत्यु कोई अंत नहीं बस अविचल क़दम बढ़ाया उसका जनम सफल जग जाने अमर नाम कर गया,सच्चा मोक्ष वही कहलाता है जहाँ त्याग दिया वह इस संसार में रहते हुए भी विदेही की तरह विचरता है।
Mrityu koee ant nahi bas avichal qadam barhaayaa usakaa janam saphal jag jaane amar naam kar gaya,Sachchaa moksh vahee kahalaataa hai jahaan tyaag diyaa woh is sansaar mein rahate hue bhi videhee ki tarah vicharataa hai.
जो तूफ़ानों में अपनी नाव रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,हृदय में जिसके दया बसी है जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
नैन मिले जब नैनन से तब तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,प्रियतम के चरणों में जिसने और मिलन की भोर हुई तो आत्मा का परमात्मा से एकात्म हो गया।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,आँखों के रस्ते दिल में उतरा जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।
प्रेम की पावन वेदी पर जिसने जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,प्रियतम का अनुराग ही जिसका उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।

अमृत की बूँद अंतर में परमात्मा की आवाज़ सुनाई दे वही सच्चा उपदेश है जो मोक्ष का द्वार खोलता है,जब आत्मा ने जाना अपना सत्य स्वरूप जिसने स्नान किया उसने संसार के समस्त दुःखों से मुक्ति पा ली।
Amrit ki boond antar mein paramaatmaa ki aavaaz sunaaee de vahee sachchaa upadesh hai jo moksh ka dvaar kholataa hai,Jab aatmaa ne jaanaa apanaa saty svaroop jisane snaan kiyaa usane sansaar ke samast duhkhon se mukti paa lee.
तेरे मिलन की आस में बीते अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,विरह का हर इक आँसू बनकर मन ऐसा निर्मल हुआ कि दर्पण भी उसके सामने लजा जाए।
इश्क़ की राह अनोखी बंदे उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,प्रियतम का अनुराग ही जिसका कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
प्रियतम की याद में जो नैना दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,प्रियतम की चाहत में जिसने नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।
तेरे मिलन की आस में बीते अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,मन मंदिर की पावन आरती संसार की सुध-बुध बिसराई केवल प्रीतम की सूरत याद रही।

माया के इस झूठे जग पार उतरना हो तो हरि नाम की पावन नौका का आश्रय लेना पड़ता है,परमानंद का यह अलौकिक रस उसे न मृत्यु का भय होता है और न जीवन की कोई आस, वह सदा मुक्त है।
Maayaa ke is jhoothe jag paar utaranaa ho to hari naam ki paavan naukaa ka aashray lenaa padta hai,Paramaanand ka yeh alaukik ras use na mrityu ka bhay hotaa hai aur na jeevan ki koee aas, woh sadaa mukt hai.
नैनन आगे तू ही तू नाचे संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,अंतर में जब प्रेम समाया मोती चमका प्रेम की सीपी में अनमोल ज्ञान का रत्न बन गया।
प्रेम रंग में जो रंग गया जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,प्रेम सुधा का रस जो चखा युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,प्रियतम का अनुराग ही जिसका जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
प्रेम रंग में जो रंग गया बरसे दिन और रात विरह की अग्नि में तपकर पावन हो गया मन का धाम,प्रियतम का अनुराग ही जिसका सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।

सत्य के पावन पथ पर जिसने भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,नेकी की राह पे जो जन लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।
Saty ke paavan path par jisane bharam ka pardaa tore amrit ras ki varshaa hove jab moh mukh more,Nekee ki raah pe jo jan lagaa sadaa ke lie woh bhavasaagar ki bheeshan laharon se paar utar jaataa hai.
तेरे दीदार की एक झलक ने दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,सच्चे आशिक़ की पहचान यही जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।
मन मंदिर में बसा जो मूरति उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,साँसों के हर तार पे जिसका अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।
नैनन आगे तू ही तू नाचे जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,प्रेम सुधा का रस जो चखा सदा प्रीतम का वास रहे वहाँ किसी दूसरे का प्रवेश कभी न हो।
फासले मिट गए जब दिल से तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,सच्चे आशिक़ की पहचान यही मोती चमका प्रेम की सीपी में अनमोल ज्ञान का रत्न बन गया।

