जो तूफ़ानों में अपनी नाव रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,नेकी की राह पे जो जन रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।
Dr. Kumar Vishwas (डॉ. कुमार विश्वास)
डॉ. कुमार विश्वास (Born 1970) Modern Hindi Poet & Youth Sensation के शीर्ष व्यक्तित्व थे, जिनकी प्रमुख कृतियों और विचारों ने समाज को नई दिशा दी।
डाउनलोड करें डॉ. कुमार विश्वास के एस्थेटिक स्टोरी कार्ड्स

‘जो तूफ़ानों में अपनी नाव रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,नेकी की राह पे जो जन रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।’— डॉ. कुमार विश्वास
शेर #1 • कॉस्मिक कलाम
जो तूफ़ानों में अपनी नाव रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,

‘सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,सत्य वचन जो मुख से बोले उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।’— डॉ. कुमार विश्वास
शेर #2 • शाही पन्ना
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,

‘मन के निर्मल दर्पण में जब घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,सदाचार की पावन वेदी पर रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।’— डॉ. कुमार विश्वास
शेr #3 • रूहानी शाम
मन के निर्मल दर्पण में जब घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,
अमर शेर और ग़ज़लें
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,सत्य वचन जो मुख से बोले उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।
मन के निर्मल दर्पण में जब घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,सदाचार की पावन वेदी पर रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।
सत्य का दीप जब जलता है अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,अहंकार का त्याग किया जिसने वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।

मन की वीणा बज उठी जब संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,साँसों के हर तार पे जिसका मन ऐसा निर्मल हुआ कि दर्पण भी उसके सामने लजा जाए।
Man ki veenaa baj uthee jab sansaar luta baithaa magar prem ke baazaar mein usane anamol ratan paa liyaa,Saanson ke har taar pe jisakaa man aisaa nirmal hua ki darpan bhi usake saamane lajaa jaae.
सत्य के पावन पथ पर जिसने जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,सत्संग की निर्मल गंगा में उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।
हरि सुमिरन में जिसका चित्त मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,साधु पुरुष की वाणी कभी लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।
वाणी में जो अमृत घोले अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,वाणी में जिसके मिठास घुली अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब निर्भय पाँव धरे काल की कठिन चाल भी उसका कुछ न बिगाड़ सके,धैर्य का दामन जिसने थामे उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।

तेरी याद का पावन साया जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,प्रेम सुधा का रस जो चखा युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
Teri yaad ka paavan saaya jab se man mein samaayaa jeevan ki har tapatee dhoop sheetal chhaanv ban gayi,Prem sudhaa ka ras jo chakhaa yuga-yug gaaee jaaegee jo prem ki raah par chale unakaa naam amar rahegaa.
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।
कर्म की खेती जो जन बोवे भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,हरि की कृपा का पावन साया उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,शांति और संतोष का धन जो लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।
प्रेम की गंगा अंतर में बहे तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।

प्रेम बिना सब सूना जग में सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,प्रेम का दीपक अंतर में जो युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
Prem binaa sab soonaa jag mein sundar shyaam sanehee usakee ek jhalak pe vaaroon yeh nashvar tana-dehee,Prem ka deepak antar mein jo yuga-yug gaaee jaaegee jo prem ki raah par chale unakaa naam amar rahegaa.
दीन-दुखी का आसरा बनकर सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,नेकी की राह पे जो जन परलोक में संग जाएगी बाकी सब माया-मोह यहीं धरा रह जाएगा।
माटी का यह देह बना है अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,शांति और संतोष का धन जो व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
प्रेम की गंगा अंतर में बहे जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।
धरती की छाती पर जिसने सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,हरि की कृपा का पावन साया जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।

टूटे दिल की ख़ामोशी में पर दिखाई दें असली ज़ख़्म तो वो हैं जो रूह पर रिसते हैं,आँसुओं की इस भाषा को तब अंतर्यामी प्रभु ने बाहँ पकड़ी और इस संकट से उबार लिया।
Toote dil ki khaamoshi mein par dikhaaee den asalee zakhm to wo hain jo rooh par risate hain,Aansuon ki is bhaashaa ko tab antaryaamee prabhu ne baahan pakaree aur is sankat se ubaar liyaa.
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी तो सारा जग अपना लागे पराया कोई न रहे सब में प्रभु रूप दिखे,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।
अहंकार की दीवारें जब प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,सत्संग की निर्मल गंगा में अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।
कर्म की खेती जो जन बोवे माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,परहित में जिसने जीवन सौंपा उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।
साधु-संगत की छाया में जो घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।

