ज्ञान का पावन भोर हुआ जब प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,दीन-बंधु का सहारा बन के रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।
Paash (पाश)
पाश (1950–1988) Legendary Revolutionary Punjabi Poet के शीर्ष व्यक्तित्व थे, जिनकी प्रमुख कृतियों और विचारों ने समाज को नई दिशा दी।
डाउनलोड करें पाश के एस्थेटिक स्टोरी कार्ड्स

‘ज्ञान का पावन भोर हुआ जब प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,दीन-बंधु का सहारा बन के रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।’— पाश
शेर #1 • कॉस्मिक कलाम
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,

‘मन मंदिर में जो दीप जले सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,प्रेम की डोर में बंध गया जो उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।’— पाश
शेर #2 • शाही पन्ना
मन मंदिर में जो दीप जले सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,

‘मन मंदिर में जो दीप जले भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,अहंकार का त्याग किया जिसने रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।’— पाश
शेr #3 • रूहानी शाम
मन मंदिर में जो दीप जले भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,
अमर शेर और ग़ज़लें
मन मंदिर में जो दीप जले सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,प्रेम की डोर में बंध गया जो उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।
मन मंदिर में जो दीप जले भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,अहंकार का त्याग किया जिसने रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।
हरि सुमिरन में जिसका चित्त का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,जीवन का यह पावन सूत्र जो उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।

प्रेम रंग में जो रंग गया से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,प्रेम सुधा का रस जो चखा और मिलन की भोर हुई तो आत्मा का परमात्मा से एकात्म हो गया।
Prem rang mein jo rang gaya se roop salonaa roma-rom mein ram gaya preetam ka paavan konaa,Prem sudhaa ka ras jo chakhaa aur milan ki bhor hui to aatmaa ka paramaatmaa se ekaatm ho gaya.
दीन-दुखी का आसरा बनकर सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,वाणी में जिसके मिठास घुली व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,अहंकार का त्याग किया जिसने जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।
कर्म की खेती जो जन बोवे सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,परहित में जिसने जीवन सौंपा अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।
प्रेम की गंगा अंतर में बहे अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,सत्य वचन जो मुख से बोले उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।

प्रेम का प्याला जिसने पिया वो प्रियतम का नाम सुना अनहद नाद का संगीत अंतर में गूँजने लगा,प्रेम की मस्ती में जो झूमा लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
Prem ka pyaalaa jisane piyaa wo priyatam ka naam sunaa anahad naad ka sangeet antar mein goonjane lagaa,Prem ki mastee mein jo jhoomaa liyaa usane saare vedon aur shaastron ka saar sahaj mein paa liyaa.
सत्य के पावन पथ पर जिसने तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,जीवन का यह पावन सूत्र जो के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।
धरती की छाती पर जिसने सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,मन के मैल को जिसने धोया उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।
माटी का यह देह बना है जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,माटी का चोला पाकर जिसने मानव धर्म निभाया उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है।
नाम और दौलत तो माटी का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,हरि की कृपा का पावन साया लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।

साँसों की सरगम में घुल गया दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,प्रेम नगर का वासी बनकर अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।
Saanson ki saragam mein ghul gaya dil ka taar juraa maun mein bhi har ek dharakan teri pukaar banee,Prem nagar ka vaasee banakar apanee sudh bisaraaee usane janama-maran ke bandhan ko sadaa ke lie tor diyaa.
मन के निर्मल दर्पण में जब घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,हृदय में जिसके दया बसी है उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।
नाम और दौलत तो माटी माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,मोह-निशा से जो जन जागा उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।
प्रेम की गंगा अंतर में बहे सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,हरि की कृपा का पावन साया उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,मोह-निशा से जो जन जागा उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।

ज़ख़्म वो नहीं जो जिस्म हैं कितने सुंदर सपने बेबस होकर देखा हमने रूठ गए सब अपने,जब सबने मुँह फेर लिया तपस्या का ऐसा दीप जला जिसने आत्मा को अमर प्रकाश से भर दिया।
Zakhm wo nahi jo jism hain kitane sundar sapane bebas hokar dekhaa hamane rooth gaye sab apane,Jab sabane munh pher liyaa tapasyaa ka aisaa deep jalaa jisane aatmaa ko amar prakaash se bhar diyaa.
दीन-दुखी का आसरा बनकर का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,हरि की कृपा का पावन साया अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।
प्रेम की गंगा अंतर में बहे का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,मोह-निशा से जो जन जागा वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।
मन के निर्मल दर्पण में जब जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।
मन मंदिर में जो दीप जले सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,अमर नाम जग में उसी का अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।