दुःख में सुमिरन सब कोई करै रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,धैर्य का दामन जिसने थामे जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
Duhkh mein sumiran sab koee karai ramaa rahe har dam use sansaar ki koee chintaa kabhee sataa nahi sakatee,Dhairy ka daaman jisane thaame jo dheer chalaa usakaa kadam kabhee saty ke maarg se dagamagaa nahi sakataa.
तेरे दीदार की एक झलक ने संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,प्रियतम के रंग में रंग कर एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।
इश्क़ जब रूह में उतरता है संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,प्रेम के इस पावन तीरथ में जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।
साँसों की सरगम में घुल गया बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,अमर प्रेम की अमर कहानी उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
प्रेम की पावन वेदी पर जिसने प्रियतम का नाम सुना अनहद नाद का संगीत अंतर में गूँजने लगा,अमर प्रेम की अमर कहानी अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।

नदिया की धारा बहती जावे बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,शांति और संतोष का धन जो उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।
Nadiyaa ki dhaaraa bahatee jaave baithaa jan nij bhaav se usakaa jeevan dhany hua prabhu kripaa sadaa barasatee,Shaanti aur santosh ka dhan jo usakaa maan kabhee ghatataa nahi saty ki shakti se woh parvat ko bhi jhukaataa hai.
फासले मिट गए जब दिल से दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,प्रियतम का अनुराग ही जिसका जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।
बिरहा की आग में तप के कुंदन तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,विरह का हर इक आँसू बनकर जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।
तेरी आँखों की झील में जो प्रियतम का नाम सुना अनहद नाद का संगीत अंतर में गूँजने लगा,प्रियतम की चाहत में जिसने जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
मन मंदिर में बसा जो मूरति जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,अमर प्रेम की अमर कहानी और मिलन की भोर हुई तो आत्मा का परमात्मा से एकात्म हो गया।

जो तूफ़ानों में अपनी नाव रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,हृदय में जिसके दया बसी है जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
Jo toofaanon mein apanee naav ramaa rahe har dam use sansaar ki koee chintaa kabhee sataa nahi sakatee,Hriday mein jisake dayaa basee hai jo dheer chalaa usakaa kadam kabhee saty ke maarg se dagamagaa nahi sakataa.
तेरे मिलन की आस में बीते से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,आँखों के रस्ते दिल में उतरा जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।
प्रेम की डोरी बाँध लई जब दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,प्रेम के इस पावन तीरथ में और मिलन की भोर हुई तो आत्मा का परमात्मा से एकात्म हो गया।
साँसों की सरगम में घुल गया हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,प्रियतम का अनुराग ही जिसका जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।
प्रेम गली अति साँकरी जामें से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,अंतर में जब प्रेम समाया अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।

मन मंदिर में बसा जो मूरति उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,साँसों के हर तार पे जिसका अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।
Man mandir mein basaa jo moorati us par doojaa rang na charhe woh to keval apane priyatam ka hokar rah gaya,Saanson ke har taar pe jisakaa ahankaar ki koee jagah nahi yahaan to keval samarpan ki sugandh bahatee hai.
तेरे दीदार की एक झलक ने तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,आँखों के रस्ते दिल में उतरा तो बाहर का सारा बैर-भाव और द्वेष पल भर में समाप्त हो गया।
इश्क़ की राह अनोखी बंदे तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,हृदय के पावन सिंहासन पर अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।
तेरी आँखों की झील में जो रैन-दिना मतवारे अंग-अंग में ज्योति जलाई प्रेम के दीपक बारे,जिसने प्रेम का मर्म समझ मोती चमका प्रेम की सीपी में अनमोल ज्ञान का रत्न बन गया।
प्रियतम की याद में जो नैना तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,प्रेम सुधा का रस जो चखा सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।

