क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी भज ले राम का नामा,। Porutpal,आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे।
Thiruvalluvar (तिरुवल्लुवर)
Thiruvalluvar is revered as Tamil literature's greatest moral philosopher and divine poet, whose 1,330 couplets in the Tirukkural illuminate virtue, wealth, and love.
Download Aesthetic Thiruvalluvar Story Cards

‘क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी भज ले राम का नामा,। Porutpal,आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे।’— Thiruvalluvar
Sher #1 • Classic Couplet
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी भज ले राम का नामा,। Porutpal,

‘तिरुवल्लुवर कहें सुनो भई साधो मन को निर्मल कीजै,कायर बैठे भाग्य गिने और धीर पुरुष कर दिखलावे।’— Thiruvalluvar
Sher #2 • Passionate Verse
तिरुवल्लुवर कहें सुनो भई साधो मन को निर्मल कीजै,

‘नदिया की धारा बहती जावे सागर से मिलन को,क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा।’— Thiruvalluvar
Sher #3 • Soulful Couplet
नदिया की धारा बहती जावे सागर से मिलन को,
Immortal Couplets & Ghazals
तिरुवल्लुवर कहें सुनो भई साधो मन को निर्मल कीजै,कायर बैठे भाग्य गिने और धीर पुरुष कर दिखलावे।
नदिया की धारा बहती जावे सागर से मिलन को,क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा।
माटी का यह देह बना है माटी में मिल जाना,। Arathuppal,पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे।

माटी का यह देह बना है माटी में मिल जाना,। Arathuppal,आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे।
मन मंदिर में जो दीप जले तो बाहर तम न सतावे,घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती।
अहंकार की दीवारें जब अंतर में गिर जातीं,। Porutpal,उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया।
आशा तृष्णा सब छूटी जब प्रभु चरणों चित लागा,कायर बैठे भाग्य गिने और धीर पुरुष कर दिखलावे।

कर्म की खेती जो जन बोवे सोई फल पावे रे,। Porutpal,पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे।
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी अंतर नैन उघारे,। Kamathuppal,अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह निशा मुख मोड़े।
दुःख में सुमिरन सब कोई करै सुख में करै न कोय,। Porutpal,कोटि ग्रंथ का सार यही है घट में हरि को ध्यावै।
कर्म की खेती जो जन बोवे सोई फल पावे रे,। Arathuppal,जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय।

आशा तृष्णा सब छूटी जब प्रभु चरणों चित लागा,। Porutpal,अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा।
धरती की छाती पर जिसने सत्य का बीज उगाया,। Kamathuppal,जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय।
दुःख में सुमिरन सब कोई करै सुख में करै न कोय,अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा।
संतन की संगति में आकर मन का मैल धुलावे,। Porutpal,मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे।

मन मंदिर में जो दीप जले तो बाहर तम न सतावे,। Porutpal,कोटि ग्रंथ का सार यही है घट में हरि को ध्यावै।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे भरम का पर्दा तोड़े,। Kamathuppal,कायर बैठे भाग्य गिने और धीर पुरुष कर दिखलावे।
संतन की संगति में आकर मन का मैल धुलावे,। Kamathuppal,सत्कर्मों की पूंजी ही बस संग तुम्हारे जाना।
दुःख में सुमिरन सब कोई करै सुख में करै न कोय,। Porutpal,मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे।

दीन-दुखी का आसरा बनकर जो जीवन महकावे,अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा।
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी भज ले राम का नामा,जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय।
दुःख में सुमिरन सब कोई करै सुख में करै न कोय,। Porutpal,कायर बैठे भाग्य गिने और धीर पुरुष कर दिखलावे।
माटी का यह देह बना है माटी में मिल जाना,। Porutpal,अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह निशा मुख मोड़े।

संतन की संगति में आकर मन का मैल धुलावे,। Porutpal,अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह निशा मुख मोड़े।
वाणी में जो अमृत घोले जग में सोई प्यारा,। Arathuppal,मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे।
दीन-दुखी का आसरा बनकर जो जीवन महकावे,। Kamathuppal,अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा।
तिरुवल्लुवर कहें सुनो भई साधो मन को निर्मल कीजै,कोटि ग्रंथ का सार यही है घट में हरि को ध्यावै।

