साधु-संगत की छाया में जो मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,प्रेम की डोर में बंध गया जो उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।
Arnimal (अरणीमाल)
अरणीमाल 18वीं सदी की महान कश्मीरी कवयित्री हैं, जिनके 'वत्सन' गीतों में विरह, उपेक्षित प्रेम और स्त्री-हृदय का मार्मिक दर्द अमर रूप में अंकित है।
डाउनलोड करें अरणीमाल के एस्थेटिक स्टोरी कार्ड्स

‘साधु-संगत की छाया में जो मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,प्रेम की डोर में बंध गया जो उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।’— अरणीमाल
शेर #1 • कॉस्मिक कलाम
साधु-संगत की छाया में जो मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,

‘मन के निर्मल दर्पण में जब तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,सदाचार की पावन वेदी पर जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।’— अरणीमाल
शेर #2 • शाही पन्ना
मन के निर्मल दर्पण में जब तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,

‘जो तूफ़ानों में अपनी नाव सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,अहंकार का त्याग किया जिसने परलोक में संग जाएगी बाकी सब माया-मोह यहीं धरा रह जाएगा।’— अरणीमाल
शेr #3 • रूहानी शाम
जो तूफ़ानों में अपनी नाव सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,
अमर शेर और ग़ज़लें
मन के निर्मल दर्पण में जब तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,सदाचार की पावन वेदी पर जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।
जो तूफ़ानों में अपनी नाव सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,अहंकार का त्याग किया जिसने परलोक में संग जाएगी बाकी सब माया-मोह यहीं धरा रह जाएगा।
आशा तृष्णा सब छूटी जब स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,सत्संग की निर्मल गंगा में जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।

तेरे दीदार की एक झलक ने अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,विरह का हर इक आँसू बनकर नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।
Tere deedaar ki ek jhalak ne amar ho gaya jag mein use duniya ka koee lobh baandh na sakaa kabhee,Virah ka har ik aansoo banakar naam likhaa hai woh har shvaas mein apane priyatam ka hi gun gaataa hai.
सत्य का दीप जब जलता है रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,भवसागर की लहरों से जो के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।
कर्म की खेती जो जन बोवे तो सारा जग अपना लागे पराया कोई न रहे सब में प्रभु रूप दिखे,सत्संग की निर्मल गंगा में व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
नाम और दौलत तो माटी अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,सत्संग की निर्मल गंगा में जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
कर्म की खेती जो जन बोवे अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,हृदय में जिसके दया बसी है वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।

प्रेम बिना सब सूना जग में बरसे दिन और रात विरह की अग्नि में तपकर पावन हो गया मन का धाम,जिसने अपना सब कुछ सौंपा उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
Prem binaa sab soonaa jag mein barase din aur raat virah ki agni mein tapakar paavan ho gaya man ka dhaam,Jisane apanaa sab kuchh saunpaa use indr ka amrit bhi pheekaa lage woh to prem ras mein tript ho gaya.
माटी का यह देह बना है प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,धैर्य का दामन जिसने थामे उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,सत्य वचन जो मुख से बोले रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।
दीन-दुखी का आसरा बनकर निर्भय पाँव धरे काल की कठिन चाल भी उसका कुछ न बिगाड़ सके,भवसागर की लहरों से जो अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
नाम और दौलत तो माटी भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,प्रेम की डोर में बंध गया जो वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।

तेरे मिलन की आस में बीते अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,जिसने प्रेम का मर्म समझ संसार की सुध-बुध बिसराई केवल प्रीतम की सूरत याद रही।
Tere milan ki aas mein beete amar ho gaya jag mein use duniya ka koee lobh baandh na sakaa kabhee,Jisane prem ka marm samajh sansaar ki sudha-budh bisaraaee keval preetam ki soorat yaad rahi.
जो तूफ़ानों में अपनी नाव मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,दीन-बंधु का सहारा बन के रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।
धरती की छाती पर जिसने घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,साधु पुरुष की वाणी कभी जिसने डुबकी लगाई उसके जन्म-जन्मांतर के सब पाप धुल जाते हैं।
धरती की छाती पर जिसने तो सारा जग अपना लागे पराया कोई न रहे सब में प्रभु रूप दिखे,धैर्य का दामन जिसने थामे जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
साधु-संगत की छाया में जो अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,धैर्य का दामन जिसने थामे वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।

