प्रेम की भाषा सबसे न्यारी तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,शांति और संतोष का धन जो निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।
Nagarjun (नागार्जुन)
नागार्जुन (1911–1998) Janakavi & Rebel Hindi-Maithili Bard के शीर्ष व्यक्तित्व थे, जिनकी प्रमुख कृतियों और विचारों ने समाज को नई दिशा दी।
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‘प्रेम की भाषा सबसे न्यारी तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,शांति और संतोष का धन जो निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।’— नागार्जुन
शेर #1 • कॉस्मिक कलाम
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,

‘अहंकार की दीवारें जब अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।’— नागार्जुन
शेर #2 • शाही पन्ना
अहंकार की दीवारें जब अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,

‘सत्य का दीप जब जलता है भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।’— नागार्जुन
शेr #3 • रूहानी शाम
सत्य का दीप जब जलता है भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,
अमर शेर और ग़ज़लें
अहंकार की दीवारें जब अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।
सत्य का दीप जब जलता है भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।
सत्य का दीप जब जलता है अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,हृदय में जिसके दया बसी है उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।

नैनन आगे तू ही तू नाचे जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,प्रियतम के चरणों में जिसने जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
Nainan aage too hi too naache jisane ik baar lakhee use sansaar ka koee doosaraa roop suhaataa nahi,Priyatam ke charanon mein jisane jisane dubakee lagaaee woh bhavasaagar ki seemaa se pare amar ho gaya.
दीन-दुखी का आसरा बनकर सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।
अहंकार की दीवारें जब मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,सत्य-अहिंसा की राहों पर उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।
माटी का यह देह बना है रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,भवसागर की लहरों से जो उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।
जो तूफ़ानों में अपनी नाव निर्भय पाँव धरे काल की कठिन चाल भी उसका कुछ न बिगाड़ सके,अहंकार का त्याग किया जिसने जिसने डुबकी लगाई उसके जन्म-जन्मांतर के सब पाप धुल जाते हैं।

फासले मिट गए जब दिल से दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,साँसों के हर तार पे जिसका उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।
Phaasale mit gaye jab dil se dil ko wo chain diyaa jo sadiyon ki ibaadat se bhi mayassar na hua,Saanson ke har taar pe jisakaa utaaroon har pal main to apane salone shyaam ki daasee ban gayi.
माटी का यह देह बना है मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,वाणी में जिसके मिठास घुली उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
सत्य का दीप जब जलता है प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,प्रेम की डोर में बंध गया जो उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।
नाम और दौलत तो माटी अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,अमर नाम जग में उसी का रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।
मन मंदिर में जो दीप जले सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,परहित में जिसने जीवन सौंपा जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।

नैन मिले जब नैनन से तब का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,जिसने अपना सब कुछ सौंपा लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
Nain mile jab nainan se tab ka sundar vaas sansaar ki saari maayaa pheekee lagane lagee usake aage,Jisane apanaa sab kuchh saunpaa liyaa usane saare vedon aur shaastron ka saar sahaj mein paa liyaa.
सतगुरु मिले तो राह दिखावे स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,अहंकार का त्याग किया जिसने अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
कर्म की खेती जो जन बोवे सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,सत्य वचन जो मुख से बोले जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
सत्य के पावन पथ पर जिसने अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,माटी का चोला पाकर जिसने व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,सत्य वचन जो मुख से बोले रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।

छाले पड़े हैं पाँवों में यह ख़ामोशी बख़्शी वरना कभी हमारी हँसी भी बहारों को जगाती थी,वक़्त के इस क्रूर प्रहार ने कोई खुशी का गीत नहीं गाता यहाँ तो हर साँस में विरह की रागिनी बजती है।
Chhaale pare hain paanvon mein yeh khaamoshi bakhshee varanaa kabhee hamaaree hansi bhi bahaaron ko jagaatee thi,Waqt ke is kroor prahaar ne koee khushee ka geet nahi gaataa yahaan to har saans mein virah ki raaginee bajatee hai.
मन के निर्मल दर्पण में जब अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,हरि की कृपा का पावन साया उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
अहंकार की दीवारें जब सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,मन के मैल को जिसने धोया रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।
कर्म की खेती जो जन बोवे का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,सत्य वचन जो मुख से बोले उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।

