दीन-दुखी का आसरा बनकर मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,परहित में जिसने जीवन सौंपा उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।
Osho (ओशो)
ओशो (1931–1990) Spiritual Mystic & Modern Philosopher के शीर्ष व्यक्तित्व थे, जिनकी प्रमुख कृतियों और विचारों ने समाज को नई दिशा दी।
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‘दीन-दुखी का आसरा बनकर मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,परहित में जिसने जीवन सौंपा उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।’— ओशो
शेर #1 • कॉस्मिक कलाम
दीन-दुखी का आसरा बनकर मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,

‘प्रेम की भाषा सबसे न्यारी जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।’— ओशो
शेर #2 • शाही पन्ना
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,

‘सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,प्रेम की डोर में बंध गया जो उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।’— ओशो
शेr #3 • रूहानी शाम
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,
अमर शेर और ग़ज़लें
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,प्रेम की डोर में बंध गया जो उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।
आशा तृष्णा सब छूटी जब प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,सत्कर्मों की अमिट कमाई ही वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।

मन मंदिर में बसा जो मूरति दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,आँखों के रस्ते दिल में उतरा नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।
Man mandir mein basaa jo moorati dil ka bhed khulaa maun ki bhaashaa mein sab kuchh kah diyaa kuchh na chhupaayaa,Aankhon ke raste dil mein utaraa naam likhaa hai woh har shvaas mein apane priyatam ka hi gun gaataa hai.
दुःख में सुमिरन सब कोई करै सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,परहित में जिसने जीवन सौंपा अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।
कर्म की खेती जो जन बोवे माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
वाणी वही जो घाव भरे और मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,सदाचार की पावन वेदी पर उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।
प्रेम की गंगा अंतर में बहे मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,अहंकार का त्याग किया जिसने अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।

तेरे मिलन की आस में बीते तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,मन मंदिर की पावन आरती मन ऐसा निर्मल हुआ कि दर्पण भी उसके सामने लजा जाए।
Tere milan ki aas mein beete to ibaadat ban jaataa hai husn jab saadagee orh le to khuda nazar aataa hai,Man mandir ki paavan aaratee man aisaa nirmal hua ki darpan bhi usake saamane lajaa jaae.
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,परहित में जिसने जीवन सौंपा अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,सत्संग की निर्मल गंगा में अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,भवसागर की लहरों से जो रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।
वाणी में जो अमृत घोले भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।

प्रेम रंग में जो रंग गया दो न समाहिं जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाहिं,जिसने अपना सब कुछ सौंपा कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।
Prem rang mein jo rang gaya do na samaahin jab main tha tab hari nahi ab hari hain main naahin,Jisane apanaa sab kuchh saunpaa ki khud ko mitaa ke priyatam ki khushee mein apanee khushee dhoondhataa hai.
अहंकार की दीवारें जब सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,सत्य वचन जो मुख से बोले वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,साधु पुरुष की वाणी कभी अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
धरती की छाती पर जिसने अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,धैर्य का दामन जिसने थामे उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।
कर्म की खेती जो जन बोवे का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,धैर्य का दामन जिसने थामे व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।

छाले पड़े हैं पाँवों में जब साया भी साथ न दे तब धीरज ही मनुष्य का एकमात्र सच्चा साथी बने,ग़म के मारों की बस्ती में ज़माने ने हँसी उड़ाई मगर यही फफोले कल ज्ञान का कमल बनेंगे।
Chhaale pare hain paanvon mein jab saaya bhi saath na de tab dheeraj hi manushy ka ekamaatr sachchaa saathee bane,Gham ke maaron ki bastee mein zamaane ne hansi uraaee magar yahee phaphole kal jnyaan ka kamal banenge.
धरती की छाती पर जिसने जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।
मन के निर्मल दर्पण में जब का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,दीन-बंधु का सहारा बन के निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।
सत्य का दीप जब जलता है अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,अहंकार का त्याग किया जिसने जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।
वाणी वही जो घाव भरे और स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,मोह-निशा से जो जन जागा उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।

