प्रेम की गंगा अंतर में बहे सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,दीन-बंधु का सहारा बन के निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।
Umashankar Joshi (उमाशंकर जोशी)
Umashankar Joshi was a Nobel-nominated Gujarati literary giant and Jnanpith laureate whose poetry blended Gandhian humanism with cosmic philosophical depth.

प्रेम की गंगा अंतर में बहे सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,दीन-बंधु का सहारा बन के निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।
— UMASHANKAR JOSHI • MODERN GUJARATI GOLDEN AGE (1911–1988)

प्रेम की गंगा अंतर में बहे सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,दीन-बंधु का सहारा बन के निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।
— UMASHANKAR JOSHI • MODERN GUJARATI GOLDEN AGE (1911–1988)
Download Aesthetic Umashankar Joshi Story Cards

‘प्रेम की गंगा अंतर में बहे सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,दीन-बंधु का सहारा बन के निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।’— Umashankar Joshi
Sher #1 • Classic Couplet
प्रेम की गंगा अंतर में बहे सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,

‘सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब तो सारा जग अपना लागे पराया कोई न रहे सब में प्रभु रूप दिखे,साधु पुरुष की वाणी कभी उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।’— Umashankar Joshi
Sher #2 • Passionate Verse
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब तो सारा जग अपना लागे पराया कोई न रहे सब में प्रभु रूप दिखे,

‘मन मंदिर में जो दीप जले निर्भय पाँव धरे काल की कठिन चाल भी उसका कुछ न बिगाड़ सके,अहंकार का त्याग किया जिसने जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।’— Umashankar Joshi
Sher #3 • Soulful Couplet
मन मंदिर में जो दीप जले निर्भय पाँव धरे काल की कठिन चाल भी उसका कुछ न बिगाड़ सके,
Immortal Couplets & Ghazals
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब तो सारा जग अपना लागे पराया कोई न रहे सब में प्रभु रूप दिखे,साधु पुरुष की वाणी कभी उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।
मन मंदिर में जो दीप जले निर्भय पाँव धरे काल की कठिन चाल भी उसका कुछ न बिगाड़ सके,अहंकार का त्याग किया जिसने जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।
कर्म की खेती जो जन बोवे बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,नेकी की राह पे जो जन परलोक में संग जाएगी बाकी सब माया-मोह यहीं धरा रह जाएगा।

प्रियतम की याद में जो नैना जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,विरह का हर इक आँसू बनकर सदा प्रीतम का वास रहे वहाँ किसी दूसरे का प्रवेश कभी न हो।
Priyatam ki yaad mein jo nainaa jab se man mein samaayaa jeevan ki har tapatee dhoop sheetal chhaanv ban gayi,Virah ka har ik aansoo banakar sadaa preetam ka vaas rahe wahaan kisee doosare ka pravesh kabhee na ho.
संतन की संगति में आकर रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,परहित में जिसने जीवन सौंपा उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
संतन की संगति में आकर तो सारा जग अपना लागे पराया कोई न रहे सब में प्रभु रूप दिखे,जीवन का यह पावन सूत्र जो उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।
आशा तृष्णा सब छूटी जब अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,अहंकार का त्याग किया जिसने वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।
मन के निर्मल दर्पण में जब मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,परहित में जिसने जीवन सौंपा रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।

फासले मिट गए जब दिल से जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,प्रियतम की चाहत में जिसने युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
Phaasale mit gaye jab dil se jaise bin paani meen prem hi jeevan ka saar hai prem hi amrit ras,Priyatam ki chaahat mein jisane yuga-yug gaaee jaaegee jo prem ki raah par chale unakaa naam amar rahegaa.
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,अहंकार का त्याग किया जिसने उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।
मन मंदिर में जो दीप जले सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,सदाचार की पावन वेदी पर जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,सत्कर्मों की अमिट कमाई ही उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
अहंकार की दीवारें जब मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,सदाचार की पावन वेदी पर उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।

