सत्य का दीप जब जलता है तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,शांति और संतोष का धन जो वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।
Moropant (मोरोपंत)
मोरोपंत पेशवा काल के शीर्षस्थ मराठी पंडित-कवि हैं, जिन्हें 'आर्या' छंद का सम्राट कहा जाता है। उनकी रचना 'केकावली' मराठी साहित्य का अनमोल रत्न है।
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‘सत्य का दीप जब जलता है तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,शांति और संतोष का धन जो वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।’— मोरोपंत
शेर #1 • कॉस्मिक कलाम
सत्य का दीप जब जलता है तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,

‘ज्ञान का पावन भोर हुआ जब माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,वाणी में जिसके मिठास घुली वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।’— मोरोपंत
शेर #2 • शाही पन्ना
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,

‘वाणी वही जो घाव भरे और जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,जीवन का यह पावन सूत्र जो के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।’— मोरोपंत
शेr #3 • रूहानी शाम
वाणी वही जो घाव भरे और जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,
अमर शेर और ग़ज़लें
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,वाणी में जिसके मिठास घुली वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।
वाणी वही जो घाव भरे और जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,जीवन का यह पावन सूत्र जो के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।
वाणी वही जो घाव भरे और अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।

तेरे मिलन की आस में बीते तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,प्रेम सुधा का रस जो चखा जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
Tere milan ki aas mein beete tera naam sanehee har ek dharakan mein teri hi vandanaa goonjatee hai,Prem sudhaa ka ras jo chakhaa jisane dubakee lagaaee woh bhavasaagar ki seemaa se pare amar ho gaya.
हरि सुमिरन में जिसका चित्त जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,मन के मैल को जिसने धोया व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
नाम और दौलत तो माटी रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,हरि की कृपा का पावन साया व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
मन के निर्मल दर्पण में जब अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,परहित में जिसने जीवन सौंपा रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।
नदिया की धारा बहती जावे मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।

फासले मिट गए जब दिल से जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,प्रियतम का अनुराग ही जिसका जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।
Phaasale mit gaye jab dil se jaise bin paani meen prem hi jeevan ka saar hai prem hi amrit ras,Priyatam ka anuraag hi jisakaa jisane ghat ke andar woh sansaar ke har praanee mein usee ka roop dekhataa hai.
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,धैर्य का दामन जिसने थामे लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।
संतन की संगति में आकर सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,शांति और संतोष का धन जो उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,मन के मैल को जिसने धोया लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।
अहंकार की दीवारें जब घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,माटी का चोला पाकर जिसने जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।

प्रेम बिना सब सूना जग में का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,प्रेम का दीपक अंतर में जो कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।
Prem binaa sab soonaa jag mein ka sundar vaas sansaar ki saari maayaa pheekee lagane lagee usake aage,Prem ka deepak antar mein jo ki khud ko mitaa ke priyatam ki khushee mein apanee khushee dhoondhataa hai.
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,मोह-निशा से जो जन जागा उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।
हरि सुमिरन में जिसका चित्त बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,हृदय में जिसके दया बसी है व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
हरि सुमिरन में जिसका चित्त सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,मोह-निशा से जो जन जागा रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।
जो तूफ़ानों में अपनी नाव स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,माटी का चोला पाकर जिसने व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।

घायल की गति घायल जाने जब कोई राह न सूझे तब टूटे दिल से निकली दुआ ही रास्ता दिखाती है,जब कोई सहारा न बचा तब अंतर्यामी प्रभु ने बाहँ पकड़ी और इस संकट से उबार लिया।
Ghaayal ki gati ghaayal jaane jab koee raah na soojhe tab toote dil se nikalee dua hi raasta dikhaatee hai,Jab koee sahaaraa na bachaa tab antaryaamee prabhu ne baahan pakaree aur is sankat se ubaar liyaa.
साधु-संगत की छाया में जो सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,परहित में जिसने जीवन सौंपा उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।
हरि सुमिरन में जिसका चित्त तो सारा जग अपना लागे पराया कोई न रहे सब में प्रभु रूप दिखे,परहित में जिसने जीवन सौंपा उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।
कर्म की खेती जो जन बोवे सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,साधु पुरुष की वाणी कभी उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
मन के निर्मल दर्पण में जब घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,साधु पुरुष की वाणी कभी उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।