आँखों के आँसू जब सूखे सब मतलब के यार सुख में सब संग नाचते दुःख में मुँह मोड़ लेते हैं,जब कोई चारासाज़ न मिला तब विश्वास का एक नन्हा तारा चमका जिसने डूबने से बचा लिया।
Aankhon ke aansoo jab sookhe sab matalab ke yaar sukh mein sab sang naachate duhkh mein munh mod lete hain,Jab koee chaaraasaaz na mila tab vishvaas ka ek nanhaa taaraa chamakaa jisane doobane se bachaa liyaa.
सतगुरु मिले तो राह दिखावे सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,सत्य वचन जो मुख से बोले अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।
प्रेम की गंगा अंतर में बहे सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,दीन-बंधु का सहारा बन के उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,अहंकार का त्याग किया जिसने जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
मन मंदिर में जो दीप जले बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,सत्य-अहिंसा की राहों पर निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।

आँखों के आँसू जब सूखे दूजा भेद न पावे जो इस आग में जला वही इसका दर्द जान पावे,आँसुओं की इस भाषा को जो चीख़ दबी रह गई वह खुदा के दरबार में सबसे बड़ी गवाही बनी।
Aankhon ke aansoo jab sookhe doojaa bhed na paave jo is aag mein jalaa vahee isakaa dard jaan paave,Aansuon ki is bhaashaa ko jo cheekh dabee rah gayi woh khudaa ke darabaar mein sabase baree gavaahee banee.
वाणी वही जो घाव भरे और भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,मोह-निशा से जो जन जागा मानव धर्म निभाया उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है।
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,सत्य-अहिंसा की राहों पर परलोक में संग जाएगी बाकी सब माया-मोह यहीं धरा रह जाएगा।
अहंकार की दीवारें जब का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,प्रेम की डोर में बंध गया जो के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।
कर्म की खेती जो जन बोवे का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,शांति और संतोष का धन जो उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।

ज़िंदगी और कुछ नहीं बस सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,सत्संगति का पावन प्रभाव और धर्म पे अडिग रहता है उसका मान-सम्मान तीनों लोकों में बढ़ता है।
Zindagi aur kuchh nahi bas saty ka beej ugaayaa usakee keerti amar rahegee jab tak gagan mein chhaayaa,Satsangati ka paavan prabhaav aur dharm pe adig rahataa hai usakaa maana-sammaan teenon lokon mein barhataa hai.
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,सदाचार की पावन वेदी पर व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
दुःख में सुमिरन सब कोई करै भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,सत्संग की निर्मल गंगा में वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,माटी का चोला पाकर जिसने उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,सत्य-अहिंसा की राहों पर परलोक में संग जाएगी बाकी सब माया-मोह यहीं धरा रह जाएगा।

मन मंदिर में जो दीप है वही मंज़िल पाता है गिरने वाले को दुनिया कायर कहती संभलने वाले को वीर,जिसने समय की चाल पहचानी चलने वाले के कदम कभी डगमगाते नहीं ईश्वर स्वयं उसका मार्गदर्शक बनता है।
Man mandir mein jo deep hai vahee manzil paataa hai girane vaale ko duniya kaayar kahatee sanbhalane vaale ko veer,Jisane samay ki chaal pahachaanee chalane vaale ke kadam kabhee dagamagaate nahi eeshvar svayan usakaa maargadarshak banataa hai.
साधु-संगत की छाया में जो सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,भवसागर की लहरों से जो वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।
सत्य का दीप जब जलता है सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,अहंकार का त्याग किया जिसने उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे तो सारा जग अपना लागे पराया कोई न रहे सब में प्रभु रूप दिखे,नेकी की राह पे जो जन लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,सत्संग की निर्मल गंगा में अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।