दर्द की रात में जब कोई भटके सूने वन में जिसका कोई घोंसला न बचा डाल-डाल रोता फिरे,अकेलेपन की इस राह पर सब कुछ उजाड़ दिया तब टूटे तिनकों से ही नया घोंसला बनाना पड़ा।
Dard ki raat mein jab koee bhatake soone van mein jisakaa koee ghonsalaa na bachaa daala-daal rotaa phire,Akelepan ki is raah par sab kuchh ujaar diyaa tab toote tinakon se hi naya ghonsalaa banaanaa paraa.
कर्म की खेती जो जन बोवे भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,धैर्य का दामन जिसने थामे मानव धर्म निभाया उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है।
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,जीवन का यह पावन सूत्र जो उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।
अहंकार की दीवारें जब जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,सदाचार की पावन वेदी पर जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।
अहंकार की दीवारें जब स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,धैर्य का दामन जिसने थामे निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।

जिसके दिल पर बीत रही चीख़ छुपी है भारी किसको अपना हाल सुनाएँ दुनिया मतलबी सारी,जब अपनों ने ही दिए ज़ख़्म सब कुछ उजाड़ दिया तब टूटे तिनकों से ही नया घोंसला बनाना पड़ा।
Jisake dil par beet rahi cheekh chhupee hai bhaaree kisako apanaa haal sunaaen duniya matalabee saari,Jab apanon ne hi diye zakhm sab kuchh ujaar diyaa tab toote tinakon se hi naya ghonsalaa banaanaa paraa.
वाणी वही जो घाव भरे और सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,माटी का चोला पाकर जिसने अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।
सत्य का दीप जब जलता है अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,मन के मैल को जिसने धोया जिसने डुबकी लगाई उसके जन्म-जन्मांतर के सब पाप धुल जाते हैं।
संतन की संगति में आकर सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,हृदय में जिसके दया बसी है अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,मोह-निशा से जो जन जागा अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।

नेकी की राह पे जो जन अगर उठने का हौसला हो हर ठोकर इंसान को चलने का नया हुनर सिखाती है,समय की अमूल्य बूँदों को मनुष्य को देव बना देता है दुर्जन भी उसकी संगति से सज्जन हो जाते हैं।
Nekee ki raah pe jo jan agar uthane ka hausalaa ho har thokar insaan ko chalane ka naya hunar sikhaatee hai,Samay ki amooly boondon ko manushy ko dev banaa detaa hai durjan bhi usakee sangati se sajjan ho jaate hain.
माटी का यह देह बना है प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,हृदय में जिसके दया बसी है उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।
नदिया की धारा बहती जावे सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,अमर नाम जग में उसी का के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।
दीन-दुखी का आसरा बनकर सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,सत्संग की निर्मल गंगा में मानव धर्म निभाया उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है।
नाम और दौलत तो माटी जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,शांति और संतोष का धन जो उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।

ठोकर खाकर जो संभलता जिसने मानव धर्म सँभाला उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है,मेहनत और लगन से जिसने जो आगे बढ़ा उसने असंभव को भी संभव करके दुनिया को दिखा दिया।
Thokar khaakar jo sanbhalataa jisane maanav dharm sanbhaalaa usakaa janam saphal jag jaane amar dhaam ko jaataa hai,Mehanat aur lagan se jisane jo aage barhaa usane asanbhav ko bhi sanbhav karake duniya ko dikhaa diyaa.
धरती की छाती पर जिसने निर्भय पाँव धरे काल की कठिन चाल भी उसका कुछ न बिगाड़ सके,दीन-बंधु का सहारा बन के जिसने डुबकी लगाई उसके जन्म-जन्मांतर के सब पाप धुल जाते हैं।
दीन-दुखी का आसरा बनकर सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,माटी का चोला पाकर जिसने उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,हृदय में जिसके दया बसी है रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।
मन के निर्मल दर्पण में जब अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,सत्कर्मों की अमिट कमाई ही उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।

