दुःख में सुमिरन सब कोई करै माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,मोह-निशा से जो जन जागा उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।
Carl Sagan (कार्ल सेगन)
कार्ल सेगन (1934–1996) Astronomer, Cosmologist & Science Communicator के शीर्ष व्यक्तित्व थे, जिनकी प्रमुख कृतियों और विचारों ने समाज को नई दिशा दी।
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‘दुःख में सुमिरन सब कोई करै माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,मोह-निशा से जो जन जागा उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।’— कार्ल सेगन
शेर #1 • कॉस्मिक कलाम
दुःख में सुमिरन सब कोई करै माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,

‘अहंकार की दीवारें जब भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,सत्य वचन जो मुख से बोले परलोक में संग जाएगी बाकी सब माया-मोह यहीं धरा रह जाएगा।’— कार्ल सेगन
शेर #2 • शाही पन्ना
अहंकार की दीवारें जब भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,

‘वाणी में जो अमृत घोले घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।’— कार्ल सेगन
शेr #3 • रूहानी शाम
वाणी में जो अमृत घोले घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,
अमर शेर और ग़ज़लें
अहंकार की दीवारें जब भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,सत्य वचन जो मुख से बोले परलोक में संग जाएगी बाकी सब माया-मोह यहीं धरा रह जाएगा।
वाणी में जो अमृत घोले घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
माटी का यह देह बना है प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,अमर नाम जग में उसी का जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।

रोम-रोम में रम गया प्रीतम संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,प्रेम के इस पावन तीरथ में उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।
A tender whisper in the twilight hour thy gentle spirit and my own are one,The golden cord of faith shall never part and binds our hearts in everlasting ties.
माटी का यह देह बना है भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,अमर नाम जग में उसी का अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,सत्संग की निर्मल गंगा में जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
सत्य के पावन पथ पर जिसने मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,सदाचार की पावन वेदी पर उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,सत्य वचन जो मुख से बोले अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।

तेरी याद का पावन साया का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,जब से नैना रूप में उलझे लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
Like summer rain upon the thirsty earth no distance can divide the faithful soul,Thy lovingkindness stays my fainting heart where weary wanderers find their native rest.
संतन की संगति में आकर अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,सत्संग की निर्मल गंगा में उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।
साधु-संगत की छाया में जो प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,प्रेम की डोर में बंध गया जो के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।
माटी का यह देह बना है जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,माटी का चोला पाकर जिसने जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
अहंकार की दीवारें जब स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,साधु पुरुष की वाणी कभी उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।

मन मंदिर में बसा जो मूरति तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,अंतर में जब प्रेम समाया जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।
Thy gentle hand upon my weary brow remains a beacon of enduring peace,Love builds its altar in the realm of light where mutual trust outshines the morning sun.
अहंकार की दीवारें जब सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,वाणी में जिसके मिठास घुली रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।
माटी का यह देह बना है जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,परहित में जिसने जीवन सौंपा के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।
नाम और दौलत तो माटी तो सारा जग अपना लागे पराया कोई न रहे सब में प्रभु रूप दिखे,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
कर्म की खेती जो जन बोवे अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,वाणी में जिसके मिठास घुली उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।

नैनों से जो नीर बहे और मंज़िल दूर सुहानी आँखों के कोने में सिमटी जीवन की वीराणी,इस दर्द भरे दिल की सदा तब परमात्मा ही सबसे बड़ा वैद्य बना और उसने रूह के ज़ख़्म भर दिए।
In silent hours when all the world is still a quiet witness of the vanished past,The wounded heart learns fortitude through pain and holds the spirit in its loving arms.
माटी का यह देह बना है तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,दीन-बंधु का सहारा बन के जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।
माटी का यह देह बना है बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,माटी का चोला पाकर जिसने अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।
कर्म की खेती जो जन बोवे भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,भवसागर की लहरों से जो अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।
अहंकार की दीवारें जब अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,मन के मैल को जिसने धोया अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।