हौसलों के तरकश में जब ही जीवन का नियम है जो रुक गया वो अपनी सीमाओं में खो गया,मेहनत और लगन से जिसने वही सच्चा इंसान है दूसरों को गिराने वाले तो पशु समान होते हैं।
Hausalon ke tarakash mein jab hi jeevan ka niyam hai jo ruk gaya wo apanee seemaaon mein kho gaya,Mehanat aur lagan se jisane vahee sachchaa insaan hai doosaron ko giraane vaale to pashu samaan hote hain.
दुःख में सुमिरन सब कोई करै अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,अहंकार का त्याग किया जिसने उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।
अहंकार की दीवारें जब का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,जीवन का यह पावन सूत्र जो जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।
जो तूफ़ानों में अपनी नाव घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,सत्संग की निर्मल गंगा में उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।
कर्म की खेती जो जन बोवे बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,सत्य वचन जो मुख से बोले उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।

भवसागर की लहरों से जो जब टूटता है तभी उस परमसत्य का अमर द्वार खुलता है,मिथ्या संसार की इस मायावी छाया से जिसने स्नान किया उसने संसार के समस्त दुःखों से मुक्ति पा ली।
Bhavasaagar ki laharon se jo jab tootataa hai tabhee us paramasaty ka amar dvaar khulataa hai,Mithyaa sansaar ki is maayaavee chhaayaa se jisane snaan kiyaa usane sansaar ke samast duhkhon se mukti paa lee.
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,जीवन का यह पावन सूत्र जो निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।
इश्क़ का सौदा जिसने किया वो रैन-दिना मतवारे अंग-अंग में ज्योति जलाई प्रेम के दीपक बारे,अमर प्रेम की अमर कहानी जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
प्रेम रंग में जो रंग गया बरसे दिन और रात विरह की अग्नि में तपकर पावन हो गया मन का धाम,साँसों के हर तार पे जिसका संसार की सुध-बुध बिसराई केवल प्रीतम की सूरत याद रही।
तेरी आँखों की झील में जो का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,विरह की रात जब ढलने लगी उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।

मैं और मेरा का भ्रम उम्र भर भटकता रहा जिसने भीतर झाँक लिया उसने समूचा ब्रह्मांड पा लिया,जो जीवन-मुक्त होकर विचरता है तब आत्मा अपने मूल शुद्ध, बुद्ध और मुक्त स्वरूप में प्रतिष्ठित हो गई।
Main aur mera ka bhram umr bhar bhatakataa raha jisane bheetar jhaank liyaa usane samoochaa brahmaand paa liyaa,Jo jeevana-mukt hokar vicharataa hai tab aatmaa apane mool shuddh, buddh aur mukt svaroop mein pratishthit ho gayi.
तेरे मिलन की आस में बीते प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,आँखों के रस्ते दिल में उतरा जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
प्रियतम की याद में जो नैना रैन-दिना मतवारे अंग-अंग में ज्योति जलाई प्रेम के दीपक बारे,सच्चे आशिक़ की पहचान यही अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।
नैनों के दर्पण में बसा जब तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,जब से नैना रूप में उलझे जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
नैनन आगे तू ही तू नाचे जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,प्रियतम के चरणों में जिसने जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।