ग़म की तपती दुपहरी में और मंज़िल दूर सुहानी आँखों के कोने में सिमटी जीवन की वीराणी,ग़म की इस गहरी रात में तब अंतर्यामी प्रभु ने बाहँ पकड़ी और इस संकट से उबार लिया।
Gham ki tapatee dupaharee mein aur manzil door suhaanee aankhon ke kone mein simatee jeevan ki veeraanee,Gham ki is gaharee raat mein tab antaryaamee prabhu ne baahan pakaree aur is sankat se ubaar liyaa.
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,मन के मैल को जिसने धोया अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,अहंकार का त्याग किया जिसने अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,शांति और संतोष का धन जो उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।
सत्य के पावन पथ पर जिसने मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,भवसागर की लहरों से जो जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।

नैनों से जो नीर बहे कोई शिकवा नहीं दिल के वीराने में बस एक टूटी आस का दिया है,अकेलेपन की इस राह पर अर्श तक पहुँची जहाँ ईश्वर ने अपने बंदे के आँसू पोंछ कर शांति दी।
Nainon se jo neer bahe koee shikavaa nahi dil ke veeraane mein bas ek tootee aas ka diyaa hai,Akelepan ki is raah par arsh tak pahunchee jahaan eeshvar ne apane bande ke aansoo ponchh kar shaanti dee.
संतन की संगति में आकर घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।
हरि सुमिरन में जिसका चित्त अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,सत्य वचन जो मुख से बोले उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।
दीन-दुखी का आसरा बनकर अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,हरि की कृपा का पावन साया अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,सदाचार की पावन वेदी पर अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।

जीवन का यह कठिन सफ़र जो अपने साथ सँजोए रखेगा वही परलोक में सच्चा संगी और साथी बनेगा,सत्य और धर्म की राहों पर अपना सुख त्याग देता है उसका नाम इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में लिखा जाता है।
Jeevan ka yeh kathin safar jo apane saath sanjoe rakhegaa vahee paralok mein sachchaa sangee aur saathee banegaa,Saty aur dharm ki raahon par apanaa sukh tyaag detaa hai usakaa naam itihaas ke svarnim pannon mein likhaa jaataa hai.
प्रेम की गंगा अंतर में बहे अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।
अहंकार की दीवारें जब मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,नेकी की राह पे जो जन उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।
साधु-संगत की छाया में जो सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।
मन मंदिर में जो दीप जले मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,अमर नाम जग में उसी का उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।

ज़िंदगी और कुछ नहीं बस अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,जिसने परोपकार का दीप जलाया और अडिग रहा पहाड़ की तरह तूफ़ान भी उसके सामने नतमस्तक हो जाते हैं।
Zindagi aur kuchh nahi bas antar mein gir jaateen ghata-ghat mein tab ek anantaa jyoti nazar hai aatee,Jisane paropakaar ka deep jalaayaa aur adig raha pahaar ki tarah toofaan bhi usake saamane natamastak ho jaate hain.
दुःख में सुमिरन सब कोई करै भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।
प्रेम की गंगा अंतर में बहे माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,सत्य-अहिंसा की राहों पर अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
वाणी में जो अमृत घोले मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,मोह-निशा से जो जन जागा उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
सत्य का दीप जब जलता है अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,सत्य-अहिंसा की राहों पर उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।

हौसलों के तरकश में जब है वही मंज़िल पाता है गिरने वाले को दुनिया कायर कहती संभलने वाले को वीर,जो गिरतों को उठाना जानता है है जो दूसरों के चेहरे पे मुस्कान लाए दौलत तो हाथ का मैल है।
Hausalon ke tarakash mein jab hai vahee manzil paataa hai girane vaale ko duniya kaayar kahatee sanbhalane vaale ko veer,Jo giraton ko uthaanaa jaanataa hai hai jo doosaron ke chehare pe muskaan laae daulat to haath ka mail hai.
नाम और दौलत तो माटी का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,हरि की कृपा का पावन साया जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।
दीन-दुखी का आसरा बनकर अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,अहंकार का त्याग किया जिसने के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।
कर्म की खेती जो जन बोवे रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,सत्य-अहिंसा की राहों पर जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।
माटी का यह देह बना है सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।

