साधु-संगत की छाया में जो अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,सत्संग की निर्मल गंगा में उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।
Michel Foucault (मिशेल फूको)
मिशेल फूको (1926–1984) Theorist of Power, Knowledge & Surveillance के शीर्ष व्यक्तित्व थे, जिनकी प्रमुख कृतियों और विचारों ने समाज को नई दिशा दी।
डाउनलोड करें मिशेल फूको के एस्थेटिक स्टोरी कार्ड्स

‘साधु-संगत की छाया में जो अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,सत्संग की निर्मल गंगा में उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।’— मिशेल फूको
शेर #1 • कॉस्मिक कलाम
साधु-संगत की छाया में जो अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,

‘कर्म की खेती जो जन बोवे सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,मोह-निशा से जो जन जागा अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।’— मिशेल फूको
शेर #2 • शाही पन्ना
कर्म की खेती जो जन बोवे सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,

‘संतन की संगति में आकर सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,माटी का चोला पाकर जिसने अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।’— मिशेल फूको
शेr #3 • रूहानी शाम
संतन की संगति में आकर सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,
अमर शेर और ग़ज़लें
कर्म की खेती जो जन बोवे सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,मोह-निशा से जो जन जागा अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।
संतन की संगति में आकर सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,माटी का चोला पाकर जिसने अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।
अहंकार की दीवारें जब मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,साधु पुरुष की वाणी कभी उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।

तेरी आँखों की झील में जो अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,आँखों के रस्ते दिल में उतरा उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
Teri aankhon ki jheel mein jo antar ghat mein saanchee duniya ki sudha-budh bisaraaee man ki veenaa baajee,Aankhon ke raste dil mein utaraa use indr ka amrit bhi pheekaa lage woh to prem ras mein tript ho gaya.
दुःख में सुमिरन सब कोई करै तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,साधु पुरुष की वाणी कभी जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।
प्रेम की गंगा अंतर में बहे मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,साधु पुरुष की वाणी कभी लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।
प्रेम की गंगा अंतर में बहे घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,भवसागर की लहरों से जो रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।

तेरे दीदार की एक झलक ने तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,प्रियतम के रंग में रंग कर जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
Tere deedaar ki ek jhalak ne tana-man vaar diyaa usane prem ke alaukik lok mein apanaa sthaan banaa liyaa,Priyatam ke rang mein rang kar jisane dubakee lagaaee woh bhavasaagar ki seemaa se pare amar ho gaya.
नाम और दौलत तो माटी सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।
सत्य का दीप जब जलता है प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,अमर नाम जग में उसी का उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।
आशा तृष्णा सब छूटी जब भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,मन के मैल को जिसने धोया उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।
आशा तृष्णा सब छूटी जब सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,सत्य वचन जो मुख से बोले मानव धर्म निभाया उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है।

प्रेम की डोरी बाँध लई जब हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,मन मंदिर की पावन आरती सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।
Prem ki doree baandh laee jab haradam sheesh navaanaa khud ko khokar priyatam paanaa jag ka bharam bhulaanaa,Man mandir ki paavan aaratee sukha-duhkh bhulaa diyaa usane jeevan ke har mod par aanand hi paayaa.
दुःख में सुमिरन सब कोई करै बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,सत्य वचन जो मुख से बोले मानव धर्म निभाया उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है।
वाणी में जो अमृत घोले अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,धैर्य का दामन जिसने थामे वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।
माटी का यह देह बना है सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,वाणी में जिसके मिठास घुली अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।
सत्य के पावन पथ पर जिसने सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,प्रेम की डोर में बंध गया जो मानव धर्म निभाया उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है।

वक़्त के थपेड़ों ने हमें हज़ार टुकड़ों में बिखर गया हर टुकड़े में अपनों की बेवफ़ाई की तस्वीर दिखी,दर्द की इस एकांत गुफ़ा में केवल वही पढ़ सकता है जिसने ख़ुद रात-रात भर जाग कर दर्द सहा हो।
Waqt ke thaperon ne hamen hazaar tukaron mein bikhar gaya har tukare mein apanon ki bevafaaee ki tasveer dikhee,Dard ki is ekaant gufaa mein keval vahee parh sakataa hai jisane khud raata-raat bhar jaag kar dard sahaa ho.
मन मंदिर में जो दीप जले अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।
नदिया की धारा बहती जावे रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,सदाचार की पावन वेदी पर उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।
प्रेम की गंगा अंतर में बहे प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,अमर नाम जग में उसी का उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।
सत्य का दीप जब जलता है मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,सत्य वचन जो मुख से बोले अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।

