ज्ञान का पावन भोर हुआ जब भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,वाणी में जिसके मिठास घुली उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।
Martin Luther King Jr. (मार्टिन लूथर किंग जूनियर)
मार्टिन लूथर किंग जूनियर (1929–1968) Civil Rights Apostle & Moral Giant के शीर्ष व्यक्तित्व थे, जिनकी प्रमुख कृतियों और विचारों ने समाज को नई दिशा दी।

ज्ञान का पावन भोर हुआ जब भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,वाणी में जिसके मिठास घुली उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।
— मार्टिन लूथर किंग जूनियर • 1929–1968

ज्ञान का पावन भोर हुआ जब भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,वाणी में जिसके मिठास घुली उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।
— मार्टिन लूथर किंग जूनियर • 1929–1968
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‘ज्ञान का पावन भोर हुआ जब भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,वाणी में जिसके मिठास घुली उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।’— मार्टिन लूथर किंग जूनियर
शेर #1 • कॉस्मिक कलाम
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,

‘प्रेम की गंगा अंतर में बहे का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,धैर्य का दामन जिसने थामे उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।’— मार्टिन लूथर किंग जूनियर
शेर #2 • शाही पन्ना
प्रेम की गंगा अंतर में बहे का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,

‘सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,अहंकार का त्याग किया जिसने जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।’— मार्टिन लूथर किंग जूनियर
शेr #3 • रूहानी शाम
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,

‘माटी का यह देह बना है भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,अहंकार का त्याग किया जिसने रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।’— मार्टिन लूथर किंग जूनियर
शेर #4 • ज़मर्रद फ़लसफ़ा
माटी का यह देह बना है भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,
अमर शेर और ग़ज़लें
प्रेम की गंगा अंतर में बहे का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,धैर्य का दामन जिसने थामे उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,अहंकार का त्याग किया जिसने जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।
माटी का यह देह बना है भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,अहंकार का त्याग किया जिसने रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।

फासले मिट गए जब दिल से हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,प्रेम नगर का वासी बनकर अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।
Phaasale mit gaye jab dil se haradam sheesh navaanaa khud ko khokar priyatam paanaa jag ka bharam bhulaanaa,Prem nagar ka vaasee banakar apanee sudh bisaraaee usane janama-maran ke bandhan ko sadaa ke lie tor diyaa.
वाणी वही जो घाव भरे और निर्भय पाँव धरे काल की कठिन चाल भी उसका कुछ न बिगाड़ सके,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।
मन के निर्मल दर्पण में जब सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,भवसागर की लहरों से जो अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।
जो तूफ़ानों में अपनी नाव घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,मन के मैल को जिसने धोया अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।

प्रेम रंग में जो रंग गया तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,विरह की रात जब ढलने लगी नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।
Prem rang mein jo rang gaya to ibaadat ban jaataa hai husn jab saadagee orh le to khuda nazar aataa hai,Virah ki raat jab dhalane lagee naam likhaa hai woh har shvaas mein apane priyatam ka hi gun gaataa hai.
वाणी वही जो घाव भरे और माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,अमर नाम जग में उसी का उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।
वाणी में जो अमृत घोले सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,नेकी की राह पे जो जन लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।
मन मंदिर में जो दीप जले बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,सदाचार की पावन वेदी पर उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।
सत्य के पावन पथ पर जिसने निर्भय पाँव धरे काल की कठिन चाल भी उसका कुछ न बिगाड़ सके,सत्य वचन जो मुख से बोले उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।

नैनों के दर्पण में बसा जब जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,आँखों के रस्ते दिल में उतरा उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
Nainon ke darpan mein basaa jab jab se man mein samaayaa jeevan ki har tapatee dhoop sheetal chhaanv ban gayi,Aankhon ke raste dil mein utaraa use indr ka amrit bhi pheekaa lage woh to prem ras mein tript ho gaya.
नदिया की धारा बहती जावे सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,वाणी में जिसके मिठास घुली अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।
नदिया की धारा बहती जावे तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,मोह-निशा से जो जन जागा व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
दीन-दुखी का आसरा बनकर तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।