मन के कोने में सिमटी हैं कितने सुंदर सपने बेबस होकर देखा हमने रूठ गए सब अपने,टूटे हुए दिल का दर्द जो चीख़ दबी रह गई वह खुदा के दरबार में सबसे बड़ी गवाही बनी।
Man ke kone mein simatee hain kitane sundar sapane bebas hokar dekhaa hamane rooth gaye sab apane,Toote hue dil ka dard jo cheekh dabee rah gayi woh khudaa ke darabaar mein sabase baree gavaahee banee.
मन मंदिर में जो दीप जले सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,मोह-निशा से जो जन जागा वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।
वाणी वही जो घाव भरे और अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,अहंकार का त्याग किया जिसने अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।
आशा तृष्णा सब छूटी जब मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,सत्संग की निर्मल गंगा में अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।
साधु-संगत की छाया में जो जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,शांति और संतोष का धन जो रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।

जिसके दिल पर बीत रही रेत की दीवार की तरह तब समझ आया कि संसार की माया सब झूठी है,ग़म की इस आँधी ने जब तब अंतरात्मा की पुकार ही ईश्वर के चरणों तक पहुँची और धीरज मिला।
Jisake dil par beet rahi ret ki deewar ki tarah tab samajh aayaa ki sansaar ki maayaa sab jhoothee hai,Gham ki is aandhee ne jab tab antaraatmaa ki pukaar hi eeshvar ke charanon tak pahunchee aur dheeraj mila.
प्रेम की गंगा अंतर में बहे तो सारा जग अपना लागे पराया कोई न रहे सब में प्रभु रूप दिखे,जीवन का यह पावन सूत्र जो निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।
साधु-संगत की छाया में जो घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,वाणी में जिसके मिठास घुली उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।
धरती की छाती पर जिसने घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,हरि की कृपा का पावन साया उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,सत्कर्मों की अमिट कमाई ही उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।

तन्हाई के अँधियारे में रेत की दीवार की तरह तब समझ आया कि संसार की माया सब झूठी है,जब कोई सहारा न बचा तब प्रभु कृपा की वर्षा हुई और जलते हुए मन को शांति मिल गई।
Tanhaaee ke andhiyaare mein ret ki deewar ki tarah tab samajh aayaa ki sansaar ki maayaa sab jhoothee hai,Jab koee sahaaraa na bachaa tab prabhu kripaa ki varshaa hui aur jalate hue man ko shaanti mil gayi.
हरि सुमिरन में जिसका चित्त स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,दीन-बंधु का सहारा बन के लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।
दुःख में सुमिरन सब कोई करै अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,शांति और संतोष का धन जो के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।
सत्य का दीप जब जलता है सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,दीन-बंधु का सहारा बन के लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।
धरती की छाती पर जिसने स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,हरि की कृपा का पावन साया परलोक में संग जाएगी बाकी सब माया-मोह यहीं धरा रह जाएगा।

हौसलों के तरकश में जब जो जस करई सो तस फल चाखा कर्म ही पूजा है कर्म ही जीवन की पहचान है,माटी के इस पुतले में जब वह कभी पराजित नहीं होता समय के साथ चलने वाला ही विजेता बनता है।
Hausalon ke tarakash mein jab jo jas karaee so tas phal chaakhaa karm hi poojaa hai karm hi jeevan ki pahachaan hai,Maatee ke is putale mein jab woh kabhee paraajit nahi hotaa samay ke saath chalane vaalaa hi vijetaa banataa hai.
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,माटी का चोला पाकर जिसने जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,सत्य-अहिंसा की राहों पर रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।
साधु-संगत की छाया में जो भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,परहित में जिसने जीवन सौंपा जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
नाम और दौलत तो माटी माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।

जीवन का यह कठिन सफ़र हँसते-हँसते तय करना सीखो जो काँटों पे मुस्कुराया वही गुलाब बना,जिसने परोपकार का दीप जलाया और अडिग रहा पहाड़ की तरह तूफ़ान भी उसके सामने नतमस्तक हो जाते हैं।
Jeevan ka yeh kathin safar hansate-hansate tay karanaa seekho jo kaanton pe muskuraayaa vahee gulaab banaa,Jisane paropakaar ka deep jalaayaa aur adig raha pahaar ki tarah toofaan bhi usake saamane natamastak ho jaate hain.
मन के निर्मल दर्पण में जब सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,हरि की कृपा का पावन साया के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।
वाणी में जो अमृत घोले भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,मोह-निशा से जो जन जागा व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
दीन-दुखी का आसरा बनकर सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,प्रेम की डोर में बंध गया जो उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।