विरह की अगन में जलता मन जब कोई राह न सूझे तब टूटे दिल से निकली दुआ ही रास्ता दिखाती है,अकेलेपन की इस राह पर तब अंतर्यामी प्रभु ने बाहँ पकड़ी और इस संकट से उबार लिया।
Virah ki agan mein jalataa man jab koee raah na soojhe tab toote dil se nikalee dua hi raasta dikhaatee hai,Akelepan ki is raah par tab antaryaamee prabhu ne baahan pakaree aur is sankat se ubaar liyaa.
साधु-संगत की छाया में जो बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,जीवन का यह पावन सूत्र जो जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,भवसागर की लहरों से जो अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।
दीन-दुखी का आसरा बनकर तो सारा जग अपना लागे पराया कोई न रहे सब में प्रभु रूप दिखे,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।
हरि सुमिरन में जिसका चित्त अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,भवसागर की लहरों से जो उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।

घायल की गति घायल जाने हज़ार टुकड़ों में बिखर गया हर टुकड़े में अपनों की बेवफ़ाई की तस्वीर दिखी,जीवन के इस कठिन मोड़ पर तब अंतर्यामी प्रभु ने बाहँ पकड़ी और इस संकट से उबार लिया।
Ghaayal ki gati ghaayal jaane hazaar tukaron mein bikhar gaya har tukare mein apanon ki bevafaaee ki tasveer dikhee,Jeevan ke is kathin mod par tab antaryaamee prabhu ne baahan pakaree aur is sankat se ubaar liyaa.
संतन की संगति में आकर सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,नेकी की राह पे जो जन निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।
सत्य का दीप जब जलता है घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,वाणी में जिसके मिठास घुली उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,हरि की कृपा का पावन साया लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,नेकी की राह पे जो जन उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।

माटी का यह चोला पाकर जले तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,सत्य और धर्म की राहों पर है जो दूसरों के चेहरे पे मुस्कान लाए दौलत तो हाथ का मैल है।
Maatee ka yeh cholaa paakar jale to baahar tam na sataave aatmajnyaan ki paavan gangaa bhavasaagar tar jaave,Saty aur dharm ki raahon par hai jo doosaron ke chehare pe muskaan laae daulat to haath ka mail hai.
नाम और दौलत तो माटी माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,अमर नाम जग में उसी का लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।
सत्य के पावन पथ पर जिसने अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,साधु पुरुष की वाणी कभी उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,धैर्य का दामन जिसने थामे अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।
दुःख में सुमिरन सब कोई करै तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,सत्य वचन जो मुख से बोले उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।

कर्म प्रधान विश्व रचि राखा बिना रुके रात और दिन राजा हो या रंक सबको एक दिन मिट्टी में मिलना है,संतोषी सदा सुखी रहता है उसने सब कुछ पा लिया नम्रता ही सबसे बड़ा आभूषण और गुण है।
Karm pradhaan vishv rachi raakhaa binaa ruke raat aur din raajaa ho yaa rank sabako ek din mitti mein milanaa hai,Santoshee sadaa sukhee rahataa hai usane sab kuchh paa liyaa namrataa hi sabase baraa aabhooshan aur gun hai.
नदिया की धारा बहती जावे सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,सदाचार की पावन वेदी पर लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।
कर्म की खेती जो जन बोवे निर्भय पाँव धरे काल की कठिन चाल भी उसका कुछ न बिगाड़ सके,दीन-बंधु का सहारा बन के उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।
कर्म की खेती जो जन बोवे प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,जीवन का यह पावन सूत्र जो जिसने डुबकी लगाई उसके जन्म-जन्मांतर के सब पाप धुल जाते हैं।
प्रेम की गंगा अंतर में बहे भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,मन के मैल को जिसने धोया अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।

कर्म प्रधान विश्व रचि राखा मेहनत की राह पे चला उसने बंजर धरती से भी सोना उपजा के दिखा दिया,सदाचार के पावन नियमों पर उसे कोई पराया नहीं लगता उसका हृदय विशाल सागर की तरह उदार होता है।
Karm pradhaan vishv rachi raakhaa mehanat ki raah pe chalaa usane banjar dharatee se bhi sonaa upajaa ke dikhaa diyaa,Sadaachaar ke paavan niyamon par use koee paraayaa nahi lagataa usakaa hriday vishaal saagar ki tarah udaar hotaa hai.
संतन की संगति में आकर जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,शांति और संतोष का धन जो उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,मोह-निशा से जो जन जागा उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।
कर्म की खेती जो जन बोवे सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,नेकी की राह पे जो जन अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,हरि की कृपा का पावन साया रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।