आँखों के आँसू जब सूखे बाहर हँसता जाए दुनिया को क्या ख़बर कि अंदर कितनी आग लगी है,ग़म की इस गहरी रात में तब अंतर्यामी प्रभु ने बाहँ पकड़ी और इस संकट से उबार लिया।
Aankhon ke aansoo jab sookhe baahar hansataa jaae duniya ko kyaa khabar ki andar kitanee aag lagee hai,Gham ki is gaharee raat mein tab antaryaamee prabhu ne baahan pakaree aur is sankat se ubaar liyaa.
प्रेम की गंगा अंतर में बहे मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,मन के मैल को जिसने धोया रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।
माटी का यह देह बना है अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,सत्य वचन जो मुख से बोले निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,शांति और संतोष का धन जो जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।
मन मंदिर में जो दीप जले जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,सत्कर्मों की अमिट कमाई ही जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।

नैनों से जो नीर बहे जब कोई राह न सूझे तब टूटे दिल से निकली दुआ ही रास्ता दिखाती है,दिल के फफोलों को देखकर पार करना ही पड़ेगा किनारे पर बैठ कर रोने से कोई पार नहीं होता।
Nainon se jo neer bahe jab koee raah na soojhe tab toote dil se nikalee dua hi raasta dikhaatee hai,Dil ke phapholon ko dekhakar paar karanaa hi paregaa kinaare par baith kar rone se koee paar nahi hotaa.
वाणी में जो अमृत घोले अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,हृदय में जिसके दया बसी है व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।
माटी का यह देह बना है माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,माटी का चोला पाकर जिसने व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
साधु-संगत की छाया में जो जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,भवसागर की लहरों से जो वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।

कर्म की पावन वेदी पर ही जीवन का नियम है जो रुक गया वो अपनी सीमाओं में खो गया,धैर्य की नौका पर सवार होकर मनुष्य को देव बना देता है दुर्जन भी उसकी संगति से सज्जन हो जाते हैं।
Karm ki paavan vedee par hi jeevan ka niyam hai jo ruk gaya wo apanee seemaaon mein kho gaya,Dhairy ki naukaa par savaar hokar manushy ko dev banaa detaa hai durjan bhi usakee sangati se sajjan ho jaate hain.
धरती की छाती पर जिसने अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,धैर्य का दामन जिसने थामे निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।
हरि सुमिरन में जिसका चित्त तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,माटी का चोला पाकर जिसने अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
नदिया की धारा बहती जावे अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,सदाचार की पावन वेदी पर उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।
जो तूफ़ानों में अपनी नाव जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,मन के मैल को जिसने धोया मानव धर्म निभाया उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है।

नेकी की राह पे जो जन बिना रुके रात और दिन राजा हो या रंक सबको एक दिन मिट्टी में मिलना है,कर्मण्यता का पावन व्रत लेकर उसे कोई पराया नहीं लगता उसका हृदय विशाल सागर की तरह उदार होता है।
Nekee ki raah pe jo jan binaa ruke raat aur din raajaa ho yaa rank sabako ek din mitti mein milanaa hai,Karmanyataa ka paavan vrat lekar use koee paraayaa nahi lagataa usakaa hriday vishaal saagar ki tarah udaar hotaa hai.
हरि सुमिरन में जिसका चित्त जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,हरि की कृपा का पावन साया जिसने डुबकी लगाई उसके जन्म-जन्मांतर के सब पाप धुल जाते हैं।
सत्य के पावन पथ पर जिसने अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,अहंकार का त्याग किया जिसने व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
संतन की संगति में आकर स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,हरि की कृपा का पावन साया जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
वाणी में जो अमृत घोले भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,अहंकार का त्याग किया जिसने उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।