साँसों की सरगम में घुल गया हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,प्रियतम का अनुराग ही जिसका जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।
Saanson ki saragam mein ghul gaya haradam sheesh navaanaa khud ko khokar priyatam paanaa jag ka bharam bhulaanaa,Priyatam ka anuraag hi jisakaa jisane snaan kiyaa usake saare santaap aur taap sadaa ke lie mit gaye.
तेरे रूप की पावन झांकी जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,विरह का हर इक आँसू बनकर जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
प्रेम की पावन वेदी पर जिसने पलकन मूँदूँ तो घट में पाऊँ ऐसा अलौकिक प्रेम जगा जो कभी मिटता नहीं,प्रियतम का अनुराग ही जिसका नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।
इश्क़ की राह अनोखी बंदे रैन-दिना मतवारे अंग-अंग में ज्योति जलाई प्रेम के दीपक बारे,जिसने प्रेम का मर्म समझ जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
तेरे रूप की पावन झांकी दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,विरह की रात जब ढलने लगी सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।

प्रेम की डोरी बाँध लई जब दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,आँखों के रस्ते दिल में उतरा अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।
Prem ki doree baandh laee jab dil ka taar juraa maun mein bhi har ek dharakan teri pukaar banee,Aankhon ke raste dil mein utaraa apanee sudh bisaraaee usane janama-maran ke bandhan ko sadaa ke lie tor diyaa.
इश्क़ की राह अनोखी बंदे प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,विरह की रात जब ढलने लगी सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।
अंतर घट में जब ज्योति जगी दो न समाहिं जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाहिं,प्रियतम की चाहत में जिसने जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।
प्रेम रंग में जो रंग गया उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,मन मंदिर की पावन आरती जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
प्रेम की डोरी बाँध लई जब दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,आँखों के रस्ते दिल में उतरा अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।

छाले पड़े हैं पाँवों में हज़ार टुकड़ों में बिखर गया हर टुकड़े में अपनों की बेवफ़ाई की तस्वीर दिखी,ग़म की इस गहरी रात में तो ग़ैरों से क्या शिकवा करना दिल ने चुपचाप सब कुछ सहना सीख लिया।
Chhaale pare hain paanvon mein hazaar tukaron mein bikhar gaya har tukare mein apanon ki bevafaaee ki tasveer dikhee,Gham ki is gaharee raat mein to ghairon se kyaa shikavaa karanaa dil ne chupachaap sab kuchh sahanaa seekh liyaa.
तेरे दीदार की एक झलक ने प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,विरह का हर इक आँसू बनकर अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम प्रियतम का नाम सुना अनहद नाद का संगीत अंतर में गूँजने लगा,प्रेम सुधा का रस जो चखा उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।
भीतर-भीतर घुटता जाए बाहर हँसता जाए दुनिया को क्या ख़बर कि अंदर कितनी आग लगी है,ग़म की इस लंबी यात्रा में तब प्रभु कृपा की वर्षा हुई और जलते हुए मन को शांति मिल गई।
घायल की गति घायल जाने पथरा गईं ये आँखें इंतज़ार की घड़ियाँ सदियों जैसी लंबी हो गईं,जब आशा की हर किरण बुझी केवल विरह का सुर निकलता है जो सुनने वालों के दिल को चीर देता है।