माटी का यह देह बना अविचल क़दम बढ़ाया उसका जनम सफल जग जाने अमर नाम कर गया,वैराग्य की इस पावन धारा में तब वह निस्पंद, प्रशांत और असीम आनंद के सागर में निमग्न हो गया।
Maatee ka yeh deh banaa avichal qadam barhaayaa usakaa janam saphal jag jaane amar naam kar gaya,Vairaagy ki is paavan dhaaraa mein tab woh nispand, prashaant aur aseem aanand ke saagar mein nimagn ho gaya.
सतगुरु मिले तो राह दिखावे प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,प्रेम की डोर में बंध गया जो रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।
साँसों की सरगम में घुल गया बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,आँखों के रस्ते दिल में उतरा कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
इश्क़ की राह अनोखी बंदे का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,जिसने अपना सब कुछ सौंपा तो बाहर का सारा बैर-भाव और द्वेष पल भर में समाप्त हो गया।
बिरहा की आग में तप के कुंदन जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,प्रियतम के चरणों में जिसने उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।

मैं और मेरा का भ्रम पार उतरना हो तो हरि नाम की पावन नौका का आश्रय लेना पड़ता है,परम चेतना का आलोक जब फैला है जो समस्त कर्तापन के भाव से मुक्त होकर केवल साक्षी भाव में जीता है।
Main aur mera ka bhram paar utaranaa ho to hari naam ki paavan naukaa ka aashray lenaa padta hai,Param chetanaa ka aalok jab phailaa hai jo samast kartaapan ke bhaav se mukt hokar keval saakshee bhaav mein jeetaa hai.
साँसों की सरगम में घुल गया जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,साँसों के हर तार पे जिसका जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
प्रेम की डोरी बाँध लई जब सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,प्रेम का दीपक अंतर में जो जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।
इश्क़ का सौदा जिसने किया वो तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,हृदय के पावन सिंहासन पर सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।
तेरी आँखों की झील में जो अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,आँखों के रस्ते दिल में उतरा उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।

मन की चंचलता को जिसने उम्र भर भटकता रहा जिसने भीतर झाँक लिया उसने समूचा ब्रह्मांड पा लिया,मिथ्या संसार की इस मायावी छाया से तब साधना पूर्ण हुई और भक्त भगवान के स्वरूप में ही विलीन हो गया।
Man ki chanchalataa ko jisane umr bhar bhatakataa raha jisane bheetar jhaank liyaa usane samoochaa brahmaand paa liyaa,Mithyaa sansaar ki is maayaavee chhaayaa se tab saadhanaa poorn hui aur bhakt bhagavaan ke svaroop mein hi vileen ho gaya.
तेरे रूप की पावन झांकी हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,प्रेम सुधा का रस जो चखा मोती चमका प्रेम की सीपी में अनमोल ज्ञान का रत्न बन गया।
इश्क़ जब रूह में उतरता है हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,प्रियतम के रंग में रंग कर एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।
मन की वीणा बज उठी जब दो न समाहिं जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाहिं,जब से नैना रूप में उलझे संसार की सुध-बुध बिसराई केवल प्रीतम की सूरत याद रही।
इश्क़ जब रूह में उतरता है उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,जिसने अपना सब कुछ सौंपा नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।

कर्म की खेती जो जन बोवे सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,मोह-निशा से जो जन जागा अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।
Karm ki khetee jo jan bove soee phal paave re kaayar baithe bhaagy gine dheer kar dikhalaave,Moha-nishaa se jo jan jaagaa avichal kadam barhaataa hai usakaa yash teenon lokon mein sadaa phailataa hai.
प्रेम बिना सब सूना जग में दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,विरह का हर इक आँसू बनकर कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
इश्क़ जब रूह में उतरता है जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,साँसों के हर तार पे जिसका जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
इश्क़ जब रूह में उतरता है तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,प्रेम की इस पावन धारा में जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।
तेरे रूप की पावन झांकी तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,अमर प्रेम की अमर कहानी कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।