प्रेम रंग में जो रंग गया प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,मन मंदिर की पावन आरती प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
Prem rang mein jo rang gaya priyatam ka roop anoop chaaron or usee ki paavan leelaa nazar aane lagee,Man mandir ki paavan aaratee prem ke paavan charanon mein usane eeshvar ka saakshaat darshan paa liyaa.
कर्म की खेती जो जन बोवे सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,अहंकार का त्याग किया जिसने उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।
धरती की छाती पर जिसने निर्भय पाँव धरे काल की कठिन चाल भी उसका कुछ न बिगाड़ सके,मन के मैल को जिसने धोया उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,धैर्य का दामन जिसने थामे व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
माटी का यह देह बना है अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,सत्संग की निर्मल गंगा में वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।

दिल का आईना जब टूटा चीख़ छुपी है भारी किसको अपना हाल सुनाएँ दुनिया मतलबी सारी,ग़म की इस गहरी रात में केवल वही समझ सकता है जिसके सीने में कभी ऐसा ही घाव लगा हो।
Dil ka aaina jab tootaa cheekh chhupee hai bhaaree kisako apanaa haal sunaaen duniya matalabee saari,Gham ki is gaharee raat mein keval vahee samajh sakataa hai jisake seene mein kabhee aisaa hi ghaav lagaa ho.
कर्म की खेती जो जन बोवे रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,सत्संग की निर्मल गंगा में अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।
मन के निर्मल दर्पण में जब सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,अमर नाम जग में उसी का व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
मन के निर्मल दर्पण में जब जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,अहंकार का त्याग किया जिसने उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।
प्रेम की गंगा अंतर में बहे माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,सत्संग की निर्मल गंगा में अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।

ज़ख़्म वो नहीं जो जिस्म हैं कितने सुंदर सपने बेबस होकर देखा हमने रूठ गए सब अपने,अंधेरी रात के सन्नाटे में सारे भ्रम तोड़ डाले और जीवन की नग्न सच्चाई से सामना करा दिया।
Zakhm wo nahi jo jism hain kitane sundar sapane bebas hokar dekhaa hamane rooth gaye sab apane,Andheree raat ke sannaate mein saare bhram tor daale aur jeevan ki nagn sachchaaee se saamanaa karaa diyaa.
माटी का यह देह बना है घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,परहित में जिसने जीवन सौंपा रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।
नाम और दौलत तो माटी घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,जीवन का यह पावन सूत्र जो उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।
अहंकार की दीवारें जब भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,मोह-निशा से जो जन जागा उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
आशा तृष्णा सब छूटी जब भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,सदाचार की पावन वेदी पर रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।

अकेलेपन की धूप जब साए हमदर्द न मिला तकिये को सीने से लगा के सारी रात रोते रहे,ग़म की इस गहरी रात में ज़माने ने हँसी उड़ाई मगर यही फफोले कल ज्ञान का कमल बनेंगे।
Akelepan ki dhoop jab saae hamadard na mila takiye ko seene se lagaa ke saari raat rote rahe,Gham ki is gaharee raat mein zamaane ne hansi uraaee magar yahee phaphole kal jnyaan ka kamal banenge.
आशा तृष्णा सब छूटी जब प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,परहित में जिसने जीवन सौंपा अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।
दुःख में सुमिरन सब कोई करै सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,मन के मैल को जिसने धोया अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।
नाम और दौलत तो माटी प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,जीवन का यह पावन सूत्र जो अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।
धरती की छाती पर जिसने अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,प्रेम की डोर में बंध गया जो उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।

ठोकर खाकर जो संभलता जो अपने साथ सँजोए रखेगा वही परलोक में सच्चा संगी और साथी बनेगा,जीवन की सच्ची पूँजी वही पाता है जो दूसरों के काम आए केवल अपने लिए जीने वाले तो मृत समान हैं।
Thokar khaakar jo sanbhalataa jo apane saath sanjoe rakhegaa vahee paralok mein sachchaa sangee aur saathee banegaa,Jeevan ki sachchee poonjee vahee paataa hai jo doosaron ke kaam aae keval apane lie jeene vaale to mrit samaan hain.
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,साधु पुरुष की वाणी कभी रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।
जो तूफ़ानों में अपनी नाव भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,अहंकार का त्याग किया जिसने व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
धरती की छाती पर जिसने जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,साधु पुरुष की वाणी कभी जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।
दीन-दुखी का आसरा बनकर तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,जीवन का यह पावन सूत्र जो निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।