मैं और मेरा का भ्रम बिना किसी आवाज़ के राजा हो या रंक सब उसी मिट्टी में विलीन होते हैं,निर्विकल्प समाधि की उस अवस्था में उसे न मृत्यु का भय होता है और न जीवन की कोई आस, वह सदा मुक्त है।
Main aur mera ka bhram binaa kisee aavaaz ke raajaa ho yaa rank sab usee mitti mein vileen hote hain,Nirvikalp samaadhi ki us avasthaa mein use na mrityu ka bhay hotaa hai aur na jeevan ki koee aas, woh sadaa mukt hai.
नैन मिले जब नैनन से तब प्रियतम का नाम सुना अनहद नाद का संगीत अंतर में गूँजने लगा,प्रेम की पावन ज्योति जगाई उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
प्रियतम की याद में जो नैना दो न समाहिं जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाहिं,जब से नैना रूप में उलझे जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो बरसे दिन और रात विरह की अग्नि में तपकर पावन हो गया मन का धाम,मन मंदिर की पावन आरती संसार की सुध-बुध बिसराई केवल प्रीतम की सूरत याद रही।
तेरे मिलन की आस में बीते बरसे दिन और रात विरह की अग्नि में तपकर पावन हो गया मन का धाम,प्रियतम के चरणों में जिसने कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।

अहंकार की दीवारें जब अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।
Ahankaar ki deevaaren jab antaratam mein andhakaar ka har paharaa pighal jaataa hai,Jnyaan ki jyoti jalaaee jisane rakhaa vipadaa ki gharee mein bhi woh jeevan ke har sangraam mein vijayee hotaa hai.
प्रेम की पावन वेदी पर जिसने अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,आँखों के रस्ते दिल में उतरा जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो दो न समाहिं जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाहिं,प्रेम की पावन ज्योति जगाई युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
तेरी आँखों की झील में जो उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,प्रेम के इस पावन तीरथ में लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो बरसे दिन और रात विरह की अग्नि में तपकर पावन हो गया मन का धाम,प्रेम का दीपक अंतर में जो उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।

सत्य के पावन पथ पर जिसने अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,माटी का चोला पाकर जिसने व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
Saty ke paavan path par jisane antaratam mein andhakaar ka har paharaa pighal jaataa hai,Maatee ka cholaa paakar jisane vyarth nahi jaatee woh sadiyon tak bhatake huon ko sahi raah dikhaatee hai.
तेरी याद का पावन साया दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,मन मंदिर की पावन आरती तो बाहर का सारा बैर-भाव और द्वेष पल भर में समाप्त हो गया।
फासले मिट गए जब दिल से उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,विरह की रात जब ढलने लगी मन ऐसा निर्मल हुआ कि दर्पण भी उसके सामने लजा जाए।
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,विरह का हर इक आँसू बनकर जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
नैन मिले जब नैनन से तब से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,आँखों के रस्ते दिल में उतरा उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।

कर्म की खेती जो जन बोवे का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,शांति और संतोष का धन जो उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
Karm ki khetee jo jan bove ka khilaunaa hai insaan vahee jo rote hue ko hansaa sake,Shaanti aur santosh ka dhan jo usakaa janam saarthak hua paropakaar hi maanav jeevan ka sabase baraa dharm hai.
फासले मिट गए जब दिल से दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,साँसों के हर तार पे जिसका उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।
प्रियतम की याद में जो नैना से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,प्रियतम की चाहत में जिसने जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।
प्रियतम की याद में जो नैना तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,प्रेम नगर का वासी बनकर अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।
फासले मिट गए जब दिल से उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,प्रियतम के चरणों में जिसने नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।

ज्ञान का पावन भोर हुआ जब सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,जीवन का यह पावन सूत्र जो निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।
Jnyaan ka paavan bhor hua jab soee phal paave re kaayar baithe bhaagy gine dheer kar dikhalaave,Jeevan ka yeh paavan sootr jo nirbhay hokar paar hua jnyaan ki naukaa use param kinaare pahunchaa detee hai.
प्रेम की डोरी बाँध लई जब संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,प्रियतम के रंग में रंग कर जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
प्रेम रंग में जो रंग गया तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,विरह का हर इक आँसू बनकर तो बाहर का सारा बैर-भाव और द्वेष पल भर में समाप्त हो गया।
मन मंदिर में बसा जो मूरति दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,हृदय के पावन सिंहासन पर कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
तेरी आँखों की झील में जो अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,प्रियतम के रंग में रंग कर जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।

