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Goswami Tulsidas (गोस्वामी तुलसीदास)

Goswami Tulsidas was a Ramanandi Vaishnava Hindu saint and poet, renowned for his devotion to Rama and authoring the epic Ramcharitmanas and Hanuman Chalisa.

• GOSWAMI TULSIDAS • 01/08
Daily Celestial Sher
Goswami Tulsidas Portrait
Aura Resonance: 99.4%
Goswami TulsidasBhakti Kal (Rama Bhakti)
Verified Heritage
श्लोक — वर्णानामर्थसङ्घनां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥

— GOSWAMI TULSIDAS • BHAKTI KAL (RAMA BHAKTI)

1/8
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Sher #1 • Classic Couplet
‘श्लोक — वर्णानामर्थसङ्घनां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥’
— Goswami Tulsidas

Sher #1 • Classic Couplet

श्लोक — वर्णानामर्थसङ्घनां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥

Sher #2 • Passionate Verse
‘भवानीशङ्करौ वन्दे श्रद्धाविश्वासरूपिणौ। याभ्यां विना न पश्यन्ति सिद्धाः स्वान्तःस्थमीश्वरम्॥’
— Goswami Tulsidas

Sher #2 • Passionate Verse

भवानीशङ्करौ वन्दे श्रद्धाविश्वासरूपिणौ। याभ्यां विना न पश्यन्ति सिद्धाः स्वान्तःस्थमीश्वरम्॥

Sher #3 • Soulful Couplet
‘वन्दे बोधमयं नित्यं गुरुं, शङ्कररूपिणम्। यमाश्रितो हि वक्रोपि चन्द्रः सर्वत्र वन्द्यते॥’
— Goswami Tulsidas

Sher #3 • Soulful Couplet

वन्दे बोधमयं नित्यं गुरुं, शङ्कररूपिणम्। यमाश्रितो हि वक्रोपि चन्द्रः सर्वत्र वन्द्यते॥

Sher #4 • Philosophical Verse
‘सीतारामगुणग्रामपुण्यारण्यविहारिणौ। वन्दे विशुद्धविज्ञानौ कवीश्वरकपीश्वरौ॥’
— Goswami Tulsidas

Sher #4 • Philosophical Verse

सीतारामगुणग्रामपुण्यारण्यविहारिणौ। वन्दे विशुद्धविज्ञानौ कवीश्वरकपीश्वरौ॥

Curated Literary Vault

Immortal Couplets & Ghazals

falsafa#01
श्लोक — वर्णानामर्थसङ्घनां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 1
#Balakand
falsafa#02
भवानीशङ्करौ वन्दे श्रद्धाविश्वासरूपिणौ। याभ्यां विना न पश्यन्ति सिद्धाः स्वान्तःस्थमीश्वरम्॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 2
#Balakand
mashhoor#03
वन्दे बोधमयं नित्यं गुरुं, शङ्कररूपिणम्। यमाश्रितो हि वक्रोपि चन्द्रः सर्वत्र वन्द्यते॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 3
#Balakand
mashhoor#04
सीतारामगुणग्रामपुण्यारण्यविहारिणौ। वन्दे विशुद्धविज्ञानौ कवीश्वरकपीश्वरौ॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 4
#Balakand
Crimson Velvet
एक खल उपमेय के पृथक् धर्मों के लिए भिन्न उपमानों का वर्णन 'मालोपमा अलंकार' है। 'सहसास्त्री' शब्द का कोई कोई साक्षी के सहित अर्थ करते हैं।

Ramcharitmanas • Balakand Verse 48

#Balakand— Goswami Tulsidas
mashhoor#05
उद्भवस्थितिसंहारकारिणीं क्लेशहारिणीम्। सर्वश्रेयस्करीं सीतां नतोऽहं रामवल्लभाम्॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 5
#Balakand
mashhoor#06
यन्मायावशवर्त्ति विश्वमखिलं ब्रह्मादिदेवासुराः। यत्सत्त्वादमृषैव भाति सकलं रज्जौ यथाऽहेर्भ्रमः। यत्पादप्लव एक एव हि भवास्सोधेस्तितीविताम्। वन्देऽहं तमशेषकारणपरं रामाख्यमीशं हरिम्॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 6
#Balakand
zindagi#07
नानापुराणनिगमागमसम्मतं यद्रामायणे निगदितं क्वचिदन्यतोऽपि। स्वान्तःसुखायतुलसी रघुनाथगाथाभाषानिवन्धमतिमञ्जुलमातनोति॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 7
#Balakand
falsafa#08
सोरठा-जेहि सुमिरत सिधि होइ, गन-नायक करि-बर-बदन। करउ अनुग्रह सोइ, बुद्धि-रासि सुभ-गुन-सदन॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 8
#Balakand
Celestial Mystic
भले और बुरे अपनी अपनी करनी के अनुसार सुयश और अयश की सिद्धि पाते है। सज्जन लोग अमृत, चन्द्रमा और गङ्गाजी है, दुष्ट प्राणी विष, अग्नि और पाप की नदी (कर्मनासा) हैं॥