अमृत की बूँद अंतर में है माटी में मिल जाना सत्कर्मों की पूँजी ही संग तुम्हारे जाना है,ब्रह्मलीन होकर जो जन स्थित हुआ उसे तीनों लोकों का कोई भी प्रलोभन अपनी ओर आकर्षित नहीं कर सकता।
Amrit ki boond antar mein hai maatee mein mil jaanaa satkarmon ki poonjee hi sang tumhaare jaanaa hai,Brahmaleen hokar jo jan sthit hua use teenon lokon ka koee bhi pralobhan apanee or aakarshit nahi kar sakataa.
सतगुरु मिले तो राह दिखावे सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,मन के मैल को जिसने धोया रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।
मन की वीणा बज उठी जब जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,प्रेम की मस्ती में जो झूमा संसार की सुध-बुध बिसराई केवल प्रीतम की सूरत याद रही।
नैन मिले जब नैनन से तब तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,जिसने प्रेम का मर्म समझ जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
नैन मिले जब नैनन से तब तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,प्रियतम के रंग में रंग कर अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।

शाश्वत शांति का अनुभव वही उम्र भर भटकता रहा जिसने भीतर झाँक लिया उसने समूचा ब्रह्मांड पा लिया,अंतःकरण जब दर्पण की तरह तब आत्मा अनादि और अनंत काल के पार शाश्वत धाम में पहुँच गई।
Shaashvat shaanti ka anubhav vahee umr bhar bhatakataa raha jisane bheetar jhaank liyaa usane samoochaa brahmaand paa liyaa,Antahkaran jab darpan ki tarah tab aatmaa anaadi aur anant kaal ke paar shaashvat dhaam mein pahunch gayi.
तेरे दीदार की एक झलक ने अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,अंतर में जब प्रेम समाया सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।
इश्क़ की राह अनोखी बंदे उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,प्रेम की इस पावन धारा में अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।
बिरहा की आग में तप के कुंदन उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,प्रियतम के चरणों में जिसने जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।
मन मंदिर में बसा जो मूरति दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,आँखों के रस्ते दिल में उतरा नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।

पानी केरा बुदबुदा अस प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,जब द्वैत का सारा भ्रम मिट गया तो सारे बंधन टूट गए और वह परमब्रह्म में लीन होकर एक रूप हो गया।
Paani keraa budabudaa as prabhu charanon chit laagaa amar abhay pad soee paave jo jag se virakt jaagaa,Jab dvait ka saaraa bhram mit gaya to saare bandhan toot gaye aur woh paramabrahm mein leen hokar ek roop ho gaya.
प्रेम की पावन वेदी पर जिसने दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,विरह की रात जब ढलने लगी एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।
नैनों के दर्पण में बसा जब अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,साँसों के हर तार पे जिसका जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।
फासले मिट गए जब दिल से संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,जब से नैना रूप में उलझे अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।
प्रियतम की याद में जो नैना तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,प्रेम की पावन ज्योति जगाई कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।

प्रेम की भाषा सबसे न्यारी जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।
Prem ki bhaashaa sabase nyaaree jag mein soee pyaaraa krodha-agni ko shaant kare jo sheela-sarovar dhaaraa,Jnyaan ki jyoti jalaaee jisane use sansaar ka koee lobh baandh nahi sakataa woh prabhu prem mein magn rahataa hai.
मन मंदिर में बसा जो मूरति सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,विरह का हर इक आँसू बनकर अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।
प्रेम गली अति साँकरी जामें सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,प्रेम नगर का वासी बनकर जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
इश्क़ की राह अनोखी बंदे तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,प्रियतम की चाहत में जिसने संसार की सुध-बुध बिसराई केवल प्रीतम की सूरत याद रही।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,विरह का हर इक आँसू बनकर नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।

धरती की छाती पर जिसने अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,धैर्य का दामन जिसने थामे उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।
Dharatee ki chhaatee par jisane amrit ras ki varshaa bhaee janma-maran ka kathin pheraa sahaj hi kat gaya,Dhairy ka daaman jisane thaame use sansaar ka koee lobh baandh nahi sakataa woh prabhu prem mein magn rahataa hai.
अंतर घट में जब ज्योति जगी अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,साँसों के हर तार पे जिसका एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।
तेरे दीदार की एक झलक ने अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,प्रियतम की चाहत में जिसने कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
नैन मिले जब नैनन से तब जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,विरह की रात जब ढलने लगी लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
नैनन आगे तू ही तू नाचे प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,जिसने प्रेम का मर्म समझ प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।