जीवन की इस रणभूमि में भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,सच्चे मित्र की पहचान यही मनुष्य को देव बना देता है दुर्जन भी उसकी संगति से सज्जन हो जाते हैं।
Jeevan ki is ranabhoomi mein bhaj le raam ka naamaa ant samay jab aavegaa tab sang na aave dhaamaa,Sachche mitr ki pahachaan yahee manushy ko dev banaa detaa hai durjan bhi usakee sangati se sajjan ho jaate hain.
माटी का यह देह बना है निर्भय पाँव धरे काल की कठिन चाल भी उसका कुछ न बिगाड़ सके,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे निर्भय पाँव धरे काल की कठिन चाल भी उसका कुछ न बिगाड़ सके,सदाचार की पावन वेदी पर जिसने डुबकी लगाई उसके जन्म-जन्मांतर के सब पाप धुल जाते हैं।
मन के निर्मल दर्पण में जब जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,शांति और संतोष का धन जो जिसने डुबकी लगाई उसके जन्म-जन्मांतर के सब पाप धुल जाते हैं।
वाणी में जो अमृत घोले बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,परहित में जिसने जीवन सौंपा जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।

मोह-निशा जब ढलती है बरसी जब साधक ने ध्यान लगाया जनम-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,जब द्वैत का सारा भ्रम मिट गया है जो समस्त कर्तापन के भाव से मुक्त होकर केवल साक्षी भाव में जीता है।
Moha-nishaa jab dhalatee hai barasee jab saadhak ne dhyaan lagaayaa janama-maran ka kathin pheraa sahaj hi kat gaya,Jab dvait ka saaraa bhram mit gaya hai jo samast kartaapan ke bhaav se mukt hokar keval saakshee bhaav mein jeetaa hai.
सत्य के पावन पथ पर जिसने अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,मन के मैल को जिसने धोया रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।
फासले मिट गए जब दिल से सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,सच्चे प्रेम की यही निशानी लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
तेरी आँखों की झील में जो दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,प्रेम नगर का वासी बनकर लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
साँसों की सरगम में घुल गया अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,विरह का हर इक आँसू बनकर सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।

जो भीतर झाँक के देखता एक वस्त्र बदलने का नाम है आत्मा अजर-अमर है और सदैव प्रकाशमान रहेगी,जब आत्मा ने जाना अपना सत्य स्वरूप तब आत्मा अपने मूल शुद्ध, बुद्ध और मुक्त स्वरूप में प्रतिष्ठित हो गई।
Jo bheetar jhaank ke dekhataa ek vastr badalane ka naam hai aatmaa ajara-amar hai aur sadaiv prakaashamaan rahegee,Jab aatmaa ne jaanaa apanaa saty svaroop tab aatmaa apane mool shuddh, buddh aur mukt svaroop mein pratishthit ho gayi.
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,प्रियतम का अनुराग ही जिसका सदा प्रीतम का वास रहे वहाँ किसी दूसरे का प्रवेश कभी न हो।
फासले मिट गए जब दिल से अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,विरह की रात जब ढलने लगी सदा प्रीतम का वास रहे वहाँ किसी दूसरे का प्रवेश कभी न हो।
प्रियतम की याद में जो नैना दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,प्रियतम के रंग में रंग कर जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
तेरे मिलन की आस में बीते तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,प्रेम सुधा का रस जो चखा जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।

माटी का यह देह बना बरसी जब साधक ने ध्यान लगाया जनम-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,निर्विकल्प समाधि की उस अवस्था में का दर्शन होने लगा तब कोई शत्रु न रहा और न कोई पराया बचा।
Maatee ka yeh deh banaa barasee jab saadhak ne dhyaan lagaayaa janama-maran ka kathin pheraa sahaj hi kat gaya,Nirvikalp samaadhi ki us avasthaa mein ka darshan hone lagaa tab koee shatru na raha aur na koee paraayaa bachaa.
प्रेम रंग में जो रंग गया से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,प्रियतम के रंग में रंग कर जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
नैन मिले जब नैनन से तब दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,प्रेम की मस्ती में जो झूमा जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।
प्रेम गली अति साँकरी जामें उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,हृदय के पावन सिंहासन पर युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम रैन-दिना मतवारे अंग-अंग में ज्योति जलाई प्रेम के दीपक बारे,विरह का हर इक आँसू बनकर सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।