आँखों के आँसू जब सूखे भटके सूने वन में जिसका कोई घोंसला न बचा डाल-डाल रोता फिरे,दर्द की भट्टी में तपकर ही सहनशीलता ही सबसे बड़ी पूँजी बनी जिसने हर तूफ़ान से बचा लिया।
The wounded spirit seeks a quiet place to mourn the loss of what was dearly loved,The pilgrim's journey ends in quiet rest and teaches wisdom to the seeking soul.
मन के निर्मल दर्पण में जब जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,जीवन का यह पावन सूत्र जो उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।
जो तूफ़ानों में अपनी नाव तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,दीन-बंधु का सहारा बन के उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,नेकी की राह पे जो जन उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।
आशा तृष्णा सब छूटी जब मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,परहित में जिसने जीवन सौंपा जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।

तन्हाई के अँधियारे में कोई शिकवा नहीं दिल के वीराने में बस एक टूटी आस का दिया है,आँसुओं की इस भाषा को अकेले ही चलना पड़ता है यहाँ कोई किसी का बोझ उठाने नहीं आता।
The saddest words of tongue or pen remain are counted by the angels of our grief,The soul endures what mortal flesh must weep and scatter all the darkness of our tears.
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,वाणी में जिसके मिठास घुली अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
माटी का यह देह बना है स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,वाणी में जिसके मिठास घुली जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,हरि की कृपा का पावन साया अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।
जो तूफ़ानों में अपनी नाव अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,जीवन का यह पावन सूत्र जो अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।

वाणी में जो अमृत घोले जिसने कर्तव्य निभाया उसके जीवन का हर क्षण यज्ञ की आहुति बन गया,संतोषी सदा सुखी रहता है उसे किसी वैभव की चाह नहीं उसका मन सदा शांत सरोवर की तरह रहता है।
A man should hear good music every day an ever-changing sea of hopes and fears,He lives the longest who has lived the best and guides the pilgrim through the maze of life.
वाणी वही जो घाव भरे और बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।
दीन-दुखी का आसरा बनकर अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,जीवन का यह पावन सूत्र जो वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।
प्रेम की गंगा अंतर में बहे स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।
नाम और दौलत तो माटी तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,सत्य-अहिंसा की राहों पर उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।

धरती की छाती पर जिसने जिसने मानव धर्म सँभाला उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है,जो अपने वचन का पक्का है विजय उसी की होती है जो सत्य और न्याय के पक्ष में अविचल खड़ा रहता है।
Stand firm and patient in the hour of trial our restless spirits seek their destined home,The brave man carves his fortune with his hand and crowns humanity with royal grace.
आशा तृष्णा सब छूटी जब माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,सदाचार की पावन वेदी पर लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।
दुःख में सुमिरन सब कोई करै मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,हृदय में जिसके दया बसी है लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।
आशा तृष्णा सब छूटी जब मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,प्रेम की डोर में बंध गया जो अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।
संतन की संगति में आकर का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।

अहंकार की दीवारें जब जले तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,मेहनत और लगन से जिसने तब केवल सत्कर्म ही साथ चलेंगे बाकी सब धन-दौलत यहीं धरा रह जाएगा।
Tell me not in mournful numbers life is vain and leads the traveler to the highest good,No worthy effort is bestowed in vain and sweetens all the bitter cups of earth.
जो तूफ़ानों में अपनी नाव तो सारा जग अपना लागे पराया कोई न रहे सब में प्रभु रूप दिखे,हृदय में जिसके दया बसी है मानव धर्म निभाया उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है।
संतन की संगति में आकर सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु परलोक में संग जाएगी बाकी सब माया-मोह यहीं धरा रह जाएगा।
वाणी वही जो घाव भरे और जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,मोह-निशा से जो जन जागा रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।
वाणी में जो अमृत घोले बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,भवसागर की लहरों से जो जिसने डुबकी लगाई उसके जन्म-जन्मांतर के सब पाप धुल जाते हैं।