धरती की छाती पर जिसने जिसके पास है संचित वह संसार के समस्त वैभवों से अधिक सुखी और शांत है,समय की अमूल्य बूँदों को विजय उसी की होती है जो सत्य और न्याय के पक्ष में अविचल खड़ा रहता है।
Dharatee ki chhaatee par jisane jisake paas hai sanchit woh sansaar ke samast vaibhavon se adhik sukhee aur shaant hai,Samay ki amooly boondon ko vijay usee ki hotee hai jo saty aur nyaay ke paksh mein avichal kharaa rahataa hai.
दीन-दुखी का आसरा बनकर भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,प्रेम की डोर में बंध गया जो उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।
सत्य के पावन पथ पर जिसने तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,दीन-बंधु का सहारा बन के मानव धर्म निभाया उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है।
हरि सुमिरन में जिसका चित्त स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,साधु पुरुष की वाणी कभी अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
वाणी में जो अमृत घोले प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,मन के मैल को जिसने धोया के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।

अंतर्मन के सन्नाटे में जब परमात्मा की आवाज़ सुनाई दे वही सच्चा उपदेश है जो मोक्ष का द्वार खोलता है,परम पद की प्राप्ति उसी को होती जीव और ब्रह्म का भेद समाप्त हो जाए और केवल अद्वैत ही शेष रहे।
Antarman ke sannaate mein jab paramaatmaa ki aavaaz sunaaee de vahee sachchaa upadesh hai jo moksh ka dvaar kholataa hai,Param pad ki praapti usee ko hotee jeev aur brahm ka bhed samaapt ho jaae aur keval advait hi shesh rahe.
दीन-दुखी का आसरा बनकर भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,सत्य वचन जो मुख से बोले निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।
तेरे रूप की पावन झांकी तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,जब से नैना रूप में उलझे जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।
नैन मिले जब नैनन से तब तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,प्रियतम के चरणों में जिसने मन ऐसा निर्मल हुआ कि दर्पण भी उसके सामने लजा जाए।
फासले मिट गए जब दिल से तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,प्रेम की इस पावन धारा में जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।

आत्मा अजर-अमर अविनाशी है एक वस्त्र बदलने का नाम है आत्मा अजर-अमर है और सदैव प्रकाशमान रहेगी,जब समस्त वासनाएँ भस्म हो गईं जिसने अपना शीश नवाया उसने परम मुक्ति का अमर वरदान प्राप्त कर लिया।
Aatmaa ajara-amar avinaashee hai ek vastr badalane ka naam hai aatmaa ajara-amar hai aur sadaiv prakaashamaan rahegee,Jab samast vaasanaaen bhasm ho gaeen jisane apanaa sheesh navaayaa usane param mukti ka amar varadaan praapt kar liyaa.
प्रेम बिना सब सूना जग में से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,साँसों के हर तार पे जिसका कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
नैन मिले जब नैनन से तब पलकन मूँदूँ तो घट में पाऊँ ऐसा अलौकिक प्रेम जगा जो कभी मिटता नहीं,अमर प्रेम की अमर कहानी अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।
प्रेम बिना सब सूना जग में तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,प्रियतम की चाहत में जिसने युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
तेरे दीदार की एक झलक ने अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,विरह का हर इक आँसू बनकर नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।

मृत्यु कोई अंत नहीं बस और ज्ञान-भोर मुस्काए अमृत रस की बूँदें अंतर घट में बरसने लगती हैं,वैराग्य की इस पावन धारा में अंतर में जागा तो अविद्या का सारा अंधकार पल भर में समाप्त हो गया।
Mrityu koee ant nahi bas aur jnyaana-bhor muskaae amrit ras ki boonden antar ghat mein barasane lagatee hain,Vairaagy ki is paavan dhaaraa mein antar mein jaagaa to avidyaa ka saaraa andhakaar pal bhar mein samaapt ho gaya.
प्रियतम की याद में जो नैना दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,अमर प्रेम की अमर कहानी जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।
नैन मिले जब नैनन से तब दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,प्रेम की मस्ती में जो झूमा कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।
बिरहा की आग में तप के कुंदन उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,प्रेम सुधा का रस जो चखा प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
नैन मिले जब नैनन से तब डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,प्रियतम के चरणों में जिसने जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।