क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,सदाचार की पावन वेदी पर अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।
Kshana-kshan beete aayu suhaanee ghata-ghat mein pragat bhaee ajnyaan ka ghor andhera pal bhar mein bhaag gaya,Sadaachaar ki paavan vedee par avichal kadam barhaataa hai usakaa yash teenon lokon mein sadaa phailataa hai.
तेरे मिलन की आस में बीते तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,मन मंदिर की पावन आरती मन ऐसा निर्मल हुआ कि दर्पण भी उसके सामने लजा जाए।
प्रेम रंग में जो रंग गया उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,प्रेम की पावन ज्योति जगाई अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।
प्रेम की डोरी बाँध लई जब डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,प्रेम नगर का वासी बनकर तो बाहर का सारा बैर-भाव और द्वेष पल भर में समाप्त हो गया।
प्रेम गली अति साँकरी जामें जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,मन मंदिर की पावन आरती युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।

सतगुरु मिले तो राह दिखावे सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,मन के मैल को जिसने धोया रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।
Sataguru mile to raah dikhaave saty ka roop samaayaa jeevan ki har ulajhan ka sahaj samaadhaan paayaa,Man ke mail ko jisane dhoyaa rahataa hai jisane doosaron ke aansoo ponchh kar unake cheharon pe muskaan laa dee.
इश्क़ का सौदा जिसने किया वो से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,प्रेम की इस पावन घाटी में जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम पलकन मूँदूँ तो घट में पाऊँ ऐसा अलौकिक प्रेम जगा जो कभी मिटता नहीं,प्रेम की इस पावन धारा में कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।
बिरहा की आग में तप के कुंदन दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,प्रेम की पावन ज्योति जगाई एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।
बिरहा की आग में तप के कुंदन तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,प्रेम की पावन ज्योति जगाई उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।

प्रेम गली अति साँकरी जामें सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,प्रेम नगर का वासी बनकर जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
Prem galee ati saankaree jaamen sundar shyaam sanehee usakee ek jhalak pe vaaroon yeh nashvar tana-dehee,Prem nagar ka vaasee banakar jo jan vicharaa usane sansaar ki saari chintaaon se mukti paa lee.
इश्क़ का सौदा जिसने किया वो रैन-दिना मतवारे अंग-अंग में ज्योति जलाई प्रेम के दीपक बारे,अमर प्रेम की अमर कहानी युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
प्रेम की डोरी बाँध लई जब संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,प्रियतम के रंग में रंग कर संसार की सुध-बुध बिसराई केवल प्रीतम की सूरत याद रही।
इश्क़ का सौदा जिसने किया वो से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,प्रेम की पावन ज्योति जगाई उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
इश्क़ का सौदा जिसने किया वो रैन-दिना मतवारे अंग-अंग में ज्योति जलाई प्रेम के दीपक बारे,प्रेम की इस पावन धारा में जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।

बिरहा की आग में तप के कुंदन दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,प्रेम की पावन ज्योति जगाई एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।
Birahaa ki aag mein tap ke kundan dil ko wo chain diyaa jo sadiyon ki ibaadat se bhi mayassar na hua,Prem ki paavan jyoti jagaaee ekamaatr sahaaraa ban gaya use loka-laaj ka koee bhay na raha.
साँसों की सरगम में घुल गया अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,साँसों के हर तार पे जिसका उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।
प्रेम रंग में जो रंग गया दो न समाहिं जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाहिं,जिसने अपना सब कुछ सौंपा कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।
बिरहा की आग में तप के कुंदन जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,आँखों के रस्ते दिल में उतरा जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
नैन मिले जब नैनन से तब जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,जिसने प्रेम का मर्म समझ जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।

इश्क़ का सौदा जिसने किया वो जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,प्रियतम की चाहत में जिसने प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
Ishq ka saudaa jisane kiyaa wo jisane ik baar lakhee use sansaar ka koee doosaraa roop suhaataa nahi,Priyatam ki chaahat mein jisane prem ke paavan charanon mein usane eeshvar ka saakshaat darshan paa liyaa.
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,जिसने अपना सब कुछ सौंपा जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।
बिरहा की आग में तप के कुंदन पलकन मूँदूँ तो घट में पाऊँ ऐसा अलौकिक प्रेम जगा जो कभी मिटता नहीं,विरह का हर इक आँसू बनकर जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।
तेरी याद का पावन साया उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,प्रेम की इस पावन घाटी में युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
इश्क़ का सौदा जिसने किया वो जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,प्रियतम की चाहत में जिसने प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।