मैं और मेरा का भ्रम से निर्मल हो बाहर के पाखंड से मुक्त होकर प्रभु भक्ति में लीन रहे,परमानंद का यह अलौकिक रस जो विलीन हो गया उसकी नदियाँ सागर में मिलकर सदा के लिए अमर हो गईं।
The inner light that illumines the mind dwells in the quiet chamber of the heart,Truth needs no champion but its own clear ray in the quiet harbor of the awakened mind.
अहंकार की दीवारें जब भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,हरि की कृपा का पावन साया उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।
तेरे मिलन की आस में बीते का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,साँसों के हर तार पे जिसका उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।
प्रेम की डोरी बाँध लई जब से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,प्रेम सुधा का रस जो चखा एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।
साँसों की सरगम में घुल गया रैन-दिना मतवारे अंग-अंग में ज्योति जलाई प्रेम के दीपक बारे,मन मंदिर की पावन आरती जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।

मोह-निशा जब ढलती है मानुष की जात देखत ही छिप जाएगा ज्यों तारा परभात,ब्रह्मलीन होकर जो जन स्थित समस्त चराचर जगत लीन है जो इसे जान लेता है वह अमरता को प्राप्त होता है।
The soul that rises like a morning star but only for the lack of wondering eyes,Pure consciousness shines radiant and serene where light and darkness merge in timeless day.
इश्क़ की राह अनोखी बंदे दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,प्रेम नगर का वासी बनकर मोती चमका प्रेम की सीपी में अनमोल ज्ञान का रत्न बन गया।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,जिसने अपना सब कुछ सौंपा जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
प्रेम गली अति साँकरी जामें दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,अमर प्रेम की अमर कहानी जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,प्रेम के इस पावन तीरथ में उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।

भवसागर की लहरों से जो व्यापक रूप से समाया हुआ है अज्ञानी बाहर ढूँढता ज्ञानी अंतर में पा लेता है,आत्मज्ञान का यह पावन प्रकाश जब तब आत्मा अपने मूल शुद्ध, बुद्ध और मुक्त स्वरूप में प्रतिष्ठित हो गई।
All that we see or seem upon this sphere that opens into boundless light and grace,The seeker and the sought are truly one and shines unclouded through the mist of doubt.
प्रेम रंग में जो रंग गया सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,जब से नैना रूप में उलझे युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
अंतर घट में जब ज्योति जगी जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,विरह का हर इक आँसू बनकर एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।
अंतर घट में जब ज्योति जगी रैन-दिना मतवारे अंग-अंग में ज्योति जलाई प्रेम के दीपक बारे,प्रेम के इस पावन तीरथ में कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,प्रियतम के चरणों में जिसने जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।

अहंकार की दीवारें जब भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,सत्य वचन जो मुख से बोले परलोक में संग जाएगी बाकी सब माया-मोह यहीं धरा रह जाएगा।
A thing of beauty is a joy forevermore to guide the seeker through the wilderness,Great hearts beat onward through the darkest night in quiet fellowship with all that lives.
प्रियतम की याद में जो नैना का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,प्रियतम के चरणों में जिसने मोती चमका प्रेम की सीपी में अनमोल ज्ञान का रत्न बन गया।
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,हृदय के पावन सिंहासन पर प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
प्रेम की पावन वेदी पर जिसने उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,प्रेम की पावन ज्योति जगाई तो बाहर का सारा बैर-भाव और द्वेष पल भर में समाप्त हो गया।
प्रेम रंग में जो रंग गया हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,प्रेम की मस्ती में जो झूमा जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।

नाम और दौलत तो माटी तो सारा जग अपना लागे पराया कोई न रहे सब में प्रभु रूप दिखे,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
The quiet grandeur of a noble deed outlives the monuments of crumbling stone,Love keeps its vigil through the passing years and sorrow melts into serene repose.
इश्क़ का सौदा जिसने किया वो प्रियतम का नाम सुना अनहद नाद का संगीत अंतर में गूँजने लगा,आँखों के रस्ते दिल में उतरा लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
प्रेम बिना सब सूना जग में पलकन मूँदूँ तो घट में पाऊँ ऐसा अलौकिक प्रेम जगा जो कभी मिटता नहीं,प्रेम के इस पावन तीरथ में प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
नैनन आगे तू ही तू नाचे तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,आँखों के रस्ते दिल में उतरा उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,अंतर में जब प्रेम समाया जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।