आँखों में जो नमी है वो रेत की दीवार की तरह तब समझ आया कि संसार की माया सब झूठी है,जब कोई चारासाज़ न मिला पैरों को लहूलुहान करती रहीं मगर मुसाफ़िर चलता रहा रुकना न सीखा।
Aankhon mein jo namee hai wo ret ki deewar ki tarah tab samajh aayaa ki sansaar ki maayaa sab jhoothee hai,Jab koee chaaraasaaz na mila pairon ko lahooluhaan karatee raheen magar musaafir chalataa raha rukanaa na seekhaa.
दुःख में सुमिरन सब कोई करै सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,सदाचार की पावन वेदी पर उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।
आशा तृष्णा सब छूटी जब मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,माटी का चोला पाकर जिसने जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।
दीन-दुखी का आसरा बनकर मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,सदाचार की पावन वेदी पर उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।
संतन की संगति में आकर रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु परलोक में संग जाएगी बाकी सब माया-मोह यहीं धरा रह जाएगा।

टूटी नाव भँवर में फँसी जीवन की वीराणी किसको दिखाएँ अपने दिल के ये गहरे ज़ख़्म,टूटे हुए सपनों की किरचें कोई खुशी का गीत नहीं गाता यहाँ तो हर साँस में विरह की रागिनी बजती है।
Tootee naav bhanvar mein phansee jeevan ki veeraanee kisako dikhaaen apane dil ke ye gahare zakhm,Toote hue sapanon ki kirachen koee khushee ka geet nahi gaataa yahaan to har saans mein virah ki raaginee bajatee hai.
प्रेम की गंगा अंतर में बहे सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,मोह-निशा से जो जन जागा उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।
मन मंदिर में जो दीप जले तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,सत्कर्मों की अमिट कमाई ही के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।
आशा तृष्णा सब छूटी जब तो सारा जग अपना लागे पराया कोई न रहे सब में प्रभु रूप दिखे,सत्य-अहिंसा की राहों पर अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,मन के मैल को जिसने धोया उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।

हौसलों के तरकश में जब जिसने कर्तव्य निभाया उसके जीवन का हर क्षण यज्ञ की आहुति बन गया,धैर्य की नौका पर सवार होकर जो आगे बढ़ा उसने असंभव को भी संभव करके दुनिया को दिखा दिया।
Hausalon ke tarakash mein jab jisane kartavy nibhaayaa usake jeevan ka har kshan yajny ki aahuti ban gaya,Dhairy ki naukaa par savaar hokar jo aage barhaa usane asanbhav ko bhi sanbhav karake duniya ko dikhaa diyaa.
सत्य का दीप जब जलता है माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,सदाचार की पावन वेदी पर अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,सत्य-अहिंसा की राहों पर उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।
प्रेम की गंगा अंतर में बहे अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,प्रेम की डोर में बंध गया जो निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,सत्कर्मों की अमिट कमाई ही उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।

सत्कर्मों की अमिट पूँजी मेहनत की राह पे चला उसने बंजर धरती से भी सोना उपजा के दिखा दिया,कर्मण्यता का पावन व्रत लेकर अपना सुख त्याग देता है उसका नाम इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में लिखा जाता है।
Satkarmon ki amit poonjee mehanat ki raah pe chalaa usane banjar dharatee se bhi sonaa upajaa ke dikhaa diyaa,Karmanyataa ka paavan vrat lekar apanaa sukh tyaag detaa hai usakaa naam itihaas ke svarnim pannon mein likhaa jaataa hai.
साधु-संगत की छाया में जो प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,अहंकार का त्याग किया जिसने अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,सत्कर्मों की अमिट कमाई ही उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।
सत्य का दीप जब जलता है सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,सत्संग की निर्मल गंगा में के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।
मन मंदिर में जो दीप जले का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,भवसागर की लहरों से जो उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।

