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Abdul Rahim Khan-i-Khana (रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना))

अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना मुग़ल काल के प्रमुख सेनापति, विद्वान और अकबर के नवरत्नों में से थे, जिनके नीतिपरक दोहे मानवीय संबंधों और व्यावहारिक ज्ञान का अमूल्य खजाना हैं।

• रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना) • 01/08
आज का शेर
रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना) Portrait
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रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)Mughal Golden Era & Bhakti Kal
प्रमाणित विरासत
अमर बेलि बिन मूल की, प्रति-पालत है ताहि,रहिमन ऐसे प्रभुहिं तजि, खोजत फिरिए काहि।

— रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना) • MUGHAL GOLDEN ERA & BHAKTI KAL

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शेर #1 • कॉस्मिक कलाम
‘अमर बेलि बिन मूल की, प्रति-पालत है ताहि,रहिमन ऐसे प्रभुहिं तजि, खोजत फिरिए काहि।’
— रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)

शेर #1 • कॉस्मिक कलाम

अमर बेलि बिन मूल की, प्रति-पालत है ताहि,

शेर #2 • शाही पन्ना
‘अधम बचन तैं को फल्यो, बैठि तार की छाहिं,रहिमन काम न आवहीं, जे नीरस जग माहिं।’
— रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)

शेर #2 • शाही पन्ना

अधम बचन तैं को फल्यो, बैठि तार की छाहिं,

शेr #3 • रूहानी शाम
‘अनुचित-उचित रहीम लघु, करहिं बड़ेन के जोर,ज्यों ससि के संयोग तैं, पचवत आगि चकोर।’
— रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)

शेr #3 • रूहानी शाम

अनुचित-उचित रहीम लघु, करहिं बड़ेन के जोर,

शेर #4 • ज़मर्रद फ़लसफ़ा
‘अनुचित बचन न मानिए, यदपि गुराइस गाढ़ि,है रहीम रघुनाथ तैं, सुजस भरत को बाढ़ि।’
— रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)

शेर #4 • ज़मर्रद फ़लसफ़ा

अनुचित बचन न मानिए, यदपि गुराइस गाढ़ि,

प्रमाणित शायरी संग्रह

अमर शेर और ग़ज़लें

mashhoor#01
अमर बेलि बिन मूल की, प्रति-पालत है ताहि,रहिमन ऐसे प्रभुहिं तजि, खोजत फिरिए काहि।
Rahim Dohavali • Couplet 1
#Dohavali
dard#02
अधम बचन तैं को फल्यो, बैठि तार की छाहिं,रहिमन काम न आवहीं, जे नीरस जग माहिं।
Rahim Dohavali • Couplet 2
#Dohavali
zindagi#03
अनुचित-उचित रहीम लघु, करहिं बड़ेन के जोर,ज्यों ससि के संयोग तैं, पचवत आगि चकोर।
Rahim Dohavali • Couplet 3
#Dohavali
falsafa#04
अनुचित बचन न मानिए, यदपि गुराइस गाढ़ि,है रहीम रघुनाथ तैं, सुजस भरत को बाढ़ि।
Rahim Dohavali • Couplet 4
#Dohavali
Crimson Velvet
चढ़िबो मैन-तुरंग पर, चलिबो पावक माँहिं,प्रेम-पंथ ऐसो कठिन, सब कोउ निबहत नाहि।

Rahim Dohavali • Couplet 48

#Dohavali— रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)
zindagi#05
अब रहीम मुसकिल परी, गाढ़े दोऊ काम,साँचे तैं तो जग नहीं, झूठे मिलैं न राम।
Rahim Dohavali • Couplet 5
#Dohavali
ishq#06
अमी पियावत मान बिन, रहिमन मोहिं न सुहाइ,प्रेम सहित मरिबो भलो, जो बिष देइ बुलाइ।
Rahim Dohavali • Couplet 6
#Dohavali
falsafa#07
अमृत ऐसे बचन में, रहिमन रिस की गाँस,जैसे मिसिरिहु में मिली, निरस बाँस की फाँस।
Rahim Dohavali • Couplet 7
#Dohavali
zindagi#08
अरज-गरज मानैं नहीं, रहिमन ये जन चारि,रिनियाँ राजा माँगता , काम-आतुरी नारि।
Rahim Dohavali • Couplet 8
#Dohavali
Celestial Mystic
जेहिं रहीम तन-मन दियो, कियो हिए बिच भौन,तासों दुख-सुख कहन की, रही बात अब कौन।