कोई न अपना इस जग में जीवन की वीराणी किसको दिखाएँ अपने दिल के ये गहरे ज़ख़्म,दर्द का यह गहरा सागर तब विश्वास का एक नन्हा तारा चमका जिसने डूबने से बचा लिया।
Koee na apanaa is jag mein jeevan ki veeraanee kisako dikhaaen apane dil ke ye gahare zakhm,Dard ka yeh gaharaa saagar tab vishvaas ka ek nanhaa taaraa chamakaa jisane doobane se bachaa liyaa.
ग़म की तपती दुपहरी में पर दिखाई दें असली ज़ख़्म तो वो हैं जो रूह पर रिसते हैं,इस दर्द भरे दिल की सदा जो चीख़ दबी रह गई वह खुदा के दरबार में सबसे बड़ी गवाही बनी।
ग़म का मारा पंछी जैसे को भी छीन ले तब समझ आता है कि तन्हाई किसे कहते हैं,जब कोई चारासाज़ न मिला ज़माने ने हँसी उड़ाई मगर यही फफोले कल ज्ञान का कमल बनेंगे।
टूटी नाव भँवर में फँसी दूजा भेद न पावे जो इस आग में जला वही इसका दर्द जान पावे,वक़्त के इस क्रूर प्रहार ने ज़माने ने हँसी उड़ाई मगर यही फफोले कल ज्ञान का कमल बनेंगे।
जिसके दिल पर बीत रही हैं कितने सुंदर सपने बेबस होकर देखा हमने रूठ गए सब अपने,जब धैर्य की सीमा टूट गई तब अंतर्यामी प्रभु ने बाहँ पकड़ी और इस संकट से उबार लिया।

भीतर-भीतर घुटता जाए अंतर घट को तोड़े अकेलेपन की धूप में जब साया भी मुँह मोड़े,जब नयनों के सब आँसू सूखे पार करना ही पड़ेगा किनारे पर बैठ कर रोने से कोई पार नहीं होता।
Bheetara-bheetar ghutataa jaae antar ghat ko tore akelepan ki dhoop mein jab saaya bhi munh more,Jab nayanon ke sab aansoo sookhe paar karanaa hi paregaa kinaare par baith kar rone se koee paar nahi hotaa.
ज़ख़्म वो नहीं जो जिस्म दिन-रैन तपे अंगार की तरह कोई शीतल बूँद न बरसे जो मन को ठंडक दे,टूटे हुए सपनों की किरचें तब प्रभु कृपा की वर्षा हुई और जलते हुए मन को शांति मिल गई।
उम्र भर का सफ़र और सब मतलब के यार सुख में सब संग नाचते दुःख में मुँह मोड़ लेते हैं,ग़म की इस गहरी रात में तब अंतर्यामी प्रभु ने बाहँ पकड़ी और इस संकट से उबार लिया।
विरह की अगन में जलता मन को भी छीन ले तब समझ आता है कि तन्हाई किसे कहते हैं,दिल के फफोलों को देखकर तब परमात्मा ही सबसे बड़ा वैद्य बना और उसने रूह के ज़ख़्म भर दिए।
सांस-सांस में याद तुम्हारी सब मतलब के यार सुख में सब संग नाचते दुःख में मुँह मोड़ लेते हैं,जीवन के इस कठिन मोड़ पर अकेले ही चलना पड़ता है यहाँ कोई किसी का बोझ उठाने नहीं आता।