माटी का यह देह बना है सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,वाणी में जिसके मिठास घुली अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।
Maatee ka yeh deh banaa hai saty ka roop samaayaa jeevan ki har ulajhan ka sahaj samaadhaan paayaa,Vaanee mein jisake mithaas ghulee apane antar mein sanjoe woh is nashvar sansaar mein sabase baraa samraat hai.
रोम-रोम में रम गया प्रीतम अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,प्रियतम के रंग में रंग कर सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।
मन मंदिर में बसा जो मूरति हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,अंतर में जब प्रेम समाया सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।
तेरे रूप की पावन झांकी डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,प्रेम नगर का वासी बनकर उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।
तेरे मिलन की आस में बीते तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,प्रेम नगर का वासी बनकर उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।

सतगुरु मिले तो राह दिखावे स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,नेकी की राह पे जो जन उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।
Sataguru mile to raah dikhaave svayan khete hain kinaaraa unake svaagat mein sir jhukaataa hai,Nekee ki raah pe jo jan usane paramaanand paayaa ahankaar mitate hi antar ka sachchaa sukh milataa hai.
तेरे दीदार की एक झलक ने तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,प्रियतम के रंग में रंग कर जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
प्रेम रंग में जो रंग गया दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,अंतर में जब प्रेम समाया अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।
तेरे रूप की पावन झांकी संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,साँसों के हर तार पे जिसका तो बाहर का सारा बैर-भाव और द्वेष पल भर में समाप्त हो गया।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,अंतर में जब प्रेम समाया उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।

सतगुरु मिले तो राह दिखावे प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,प्रेम की डोर में बंध गया जो रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।
Sataguru mile to raah dikhaave prabhu charanon chit laagaa amar abhay pad soee paave jo jag se virakt jaagaa,Prem ki dor mein bandh gaya jo rahataa hai jisane doosaron ke aansoo ponchh kar unake cheharon pe muskaan laa dee.
इश्क़ का सौदा जिसने किया वो तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,सच्चे आशिक़ की पहचान यही उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।
मन मंदिर में बसा जो मूरति जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,सच्चे आशिक़ की पहचान यही अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।
अंतर घट में जब ज्योति जगी प्रियतम का नाम सुना अनहद नाद का संगीत अंतर में गूँजने लगा,अंतर में जब प्रेम समाया सदा प्रीतम का वास रहे वहाँ किसी दूसरे का प्रवेश कभी न हो।
तेरे रूप की पावन झांकी डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,प्रेम की मस्ती में जो झूमा सदा प्रीतम का वास रहे वहाँ किसी दूसरे का प्रवेश कभी न हो।

इश्क़ जब रूह में उतरता है जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,साँसों के हर तार पे जिसका जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
Ishq jab rooh mein utarataa hai jisane ik baar lakhee use sansaar ka koee doosaraa roop suhaataa nahi,Saanson ke har taar pe jisakaa jisane dubakee lagaaee woh bhavasaagar ki seemaa se pare amar ho gaya.
अंतर घट में जब ज्योति जगी रैन-दिना मतवारे अंग-अंग में ज्योति जलाई प्रेम के दीपक बारे,प्रेम के इस पावन तीरथ में कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
अंतर घट में जब ज्योति जगी रैन-दिना मतवारे अंग-अंग में ज्योति जलाई प्रेम के दीपक बारे,प्रेम की मस्ती में जो झूमा और मिलन की भोर हुई तो आत्मा का परमात्मा से एकात्म हो गया।
प्रेम की डोरी बाँध लई जब उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,अमर प्रेम की अमर कहानी तो बाहर का सारा बैर-भाव और द्वेष पल भर में समाप्त हो गया।
प्रेम की डोरी बाँध लई जब डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,प्रेम की मस्ती में जो झूमा कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।

अंतर घट में जब ज्योति जगी प्रियतम का नाम सुना अनहद नाद का संगीत अंतर में गूँजने लगा,अंतर में जब प्रेम समाया सदा प्रीतम का वास रहे वहाँ किसी दूसरे का प्रवेश कभी न हो।
Antar ghat mein jab jyoti jagee priyatam ka naam sunaa anahad naad ka sangeet antar mein goonjane lagaa,Antar mein jab prem samaayaa sadaa preetam ka vaas rahe wahaan kisee doosare ka pravesh kabhee na ho.
तेरे दीदार की एक झलक ने दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,विरह का हर इक आँसू बनकर जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।
प्रेम की डोरी बाँध लई जब हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,मन मंदिर की पावन आरती सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।
बिरहा की आग में तप के कुंदन से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,सच्चे आशिक़ की पहचान यही और मिलन की भोर हुई तो आत्मा का परमात्मा से एकात्म हो गया।
बिरहा की आग में तप के कुंदन बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,जिसने अपना सब कुछ सौंपा प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।