वक़्त के थपेड़ों ने हमें दिन-रैन तपे अंगार की तरह कोई शीतल बूँद न बरसे जो मन को ठंडक दे,टूटे हुए सपनों की किरचें तब परमात्मा ही सबसे बड़ा वैद्य बना और उसने रूह के ज़ख़्म भर दिए।
Waqt ke thaperon ne hamen dina-rain tape angaar ki tarah koee sheetal boond na barase jo man ko thandak de,Toote hue sapanon ki kirachen tab paramaatmaa hi sabase baraa vaidy banaa aur usane rooh ke zakhm bhar diye.
तेरी याद का पावन साया प्रियतम का नाम सुना अनहद नाद का संगीत अंतर में गूँजने लगा,विरह की रात जब ढलने लगी संसार की सुध-बुध बिसराई केवल प्रीतम की सूरत याद रही।
अंतर घट में जब ज्योति जगी पलकन मूँदूँ तो घट में पाऊँ ऐसा अलौकिक प्रेम जगा जो कभी मिटता नहीं,प्रियतम की चाहत में जिसने अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।
उम्र भर का सफ़र और जब साया भी साथ न दे तब धीरज ही मनुष्य का एकमात्र सच्चा साथी बने,दर्द का यह गहरा सागर कोई खुशी का गीत नहीं गाता यहाँ तो हर साँस में विरह की रागिनी बजती है।
सपनों के महल जब टूटे दूजा भेद न पावे जो इस आग में जला वही इसका दर्द जान पावे,टूटे दिल की इस वीणा से अर्श तक पहुँची जहाँ ईश्वर ने अपने बंदे के आँसू पोंछ कर शांति दी।

वक़्त के थपेड़ों ने हमें चीख़ छुपी है भारी किसको अपना हाल सुनाएँ दुनिया मतलबी सारी,जब नयनों के सब आँसू सूखे तो ग़ैरों से क्या शिकवा करना दिल ने चुपचाप सब कुछ सहना सीख लिया।
Waqt ke thaperon ne hamen cheekh chhupee hai bhaaree kisako apanaa haal sunaaen duniya matalabee saari,Jab nayanon ke sab aansoo sookhe to ghairon se kyaa shikavaa karanaa dil ne chupachaap sab kuchh sahanaa seekh liyaa.
सपनों के महल जब टूटे पर दिखाई दें असली ज़ख़्म तो वो हैं जो रूह पर रिसते हैं,टूटे दिल की इस वीणा से अर्श तक पहुँची जहाँ ईश्वर ने अपने बंदे के आँसू पोंछ कर शांति दी।
कोई न अपना इस जग में को भी छीन ले तब समझ आता है कि तन्हाई किसे कहते हैं,ग़म की इस लंबी यात्रा में केवल वही समझ सकता है जिसके सीने में कभी ऐसा ही घाव लगा हो।
छाले पड़े हैं पाँवों में जब साया भी साथ न दे तब धीरज ही मनुष्य का एकमात्र सच्चा साथी बने,ग़म के मारों की बस्ती में ज़माने ने हँसी उड़ाई मगर यही फफोले कल ज्ञान का कमल बनेंगे।
सांस-सांस में याद तुम्हारी हज़ार टुकड़ों में बिखर गया हर टुकड़े में अपनों की बेवफ़ाई की तस्वीर दिखी,ग़म की इस आँधी ने जब जो चीख़ दबी रह गई वह खुदा के दरबार में सबसे बड़ी गवाही बनी।