चंद साँसों की मोहलत में जो अपने साथ सँजोए रखेगा वही परलोक में सच्चा संगी और साथी बनेगा,हृदय में जिसके दया और करुणा उसने सब कुछ पा लिया नम्रता ही सबसे बड़ा आभूषण और गुण है।
Chand saanson ki mohalat mein jo apane saath sanjoe rakhegaa vahee paralok mein sachchaa sangee aur saathee banegaa,Hriday mein jisake dayaa aur karunaa usane sab kuchh paa liyaa namrataa hi sabase baraa aabhooshan aur gun hai.
नाम और दौलत तो माटी रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,नेकी की राह पे जो जन जिसने डुबकी लगाई उसके जन्म-जन्मांतर के सब पाप धुल जाते हैं।
धरती की छाती पर जिसने सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।
सत्य के पावन पथ पर जिसने तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु परलोक में संग जाएगी बाकी सब माया-मोह यहीं धरा रह जाएगा।
साधु-संगत की छाया में जो सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।

अंतर्मन के सन्नाटे में जब परमात्मा की आवाज़ सुनाई दे वही सच्चा उपदेश है जो मोक्ष का द्वार खोलता है,परमानंद का यह अलौकिक रस समस्त चराचर जगत लीन है जो इसे जान लेता है वह अमरता को प्राप्त होता है।
Antarman ke sannaate mein jab paramaatmaa ki aavaaz sunaaee de vahee sachchaa upadesh hai jo moksh ka dvaar kholataa hai,Paramaanand ka yeh alaukik ras samast charaachar jagat leen hai jo ise jaan letaa hai woh amarataa ko praapt hotaa hai.
सत्य का दीप जब जलता है अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
नैनों के दर्पण में बसा जब रैन-दिना मतवारे अंग-अंग में ज्योति जलाई प्रेम के दीपक बारे,मन मंदिर की पावन आरती अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।
मन की वीणा बज उठी जब दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,मन मंदिर की पावन आरती जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
प्रेम की पावन वेदी पर जिसने जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,अंतर में जब प्रेम समाया सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।

मन की चंचलता को जिसने और ज्ञान-भोर मुस्काए अमृत रस की बूँदें अंतर घट में बरसने लगती हैं,जब मन की सब तरंगें शांत हुईं समस्त चराचर जगत लीन है जो इसे जान लेता है वह अमरता को प्राप्त होता है।
Man ki chanchalataa ko jisane aur jnyaana-bhor muskaae amrit ras ki boonden antar ghat mein barasane lagatee hain,Jab man ki sab tarangen shaant hueen samast charaachar jagat leen hai jo ise jaan letaa hai woh amarataa ko praapt hotaa hai.
फासले मिट गए जब दिल से जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,मन मंदिर की पावन आरती सदा प्रीतम का वास रहे वहाँ किसी दूसरे का प्रवेश कभी न हो।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,प्रियतम के रंग में रंग कर संसार की सुध-बुध बिसराई केवल प्रीतम की सूरत याद रही।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,प्रेम के इस पावन तीरथ में जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
प्रेम रंग में जो रंग गया से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,प्रेम सुधा का रस जो चखा और मिलन की भोर हुई तो आत्मा का परमात्मा से एकात्म हो गया।

संतन की संगति में आकर है माटी में मिल जाना सत्कर्मों की पूँजी ही संग तुम्हारे जाना है,जब काल की सीमाएँ समाप्त हुईं उसी को प्राप्त होता है जो सुख-दुःख, लाभ-हानि में सदा समभाव रहता है।
Santan ki sangati mein aakar hai maatee mein mil jaanaa satkarmon ki poonjee hi sang tumhaare jaanaa hai,Jab kaal ki seemaaen samaapt hueen usee ko praapt hotaa hai jo sukha-duhkh, laabha-haani mein sadaa samabhaav rahataa hai.
फासले मिट गए जब दिल से दो न समाहिं जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाहिं,प्रियतम की चाहत में जिसने जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
इश्क़ की राह अनोखी बंदे डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,प्रेम नगर का वासी बनकर उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।
अंतर घट में जब ज्योति जगी से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,प्रियतम के रंग में रंग कर उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
तेरी आँखों की झील में जो बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,प्रेम की मस्ती में जो झूमा अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।

मन मंदिर में जो दीप जले सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,प्रेम की डोर में बंध गया जो उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।
Man mandir mein jo deep jale saty ka beej ugaayaa usakee keerti amar rahegee jab tak gagan mein chhaayaa,Prem ki dor mein bandh gaya jo usane paramaanand paayaa ahankaar mitate hi antar ka sachchaa sukh milataa hai.
रोम-रोम में रम गया प्रीतम अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,मन मंदिर की पावन आरती कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो दो न समाहिं जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाहिं,जिसने प्रेम का मर्म समझ उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
प्रेम रंग में जो रंग गया अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,मन मंदिर की पावन आरती अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।
तेरे मिलन की आस में बीते दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,प्रेम की पावन ज्योति जगाई मोती चमका प्रेम की सीपी में अनमोल ज्ञान का रत्न बन गया।