मन के निर्मल दर्पण में जब तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,सदाचार की पावन वेदी पर जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।
Man ke nirmal darpan mein jab to baahar tam na sataave aatmajnyaan ki paavan gangaa bhavasaagar tar jaave,Sadaachaar ki paavan vedee par jisane apane praan nyauchhaavar kie usakee keerti gaathaa yuga-yugaantar tak gaaee jaatee hai.
बिरहा की आग में तप के कुंदन उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,विरह का हर इक आँसू बनकर और मिलन की भोर हुई तो आत्मा का परमात्मा से एकात्म हो गया।
नैन मिले जब नैनन से तब रैन-दिना मतवारे अंग-अंग में ज्योति जलाई प्रेम के दीपक बारे,प्रेम का दीपक अंतर में जो मोती चमका प्रेम की सीपी में अनमोल ज्ञान का रत्न बन गया।
नैनन आगे तू ही तू नाचे का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,अंतर में जब प्रेम समाया मोती चमका प्रेम की सीपी में अनमोल ज्ञान का रत्न बन गया।
प्रेम बिना सब सूना जग में से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,प्रियतम के रंग में रंग कर कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।

धरती की छाती पर जिसने तो सारा जग अपना लागे पराया कोई न रहे सब में प्रभु रूप दिखे,धैर्य का दामन जिसने थामे जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
Dharatee ki chhaatee par jisane to saaraa jag apanaa laage paraayaa koee na rahe sab mein prabhu roop dikhe,Dhairy ka daaman jisane thaame jo dheer chalaa usakaa kadam kabhee saty ke maarg se dagamagaa nahi sakataa.
प्रेम रंग में जो रंग गया जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,हृदय के पावन सिंहासन पर जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
नैनन आगे तू ही तू नाचे जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,साँसों के हर तार पे जिसका एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।
नैनों के दर्पण में बसा जब दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,प्रेम की पावन ज्योति जगाई जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम दो न समाहिं जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाहिं,जब से नैना रूप में उलझे नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।

धरती की छाती पर जिसने स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,हरि की कृपा का पावन साया परलोक में संग जाएगी बाकी सब माया-मोह यहीं धरा रह जाएगा।
Dharatee ki chhaatee par jisane svayan khete hain kinaaraa unake svaagat mein sir jhukaataa hai,Hari ki kripaa ka paavan saaya paralok mein sang jaaegee baakee sab maayaa-moh yaheen dharaa rah jaaegaa.
प्रेम बिना सब सूना जग में बरसे दिन और रात विरह की अग्नि में तपकर पावन हो गया मन का धाम,जिसने अपना सब कुछ सौंपा उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
तेरी याद का पावन साया जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,जिसने अपना सब कुछ सौंपा जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,प्रेम की मस्ती में जो झूमा जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
प्रेम की पावन वेदी पर जिसने से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,साँसों के हर तार पे जिसका तो बाहर का सारा बैर-भाव और द्वेष पल भर में समाप्त हो गया।

दीन-दुखी का आसरा बनकर भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,सत्य वचन जो मुख से बोले निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।
Deena-dukhee ka aasaraa banakar bhaj le raam ka naamaa ant samay jab aavegaa tab sang na aave dhaamaa,Saty vachan jo mukh se bole nirbhay hokar paar hua jnyaan ki naukaa use param kinaare pahunchaa detee hai.
नैनों के दर्पण में बसा जब उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,विरह का हर इक आँसू बनकर जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।
नैनन आगे तू ही तू नाचे बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,प्रेम नगर का वासी बनकर उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।
नैन मिले जब नैनन से तब उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,विरह की रात जब ढलने लगी जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
नैनन आगे तू ही तू नाचे दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,विरह का हर इक आँसू बनकर अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।

नैन मिले जब नैनन से तब रैन-दिना मतवारे अंग-अंग में ज्योति जलाई प्रेम के दीपक बारे,प्रेम का दीपक अंतर में जो मोती चमका प्रेम की सीपी में अनमोल ज्ञान का रत्न बन गया।
Nain mile jab nainan se tab raina-dinaa matavaare anga-ang mein jyoti jalaaee prem ke deepak baare,Prem ka deepak antar mein jo motee chamakaa prem ki seepee mein anamol jnyaan ka ratn ban gaya.
मन मंदिर में बसा जो मूरति दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,प्रेम की इस पावन धारा में और मिलन की भोर हुई तो आत्मा का परमात्मा से एकात्म हो गया।
प्रेम रंग में जो रंग गया दो न समाहिं जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाहिं,प्रेम सुधा का रस जो चखा एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।
प्रेम की डोरी बाँध लई जब दो न समाहिं जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाहिं,सच्चे प्रेम की यही निशानी सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।
प्रेम गली अति साँकरी जामें तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,प्रेम नगर का वासी बनकर तो बाहर का सारा बैर-भाव और द्वेष पल भर में समाप्त हो गया।