संतन की संगति में आकर तक उम्मीद का तीर ज़िंदा है हार कर भी जीतने का जज़्बा कभी कम न होगा,कर्म की खेती में जो पसीना और अडिग रहा पहाड़ की तरह तूफ़ान भी उसके सामने नतमस्तक हो जाते हैं।
Santan ki sangati mein aakar tak ummeed ka teer zinda hai haar kar bhi jeetane ka jazbaa kabhee kam na hogaa,Karm ki khetee mein jo paseenaa aur adig raha pahaar ki tarah toofaan bhi usake saamane natamastak ho jaate hain.
माटी का यह देह बना है रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,नेकी की राह पे जो जन उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।
प्रेम की गंगा अंतर में बहे अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,हरि की कृपा का पावन साया परलोक में संग जाएगी बाकी सब माया-मोह यहीं धरा रह जाएगा।
दुःख में सुमिरन सब कोई करै निर्भय पाँव धरे काल की कठिन चाल भी उसका कुछ न बिगाड़ सके,हृदय में जिसके दया बसी है मानव धर्म निभाया उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है।
नाम और दौलत तो माटी सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,परहित में जिसने जीवन सौंपा रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।

धैर्य और संतोष का धन बिना रुके रात और दिन राजा हो या रंक सबको एक दिन मिट्टी में मिलना है,जीवन के इस महासमर में पाता है जो दूसरों के काम आए केवल अपने लिए जीने वाले तो मृत समान हैं।
Dhairy aur santosh ka dhan binaa ruke raat aur din raajaa ho yaa rank sabako ek din mitti mein milanaa hai,Jeevan ke is mahaasamar mein paataa hai jo doosaron ke kaam aae keval apane lie jeene vaale to mrit samaan hain.
प्रेम की गंगा अंतर में बहे सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,हृदय में जिसके दया बसी है अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।
कर्म की खेती जो जन बोवे स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,नेकी की राह पे जो जन अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
हरि सुमिरन में जिसका चित्त स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,जीवन का यह पावन सूत्र जो उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।
नाम और दौलत तो माटी अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।

सत्य-अहिंसा की राहों पर परमात्मा की आवाज़ सुनाई दे वही सच्चा उपदेश है जो मोक्ष का द्वार खोलता है,जब द्वैत का सारा भ्रम मिट गया तब साधना पूर्ण हुई और भक्त भगवान के स्वरूप में ही विलीन हो गया।
Satya-ahinsaa ki raahon par paramaatmaa ki aavaaz sunaaee de vahee sachchaa upadesh hai jo moksh ka dvaar kholataa hai,Jab dvait ka saaraa bhram mit gaya tab saadhanaa poorn hui aur bhakt bhagavaan ke svaroop mein hi vileen ho gaya.
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,जीवन का यह पावन सूत्र जो उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।
इश्क़ का सौदा जिसने किया वो जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,मन मंदिर की पावन आरती युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
नैन मिले जब नैनन से तब बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,प्रियतम का अनुराग ही जिसका एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।
नैन मिले जब नैनन से तब अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,प्रेम के इस पावन तीरथ में उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।

सत्य का दीप जब जलता से निर्मल हो बाहर के पाखंड से मुक्त होकर प्रभु भक्ति में लीन रहे,जब द्वैत का सारा भ्रम मिट गया उसे न मृत्यु का भय होता है और न जीवन की कोई आस, वह सदा मुक्त है।
Saty ka deep jab jalataa se nirmal ho baahar ke paakhand se mukt hokar prabhu bhakti mein leen rahe,Jab dvait ka saaraa bhram mit gaya use na mrityu ka bhay hotaa hai aur na jeevan ki koee aas, woh sadaa mukt hai.
प्रेम बिना सब सूना जग में तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,जिसने अपना सब कुछ सौंपा संसार की सुध-बुध बिसराई केवल प्रीतम की सूरत याद रही।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,प्रियतम की चाहत में जिसने जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,प्रेम का दीपक अंतर में जो जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
प्रियतम की याद में जो नैना जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,विरह का हर इक आँसू बनकर सदा प्रीतम का वास रहे वहाँ किसी दूसरे का प्रवेश कभी न हो।