प्रेम की गंगा अंतर में बहे सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,हरि की कृपा का पावन साया उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।
Prem ki gangaa antar mein bahe saty ka roop samaayaa jeevan ki har ulajhan ka sahaj samaadhaan paayaa,Hari ki kripaa ka paavan saaya usane alaukik bhor dekhaa jahaan keval saty aur aanand ka prakaash hai.
मन की वीणा बज उठी जब तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,आँखों के रस्ते दिल में उतरा प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,प्रियतम का अनुराग ही जिसका कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।
नैन मिले जब नैनन से तब दो न समाहिं जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाहिं,प्रियतम का अनुराग ही जिसका संसार की सुध-बुध बिसराई केवल प्रीतम की सूरत याद रही।
इश्क़ का सौदा जिसने किया वो का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,प्रियतम की चाहत में जिसने तो बाहर का सारा बैर-भाव और द्वेष पल भर में समाप्त हो गया।

सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,मोह-निशा से जो जन जागा अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।
Satkarmon ki amit jyoti jab bharam ka pardaa tore amrit ras ki varshaa hove jab moh mukh more,Moha-nishaa se jo jan jaagaa ajnyaan andhera mitaa ke woh sansaar mein jnyaan ka amar prakaash phailaa jaataa hai.
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो प्रियतम का नाम सुना अनहद नाद का संगीत अंतर में गूँजने लगा,प्रेम की मस्ती में जो झूमा लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,जब से नैना रूप में उलझे उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।
प्रेम की पावन वेदी पर जिसने जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,प्रियतम के चरणों में जिसने लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
नैनों के दर्पण में बसा जब दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,विरह की रात जब ढलने लगी और मिलन की भोर हुई तो आत्मा का परमात्मा से एकात्म हो गया।

सत्य का दीप जब जलता है अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
Saty ka deep jab jalataa hai amrit ras ki varshaa bhaee janma-maran ka kathin pheraa sahaj hi kat gaya,Aatma-samarpan kiyaa jisane prabhu vyarth nahi jaatee woh sadiyon tak bhatake huon ko sahi raah dikhaatee hai.
तेरे रूप की पावन झांकी हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,आँखों के रस्ते दिल में उतरा जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।
नैनों के दर्पण में बसा जब दो न समाहिं जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाहिं,जब से नैना रूप में उलझे जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।
प्रियतम की याद में जो नैना डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,आँखों के रस्ते दिल में उतरा नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,प्रेम की पावन ज्योति जगाई सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।

प्रेम का प्याला जिसने पिया वो दो न समाहिं जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाहिं,जिसने प्रेम का मर्म समझ उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
Prem ka pyaalaa jisane piyaa wo do na samaahin jab main tha tab hari nahi ab hari hain main naahin,Jisane prem ka marm samajh use indr ka amrit bhi pheekaa lage woh to prem ras mein tript ho gaya.
नैनन आगे तू ही तू नाचे रैन-दिना मतवारे अंग-अंग में ज्योति जलाई प्रेम के दीपक बारे,जिसने अपना सब कुछ सौंपा मन ऐसा निर्मल हुआ कि दर्पण भी उसके सामने लजा जाए।
इश्क़ की राह अनोखी बंदे अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,प्रेम सुधा का रस जो चखा जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।
नैनों के दर्पण में बसा जब प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,प्रेम सुधा का रस जो चखा लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
प्रेम गली अति साँकरी जामें अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,प्रियतम की चाहत में जिसने मोती चमका प्रेम की सीपी में अनमोल ज्ञान का रत्न बन गया।

प्रियतम की याद में जो नैना डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,आँखों के रस्ते दिल में उतरा नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।
Priyatam ki yaad mein jo nainaa doob gaya ik baar use kinaare ki koee aarazoo baaqee na rahi,Aankhon ke raste dil mein utaraa naam likhaa hai woh har shvaas mein apane priyatam ka hi gun gaataa hai.
तेरे मिलन की आस में बीते तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,मन मंदिर की पावन आरती उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
साँसों की सरगम में घुल गया दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,प्रेम नगर का वासी बनकर अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।
प्रेम की डोरी बाँध लई जब तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,प्रेम के इस पावन तीरथ में सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।
प्रेम की पावन वेदी पर जिसने रैन-दिना मतवारे अंग-अंग में ज्योति जलाई प्रेम के दीपक बारे,आँखों के रस्ते दिल में उतरा संसार की सुध-बुध बिसराई केवल प्रीतम की सूरत याद रही।