नैन मिले जब नैनन से तब उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,विरह की रात जब ढलने लगी जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
Nain mile jab nainan se tab us par doojaa rang na charhe woh to keval apane priyatam ka hokar rah gaya,Virah ki raat jab dhalane lagee jo jan vicharaa usane sansaar ki saari chintaaon se mukti paa lee.
नैनों के दर्पण में बसा जब प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,प्रेम की पावन ज्योति जगाई प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
तेरे मिलन की आस में बीते अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,जिसने प्रेम का मर्म समझ संसार की सुध-बुध बिसराई केवल प्रीतम की सूरत याद रही।
प्रेम रंग में जो रंग गया तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,अमर प्रेम की अमर कहानी उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।
इश्क़ की राह अनोखी बंदे अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,साँसों के हर तार पे जिसका उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।

नैनन आगे तू ही तू नाचे दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,प्रेम की पावन ज्योति जगाई सदा प्रीतम का वास रहे वहाँ किसी दूसरे का प्रवेश कभी न हो।
Nainan aage too hi too naache dil ka bhed khulaa maun ki bhaashaa mein sab kuchh kah diyaa kuchh na chhupaayaa,Prem ki paavan jyoti jagaaee sadaa preetam ka vaas rahe wahaan kisee doosare ka pravesh kabhee na ho.
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,प्रेम की इस पावन घाटी में जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।
नैनन आगे तू ही तू नाचे का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,प्रेम सुधा का रस जो चखा युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
इश्क़ जब रूह में उतरता है अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,जिसने अपना सब कुछ सौंपा अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।
नैनन आगे तू ही तू नाचे दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,प्रेम की पावन ज्योति जगाई सदा प्रीतम का वास रहे वहाँ किसी दूसरे का प्रवेश कभी न हो।

भीतर-भीतर घुटता जाए सब मतलब के यार सुख में सब संग नाचते दुःख में मुँह मोड़ लेते हैं,दिल के फफोलों को देखकर मनुष्य का आत्मबल निखरता है और वह सोने की तरह चमक उठता है।
Bheetara-bheetar ghutataa jaae sab matalab ke yaar sukh mein sab sang naachate duhkh mein munh mod lete hain,Dil ke phapholon ko dekhakar manushy ka aatmabal nikharataa hai aur woh sone ki tarah chamak uthataa hai.
अंतर घट में जब ज्योति जगी संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,जब से नैना रूप में उलझे संसार की सुध-बुध बिसराई केवल प्रीतम की सूरत याद रही।
तेरी याद का पावन साया अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,प्रियतम के रंग में रंग कर जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।
नैनों से जो नीर बहे हमदर्द न मिला तकिये को सीने से लगा के सारी रात रोते रहे,जब आशा की हर किरण बुझी तब परमात्मा ही सबसे बड़ा वैद्य बना और उसने रूह के ज़ख़्म भर दिए।
ज़ख़्म वो नहीं जो जिस्म सो पीर विरह की गावे अंतर घट की पीड़ा को कोई समझ न पावे,जब अपनों ने ही दिए ज़ख़्म तब भीतर ज्ञान का अमृत झरना फूटा जिसने जीवन को तृप्त कर दिया।

मन के कोने में सिमटी किनारा कहीं न सूझे प्रभु बिना इस संकट में कोई पार लगाने वाला न दिखे,टूटे दिल की इस वीणा से तब विश्वास का एक नन्हा तारा चमका जिसने डूबने से बचा लिया।
Man ke kone mein simatee kinaaraa kaheen na soojhe prabhu binaa is sankat mein koee paar lagaane vaalaa na dikhe,Toote dil ki is veenaa se tab vishvaas ka ek nanhaa taaraa chamakaa jisane doobane se bachaa liyaa.
जिसके दिल पर बीत रही पर दिखाई दें असली ज़ख़्म तो वो हैं जो रूह पर रिसते हैं,अकेलेपन की इस राह पर केवल वही समझ सकता है जिसके सीने में कभी ऐसा ही घाव लगा हो।
मन के कोने में सिमटी और मंज़िल दूर सुहानी आँखों के कोने में सिमटी जीवन की वीराणी,जब कोई चारासाज़ न मिला ज़माने ने हँसी उड़ाई मगर यही फफोले कल ज्ञान का कमल बनेंगे।
मन के कोने में सिमटी हैं कितने सुंदर सपने बेबस होकर देखा हमने रूठ गए सब अपने,टूटे हुए दिल का दर्द जो चीख़ दबी रह गई वह खुदा के दरबार में सबसे बड़ी गवाही बनी।
मन के कोने में सिमटी हैं कितने सुंदर सपने बेबस होकर देखा हमने रूठ गए सब अपने,जब आशा की हर किरण बुझी केवल वही समझ सकता है जिसके सीने में कभी ऐसा ही घाव लगा हो।