माटी का यह चोला पाकर चलता है अविचल होकर उसके कदम चूमती हैं मंज़िलें बाधाएँ दूर भागती हैं,सच्चे मित्र की पहचान यही चलने वाले के कदम कभी डगमगाते नहीं ईश्वर स्वयं उसका मार्गदर्शक बनता है।
Maatee ka yeh cholaa paakar chalataa hai avichal hokar usake kadam choomatee hain manzilen baadhaaen door bhaagatee hain,Sachche mitr ki pahachaan yahee chalane vaale ke kadam kabhee dagamagaate nahi eeshvar svayan usakaa maargadarshak banataa hai.
छाले पड़े हैं पाँवों में हज़ार टुकड़ों में बिखर गया हर टुकड़े में अपनों की बेवफ़ाई की तस्वीर दिखी,ग़म की इस गहरी रात में तो ग़ैरों से क्या शिकवा करना दिल ने चुपचाप सब कुछ सहना सीख लिया।
वक़्त के थपेड़ों ने हमें लगे तब जीवन में घोर निराशा छाए परमात्मा का ही आसरा शेष रहे,जब कोई चारासाज़ न मिला अकेले ही चलना पड़ता है यहाँ कोई किसी का बोझ उठाने नहीं आता।
दिल का आईना जब टूटा दिन-रैन तपे अंगार की तरह कोई शीतल बूँद न बरसे जो मन को ठंडक दे,दर्द की भट्टी में तपकर ही ज़माने ने हँसी उड़ाई मगर यही फफोले कल ज्ञान का कमल बनेंगे।
घायल की गति घायल जाने जब साया भी साथ न दे तब धीरज ही मनुष्य का एकमात्र सच्चा साथी बने,आँसुओं की इस भाषा को सारे भ्रम तोड़ डाले और जीवन की नग्न सच्चाई से सामना करा दिया।

वाणी में जो अमृत घोले जो अपने साथ सँजोए रखेगा वही परलोक में सच्चा संगी और साथी बनेगा,जिसने अहंकार को त्याग दिया कि संकट के समय ढाल बन जाए सुख में तो सारी दुनिया साथ चलती है।
Vaanee mein jo amrit ghole jo apane saath sanjoe rakhegaa vahee paralok mein sachchaa sangee aur saathee banegaa,Jisane ahankaar ko tyaag diyaa ki sankat ke samay dhaal ban jaae sukh mein to saari duniya saath chalatee hai.
मन के कोने में सिमटी दूजा भेद न पावे जो इस आग में जला वही इसका दर्द जान पावे,ज़िंदगी की इस सूनी डगर पर सहनशीलता ही सबसे बड़ी पूँजी बनी जिसने हर तूफ़ान से बचा लिया।
सांस-सांस में याद तुम्हारी और मंज़िल दूर सुहानी आँखों के कोने में सिमटी जीवन की वीराणी,आँसुओं की इस भाषा को ज़माने ने हँसी उड़ाई मगर यही फफोले कल ज्ञान का कमल बनेंगे।
छाले पड़े हैं पाँवों में अंतर घट को तोड़े अकेलेपन की धूप में जब साया भी मुँह मोड़े,जब आशा की हर किरण बुझी पार करना ही पड़ेगा किनारे पर बैठ कर रोने से कोई पार नहीं होता।
सपनों के महल जब टूटे लगे तब जीवन में घोर निराशा छाए परमात्मा का ही आसरा शेष रहे,जब अपनों ने ही दिए ज़ख़्म तब भीतर ज्ञान का अमृत झरना फूटा जिसने जीवन को तृप्त कर दिया।