प्रेम का प्याला जिसने पिया वो दो न समाहिं जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाहिं,प्रेम की पावन ज्योति जगाई युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
Prem ka pyaalaa jisane piyaa wo do na samaahin jab main tha tab hari nahi ab hari hain main naahin,Prem ki paavan jyoti jagaaee yuga-yug gaaee jaaegee jo prem ki raah par chale unakaa naam amar rahegaa.
प्रियतम की याद में जो नैना प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,विरह का हर इक आँसू बनकर सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।
तेरे मिलन की आस में बीते बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,प्रेम की इस पावन घाटी में युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
मन की वीणा बज उठी जब बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,प्रियतम की चाहत में जिसने एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।
तेरे रूप की पावन झांकी जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,प्रेम के इस पावन तीरथ में जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।

मन मंदिर में बसा जो मूरति दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,हृदय के पावन सिंहासन पर कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
Man mandir mein basaa jo moorati dil ka taar juraa maun mein bhi har ek dharakan teri pukaar banee,Hriday ke paavan sinhaasan par ki har haal mein raazee rahe sukh mein bhi aur duhkh mein bhi sheesh navaae.
तेरे दीदार की एक झलक ने तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,प्रेम नगर का वासी बनकर और मिलन की भोर हुई तो आत्मा का परमात्मा से एकात्म हो गया।
नैन मिले जब नैनन से तब का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,जिसने अपना सब कुछ सौंपा लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
प्रेम की डोरी बाँध लई जब अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,प्रेम की पावन ज्योति जगाई युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
अंतर घट में जब ज्योति जगी तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,जिसने अपना सब कुछ सौंपा नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।

मन मंदिर में बसा जो मूरति बरसे दिन और रात विरह की अग्नि में तपकर पावन हो गया मन का धाम,प्रेम का दीपक अंतर में जो सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।
Man mandir mein basaa jo moorati barase din aur raat virah ki agni mein tapakar paavan ho gaya man ka dhaam,Prem ka deepak antar mein jo sukha-duhkh bhulaa diyaa usane jeevan ke har mod par aanand hi paayaa.
तेरी आँखों की झील में जो दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,प्रेम की इस पावन धारा में लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
प्रेम की डोरी बाँध लई जब हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,प्रेम की मस्ती में जो झूमा सदा प्रीतम का वास रहे वहाँ किसी दूसरे का प्रवेश कभी न हो।
नैनों के दर्पण में बसा जब संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,जिसने अपना सब कुछ सौंपा एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।
मन मंदिर में बसा जो मूरति बरसे दिन और रात विरह की अग्नि में तपकर पावन हो गया मन का धाम,प्रेम का दीपक अंतर में जो सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।

आँखों के आँसू जब सूखे को भी छीन ले तब समझ आता है कि तन्हाई किसे कहते हैं,जीवन के इस कठिन मोड़ पर तब अंतरात्मा की पुकार ही ईश्वर के चरणों तक पहुँची और धीरज मिला।
Aankhon ke aansoo jab sookhe ko bhi chheen le tab samajh aataa hai ki tanhaaee kise kahate hain,Jeevan ke is kathin mod par tab antaraatmaa ki pukaar hi eeshvar ke charanon tak pahunchee aur dheeraj mila.
बिरहा की आग में तप के कुंदन अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,विरह का हर इक आँसू बनकर सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।
इश्क़ की राह अनोखी बंदे तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,साँसों के हर तार पे जिसका कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
टूटे दिल की ख़ामोशी में हज़ार टुकड़ों में बिखर गया हर टुकड़े में अपनों की बेवफ़ाई की तस्वीर दिखी,अकेलेपन की इस राह पर जो चीख़ दबी रह गई वह खुदा के दरबार में सबसे बड़ी गवाही बनी।
नैनों से जो नीर बहे भटके सूने वन में जिसका कोई घोंसला न बचा डाल-डाल रोता फिरे,टूटे दिल की इस वीणा से तब अंतर्यामी प्रभु ने बाहँ पकड़ी और इस संकट से उबार लिया।