प्रेम की पावन वेदी पर जिसने बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,प्रेम की मस्ती में जो झूमा संसार की सुध-बुध बिसराई केवल प्रीतम की सूरत याद रही।
Prem ki paavan vedee par jisane banaa yeh jeev prem ki alaukik chamak se dason dishaaen jagamagaa utheen,Prem ki mastee mein jo jhoomaa sansaar ki sudha-budh bisaraaee keval preetam ki soorat yaad rahi.
प्रेम बिना सब सूना जग में संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,मन मंदिर की पावन आरती जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,प्रेम की इस पावन धारा में अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।
मन की वीणा बज उठी जब अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,आँखों के रस्ते दिल में उतरा जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
प्रेम की पावन वेदी पर जिसने बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,प्रेम की मस्ती में जो झूमा संसार की सुध-बुध बिसराई केवल प्रीतम की सूरत याद रही।

जिसके दिल पर बीत रही यह ख़ामोशी बख़्शी वरना कभी हमारी हँसी भी बहारों को जगाती थी,ग़म के मारों की बस्ती में तब विश्वास का एक नन्हा तारा चमका जिसने डूबने से बचा लिया।
Jisake dil par beet rahi yeh khaamoshi bakhshee varanaa kabhee hamaaree hansi bhi bahaaron ko jagaatee thi,Gham ke maaron ki bastee mein tab vishvaas ka ek nanhaa taaraa chamakaa jisane doobane se bachaa liyaa.
नैनन आगे तू ही तू नाचे तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,जिसने अपना सब कुछ सौंपा सदा प्रीतम का वास रहे वहाँ किसी दूसरे का प्रवेश कभी न हो।
तेरे रूप की पावन झांकी रैन-दिना मतवारे अंग-अंग में ज्योति जलाई प्रेम के दीपक बारे,अंतर में जब प्रेम समाया नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।
वक़्त के थपेड़ों ने हमें अंतर घट को तोड़े अकेलेपन की धूप में जब साया भी मुँह मोड़े,ग़म की इस लंबी यात्रा में तब अंतर्यामी प्रभु ने बाहँ पकड़ी और इस संकट से उबार लिया।
मन के कोने में सिमटी हमदर्द न मिला तकिये को सीने से लगा के सारी रात रोते रहे,जब कोई चारासाज़ न मिला अर्श तक पहुँची जहाँ ईश्वर ने अपने बंदे के आँसू पोंछ कर शांति दी।

अकेलेपन की धूप जब साए सोई जाने पीर पराई दुनिया तो तमाशा देखती है कोई दर्द नहीं बाँटता,जब नयनों के सब आँसू सूखे ज़माने ने हँसी उड़ाई मगर यही फफोले कल ज्ञान का कमल बनेंगे।
Akelepan ki dhoop jab saae soee jaane peer paraaee duniya to tamaashaa dekhatee hai koee dard nahi baantataa,Jab nayanon ke sab aansoo sookhe zamaane ne hansi uraaee magar yahee phaphole kal jnyaan ka kamal banenge.
अकेलेपन की धूप जब साए किनारा कहीं न सूझे प्रभु बिना इस संकट में कोई पार लगाने वाला न दिखे,ग़म की इस लंबी यात्रा में तब विश्वास का एक नन्हा तारा चमका जिसने डूबने से बचा लिया।
दिल का आईना जब टूटा दूजा भेद न पावे जो इस आग में जला वही इसका दर्द जान पावे,जब कोई चारासाज़ न मिला कोई खुशी का गीत नहीं गाता यहाँ तो हर साँस में विरह की रागिनी बजती है।
ज़ख़्म वो नहीं जो जिस्म हैं कितने सुंदर सपने बेबस होकर देखा हमने रूठ गए सब अपने,जब सबने मुँह फेर लिया तपस्या का ऐसा दीप जला जिसने आत्मा को अमर प्रकाश से भर दिया।
ग़म का मारा पंछी जैसे जब साया भी साथ न दे तब धीरज ही मनुष्य का एकमात्र सच्चा साथी बने,जब अपनों ने ही दिए ज़ख़्म तब परमात्मा ही सबसे बड़ा वैद्य बना और उसने रूह के ज़ख़्म भर दिए।