मन मंदिर में जो दीप अगर उठने का हौसला हो हर ठोकर इंसान को चलने का नया हुनर सिखाती है,धैर्य की नौका पर सवार होकर उसे किसी वैभव की चाह नहीं उसका मन सदा शांत सरोवर की तरह रहता है।
Man mandir mein jo deep agar uthane ka hausalaa ho har thokar insaan ko chalane ka naya hunar sikhaatee hai,Dhairy ki naukaa par savaar hokar use kisee vaibhav ki chaah nahi usakaa man sadaa shaant sarovar ki tarah rahataa hai.
वाणी में जो अमृत घोले अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,जीवन का यह पावन सूत्र जो जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
नाम और दौलत तो माटी सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,सत्कर्मों की अमिट कमाई ही लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,हृदय में जिसके दया बसी है रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।
संतन की संगति में आकर अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,मन के मैल को जिसने धोया उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।

सत्य का दीप जब जलता है अंतरतम में अंधकार का हर पहरा स्वयं पिघल जाता है,मिथ्या संसार की इस मायावी छाया से जो पी लेता है उसे संसार के समस्त सुख तुच्छ और क्षणभंगुर लगने लगते हैं।
Saty ka deep jab jalataa hai antaratam mein andhakaar ka har paharaa svayan pighal jaataa hai,Mithyaa sansaar ki is maayaavee chhaayaa se jo pee letaa hai use sansaar ke samast sukh tuchchh aur kshanabhangur lagane lagate hain.
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,सत्संग की निर्मल गंगा में उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
मन की वीणा बज उठी जब प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,मन मंदिर की पावन आरती उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।
प्रेम की पावन वेदी पर जिसने दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,जब से नैना रूप में उलझे और मिलन की भोर हुई तो आत्मा का परमात्मा से एकात्म हो गया।
प्रेम गली अति साँकरी जामें सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,प्रियतम के रंग में रंग कर उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।

अहंकार की दीवारें जब अंतर है उसने समस्त वेदों का सार जान लिया बाहर तो केवल माया की छाया है,जब प्रेम और ज्ञान का संगम हुआ जो मुक्त हो गया उसे संसार की कोई भी चिंता कभी स्पर्श नहीं कर सकती।
Ahankaar ki deevaaren jab antar hai usane samast vedon ka saar jaan liyaa baahar to keval maayaa ki chhaayaa hai,Jab prem aur jnyaan ka sangam hua jo mukt ho gaya use sansaar ki koee bhi chintaa kabhee sparsh nahi kar sakatee.
नैन मिले जब नैनन से तब से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,आँखों के रस्ते दिल में उतरा अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।
तेरी याद का पावन साया तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,प्रियतम की चाहत में जिसने जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
प्रियतम की याद में जो नैना रैन-दिना मतवारे अंग-अंग में ज्योति जलाई प्रेम के दीपक बारे,प्रियतम की चाहत में जिसने कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।
मन की वीणा बज उठी जब संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,साँसों के हर तार पे जिसका मन ऐसा निर्मल हुआ कि दर्पण भी उसके सामने लजा जाए।

अमृत की बूँद अंतर में बरसी जब साधक ने ध्यान लगाया जनम-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,जब समस्त वासनाएँ भस्म हो गईं तो समस्त जगत उस एक ही अनंत परमात्मा का स्वरूप नज़र आने लगा।
Amrit ki boond antar mein barasee jab saadhak ne dhyaan lagaayaa janama-maran ka kathin pheraa sahaj hi kat gaya,Jab samast vaasanaaen bhasm ho gaeen to samast jagat us ek hi anant paramaatmaa ka svaroop nazar aane lagaa.
इश्क़ का सौदा जिसने किया वो तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,प्रियतम के रंग में रंग कर कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।
तेरी आँखों की झील में जो सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,सच्चे आशिक़ की पहचान यही उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
प्रेम गली अति साँकरी जामें का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,हृदय के पावन सिंहासन पर युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
नैनों के दर्पण में बसा जब प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,आँखों के रस्ते दिल में उतरा जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।

सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,सत्य वचन जो मुख से बोले उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।
Satkarmon ki amit jyoti jab saagar se milan ko man paavan ho jaae jab hari gun dina-raat sunaave,Saty vachan jo mukh se bole us par sadaa banaa rahataa hai jo nishkaam bhaav se sab jeevon se prem karataa hai.
इश्क़ जब रूह में उतरता है तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,प्रेम का दीपक अंतर में जो संसार की सुध-बुध बिसराई केवल प्रीतम की सूरत याद रही।
तेरी याद का पावन साया दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,जब से नैना रूप में उलझे उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
इश्क़ जब रूह में उतरता है तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,प्रेम की इस पावन घाटी में उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।
फासले मिट गए जब दिल से दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,प्रियतम के चरणों में जिसने जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।