Ramcharitmanas • Balakand Verse 61

#Balakand— Goswami Tulsidas
mashhoor#09
मूक होइ बाचाल, पङ्गु चढ़इ गिरिवर गहन। जासु कृपा सो दयाल, द्रवउ सकल-कलिमल-दहन॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 9
#Balakand
mashhoor#10
जिनकी कृपा से मूंगा बोलनेवाला होता है और पंगुल दुरारोह पहाड़ पर बढ़ जाता है, कलि के सम्पूर्ण पापों को जलानेवाले वे (सूर्य भगवान) मुझ पर प्रसन्न हों।
Ramcharitmanas • Balakand Verse 10
#Balakand
falsafa#11
नील-सरोरुह-स्याम, तरुन-अरुन-बारिज नयन। करउ सो मम उर धाम, सदा छीर-सागर-सयन।
Ramcharitmanas • Balakand Verse 11
#Balakand
falsafa#12
जिनका शरीर नील-कमल के समान श्याम है और नवीन लिखे हुए लाल कमल के समान नेत्र हैं, जो सदा क्षीरसागर में शयन करते हैं, वे (विष्णु भगवान्) मेरे हृदयमन्दिर में निवास करें।
Ramcharitmanas • Balakand Verse 12
#Balakand
Royal Sapphire
ब्रह्म-ईश्वर को ब्रह्मा के प्रपञ्च में मिलाजुला कहना 'विरोधाभास अलंकार' है, क्योंकि वे ब्रह्मा की सृष्टि से परे हैं, यहाँ गुण-दोष की गणना मात्र है।

Ramcharitmanas • Balakand Verse 74

#Balakand— Goswami Tulsidas
mashhoor#13
कुन्द-इन्दु-सम देह, उमा-रमन करुना-अयन। जाहि दोन पर नेह, करउ कृपा मर्दन-मयन॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 13
#Balakand
mashhoor#14
कुन्द के फूल और चन्द्रमा के समान देहवाले, उमावर, दया के स्थान, कामदेव को भस्म करनेवाले, जिन्हें दीनजनों पर स्नेह है, वे (शिवजी मुझ पर) कृपा करें।
Ramcharitmanas • Balakand Verse 14
#Balakand
dard#15
बन्दउँ गुरु-पद-कञ्ज, कृपा-सिन्धु नर-रूप-हरि। महामोह-तम-पुञ्ज, जासु बचन-रबि-कर-निकर॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 15
#Balakand
ishq#16
चौ॰—बन्दउँ गुरु-पद-पदुम-परागा। सुरुचि-सुबास सरस अनुरागा॥ अमिय मूरि-मय चूरन चारू समन सकल-भव-रुज-परिवारू॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 16
#Balakand
Golden Amber
गगन चढ़इ रज पवन प्रसङ्गा। कोचहि मिलइ नीच जल सङ्गा॥ साधु-असाधु-सदन सुक सारी। सुमिरहिं राम देहि गनि गारी॥

Ramcharitmanas • Balakand Verse 87

#Balakand— Goswami Tulsidas
falsafa#17
सुकृत सम्भू-तन विमल बिभूती। मज्जुल मङ्गल-मोद-प्रसूती॥ जन मन मज्जु मुकुर मल हरनी। किये तिलक गुन-गन बस करनी॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 17
#Balakand
ishq#18
श्रीगुरु-पद-नख मनि-गन-जोती। सुमिरत दिव्य-दृष्टि हिय होती। दलन मोह-तम सासु प्रकासू। बड़े भाग उर आवइ जासू॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 18
#Balakand
ishq#19
उघरहिँ बिमल बिलोचन ही के। मिटहिँ दोष दुख भव-रजनी के॥ सूझहिँ रामचरित-मनि-मानिक। गुपुत प्रगट जहँ जो जेहि खानिक॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 19
#Balakand
falsafa#20
दो॰—जथा सुअञ्जन अञ्जि दृग, साधक सिद्ध सुजान। कौतुक देखहिँ सैल बन, भूतल भूरि निधान॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 20
#Balakand
Cosmic Violet
मैं रघुनाथजी के गुणों की कथा वर्णन करना चाहता है, परन्तु मेरी बुद्धि छोटी हैं और चरित अथाह (अपरम्पार) है। उपाय का एक भी अङ्ग नहीं सूझता है, मन और बुद्धि दरिद्र है, पर मनोरथ राजा जैसा है॥