जो तूफ़ानों में अपनी नाव अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,जीवन का यह पावन सूत्र जो अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।
In every blossom of the quiet spring and listens to the music of the spheres,Faith plants its seeds beneath the winter snow and fills the silent chambers of the soul.
तेरी याद का पावन साया का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,जब से नैना रूप में उलझे लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
प्रियतम की याद में जो नैना दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,प्रेम की इस पावन घाटी में कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
तेरे मिलन की आस में बीते तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,विरह की रात जब ढलने लगी जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।
प्रेम बिना सब सूना जग में दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,प्रेम नगर का वासी बनकर उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।

अहंकार की दीवारें जब भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,हरि की कृपा का पावन साया उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।
Beneath the starry canopy of night reveals the wonder of the architect,The timeless melody shall never cease and crowns the seeker with eternal light.
तेरे मिलन की आस में बीते दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,हृदय के पावन सिंहासन पर लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
साँसों की सरगम में घुल गया जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,साँसों के हर तार पे जिसका जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
इश्क़ की राह अनोखी बंदे जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,प्रेम की मस्ती में जो झूमा कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
नैनन आगे तू ही तू नाचे पलकन मूँदूँ तो घट में पाऊँ ऐसा अलौकिक प्रेम जगा जो कभी मिटता नहीं,प्रेम की मस्ती में जो झूमा मन ऐसा निर्मल हुआ कि दर्पण भी उसके सामने लजा जाए।

प्रेम का प्याला जिसने पिया वो सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,हृदय के पावन सिंहासन पर प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
Love is the anchor in the fiercest storm and holds the spirit when the gale blows strong,Time cannot dim the luster of thy brow for silence speaks the language of the soul.
तेरे मिलन की आस में बीते दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,जब से नैना रूप में उलझे जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
नैन मिले जब नैनन से तब तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,प्रियतम के चरणों में जिसने एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।
तेरे रूप की पावन झांकी प्रियतम का नाम सुना अनहद नाद का संगीत अंतर में गूँजने लगा,प्रेम का दीपक अंतर में जो जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।
तेरे दीदार की एक झलक ने तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,जिसने अपना सब कुछ सौंपा नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।

इश्क़ की राह अनोखी बंदे जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,प्रेम की मस्ती में जो झूमा कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
Two wandering spirits meet at eventide safe from the fury of the surging main,In thy remembrance all my grief is lost and guides my footsteps to the quiet shore.
रोम-रोम में रम गया प्रीतम तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,प्रेम का दीपक अंतर में जो प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
मन मंदिर में बसा जो मूरति तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,अंतर में जब प्रेम समाया जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।
तेरे रूप की पावन झांकी तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,साँसों के हर तार पे जिसका सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।
प्रेम गली अति साँकरी जामें जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,प्रियतम का अनुराग ही जिसका नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।

रोम-रोम में रम गया प्रीतम तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,प्रेम के इस पावन तीरथ में जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।
I love thee to the depth and breadth and height of cloudless climes and pure celestial skies,Love needs no words to make its meaning plain and morning dawns upon the darkest night.
प्रियतम की याद में जो नैना जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,प्रियतम का अनुराग ही जिसका जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
नैनों के दर्पण में बसा जब दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,विरह का हर इक आँसू बनकर युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
तेरे दीदार की एक झलक ने से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,विरह का हर इक आँसू बनकर और मिलन की भोर हुई तो आत्मा का परमात्मा से एकात्म हो गया।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,प्रेम के इस पावन तीरथ में जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।