मन की चंचलता को जिसने कर पाता है जो समस्त विकारों से मुक्त होकर समत्व भाव में स्थित हो गया,जिसने इस नश्वर शरीर का मोह तो समस्त जगत उस एक ही अनंत परमात्मा का स्वरूप नज़र आने लगा।
Man ki chanchalataa ko jisane kar paataa hai jo samast vikaaron se mukt hokar samatv bhaav mein sthit ho gaya,Jisane is nashvar shareer ka moh to samast jagat us ek hi anant paramaatmaa ka svaroop nazar aane lagaa.
प्रेम की डोरी बाँध लई जब हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,प्रियतम के चरणों में जिसने जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,मन मंदिर की पावन आरती कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।
प्रियतम की याद में जो नैना तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,प्रियतम के चरणों में जिसने प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
तेरी आँखों की झील में जो संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,साँसों के हर तार पे जिसका मोती चमका प्रेम की सीपी में अनमोल ज्ञान का रत्न बन गया।

सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब तो सारा जग अपना लागे पराया कोई न रहे सब में प्रभु रूप दिखे,साधु पुरुष की वाणी कभी उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।
Satkarmon ki amit jyoti jab to saaraa jag apanaa laage paraayaa koee na rahe sab mein prabhu roop dikhe,Saadhu purush ki vaanee kabhee usane nirmal darpan paayaa jahaan paramaatmaa ka saakshaat svaroop dikhataa hai.
इश्क़ जब रूह में उतरता है जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,जिसने अपना सब कुछ सौंपा लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
नैनन आगे तू ही तू नाचे दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,सच्चे प्रेम की यही निशानी जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
प्रेम बिना सब सूना जग में डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,सच्चे आशिक़ की पहचान यही नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।
इश्क़ जब रूह में उतरता है प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,साँसों के हर तार पे जिसका जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।

क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,धैर्य का दामन जिसने थामे व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
Kshana-kshan beete aayu suhaanee saty ka beej ugaayaa usakee keerti amar rahegee jab tak gagan mein chhaayaa,Dhairy ka daaman jisane thaame vyarth nahi jaatee woh sadiyon tak bhatake huon ko sahi raah dikhaatee hai.
तेरी आँखों की झील में जो प्रियतम का नाम सुना अनहद नाद का संगीत अंतर में गूँजने लगा,प्रेम सुधा का रस जो चखा उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
नैन मिले जब नैनन से तब बरसे दिन और रात विरह की अग्नि में तपकर पावन हो गया मन का धाम,प्रेम सुधा का रस जो चखा जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।
नैन मिले जब नैनन से तब जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,प्रियतम का अनुराग ही जिसका अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।
तेरी याद का पावन साया का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,प्रेम की इस पावन धारा में युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।

धरती की छाती पर जिसने अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,प्रेम की डोर में बंध गया जो उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।
Dharatee ki chhaatee par jisane amrit ras ki varshaa bhaee janma-maran ka kathin pheraa sahaj hi kat gaya,Prem ki dor mein bandh gaya jo usakaa maan kabhee ghatataa nahi saty ki shakti se woh parvat ko bhi jhukaataa hai.
फासले मिट गए जब दिल से जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,प्रियतम की चाहत में जिसने युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
मन की वीणा बज उठी जब तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,जब से नैना रूप में उलझे प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
तेरे रूप की पावन झांकी उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,प्रियतम के चरणों में जिसने जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।
नैनन आगे तू ही तू नाचे उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,साँसों के हर तार पे जिसका जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।

ज्ञान का पावन भोर हुआ जब सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,जीवन का यह पावन सूत्र जो उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।
Jnyaan ka paavan bhor hua jab soee phal paave re kaayar baithe bhaagy gine dheer kar dikhalaave,Jeevan ka yeh paavan sootr jo usane nirmal darpan paayaa jahaan paramaatmaa ka saakshaat svaroop dikhataa hai.
साँसों की सरगम में घुल गया प्रियतम का नाम सुना अनहद नाद का संगीत अंतर में गूँजने लगा,जिसने अपना सब कुछ सौंपा जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
प्रेम की डोरी बाँध लई जब जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,प्रेम नगर का वासी बनकर एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।
इश्क़ जब रूह में उतरता है दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,हृदय के पावन सिंहासन पर लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
इश्क़ की राह अनोखी बंदे जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,प्रियतम की चाहत में जिसने सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।