इश्क़ का सौदा जिसने किया वो बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,जिसने प्रेम का मर्म समझ सदा प्रीतम का वास रहे वहाँ किसी दूसरे का प्रवेश कभी न हो।
Ishq ka saudaa jisane kiyaa wo banaa yeh jeev prem ki alaukik chamak se dason dishaaen jagamagaa utheen,Jisane prem ka marm samajh sadaa preetam ka vaas rahe wahaan kisee doosare ka pravesh kabhee na ho.
अंतर घट में जब ज्योति जगी संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,विरह की रात जब ढलने लगी जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
तेरे दीदार की एक झलक ने डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,जब से नैना रूप में उलझे जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
तेरी आँखों की झील में जो प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,प्रियतम के रंग में रंग कर युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
इश्क़ का सौदा जिसने किया वो बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,जिसने प्रेम का मर्म समझ सदा प्रीतम का वास रहे वहाँ किसी दूसरे का प्रवेश कभी न हो।

छाले पड़े हैं पाँवों में सोई जाने पीर पराई दुनिया तो तमाशा देखती है कोई दर्द नहीं बाँटता,वक़्त के इस क्रूर प्रहार ने तब प्रभु कृपा की वर्षा हुई और जलते हुए मन को शांति मिल गई।
Chhaale pare hain paanvon mein soee jaane peer paraaee duniya to tamaashaa dekhatee hai koee dard nahi baantataa,Waqt ke is kroor prahaar ne tab prabhu kripaa ki varshaa hui aur jalate hue man ko shaanti mil gayi.
बिरहा की आग में तप के कुंदन तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,आँखों के रस्ते दिल में उतरा मन ऐसा निर्मल हुआ कि दर्पण भी उसके सामने लजा जाए।
प्रियतम की याद में जो नैना तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,साँसों के हर तार पे जिसका प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
उम्र भर का सफ़र और चीख़ छुपी है भारी किसको अपना हाल सुनाएँ दुनिया मतलबी सारी,ग़म की इस आँधी ने जब मनुष्य का आत्मबल निखरता है और वह सोने की तरह चमक उठता है।
आँखों के आँसू जब सूखे दिन-रैन तपे अंगार की तरह कोई शीतल बूँद न बरसे जो मन को ठंडक दे,ग़म के मारों की बस्ती में कोई खुशी का गीत नहीं गाता यहाँ तो हर साँस में विरह की रागिनी बजती है।

वक़्त की आँधी ने तोड़े हैं कितने सुंदर सपने बेबस होकर देखा हमने रूठ गए सब अपने,ज़िंदगी की इस सूनी डगर पर जो चीख़ दबी रह गई वह खुदा के दरबार में सबसे बड़ी गवाही बनी।
Waqt ki aandhee ne tore hain kitane sundar sapane bebas hokar dekhaa hamane rooth gaye sab apane,Zindagi ki is soonee dagar par jo cheekh dabee rah gayi woh khudaa ke darabaar mein sabase baree gavaahee banee.
नैनों से जो नीर बहे और मंज़िल दूर सुहानी आँखों के कोने में सिमटी जीवन की वीराणी,ग़म की इस गहरी रात में जो चीख़ दबी रह गई वह खुदा के दरबार में सबसे बड़ी गवाही बनी।
वक़्त की आँधी ने तोड़े सोई जाने पीर पराई दुनिया तो तमाशा देखती है कोई दर्द नहीं बाँटता,आँसुओं की इस भाषा को मनुष्य का आत्मबल निखरता है और वह सोने की तरह चमक उठता है।
वक़्त के थपेड़ों ने हमें हज़ार टुकड़ों में बिखर गया हर टुकड़े में अपनों की बेवफ़ाई की तस्वीर दिखी,दर्द की इस एकांत गुफ़ा में केवल वही पढ़ सकता है जिसने ख़ुद रात-रात भर जाग कर दर्द सहा हो।
भीतर-भीतर घुटता जाए जब साया भी साथ न दे तब धीरज ही मनुष्य का एकमात्र सच्चा साथी बने,अंधेरी रात के सन्नाटे में केवल वही पढ़ सकता है जिसने ख़ुद रात-रात भर जाग कर दर्द सहा हो।