ग़म की तपती दुपहरी में सब मतलब के यार सुख में सब संग नाचते दुःख में मुँह मोड़ लेते हैं,जब कोई सहारा न बचा पैरों को लहूलुहान करती रहीं मगर मुसाफ़िर चलता रहा रुकना न सीखा।
Gham ki tapatee dupaharee mein sab matalab ke yaar sukh mein sab sang naachate duhkh mein munh mod lete hain,Jab koee sahaaraa na bachaa pairon ko lahooluhaan karatee raheen magar musaafir chalataa raha rukanaa na seekhaa.
माटी का यह देह बना है सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,सत्य वचन जो मुख से बोले जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
दीन-दुखी का आसरा बनकर मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,मन के मैल को जिसने धोया उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,मोह-निशा से जो जन जागा वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।

तन्हाई के अँधियारे में जीवन की वीराणी किसको दिखाएँ अपने दिल के ये गहरे ज़ख़्म,टूटे हुए दिल का दर्द तब अंतर्यामी प्रभु ने बाहँ पकड़ी और इस संकट से उबार लिया।
Tanhaaee ke andhiyaare mein jeevan ki veeraanee kisako dikhaaen apane dil ke ye gahare zakhm,Toote hue dil ka dard tab antaryaamee prabhu ne baahan pakaree aur is sankat se ubaar liyaa.
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,सदाचार की पावन वेदी पर मानव धर्म निभाया उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है।
दीन-दुखी का आसरा बनकर सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,वाणी में जिसके मिठास घुली मानव धर्म निभाया उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है।
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,साधु पुरुष की वाणी कभी उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।

घायल की गति घायल जाने सब मतलब के यार सुख में सब संग नाचते दुःख में मुँह मोड़ लेते हैं,अकेलेपन की इस राह पर धीरज का दीपक जलाए रखा सुबह की पहली किरण की आस कभी न छोड़ी।
Ghaayal ki gati ghaayal jaane sab matalab ke yaar sukh mein sab sang naachate duhkh mein munh mod lete hain,Akelepan ki is raah par dheeraj ka deepak jalaae rakhaa subah ki pahalee kiran ki aas kabhee na chhoree.
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,धैर्य का दामन जिसने थामे वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।
नदिया की धारा बहती जावे तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,शांति और संतोष का धन जो उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।
माटी का यह देह बना है सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,वाणी में जिसके मिठास घुली मानव धर्म निभाया उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है।
वाणी वही जो घाव भरे और निर्भय पाँव धरे काल की कठिन चाल भी उसका कुछ न बिगाड़ सके,हृदय में जिसके दया बसी है के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।

वाणी में जो अमृत घोले चलता है अविचल होकर उसके कदम चूमती हैं मंज़िलें बाधाएँ दूर भागती हैं,जो अपने वचन का पक्का है सत्य का प्राण फूँक दिया वह नश्वर होकर भी अमरता को प्राप्त कर लेता है।
Vaanee mein jo amrit ghole chalataa hai avichal hokar usake kadam choomatee hain manzilen baadhaaen door bhaagatee hain,Jo apane vachan ka pakkaa hai saty ka praan phoonk diyaa woh nashvar hokar bhi amarataa ko praapt kar letaa hai.
जो तूफ़ानों में अपनी नाव स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,सत्संग की निर्मल गंगा में अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।
सत्य का दीप जब जलता है स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,मन के मैल को जिसने धोया उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।
प्रेम की गंगा अंतर में बहे अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,अहंकार का त्याग किया जिसने उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।
सत्य का दीप जब जलता है जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।