Rahim Dohavali • Couplet 61

#Dohavali— रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)
falsafa#09
असमय परे रहीम कहि, माँगिजात तजि लाज,ज्यों लछिमन माँगन गए, पाराशर के नाज।
Rahim Dohavali • Couplet 9
#Dohavali
mashhoor#10
आए राम रहीम सब, किए मुनिन को भेष,जब जापै बिपदा परै, सो जावै परदेश।
Rahim Dohavali • Couplet 10
#Dohavali
ishq#11
आवत काम रहीम है, गाढ़े बन्धु सनेह,जीरन पेड़हिं के भए, राखत बरहि बरोह।
Rahim Dohavali • Couplet 11
#Dohavali
zindagi#12
आप न काहू काम के, डार पात फल मूर,औरन को रोकत फिरैं, रहिमन कूर बबूर।
Rahim Dohavali • Couplet 12
#Dohavali
Royal Sapphire
जो रहीम मन हाथ है, मनसा कहुँ किन जाहि,जल मैं ज्यों छाया परी, काया भीजति नाहिं।

Rahim Dohavali • Couplet 74

#Dohavali— रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)
falsafa#13
उरग तुरँग नारी नृपति, नीच जाति हथियार,रहिमन इन्है सँभारिए, पलटत लगै न बार।
Rahim Dohavali • Couplet 13
#Dohavali
dard#14
ऊगत जाही भाँति सों, अथवत ताही काँति,त्यों रहीम सुख-दुख सबै, बढ़त एक ही भाँति।
Rahim Dohavali • Couplet 14
#Dohavali
zindagi#15
ओछे काम बड़े करैं, तौ न बड़ाई होइ,ज्यों रहीम हनुमन्त को, गिरिधर कहै न कोइ।
Rahim Dohavali • Couplet 15
#Dohavali
falsafa#16
अंडन बौड़ रहीम कहि, देखि सचिक्कन पान,हस्ती धक्का कुल्हड़िन, सहैं ते तरुवर आन।
Rahim Dohavali • Couplet 16
#Dohavali
Golden Amber
तेहि प्रमान चलिबो भलो, जो सब दिन ठहराइ,उमँड़ि चलै जल पाट तैं, जो रहीम बढ़ि जाइ।

Rahim Dohavali • Couplet 87

#Dohavali— रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)
mashhoor#17
अंजन दीन्हे किरकिरी, सुरमा दियो न जाय,जिन आँखिनसों हरिलख्यो, रहिमन बलि-बलि जाय।
Rahim Dohavali • Couplet 17
#Dohavali
mashhoor#18
कदली सीप भुजंग मुख, स्वाति एक गुन तीन,जैसी संगति बैठिए, तैसोई फल दीन।
Rahim Dohavali • Couplet 18
#Dohavali
falsafa#19
कमला थिर न रहीम कहि, यह जानत सब कोय,पुरुष पुरातन की बधू, क्यों न चंचला होय।
Rahim Dohavali • Couplet 19
#Dohavali
dard#20
कमला थिर न रहीम कहि, लखत अधम जे कोय,प्रभु की सो अपनी कहै, क्यों न फजीहत होय।
Rahim Dohavali • Couplet 20
#Dohavali
Cosmic Violet
धूरि धरत नित सीस पै, कहु रहीम केहि काज,जेहि रज मुनि-पतनी तरी, सो ढूँढ़त गजराज।

Rahim Dohavali • Couplet 100

#Dohavali— रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)
falsafa#21
करत निपुनई गुन बिना, रहिमन गुनी हजूर,मानौं टेरत बिटप चढ़ि, यहि समान हम कूर।
Rahim Dohavali • Couplet 21
#Dohavali
falsafa#22
करम-हीन रहिमन लखौ, धँसो बड़े घर चोर,चिन्तत ही बड़ लाभ कों, जागत ह्वैगो भोर।
Rahim Dohavali • Couplet 22
#Dohavali
ishq#23
कहि रहीम इक दीपतैं, प्रगट सबै द्युति होइ,तनु-सनेह कैले दुरै, दृग-दीपक जरु दोह।
Rahim Dohavali • Couplet 23
#Dohavali
falsafa#24
कहि रहीम धन बढ़ि घटै, जात धनिन की बात,घटै-बढ़ै उनको कहा, घास बेंचि जे खात।
Rahim Dohavali • Couplet 24
#Dohavali
Emerald Radiance
बड़ माया को दोष यह, जो कबहूँ घटि जाइ,तौ रहीम मरिबो भलो, दुख सहि जियै बलाइ।