ज़ख़्म वो नहीं जो जिस्म जब साया भी साथ न दे तब धीरज ही मनुष्य का एकमात्र सच्चा साथी बने,अंधेरी रात के सन्नाटे में तब अंतरात्मा की पुकार ही ईश्वर के चरणों तक पहुँची और धीरज मिला।
When cherished dreams dissolve like morning mist yet shakes the foundations of our earthly pride,Time heals the anguish that no speech can tell to face the trials of the coming year.
प्रेम बिना सब सूना जग में उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,अमर प्रेम की अमर कहानी कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
प्रेम बिना सब सूना जग में सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,आँखों के रस्ते दिल में उतरा जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
दिल का आईना जब टूटा जीवन की वीराणी किसको दिखाएँ अपने दिल के ये गहरे ज़ख़्म,ग़म की इस गहरी रात में धीरज का दीपक जलाए रखा सुबह की पहली किरण की आस कभी न छोड़ी।
आँखों में जो नमी है वो कोई शिकवा नहीं दिल के वीराने में बस एक टूटी आस का दिया है,जब सबने मुँह फेर लिया कोई खुशी का गीत नहीं गाता यहाँ तो हर साँस में विरह की रागिनी बजती है।

दिल का आईना जब टूटा हज़ार टुकड़ों में बिखर गया हर टुकड़े में अपनों की बेवफ़ाई की तस्वीर दिखी,जब नयनों के सब आँसू सूखे सहनशीलता ही सबसे बड़ी पूँजी बनी जिसने हर तूफ़ान से बचा लिया।
Out of the night that covers me with shade yet shakes the foundations of our earthly pride,The soul endures what mortal flesh must weep and shines radiant through the passing storm.
तन्हाई के अँधियारे में सब मतलब के यार सुख में सब संग नाचते दुःख में मुँह मोड़ लेते हैं,टूटे हुए सपनों की किरचें जो चीख़ दबी रह गई वह खुदा के दरबार में सबसे बड़ी गवाही बनी।
टूटे दिल की ख़ामोशी में और मंज़िल दूर सुहानी आँखों के कोने में सिमटी जीवन की वीराणी,दिल के फफोलों को देखकर तब प्रभु कृपा की वर्षा हुई और जलते हुए मन को शांति मिल गई।
नैनों से जो नीर बहे और मंज़िल दूर सुहानी आँखों के कोने में सिमटी जीवन की वीराणी,इस दर्द भरे दिल की सदा तब परमात्मा ही सबसे बड़ा वैद्य बना और उसने रूह के ज़ख़्म भर दिए।
जिसके दिल पर बीत रही बाहर हँसता जाए दुनिया को क्या ख़बर कि अंदर कितनी आग लगी है,दर्द की इस एकांत गुफ़ा में तन्हाई ही अब संग चलती है साया भी धूप ढलते ही साथ छोड़ जाता है।

आँखों के आँसू जब सूखे दिन-रैन तपे अंगार की तरह कोई शीतल बूँद न बरसे जो मन को ठंडक दे,अंधेरी रात के सन्नाटे में तन्हाई ही अब संग चलती है साया भी धूप ढलते ही साथ छोड़ जाता है।
When friends depart and youthful days are gone and hears the distant tolling of the bell,The gentle dawn shall break upon our night and every tear becomes a pearl of price.
वक़्त के थपेड़ों ने हमें सो पीर विरह की गावे अंतर घट की पीड़ा को कोई समझ न पावे,टूटे दिल की इस वीणा से जो चीख़ दबी रह गई वह खुदा के दरबार में सबसे बड़ी गवाही बनी।
आँखों के आँसू जब सूखे जीवन की वीराणी किसको दिखाएँ अपने दिल के ये गहरे ज़ख़्म,दिल के फफोलों को देखकर मनुष्य का आत्मबल निखरता है और वह सोने की तरह चमक उठता है।
ग़म की तपती दुपहरी में चीख़ छुपी है भारी किसको अपना हाल सुनाएँ दुनिया मतलबी सारी,इस दर्द भरे दिल की सदा तब भीतर ज्ञान का अमृत झरना फूटा जिसने जीवन को तृप्त कर दिया।
छाले पड़े हैं पाँवों में दूजा भेद न पावे जो इस आग में जला वही इसका दर्द जान पावे,जब आशा की हर किरण बुझी पैरों को लहूलुहान करती रहीं मगर मुसाफ़िर चलता रहा रुकना न सीखा।