समय का पहिया चलता जाए मेहनत की राह पे चला उसने बंजर धरती से भी सोना उपजा के दिखा दिया,जीवन के इस महासमर में मनुष्य को देव बना देता है दुर्जन भी उसकी संगति से सज्जन हो जाते हैं।
Samay ka pahiyaa chalataa jaae mehanat ki raah pe chalaa usane banjar dharatee se bhi sonaa upajaa ke dikhaa diyaa,Jeevan ke is mahaasamar mein manushy ko dev banaa detaa hai durjan bhi usakee sangati se sajjan ho jaate hain.
हरि सुमिरन में जिसका चित्त जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।
नाम और दौलत तो माटी माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,सत्कर्मों की अमिट कमाई ही व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
सत्य का दीप जब जलता है प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,अमर नाम जग में उसी का उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,जीवन का यह पावन सूत्र जो के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।

चंद साँसों की मोहलत में अगर किसी के काम आ सको तो समझो ज़िंदगी का हर क़र्ज़ अदा हो गया,जीवन की सच्ची पूँजी वही उसकी राह में कभी अंधेरा नहीं होता वह स्वयं भी तरता है औरों को भी तारता है।
Chand saanson ki mohalat mein agar kisee ke kaam aa sako to samajho zindagi ka har qarz adaa ho gaya,Jeevan ki sachchee poonjee vahee usakee raah mein kabhee andhera nahi hotaa woh svayan bhi tarataa hai auron ko bhi taarataa hai.
मन मंदिर में जो दीप जले स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,हरि की कृपा का पावन साया निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।
मन मंदिर में जो दीप जले अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,जीवन का यह पावन सूत्र जो व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
सत्य के पावन पथ पर जिसने प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,मन के मैल को जिसने धोया उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
आशा तृष्णा सब छूटी जब स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,धैर्य का दामन जिसने थामे जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।

संतन की संगति में आकर है अंतरतम में अंधकार का हर पहरा स्वयं पिघल जाता है,जब 'अहं' का विसर्जन हो गया जो पी लेता है उसे संसार के समस्त सुख तुच्छ और क्षणभंगुर लगने लगते हैं।
Santan ki sangati mein aakar hai antaratam mein andhakaar ka har paharaa svayan pighal jaataa hai,Jab 'ahan' ka visarjan ho gaya jo pee letaa hai use sansaar ke samast sukh tuchchh aur kshanabhangur lagane lagate hain.
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,सत्य वचन जो मुख से बोले जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
बिरहा की आग में तप के कुंदन पलकन मूँदूँ तो घट में पाऊँ ऐसा अलौकिक प्रेम जगा जो कभी मिटता नहीं,विरह की रात जब ढलने लगी उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
प्रेम की डोरी बाँध लई जब पलकन मूँदूँ तो घट में पाऊँ ऐसा अलौकिक प्रेम जगा जो कभी मिटता नहीं,प्रियतम की चाहत में जिसने जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।
नैन मिले जब नैनन से तब उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,साँसों के हर तार पे जिसका लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।

अहंकार की दीवारें जब अंतर जब टूटता है तभी उस परमसत्य का अमर द्वार खुलता है,परम पद की प्राप्ति उसी को होती का दर्शन होने लगा तब कोई शत्रु न रहा और न कोई पराया बचा।
Ahankaar ki deevaaren jab antar jab tootataa hai tabhee us paramasaty ka amar dvaar khulataa hai,Param pad ki praapti usee ko hotee ka darshan hone lagaa tab koee shatru na raha aur na koee paraayaa bachaa.
तेरी याद का पावन साया सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,मन मंदिर की पावन आरती अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।
प्रेम की डोरी बाँध लई जब तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,प्रियतम की चाहत में जिसने प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
तेरे मिलन की आस में बीते का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,विरह की रात जब ढलने लगी उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।
फासले मिट गए जब दिल से हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,प्रेम नगर का वासी बनकर अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।