गिरने में कोई हार नहीं अगर किसी के काम आ सको तो समझो ज़िंदगी का हर क़र्ज़ अदा हो गया,सत्संगति का पावन प्रभाव जो भवसागर में उतरा वह भीषण तूफ़ानों से भी सुरक्षित पार निकल गया।
Girane mein koee haar nahi agar kisee ke kaam aa sako to samajho zindagi ka har qarz adaa ho gaya,Satsangati ka paavan prabhaav jo bhavasaagar mein utaraa woh bheeshan toofaanon se bhi surakshit paar nikal gaya.
नैनों से जो नीर बहे और मंज़िल दूर सुहानी आँखों के कोने में सिमटी जीवन की वीराणी,दिल के फफोलों को देखकर अकेले ही चलना पड़ता है यहाँ कोई किसी का बोझ उठाने नहीं आता।
शिवमंगल सिंह 'सुमन' (Shivmangal Singh 'Suman') — साहित्यिक महानायक एवं कालजयी विरासत
शिवमंगल सिंह 'सुमन' (1915–2002) Poet of Revolutionary Optimism & Padmashri के शीर्ष व्यक्तित्व थे, जिनकी प्रमुख कृतियों और विचारों ने समाज को नई दिशा दी।
साहित्यिक विधा और मौलिक शैली
शिवमंगल सिंह 'सुमन' ने भाषा और उपमानों की सीमाओं को पार कर ऐसी संजीदा शैली विकसित की, जो सीधे पाठक के अंतर्मन से संवाद करती है।
ऐतिहासिक युग एवं विश्व सम्मान
1915–2002 के महान रचनाकार के रूप में सम्मानित, शिवमंगल सिंह 'सुमन' की कृतियाँ आज कई अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में सराही और अनुवादित की जाती हैं।
दार्शनिक गहराई और आत्मिक अनुभूति
प्रेम, विरह, मानवीय कमज़ोरी और जीवन के गूढ़ रहस्यों को शिवमंगल सिंह 'सुमन' ने अपनी शायरी में अमर सत्य की तरह संजोया है।
शिवमंगल सिंह 'सुमन' की शायरी पीढ़ियों के दिलों को क्यों छूती है?
कॉलेज के युवाओं से लेकर दशकों पुरानी यादों में खोए बुज़ुर्गों तक, शिवमंगल सिंह 'सुमन' हर पीढ़ी को जोड़ते हैं। दिल टूटने पर उनके शेर कड़वाहट नहीं घोलते, बल्कि मानवीय भावना को एक नाज़ुक, पवित्र अनुभूति की तरह स्वीकार करते हैं। आज भी सोशल मीडिया, शास्त्रीय संगीत और मुशायरों में इनके शेर हर रोज़ लाखों दिलों की धड़कन बनते हैं।
अन्य महान ग़ज़लकार एवं कवि
30 सेकंड में बनाइए अपना कार्ड
पसंद का शेर चुनिए, मनपसंद टेम्पलेट लगाइए, फ़ॉन्ट और रंग सजाइए और एक क्लिक में सेव कर लीजिए।
- बिना साइन-अप
- बिना वॉटरमार्क
- हमेशा मुफ़्त
“तेरी खामोशियों में भी एक कायनात बसती है...”
EmotionHub.in • Cosmic Poetryहर मौक़े और हर अपने के लिए संदेश
जिसके लिए लिखना है, उसे या कोई त्योहार चुनिए और तैयार संग्रह खोल लीजिए।
- पापा का जन्मदिनजिन्होंने उँगली पकड़कर चलना सिखाया
- सालगिरह की बधाईजोड़ों के लिए मीठी-सी पंक्तियाँ
- परिवार को सुप्रभातघर के ग्रुप के लिए सुबह की शुरुआत
- प्यार भरी शुभ रात्रिसोने से पहले भेजने लायक़ बातें
- दिवाली की बधाईअपनों के लिए रोशनी भरे संदेश
- होली की बधाईरंगों वाले संदेश दोस्तों के नाम
- ईद मुबारकअपनों तक पहुँचाइए ईद की ख़ुशी
- साथी को विदाईसहकर्मी के लिए अपनापन भरे अल्फ़ाज़
- सफलता पर बधाईकिसी की बड़ी जीत पर हौसला बढ़ाइए
- किसी की याद मेंजब दूरी कुछ ज़्यादा ही लंबी लगे
- दोस्त का जन्मदिनयार के लिए हँसी-ख़ुशी वाली दुआएँ