Ramcharitmanas • Balakand Verse 100

#Balakand— Goswami Tulsidas
ishq#21
चौ॰—गुरु-पद-रज मृदु मञ्जुल अञ्जन। नयन-अमिय दृग दोष बिभञ्जन। तेहि करि बिमल बिबेक बिलोचन। बरनउँ रामचरित भव-मोचन॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 21
#Balakand
ishq#22
बन्दउँ प्रथम महोसुरचरना। माह जनित संसय सब हरना॥ सुजन-समाज सकल-गुन-खानी। करउँ प्रनाम सप्रेम सुबानी॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 22
#Balakand
dard#23
साधु चरित सुभ सरिस कपासू। निरस बिसद गुन-मय फल जासू॥ जो सहि दुख पर-छिद्र दुरावा। वन्दनीय जेहि जग जस पावा॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 23
#Balakand
zindagi#24
मुद-मङ्गल-मय सन्त-समाजू। जो जग जङ्गम तीरथराजू॥ रामभगति जहँ सुरसरि धारा। सरसइ ब्रह्म-विचार-प्रचारा॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 24
#Balakand
Emerald Radiance
सज्जन लोग इसको रामभक्ति से विभूषित जी में जान कर सुनेगे और सुन्दर वाणी से सराहना करेंगे। न तो मैं कवि हूँ, और न चतुर हूँ, न विज्ञ हूँ, समस्त हुनरों तथा सम्पूर्ण विद्याओं से खाली हूँ॥

Ramcharitmanas • Balakand Verse 113

#Balakand— Goswami Tulsidas
zindagi#25
आनन्द मङ्गलमय सन्तों को समाज जो जगत् में चलता फिरता नीर्थराज-प्रयाग है। जिसमें रामभक्ति गङ्गाजी की धारा (अखण्ड प्रवाह) है और ब्रह्मविचार का फैलाव सरस्वती है॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 25
#Balakand
mashhoor#26
विधि-निषेध-मय कलिमल-हरनी। करम कथा रविनन्दिनि बरनी॥ हरि-हर-कथा बिराजति बेनी। सुनत सकल-मुद-मङ्गल देनी॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 26
#Balakand
zindagi#27
करने और न करने योग्य कर्मों की कथा का वर्णन कलि के पापों को हरनेवाली यमुना नदी है। विष्णु भगवान और शिवजी की कथा त्रिवेणी रूप विराजती है, जो सुनते ही आनन्द मङ्गल देती है॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 27
#Balakand
zindagi#28
बट बिस्वास अचल निज-धर्मा। तीरथराज-समाज सुकर्मा॥ सबहि सुलभ सब दिन सब देसा। सेवत साइर समन कलेसा॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 28
#Balakand
Sunset Aura
पूर्वार्द्ध वाक्य उपमेय रूप और उत्तरार्द्ध वाक्य उपमान रूप है। बिना राम नाम के कविता और बिना वस्त्र के सुन्दर शृङ्गारित तरुणी, दोनों का एक धर्म 'सोह न' कथन होना 'प्रतिवस्तूपमा अलंकार' है।

Ramcharitmanas • Balakand Verse 126

#Balakand— Goswami Tulsidas
falsafa#29
अकथ अलौकिक तीरथराऊ। देइ सद्य फल प्रगट प्रमाऊ॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 29
#Balakand
falsafa#30
यह तीर्थराज अवर्णनीय और लोकोत्तर है, तत्काल फल देने में इसकी महिमा विख्यात है॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 30
#Balakand
ishq#31
दो॰ – सुनि समुझहिँ जन मुदित मन, मज्जहिँ अति अनुराग। लहहिं चारि-फल अछत-तनु, साधु-समाज प्रयाग॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 31
#Balakand
falsafa#32
चौ॰ – मज्जन फल पेखिय ततकाला। काक होहिं पिक बकउ मराला॥ सुनि आचरज करइ जनि कोई। सत-सङ्गति-महिमा नहिँ गाई॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 32
#Balakand
Imperial Gold
बिना रामचरितमानस में स्नान कराये वह थकावट करोड़ों उपायों से भी नहीं जाती, कवि और विद्वान ऐसा मन में विचार कर कलि के पापों के हरनेवाले भगवान का यश-गान करते हैं॥

Ramcharitmanas • Balakand Verse 139

#Balakand— Goswami Tulsidas
dard#33
सन्तसमाज रूपी प्रयाग के संसर्ग से कौए और बगुले का दोष दूर हो कर उनका गुण-गान होना 'प्रथम उल्लास अलंकार' है।
Ramcharitmanas • Balakand Verse 33
#Balakand
falsafa#34
बालमीकि नारद घटजोनी। निज निज मुखनि कही निज होनी॥ जलचर थलचर नभचर नाना। जे जड़-चेतन जीव जहाना॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 34
#Balakand
zindagi#35
वाल्मीकि, नारद और अगस्त ने अपनी अपनी उत्पत्ति अपने ही मुख से कही है। संसार में जलचारी, भूमिचारी और आकाशचारियों में नाना प्रकार के जितने जड़ चेतन जीव हैं॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 35
#Balakand
falsafa#36
वाल्मीकि मुनि बिल से, नारद दासी से और अगस्तजी घड़े से उत्पन्न हैं। इनकी उत्पत्ति के योग्य एक भी कारण पर्याप्त न होना 'चतुर्थ विभावना अलंकार' है।
Ramcharitmanas • Balakand Verse 36
#Balakand
Crimson Velvet
गुटका में 'समुझि विविध विनती अब मोरी' पाठ है और शङ्का के स्थान में 'अशङ्का पाठ है, जिससे छन्दोभङ्ग दोष आ जाता है।