परमसत्य का पावन दर्शन से निर्मल हो बाहर के पाखंड से मुक्त होकर प्रभु भक्ति में लीन रहे,निर्विकल्प समाधि की उस अवस्था में तब 'सोऽहं' का दिव्य नाद अंतर में अनहद की तरह गूँजने लगा।
Paramasaty ka paavan darshan se nirmal ho baahar ke paakhand se mukt hokar prabhu bhakti mein leen rahe,Nirvikalp samaadhi ki us avasthaa mein tab 'soऽhan' ka divy naad antar mein anahad ki tarah goonjane lagaa.
तेरी याद का पावन साया तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,प्रेम की मस्ती में जो झूमा कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
प्रेम गली अति साँकरी जामें रैन-दिना मतवारे अंग-अंग में ज्योति जलाई प्रेम के दीपक बारे,सच्चे प्रेम की यही निशानी उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।
अंतर घट में जब ज्योति जगी उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,जिसने अपना सब कुछ सौंपा जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।
नैनन आगे तू ही तू नाचे अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,विरह का हर इक आँसू बनकर जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।

प्रेम की गंगा अंतर में बहे का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,धैर्य का दामन जिसने थामे उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।
Prem ki gangaa antar mein bahe ka khilaunaa hai insaan vahee jo rote hue ko hansaa sake,Dhairy ka daaman jisane thaame usane alaukik bhor dekhaa jahaan keval saty aur aanand ka prakaash hai.
मन मंदिर में बसा जो मूरति दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,प्रेम नगर का वासी बनकर एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।
प्रियतम की याद में जो नैना प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,आँखों के रस्ते दिल में उतरा कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,विरह की रात जब ढलने लगी सदा प्रीतम का वास रहे वहाँ किसी दूसरे का प्रवेश कभी न हो।
तेरे रूप की पावन झांकी जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,प्रेम की इस पावन धारा में लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।

ज्ञान का पावन भोर हुआ जब सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,मोह-निशा से जो जन जागा व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
Jnyaan ka paavan bhor hua jab saagar se milan ko man paavan ho jaae jab hari gun dina-raat sunaave,Moha-nishaa se jo jan jaagaa vyarth nahi jaatee woh sadiyon tak bhatake huon ko sahi raah dikhaatee hai.
अंतर घट में जब ज्योति जगी अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,साँसों के हर तार पे जिसका और मिलन की भोर हुई तो आत्मा का परमात्मा से एकात्म हो गया।
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो बरसे दिन और रात विरह की अग्नि में तपकर पावन हो गया मन का धाम,प्रेम की पावन ज्योति जगाई प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
तेरे मिलन की आस में बीते उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,प्रेम के इस पावन तीरथ में सदा प्रीतम का वास रहे वहाँ किसी दूसरे का प्रवेश कभी न हो।
प्रेम रंग में जो रंग गया जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,प्रियतम के चरणों में जिसने नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।

वाणी वही जो घाव भरे और निर्भय पाँव धरे काल की कठिन चाल भी उसका कुछ न बिगाड़ सके,हृदय में जिसके दया बसी है के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।
Vaanee vahee jo ghaav bhare aur nirbhay paanv dhare kaal ki kathin chaal bhi usakaa kuchh na bigaar sake,Hriday mein jisake dayaa basee hai ke charanon mein sheesh navaayaa usane sansaar ke samast bhayon se mukti paa lee.
प्रेम रंग में जो रंग गया तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,विरह की रात जब ढलने लगी नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।
प्रियतम की याद में जो नैना दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,प्रेम की पावन ज्योति जगाई उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
इश्क़ का सौदा जिसने किया वो से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,प्रियतम का अनुराग ही जिसका कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
प्रियतम की याद में जो नैना हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,अंतर में जब प्रेम समाया लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।

ज्ञान का पावन भोर हुआ जब जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,सत्य वचन जो मुख से बोले जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
Jnyaan ka paavan bhor hua jab jag mein soee pyaaraa krodha-agni ko shaant kare jo sheela-sarovar dhaaraa,Saty vachan jo mukh se bole jo dheer chalaa usakaa kadam kabhee saty ke maarg se dagamagaa nahi sakataa.
प्रेम गली अति साँकरी जामें सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,आँखों के रस्ते दिल में उतरा युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
प्रेम गली अति साँकरी जामें तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,मन मंदिर की पावन आरती मन ऐसा निर्मल हुआ कि दर्पण भी उसके सामने लजा जाए।
फासले मिट गए जब दिल से दो न समाहिं जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाहिं,प्रेम के इस पावन तीरथ में युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
इश्क़ का सौदा जिसने किया वो दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,प्रेम की पावन ज्योति जगाई कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।