आँखों में जो नमी है वो हैं कितने सुंदर सपने बेबस होकर देखा हमने रूठ गए सब अपने,जब अपनों ने ही दिए ज़ख़्म सब कुछ उजाड़ दिया तब टूटे तिनकों से ही नया घोंसला बनाना पड़ा।
Aankhon mein jo namee hai wo hain kitane sundar sapane bebas hokar dekhaa hamane rooth gaye sab apane,Jab apanon ne hi diye zakhm sab kuchh ujaar diyaa tab toote tinakon se hi naya ghonsalaa banaanaa paraa.
नैनों से जो नीर बहे भटके सूने वन में जिसका कोई घोंसला न बचा डाल-डाल रोता फिरे,जीवन के इस कठिन मोड़ पर तब भीतर ज्ञान का अमृत झरना फूटा जिसने जीवन को तृप्त कर दिया।
नैनों से जो नीर बहे दिन-रैन तपे अंगार की तरह कोई शीतल बूँद न बरसे जो मन को ठंडक दे,इस दर्द भरे दिल की सदा तब परमात्मा ही सबसे बड़ा वैद्य बना और उसने रूह के ज़ख़्म भर दिए।
टूटे दिल की ख़ामोशी में दिन-रैन तपे अंगार की तरह कोई शीतल बूँद न बरसे जो मन को ठंडक दे,टूटे दिल की इस वीणा से केवल वही समझ सकता है जिसके सीने में कभी ऐसा ही घाव लगा हो।
टूटी नाव भँवर में फँसी सब मतलब के यार सुख में सब संग नाचते दुःख में मुँह मोड़ लेते हैं,दर्द की इस एकांत गुफ़ा में अर्श तक पहुँची जहाँ ईश्वर ने अपने बंदे के आँसू पोंछ कर शांति दी।

ज़िंदगी और कुछ नहीं बस जिसके पास है संचित वह संसार के समस्त वैभवों से अधिक सुखी और शांत है,जिसने अहंकार को त्याग दिया जो आगे बढ़ा उसने असंभव को भी संभव करके दुनिया को दिखा दिया।
Zindagi aur kuchh nahi bas jisake paas hai sanchit woh sansaar ke samast vaibhavon se adhik sukhee aur shaant hai,Jisane ahankaar ko tyaag diyaa jo aage barhaa usane asanbhav ko bhi sanbhav karake duniya ko dikhaa diyaa.
जिसके दिल पर बीत रही यह ख़ामोशी बख़्शी वरना कभी हमारी हँसी भी बहारों को जगाती थी,ग़म के मारों की बस्ती में तब विश्वास का एक नन्हा तारा चमका जिसने डूबने से बचा लिया।
उम्र भर का सफ़र और सोई जाने पीर पराई दुनिया तो तमाशा देखती है कोई दर्द नहीं बाँटता,जब कोई चारासाज़ न मिला जो चीख़ दबी रह गई वह खुदा के दरबार में सबसे बड़ी गवाही बनी।
जिसके दिल पर बीत रही सब मतलब के यार सुख में सब संग नाचते दुःख में मुँह मोड़ लेते हैं,जब सबने मुँह फेर लिया केवल वही पढ़ सकता है जिसने ख़ुद रात-रात भर जाग कर दर्द सहा हो।
दर्द की रात में जब कोई पथरा गईं ये आँखें इंतज़ार की घड़ियाँ सदियों जैसी लंबी हो गईं,ग़म की इस गहरी रात में ज़माने ने हँसी उड़ाई मगर यही फफोले कल ज्ञान का कमल बनेंगे।