Rahim Dohavali • Couplet 113

#Dohavali— रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)
ishq#25
कहि रहीम या जगत में, प्रीति गई है टेरि,रहि रहीम नर नीच में, स्वारथ-स्वारथ हेरि।
Rahim Dohavali • Couplet 25
#Dohavali
falsafa#26
कहि रहीम सम्पति सगे, बनत बहुत बहु रीति,बिपति कसौटी जे कसे, तेई साँचे मीत।
Rahim Dohavali • Couplet 26
#Dohavali
falsafa#27
कहु रहीम कैसे बनै, बेर -केर को संग,वे डोलत रस आपने, उनके फाटत अंग।
Rahim Dohavali • Couplet 27
#Dohavali
falsafa#28
कहु रहीम केतिक रही, केती गई बिहाइ,माया ममता मोह परि, अन्त चले पछिताइ।
Rahim Dohavali • Couplet 28
#Dohavali
Sunset Aura
भली भई धर ते छुट्यो, हँस्यो सीस परि खेत,काके-काके नवत हम, अपन पेट के हेत।

Rahim Dohavali • Couplet 126

#Dohavali— रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)
falsafa#29
कहु रहीम उत जायकै, गिरिधारी सों टेरि,राधे दृग-जल-झरन ते, अब ब्रज बूड़त फेरि।
Rahim Dohavali • Couplet 29
#Dohavali
falsafa#30
कहु रहीम कैसे बनै, अनहोनी ह्वै जाइ,मिला रहै औ ना मिलै, तासों कहा बसाइ।
Rahim Dohavali • Couplet 30
#Dohavali
falsafa#31
कागद को-सो पूतरा, सहजहिं में घुलि जाय,रहिमन यह अचरज लखौ, सोऊ खैंचत बाय।
Rahim Dohavali • Couplet 31
#Dohavali
falsafa#32
काज परे कछु और है, काज सरे कछु और,रहिमन भाँवर के भए, नदी सिरावत मौर।
Rahim Dohavali • Couplet 32
#Dohavali
Imperial Gold
मान सहित बिष खायकै, संभु भये जगदीस,बिन आदर अमृत पियो, राहु कटायो सीस।

Rahim Dohavali • Couplet 139

#Dohavali— रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)
zindagi#33
काम कछू आवै नहीं, मोल रहीम न लेइ,बाजू टूटे बाज को, साहब चारा देह।
Rahim Dohavali • Couplet 33
#Dohavali
zindagi#34
काह कामरी पामरी, जाड़ु गए ते काज,रहिमन भूख बुझाइए, कैसो मिलै अनाज।
Rahim Dohavali • Couplet 34
#Dohavali
falsafa#35
काह करब बैकुंठ लै, कलपबृच्छ की छाँह,रहिमन ढाक सुहावनी, जो गल पीतम-बाँह।
Rahim Dohavali • Couplet 35
#Dohavali
falsafa#36
कुटिलन संग रहीम कहि, साधू बचते नाहिं,ज्यों नैना सैना करहिं, उरज उमेठे जाहिं।
Rahim Dohavali • Couplet 36
#Dohavali
Crimson Velvet
यों रहीम दुख-सुख सहत, बड़े लोग सहि साँति,उवत चन्द्र जेहिं भाँतिसों, अथवत वाही भाँति।

Rahim Dohavali • Couplet 152

#Dohavali— रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)
falsafa#37
कोउ रहीम जनि काहु के, द्वार गए पछिताय,सम्पति के सब जात हैं, बिपति सबै लै जाय।
Rahim Dohavali • Couplet 37
#Dohavali
falsafa#38
कौन बड़ाई जलधि मिलि, गंग नाम भो धीम,काकी महिमा नहिं घटी, पर घर गए रहीम।
Rahim Dohavali • Couplet 38
#Dohavali
falsafa#39
खर्चु बढ़ो रोजी घटी, नृपति निठुर मन कीन,रहिमन वे नर का करैं, ज्यों थोरे जल मीन।
Rahim Dohavali • Couplet 39
#Dohavali
ishq#40
खीरा सिर तें काटिए, मलिए लोन लगाइ,रहिमन करुए मुखन को, चहियत यही सजाइ।
Rahim Dohavali • Couplet 40
#Dohavali
Celestial Mystic
रहिमन कबहूँ बड़ेन के, नहीं गर्व को लेस,भार धरे संसार को, तऊ कहावत सेस।