भीतर-भीतर घुटता जाए हमदर्द न मिला तकिये को सीने से लगा के सारी रात रोते रहे,अंधेरी रात के सन्नाटे में केवल विरह का सुर निकलता है जो सुनने वालों के दिल को चीर देता है।
Bheetara-bheetar ghutataa jaae hamadard na mila takiye ko seene se lagaa ke saari raat rote rahe,Andheree raat ke sannaate mein keval virah ka sur nikalataa hai jo sunane vaalon ke dil ko cheer detaa hai.
दर्द की रात में जब कोई जीवन की वीराणी किसको दिखाएँ अपने दिल के ये गहरे ज़ख़्म,जब सबने मुँह फेर लिया ज़माने ने हँसी उड़ाई मगर यही फफोले कल ज्ञान का कमल बनेंगे।
आशा का दीप जब बुझने को भी छीन ले तब समझ आता है कि तन्हाई किसे कहते हैं,आँसुओं की इस भाषा को धीरज का दीपक जलाए रखा सुबह की पहली किरण की आस कभी न छोड़ी।
सपनों के महल जब टूटे और मंज़िल दूर सुहानी आँखों के कोने में सिमटी जीवन की वीराणी,ज़िंदगी की इस सूनी डगर पर केवल वही पढ़ सकता है जिसने ख़ुद रात-रात भर जाग कर दर्द सहा हो।
ज़ख़्म वो नहीं जो जिस्म सोई जाने पीर पराई दुनिया तो तमाशा देखती है कोई दर्द नहीं बाँटता,टूटे हुए दिल का दर्द तब प्रभु कृपा की वर्षा हुई और जलते हुए मन को शांति मिल गई।

सच्ची लगन से जो जन बिना रुके रात और दिन राजा हो या रंक सबको एक दिन मिट्टी में मिलना है,समय की अमूल्य बूँदों को है जो दूसरों के चेहरे पे मुस्कान लाए दौलत तो हाथ का मैल है।
Sachchee lagan se jo jan binaa ruke raat aur din raajaa ho yaa rank sabako ek din mitti mein milanaa hai,Samay ki amooly boondon ko hai jo doosaron ke chehare pe muskaan laae daulat to haath ka mail hai.
भीतर-भीतर घुटता जाए सब मतलब के यार सुख में सब संग नाचते दुःख में मुँह मोड़ लेते हैं,दिल के फफोलों को देखकर मनुष्य का आत्मबल निखरता है और वह सोने की तरह चमक उठता है।
तन्हाई के अँधियारे में हमदर्द न मिला तकिये को सीने से लगा के सारी रात रोते रहे,ज़िंदगी की इस सूनी डगर पर कोई खुशी का गीत नहीं गाता यहाँ तो हर साँस में विरह की रागिनी बजती है।
टूटे दिल की ख़ामोशी में पथरा गईं ये आँखें इंतज़ार की घड़ियाँ सदियों जैसी लंबी हो गईं,ग़म की इस गहरी रात में तब अंतरात्मा की पुकार ही ईश्वर के चरणों तक पहुँची और धीरज मिला।
घायल की गति घायल जाने किनारा कहीं न सूझे प्रभु बिना इस संकट में कोई पार लगाने वाला न दिखे,जीवन के इस कठिन मोड़ पर केवल विरह का सुर निकलता है जो सुनने वालों के दिल को चीर देता है।

धैर्य और संतोष का धन जिसने मानव धर्म सँभाला उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है,हृदय में जिसके दया और करुणा विजय उसी की होती है जो सत्य और न्याय के पक्ष में अविचल खड़ा रहता है।
Dhairy aur santosh ka dhan jisane maanav dharm sanbhaalaa usakaa janam saphal jag jaane amar dhaam ko jaataa hai,Hriday mein jisake dayaa aur karunaa vijay usee ki hotee hai jo saty aur nyaay ke paksh mein avichal kharaa rahataa hai.
विरह की अगन में जलता मन अंतर घट को तोड़े अकेलेपन की धूप में जब साया भी मुँह मोड़े,जब अपनों ने ही दिए ज़ख़्म ज़माने ने हँसी उड़ाई मगर यही फफोले कल ज्ञान का कमल बनेंगे।
सपनों के महल जब टूटे बाहर हँसता जाए दुनिया को क्या ख़बर कि अंदर कितनी आग लगी है,ग़म के मारों की बस्ती में सहनशीलता ही सबसे बड़ी पूँजी बनी जिसने हर तूफ़ान से बचा लिया।
कोई न अपना इस जग में पर दिखाई दें असली ज़ख़्म तो वो हैं जो रूह पर रिसते हैं,अकेलेपन की इस राह पर केवल विरह का सुर निकलता है जो सुनने वालों के दिल को चीर देता है।
जिसके दिल पर बीत रही रेत की दीवार की तरह तब समझ आया कि संसार की माया सब झूठी है,ग़म की इस आँधी ने जब तब अंतरात्मा की पुकार ही ईश्वर के चरणों तक पहुँची और धीरज मिला।