सपनों के महल जब टूटे हज़ार टुकड़ों में बिखर गया हर टुकड़े में अपनों की बेवफ़ाई की तस्वीर दिखी,ज़िंदगी की इस सूनी डगर पर सारे भ्रम तोड़ डाले और जीवन की नग्न सच्चाई से सामना करा दिया।
Sapanon ke mahal jab toote hazaar tukaron mein bikhar gaya har tukare mein apanon ki bevafaaee ki tasveer dikhee,Zindagi ki is soonee dagar par saare bhram tor daale aur jeevan ki nagn sachchaaee se saamanaa karaa diyaa.
मन के कोने में सिमटी जीवन की वीराणी किसको दिखाएँ अपने दिल के ये गहरे ज़ख़्म,जीवन के इस कठिन मोड़ पर पार करना ही पड़ेगा किनारे पर बैठ कर रोने से कोई पार नहीं होता।
छाले पड़े हैं पाँवों में हज़ार टुकड़ों में बिखर गया हर टुकड़े में अपनों की बेवफ़ाई की तस्वीर दिखी,ग़म की इस आँधी ने जब तब विश्वास का एक नन्हा तारा चमका जिसने डूबने से बचा लिया।
जिसके दिल पर बीत रही सो पीर विरह की गावे अंतर घट की पीड़ा को कोई समझ न पावे,टूटे हुए दिल का दर्द तब प्रभु कृपा की वर्षा हुई और जलते हुए मन को शांति मिल गई।
वक़्त के थपेड़ों ने हमें सो पीर विरह की गावे अंतर घट की पीड़ा को कोई समझ न पावे,दर्द का यह गहरा सागर तब भीतर ज्ञान का अमृत झरना फूटा जिसने जीवन को तृप्त कर दिया।

गिरने में कोई हार नहीं है वही मंज़िल पाता है गिरने वाले को दुनिया कायर कहती संभलने वाले को वीर,जिसने अहंकार को त्याग दिया उसे किसी वैभव की चाह नहीं उसका मन सदा शांत सरोवर की तरह रहता है।
Girane mein koee haar nahi hai vahee manzil paataa hai girane vaale ko duniya kaayar kahatee sanbhalane vaale ko veer,Jisane ahankaar ko tyaag diyaa use kisee vaibhav ki chaah nahi usakaa man sadaa shaant sarovar ki tarah rahataa hai.
छाले पड़े हैं पाँवों में सोई जाने पीर पराई दुनिया तो तमाशा देखती है कोई दर्द नहीं बाँटता,वक़्त के इस क्रूर प्रहार ने तब प्रभु कृपा की वर्षा हुई और जलते हुए मन को शांति मिल गई।
सांस-सांस में याद तुम्हारी बाहर हँसता जाए दुनिया को क्या ख़बर कि अंदर कितनी आग लगी है,आँसुओं की इस भाषा को तब अंतरात्मा की पुकार ही ईश्वर के चरणों तक पहुँची और धीरज मिला।
उम्र भर का सफ़र और यह ख़ामोशी बख़्शी वरना कभी हमारी हँसी भी बहारों को जगाती थी,ग़म की इस गहरी रात में केवल वही पढ़ सकता है जिसने ख़ुद रात-रात भर जाग कर दर्द सहा हो।
आशा का दीप जब बुझने सब मतलब के यार सुख में सब संग नाचते दुःख में मुँह मोड़ लेते हैं,दिल के फफोलों को देखकर तब विश्वास का एक नन्हा तारा चमका जिसने डूबने से बचा लिया।