Rahim Dohavali • Couplet 165

#Dohavali— रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)
ishq#41
खैर खून खाँसी खुसी, बैर प्रीति मद पान,रहिमन दाबे ना दबैं, जानत सकल जहान।
Rahim Dohavali • Couplet 41
#Dohavali
ishq#42
खैंचि चढ़नि ढीली ढरनि, कहहु कौन यह प्रीति,आजु काल्हि मोहन गही, बंस-दिया की रीति।
Rahim Dohavali • Couplet 42
#Dohavali
dard#43
गगन चढ़ै फिर क्यों तिरै, रहिमन बहरी बाज,फेरि आइ बंधन परै, पेट अधम के काज।
Rahim Dohavali • Couplet 43
#Dohavali
falsafa#44
गरज आपनी आप सों, कही रहीम न जाइ,जैसे कुल की कुल-बधू, पर घर जात लजाइ।
Rahim Dohavali • Couplet 44
#Dohavali
Royal Sapphire
रहिमन जो तुम कहत हौ, संगत ही गुन होइ,बीच उखारी रामसर , रस काहे ना होइ।

Rahim Dohavali • Couplet 178

#Dohavali— रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)
zindagi#45
गहि सरनागत राम की, भवसागर की नाव,रहिमन जगत-उधार कर, और न कछू उपाव।
Rahim Dohavali • Couplet 45
#Dohavali
falsafa#46
गुन ते लेत रहीम जन, सलिल कूप ते काढ़ि,कूपहुँ ते कहुँ होत हैं, मन काहू के बाढ़ि।
Rahim Dohavali • Couplet 46
#Dohavali
falsafa#47
गुरुता फबै रहीम कहि, फबि आई है जाहि,उर पर कुच नीके लगैं, अनत बतौरी आहि।
Rahim Dohavali • Couplet 47
#Dohavali
ishq#48
चढ़िबो मैन-तुरंग पर, चलिबो पावक माँहिं,प्रेम-पंथ ऐसो कठिन, सब कोउ निबहत नाहि।
Rahim Dohavali • Couplet 48
#Dohavali
Golden Amber
रहिमन बात अगम्य की, कहन-सुनन की नाहिं,जो जानत सो कहत नहिं, कहत सो जानत नाहिं।

Rahim Dohavali • Couplet 191

#Dohavali— रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)
ishq#49
चरन छुए मस्तक छुए, तऊ न छाँड़त पानि,हियौ छुवत प्रभु छोंड़ि दै, कहु रहीम का जानि।
Rahim Dohavali • Couplet 49
#Dohavali
zindagi#50
चारा प्यारा जगत में, छाला हित कर लेइ,ज्यों रहीम आटा लगै, त्यों मृदंग सुरु देइ।
Rahim Dohavali • Couplet 50
#Dohavali
mashhoor#51
छमा बड़ेन को चाहिए, छोटेन को उतपात,का रहीम हरि को घट्यो, जो भृगु मारी लात।
Rahim Dohavali • Couplet 51
#Dohavali
falsafa#52
छोटेन सों सोहैं बड़े, कहि रहीम यहि लेख,सहसन को हय बाँधियत, लै दमरी की मेख।
Rahim Dohavali • Couplet 52
#Dohavali
Cosmic Violet
अधम बचन तैं को फल्यो, बैठि तार की छाहिं,रहिमन काम न आवहीं, जे नीरस जग माहिं।

Rahim Dohavali • Couplet 2

#Dohavali— रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)
falsafa#53
जब लगि बित्त न आपने, तब लगि मित्त न कोइ,रहिमन अम्बुज अम्बु बिन, रबि ताकर रिपु होइ।
Rahim Dohavali • Couplet 53
#Dohavali
falsafa#54
जलहिं मिलाइ रहीम ज्यों, कियो आपु सम छीर,अँगवै आपुहिं आप त्यों, सकल आँच की भीर।
Rahim Dohavali • Couplet 54
#Dohavali
falsafa#55
जहाँ गाँठि तहँ रस नहीं, यह जानत सब कोइ,मड़ए-तर की गाँठि मैं, गाँठि-गाँठि रस होइ।
Rahim Dohavali • Couplet 55
#Dohavali
zindagi#56
जानि अनीतिहिं जो करै, जागत ही रह सोइ,ताहि जगाइ बुझाइबो, रहिमन उचित न होइ।
Rahim Dohavali • Couplet 56
#Dohavali
Emerald Radiance
ओछे काम बड़े करैं, तौ न बड़ाई होइ,ज्यों रहीम हनुमन्त को, गिरिधर कहै न कोइ।