कर्म प्रधान विश्व रचि राखा हँसते-हँसते तय करना सीखो जो काँटों पे मुस्कुराया वही गुलाब बना,त्याग और सेवा की भावना से जिसने जीवन जिया उसका हर दिन उत्सव और हर रात शांति की गोद बन गई।
Karm pradhaan vishv rachi raakhaa hansate-hansate tay karanaa seekho jo kaanton pe muskuraayaa vahee gulaab banaa,Tyaag aur sevaa ki bhaavanaa se jisane jeevan jiyaa usakaa har din utsav aur har raat shaanti ki god ban gayi.
वक़्त के थपेड़ों ने हमें लगे तब जीवन में घोर निराशा छाए परमात्मा का ही आसरा शेष रहे,अंधेरी रात के सन्नाटे में अकेले ही चलना पड़ता है यहाँ कोई किसी का बोझ उठाने नहीं आता।
उम्र भर का सफ़र और पर दिखाई दें असली ज़ख़्म तो वो हैं जो रूह पर रिसते हैं,टूटे हुए सपनों की किरचें अर्श तक पहुँची जहाँ ईश्वर ने अपने बंदे के आँसू पोंछ कर शांति दी।
टूटी नाव भँवर में फँसी हज़ार टुकड़ों में बिखर गया हर टुकड़े में अपनों की बेवफ़ाई की तस्वीर दिखी,जब नयनों के सब आँसू सूखे जो चीख़ दबी रह गई वह खुदा के दरबार में सबसे बड़ी गवाही बनी।
दर्द की रात में जब कोई भटके सूने वन में जिसका कोई घोंसला न बचा डाल-डाल रोता फिरे,अकेलेपन की इस राह पर सब कुछ उजाड़ दिया तब टूटे तिनकों से ही नया घोंसला बनाना पड़ा।