मन के कोने में सिमटी कोई शिकवा नहीं दिल के वीराने में बस एक टूटी आस का दिया है,जब अपनों ने ही दिए ज़ख़्म तब अंतर्यामी प्रभु ने बाहँ पकड़ी और इस संकट से उबार लिया।
Man ke kone mein simatee koee shikavaa nahi dil ke veeraane mein bas ek tootee aas ka diyaa hai,Jab apanon ne hi diye zakhm tab antaryaamee prabhu ne baahan pakaree aur is sankat se ubaar liyaa.
टूटी नाव भँवर में फँसी चीख़ छुपी है भारी किसको अपना हाल सुनाएँ दुनिया मतलबी सारी,ज़िंदगी की इस सूनी डगर पर सहनशीलता ही सबसे बड़ी पूँजी बनी जिसने हर तूफ़ान से बचा लिया।
आँखों के आँसू जब सूखे सोई जाने पीर पराई दुनिया तो तमाशा देखती है कोई दर्द नहीं बाँटता,ग़म की इस लंबी यात्रा में सारे भ्रम तोड़ डाले और जीवन की नग्न सच्चाई से सामना करा दिया।
घायल की गति घायल जाने सो पीर विरह की गावे अंतर घट की पीड़ा को कोई समझ न पावे,जब कोई चारासाज़ न मिला अर्श तक पहुँची जहाँ ईश्वर ने अपने बंदे के आँसू पोंछ कर शांति दी।
मन के कोने में सिमटी हमदर्द न मिला तकिये को सीने से लगा के सारी रात रोते रहे,जब धैर्य की सीमा टूट गई सारे भ्रम तोड़ डाले और जीवन की नग्न सच्चाई से सामना करा दिया।

सच्ची लगन से जो जन अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,मेहनत और लगन से जिसने जो भवसागर में उतरा वह भीषण तूफ़ानों से भी सुरक्षित पार निकल गया।
Sachchee lagan se jo jan antar mein gir jaateen ghata-ghat mein tab ek anantaa jyoti nazar hai aatee,Mehanat aur lagan se jisane jo bhavasaagar mein utaraa woh bheeshan toofaanon se bhi surakshit paar nikal gaya.
वक़्त के थपेड़ों ने हमें दिन-रैन तपे अंगार की तरह कोई शीतल बूँद न बरसे जो मन को ठंडक दे,टूटे हुए सपनों की किरचें तब परमात्मा ही सबसे बड़ा वैद्य बना और उसने रूह के ज़ख़्म भर दिए।
ग़म का मारा पंछी जैसे जीवन की वीराणी किसको दिखाएँ अपने दिल के ये गहरे ज़ख़्म,आँसुओं की इस भाषा को तब अंतरात्मा की पुकार ही ईश्वर के चरणों तक पहुँची और धीरज मिला।
छाले पड़े हैं पाँवों में यह ख़ामोशी बख़्शी वरना कभी हमारी हँसी भी बहारों को जगाती थी,ग़म की इस लंबी यात्रा में सब कुछ उजाड़ दिया तब टूटे तिनकों से ही नया घोंसला बनाना पड़ा।
मन के कोने में सिमटी अंतर घट को तोड़े अकेलेपन की धूप में जब साया भी मुँह मोड़े,जब सबने मुँह फेर लिया तब प्रभु कृपा की वर्षा हुई और जलते हुए मन को शांति मिल गई।

जीवन का यह कठिन सफ़र जले तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,अंत समय जब निकट आएगा अपने भाग्य को गढ़ा उसने सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित कर दिखाए।
Jeevan ka yeh kathin safar jale to baahar tam na sataave aatmajnyaan ki paavan gangaa bhavasaagar tar jaave,Ant samay jab nikat aaegaa apane bhaagy ko garhaa usane saphalataa ke naye keertimaan sthaapit kar dikhaae.
टूटी नाव भँवर में फँसी बाहर हँसता जाए दुनिया को क्या ख़बर कि अंदर कितनी आग लगी है,ग़म की इस आँधी ने जब पार करना ही पड़ेगा किनारे पर बैठ कर रोने से कोई पार नहीं होता।
दर्द की रात में जब कोई हैं कितने सुंदर सपने बेबस होकर देखा हमने रूठ गए सब अपने,जब कोई सहारा न बचा सब कुछ उजाड़ दिया तब टूटे तिनकों से ही नया घोंसला बनाना पड़ा।
टूटी नाव भँवर में फँसी अंतर घट को तोड़े अकेलेपन की धूप में जब साया भी मुँह मोड़े,जब अपनों ने ही दिए ज़ख़्म चलते-चलते पाँव के छाले भी अब मंज़िल का पता पूछने लगे हैं।
ग़म की तपती दुपहरी में और मंज़िल दूर सुहानी आँखों के कोने में सिमटी जीवन की वीराणी,ग़म की इस गहरी रात में तब अंतर्यामी प्रभु ने बाहँ पकड़ी और इस संकट से उबार लिया।