धैर्य और संतोष का धन अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,माटी के इस पुतले में जब अपने भाग्य को गढ़ा उसने सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित कर दिखाए।
Dhairy aur santosh ka dhan antar mein gir jaateen ghata-ghat mein tab ek anantaa jyoti nazar hai aatee,Maatee ke is putale mein jab apane bhaagy ko garhaa usane saphalataa ke naye keertimaan sthaapit kar dikhaae.
विरह की अगन में जलता मन को भी छीन ले तब समझ आता है कि तन्हाई किसे कहते हैं,जब आशा की हर किरण बुझी तपस्या का ऐसा दीप जला जिसने आत्मा को अमर प्रकाश से भर दिया।
सपनों के महल जब टूटे कोई शिकवा नहीं दिल के वीराने में बस एक टूटी आस का दिया है,दर्द का यह गहरा सागर चलते-चलते पाँव के छाले भी अब मंज़िल का पता पूछने लगे हैं।
वक़्त के थपेड़ों ने हमें कोई शिकवा नहीं दिल के वीराने में बस एक टूटी आस का दिया है,जब नयनों के सब आँसू सूखे चलते-चलते पाँव के छाले भी अब मंज़िल का पता पूछने लगे हैं।
विरह की अगन में जलता मन जब कोई राह न सूझे तब टूटे दिल से निकली दुआ ही रास्ता दिखाती है,अकेलेपन की इस राह पर तब अंतर्यामी प्रभु ने बाहँ पकड़ी और इस संकट से उबार लिया।