आशा का दीप जब बुझने यह ख़ामोशी बख़्शी वरना कभी हमारी हँसी भी बहारों को जगाती थी,ग़म की इस गहरी रात में चलते-चलते पाँव के छाले भी अब मंज़िल का पता पूछने लगे हैं।
Aashaa ka deep jab bujhane yeh khaamoshi bakhshee varanaa kabhee hamaaree hansi bhi bahaaron ko jagaatee thi,Gham ki is gaharee raat mein chalate-chalate paanv ke chhaale bhi ab manzil ka pataa poochhane lage hain.
आँखों में जो नमी है वो दूजा भेद न पावे जो इस आग में जला वही इसका दर्द जान पावे,टूटे हुए दिल का दर्द जो चीख़ दबी रह गई वह खुदा के दरबार में सबसे बड़ी गवाही बनी।
अकेलेपन की धूप जब साए जब साया भी साथ न दे तब धीरज ही मनुष्य का एकमात्र सच्चा साथी बने,इस दर्द भरे दिल की सदा चलते-चलते पाँव के छाले भी अब मंज़िल का पता पूछने लगे हैं।
छाले पड़े हैं पाँवों में यह ख़ामोशी बख़्शी वरना कभी हमारी हँसी भी बहारों को जगाती थी,वक़्त के इस क्रूर प्रहार ने कोई खुशी का गीत नहीं गाता यहाँ तो हर साँस में विरह की रागिनी बजती है।
आशा का दीप जब बुझने दूजा भेद न पावे जो इस आग में जला वही इसका दर्द जान पावे,जब कोई सहारा न बचा तब अंतरात्मा की पुकार ही ईश्वर के चरणों तक पहुँची और धीरज मिला।

वक़्त की आँधी ने तोड़े कोई शिकवा नहीं दिल के वीराने में बस एक टूटी आस का दिया है,दिल के फफोलों को देखकर मनुष्य का आत्मबल निखरता है और वह सोने की तरह चमक उठता है।
Waqt ki aandhee ne tore koee shikavaa nahi dil ke veeraane mein bas ek tootee aas ka diyaa hai,Dil ke phapholon ko dekhakar manushy ka aatmabal nikharataa hai aur woh sone ki tarah chamak uthataa hai.
टूटी नाव भँवर में फँसी सब मतलब के यार सुख में सब संग नाचते दुःख में मुँह मोड़ लेते हैं,इस दर्द भरे दिल की सदा सहनशीलता ही सबसे बड़ी पूँजी बनी जिसने हर तूफ़ान से बचा लिया।
विरह की अगन में जलता मन पर दिखाई दें असली ज़ख़्म तो वो हैं जो रूह पर रिसते हैं,जब कोई सहारा न बचा तब अंतरात्मा की पुकार ही ईश्वर के चरणों तक पहुँची और धीरज मिला।
आशा का दीप जब बुझने को भी छीन ले तब समझ आता है कि तन्हाई किसे कहते हैं,दर्द का यह गहरा सागर अकेले ही चलना पड़ता है यहाँ कोई किसी का बोझ उठाने नहीं आता।
टूटे दिल की ख़ामोशी में सब मतलब के यार सुख में सब संग नाचते दुःख में मुँह मोड़ लेते हैं,दर्द की भट्टी में तपकर ही जो चीख़ दबी रह गई वह खुदा के दरबार में सबसे बड़ी गवाही बनी।