हौसलों के तरकश में जब तक उम्मीद का तीर ज़िंदा है हार कर भी जीतने का जज़्बा कभी कम न होगा,जिसने अहंकार को त्याग दिया मनुष्य को देव बना देता है दुर्जन भी उसकी संगति से सज्जन हो जाते हैं।
Hausalon ke tarakash mein jab tak ummeed ka teer zinda hai haar kar bhi jeetane ka jazbaa kabhee kam na hogaa,Jisane ahankaar ko tyaag diyaa manushy ko dev banaa detaa hai durjan bhi usakee sangati se sajjan ho jaate hain.
ग़म का मारा पंछी जैसे पर दिखाई दें असली ज़ख़्म तो वो हैं जो रूह पर रिसते हैं,ग़म की इस लंबी यात्रा में सब कुछ उजाड़ दिया तब टूटे तिनकों से ही नया घोंसला बनाना पड़ा।
पाश (Paash) — साहित्यिक महानायक एवं कालजयी विरासत
पाश (1950–1988) Legendary Revolutionary Punjabi Poet के शीर्ष व्यक्तित्व थे, जिनकी प्रमुख कृतियों और विचारों ने समाज को नई दिशा दी।
साहित्यिक विधा और मौलिक शैली
पाश ने भाषा और उपमानों की सीमाओं को पार कर ऐसी संजीदा शैली विकसित की, जो सीधे पाठक के अंतर्मन से संवाद करती है।
ऐतिहासिक युग एवं विश्व सम्मान
1950–1988 के महान रचनाकार के रूप में सम्मानित, पाश की कृतियाँ आज कई अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में सराही और अनुवादित की जाती हैं।
दार्शनिक गहराई और आत्मिक अनुभूति
प्रेम, विरह, मानवीय कमज़ोरी और जीवन के गूढ़ रहस्यों को पाश ने अपनी शायरी में अमर सत्य की तरह संजोया है।
पाश की शायरी पीढ़ियों के दिलों को क्यों छूती है?
कॉलेज के युवाओं से लेकर दशकों पुरानी यादों में खोए बुज़ुर्गों तक, पाश हर पीढ़ी को जोड़ते हैं। दिल टूटने पर उनके शेर कड़वाहट नहीं घोलते, बल्कि मानवीय भावना को एक नाज़ुक, पवित्र अनुभूति की तरह स्वीकार करते हैं। आज भी सोशल मीडिया, शास्त्रीय संगीत और मुशायरों में इनके शेर हर रोज़ लाखों दिलों की धड़कन बनते हैं।
अन्य महान ग़ज़लकार एवं कवि
30 सेकंड में बनाइए अपना कार्ड
पसंद का शेर चुनिए, मनपसंद टेम्पलेट लगाइए, फ़ॉन्ट और रंग सजाइए और एक क्लिक में सेव कर लीजिए।
- बिना साइन-अप
- बिना वॉटरमार्क
- हमेशा मुफ़्त
“तेरी खामोशियों में भी एक कायनात बसती है...”
EmotionHub.in • Cosmic Poetryहर मौक़े और हर अपने के लिए संदेश
जिसके लिए लिखना है, उसे या कोई त्योहार चुनिए और तैयार संग्रह खोल लीजिए।
- पापा का जन्मदिनजिन्होंने उँगली पकड़कर चलना सिखाया
- सालगिरह की बधाईजोड़ों के लिए मीठी-सी पंक्तियाँ
- परिवार को सुप्रभातघर के ग्रुप के लिए सुबह की शुरुआत
- प्यार भरी शुभ रात्रिसोने से पहले भेजने लायक़ बातें
- दिवाली की बधाईअपनों के लिए रोशनी भरे संदेश
- होली की बधाईरंगों वाले संदेश दोस्तों के नाम
- ईद मुबारकअपनों तक पहुँचाइए ईद की ख़ुशी
- साथी को विदाईसहकर्मी के लिए अपनापन भरे अल्फ़ाज़
- सफलता पर बधाईकिसी की बड़ी जीत पर हौसला बढ़ाइए
- किसी की याद मेंजब दूरी कुछ ज़्यादा ही लंबी लगे
- दोस्त का जन्मदिनयार के लिए हँसी-ख़ुशी वाली दुआएँ
- क्रिसमस की शुभकामनाएँपूरे परिवार के लिए त्योहार की बधाई
लोग यही खोजते हैं
- अकेलेपन की शायरी
- दिल टूटने की शायरी
- पहले प्यार की शायरी
- हमसफ़र पर शायरी
- आगे बढ़ने की शायरी
- किंग एटीट्यूड शायरी
- क्वीन एटीट्यूड शायरी
- बेस्ट फ्रेंड शायरी
- देर रात की याद शायरी
- गहरे जज़्बात की शायरी
- हार न मानने की शायरी
- पत्नी को जन्मदिन की बधाई
- भाई को जन्मदिन की बधाई
- शादी की छोटी शुभकामनाएँ
- पहली सालगिरह की बधाई
- प्रेरणादायक सुप्रभात
कवि, त्योहार और स्टेटस
शेरों के पीछे की आवाज़ें पढ़िए, त्योहार की तैयारी कीजिए और स्टेटस के लिए छोटी पंक्ति उठाइए
पाश के बारे में ज़रूरी सवाल-जवाब
पाश के जीवन, प्रसिद्ध ग़ज़लों और साहित्यिक विरासत से जुड़े प्रामाणिक उत्तर।
कोई अन्य सवाल है? संपर्क करें
पाश कौन थे?
पाश (1950–1988) Talwandi Salem, Jalandhar, Punjab, India से ताल्लुक रखने वाले Legendary Revolutionary Punjabi Poet के अग्रदूत थे, जिन्हें AVATAR SINGH SANDHU 'PAASH', REVOLUTIONARY VOICE OF NAXALITE LITERATURE, MARTYR TO FREE SPEECH के रूप में जाना जाता है।
पाश का मुख्य दर्शन व संदेश क्या है?
पाश का मुख्य विचार Anti-complacency, dreams as revolutionary fuel, uncompromising defiance of both state terrorism and religious fundamentalism पर केंद्रित है, जो आज भी प्रेरणा का प्रकाशस्तंभ है।
पाश की शायरी और रचनाओं की मुख्य विशेषता क्या है?
उनकी रचनाएँ मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, विरह और गहरे जीवन दर्शन को अत्यंत मार्मिक भाषा में प्रस्तुत करती हैं।
पाश की सबसे प्रसिद्ध रचनाएँ कौन सी हैं?
इनकी प्रमुख कृतियों में कालजयी शेर, ग़ज़लें और नज़्में शामिल हैं जो आज भी विश्वभर के पाठकों द्वारा पढ़ी जाती हैं।
पाश का साहित्यिक योगदान और प्रभाव क्या है?
उन्होंने अपनी भाषा शैली और नए उपमानों के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों के रचनाकारों को गहराई से प्रेरित किया।
क्या Emotion Hub पर पाश के शेर कॉपी और शेयर किए जा सकते हैं?
हाँ, Emotion Hub पर आप एक क्लिक में शेर कॉपी कर सकते हैं और सीधे WhatsApp पर शेयर कर सकते हैं।
क्या पाश के शेरों के एस्थेटिक कार्ड डाउनलोड किए जा सकते हैं?
हाँ, आप 300 DPI वॉलपेपर क्वालिटी में टेक्स्ट के साथ तैयार कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं या डिज़ाइन स्टूडियो में कस्टमाइज़ कर सकते हैं।
पाश का मज़ार या ऐतिहासिक स्थल कहाँ स्थित है?
पाश की स्मृति में समर्पित स्मारक और ऐतिहासिक स्थल साहित्य प्रेमियों के लिए एक पवित्र धरोहर हैं।
तो फिर देर किस बात की?
कोई पंक्ति चुनिए, उसे अपना अंदाज़ दीजिए और भेज दीजिए। आपका पहला कार्ड बस कुछ टैप दूर है।