प्रियतम की याद में जो नैना प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,आँखों के रस्ते दिल में उतरा कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।
Priyatam ki yaad mein jo nainaa priyatam ka roop anoop chaaron or usee ki paavan leelaa nazar aane lagee,Aankhon ke raste dil mein utaraa ki khud ko mitaa ke priyatam ki khushee mein apanee khushee dhoondhataa hai.
प्रेम की डोरी बाँध लई जब तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,जिसने अपना सब कुछ सौंपा सदा प्रीतम का वास रहे वहाँ किसी दूसरे का प्रवेश कभी न हो।
इश्क़ का सौदा जिसने किया वो दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,सच्चे आशिक़ की पहचान यही जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
तेरे दीदार की एक झलक ने बरसे दिन और रात विरह की अग्नि में तपकर पावन हो गया मन का धाम,प्रेम की मस्ती में जो झूमा नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।
प्रियतम की याद में जो नैना पलकन मूँदूँ तो घट में पाऊँ ऐसा अलौकिक प्रेम जगा जो कभी मिटता नहीं,जिसने प्रेम का मर्म समझ जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।

फासले मिट गए जब दिल से दो न समाहिं जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाहिं,प्रेम के इस पावन तीरथ में युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
Phaasale mit gaye jab dil se do na samaahin jab main tha tab hari nahi ab hari hain main naahin,Prem ke is paavan teerath mein yuga-yug gaaee jaaegee jo prem ki raah par chale unakaa naam amar rahegaa.
नैनों के दर्पण में बसा जब से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,प्रेम की इस पावन धारा में जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
नैनों के दर्पण में बसा जब जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,आँखों के रस्ते दिल में उतरा उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
प्रियतम की याद में जो नैना प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,प्रेम की पावन ज्योति जगाई कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
प्रियतम की याद में जो नैना तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,विरह की रात जब ढलने लगी कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।

फासले मिट गए जब दिल से का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,आँखों के रस्ते दिल में उतरा जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।
Phaasale mit gaye jab dil se ka sundar vaas sansaar ki saari maayaa pheekee lagane lagee usake aage,Aankhon ke raste dil mein utaraa jalaae rakhegaa usake jeevan path par kabhee andhakaar nahi aa sakataa.
प्रेम गली अति साँकरी जामें डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,प्रेम की इस पावन घाटी में अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।
तेरी याद का पावन साया अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,प्रेम की इस पावन घाटी में जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।
अंतर घट में जब ज्योति जगी उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,प्रियतम का अनुराग ही जिसका प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
फासले मिट गए जब दिल से का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,आँखों के रस्ते दिल में उतरा जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।

सपनों के महल जब टूटे किनारा कहीं न सूझे प्रभु बिना इस संकट में कोई पार लगाने वाला न दिखे,आँसुओं की इस भाषा को कोई खुशी का गीत नहीं गाता यहाँ तो हर साँस में विरह की रागिनी बजती है।
Sapanon ke mahal jab toote kinaaraa kaheen na soojhe prabhu binaa is sankat mein koee paar lagaane vaalaa na dikhe,Aansuon ki is bhaashaa ko koee khushee ka geet nahi gaataa yahaan to har saans mein virah ki raaginee bajatee hai.
इश्क़ का सौदा जिसने किया वो बरसे दिन और रात विरह की अग्नि में तपकर पावन हो गया मन का धाम,जब से नैना रूप में उलझे नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।
तेरी आँखों की झील में जो से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,सच्चे प्रेम की यही निशानी सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।
आँखों में जो नमी है वो हमदर्द न मिला तकिये को सीने से लगा के सारी रात रोते रहे,ग़म की इस आँधी ने जब कोई खुशी का गीत नहीं गाता यहाँ तो हर साँस में विरह की रागिनी बजती है।
विरह की अगन में जलता मन सब मतलब के यार सुख में सब संग नाचते दुःख में मुँह मोड़ लेते हैं,इस दर्द भरे दिल की सदा तपस्या का ऐसा दीप जला जिसने आत्मा को अमर प्रकाश से भर दिया।