क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी भज ले राम का नामा,। Arathuppal,अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा।
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी भज ले राम का नामा,। Kamathuppal,लोभ मोह मद त्यागि के निज स्वरूप को चीन्है।
नदिया की धारा बहती जावे सागर से मिलन को,। Porutpal,कोटि ग्रंथ का सार यही है घट में हरि को ध्यावै।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे भरम का पर्दा तोड़े,। Kamathuppal,उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया।

क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी भज ले राम का नामा,। Kamathuppal,जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय।
आशा तृष्णा सब छूटी जब प्रभु चरणों चित लागा,। Kamathuppal,उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया।
कर्म की खेती जो जन बोवे सोई फल पावे रे,। Arathuppal,घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती।
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी अंतर नैन उघारे,। Arathuppal,कायर बैठे भाग्य गिने और धीर पुरुष कर दिखलावे।

तिरुवल्लुवर कहें सुनो भई साधो मन को निर्मल कीजै,उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया।
कर्म की खेती जो जन बोवे सोई फल पावे रे,आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे।
वाणी में जो अमृत घोले जग में सोई प्यारा,घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती।
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी भज ले राम का नामा,। Kamathuppal,पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे।

प्रेम की भाषा सबसे न्यारी अंतर नैन उघारे,। Porutpal,क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा।
नदिया की धारा बहती जावे सागर से मिलन को,। Kamathuppal,सत्कर्मों की पूंजी ही बस संग तुम्हारे जाना।
धरती की छाती पर जिसने सत्य का बीज उगाया,लोभ मोह मद त्यागि के निज स्वरूप को चीन्है।
दुःख में सुमिरन सब कोई करै सुख में करै न कोय,। Porutpal,लोभ मोह मद त्यागि के निज स्वरूप को चीन्है।

प्रेम की भाषा सबसे न्यारी अंतर नैन उघारे,। Kamathuppal,उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे।
धरती की छाती पर जिसने सत्य का बीज उगाया,। Porutpal,सत्कर्मों की पूंजी ही बस संग तुम्हारे जाना।
दुःख में सुमिरन सब कोई करै सुख में करै न कोय,। Porutpal,उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया।
दुःख में सुमिरन सब कोई करै सुख में करै न कोय,। Kamathuppal,पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे।

मन मंदिर में जो दीप जले तो बाहर तम न सतावे,। Arathuppal,उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया।
तिरुवल्लुवर कहें सुनो भई साधो मन को निर्मल कीजै,कायर बैठे भाग्य गिने और धीर पुरुष कर दिखलावे।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे भरम का पर्दा तोड़े,लोभ मोह मद त्यागि के निज स्वरूप को चीन्है।
दीन-दुखी का आसरा बनकर जो जीवन महकावे,। Porutpal,पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे।

माटी का यह देह बना है माटी में मिल जाना,। Kamathuppal,सत्कर्मों की पूंजी ही बस संग तुम्हारे जाना।
वाणी में जो अमृत घोले जग में सोई प्यारा,मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे।
दुःख में सुमिरन सब कोई करै सुख में करै न कोय,मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे।
कर्म की खेती जो जन बोवे सोई फल पावे रे,। Kamathuppal,क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा।

वाणी में जो अमृत घोले जग में सोई प्यारा,। Kamathuppal,घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती।
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी अंतर नैन उघारे,अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा।
मन मंदिर में जो दीप जले तो बाहर तम न सतावे,। Porutpal,घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती।
दुःख में सुमिरन सब कोई करै सुख में करै न कोय,। Porutpal,जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय।

दुःख में सुमिरन सब कोई करै सुख में करै न कोय,। Arathuppal,अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा।
दीन-दुखी का आसरा बनकर जो जीवन महकावे,। Kamathuppal,कायर बैठे भाग्य गिने और धीर पुरुष कर दिखलावे।
कर्म की खेती जो जन बोवे सोई फल पावे रे,। Kamathuppal,कायर बैठे भाग्य गिने और धीर पुरुष कर दिखलावे।
आशा तृष्णा सब छूटी जब प्रभु चरणों चित लागा,। Arathuppal,कोटि ग्रंथ का सार यही है घट में हरि को ध्यावै।

मन मंदिर में जो दीप जले तो बाहर तम न सतावे,। Porutpal,कायर बैठे भाग्य गिने और धीर पुरुष कर दिखलावे।
अहंकार की दीवारें जब अंतर में गिर जातीं,। Kamathuppal,जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय।
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी भज ले राम का नामा,। Kamathuppal,अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा।
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी भज ले राम का नामा,। Porutpal,उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया।