Ramcharitmanas • Balakand Verse 152

#Balakand— Goswami Tulsidas
falsafa#37
मति कीरति गति भूति भलाई। जब जेहि जतन जहाँ जेहि पाई।। सो जानब सतसङ्ग प्रभाऊ। लोकहु बेद न आन उपाऊ॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 37
#Balakand
mashhoor#38
बिनु सतसङ्ग बिबेक न होई। राम-कृपा-बिनु सुलम न सोई॥ सतसङ्गति मुद-मङ्गल मूला। साइ फल सिधि सब साधन फूला॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 38
#Balakand
mashhoor#39
बिना सत्संग के ज्ञान नहीं होता और बिना रामचन्द्रजी की कृपा वह (सत्संग) महज में प्राप्त नहीं होता। आनन्द-मङ्गल रूपी वृक्ष की जड़ सत्सग ही है, सब साधन फूल हैं वही एक सिद्ध फल है ॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 39
#Balakand
mashhoor#40
बिना सत्सङ्ग के ज्ञान नहीं होता और बिना राम-कृपा के सत्सङ्ग नहीं मिलता 'द्वितीय कारणमाला अलंकार' है।
Ramcharitmanas • Balakand Verse 40
#Balakand
Celestial Mystic
तेहि बल मैं रघुपति गुन-गाथा। कहिहउँ नाइ राम-पद माथा। मुनिन्ह प्रथम हरि-कीरति गाई। तेहि मग चलत सुगम मोहि भाई॥

Ramcharitmanas • Balakand Verse 165

#Balakand— Goswami Tulsidas
falsafa#41
सठ सुधरहिँ सतसङ्गति पाई। पारस परस कुधातु सुहाई॥ विधि बस सुजन कुसङ्गति परहीं। फनि मनि सभ निज गुन अनुसरहीँ॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 41
#Balakand
mashhoor#42
बिधि हरि हर कबि कोबिद बानी। कहत साधु-महिमा सकुचानी॥ सो मो सन कहि जात न कैसे। साक-बनिक मनि-गन-गुन जैसे॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 42
#Balakand
falsafa#43
ब्रह्मा, विष्णु, महेश, कवि, विद्वान और सरस्वती साधुओं की महिमा कहने में लजा जाते हैं। वह मुझसे कैसे नहीं कही जाती, जैसे साग का बेचनेवाला (कुंजड़ा-खटिक) मणियों का गुण नहीं कह सकता॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 43
#Balakand
falsafa#44
दो॰ – बन्दउँ सन्त समान चित, हित अनहित नहिं कोउ। अञ्जलि-गत सुभ-सुमन जिमि, सम सुगन्ध कर दोउ॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 44
#Balakand
Royal Sapphire
आप की कृपा से वह मुझे सुगम है, टाट की हो या रेशम की सिलाई, अच्छी होने पर सुहावनी लगती ही है॥

Ramcharitmanas • Balakand Verse 178

#Balakand— Goswami Tulsidas
ishq#45
सन्त सरल चित जगत हित, जानि सुभाउ सनेहु। बाल बिनय सुनि सुरुचि लखि, राम-चरन-रति देहु॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 45
#Balakand
falsafa#46
चौ॰ – बहुरिवन्दि खलगन सतिभाये। जे बिनु काज दाहिनेहुँ बाँये। पर-हित-हानि लाभ जिन्ह केरे। उजरे हरष विषाद बसेरे॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 46
#Balakand
dard#47
हरि-हर-जस राकेस राहु से। पर अकाज भट सहसबाहु से॥ जे पर-दोष लखहिँ सहसाखी। परहित घृत जिनके मन माखी॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 47
#Balakand
zindagi#48
एक खल उपमेय के पृथक् धर्मों के लिए भिन्न उपमानों का वर्णन 'मालोपमा अलंकार' है। 'सहसास्त्री' शब्द का कोई कोई साक्षी के सहित अर्थ करते हैं।
Ramcharitmanas • Balakand Verse 48
#Balakand
Golden Amber
सेवक-स्वामी आदि होने का विशेष रूप से स्पष्टीकरण लङ्काकाण्ड में दूसरे दोहे के बाद प्रथम चौपाई के नीचे देखो।

Ramcharitmanas • Balakand Verse 191

#Balakand— Goswami Tulsidas
mashhoor#49
तेज-कृपानु रोष महिषेसा। अघ-अवगुन-धन धनी धनेसा॥ उदय केतु सम हित सबही के। कुम्भकरन सम सोवत नीके॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 49
#Balakand
dard#50
पर अकाज लगि तनु परिहरहीं। जिमि हिम-उपल कृषी दलि गरहीं॥ बन्दउँ खल जस सेष सरोषा। सहस-बदन बरनइ पर-दोषा॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 50
#Balakand
dard#51
शेष सरोप नहीं हैं पर खल सरोप शेप के समान हैं, शेष हज़ार मुख से हरि यश वर्णन करते हैं, खलों के एक ही मुख पराये का दोष कहने के लिए हज़ार मुख के समान 'पूर्णोपमा अलंकार' है।
Ramcharitmanas • Balakand Verse 51
#Balakand
falsafa#52
पुनि प्रनववोँ पृथुराज समाना। पर अघ सुनइ सहस-दस-काना॥ बहुरि सक्र सम बिनवउँ तेही। सन्तत सुरा-नीक हित जेही॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 52
#Balakand
Cosmic Violet
भवानीशङ्करौ वन्दे श्रद्धाविश्वासरूपिणौ। याभ्यां विना न पश्यन्ति सिद्धाः स्वान्तःस्थमीश्वरम्॥