प्रेम की गंगा अंतर में बहे जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।
Prem ki gangaa antar mein bahe jo jeevan mahakaave usee manushy ka janam saphal jo parapeeraa apanaave,Aatma-samarpan kiyaa jisane prabhu ajnyaan andhera mitaa ke woh sansaar mein jnyaan ka amar prakaash phailaa jaataa hai.
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो रैन-दिना मतवारे अंग-अंग में ज्योति जलाई प्रेम के दीपक बारे,जिसने अपना सब कुछ सौंपा जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,प्रेम की मस्ती में जो झूमा नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।
इश्क़ का सौदा जिसने किया वो अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,विरह का हर इक आँसू बनकर जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।
तेरे रूप की पावन झांकी तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,अमर प्रेम की अमर कहानी युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।

सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,मन के मैल को जिसने धोया उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
Satkarmon ki amit jyoti jab antar nain ughaare ghat mein hi paramaatmaa ka deedaar karaae,Man ke mail ko jisane dhoyaa usakaa janam saarthak hua paropakaar hi maanav jeevan ka sabase baraa dharm hai.
तेरी याद का पावन साया जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,प्रेम सुधा का रस जो चखा युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
प्रेम की पावन वेदी पर जिसने हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,मन मंदिर की पावन आरती जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।
इश्क़ का सौदा जिसने किया वो प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,प्रेम की मस्ती में जो झूमा मन ऐसा निर्मल हुआ कि दर्पण भी उसके सामने लजा जाए।
तेरे रूप की पावन झांकी दो न समाहिं जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाहिं,प्रेम के इस पावन तीरथ में मोती चमका प्रेम की सीपी में अनमोल ज्ञान का रत्न बन गया।

सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,सत्संग की निर्मल गंगा में उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
Satkarmon ki amit jyoti jab antar nain ughaare ghat mein hi paramaatmaa ka deedaar karaae,Satsang ki nirmal gangaa mein usakaa janam saarthak hua paropakaar hi maanav jeevan ka sabase baraa dharm hai.
प्रेम बिना सब सूना जग में प्रियतम का नाम सुना अनहद नाद का संगीत अंतर में गूँजने लगा,जिसने अपना सब कुछ सौंपा और मिलन की भोर हुई तो आत्मा का परमात्मा से एकात्म हो गया।
नैनों के दर्पण में बसा जब जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,प्रियतम का अनुराग ही जिसका संसार की सुध-बुध बिसराई केवल प्रीतम की सूरत याद रही।
इश्क़ की राह अनोखी बंदे तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,हृदय के पावन सिंहासन पर और मिलन की भोर हुई तो आत्मा का परमात्मा से एकात्म हो गया।
प्रेम बिना सब सूना जग में जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,साँसों के हर तार पे जिसका जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।

तेरी याद का पावन साया दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,जब से नैना रूप में उलझे उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
Teri yaad ka paavan saaya dil ko wo chain diyaa jo sadiyon ki ibaadat se bhi mayassar na hua,Jab se nainaa roop mein ulajhe use indr ka amrit bhi pheekaa lage woh to prem ras mein tript ho gaya.
तेरे मिलन की आस में बीते तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,जब से नैना रूप में उलझे एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।
मन मंदिर में बसा जो मूरति तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,प्रेम नगर का वासी बनकर अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।
इश्क़ की राह अनोखी बंदे रैन-दिना मतवारे अंग-अंग में ज्योति जलाई प्रेम के दीपक बारे,विरह की रात जब ढलने लगी प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
प्रियतम की याद में जो नैना तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,प्रियतम के चरणों में जिसने उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।

इश्क़ की राह अनोखी बंदे तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,हृदय के पावन सिंहासन पर और मिलन की भोर हुई तो आत्मा का परमात्मा से एकात्म हो गया।
Ishq ki raah anokhee bande tera naam sanehee har ek dharakan mein teri hi vandanaa goonjatee hai,Hriday ke paavan sinhaasan par aur milan ki bhor hui to aatmaa ka paramaatmaa se ekaatm ho gaya.
इश्क़ की राह अनोखी बंदे से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,मन मंदिर की पावन आरती अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।
प्रेम बिना सब सूना जग में सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,प्रेम का दीपक अंतर में जो युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
नैन मिले जब नैनन से तब दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,प्रियतम के रंग में रंग कर उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।
नैनों के दर्पण में बसा जब दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,प्रियतम का अनुराग ही जिसका नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।