नैनन आगे तू ही तू नाचे दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,सच्चे प्रेम की यही निशानी जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
Nainan aage too hi too naache dil ka taar juraa maun mein bhi har ek dharakan teri pukaar banee,Sachche prem ki yahee nishaanee jo jan vicharaa usane sansaar ki saari chintaaon se mukti paa lee.
रोम-रोम में रम गया प्रीतम दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,सच्चे प्रेम की यही निशानी जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
साँसों की सरगम में घुल गया जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,प्रेम के इस पावन तीरथ में सदा प्रीतम का वास रहे वहाँ किसी दूसरे का प्रवेश कभी न हो।
प्रेम की पावन वेदी पर जिसने जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,प्रेम के इस पावन तीरथ में जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
साँसों की सरगम में घुल गया बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,प्रियतम के रंग में रंग कर प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।

इश्क़ जब रूह में उतरता है दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,हृदय के पावन सिंहासन पर लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
Ishq jab rooh mein utarataa hai dil ka bhed khulaa maun ki bhaashaa mein sab kuchh kah diyaa kuchh na chhupaayaa,Hriday ke paavan sinhaasan par liyaa usane saare vedon aur shaastron ka saar sahaj mein paa liyaa.
इश्क़ का सौदा जिसने किया वो दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,प्रेम के इस पावन तीरथ में उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।
प्रेम रंग में जो रंग गया प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,मन मंदिर की पावन आरती प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
तेरे मिलन की आस में बीते उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,साँसों के हर तार पे जिसका जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।
नैनों के दर्पण में बसा जब का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,प्रेम सुधा का रस जो चखा एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।

तेरे रूप की पावन झांकी अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,जिसने अपना सब कुछ सौंपा अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।
Tere roop ki paavan jhaankee antar ghat mein saanchee duniya ki sudha-budh bisaraaee man ki veenaa baajee,Jisane apanaa sab kuchh saunpaa apanee sudh bisaraaee usane janama-maran ke bandhan ko sadaa ke lie tor diyaa.
साँसों की सरगम में घुल गया बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,प्रेम सुधा का रस जो चखा जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
मन मंदिर में बसा जो मूरति सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,प्रेम नगर का वासी बनकर प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
साँसों की सरगम में घुल गया दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,प्रेम नगर का वासी बनकर संसार की सुध-बुध बिसराई केवल प्रीतम की सूरत याद रही।
तेरे रूप की पावन झांकी अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,जिसने अपना सब कुछ सौंपा अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।

दिल का आईना जब टूटा सब मतलब के यार सुख में सब संग नाचते दुःख में मुँह मोड़ लेते हैं,वक़्त के इस क्रूर प्रहार ने सब कुछ उजाड़ दिया तब टूटे तिनकों से ही नया घोंसला बनाना पड़ा।
Dil ka aaina jab tootaa sab matalab ke yaar sukh mein sab sang naachate duhkh mein munh mod lete hain,Waqt ke is kroor prahaar ne sab kuchh ujaar diyaa tab toote tinakon se hi naya ghonsalaa banaanaa paraa.
प्रेम बिना सब सूना जग में अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,विरह का हर इक आँसू बनकर युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
नैन मिले जब नैनन से तब तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,जब से नैना रूप में उलझे जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।
मन के कोने में सिमटी लगे तब जीवन में घोर निराशा छाए परमात्मा का ही आसरा शेष रहे,दिल के फफोलों को देखकर तन्हाई ही अब संग चलती है साया भी धूप ढलते ही साथ छोड़ जाता है।
उम्र भर का सफ़र और को भी छीन ले तब समझ आता है कि तन्हाई किसे कहते हैं,अकेलेपन की इस राह पर सब कुछ उजाड़ दिया तब टूटे तिनकों से ही नया घोंसला बनाना पड़ा।