Ramcharitmanas • Balakand Verse 2

#Balakand— Goswami Tulsidas
dard#53
बचन बज्र जेहि सदा पियारा। सहस-नयन पर दोष निहारा॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 53
#Balakand
ishq#54
दो॰ – उदासीन-अरि-मीत-हित, सुनत जरहिं खल रीति। जानि पानि जुग जीरि जन, विनती करइ सप्रीति॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 54
#Balakand
ishq#55
खलों की यही रीति है कि वे उदासीन, शत्रु, और मित्र की भलाई सुन कर जलते हैं। ऐसा जानते हुए भी यह जन (तुलसीदास) दोनों हाथ जोड़ कर प्रीति पूर्वक उनसे विनती करता है॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 55
#Balakand
ishq#56
चौ॰ – में अपनी दिसि कीन्ह निहोरा। तिन्ह निज ओर न लाउब भोरा॥ बायस पालिय अति अनुरागा। होहिँ निरामिष कबहुँ कि कागा॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 56
#Balakand
Emerald Radiance
बन्दउँ गुरु-पद-कञ्ज, कृपा-सिन्धु नर-रूप-हरि। महामोह-तम-पुञ्ज, जासु बचन-रबि-कर-निकर॥

Ramcharitmanas • Balakand Verse 15

#Balakand— Goswami Tulsidas
dard#57
बन्दउँ सन्त असज्जन चरना। दुख-प्रद-उभय बीच कछु धरना। मिछुरत एक प्रान हरि लेहीं। मिलत एक दारुन दुख देहीं॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 57
#Balakand
dard#58
मैं सज्जन और दुर्जन दोनों के चरणों की वन्दना करता है, दोनों दुःख देनेवाले हैं पर उसमें कुछ अन्तर कहा जाता है। एक बिछुड़ने पर प्राण हर लेते हैं, दूसरे मिलने पर भीषण कष्ट देते हैं॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 58
#Balakand
zindagi#59
उपजहिँ एक सङ्ग जग माहीं। जलज जोँक जिमि गुन बिलगाहीं॥ सुधा सुरा सम साधु असाधू। जनक एक जग जलधि अगाधू॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 59
#Balakand
falsafa#60
भल अनभलनिजनिज करतूती। लहत सुजस अपलोक बिभूती॥ सुधा-सुधाकर-सुरसरि-साधू। गरल-अनल-कलिमलसरि-ब्याधू॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 60
#Balakand
Sunset Aura
बट बिस्वास अचल निज-धर्मा। तीरथराज-समाज सुकर्मा॥ सबहि सुलभ सब दिन सब देसा। सेवत साइर समन कलेसा॥

Ramcharitmanas • Balakand Verse 28

#Balakand— Goswami Tulsidas
zindagi#61
भले और बुरे अपनी अपनी करनी के अनुसार सुयश और अयश की सिद्धि पाते है। सज्जन लोग अमृत, चन्द्रमा और गङ्गाजी है, दुष्ट प्राणी विष, अग्नि और पाप की नदी (कर्मनासा) हैं॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 61
#Balakand
falsafa#62
गुन अवगुन जानत सब कोई। जो जेहि भाव नीक तेहि सोई॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 62
#Balakand
dard#63
गुण और दोष को सब कोई जानता है, पर जिसको जो अच्छा लगता है उसको वही सुहाता है॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 63
#Balakand
ishq#64
दो॰ – भलो भलाइहि पै लहइ, लहइ निचाइहि नीचु। सुधा सराहिय अमरता, गरल सराहिय मीचु॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 64
#Balakand
Imperial Gold
सठ सुधरहिँ सतसङ्गति पाई। पारस परस कुधातु सुहाई॥ विधि बस सुजन कुसङ्गति परहीं। फनि मनि सभ निज गुन अनुसरहीँ॥