- क्रिसमस की शुभकामनाएँपूरे परिवार के लिए त्योहार की बधाई
लोग यही खोजते हैं
- अकेलेपन की शायरी
- दिल टूटने की शायरी
- पहले प्यार की शायरी
- हमसफ़र पर शायरी
- आगे बढ़ने की शायरी
- किंग एटीट्यूड शायरी
- क्वीन एटीट्यूड शायरी
- बेस्ट फ्रेंड शायरी
- देर रात की याद शायरी
- गहरे जज़्बात की शायरी
- हार न मानने की शायरी
- पत्नी को जन्मदिन की बधाई
- भाई को जन्मदिन की बधाई
- शादी की छोटी शुभकामनाएँ
- पहली सालगिरह की बधाई
- प्रेरणादायक सुप्रभात
कवि, त्योहार और स्टेटस
शेरों के पीछे की आवाज़ें पढ़िए, त्योहार की तैयारी कीजिए और स्टेटस के लिए छोटी पंक्ति उठाइए
शिवमंगल सिंह 'सुमन' के बारे में ज़रूरी सवाल-जवाब
शिवमंगल सिंह 'सुमन' के जीवन, प्रसिद्ध ग़ज़लों और साहित्यिक विरासत से जुड़े प्रामाणिक उत्तर।
कोई अन्य सवाल है? संपर्क करें
शिवमंगल सिंह 'सुमन' कौन थे?
शिवमंगल सिंह 'सुमन' (1915–2002) Jhagarpur, Unnao, Uttar Pradesh, India से ताल्लुक रखने वाले Poet of Revolutionary Optimism & Padmashri के अग्रदूत थे, जिन्हें POET OF 'HUM PANCHI UNMUKT GAGAN KE', VICE-CHANCELLOR OF VIKRAM UNIVERSITY, PADMA BHUSHAN & SAHITYA AKADEMI LAUREATE के रूप में जाना जाता है।
शिवमंगल सिंह 'सुमन' का मुख्य दर्शन व संदेश क्या है?
शिवमंगल सिंह 'सुमन' का मुख्य विचार Freedom as essential life-breath, victory of labor over destruction, progressive socialist optimism, unyielding courage पर केंद्रित है, जो आज भी प्रेरणा का प्रकाशस्तंभ है।
शिवमंगल सिंह 'सुमन' की शायरी और रचनाओं की मुख्य विशेषता क्या है?
उनकी रचनाएँ मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, विरह और गहरे जीवन दर्शन को अत्यंत मार्मिक भाषा में प्रस्तुत करती हैं।
शिवमंगल सिंह 'सुमन' की सबसे प्रसिद्ध रचनाएँ कौन सी हैं?
इनकी प्रमुख कृतियों में कालजयी शेर, ग़ज़लें और नज़्में शामिल हैं जो आज भी विश्वभर के पाठकों द्वारा पढ़ी जाती हैं।
शिवमंगल सिंह 'सुमन' का साहित्यिक योगदान और प्रभाव क्या है?
उन्होंने अपनी भाषा शैली और नए उपमानों के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों के रचनाकारों को गहराई से प्रेरित किया।
क्या Emotion Hub पर शिवमंगल सिंह 'सुमन' के शेर कॉपी और शेयर किए जा सकते हैं?
हाँ, Emotion Hub पर आप एक क्लिक में शेर कॉपी कर सकते हैं और सीधे WhatsApp पर शेयर कर सकते हैं।
क्या शिवमंगल सिंह 'सुमन' के शेरों के एस्थेटिक कार्ड डाउनलोड किए जा सकते हैं?
हाँ, आप 300 DPI वॉलपेपर क्वालिटी में टेक्स्ट के साथ तैयार कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं या डिज़ाइन स्टूडियो में कस्टमाइज़ कर सकते हैं।
शिवमंगल सिंह 'सुमन' का मज़ार या ऐतिहासिक स्थल कहाँ स्थित है?
शिवमंगल सिंह 'सुमन' की स्मृति में समर्पित स्मारक और ऐतिहासिक स्थल साहित्य प्रेमियों के लिए एक पवित्र धरोहर हैं।
तो फिर देर किस बात की?
कोई पंक्ति चुनिए, उसे अपना अंदाज़ दीजिए और भेज दीजिए। आपका पहला कार्ड बस कुछ टैप दूर है।