दुःख में सुमिरन सब कोई मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,जिसने समय की चाल पहचानी और धर्म पे अडिग रहता है उसका मान-सम्मान तीनों लोकों में बढ़ता है।
Duhkh mein sumiran sab koee man ka mail dhulaave paaras ka paras paakar jaise lohaa kanchan ho jaave,Jisane samay ki chaal pahachaanee aur dharm pe adig rahataa hai usakaa maana-sammaan teenon lokon mein barhataa hai.
छाले पड़े हैं पाँवों में कोई शिकवा नहीं दिल के वीराने में बस एक टूटी आस का दिया है,जब धैर्य की सीमा टूट गई पार करना ही पड़ेगा किनारे पर बैठ कर रोने से कोई पार नहीं होता।
मिशेल फूको (Michel Foucault) — साहित्यिक महानायक एवं कालजयी विरासत
मिशेल फूको (1926–1984) Theorist of Power, Knowledge & Surveillance के शीर्ष व्यक्तित्व थे, जिनकी प्रमुख कृतियों और विचारों ने समाज को नई दिशा दी।
साहित्यिक विधा और मौलिक शैली
मिशेल फूको ने भाषा और उपमानों की सीमाओं को पार कर ऐसी संजीदा शैली विकसित की, जो सीधे पाठक के अंतर्मन से संवाद करती है।
ऐतिहासिक युग एवं विश्व सम्मान
1926–1984 के महान रचनाकार के रूप में सम्मानित, मिशेल फूको की कृतियाँ आज कई अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में सराही और अनुवादित की जाती हैं।
दार्शनिक गहराई और आत्मिक अनुभूति
प्रेम, विरह, मानवीय कमज़ोरी और जीवन के गूढ़ रहस्यों को मिशेल फूको ने अपनी शायरी में अमर सत्य की तरह संजोया है।
मिशेल फूको की शायरी पीढ़ियों के दिलों को क्यों छूती है?
कॉलेज के युवाओं से लेकर दशकों पुरानी यादों में खोए बुज़ुर्गों तक, मिशेल फूको हर पीढ़ी को जोड़ते हैं। दिल टूटने पर उनके शेर कड़वाहट नहीं घोलते, बल्कि मानवीय भावना को एक नाज़ुक, पवित्र अनुभूति की तरह स्वीकार करते हैं। आज भी सोशल मीडिया, शास्त्रीय संगीत और मुशायरों में इनके शेर हर रोज़ लाखों दिलों की धड़कन बनते हैं।
अन्य महान ग़ज़लकार एवं कवि
30 सेकंड में बनाइए अपना कार्ड
पसंद का शेर चुनिए, मनपसंद टेम्पलेट लगाइए, फ़ॉन्ट और रंग सजाइए और एक क्लिक में सेव कर लीजिए।
- बिना साइन-अप
- बिना वॉटरमार्क
- हमेशा मुफ़्त
“तेरी खामोशियों में भी एक कायनात बसती है...”
EmotionHub.in • Cosmic Poetryहर मौक़े और हर अपने के लिए संदेश
जिसके लिए लिखना है, उसे या कोई त्योहार चुनिए और तैयार संग्रह खोल लीजिए।
- पापा का जन्मदिनजिन्होंने उँगली पकड़कर चलना सिखाया
- सालगिरह की बधाईजोड़ों के लिए मीठी-सी पंक्तियाँ
- परिवार को सुप्रभातघर के ग्रुप के लिए सुबह की शुरुआत
- प्यार भरी शुभ रात्रिसोने से पहले भेजने लायक़ बातें
- दिवाली की बधाईअपनों के लिए रोशनी भरे संदेश
- होली की बधाईरंगों वाले संदेश दोस्तों के नाम
- ईद मुबारकअपनों तक पहुँचाइए ईद की ख़ुशी
- साथी को विदाईसहकर्मी के लिए अपनापन भरे अल्फ़ाज़
- सफलता पर बधाईकिसी की बड़ी जीत पर हौसला बढ़ाइए
- किसी की याद मेंजब दूरी कुछ ज़्यादा ही लंबी लगे
- दोस्त का जन्मदिनयार के लिए हँसी-ख़ुशी वाली दुआएँ
- क्रिसमस की शुभकामनाएँपूरे परिवार के लिए त्योहार की बधाई
लोग यही खोजते हैं
- अकेलेपन की शायरी
- दिल टूटने की शायरी
- पहले प्यार की शायरी
- हमसफ़र पर शायरी
- आगे बढ़ने की शायरी
- किंग एटीट्यूड शायरी
- क्वीन एटीट्यूड शायरी
- बेस्ट फ्रेंड शायरी
- देर रात की याद शायरी
- गहरे जज़्बात की शायरी
- हार न मानने की शायरी
- पत्नी को जन्मदिन की बधाई
- भाई को जन्मदिन की बधाई
- शादी की छोटी शुभकामनाएँ
- पहली सालगिरह की बधाई
- प्रेरणादायक सुप्रभात
कवि, त्योहार और स्टेटस
शेरों के पीछे की आवाज़ें पढ़िए, त्योहार की तैयारी कीजिए और स्टेटस के लिए छोटी पंक्ति उठाइए
मिशेल फूको के बारे में ज़रूरी सवाल-जवाब
मिशेल फूको के जीवन, प्रसिद्ध ग़ज़लों और साहित्यिक विरासत से जुड़े प्रामाणिक उत्तर।
कोई अन्य सवाल है? संपर्क करें
मिशेल फूको कौन थे?
मिशेल फूको (1926–1984) Poitiers, France से ताल्लुक रखने वाले Theorist of Power, Knowledge & Surveillance के अग्रदूत थे, जिन्हें COLLÈGE DE FRANCE PROFESSOR, MASTER OF POST-STRUCTURALISM, ANALYST OF THE PANOPTICON AND BIOPOLITICS के रूप में जाना जाता है।
मिशेल फूको का मुख्य दर्शन व संदेश क्या है?
मिशेल फूको का मुख्य विचार Power-knowledge nexus (knowledge is never neutral), subtle invisible mechanisms of disciplinary surveillance, social institutions as prisons पर केंद्रित है, जो आज भी प्रेरणा का प्रकाशस्तंभ है।
मिशेल फूको की शायरी और रचनाओं की मुख्य विशेषता क्या है?
उनकी रचनाएँ मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, विरह और गहरे जीवन दर्शन को अत्यंत मार्मिक भाषा में प्रस्तुत करती हैं।
मिशेल फूको की सबसे प्रसिद्ध रचनाएँ कौन सी हैं?
इनकी प्रमुख कृतियों में कालजयी शेर, ग़ज़लें और नज़्में शामिल हैं जो आज भी विश्वभर के पाठकों द्वारा पढ़ी जाती हैं।
मिशेल फूको का साहित्यिक योगदान और प्रभाव क्या है?
उन्होंने अपनी भाषा शैली और नए उपमानों के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों के रचनाकारों को गहराई से प्रेरित किया।
क्या Emotion Hub पर मिशेल फूको के शेर कॉपी और शेयर किए जा सकते हैं?
हाँ, Emotion Hub पर आप एक क्लिक में शेर कॉपी कर सकते हैं और सीधे WhatsApp पर शेयर कर सकते हैं।
क्या मिशेल फूको के शेरों के एस्थेटिक कार्ड डाउनलोड किए जा सकते हैं?
हाँ, आप 300 DPI वॉलपेपर क्वालिटी में टेक्स्ट के साथ तैयार कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं या डिज़ाइन स्टूडियो में कस्टमाइज़ कर सकते हैं।
मिशेल फूको का मज़ार या ऐतिहासिक स्थल कहाँ स्थित है?
मिशेल फूको की स्मृति में समर्पित स्मारक और ऐतिहासिक स्थल साहित्य प्रेमियों के लिए एक पवित्र धरोहर हैं।
तो फिर देर किस बात की?
कोई पंक्ति चुनिए, उसे अपना अंदाज़ दीजिए और भेज दीजिए। आपका पहला कार्ड बस कुछ टैप दूर है।