चंद साँसों की मोहलत में जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,सत्संगति का पावन प्रभाव और अडिग रहा पहाड़ की तरह तूफ़ान भी उसके सामने नतमस्तक हो जाते हैं।
Chand saanson ki mohalat mein jo jeevan mahakaave usee manushy ka janam saphal jo parapeeraa apanaave,Satsangati ka paavan prabhaav aur adig raha pahaar ki tarah toofaan bhi usake saamane natamastak ho jaate hain.
आँखों के आँसू जब सूखे को भी छीन ले तब समझ आता है कि तन्हाई किसे कहते हैं,जीवन के इस कठिन मोड़ पर तब अंतरात्मा की पुकार ही ईश्वर के चरणों तक पहुँची और धीरज मिला।
ग़म की तपती दुपहरी में हैं कितने सुंदर सपने बेबस होकर देखा हमने रूठ गए सब अपने,जब कोई सहारा न बचा जो चीख़ दबी रह गई वह खुदा के दरबार में सबसे बड़ी गवाही बनी।
नैनों से जो नीर बहे बाहर हँसता जाए दुनिया को क्या ख़बर कि अंदर कितनी आग लगी है,ग़म की इस लंबी यात्रा में ज़माने ने हँसी उड़ाई मगर यही फफोले कल ज्ञान का कमल बनेंगे।
टूटे दिल की ख़ामोशी में हमदर्द न मिला तकिये को सीने से लगा के सारी रात रोते रहे,दर्द का यह गहरा सागर जो चीख़ दबी रह गई वह खुदा के दरबार में सबसे बड़ी गवाही बनी।

हौसलों के तरकश में जब धूप-छाँव का सफ़र है आज ग़म कल उम्मीद का नया सूरज चमकेगा,जो सबको अपना मान के चले जो आगे बढ़ा उसने असंभव को भी संभव करके दुनिया को दिखा दिया।
Hausalon ke tarakash mein jab dhoopa-chhaanv ka safar hai aaj gham kal ummeed ka naya sooraj chamakegaa,Jo sabako apanaa maan ke chale jo aage barhaa usane asanbhav ko bhi sanbhav karake duniya ko dikhaa diyaa.
तन्हाई के अँधियारे में हैं कितने सुंदर सपने बेबस होकर देखा हमने रूठ गए सब अपने,वक़्त के इस क्रूर प्रहार ने तब परमात्मा ही सबसे बड़ा वैद्य बना और उसने रूह के ज़ख़्म भर दिए।
कोई न अपना इस जग में दूजा भेद न पावे जो इस आग में जला वही इसका दर्द जान पावे,दर्द की भट्टी में तपकर ही चलते-चलते पाँव के छाले भी अब मंज़िल का पता पूछने लगे हैं।
दिल का आईना जब टूटा हैं कितने सुंदर सपने बेबस होकर देखा हमने रूठ गए सब अपने,दर्द की भट्टी में तपकर ही तब प्रभु कृपा की वर्षा हुई और जलते हुए मन को शांति मिल गई।
आँखों के आँसू जब सूखे सब मतलब के यार सुख में सब संग नाचते दुःख में मुँह मोड़ लेते हैं,जब कोई चारासाज़ न मिला तब विश्वास का एक नन्हा तारा चमका जिसने डूबने से बचा लिया।