ज़ख़्म वो नहीं जो जिस्म पर दिखाई दें असली ज़ख़्म तो वो हैं जो रूह पर रिसते हैं,जब धैर्य की सीमा टूट गई केवल वही पढ़ सकता है जिसने ख़ुद रात-रात भर जाग कर दर्द सहा हो।
Zakhm wo nahi jo jism par dikhaaee den asalee zakhm to wo hain jo rooh par risate hain,Jab dhairy ki seemaa toot gayi keval vahee parh sakataa hai jisane khud raata-raat bhar jaag kar dard sahaa ho.
जिसके दिल पर बीत रही कोई शिकवा नहीं दिल के वीराने में बस एक टूटी आस का दिया है,टूटे हुए सपनों की किरचें तब भीतर ज्ञान का अमृत झरना फूटा जिसने जीवन को तृप्त कर दिया।
ग़म का मारा पंछी जैसे दूजा भेद न पावे जो इस आग में जला वही इसका दर्द जान पावे,दर्द का यह गहरा सागर पैरों को लहूलुहान करती रहीं मगर मुसाफ़िर चलता रहा रुकना न सीखा।
दिल का आईना जब टूटा चीख़ छुपी है भारी किसको अपना हाल सुनाएँ दुनिया मतलबी सारी,ग़म की इस गहरी रात में केवल वही समझ सकता है जिसके सीने में कभी ऐसा ही घाव लगा हो।
सांस-सांस में याद तुम्हारी और मंज़िल दूर सुहानी आँखों के कोने में सिमटी जीवन की वीराणी,ग़म की इस गहरी रात में पार करना ही पड़ेगा किनारे पर बैठ कर रोने से कोई पार नहीं होता।

टूटी नाव भँवर में फँसी जीवन की वीराणी किसको दिखाएँ अपने दिल के ये गहरे ज़ख़्म,आँसुओं की इस भाषा को जो चीख़ दबी रह गई वह खुदा के दरबार में सबसे बड़ी गवाही बनी।
Tootee naav bhanvar mein phansee jeevan ki veeraanee kisako dikhaaen apane dil ke ye gahare zakhm,Aansuon ki is bhaashaa ko jo cheekh dabee rah gayi woh khudaa ke darabaar mein sabase baree gavaahee banee.
उम्र भर का सफ़र और रेत की दीवार की तरह तब समझ आया कि संसार की माया सब झूठी है,ग़म के मारों की बस्ती में तब अंतर्यामी प्रभु ने बाहँ पकड़ी और इस संकट से उबार लिया।
जिसके दिल पर बीत रही हासिल-ए-ज़िंदगी यह अकेलापन राहों में भटकते रहे कोई किनारा न मिला,जब सबने मुँह फेर लिया केवल वही समझ सकता है जिसके सीने में कभी ऐसा ही घाव लगा हो।
ज़ख़्म वो नहीं जो जिस्म रेत की दीवार की तरह तब समझ आया कि संसार की माया सब झूठी है,जब धैर्य की सीमा टूट गई तपस्या का ऐसा दीप जला जिसने आत्मा को अमर प्रकाश से भर दिया।
छाले पड़े हैं पाँवों में किनारा कहीं न सूझे प्रभु बिना इस संकट में कोई पार लगाने वाला न दिखे,जब सबने मुँह फेर लिया ज़माने ने हँसी उड़ाई मगर यही फफोले कल ज्ञान का कमल बनेंगे।