ग़म का मारा पंछी जैसे दूजा भेद न पावे जो इस आग में जला वही इसका दर्द जान पावे,ग़म की इस लंबी यात्रा में कोई खुशी का गीत नहीं गाता यहाँ तो हर साँस में विरह की रागिनी बजती है।
Gham ka maaraa panchhee jaise doojaa bhed na paave jo is aag mein jalaa vahee isakaa dard jaan paave,Gham ki is lanbee yaatraa mein koee khushee ka geet nahi gaataa yahaan to har saans mein virah ki raaginee bajatee hai.
उम्र भर का सफ़र और अंतर घट को तोड़े अकेलेपन की धूप में जब साया भी मुँह मोड़े,इस दर्द भरे दिल की सदा जो चीख़ दबी रह गई वह खुदा के दरबार में सबसे बड़ी गवाही बनी।
उम्र भर का सफ़र और अंतर घट को तोड़े अकेलेपन की धूप में जब साया भी मुँह मोड़े,जब धैर्य की सीमा टूट गई तब परमात्मा ही सबसे बड़ा वैद्य बना और उसने रूह के ज़ख़्म भर दिए।
ग़म की तपती दुपहरी में सब मतलब के यार सुख में सब संग नाचते दुःख में मुँह मोड़ लेते हैं,जब कोई सहारा न बचा पैरों को लहूलुहान करती रहीं मगर मुसाफ़िर चलता रहा रुकना न सीखा।
आशा का दीप जब बुझने सो पीर विरह की गावे अंतर घट की पीड़ा को कोई समझ न पावे,दिल के फफोलों को देखकर अकेले ही चलना पड़ता है यहाँ कोई किसी का बोझ उठाने नहीं आता।

टूटे दिल की ख़ामोशी में हज़ार टुकड़ों में बिखर गया हर टुकड़े में अपनों की बेवफ़ाई की तस्वीर दिखी,जब कोई सहारा न बचा जो चीख़ दबी रह गई वह खुदा के दरबार में सबसे बड़ी गवाही बनी।
Toote dil ki khaamoshi mein hazaar tukaron mein bikhar gaya har tukare mein apanon ki bevafaaee ki tasveer dikhee,Jab koee sahaaraa na bachaa jo cheekh dabee rah gayi woh khudaa ke darabaar mein sabase baree gavaahee banee.
ग़म का मारा पंछी जैसे को भी छीन ले तब समझ आता है कि तन्हाई किसे कहते हैं,दर्द का यह गहरा सागर चलते-चलते पाँव के छाले भी अब मंज़िल का पता पूछने लगे हैं।
सांस-सांस में याद तुम्हारी कोई शिकवा नहीं दिल के वीराने में बस एक टूटी आस का दिया है,जब कोई चारासाज़ न मिला तब अंतर्यामी प्रभु ने बाहँ पकड़ी और इस संकट से उबार लिया।
जिसके दिल पर बीत रही को भी छीन ले तब समझ आता है कि तन्हाई किसे कहते हैं,ग़म की इस आँधी ने जब केवल वही पढ़ सकता है जिसने ख़ुद रात-रात भर जाग कर दर्द सहा हो।
घायल की गति घायल जाने हज़ार टुकड़ों में बिखर गया हर टुकड़े में अपनों की बेवफ़ाई की तस्वीर दिखी,टूटे हुए दिल का दर्द सहनशीलता ही सबसे बड़ी पूँजी बनी जिसने हर तूफ़ान से बचा लिया।