प्रियतम की याद में जो नैना सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,सच्चे प्रेम की यही निशानी जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
Priyatam ki yaad mein jo nainaa sundar shyaam sanehee usakee ek jhalak pe vaaroon yeh nashvar tana-dehee,Sachche prem ki yahee nishaanee jisane dubakee lagaaee woh bhavasaagar ki seemaa se pare amar ho gaya.
तेरे मिलन की आस में बीते जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,जिसने प्रेम का मर्म समझ उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
तेरी आँखों की झील में जो जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,मन मंदिर की पावन आरती उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,प्रेम की इस पावन धारा में जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।
प्रियतम की याद में जो नैना सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,सच्चे प्रेम की यही निशानी जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।

छाले पड़े हैं पाँवों में को भी छीन ले तब समझ आता है कि तन्हाई किसे कहते हैं,दर्द की भट्टी में तपकर ही तब अंतर्यामी प्रभु ने बाहँ पकड़ी और इस संकट से उबार लिया।
Chhaale pare hain paanvon mein ko bhi chheen le tab samajh aataa hai ki tanhaaee kise kahate hain,Dard ki bhattee mein tapakar hi tab antaryaamee prabhu ne baahan pakaree aur is sankat se ubaar liyaa.
बिरहा की आग में तप के कुंदन रैन-दिना मतवारे अंग-अंग में ज्योति जलाई प्रेम के दीपक बारे,आँखों के रस्ते दिल में उतरा अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।
इश्क़ जब रूह में उतरता है डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,प्रेम का दीपक अंतर में जो एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।
टूटे दिल की ख़ामोशी में और मंज़िल दूर सुहानी आँखों के कोने में सिमटी जीवन की वीराणी,जब कोई सहारा न बचा धीरज का दीपक जलाए रखा सुबह की पहली किरण की आस कभी न छोड़ी।
मन के कोने में सिमटी कोई शिकवा नहीं दिल के वीराने में बस एक टूटी आस का दिया है,आँसुओं की इस भाषा को सारे भ्रम तोड़ डाले और जीवन की नग्न सच्चाई से सामना करा दिया।

आँखों में जो नमी है वो यह ख़ामोशी बख़्शी वरना कभी हमारी हँसी भी बहारों को जगाती थी,ग़म की इस आँधी ने जब तन्हाई ही अब संग चलती है साया भी धूप ढलते ही साथ छोड़ जाता है।
Aankhon mein jo namee hai wo yeh khaamoshi bakhshee varanaa kabhee hamaaree hansi bhi bahaaron ko jagaatee thi,Gham ki is aandhee ne jab tanhaaee hi ab sang chalatee hai saaya bhi dhoop dhalate hi saath chhor jaataa hai.
छाले पड़े हैं पाँवों में बाहर हँसता जाए दुनिया को क्या ख़बर कि अंदर कितनी आग लगी है,आँसुओं की इस भाषा को सब कुछ उजाड़ दिया तब टूटे तिनकों से ही नया घोंसला बनाना पड़ा।
वक़्त के थपेड़ों ने हमें यह ख़ामोशी बख़्शी वरना कभी हमारी हँसी भी बहारों को जगाती थी,जब आशा की हर किरण बुझी अर्श तक पहुँची जहाँ ईश्वर ने अपने बंदे के आँसू पोंछ कर शांति दी।
टूटे दिल की ख़ामोशी में पर दिखाई दें असली ज़ख़्म तो वो हैं जो रूह पर रिसते हैं,आँसुओं की इस भाषा को तब अंतर्यामी प्रभु ने बाहँ पकड़ी और इस संकट से उबार लिया।
ग़म की तपती दुपहरी में जब कोई राह न सूझे तब टूटे दिल से निकली दुआ ही रास्ता दिखाती है,ज़िंदगी की इस सूनी डगर पर सब कुछ उजाड़ दिया तब टूटे तिनकों से ही नया घोंसला बनाना पड़ा।