ज्ञान का पावन भोर हुआ जब माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,वाणी में जिसके मिठास घुली वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।
Jnyaan ka paavan bhor hua jab maatee mein mil jaanaa lobh moh mad tyaag ke nij svaroop cheenh le,Vaanee mein jisake mithaas ghulee woh sabake man ko bhaataa hai katu vachan tyaag ke jo bole vahee sant kahaataa hai.
साँसों की सरगम में घुल गया दो न समाहिं जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाहिं,प्रियतम के चरणों में जिसने युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
तेरे मिलन की आस में बीते जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,प्रेम की इस पावन धारा में सदा प्रीतम का वास रहे वहाँ किसी दूसरे का प्रवेश कभी न हो।
मन की वीणा बज उठी जब जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,प्रियतम के रंग में रंग कर लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
नैनन आगे तू ही तू नाचे दो न समाहिं जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाहिं,मन मंदिर की पावन आरती जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।

हरि सुमिरन में जिसका चित्त सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,मोह-निशा से जो जन जागा रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।
Hari sumiran mein jisakaa chitt saty ka roop samaayaa jeevan ki har ulajhan ka sahaj samaadhaan paayaa,Moha-nishaa se jo jan jaagaa rahataa hai jisane doosaron ke aansoo ponchh kar unake cheharon pe muskaan laa dee.
तेरे दीदार की एक झलक ने जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,विरह की रात जब ढलने लगी जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।
प्रेम की डोरी बाँध लई जब तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,मन मंदिर की पावन आरती जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,प्रेम सुधा का रस जो चखा प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
फासले मिट गए जब दिल से उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,सच्चे आशिक़ की पहचान यही उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।

साधु-संगत की छाया में जो जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,भवसागर की लहरों से जो वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।
Saadhu-sangat ki chhaayaa mein jo jo jeevan mahakaave usee manushy ka janam saphal jo parapeeraa apanaave,Bhavasaagar ki laharon se jo woh sabake man ko bhaataa hai katu vachan tyaag ke jo bole vahee sant kahaataa hai.
फासले मिट गए जब दिल से जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,प्रियतम का अनुराग ही जिसका जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।
नैनन आगे तू ही तू नाचे उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,प्रेम का दीपक अंतर में जो तो बाहर का सारा बैर-भाव और द्वेष पल भर में समाप्त हो गया।
प्रेम गली अति साँकरी जामें दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,प्रेम की पावन ज्योति जगाई युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
प्रेम की डोरी बाँध लई जब संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,प्रेम सुधा का रस जो चखा जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।

सत्य के पावन पथ पर जिसने अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,मन के मैल को जिसने धोया रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।
Saty ke paavan path par jisane amrit ras ki varshaa bhaee janma-maran ka kathin pheraa sahaj hi kat gaya,Man ke mail ko jisane dhoyaa rakhaa vipadaa ki gharee mein bhi woh jeevan ke har sangraam mein vijayee hotaa hai.
इश्क़ का सौदा जिसने किया वो प्रियतम का नाम सुना अनहद नाद का संगीत अंतर में गूँजने लगा,प्रियतम का अनुराग ही जिसका मन ऐसा निर्मल हुआ कि दर्पण भी उसके सामने लजा जाए।
तेरी आँखों की झील में जो जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,प्रियतम के चरणों में जिसने उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।
प्रियतम की याद में जो नैना अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,अमर प्रेम की अमर कहानी अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।
अंतर घट में जब ज्योति जगी से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,प्रियतम का अनुराग ही जिसका कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।

तेरे मिलन की आस में बीते जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,प्रेम की इस पावन धारा में सदा प्रीतम का वास रहे वहाँ किसी दूसरे का प्रवेश कभी न हो।
Tere milan ki aas mein beete jisane ik baar lakhee use sansaar ka koee doosaraa roop suhaataa nahi,Prem ki is paavan dhaaraa mein sadaa preetam ka vaas rahe wahaan kisee doosare ka pravesh kabhee na ho.
अंतर घट में जब ज्योति जगी उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,अमर प्रेम की अमर कहानी युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,अमर प्रेम की अमर कहानी एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।
साँसों की सरगम में घुल गया से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,प्रेम की मस्ती में जो झूमा लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
प्रेम बिना सब सूना जग में प्रियतम का नाम सुना अनहद नाद का संगीत अंतर में गूँजने लगा,प्रेम की इस पावन घाटी में अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।