Rahim Dohavali • Couplet 15

#Dohavali— रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)
falsafa#57
जाल परे जल जात बहि, तजि मीनन को मोह,रहिमन मछरी नीर को, तऊ न छाँड़त छोह।
Rahim Dohavali • Couplet 57
#Dohavali
falsafa#58
चित्रकूट में रमि रहे, रहिमन अवध नरेस,जेहि पर बिपदा परत है, सो आवत यहि देस।
Rahim Dohavali • Couplet 58
#Dohavali
falsafa#59
जे अनुचितकारी तिन्है, लगै अंक परिनाम,लखे उरज उर बेधिए, क्यों न होइ मुख स्याम।
Rahim Dohavali • Couplet 59
#Dohavali
falsafa#60
जे गरीब पर हित करैं, ते रहीम बड़ लोग,कहाँ सुदामा बापुरो , कृष्ण-मिताई-जोग।
Rahim Dohavali • Couplet 60
#Dohavali
Sunset Aura
कहु रहीम केतिक रही, केती गई बिहाइ,माया ममता मोह परि, अन्त चले पछिताइ।

Rahim Dohavali • Couplet 28

#Dohavali— रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)
dard#61
जेहिं रहीम तन-मन दियो, कियो हिए बिच भौन,तासों दुख-सुख कहन की, रही बात अब कौन।
Rahim Dohavali • Couplet 61
#Dohavali
falsafa#62
जेहि रहीम चित आपनो, कीन्हो चतुर चकोर,निसि-बासर लागो रहै, कृष्ण-चन्द्र की ओर।
Rahim Dohavali • Couplet 62
#Dohavali
zindagi#63
जेहिं अंचल दीपक दुरो , हन्यो सो ताही गात,रहिमन असमय के परे, मित्र सत्रु ह्वै जात।
Rahim Dohavali • Couplet 63
#Dohavali
falsafa#64
जैसी तुम हमको करी, करी करी जो तीर,बाढ़े दिन के मीत हौ, गाढ़े दिन रघुबीर।
Rahim Dohavali • Couplet 64
#Dohavali
Imperial Gold
खैर खून खाँसी खुसी, बैर प्रीति मद पान,रहिमन दाबे ना दबैं, जानत सकल जहान।

Rahim Dohavali • Couplet 41

#Dohavali— रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)
falsafa#65
जैसी परै सो सहि रहै, कहि रहीम यह देह,धरती ही पर परत सब, सीत घाम अरु मेह।
Rahim Dohavali • Couplet 65
#Dohavali
falsafa#66
जो रहीम ओछो बढ़ै, तौ तितही इतराइ,प्यादे से फरजी भयो, टेढ़ो-टेढ़ो जाइ।
Rahim Dohavali • Couplet 66
#Dohavali
falsafa#67
जो विषया सन्तन तजी, मूढ़ ताहि लपटात,ज्यों नर डारत बमन करि, स्वान स्वाद सों खात।
Rahim Dohavali • Couplet 67
#Dohavali
falsafa#68
जो रहीम दीपक दसा, तिय राखत पट ओट,समय परे ते होति है, वाही पट की चोट।
Rahim Dohavali • Couplet 68
#Dohavali
Crimson Velvet
जलहिं मिलाइ रहीम ज्यों, कियो आपु सम छीर,अँगवै आपुहिं आप त्यों, सकल आँच की भीर।