हौसलों के तरकश में जब उसने सारा जग जीत लिया मन के जीते जीत है मन के हारे हार,संतोषी सदा सुखी रहता है विजय उसी की होती है जो सत्य और न्याय के पक्ष में अविचल खड़ा रहता है।
Hausalon ke tarakash mein jab usane saaraa jag jeet liyaa man ke jeete jeet hai man ke haare haar,Santoshee sadaa sukhee rahataa hai vijay usee ki hotee hai jo saty aur nyaay ke paksh mein avichal kharaa rahataa hai.
दिल का आईना जब टूटा सब मतलब के यार सुख में सब संग नाचते दुःख में मुँह मोड़ लेते हैं,वक़्त के इस क्रूर प्रहार ने सब कुछ उजाड़ दिया तब टूटे तिनकों से ही नया घोंसला बनाना पड़ा।
वक़्त के थपेड़ों ने हमें पथरा गईं ये आँखें इंतज़ार की घड़ियाँ सदियों जैसी लंबी हो गईं,ग़म की इस गहरी रात में केवल वही पढ़ सकता है जिसने ख़ुद रात-रात भर जाग कर दर्द सहा हो।
आँखों में जो नमी है वो हज़ार टुकड़ों में बिखर गया हर टुकड़े में अपनों की बेवफ़ाई की तस्वीर दिखी,जब नयनों के सब आँसू सूखे सब कुछ उजाड़ दिया तब टूटे तिनकों से ही नया घोंसला बनाना पड़ा।
ज़ख़्म वो नहीं जो जिस्म हैं कितने सुंदर सपने बेबस होकर देखा हमने रूठ गए सब अपने,दर्द की इस एकांत गुफ़ा में धीरज का दीपक जलाए रखा सुबह की पहली किरण की आस कभी न छोड़ी।

दीन-दुखी का आसरा बनकर ही जीवन का नियम है जो रुक गया वो अपनी सीमाओं में खो गया,हृदय में जिसके दया और करुणा उसे किसी वैभव की चाह नहीं उसका मन सदा शांत सरोवर की तरह रहता है।
Deena-dukhee ka aasaraa banakar hi jeevan ka niyam hai jo ruk gaya wo apanee seemaaon mein kho gaya,Hriday mein jisake dayaa aur karunaa use kisee vaibhav ki chaah nahi usakaa man sadaa shaant sarovar ki tarah rahataa hai.
आँखों के आँसू जब सूखे रेत की दीवार की तरह तब समझ आया कि संसार की माया सब झूठी है,वक़्त के इस क्रूर प्रहार ने सारे भ्रम तोड़ डाले और जीवन की नग्न सच्चाई से सामना करा दिया।
आँखों के आँसू जब सूखे हज़ार टुकड़ों में बिखर गया हर टुकड़े में अपनों की बेवफ़ाई की तस्वीर दिखी,दर्द का यह गहरा सागर धीरज का दीपक जलाए रखा सुबह की पहली किरण की आस कभी न छोड़ी।
जिसके दिल पर बीत रही हमदर्द न मिला तकिये को सीने से लगा के सारी रात रोते रहे,इस दर्द भरे दिल की सदा तब परमात्मा ही सबसे बड़ा वैद्य बना और उसने रूह के ज़ख़्म भर दिए।
ज़ख़्म वो नहीं जो जिस्म हैं कितने सुंदर सपने बेबस होकर देखा हमने रूठ गए सब अपने,अंधेरी रात के सन्नाटे में सारे भ्रम तोड़ डाले और जीवन की नग्न सच्चाई से सामना करा दिया।