प्रियतम की याद में जो नैना अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,अमर प्रेम की अमर कहानी अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।
Priyatam ki yaad mein jo nainaa antar ghat mein saanchee duniya ki sudha-budh bisaraaee man ki veenaa baajee,Amar prem ki amar kahaanee apanee sudh bisaraaee usane janama-maran ke bandhan ko sadaa ke lie tor diyaa.
प्रेम गली अति साँकरी जामें उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,जब से नैना रूप में उलझे उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
प्रेम बिना सब सूना जग में का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,प्रेम का दीपक अंतर में जो कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।
मन मंदिर में बसा जो मूरति हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,सच्चे आशिक़ की पहचान यही जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।
प्रेम रंग में जो रंग गया संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,आँखों के रस्ते दिल में उतरा जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।

प्रेम का प्याला जिसने पिया वो डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,जिसने अपना सब कुछ सौंपा जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
Prem ka pyaalaa jisane piyaa wo doob gaya ik baar use kinaare ki koee aarazoo baaqee na rahi,Jisane apanaa sab kuchh saunpaa jo roop salonaa usane jeevan ke har andhiyaare ko mitaa daalaa.
प्रियतम की याद में जो नैना अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,प्रियतम के चरणों में जिसने अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।
इश्क़ का सौदा जिसने किया वो डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,मन मंदिर की पावन आरती प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
प्रियतम की याद में जो नैना डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,अमर प्रेम की अमर कहानी अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,जिसने अपना सब कुछ सौंपा जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।

कोई न अपना इस जग में चीख़ छुपी है भारी किसको अपना हाल सुनाएँ दुनिया मतलबी सारी,इस दर्द भरे दिल की सदा केवल विरह का सुर निकलता है जो सुनने वालों के दिल को चीर देता है।
Koee na apanaa is jag mein cheekh chhupee hai bhaaree kisako apanaa haal sunaaen duniya matalabee saari,Is dard bhare dil ki sadaa keval virah ka sur nikalataa hai jo sunane vaalon ke dil ko cheer detaa hai.
तेरे रूप की पावन झांकी बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,आँखों के रस्ते दिल में उतरा संसार की सुध-बुध बिसराई केवल प्रीतम की सूरत याद रही।
मन मंदिर में बसा जो मूरति हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,जिसने प्रेम का मर्म समझ जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
घायल की गति घायल जाने जब साया भी साथ न दे तब धीरज ही मनुष्य का एकमात्र सच्चा साथी बने,आँसुओं की इस भाषा को चलते-चलते पाँव के छाले भी अब मंज़िल का पता पूछने लगे हैं।
जिसके दिल पर बीत रही जीवन की वीराणी किसको दिखाएँ अपने दिल के ये गहरे ज़ख़्म,ग़म की इस आँधी ने जब तो ग़ैरों से क्या शिकवा करना दिल ने चुपचाप सब कुछ सहना सीख लिया।

टूटी नाव भँवर में फँसी लगे तब जीवन में घोर निराशा छाए परमात्मा का ही आसरा शेष रहे,वक़्त के इस क्रूर प्रहार ने कोई खुशी का गीत नहीं गाता यहाँ तो हर साँस में विरह की रागिनी बजती है।
Tootee naav bhanvar mein phansee lage tab jeevan mein ghor niraashaa chhaae paramaatmaa ka hi aasaraa shesh rahe,Waqt ke is kroor prahaar ne koee khushee ka geet nahi gaataa yahaan to har saans mein virah ki raaginee bajatee hai.
सपनों के महल जब टूटे कोई शिकवा नहीं दिल के वीराने में बस एक टूटी आस का दिया है,जब कोई सहारा न बचा ज़माने ने हँसी उड़ाई मगर यही फफोले कल ज्ञान का कमल बनेंगे।
भीतर-भीतर घुटता जाए सोई जाने पीर पराई दुनिया तो तमाशा देखती है कोई दर्द नहीं बाँटता,अकेलेपन की इस राह पर जो चीख़ दबी रह गई वह खुदा के दरबार में सबसे बड़ी गवाही बनी।
घायल की गति घायल जाने जब कोई राह न सूझे तब टूटे दिल से निकली दुआ ही रास्ता दिखाती है,जब कोई सहारा न बचा तब अंतर्यामी प्रभु ने बाहँ पकड़ी और इस संकट से उबार लिया।
दिल का आईना जब टूटा बाहर हँसता जाए दुनिया को क्या ख़बर कि अंदर कितनी आग लगी है,दिल के फफोलों को देखकर केवल वही समझ सकता है जिसके सीने में कभी ऐसा ही घाव लगा हो।