Rahim Dohavali • Couplet 54

#Dohavali— रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)
falsafa#69
जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग,चन्दन बिष ब्यापत नहीं, लपटे रहत भुजंग।
Rahim Dohavali • Couplet 69
#Dohavali
dard#70
जो बड़ेन को लघु कहौ, नहिं रहीम घटि जाहिं,गिरिधर मुरलीधर कहे, दुख कछु मानत नाहिं।
Rahim Dohavali • Couplet 70
#Dohavali
falsafa#71
जो पुरुषारथ ते कहूँ, सम्पति मिलति रहीम,पेट लागि बैराट घर, तपत रसोंई भीम।
Rahim Dohavali • Couplet 71
#Dohavali
falsafa#72
जो रहीम गति दीपकी, कुल कपूत की सोइ,बारे उजियारो लगै, बढ़े अँधेरो होइ।
Rahim Dohavali • Couplet 72
#Dohavali
Celestial Mystic
जो विषया सन्तन तजी, मूढ़ ताहि लपटात,ज्यों नर डारत बमन करि, स्वान स्वाद सों खात।

Rahim Dohavali • Couplet 67

#Dohavali— रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)
mashhoor#73
जो रहीम होती कहूँ, प्रभु गति अपने हाथ,तौ को धौं केहि मानतो, आप बड़ाई साथ।
Rahim Dohavali • Couplet 73
#Dohavali
falsafa#74
जो रहीम मन हाथ है, मनसा कहुँ किन जाहि,जल मैं ज्यों छाया परी, काया भीजति नाहिं।
Rahim Dohavali • Couplet 74
#Dohavali
falsafa#75
जो रहीम बिधि बड़ किए, को कहि दूषन काढ़ि,चन्द्र दूबरो कूबरो, तऊ नखत तैं बाढ़ि।
Rahim Dohavali • Couplet 75
#Dohavali
dard#76
जो रहीम करिबो हुतो, ब्रज को यही हवाल,तौ कत मातहिं दुखदियो, गिरिवर-धरि गोपाल।
Rahim Dohavali • Couplet 76
#Dohavali
Royal Sapphire
जो घरही मैं घुसि रहैं, कदली सुवन सुडील,तो रहीम तिनते भले, पथके अपत करील।

Rahim Dohavali • Couplet 80

#Dohavali— रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)
falsafa#77
जो नृप बासर निसि कहै, तौ कचपची देखाउ,रहिमन जो रहिबो चहौ, कहौ उसी को दाँउ।
Rahim Dohavali • Couplet 77
#Dohavali
falsafa#78
जो रहीम पग तर परै, रगरि नाक अरु सीस,निठुरा आगे रोइबो, आँस गारिबो खीस।
Rahim Dohavali • Couplet 78
#Dohavali
zindagi#79
जो रहीम कोटिन मिलै, धिक जीवन जग माहिं,आदर घटो नरेस ढिग, बसे रहे कछु नाहिं।
Rahim Dohavali • Couplet 79
#Dohavali
falsafa#80
जो घरही मैं घुसि रहैं, कदली सुवन सुडील,तो रहीम तिनते भले, पथके अपत करील।
Rahim Dohavali • Couplet 80
#Dohavali
Golden Amber
दुर दिन परे रहीम कहि, भूलत सब पहिंचानि,सोच नहीं बित-हानि को, जो न होइ हित-हानि।

Rahim Dohavali • Couplet 93

#Dohavali— रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)
falsafa#81
जो रहीम गति दीप की, कुल सपूत की सोइ,बड़ो उजेरो तेहि रहे, बढ़े अँधेरो होइ।
Rahim Dohavali • Couplet 81
#Dohavali
falsafa#82
ज्यों नाचति कठपूतरी, करम नचावत साथ,अपनो हाथ रहीम त्यों, नहीं आपने हाथ।
Rahim Dohavali • Couplet 82
#Dohavali
falsafa#83
टूटे सुजन मनाइए, जो टूटैं सौ बार,रहिमन फिरि-फिरि पोहिए, टूटे मुकता हार।
Rahim Dohavali • Couplet 83
#Dohavali
falsafa#84
तनु रहीम है कर्म-बस, मन राखो वहि ओर,जल में उलटी नाव ज्यों, खैंचत गुन के जोर।
Rahim Dohavali • Couplet 84
#Dohavali
Cosmic Violet
पन्नग-बेलि पतिब्रता, रति-सम सुनहु सुजान,हिम रहीम बेली दही, सत योजन दहियान।