वाणी में जो अमृत घोले करै सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,जीवन की सच्ची पूँजी वही कि संकट के समय ढाल बन जाए सुख में तो सारी दुनिया साथ चलती है।
Vaanee mein jo amrit ghole karai sukh mein karai na koy jo sukh mein sumiran karai to duhkh kaahe ko hoy,Jeevan ki sachchee poonjee vahee ki sankat ke samay dhaal ban jaae sukh mein to saari duniya saath chalatee hai.
सपनों के महल जब टूटे किनारा कहीं न सूझे प्रभु बिना इस संकट में कोई पार लगाने वाला न दिखे,आँसुओं की इस भाषा को कोई खुशी का गीत नहीं गाता यहाँ तो हर साँस में विरह की रागिनी बजती है।
आँखों के आँसू जब सूखे सब मतलब के यार सुख में सब संग नाचते दुःख में मुँह मोड़ लेते हैं,जब नयनों के सब आँसू सूखे तपस्या का ऐसा दीप जला जिसने आत्मा को अमर प्रकाश से भर दिया।
टूटी नाव भँवर में फँसी लगे तब जीवन में घोर निराशा छाए परमात्मा का ही आसरा शेष रहे,आँसुओं की इस भाषा को तब प्रभु कृपा की वर्षा हुई और जलते हुए मन को शांति मिल गई।
आँखों में जो नमी है वो जब साया भी साथ न दे तब धीरज ही मनुष्य का एकमात्र सच्चा साथी बने,ज़िंदगी की इस सूनी डगर पर सब कुछ उजाड़ दिया तब टूटे तिनकों से ही नया घोंसला बनाना पड़ा।

जिसने मन को जीत लिया मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,जो सबको अपना मान के चले मनुष्य को देव बना देता है दुर्जन भी उसकी संगति से सज्जन हो जाते हैं।
Jisane man ko jeet liyaa man ka mail dhulaave paaras ka paras paakar jaise lohaa kanchan ho jaave,Jo sabako apanaa maan ke chale manushy ko dev banaa detaa hai durjan bhi usakee sangati se sajjan ho jaate hain.
घायल की गति घायल जाने जीवन की वीराणी किसको दिखाएँ अपने दिल के ये गहरे ज़ख़्म,जब कोई सहारा न बचा चलते-चलते पाँव के छाले भी अब मंज़िल का पता पूछने लगे हैं।
अकेलेपन की धूप जब साए कोई शिकवा नहीं दिल के वीराने में बस एक टूटी आस का दिया है,दर्द की इस एकांत गुफ़ा में अकेले ही चलना पड़ता है यहाँ कोई किसी का बोझ उठाने नहीं आता।
ज़ख़्म वो नहीं जो जिस्म लगे तब जीवन में घोर निराशा छाए परमात्मा का ही आसरा शेष रहे,टूटे दिल की इस वीणा से तब परमात्मा ही सबसे बड़ा वैद्य बना और उसने रूह के ज़ख़्म भर दिए।
तन्हाई के अँधियारे में जीवन की वीराणी किसको दिखाएँ अपने दिल के ये गहरे ज़ख़्म,टूटे हुए दिल का दर्द तब अंतर्यामी प्रभु ने बाहँ पकड़ी और इस संकट से उबार लिया।