Ramcharitmanas • Balakand Verse 41

#Balakand— Goswami Tulsidas
falsafa#65
परन्तु भले भलाई हो पाते हैं और नीच निचाई ही लहते हैं। अमृत की प्रशंसा अमर करने में और विष की सराहना मृत्यु करने में होती है॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 65
#Balakand
falsafa#66
इस दोहा में पद और अर्थ को बार बार आवृत्ति होना 'पदार्थावृति दीपक अलंकार, है।
Ramcharitmanas • Balakand Verse 66
#Balakand
dard#67
चौ॰ – खल-अघ-अगुन साधु-गुन-गाहा। उभय अपार उदधि अवगाहा॥ तेहि तेँ कछु गुन दोष बखाने। सङ्ग्रह त्याग न बिनु पहिचाने॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 67
#Balakand
dard#68
दुष्टों के पाप और अवगुण का वृत्तान्त एवम् साधुओं के गुणों की कथा दोनों ही अपार और अथाह समुद्र हैं। उनके गुण दोष कुछ इसलिए कहे गये हैं कि बिना पहचान के ग्रहण वा त्याग नहीं होता॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 68
#Balakand
Crimson Velvet
दो॰ – उदासीन-अरि-मीत-हित, सुनत जरहिं खल रीति। जानि पानि जुग जीरि जन, विनती करइ सप्रीति॥

Ramcharitmanas • Balakand Verse 54

#Balakand— Goswami Tulsidas
dard#69
भलेउ पोच सब विधि उपजाये। गनि गुन दोष बेद बिलगाये॥ कहहिँ बेद इतिहास पुराना। बिधि-प्रपञ्च गुन अवगुन साना॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 69
#Balakand
dard#70
दुख-सुख पाप-पुन्य दिन-राती। साधु-असाधु सुजाति-कुजाती॥ दानव-देव ऊँच अरु नीचू। अमिय सजीवन माहुर मीचू॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 70
#Balakand
zindagi#71
दुःख-सुख, पाप-पुण्य, दिन-रात, सजन-असज्जन, सुजाति-कुजाति, दानव-देवता, ऊँच और नीच, अमृत जिलानेवाला तथा विष मृत्यु करनेवाला॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 71
#Balakand
zindagi#72
माया ब्रह्म जीव-जगदीसा। लच्छि-अलच्छि रङ्क-अवनीसा॥ कासी-मग सुरसरि-क्रमनासा। मरु-मालव महिदेव-गवासा॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 72
#Balakand
Celestial Mystic
चौ॰ – खल-अघ-अगुन साधु-गुन-गाहा। उभय अपार उदधि अवगाहा॥ तेहि तेँ कछु गुन दोष बखाने। सङ्ग्रह त्याग न बिनु पहिचाने॥

Ramcharitmanas • Balakand Verse 67

#Balakand— Goswami Tulsidas
zindagi#73
माया-ब्रह्म, जीव-ईश्वर, लक्ष्मीवान-बिना लक्ष्मी का, कङ्गाल-राजा, काशी-मगह, गङ्गा-कर्मनासा, मारवाड़-मालवा, ब्राह्मण और कसाई॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 73
#Balakand
dard#74
ब्रह्म-ईश्वर को ब्रह्मा के प्रपञ्च में मिलाजुला कहना 'विरोधाभास अलंकार' है, क्योंकि वे ब्रह्मा की सृष्टि से परे हैं, यहाँ गुण-दोष की गणना मात्र है।
Ramcharitmanas • Balakand Verse 74
#Balakand
ishq#75
सरग-नरक अनुराग-बिरागा। निगम-अगम गुन-दोष-विभागा॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 75
#Balakand
ishq#76
स्वर्ग-नरक, प्रीति और वैराग्य, वेद शास्त्रों ने इनके गुण दोष अलगाये है॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 76
#Balakand
Royal Sapphire
सो सुधारि हरिजन जिमि लेहीँ। दलि दुख दोष बिमल जस देहीं। खलउ करहिँ अल पाइ सुसङ्ग। मिटइ न मलिन सुभाउ अभङ्गू॥

Ramcharitmanas • Balakand Verse 80

#Balakand— Goswami Tulsidas
dard#77
दो॰ – जड़-चेतन गुन-दोष मय, बिस्व कीन्ह करतार। सन्त हंस गुन गहहिँ पय, परिहरि बारि बिकार॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 77
#Balakand
dard#78
ब्रह्मा ने संसार को जड़-चेतन और गुण-दोष मय बनाया है। सन्त रूपी हंस गुण रूपी दूध को ग्रहण करते और दोष रूपी जल को त्याग देते हैं॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 78
#Balakand
dard#79
चौ॰ – अस बिबेक जब देइ बिधाता। तब तजि दोष गुनहि मन राता॥ काल सुभाउ करम बरिआई। अलउ प्रकृति-बस चुकइ भलाई॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 79
#Balakand
dard#80
सो सुधारि हरिजन जिमि लेहीँ। दलि दुख दोष बिमल जस देहीं। खलउ करहिँ अल पाइ सुसङ्ग। मिटइ न मलिन सुभाउ अभङ्गू॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 80
#Balakand
Golden Amber
सम प्रकास तम पाख दुहुँ, नाम भेद बिधि कीन्ह। ससि पोषक सेोषक समुझि, जग जस अपजस दीन्ह॥