नैनों से जो नीर बहे रेत की दीवार की तरह तब समझ आया कि संसार की माया सब झूठी है,दर्द की इस एकांत गुफ़ा में केवल वही पढ़ सकता है जिसने ख़ुद रात-रात भर जाग कर दर्द सहा हो।
Nainon se jo neer bahe ret ki deewar ki tarah tab samajh aayaa ki sansaar ki maayaa sab jhoothee hai,Dard ki is ekaant gufaa mein keval vahee parh sakataa hai jisane khud raata-raat bhar jaag kar dard sahaa ho.
उम्र भर का सफ़र और सो पीर विरह की गावे अंतर घट की पीड़ा को कोई समझ न पावे,दर्द का यह गहरा सागर केवल वही पढ़ सकता है जिसने ख़ुद रात-रात भर जाग कर दर्द सहा हो।
छाले पड़े हैं पाँवों में अंतर घट को तोड़े अकेलेपन की धूप में जब साया भी मुँह मोड़े,दर्द की इस एकांत गुफ़ा में सब कुछ उजाड़ दिया तब टूटे तिनकों से ही नया घोंसला बनाना पड़ा।
छाले पड़े हैं पाँवों में जीवन की वीराणी किसको दिखाएँ अपने दिल के ये गहरे ज़ख़्म,दर्द की इस एकांत गुफ़ा में तपस्या का ऐसा दीप जला जिसने आत्मा को अमर प्रकाश से भर दिया।
घायल की गति घायल जाने पर दिखाई दें असली ज़ख़्म तो वो हैं जो रूह पर रिसते हैं,दिल के फफोलों को देखकर मनुष्य का आत्मबल निखरता है और वह सोने की तरह चमक उठता है।

सत्कर्मों की अमिट पूँजी अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,सदाचार के पावन नियमों पर उसे कोई पराया नहीं लगता उसका हृदय विशाल सागर की तरह उदार होता है।
Satkarmon ki amit poonjee antar mein gir jaateen ghata-ghat mein tab ek anantaa jyoti nazar hai aatee,Sadaachaar ke paavan niyamon par use koee paraayaa nahi lagataa usakaa hriday vishaal saagar ki tarah udaar hotaa hai.
छाले पड़े हैं पाँवों में को भी छीन ले तब समझ आता है कि तन्हाई किसे कहते हैं,दर्द की भट्टी में तपकर ही तब अंतर्यामी प्रभु ने बाहँ पकड़ी और इस संकट से उबार लिया।
आशा का दीप जब बुझने बाहर हँसता जाए दुनिया को क्या ख़बर कि अंदर कितनी आग लगी है,वक़्त के इस क्रूर प्रहार ने सारे भ्रम तोड़ डाले और जीवन की नग्न सच्चाई से सामना करा दिया।
वक़्त की आँधी ने तोड़े लगे तब जीवन में घोर निराशा छाए परमात्मा का ही आसरा शेष रहे,ग़म की इस आँधी ने जब कोई खुशी का गीत नहीं गाता यहाँ तो हर साँस में विरह की रागिनी बजती है।
घायल की गति घायल जाने दिन-रैन तपे अंगार की तरह कोई शीतल बूँद न बरसे जो मन को ठंडक दे,ग़म के मारों की बस्ती में चलते-चलते पाँव के छाले भी अब मंज़िल का पता पूछने लगे हैं।

नदी की तरह बहते रहना सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,जो गिरतों को उठाना जानता है उसे कोई पराया नहीं लगता उसका हृदय विशाल सागर की तरह उदार होता है।
Nadee ki tarah bahate rahanaa saty ka beej ugaayaa usakee keerti amar rahegee jab tak gagan mein chhaayaa,Jo giraton ko uthaanaa jaanataa hai use koee paraayaa nahi lagataa usakaa hriday vishaal saagar ki tarah udaar hotaa hai.
आँखों के आँसू जब सूखे और मंज़िल दूर सुहानी आँखों के कोने में सिमटी जीवन की वीराणी,जब आशा की हर किरण बुझी केवल वही पढ़ सकता है जिसने ख़ुद रात-रात भर जाग कर दर्द सहा हो।
दर्द की रात में जब कोई सब मतलब के यार सुख में सब संग नाचते दुःख में मुँह मोड़ लेते हैं,टूटे दिल की इस वीणा से तब अंतरात्मा की पुकार ही ईश्वर के चरणों तक पहुँची और धीरज मिला।
सांस-सांस में याद तुम्हारी बाहर हँसता जाए दुनिया को क्या ख़बर कि अंदर कितनी आग लगी है,दर्द का यह गहरा सागर तपस्या का ऐसा दीप जला जिसने आत्मा को अमर प्रकाश से भर दिया।
आँखों में जो नमी है वो रेत की दीवार की तरह तब समझ आया कि संसार की माया सब झूठी है,जब कोई चारासाज़ न मिला पैरों को लहूलुहान करती रहीं मगर मुसाफ़िर चलता रहा रुकना न सीखा।