कर्म की पावन वेदी पर जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,विपदाओं से जो कभी न डरा उसे किसी वैभव की चाह नहीं उसका मन सदा शांत सरोवर की तरह रहता है।
The honest laborer with his sunburned brow but to achieve and labor while 'tis day,He lives the longest who has lived the best and sweetens all the bitter cups of earth.
ज़ख़्म वो नहीं जो जिस्म जब साया भी साथ न दे तब धीरज ही मनुष्य का एकमात्र सच्चा साथी बने,अंधेरी रात के सन्नाटे में तब अंतरात्मा की पुकार ही ईश्वर के चरणों तक पहुँची और धीरज मिला।
ज़ख़्म वो नहीं जो जिस्म किनारा कहीं न सूझे प्रभु बिना इस संकट में कोई पार लगाने वाला न दिखे,टूटे हुए सपनों की किरचें सब कुछ उजाड़ दिया तब टूटे तिनकों से ही नया घोंसला बनाना पड़ा।
वक़्त की आँधी ने तोड़े सब मतलब के यार सुख में सब संग नाचते दुःख में मुँह मोड़ लेते हैं,जब कोई सहारा न बचा तब प्रभु कृपा की वर्षा हुई और जलते हुए मन को शांति मिल गई।
उम्र भर का सफ़र और को भी छीन ले तब समझ आता है कि तन्हाई किसे कहते हैं,टूटे दिल की इस वीणा से तब परमात्मा ही सबसे बड़ा वैद्य बना और उसने रूह के ज़ख़्म भर दिए।

माटी का यह चोला पाकर जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,जिसने परोपकार का दीप जलाया जिसने जीवन जिया उसका हर दिन उत्सव और हर रात शांति की गोद बन गई।
Count that day lost whose low descending sun and drift like phantoms through the morning mist,Character outlives the monument of brass and sheds a lustre on our mortal path.
वक़्त की आँधी ने तोड़े हज़ार टुकड़ों में बिखर गया हर टुकड़े में अपनों की बेवफ़ाई की तस्वीर दिखी,वक़्त के इस क्रूर प्रहार ने अकेले ही चलना पड़ता है यहाँ कोई किसी का बोझ उठाने नहीं आता।
ज़ख़्म वो नहीं जो जिस्म और मंज़िल दूर सुहानी आँखों के कोने में सिमटी जीवन की वीराणी,टूटे दिल की इस वीणा से तो ग़ैरों से क्या शिकवा करना दिल ने चुपचाप सब कुछ सहना सीख लिया।
तन्हाई के अँधियारे में हज़ार टुकड़ों में बिखर गया हर टुकड़े में अपनों की बेवफ़ाई की तस्वीर दिखी,अकेलेपन की इस राह पर तब अंतरात्मा की पुकार ही ईश्वर के चरणों तक पहुँची और धीरज मिला।
आँखों के आँसू जब सूखे भटके सूने वन में जिसका कोई घोंसला न बचा डाल-डाल रोता फिरे,दर्द की भट्टी में तपकर ही सहनशीलता ही सबसे बड़ी पूँजी बनी जिसने हर तूफ़ान से बचा लिया।