Ramcharitmanas • Balakand Verse 93

#Balakand— Goswami Tulsidas
dard#81
उस (भूल) को जिस प्रकार हरिभक्त सुधार लेते हैं कि दुःख और दोषों का नाश कर निर्मल यश देते हैं। दुष्ट भी अच्छा संग पा कर भलाई करते हैं, पर उनकी अभङ्ग नीच-प्रकृति नहीं मिटती॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 81
#Balakand
dard#82
लखि सुबेष जग बञ्चक जेऊ। बेष प्रताप पूजियहि तेऊ। उघरहिँ अन्त न हाइ निबाहू। कालनेमि जिमि रावन राहू॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 82
#Balakand
dard#83
जो ससार को ठगनेवाले हैं, उन्हें भी अच्छा वेष बनाये देख कर वेष के प्रताप से लोग पूजते ही हैं। अन्त में कपट खुल जाने पर उनकी रहायस नहीं होती, जैसे – कालनेमि, रावण और राहु की गति हुई थी॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 83
#Balakand
falsafa#84
कालिनेमि और रावण ने यती वेष बना कर और राहु ने देवता बन कर उगबाज़ी की कलई खुल जाने पर तीनों मारे गये।
Ramcharitmanas • Balakand Verse 84
#Balakand
Cosmic Violet
निज कबित्त केहि लाग न नीका। सरस होउ अथवा अति फीका॥ जे पर-भनिति सुनत हरषाहीं। ते बर पुरुष बहुत जग नाही॥

Ramcharitmanas • Balakand Verse 106

#Balakand— Goswami Tulsidas
zindagi#85
किये कुबेष साधु सनमानू। जिमि जग जामवन्त हनुमानू॥ हानि-कुसङ्ग सुसङ्गति-लाहू। लोकहु बेद बिदित सब काहू॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 85
#Balakand
zindagi#86
कुवेष किए रहने पर भी साधु का सम्मान ही होता है, जैसे संसार में जाम्बवान और हनूमान। यह लोक में तथा वेद में प्रसिद्ध है और सब को मालूम है कि कुसङ्ग से हानि और सुसङ्ग से लाभ होता है॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 86
#Balakand
mashhoor#87
गगन चढ़इ रज पवन प्रसङ्गा। कोचहि मिलइ नीच जल सङ्गा॥ साधु-असाधु-सदन सुक सारी। सुमिरहिं राम देहि गनि गारी॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 87
#Balakand
mashhoor#88
हवा के सङ्ग से धूल आकाश पर चढ़ती है और नीच जल के साथ से कीचड़ में मिलती है। साधुओं के घर में (पलनेवाले) सुग्गा-मैना राम-राम स्मरण करते हैं और असाधुओं के घरवाले गिन गिन कर गालियाँ देते हैं॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 88
#Balakand
Emerald Radiance
गुण का कार्पण्य दिखा कर कवि का भाव अपनी नम्रता व्यञ्जित करने का है।

Ramcharitmanas • Balakand Verse 119

#Balakand— Goswami Tulsidas
zindagi#89
धूम कुसङ्गति कारिख होई। लिखिय पुरान मज्जु मसि सोई॥ सोइ जल अनल अनिल सङ्घाता। होइ जलद जग-जीवन-दाता॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 89
#Balakand
zindagi#90
कुसङ्ग में पड़ कर धुनाँ कारिख होता है, वही पुराण लिखने पर सुन्दर स्याही कहलाता है। वही (धूम) पानी, अग्नि और वायु के सङ्ग से संसार को जीवन (जल) देनेवाला बादल होता है॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 90
#Balakand
zindagi#91
दो॰ – ग्रह भेषज जल पवन पट, पाइ कुजोग सुजोग। होहिं कुबस्तु सुबस्तु जग, लखहिँ सुलच्छन लोग।
Ramcharitmanas • Balakand Verse 91
#Balakand
falsafa#92
ग्रह, औषधि, पानी, हवा और वस्त्र कुसङ्ग सुसङ्ग पाकर (सङ्ग के प्रभाव से) अच्छी वस्तु बुरी चीज़ हो जाती है, इसको सुलक्षण (चतुर) लोग लखते हैं।
Ramcharitmanas • Balakand Verse 92
#Balakand
Sunset Aura
दो॰ – प्रिय लागिहि अति सबहि मम, भनिति ति राम-जस-सङ्ग। दारु बिचार कि करइ कोउ, बन्दिय मलय प्रसङ्ग।

Ramcharitmanas • Balakand Verse 132

#Balakand— Goswami Tulsidas
zindagi#93
सम प्रकास तम पाख दुहुँ, नाम भेद बिधि कीन्ह। ससि पोषक सेोषक समुझि, जग जस अपजस दीन्ह॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 93
#Balakand
zindagi#94
जड़ चेतन जग जीव जत, सकल राम-मय जानि। बन्दउँ सब के पद-कमल, सदा जारि जुग पानि॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 94
#Balakand
mashhoor#95
देव दनुज नर नाग खग, प्रेत पितर गन्धर्व। बन्दउँ किन्नर रजनिचर, कृपा करहु अब सर्व॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 95
#Balakand
zindagi#96
चौ॰ – आकर चारि लाख चौरासी। जाति जीव जल-थल-नभ-वासी॥ सीय-राम-मय सब जग जानी। करउँ प्रनाम जोरि जुग पानी॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 96
#Balakand
Imperial Gold
चौ॰ – जे जनमे कलिकाल कराला। करतब बायस बेष मराला॥ चलत कुपन्थ बेद-मग छाँड़े। कपट-कलेवर कलिमल-भाँड़े॥