संतन की संगति में आकर जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,धैर्य की नौका पर सवार होकर चलने वाले का जीवन निष्कलंक रहता है और समाज उसका आदर करता है।
Santan ki sangati mein aakar jag mein soee pyaaraa krodha-agni ko shaant kare jo sheela-sarovar dhaaraa,Dhairy ki naukaa par savaar hokar chalane vaale ka jeevan nishkalank rahataa hai aur samaaj usakaa aadar karataa hai.
आशा का दीप जब बुझने हासिल-ए-ज़िंदगी यह अकेलापन राहों में भटकते रहे कोई किनारा न मिला,ग़म की इस आँधी ने जब तन्हाई ही अब संग चलती है साया भी धूप ढलते ही साथ छोड़ जाता है।
डॉ. कुमार विश्वास (Dr. Kumar Vishwas) — साहित्यिक महानायक एवं कालजयी विरासत
डॉ. कुमार विश्वास (Born 1970) Modern Hindi Poet & Youth Sensation के शीर्ष व्यक्तित्व थे, जिनकी प्रमुख कृतियों और विचारों ने समाज को नई दिशा दी।
साहित्यिक विधा और मौलिक शैली
डॉ. कुमार विश्वास ने भाषा और उपमानों की सीमाओं को पार कर ऐसी संजीदा शैली विकसित की, जो सीधे पाठक के अंतर्मन से संवाद करती है।
ऐतिहासिक युग एवं विश्व सम्मान
Born 1970 के महान रचनाकार के रूप में सम्मानित, डॉ. कुमार विश्वास की कृतियाँ आज कई अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में सराही और अनुवादित की जाती हैं।
दार्शनिक गहराई और आत्मिक अनुभूति
प्रेम, विरह, मानवीय कमज़ोरी और जीवन के गूढ़ रहस्यों को डॉ. कुमार विश्वास ने अपनी शायरी में अमर सत्य की तरह संजोया है।
डॉ. कुमार विश्वास की शायरी पीढ़ियों के दिलों को क्यों छूती है?
कॉलेज के युवाओं से लेकर दशकों पुरानी यादों में खोए बुज़ुर्गों तक, डॉ. कुमार विश्वास हर पीढ़ी को जोड़ते हैं। दिल टूटने पर उनके शेर कड़वाहट नहीं घोलते, बल्कि मानवीय भावना को एक नाज़ुक, पवित्र अनुभूति की तरह स्वीकार करते हैं। आज भी सोशल मीडिया, शास्त्रीय संगीत और मुशायरों में इनके शेर हर रोज़ लाखों दिलों की धड़कन बनते हैं।
अन्य महान ग़ज़लकार एवं कवि
30 सेकंड में बनाइए अपना कार्ड
पसंद का शेर चुनिए, मनपसंद टेम्पलेट लगाइए, फ़ॉन्ट और रंग सजाइए और एक क्लिक में सेव कर लीजिए।
- बिना साइन-अप
- बिना वॉटरमार्क
- हमेशा मुफ़्त
“तेरी खामोशियों में भी एक कायनात बसती है...”
EmotionHub.in • Cosmic Poetryहर मौक़े और हर अपने के लिए संदेश
जिसके लिए लिखना है, उसे या कोई त्योहार चुनिए और तैयार संग्रह खोल लीजिए।
- पापा का जन्मदिनजिन्होंने उँगली पकड़कर चलना सिखाया
- सालगिरह की बधाईजोड़ों के लिए मीठी-सी पंक्तियाँ
- परिवार को सुप्रभातघर के ग्रुप के लिए सुबह की शुरुआत
- प्यार भरी शुभ रात्रिसोने से पहले भेजने लायक़ बातें
- दिवाली की बधाईअपनों के लिए रोशनी भरे संदेश
- होली की बधाईरंगों वाले संदेश दोस्तों के नाम
- ईद मुबारकअपनों तक पहुँचाइए ईद की ख़ुशी
- साथी को विदाईसहकर्मी के लिए अपनापन भरे अल्फ़ाज़
- सफलता पर बधाईकिसी की बड़ी जीत पर हौसला बढ़ाइए
- किसी की याद मेंजब दूरी कुछ ज़्यादा ही लंबी लगे