वाणी में जो अमृत घोले चलता है अविचल होकर उसके कदम चूमती हैं मंज़िलें बाधाएँ दूर भागती हैं,संतोषी सदा सुखी रहता है पाता है जो दूसरों के काम आए केवल अपने लिए जीने वाले तो मृत समान हैं।
Vaanee mein jo amrit ghole chalataa hai avichal hokar usake kadam choomatee hain manzilen baadhaaen door bhaagatee hain,Santoshee sadaa sukhee rahataa hai paataa hai jo doosaron ke kaam aae keval apane lie jeene vaale to mrit samaan hain.
नैनों से जो नीर बहे हज़ार टुकड़ों में बिखर गया हर टुकड़े में अपनों की बेवफ़ाई की तस्वीर दिखी,दिल के फफोलों को देखकर जो चीख़ दबी रह गई वह खुदा के दरबार में सबसे बड़ी गवाही बनी।
About Umashankar Joshi (उमाशंकर जोशी) — The Maestro of Human Emotion
Umashankar Joshi was a Nobel-nominated Gujarati literary giant and Jnanpith laureate whose poetry blended Gandhian humanism with cosmic philosophical depth.
Poetic Innovation & Distinct Voice
Umashankar Joshi pioneered unique metaphors and an intimate conversational style, permanently redefining South Asian lyrical expression.
Historical Era & Global Acclaim
Celebrated across the Modern Gujarati Golden Age (1911–1988), their verses have transcended borders, honored globally in multiple international translations and scholarly anthologies.
Cosmic Depth & Emotional Resonance
Weaving existential inquiry, intimate vulnerability, and philosophical depth, Umashankar Joshi captured the bittersweet beauty of human existence.
Why Umashankar Joshi's Poetry Resonates Across Generations
From student dormitories to seasoned scholars, Umashankar Joshi effortlessly bridges generational divides. Their couplets on love, heartbreak, and resilience don't wallow in bitterness; rather, they gently embrace emotion as a precious, soulful companion. On digital platforms and in musical concerts, their words continue to touch millions daily.
Explore Other Ghazal Masters
Create Aesthetic Cards in Under 30 Seconds
Select your favourite shayari or quote, choose an ethereal cosmic gradient, adjust the font to Noto Serif Devanagari, and export immediately.
- No sign up
- No watermark
- Free forever
“तेरी खामोशियों में भी एक कायनात बसती है...”
EmotionHub.in • Cosmic PoetryMessages for every occasion and every person
Pick who you are writing to, or the festival, and open a ready collection.
- Birthday for dadWarm lines for the man who raised you
- Anniversary for husbandSweet notes for the one by your side
- Good morning, familyA bright start for the family group
- Good night, girlfriendSoft words before she sleeps
- Diwali wishesFestive messages for family and friends
- Holi wishesColourful lines for your friends
- Eid wishesEid Mubarak for your loved ones
- Farewell, colleagueKind goodbyes for a teammate
- CongratulationsCheer on a friend's big win
- Miss you, girlfriendFor the days when distance feels long
- Funny birthdayLight-hearted wishes for a best friend
- Christmas wishesSeason's greetings for the family
Popular searches
- Breakup Shayari for Girlfriend
- Attitude Shayari for Boys
- Attitude Shayari for Girls
- Attitude Status for Boys
- Alone Shayari
- 2 Line Attitude Shayari
- 2 Line Breakup Shayari
- Love Shayari for Girlfriend
- Miss You Shayari for Girlfriend
- Emotional Shayari for Mom
- Heart Touching Shayari for Husband
- Birthday Wishes for Wife
- Birthday Wishes for Husband
- Love Status for WhatsApp
- Inspirational Quotes for Students
- Life Quotes for Self
Poets, Festivals & Status
Read the voices behind the verses, plan ahead for festivals and grab a quick status line
Essential Questions About Umashankar Joshi
Authentic answers about Umashankar Joshi's life, iconic ghazals, and timeless literary legacy.
Still have a question? Contact us
Who was Umashankar Joshi and what was their literary significance?
Umashankar Joshi (1911–1988) was a monumental figure in Gujarati/Modern literature, celebrated for masterpieces exploring human devotion, existential philosophy, and timeless beauty.
What are the central themes in Umashankar Joshi's poetry?
The core themes across Umashankar Joshi's oeuvre encompass विश्व-शांति और सार्वभौमिक मानवता, गांधीवादी सत्य व अहिंसा, प्रकृति का विराट सौन्दर्य, अंतर्मन का आध्यात्मिक अन्वेषण, संस्कृति और कला का समन्वय, harmonizing lyrical beauty with deep moral introspection.
What makes Umashankar Joshi's literary works so renowned?
Their poetry explores the full spectrum of human emotions—love, existential yearning, resilience, and philosophical introspection.
What are the most famous works of Umashankar Joshi?
Their masterworks include timeless couplets and verses celebrated globally across literary traditions.
What was Umashankar Joshi's impact on literary culture?
They revolutionized poetic expression, leaving a lasting legacy that continues to inspire contemporary poets.
Can I copy and share couplets by Umashankar Joshi?
Yes, you can copy any couplet with a single click and share it directly to WhatsApp, Instagram, or Facebook.
Can I download aesthetic cards for Umashankar Joshi's poetry?
Yes! You can download high-resolution 300 DPI cards with full typography, or customize them in our online studio.
Where is Umashankar Joshi's memorial or tomb located?
Memorials and historic landmarks commemorating Umashankar Joshi stand as cherished cultural heritage sites for poetry enthusiasts.
Ready to Express Yourself?
Pick a line, add your style and send it off. Your first card is a few taps away.