ग़म की तपती दुपहरी में यह ख़ामोशी बख़्शी वरना कभी हमारी हँसी भी बहारों को जगाती थी,जब कोई चारासाज़ न मिला तब अंतर्यामी प्रभु ने बाहँ पकड़ी और इस संकट से उबार लिया।
Gham ki tapatee dupaharee mein yeh khaamoshi bakhshee varanaa kabhee hamaaree hansi bhi bahaaron ko jagaatee thi,Jab koee chaaraasaaz na mila tab antaryaamee prabhu ne baahan pakaree aur is sankat se ubaar liyaa.
सपनों के महल जब टूटे अंतर घट को तोड़े अकेलेपन की धूप में जब साया भी मुँह मोड़े,ज़िंदगी की इस सूनी डगर पर केवल विरह का सुर निकलता है जो सुनने वालों के दिल को चीर देता है।
दिल का आईना जब टूटा सब मतलब के यार सुख में सब संग नाचते दुःख में मुँह मोड़ लेते हैं,अंधेरी रात के सन्नाटे में जो चीख़ दबी रह गई वह खुदा के दरबार में सबसे बड़ी गवाही बनी।
ज़ख़्म वो नहीं जो जिस्म रेत की दीवार की तरह तब समझ आया कि संसार की माया सब झूठी है,ग़म की इस लंबी यात्रा में ज़माने ने हँसी उड़ाई मगर यही फफोले कल ज्ञान का कमल बनेंगे।
टूटे दिल की ख़ामोशी में जब कोई राह न सूझे तब टूटे दिल से निकली दुआ ही रास्ता दिखाती है,अकेलेपन की इस राह पर सारे भ्रम तोड़ डाले और जीवन की नग्न सच्चाई से सामना करा दिया।

कर्म प्रधान विश्व रचि राखा अगर उठने का हौसला हो हर ठोकर इंसान को चलने का नया हुनर सिखाती है,जीवन का असली आनंद वही तब केवल सत्कर्म ही साथ चलेंगे बाकी सब धन-दौलत यहीं धरा रह जाएगा।
Karm pradhaan vishv rachi raakhaa agar uthane ka hausalaa ho har thokar insaan ko chalane ka naya hunar sikhaatee hai,Jeevan ka asalee aanand vahee tab keval satkarm hi saath chalenge baakee sab dhana-daulat yaheen dharaa rah jaaegaa.
कोई न अपना इस जग में चीख़ छुपी है भारी किसको अपना हाल सुनाएँ दुनिया मतलबी सारी,इस दर्द भरे दिल की सदा केवल विरह का सुर निकलता है जो सुनने वालों के दिल को चीर देता है।
छाले पड़े हैं पाँवों में हासिल-ए-ज़िंदगी यह अकेलापन राहों में भटकते रहे कोई किनारा न मिला,दिल के फफोलों को देखकर तब प्रभु कृपा की वर्षा हुई और जलते हुए मन को शांति मिल गई।
दिल का आईना जब टूटा हज़ार टुकड़ों में बिखर गया हर टुकड़े में अपनों की बेवफ़ाई की तस्वीर दिखी,जब कोई चारासाज़ न मिला तब परमात्मा ही सबसे बड़ा वैद्य बना और उसने रूह के ज़ख़्म भर दिए।
वक़्त की आँधी ने तोड़े अंतर घट को तोड़े अकेलेपन की धूप में जब साया भी मुँह मोड़े,दर्द की इस एकांत गुफ़ा में सहनशीलता ही सबसे बड़ी पूँजी बनी जिसने हर तूफ़ान से बचा लिया।