Rahim Dohavali • Couplet 106

#Dohavali— रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)
zindagi#85
तबहीं लग जीबो भलो, दीबो परै न धीम,बिन दीबो जीबो जगत, हमहिं न रुचै रहीम।
Rahim Dohavali • Couplet 85
#Dohavali
falsafa#86
तरुवर फल नहिं खात हैं, सरवर पियहिं न पान,कहि रहीम पर काज हित, सम्पति सँचाहिं सुजान।
Rahim Dohavali • Couplet 86
#Dohavali
falsafa#87
तेहि प्रमान चलिबो भलो, जो सब दिन ठहराइ,उमँड़ि चलै जल पाट तैं, जो रहीम बढ़ि जाइ।
Rahim Dohavali • Couplet 87
#Dohavali
falsafa#88
दादुर मोर किसान मन, लग्यो रहै घन माहिं,पै रहीम चातक-रटनि, सरवरि को कोउ नाहिं।
Rahim Dohavali • Couplet 88
#Dohavali
Emerald Radiance
बरु रहीम कानन बसिय, असन करिय फल तोय,बंधु-मध्य गति दीन ह्वै, बसिबो उचित न होय।

Rahim Dohavali • Couplet 119

#Dohavali— रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)
zindagi#89
दिव्य दीनता के रसहिं, का जानै जग अन्धु,भली बिचारी दीनता, दीनबन्धु-से बन्धु।
Rahim Dohavali • Couplet 89
#Dohavali
mashhoor#90
दीन सबन को लखत है, दीनहिं लखै न कोइ,जो रहीम दीनहिं लखै, दीनबन्धु सम होइ।
Rahim Dohavali • Couplet 90
#Dohavali
dard#91
दुख नर सुनि हाँसी करैं, धरैं रहीम न धीर,कही सुनैं सुनि-सुनि करैं, ऐसे वे रघुवीर।
Rahim Dohavali • Couplet 91
#Dohavali
zindagi#92
दुरदिन परे रहीम जग, दुरथल जैयत भागि,ठाढ़े हूजत घूर पर, जब घर लागति आगि।
Rahim Dohavali • Couplet 92
#Dohavali
Sunset Aura
मन-सों कहाँ रहीम प्रभु, दृग-सों कहाँ देवान,दृग देखैं जेहि आदरैं, मन तेहि हाथ बिकान।

Rahim Dohavali • Couplet 132

#Dohavali— रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)
falsafa#93
दुर दिन परे रहीम कहि, भूलत सब पहिंचानि,सोच नहीं बित-हानि को, जो न होइ हित-हानि।
Rahim Dohavali • Couplet 93
#Dohavali
falsafa#94
दोहा दीरघ अर्थ के, आखर थोरे आहिं,ज्यों रहीम नट कुण्डली, सिमिटि कूदि कढ़ि जाहिं।
Rahim Dohavali • Couplet 94
#Dohavali
falsafa#95
देनहार कोउ और है, भेजत सो दिन-रैन,लोग भरम हम पै धरैं, याते नीचे नैन।
Rahim Dohavali • Couplet 95
#Dohavali
falsafa#96
धन थोरो इज्जति बड़ी, कहु रहीम का बात,जैसे कुल की कुल-बधू, चिथरन माहिं समात।
Rahim Dohavali • Couplet 96
#Dohavali
Imperial Gold
यह रहीम मानै नहीं, दिलते नवा जो होइ,चिन्ता जोर कमान के, नए ते औगुन होइ।

Rahim Dohavali • Couplet 145

#Dohavali— रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)
falsafa#97
धन दारा अरु सुतन मैं, रहत लगाए चित्त,क्यों रहीम खोजत नहीं, गाढ़े दिनको मित्त।
Rahim Dohavali • Couplet 97
#Dohavali
falsafa#98
धनि रहीम गति मीन की, जल बिछुरत जिय जाय,जियत कंज तजि अन्त बसि, कहा भौंर को भाय।
Rahim Dohavali • Couplet 98
#Dohavali
zindagi#99
धनि रहीम जल पंक को, लघु जिय पियत अघाइ,उदधि बड़ाई कौन है, जगत पियासो जाइ।
Rahim Dohavali • Couplet 99
#Dohavali
falsafa#100
धूरि धरत नित सीस पै, कहु रहीम केहि काज,जेहि रज मुनि-पतनी तरी, सो ढूँढ़त गजराज।
Rahim Dohavali • Couplet 100
#Dohavali
Crimson Velvet
रहिमन जा उर निसि परै, ता दिन डर सब कोय,पल-पल करिकै लागतो, देखु कहाँ धौं होय।