मन मंदिर में जो दीप है वही मंज़िल पाता है गिरने वाले को दुनिया कायर कहती संभलने वाले को वीर,जो अपने वचन का पक्का है उसकी राह में कभी अंधेरा नहीं होता वह स्वयं भी तरता है औरों को भी तारता है।
Each morning brings a fresh and sacred task views from thy hand no worthy action done,No honest labor ever goes unblessed and sheds a lustre on our mortal path.
मन के कोने में सिमटी चीख़ छुपी है भारी किसको अपना हाल सुनाएँ दुनिया मतलबी सारी,जब कोई चारासाज़ न मिला अकेले ही चलना पड़ता है यहाँ कोई किसी का बोझ उठाने नहीं आता।
कार्ल सेगन (Carl Sagan) — साहित्यिक महानायक एवं कालजयी विरासत
कार्ल सेगन (1934–1996) Astronomer, Cosmologist & Science Communicator के शीर्ष व्यक्तित्व थे, जिनकी प्रमुख कृतियों और विचारों ने समाज को नई दिशा दी।
साहित्यिक विधा और मौलिक शैली
कार्ल सेगन ने भाषा और उपमानों की सीमाओं को पार कर ऐसी संजीदा शैली विकसित की, जो सीधे पाठक के अंतर्मन से संवाद करती है।
ऐतिहासिक युग एवं विश्व सम्मान
1934–1996 के महान रचनाकार के रूप में सम्मानित, कार्ल सेगन की कृतियाँ आज कई अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में सराही और अनुवादित की जाती हैं।
दार्शनिक गहराई और आत्मिक अनुभूति
प्रेम, विरह, मानवीय कमज़ोरी और जीवन के गूढ़ रहस्यों को कार्ल सेगन ने अपनी शायरी में अमर सत्य की तरह संजोया है।
कार्ल सेगन की शायरी पीढ़ियों के दिलों को क्यों छूती है?
कॉलेज के युवाओं से लेकर दशकों पुरानी यादों में खोए बुज़ुर्गों तक, कार्ल सेगन हर पीढ़ी को जोड़ते हैं। दिल टूटने पर उनके शेर कड़वाहट नहीं घोलते, बल्कि मानवीय भावना को एक नाज़ुक, पवित्र अनुभूति की तरह स्वीकार करते हैं। आज भी सोशल मीडिया, शास्त्रीय संगीत और मुशायरों में इनके शेर हर रोज़ लाखों दिलों की धड़कन बनते हैं।
अन्य महान ग़ज़लकार एवं कवि
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कार्ल सेगन कौन थे?
कार्ल सेगन (1934–1996) Brooklyn, New York, USA से ताल्लुक रखने वाले Astronomer, Cosmologist & Science Communicator के अग्रदूत थे, जिन्हें CREATOR OF 'COSMOS', PIONEER OF PLANETARY SCIENCE, VOICE OF THE 'PALE BLUE DOT', PULITZER LAUREATE के रूप में जाना जाता है।
कार्ल सेगन का मुख्य दर्शन व संदेश क्या है?
कार्ल सेगन का मुख्य विचार We are a way for the cosmos to know itself; scientific skepticism as a candle in the dark; cosmic humility of Earth as a pale blue dot पर केंद्रित है, जो आज भी प्रेरणा का प्रकाशस्तंभ है।
कार्ल सेगन की शायरी और रचनाओं की मुख्य विशेषता क्या है?
उनकी रचनाएँ मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, विरह और गहरे जीवन दर्शन को अत्यंत मार्मिक भाषा में प्रस्तुत करती हैं।
कार्ल सेगन की सबसे प्रसिद्ध रचनाएँ कौन सी हैं?
इनकी प्रमुख कृतियों में कालजयी शेर, ग़ज़लें और नज़्में शामिल हैं जो आज भी विश्वभर के पाठकों द्वारा पढ़ी जाती हैं।
कार्ल सेगन का साहित्यिक योगदान और प्रभाव क्या है?
उन्होंने अपनी भाषा शैली और नए उपमानों के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों के रचनाकारों को गहराई से प्रेरित किया।
क्या Emotion Hub पर कार्ल सेगन के शेर कॉपी और शेयर किए जा सकते हैं?
हाँ, Emotion Hub पर आप एक क्लिक में शेर कॉपी कर सकते हैं और सीधे WhatsApp पर शेयर कर सकते हैं।
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कार्ल सेगन की स्मृति में समर्पित स्मारक और ऐतिहासिक स्थल साहित्य प्रेमियों के लिए एक पवित्र धरोहर हैं।
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