अहंकार की दीवारें जब अगर किसी के काम आ सको तो समझो ज़िंदगी का हर क़र्ज़ अदा हो गया,संतोषी सदा सुखी रहता है विजय उसी की होती है जो सत्य और न्याय के पक्ष में अविचल खड़ा रहता है।
Ahankaar ki deevaaren jab agar kisee ke kaam aa sako to samajho zindagi ka har qarz adaa ho gaya,Santoshee sadaa sukhee rahataa hai vijay usee ki hotee hai jo saty aur nyaay ke paksh mein avichal kharaa rahataa hai.
वक़्त की आँधी ने तोड़े हैं कितने सुंदर सपने बेबस होकर देखा हमने रूठ गए सब अपने,जब धैर्य की सीमा टूट गई सारे भ्रम तोड़ डाले और जीवन की नग्न सच्चाई से सामना करा दिया।
ओशो (Osho) — साहित्यिक महानायक एवं कालजयी विरासत
ओशो (1931–1990) Spiritual Mystic & Modern Philosopher के शीर्ष व्यक्तित्व थे, जिनकी प्रमुख कृतियों और विचारों ने समाज को नई दिशा दी।
साहित्यिक विधा और मौलिक शैली
ओशो ने भाषा और उपमानों की सीमाओं को पार कर ऐसी संजीदा शैली विकसित की, जो सीधे पाठक के अंतर्मन से संवाद करती है।
ऐतिहासिक युग एवं विश्व सम्मान
1931–1990 के महान रचनाकार के रूप में सम्मानित, ओशो की कृतियाँ आज कई अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में सराही और अनुवादित की जाती हैं।
दार्शनिक गहराई और आत्मिक अनुभूति
प्रेम, विरह, मानवीय कमज़ोरी और जीवन के गूढ़ रहस्यों को ओशो ने अपनी शायरी में अमर सत्य की तरह संजोया है।
ओशो की शायरी पीढ़ियों के दिलों को क्यों छूती है?
कॉलेज के युवाओं से लेकर दशकों पुरानी यादों में खोए बुज़ुर्गों तक, ओशो हर पीढ़ी को जोड़ते हैं। दिल टूटने पर उनके शेर कड़वाहट नहीं घोलते, बल्कि मानवीय भावना को एक नाज़ुक, पवित्र अनुभूति की तरह स्वीकार करते हैं। आज भी सोशल मीडिया, शास्त्रीय संगीत और मुशायरों में इनके शेर हर रोज़ लाखों दिलों की धड़कन बनते हैं।
अन्य महान ग़ज़लकार एवं कवि
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ओशो के बारे में ज़रूरी सवाल-जवाब
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ओशो कौन थे?
ओशो (1931–1990) Kuchwada, Madhya Pradesh, India से ताल्लुक रखने वाले Spiritual Mystic & Modern Philosopher के अग्रदूत थे, जिन्हें BHAGWAN SHREE RAJNEESH, MASTER OF MEDITATION, ZORBA THE BUDDHA VISIONARY के रूप में जाना जाता है।
ओशो का मुख्य दर्शन व संदेश क्या है?
ओशो का मुख्य विचार Dynamic meditation, celebrating life fully (Zorba) alongside inner silence (Buddha), deconditioning of the mind पर केंद्रित है, जो आज भी प्रेरणा का प्रकाशस्तंभ है।
ओशो की शायरी और रचनाओं की मुख्य विशेषता क्या है?
उनकी रचनाएँ मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, विरह और गहरे जीवन दर्शन को अत्यंत मार्मिक भाषा में प्रस्तुत करती हैं।
ओशो की सबसे प्रसिद्ध रचनाएँ कौन सी हैं?
इनकी प्रमुख कृतियों में कालजयी शेर, ग़ज़लें और नज़्में शामिल हैं जो आज भी विश्वभर के पाठकों द्वारा पढ़ी जाती हैं।
ओशो का साहित्यिक योगदान और प्रभाव क्या है?
उन्होंने अपनी भाषा शैली और नए उपमानों के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों के रचनाकारों को गहराई से प्रेरित किया।
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ओशो की स्मृति में समर्पित स्मारक और ऐतिहासिक स्थल साहित्य प्रेमियों के लिए एक पवित्र धरोहर हैं।
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