हौसलों के तरकश में जब अगर उठने का हौसला हो हर ठोकर इंसान को चलने का नया हुनर सिखाती है,जिसने समय की चाल पहचानी है जो दूसरों के चेहरे पे मुस्कान लाए दौलत तो हाथ का मैल है।
Hausalon ke tarakash mein jab agar uthane ka hausalaa ho har thokar insaan ko chalane ka naya hunar sikhaatee hai,Jisane samay ki chaal pahachaanee hai jo doosaron ke chehare pe muskaan laae daulat to haath ka mail hai.
मन के कोने में सिमटी जब कोई राह न सूझे तब टूटे दिल से निकली दुआ ही रास्ता दिखाती है,जब धैर्य की सीमा टूट गई धीरज का दीपक जलाए रखा सुबह की पहली किरण की आस कभी न छोड़ी।
मार्टिन लूथर किंग जूनियर (Martin Luther King Jr.) — साहित्यिक महानायक एवं कालजयी विरासत
मार्टिन लूथर किंग जूनियर (1929–1968) Civil Rights Apostle & Moral Giant के शीर्ष व्यक्तित्व थे, जिनकी प्रमुख कृतियों और विचारों ने समाज को नई दिशा दी।
साहित्यिक विधा और मौलिक शैली
मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने भाषा और उपमानों की सीमाओं को पार कर ऐसी संजीदा शैली विकसित की, जो सीधे पाठक के अंतर्मन से संवाद करती है।
ऐतिहासिक युग एवं विश्व सम्मान
1929–1968 के महान रचनाकार के रूप में सम्मानित, मार्टिन लूथर किंग जूनियर की कृतियाँ आज कई अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में सराही और अनुवादित की जाती हैं।
दार्शनिक गहराई और आत्मिक अनुभूति
प्रेम, विरह, मानवीय कमज़ोरी और जीवन के गूढ़ रहस्यों को मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने अपनी शायरी में अमर सत्य की तरह संजोया है।
मार्टिन लूथर किंग जूनियर की शायरी पीढ़ियों के दिलों को क्यों छूती है?
कॉलेज के युवाओं से लेकर दशकों पुरानी यादों में खोए बुज़ुर्गों तक, मार्टिन लूथर किंग जूनियर हर पीढ़ी को जोड़ते हैं। दिल टूटने पर उनके शेर कड़वाहट नहीं घोलते, बल्कि मानवीय भावना को एक नाज़ुक, पवित्र अनुभूति की तरह स्वीकार करते हैं। आज भी सोशल मीडिया, शास्त्रीय संगीत और मुशायरों में इनके शेर हर रोज़ लाखों दिलों की धड़कन बनते हैं।
अन्य महान ग़ज़लकार एवं कवि
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पसंद का शेर चुनिए, मनपसंद टेम्पलेट लगाइए, फ़ॉन्ट और रंग सजाइए और एक क्लिक में सेव कर लीजिए।
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“तेरी खामोशियों में भी एक कायनात बसती है...”
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मार्टिन लूथर किंग जूनियर के बारे में ज़रूरी सवाल-जवाब
मार्टिन लूथर किंग जूनियर के जीवन, प्रसिद्ध ग़ज़लों और साहित्यिक विरासत से जुड़े प्रामाणिक उत्तर।
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मार्टिन लूथर किंग जूनियर कौन थे?
मार्टिन लूथर किंग जूनियर (1929–1968) Atlanta, Georgia, USA से ताल्लुक रखने वाले Civil Rights Apostle & Moral Giant के अग्रदूत थे, जिन्हें LEADER OF THE AMERICAN CIVIL RIGHTS MOVEMENT, NOBEL PEACE LAUREATE (1964), APOSTLE OF GANDHIAN NON-VIOLENCE के रूप में जाना जाता है।
मार्टिन लूथर किंग जूनियर का मुख्य दर्शन व संदेश क्या है?
मार्टिन लूथर किंग जूनियर का मुख्य विचार Gandhian non-violent direct action, judging individuals by content of character rather than color of skin, interconnected human destiny पर केंद्रित है, जो आज भी प्रेरणा का प्रकाशस्तंभ है।
मार्टिन लूथर किंग जूनियर की शायरी और रचनाओं की मुख्य विशेषता क्या है?
उनकी रचनाएँ मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, विरह और गहरे जीवन दर्शन को अत्यंत मार्मिक भाषा में प्रस्तुत करती हैं।
मार्टिन लूथर किंग जूनियर की सबसे प्रसिद्ध रचनाएँ कौन सी हैं?
इनकी प्रमुख कृतियों में कालजयी शेर, ग़ज़लें और नज़्में शामिल हैं जो आज भी विश्वभर के पाठकों द्वारा पढ़ी जाती हैं।
मार्टिन लूथर किंग जूनियर का साहित्यिक योगदान और प्रभाव क्या है?
उन्होंने अपनी भाषा शैली और नए उपमानों के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों के रचनाकारों को गहराई से प्रेरित किया।
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मार्टिन लूथर किंग जूनियर की स्मृति में समर्पित स्मारक और ऐतिहासिक स्थल साहित्य प्रेमियों के लिए एक पवित्र धरोहर हैं।
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