Ramcharitmanas • Balakand Verse 145

#Balakand— Goswami Tulsidas
mashhoor#97
सभा की प्रति में 'सियाराम-मय' पाठ है। चौरासी लक्ष योनियों की संख्या इस प्रकार है। ४ लाख मनुष्य, ६ लाख जलचर, १० लाख पक्षी, ११ लाख कृमि, २० लाख वृक्ष, ३० लाख पशु।
Ramcharitmanas • Balakand Verse 97
#Balakand
dard#98
जानि कृपाकर किङ्कर मोहू। सब मिलि करहु छाड़ि छल छोहू॥ निजबुधिबल भरोस मोहिँनाहीँ। ता तें बिनय करउँ सब पाहीं॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 98
#Balakand
falsafa#99
करन चहउँ रघुपति-गुन-गाहा। लघु-मति-मोरि चरित अवगाहा। सूझ न एकउ अङ्ग उपाऊ। मन-मति-मनोरथ राऊ॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 99
#Balakand
falsafa#100
मैं रघुनाथजी के गुणों की कथा वर्णन करना चाहता है, परन्तु मेरी बुद्धि छोटी हैं और चरित अथाह (अपरम्पार) है। उपाय का एक भी अङ्ग नहीं सूझता है, मन और बुद्धि दरिद्र है, पर मनोरथ राजा जैसा है॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 100
#Balakand
Crimson Velvet
सरस्वती, शेष, शिव, ब्रह्मा, शास्त्र, वेद और पुराण जिनके गुण को-इति नहीं, इति नहीं – कह कर निरन्तर गान करते हैं॥

Ramcharitmanas • Balakand Verse 158

#Balakand— Goswami Tulsidas
ishq#101
मति अति नीच ऊँचि रुचि आछी। चहिय अमिय जग जुरइ न छाछी॥ छमिहहिँ सज्जन मोरि ढिठाई। सुनिहहिँ बाल बचन मन लाई॥
Ramcharitmanas • Balakand Verse 101
#Balakand
AUTHOR PROFILE & CRITICAL ACCLAIM

About Goswami Tulsidas (गोस्वामी तुलसीदास) — The Maestro of Human Emotion

Goswami Tulsidas was a Ramanandi Vaishnava Hindu saint and poet, renowned for his devotion to Rama and authoring the epic Ramcharitmanas and Hanuman Chalisa.

Poetic Innovation & Distinct Voice

Goswami Tulsidas pioneered unique metaphors and an intimate conversational style, permanently redefining South Asian lyrical expression.

Historical Era & Global Acclaim

Celebrated across the Bhakti Kal (Rama Bhakti), their verses have transcended borders, honored globally in multiple international translations and scholarly anthologies.

Cosmic Depth & Emotional Resonance

Weaving existential inquiry, intimate vulnerability, and philosophical depth, Goswami Tulsidas captured the bittersweet beauty of human existence.

Why Goswami Tulsidas's Poetry Resonates Across Generations

From student dormitories to seasoned scholars, Goswami Tulsidas effortlessly bridges generational divides. Their couplets on love, heartbreak, and resilience don't wallow in bitterness; rather, they gently embrace emotion as a precious, soulful companion. On digital platforms and in musical concerts, their words continue to touch millions daily.

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Essential Questions About Goswami Tulsidas

Authentic answers about Goswami Tulsidas's life, iconic ghazals, and timeless literary legacy.

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Who was Goswami Tulsidas?

Goswami Tulsidas (1532–1623) was a revered Indian saint-poet who wrote the epic Ramcharitmanas in Awadhi.

In which language is Ramcharitmanas written?

Ramcharitmanas was composed in Awadhi, an Eastern Hindi dialect.

What makes Goswami Tulsidas's literary works so renowned?

Their poetry explores the full spectrum of human emotions—love, existential yearning, resilience, and philosophical introspection.

What are the most famous works of Goswami Tulsidas?

Their masterworks include timeless couplets and verses celebrated globally across literary traditions.

What was Goswami Tulsidas's impact on literary culture?

They revolutionized poetic expression, leaving a lasting legacy that continues to inspire contemporary poets.

Can I copy and share couplets by Goswami Tulsidas?

Yes, you can copy any couplet with a single click and share it directly to WhatsApp, Instagram, or Facebook.

Can I download aesthetic cards for Goswami Tulsidas's poetry?

Yes! You can download high-resolution 300 DPI cards with full typography, or customize them in our online studio.

Where is Goswami Tulsidas's memorial or tomb located?

Memorials and historic landmarks commemorating Goswami Tulsidas stand as cherished cultural heritage sites for poetry enthusiasts.

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