नदी की तरह बहते रहना जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,समय की अमूल्य बूँदों को तब केवल सत्कर्म ही साथ चलेंगे बाकी सब धन-दौलत यहीं धरा रह जाएगा।
Nadee ki tarah bahate rahanaa jo jeevan mahakaave usee manushy ka janam saphal jo parapeeraa apanaave,Samay ki amooly boondon ko tab keval satkarm hi saath chalenge baakee sab dhana-daulat yaheen dharaa rah jaaegaa.
कोई न अपना इस जग में किनारा कहीं न सूझे प्रभु बिना इस संकट में कोई पार लगाने वाला न दिखे,जब कोई चारासाज़ न मिला सहनशीलता ही सबसे बड़ी पूँजी बनी जिसने हर तूफ़ान से बचा लिया।
अरणीमाल (Arnimal) — साहित्यिक महानायक एवं कालजयी विरासत
अरणीमाल 18वीं सदी की महान कश्मीरी कवयित्री हैं, जिनके 'वत्सन' गीतों में विरह, उपेक्षित प्रेम और स्त्री-हृदय का मार्मिक दर्द अमर रूप में अंकित है।
साहित्यिक विधा और मौलिक शैली
अरणीमाल ने भाषा और उपमानों की सीमाओं को पार कर ऐसी संजीदा शैली विकसित की, जो सीधे पाठक के अंतर्मन से संवाद करती है।
ऐतिहासिक युग एवं विश्व सम्मान
18th Century Kashmir के महान रचनाकार के रूप में सम्मानित, अरणीमाल की कृतियाँ आज कई अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में सराही और अनुवादित की जाती हैं।
दार्शनिक गहराई और आत्मिक अनुभूति
प्रेम, विरह, मानवीय कमज़ोरी और जीवन के गूढ़ रहस्यों को अरणीमाल ने अपनी शायरी में अमर सत्य की तरह संजोया है।
अरणीमाल की शायरी पीढ़ियों के दिलों को क्यों छूती है?
कॉलेज के युवाओं से लेकर दशकों पुरानी यादों में खोए बुज़ुर्गों तक, अरणीमाल हर पीढ़ी को जोड़ते हैं। दिल टूटने पर उनके शेर कड़वाहट नहीं घोलते, बल्कि मानवीय भावना को एक नाज़ुक, पवित्र अनुभूति की तरह स्वीकार करते हैं। आज भी सोशल मीडिया, शास्त्रीय संगीत और मुशायरों में इनके शेर हर रोज़ लाखों दिलों की धड़कन बनते हैं।
अन्य महान ग़ज़लकार एवं कवि
30 सेकंड में बनाइए अपना कार्ड
पसंद का शेर चुनिए, मनपसंद टेम्पलेट लगाइए, फ़ॉन्ट और रंग सजाइए और एक क्लिक में सेव कर लीजिए।
- बिना साइन-अप
- बिना वॉटरमार्क
- हमेशा मुफ़्त
“तेरी खामोशियों में भी एक कायनात बसती है...”
EmotionHub.in • Cosmic Poetryहर मौक़े और हर अपने के लिए संदेश
जिसके लिए लिखना है, उसे या कोई त्योहार चुनिए और तैयार संग्रह खोल लीजिए।
- पापा का जन्मदिनजिन्होंने उँगली पकड़कर चलना सिखाया
- सालगिरह की बधाईजोड़ों के लिए मीठी-सी पंक्तियाँ
- परिवार को सुप्रभातघर के ग्रुप के लिए सुबह की शुरुआत
- प्यार भरी शुभ रात्रिसोने से पहले भेजने लायक़ बातें
- दिवाली की बधाईअपनों के लिए रोशनी भरे संदेश
- होली की बधाईरंगों वाले संदेश दोस्तों के नाम
- ईद मुबारकअपनों तक पहुँचाइए ईद की ख़ुशी
- साथी को विदाईसहकर्मी के लिए अपनापन भरे अल्फ़ाज़
- सफलता पर बधाईकिसी की बड़ी जीत पर हौसला बढ़ाइए
- किसी की याद मेंजब दूरी कुछ ज़्यादा ही लंबी लगे