Rahim Dohavali • Couplet 158

#Dohavali— रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)
falsafa#101
नहिं रहीम कछु रूप गुन, नहिं मृगया अनुराग,देसी स्वान जो राखिए, भ्रमत भूख ही लाग।
Rahim Dohavali • Couplet 101
#Dohavali
साहित्यिक परिचय एवं आलोचनात्मक सम्मान

रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना) (Abdul Rahim Khan-i-Khana) — साहित्यिक महानायक एवं कालजयी विरासत

अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना मुग़ल काल के प्रमुख सेनापति, विद्वान और अकबर के नवरत्नों में से थे, जिनके नीतिपरक दोहे मानवीय संबंधों और व्यावहारिक ज्ञान का अमूल्य खजाना हैं।

साहित्यिक विधा और मौलिक शैली

रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना) ने भाषा और उपमानों की सीमाओं को पार कर ऐसी संजीदा शैली विकसित की, जो सीधे पाठक के अंतर्मन से संवाद करती है।

ऐतिहासिक युग एवं विश्व सम्मान

Mughal Golden Era & Bhakti Kal के महान रचनाकार के रूप में सम्मानित, रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना) की कृतियाँ आज कई अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में सराही और अनुवादित की जाती हैं।

दार्शनिक गहराई और आत्मिक अनुभूति

प्रेम, विरह, मानवीय कमज़ोरी और जीवन के गूढ़ रहस्यों को रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना) ने अपनी शायरी में अमर सत्य की तरह संजोया है।

रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना) की शायरी पीढ़ियों के दिलों को क्यों छूती है?

कॉलेज के युवाओं से लेकर दशकों पुरानी यादों में खोए बुज़ुर्गों तक, रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना) हर पीढ़ी को जोड़ते हैं। दिल टूटने पर उनके शेर कड़वाहट नहीं घोलते, बल्कि मानवीय भावना को एक नाज़ुक, पवित्र अनुभूति की तरह स्वीकार करते हैं। आज भी सोशल मीडिया, शास्त्रीय संगीत और मुशायरों में इनके शेर हर रोज़ लाखों दिलों की धड़कन बनते हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना) के बारे में ज़रूरी सवाल-जवाब

रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना) के जीवन, प्रसिद्ध ग़ज़लों और साहित्यिक विरासत से जुड़े प्रामाणिक उत्तर।

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भारतीय इतिहास में रहीम कौन थे?

रहीम अकबर के नवरत्नों में से एक सेनापति और उच्च कोटि के नीतिपरक दोहाकार थे।

रहीम का सबसे प्रसिद्ध दोहा कौन सा है?

"रहिमन धागा प्रेम का मत तोड़ो चटकाय" उनका सर्वाधिक लोकप्रिय दोहा है।

रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना) की शायरी और रचनाओं की मुख्य विशेषता क्या है?

उनकी रचनाएँ मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, विरह और गहरे जीवन दर्शन को अत्यंत मार्मिक भाषा में प्रस्तुत करती हैं।

रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना) की सबसे प्रसिद्ध रचनाएँ कौन सी हैं?

इनकी प्रमुख कृतियों में कालजयी शेर, ग़ज़लें और नज़्में शामिल हैं जो आज भी विश्वभर के पाठकों द्वारा पढ़ी जाती हैं।

रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना) का साहित्यिक योगदान और प्रभाव क्या है?

उन्होंने अपनी भाषा शैली और नए उपमानों के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों के रचनाकारों को गहराई से प्रेरित किया।

क्या Emotion Hub पर रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना) के शेर कॉपी और शेयर किए जा सकते हैं?

हाँ, Emotion Hub पर आप एक क्लिक में शेर कॉपी कर सकते हैं और सीधे WhatsApp पर शेयर कर सकते हैं।

क्या रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना) के शेरों के एस्थेटिक कार्ड डाउनलोड किए जा सकते हैं?

हाँ, आप 300 DPI वॉलपेपर क्वालिटी में टेक्स्ट के साथ तैयार कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं या डिज़ाइन स्टूडियो में कस्टमाइज़ कर सकते हैं।

रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना) का मज़ार या ऐतिहासिक स्थल कहाँ स्थित है?

रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना) की स्मृति में समर्पित स्मारक और ऐतिहासिक स्थल साहित्य प्रेमियों के लिए एक पवित्र धरोहर हैं।

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