अहंकार की दीवारें जब अंतर में गिर जातीं,अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा।
संतन की संगति में आकर मन का मैल धुलावे,घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती।
वाणी में जो अमृत घोले जग में सोई प्यारा,। Kamathuppal,आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे।
आशा तृष्णा सब छूटी जब प्रभु चरणों चित लागा,। Kamathuppal,सत्कर्मों की पूंजी ही बस संग तुम्हारे जाना।

आशा तृष्णा सब छूटी जब प्रभु चरणों चित लागा,। Porutpal,पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे।
दुःख में सुमिरन सब कोई करै सुख में करै न कोय,जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय।
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी भज ले राम का नामा,। Arathuppal,पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे।
आशा तृष्णा सब छूटी जब प्रभु चरणों चित लागा,। Porutpal,घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती।

संतन की संगति में आकर मन का मैल धुलावे,। Porutpal,जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय।
तिरुवल्लुवर कहें सुनो भई साधो मन को निर्मल कीजै,। Kamathuppal,उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया।
मन मंदिर में जो दीप जले तो बाहर तम न सतावे,। Kamathuppal,सत्कर्मों की पूंजी ही बस संग तुम्हारे जाना।
कर्म की खेती जो जन बोवे सोई फल पावे रे,मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे।

क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी भज ले राम का नामा,। Kamathuppal,उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे।
दुःख में सुमिरन सब कोई करै सुख में करै न कोय,। Kamathuppal,लोभ मोह मद त्यागि के निज स्वरूप को चीन्है।
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी अंतर नैन उघारे,। Arathuppal,लोभ मोह मद त्यागि के निज स्वरूप को चीन्है।
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी भज ले राम का नामा,लोभ मोह मद त्यागि के निज स्वरूप को चीन्है।

अहंकार की दीवारें जब अंतर में गिर जातीं,। Kamathuppal,कायर बैठे भाग्य गिने और धीर पुरुष कर दिखलावे।
संतन की संगति में आकर मन का मैल धुलावे,। Porutpal,कायर बैठे भाग्य गिने और धीर पुरुष कर दिखलावे।
दुःख में सुमिरन सब कोई करै सुख में करै न कोय,। Kamathuppal,उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे।
तिरुवल्लुवर कहें सुनो भई साधो मन को निर्मल कीजै,अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह निशा मुख मोड़े।

माटी का यह देह बना है माटी में मिल जाना,जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय।
आशा तृष्णा सब छूटी जब प्रभु चरणों चित लागा,। Arathuppal,उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे।
वाणी में जो अमृत घोले जग में सोई प्यारा,लोभ मोह मद त्यागि के निज स्वरूप को चीन्है।
आशा तृष्णा सब छूटी जब प्रभु चरणों चित लागा,। Porutpal,कायर बैठे भाग्य गिने और धीर पुरुष कर दिखलावे।

तिरुवल्लुवर कहें सुनो भई साधो मन को निर्मल कीजै,। Porutpal,अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह निशा मुख मोड़े।
कर्म की खेती जो जन बोवे सोई फल पावे रे,। Kamathuppal,उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे भरम का पर्दा तोड़े,। Porutpal,लोभ मोह मद त्यागि के निज स्वरूप को चीन्है।
कर्म की खेती जो जन बोवे सोई फल पावे रे,। Arathuppal,आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे।

कर्म की खेती जो जन बोवे सोई फल पावे रे,। Arathuppal,कायर बैठे भाग्य गिने और धीर पुरुष कर दिखलावे।
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी अंतर नैन उघारे,। Arathuppal,अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा।
दीन-दुखी का आसरा बनकर जो जीवन महकावे,। Kamathuppal,आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे।
दीन-दुखी का आसरा बनकर जो जीवन महकावे,उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया।