- दोस्त का जन्मदिनयार के लिए हँसी-ख़ुशी वाली दुआएँ
- क्रिसमस की शुभकामनाएँपूरे परिवार के लिए त्योहार की बधाई
लोग यही खोजते हैं
- अकेलेपन की शायरी
- दिल टूटने की शायरी
- पहले प्यार की शायरी
- हमसफ़र पर शायरी
- आगे बढ़ने की शायरी
- किंग एटीट्यूड शायरी
- क्वीन एटीट्यूड शायरी
- बेस्ट फ्रेंड शायरी
- देर रात की याद शायरी
- गहरे जज़्बात की शायरी
- हार न मानने की शायरी
- पत्नी को जन्मदिन की बधाई
- भाई को जन्मदिन की बधाई
- शादी की छोटी शुभकामनाएँ
- पहली सालगिरह की बधाई
- प्रेरणादायक सुप्रभात
कवि, त्योहार और स्टेटस
शेरों के पीछे की आवाज़ें पढ़िए, त्योहार की तैयारी कीजिए और स्टेटस के लिए छोटी पंक्ति उठाइए
अरणीमाल के बारे में ज़रूरी सवाल-जवाब
अरणीमाल के जीवन, प्रसिद्ध ग़ज़लों और साहित्यिक विरासत से जुड़े प्रामाणिक उत्तर।
कोई अन्य सवाल है? संपर्क करें
अरणीमाल कौन थे और उनका साहित्यिक योगदान क्या है?
अरणीमाल (18th Century CE–18th Century CE) Kashmiri/Romantic साहित्य के शीर्ष हस्ताक्षर हैं, जिनकी रचनाओं ने मानवीय संवेदना, जीवन दर्शन और आध्यात्मिक प्रेम को अमर अभिव्यक्ति दी।
अरणीमाल की रचनाओं के मुख्य विषय क्या हैं?
अरणीमाल की रचनाओं के केंद्र में विरह-वेदना और उपेक्षित प्रेम, अकेलेपन का मार्मिक रुदन, प्रकृति और फूलों के प्रतीक, नारी-हृदय की मूक पुकार, कश्मीरी लोक-संगीत का माधुर्य जैसे विषय हैं, जो हृदयस्पर्शी अभिव्यक्ति और गहरे जीवन-सत्य से परिपूर्ण हैं।
अरणीमाल की शायरी और रचनाओं की मुख्य विशेषता क्या है?
उनकी रचनाएँ मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, विरह और गहरे जीवन दर्शन को अत्यंत मार्मिक भाषा में प्रस्तुत करती हैं।
अरणीमाल की सबसे प्रसिद्ध रचनाएँ कौन सी हैं?
इनकी प्रमुख कृतियों में कालजयी शेर, ग़ज़लें और नज़्में शामिल हैं जो आज भी विश्वभर के पाठकों द्वारा पढ़ी जाती हैं।
अरणीमाल का साहित्यिक योगदान और प्रभाव क्या है?
उन्होंने अपनी भाषा शैली और नए उपमानों के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों के रचनाकारों को गहराई से प्रेरित किया।
क्या Emotion Hub पर अरणीमाल के शेर कॉपी और शेयर किए जा सकते हैं?
हाँ, Emotion Hub पर आप एक क्लिक में शेर कॉपी कर सकते हैं और सीधे WhatsApp पर शेयर कर सकते हैं।
क्या अरणीमाल के शेरों के एस्थेटिक कार्ड डाउनलोड किए जा सकते हैं?
हाँ, आप 300 DPI वॉलपेपर क्वालिटी में टेक्स्ट के साथ तैयार कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं या डिज़ाइन स्टूडियो में कस्टमाइज़ कर सकते हैं।
अरणीमाल का मज़ार या ऐतिहासिक स्थल कहाँ स्थित है?
अरणीमाल की स्मृति में समर्पित स्मारक और ऐतिहासिक स्थल साहित्य प्रेमियों के लिए एक पवित्र धरोहर हैं।
तो फिर देर किस बात की?
कोई पंक्ति चुनिए, उसे अपना अंदाज़ दीजिए और भेज दीजिए। आपका पहला कार्ड बस कुछ टैप दूर है।