सच्ची लगन से जो जन चलता है अविचल होकर उसके कदम चूमती हैं मंज़िलें बाधाएँ दूर भागती हैं,जिसने अहंकार को त्याग दिया उसे किसी वैभव की चाह नहीं उसका मन सदा शांत सरोवर की तरह रहता है।
Sachchee lagan se jo jan chalataa hai avichal hokar usake kadam choomatee hain manzilen baadhaaen door bhaagatee hain,Jisane ahankaar ko tyaag diyaa use kisee vaibhav ki chaah nahi usakaa man sadaa shaant sarovar ki tarah rahataa hai.
टूटी नाव भँवर में फँसी अंतर घट को तोड़े अकेलेपन की धूप में जब साया भी मुँह मोड़े,इस दर्द भरे दिल की सदा तब विश्वास का एक नन्हा तारा चमका जिसने डूबने से बचा लिया।
विरह की अगन में जलता मन दूजा भेद न पावे जो इस आग में जला वही इसका दर्द जान पावे,टूटे हुए दिल का दर्द पार करना ही पड़ेगा किनारे पर बैठ कर रोने से कोई पार नहीं होता।
सपनों के महल जब टूटे जीवन की वीराणी किसको दिखाएँ अपने दिल के ये गहरे ज़ख़्म,दर्द की भट्टी में तपकर ही तन्हाई ही अब संग चलती है साया भी धूप ढलते ही साथ छोड़ जाता है।
आँखों के आँसू जब सूखे बाहर हँसता जाए दुनिया को क्या ख़बर कि अंदर कितनी आग लगी है,ग़म की इस गहरी रात में तब अंतर्यामी प्रभु ने बाहँ पकड़ी और इस संकट से उबार लिया।