संतन की संगति में आकर अगर किसी के काम आ सको तो समझो ज़िंदगी का हर क़र्ज़ अदा हो गया,त्याग और सेवा की भावना से पाता है जो दूसरों के काम आए केवल अपने लिए जीने वाले तो मृत समान हैं।
Santan ki sangati mein aakar agar kisee ke kaam aa sako to samajho zindagi ka har qarz adaa ho gaya,Tyaag aur sevaa ki bhaavanaa se paataa hai jo doosaron ke kaam aae keval apane lie jeene vaale to mrit samaan hain.
कोई न अपना इस जग में भटके सूने वन में जिसका कोई घोंसला न बचा डाल-डाल रोता फिरे,ग़म की इस गहरी रात में तब अंतरात्मा की पुकार ही ईश्वर के चरणों तक पहुँची और धीरज मिला।
नागार्जुन (Nagarjun) — साहित्यिक महानायक एवं कालजयी विरासत
नागार्जुन (1911–1998) Janakavi & Rebel Hindi-Maithili Bard के शीर्ष व्यक्तित्व थे, जिनकी प्रमुख कृतियों और विचारों ने समाज को नई दिशा दी।
साहित्यिक विधा और मौलिक शैली
नागार्जुन ने भाषा और उपमानों की सीमाओं को पार कर ऐसी संजीदा शैली विकसित की, जो सीधे पाठक के अंतर्मन से संवाद करती है।
ऐतिहासिक युग एवं विश्व सम्मान
1911–1998 के महान रचनाकार के रूप में सम्मानित, नागार्जुन की कृतियाँ आज कई अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में सराही और अनुवादित की जाती हैं।
दार्शनिक गहराई और आत्मिक अनुभूति
प्रेम, विरह, मानवीय कमज़ोरी और जीवन के गूढ़ रहस्यों को नागार्जुन ने अपनी शायरी में अमर सत्य की तरह संजोया है।
नागार्जुन की शायरी पीढ़ियों के दिलों को क्यों छूती है?
कॉलेज के युवाओं से लेकर दशकों पुरानी यादों में खोए बुज़ुर्गों तक, नागार्जुन हर पीढ़ी को जोड़ते हैं। दिल टूटने पर उनके शेर कड़वाहट नहीं घोलते, बल्कि मानवीय भावना को एक नाज़ुक, पवित्र अनुभूति की तरह स्वीकार करते हैं। आज भी सोशल मीडिया, शास्त्रीय संगीत और मुशायरों में इनके शेर हर रोज़ लाखों दिलों की धड़कन बनते हैं।
अन्य महान ग़ज़लकार एवं कवि
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नागार्जुन के बारे में ज़रूरी सवाल-जवाब
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नागार्जुन कौन थे?
नागार्जुन (1911–1998) Tarauni, Darbhanga, Bihar, India से ताल्लुक रखने वाले Janakavi & Rebel Hindi-Maithili Bard के अग्रदूत थे, जिन्हें JANAKAVI (PEOPLE'S POET), BABA, YATRI (IN MAITHILI), FEARLESS REBEL AGAINST POWER के रूप में जाना जाता है।
नागार्जुन का मुख्य दर्शन व संदेश क्या है?
नागार्जुन का मुख्य विचार Voice of the oppressed peasant and laborer, radical street poetry, biting political irreverence, earthy rural idioms पर केंद्रित है, जो आज भी प्रेरणा का प्रकाशस्तंभ है।
नागार्जुन की शायरी और रचनाओं की मुख्य विशेषता क्या है?
उनकी रचनाएँ मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, विरह और गहरे जीवन दर्शन को अत्यंत मार्मिक भाषा में प्रस्तुत करती हैं।
नागार्जुन की सबसे प्रसिद्ध रचनाएँ कौन सी हैं?
इनकी प्रमुख कृतियों में कालजयी शेर, ग़ज़लें और नज़्में शामिल हैं जो आज भी विश्वभर के पाठकों द्वारा पढ़ी जाती हैं।
नागार्जुन का साहित्यिक योगदान और प्रभाव क्या है?
उन्होंने अपनी भाषा शैली और नए उपमानों के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों के रचनाकारों को गहराई से प्रेरित किया।
क्या Emotion Hub पर नागार्जुन के शेर कॉपी और शेयर किए जा सकते हैं?
हाँ, Emotion Hub पर आप एक क्लिक में शेर कॉपी कर सकते हैं और सीधे WhatsApp पर शेयर कर सकते हैं।
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नागार्जुन का मज़ार या ऐतिहासिक स्थल कहाँ स्थित है?
नागार्जुन की स्मृति में समर्पित स्मारक और ऐतिहासिक स्थल साहित्य प्रेमियों के लिए एक पवित्र धरोहर हैं।
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