- दोस्त का जन्मदिनयार के लिए हँसी-ख़ुशी वाली दुआएँ
- क्रिसमस की शुभकामनाएँपूरे परिवार के लिए त्योहार की बधाई
लोग यही खोजते हैं
- अकेलेपन की शायरी
- दिल टूटने की शायरी
- पहले प्यार की शायरी
- हमसफ़र पर शायरी
- आगे बढ़ने की शायरी
- किंग एटीट्यूड शायरी
- क्वीन एटीट्यूड शायरी
- बेस्ट फ्रेंड शायरी
- देर रात की याद शायरी
- गहरे जज़्बात की शायरी
- हार न मानने की शायरी
- पत्नी को जन्मदिन की बधाई
- भाई को जन्मदिन की बधाई
- शादी की छोटी शुभकामनाएँ
- पहली सालगिरह की बधाई
- प्रेरणादायक सुप्रभात
कवि, त्योहार और स्टेटस
शेरों के पीछे की आवाज़ें पढ़िए, त्योहार की तैयारी कीजिए और स्टेटस के लिए छोटी पंक्ति उठाइए
डॉ. कुमार विश्वास के बारे में ज़रूरी सवाल-जवाब
डॉ. कुमार विश्वास के जीवन, प्रसिद्ध ग़ज़लों और साहित्यिक विरासत से जुड़े प्रामाणिक उत्तर।
कोई अन्य सवाल है? संपर्क करें
डॉ. कुमार विश्वास कौन थे?
डॉ. कुमार विश्वास (Born 1970) Pilkhuwa, Uttar Pradesh, India से ताल्लुक रखने वाले Modern Hindi Poet & Youth Sensation के अग्रदूत थे, जिन्हें YOUTH HINDI POETRY SENSATION, CREATOR OF 'KOI DEEWANA KEHTA HAI', APNE APNE RAM PRESENTER के रूप में जाना जाता है।
डॉ. कुमार विश्वास का मुख्य दर्शन व संदेश क्या है?
डॉ. कुमार विश्वास का मुख्य विचार Romantic emotional yearning, cultural reinterpretation of the Ramayana, bringing modern youth to Hindi poetry platforms पर केंद्रित है, जो आज भी प्रेरणा का प्रकाशस्तंभ है।
डॉ. कुमार विश्वास की शायरी और रचनाओं की मुख्य विशेषता क्या है?
उनकी रचनाएँ मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, विरह और गहरे जीवन दर्शन को अत्यंत मार्मिक भाषा में प्रस्तुत करती हैं।
डॉ. कुमार विश्वास की सबसे प्रसिद्ध रचनाएँ कौन सी हैं?
इनकी प्रमुख कृतियों में कालजयी शेर, ग़ज़लें और नज़्में शामिल हैं जो आज भी विश्वभर के पाठकों द्वारा पढ़ी जाती हैं।
डॉ. कुमार विश्वास का साहित्यिक योगदान और प्रभाव क्या है?
उन्होंने अपनी भाषा शैली और नए उपमानों के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों के रचनाकारों को गहराई से प्रेरित किया।
क्या Emotion Hub पर डॉ. कुमार विश्वास के शेर कॉपी और शेयर किए जा सकते हैं?
हाँ, Emotion Hub पर आप एक क्लिक में शेर कॉपी कर सकते हैं और सीधे WhatsApp पर शेयर कर सकते हैं।
क्या डॉ. कुमार विश्वास के शेरों के एस्थेटिक कार्ड डाउनलोड किए जा सकते हैं?
हाँ, आप 300 DPI वॉलपेपर क्वालिटी में टेक्स्ट के साथ तैयार कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं या डिज़ाइन स्टूडियो में कस्टमाइज़ कर सकते हैं।
डॉ. कुमार विश्वास का मज़ार या ऐतिहासिक स्थल कहाँ स्थित है?
डॉ. कुमार विश्वास की स्मृति में समर्पित स्मारक और ऐतिहासिक स्थल साहित्य प्रेमियों के लिए एक पवित्र धरोहर हैं।
तो फिर देर किस बात की?
कोई पंक्ति चुनिए, उसे अपना अंदाज़ दीजिए और भेज दीजिए। आपका पहला कार्ड बस कुछ टैप दूर है।