हौसलों के तरकश में जब मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,कर्म की खेती में जो पसीना कि संकट के समय ढाल बन जाए सुख में तो सारी दुनिया साथ चलती है।
Hausalon ke tarakash mein jab man ka mail dhulaave paaras ka paras paakar jaise lohaa kanchan ho jaave,Karm ki khetee mein jo paseenaa ki sankat ke samay dhaal ban jaae sukh mein to saari duniya saath chalatee hai.
वक़्त के थपेड़ों ने हमें हमदर्द न मिला तकिये को सीने से लगा के सारी रात रोते रहे,ग़म की इस लंबी यात्रा में तो ग़ैरों से क्या शिकवा करना दिल ने चुपचाप सब कुछ सहना सीख लिया।
मोरोपंत (Moropant) — साहित्यिक महानायक एवं कालजयी विरासत
मोरोपंत पेशवा काल के शीर्षस्थ मराठी पंडित-कवि हैं, जिन्हें 'आर्या' छंद का सम्राट कहा जाता है। उनकी रचना 'केकावली' मराठी साहित्य का अनमोल रत्न है।
साहित्यिक विधा और मौलिक शैली
मोरोपंत ने भाषा और उपमानों की सीमाओं को पार कर ऐसी संजीदा शैली विकसित की, जो सीधे पाठक के अंतर्मन से संवाद करती है।
ऐतिहासिक युग एवं विश्व सम्मान
Peshwa Era (1729–1794) के महान रचनाकार के रूप में सम्मानित, मोरोपंत की कृतियाँ आज कई अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में सराही और अनुवादित की जाती हैं।
दार्शनिक गहराई और आत्मिक अनुभूति
प्रेम, विरह, मानवीय कमज़ोरी और जीवन के गूढ़ रहस्यों को मोरोपंत ने अपनी शायरी में अमर सत्य की तरह संजोया है।
मोरोपंत की शायरी पीढ़ियों के दिलों को क्यों छूती है?
कॉलेज के युवाओं से लेकर दशकों पुरानी यादों में खोए बुज़ुर्गों तक, मोरोपंत हर पीढ़ी को जोड़ते हैं। दिल टूटने पर उनके शेर कड़वाहट नहीं घोलते, बल्कि मानवीय भावना को एक नाज़ुक, पवित्र अनुभूति की तरह स्वीकार करते हैं। आज भी सोशल मीडिया, शास्त्रीय संगीत और मुशायरों में इनके शेर हर रोज़ लाखों दिलों की धड़कन बनते हैं।
अन्य महान ग़ज़लकार एवं कवि
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पसंद का शेर चुनिए, मनपसंद टेम्पलेट लगाइए, फ़ॉन्ट और रंग सजाइए और एक क्लिक में सेव कर लीजिए।
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“तेरी खामोशियों में भी एक कायनात बसती है...”
EmotionHub.in • Cosmic Poetryहर मौक़े और हर अपने के लिए संदेश
जिसके लिए लिखना है, उसे या कोई त्योहार चुनिए और तैयार संग्रह खोल लीजिए।
- पापा का जन्मदिनजिन्होंने उँगली पकड़कर चलना सिखाया
- सालगिरह की बधाईजोड़ों के लिए मीठी-सी पंक्तियाँ
- परिवार को सुप्रभातघर के ग्रुप के लिए सुबह की शुरुआत
- प्यार भरी शुभ रात्रिसोने से पहले भेजने लायक़ बातें
- दिवाली की बधाईअपनों के लिए रोशनी भरे संदेश
- होली की बधाईरंगों वाले संदेश दोस्तों के नाम
- ईद मुबारकअपनों तक पहुँचाइए ईद की ख़ुशी
- साथी को विदाईसहकर्मी के लिए अपनापन भरे अल्फ़ाज़
- सफलता पर बधाईकिसी की बड़ी जीत पर हौसला बढ़ाइए
- किसी की याद मेंजब दूरी कुछ ज़्यादा ही लंबी लगे
- दोस्त का जन्मदिनयार के लिए हँसी-ख़ुशी वाली दुआएँ
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मोरोपंत के बारे में ज़रूरी सवाल-जवाब
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मोरोपंत कौन थे और उनका साहित्यिक योगदान क्या है?
मोरोपंत (1729–1794) Marathi/Classical साहित्य के शीर्ष हस्ताक्षर हैं, जिनकी रचनाओं ने मानवीय संवेदना, जीवन दर्शन और आध्यात्मिक प्रेम को अमर अभिव्यक्ति दी।
मोरोपंत की रचनाओं के मुख्य विषय क्या हैं?
मोरोपंत की रचनाओं के केंद्र में सत्संगति, सुविचार व मन की शुद्धि, आर्या छंद का अद्भुत सौन्दर्य, महाभारत के प्रसंगों का गांभीर्य, ईश्वर-कृपा की करुण याचना, पंडिताऊ पांडित्य व भाषा-प्रभुत्व जैसे विषय हैं, जो हृदयस्पर्शी अभिव्यक्ति और गहरे जीवन-सत्य से परिपूर्ण हैं।
मोरोपंत की शायरी और रचनाओं की मुख्य विशेषता क्या है?
उनकी रचनाएँ मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, विरह और गहरे जीवन दर्शन को अत्यंत मार्मिक भाषा में प्रस्तुत करती हैं।
मोरोपंत की सबसे प्रसिद्ध रचनाएँ कौन सी हैं?
इनकी प्रमुख कृतियों में कालजयी शेर, ग़ज़लें और नज़्में शामिल हैं जो आज भी विश्वभर के पाठकों द्वारा पढ़ी जाती हैं।
मोरोपंत का साहित्यिक योगदान और प्रभाव क्या है?
उन्होंने अपनी भाषा शैली और नए उपमानों के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों के रचनाकारों को गहराई से प्रेरित किया।
क्या Emotion Hub पर मोरोपंत के शेर कॉपी और शेयर किए जा सकते हैं?
हाँ, Emotion Hub पर आप एक क्लिक में शेर कॉपी कर सकते हैं और सीधे WhatsApp पर शेयर कर सकते हैं।
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हाँ, आप 300 DPI वॉलपेपर क्वालिटी में टेक्स्ट के साथ तैयार कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं या डिज़ाइन स्टूडियो में कस्टमाइज़ कर सकते हैं।
मोरोपंत का मज़ार या ऐतिहासिक स्थल कहाँ स्थित है?
मोरोपंत की स्मृति में समर्पित स्मारक और ऐतिहासिक स्थल साहित्य प्रेमियों के लिए एक पवित्र धरोहर हैं।
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