कर्म की खेती जो जन बोवे सोई फल पावे रे,। Arathuppal,अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा।
About Thiruvalluvar (तिरुवल्लुवर) — The Maestro of Human Emotion
Thiruvalluvar is revered as Tamil literature's greatest moral philosopher and divine poet, whose 1,330 couplets in the Tirukkural illuminate virtue, wealth, and love.
Poetic Innovation & Distinct Voice
Thiruvalluvar pioneered unique metaphors and an intimate conversational style, permanently redefining South Asian lyrical expression.
Historical Era & Global Acclaim
Celebrated across the Sangam / Post-Sangam Tamil Classical, their verses have transcended borders, honored globally in multiple international translations and scholarly anthologies.
Cosmic Depth & Emotional Resonance
Weaving existential inquiry, intimate vulnerability, and philosophical depth, Thiruvalluvar captured the bittersweet beauty of human existence.
Why Thiruvalluvar's Poetry Resonates Across Generations
From student dormitories to seasoned scholars, Thiruvalluvar effortlessly bridges generational divides. Their couplets on love, heartbreak, and resilience don't wallow in bitterness; rather, they gently embrace emotion as a precious, soulful companion. On digital platforms and in musical concerts, their words continue to touch millions daily.
Explore Other Ghazal Masters
Create Aesthetic Cards in Under 30 Seconds
Select your favourite shayari or quote, choose an ethereal cosmic gradient, adjust the font to Noto Serif Devanagari, and export immediately.
- No sign up
- No watermark
- Free forever
“तेरी खामोशियों में भी एक कायनात बसती है...”
EmotionHub.in • Cosmic PoetryMessages for every occasion and every person
Pick who you are writing to, or the festival, and open a ready collection.
- Birthday for dadWarm lines for the man who raised you
- Anniversary for husbandSweet notes for the one by your side
- Good morning, familyA bright start for the family group
- Good night, girlfriendSoft words before she sleeps
- Diwali wishesFestive messages for family and friends
- Holi wishesColourful lines for your friends
- Eid wishesEid Mubarak for your loved ones
- Farewell, colleagueKind goodbyes for a teammate
- CongratulationsCheer on a friend's big win
- Miss you, girlfriendFor the days when distance feels long
- Funny birthdayLight-hearted wishes for a best friend
- Christmas wishesSeason's greetings for the family
Popular searches
- Breakup Shayari for Girlfriend
- Attitude Shayari for Boys
- Attitude Shayari for Girls
- Attitude Status for Boys
- Alone Shayari
- 2 Line Attitude Shayari
- 2 Line Breakup Shayari
- Love Shayari for Girlfriend
- Miss You Shayari for Girlfriend
- Emotional Shayari for Mom
- Heart Touching Shayari for Husband
- Birthday Wishes for Wife
- Birthday Wishes for Husband
- Love Status for WhatsApp
- Inspirational Quotes for Students
- Life Quotes for Self
Poets, Festivals & Status
Read the voices behind the verses, plan ahead for festivals and grab a quick status line
Essential Questions About Thiruvalluvar
Authentic answers about Thiruvalluvar's life, iconic ghazals, and timeless literary legacy.
Still have a question? Contact us
Who was Thiruvalluvar and what was their literary significance?
Thiruvalluvar (c. 4th–5th Century CE–Ancient Era) was a monumental figure in Tamil/Classical literature, celebrated for masterpieces exploring human devotion, existential philosophy, and timeless beauty.
What are the central themes in Thiruvalluvar's poetry?
The core themes across Thiruvalluvar's oeuvre encompass सत्य, अहिंसा और सार्वभौमिक करुणा, सदाचारी गृहस्थ और निष्कलंक आचरण, शासक के कर्तव्य और ज्ञान-साधना, मधुर प्रणय, मान और विरह की गरिमा, भाग्य, कर्म और आत्म-नियंत्रण, harmonizing lyrical beauty with deep moral introspection.
What makes Thiruvalluvar's literary works so renowned?
Their poetry explores the full spectrum of human emotions—love, existential yearning, resilience, and philosophical introspection.
What are the most famous works of Thiruvalluvar?
Their masterworks include timeless couplets and verses celebrated globally across literary traditions.
What was Thiruvalluvar's impact on literary culture?
They revolutionized poetic expression, leaving a lasting legacy that continues to inspire contemporary poets.
Can I copy and share couplets by Thiruvalluvar?
Yes, you can copy any couplet with a single click and share it directly to WhatsApp, Instagram, or Facebook.
Can I download aesthetic cards for Thiruvalluvar's poetry?
Yes! You can download high-resolution 300 DPI cards with full typography, or customize them in our online studio.
Where is Thiruvalluvar's memorial or tomb located?
Memorials and historic landmarks commemorating Thiruvalluvar stand as cherished cultural heritage sites for poetry enthusiasts.
Ready to Express Yourself?
Pick a line, add your style and send it off. Your first card is a few taps away.







