सत्य का दीप जब जलता है मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,सत्य-अहिंसा की राहों पर परलोक में संग जाएगी बाकी सब माया-मोह यहीं धरा रह जाएगा।
Swami Rama Tirtha (स्वामी रामतीर्थ)
Swami Rama Tirtha was an illustrious figure in Practical Vedantin & Poet-Monk (1873–1906), renowned for In Woods of God-Realization (8 volumes), Lectures in America and Japan.

सत्य का दीप जब जलता है मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,सत्य-अहिंसा की राहों पर परलोक में संग जाएगी बाकी सब माया-मोह यहीं धरा रह जाएगा।
— SWAMI RAMA TIRTHA • 1873–1906

सत्य का दीप जब जलता है मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,सत्य-अहिंसा की राहों पर परलोक में संग जाएगी बाकी सब माया-मोह यहीं धरा रह जाएगा।
— SWAMI RAMA TIRTHA • 1873–1906
Download Aesthetic Swami Rama Tirtha Story Cards

‘सत्य का दीप जब जलता है मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,सत्य-अहिंसा की राहों पर परलोक में संग जाएगी बाकी सब माया-मोह यहीं धरा रह जाएगा।’— Swami Rama Tirtha
Sher #1 • Classic Couplet
सत्य का दीप जब जलता है मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,

‘मन मंदिर में जो दीप जले भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,साधु पुरुष की वाणी कभी अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।’— Swami Rama Tirtha
Sher #2 • Passionate Verse
मन मंदिर में जो दीप जले भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,

‘मन के निर्मल दर्पण में जब अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,अहंकार का त्याग किया जिसने जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।’— Swami Rama Tirtha
Sher #3 • Soulful Couplet
मन के निर्मल दर्पण में जब अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,

‘सत्य का दीप जब जलता है अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,सत्य वचन जो मुख से बोले रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।’— Swami Rama Tirtha
Sher #4 • Philosophical Verse
सत्य का दीप जब जलता है अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,
Immortal Couplets & Ghazals
मन मंदिर में जो दीप जले भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,साधु पुरुष की वाणी कभी अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।
मन के निर्मल दर्पण में जब अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,अहंकार का त्याग किया जिसने जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
सत्य का दीप जब जलता है अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,सत्य वचन जो मुख से बोले रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।

बिरहा की आग में तप के कुंदन बरसे दिन और रात विरह की अग्नि में तपकर पावन हो गया मन का धाम,जिसने प्रेम का मर्म समझ कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
Birahaa ki aag mein tap ke kundan barase din aur raat virah ki agni mein tapakar paavan ho gaya man ka dhaam,Jisane prem ka marm samajh ki har haal mein raazee rahe sukh mein bhi aur duhkh mein bhi sheesh navaae.
सत्य का दीप जब जलता है सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,धैर्य का दामन जिसने थामे रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।
सत्य के पावन पथ पर जिसने भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,वाणी में जिसके मिठास घुली उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।
दीन-दुखी का आसरा बनकर बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,शांति और संतोष का धन जो निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।
माटी का यह देह बना है जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,सत्कर्मों की अमिट कमाई ही उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।

प्रेम का प्याला जिसने पिया वो अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,हृदय के पावन सिंहासन पर जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
Prem ka pyaalaa jisane piyaa wo amar ho gaya jag mein use duniya ka koee lobh baandh na sakaa kabhee,Hriday ke paavan sinhaasan par jo jan vicharaa usane sansaar ki saari chintaaon se mukti paa lee.
वाणी में जो अमृत घोले माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,अहंकार का त्याग किया जिसने जिसने डुबकी लगाई उसके जन्म-जन्मांतर के सब पाप धुल जाते हैं।
आशा तृष्णा सब छूटी जब सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,माटी का चोला पाकर जिसने वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।
सत्य का दीप जब जलता है सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,हृदय में जिसके दया बसी है उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।
आशा तृष्णा सब छूटी जब माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,प्रेम की डोर में बंध गया जो जिसने डुबकी लगाई उसके जन्म-जन्मांतर के सब पाप धुल जाते हैं।

प्रेम गली अति साँकरी जामें प्रियतम का नाम सुना अनहद नाद का संगीत अंतर में गूँजने लगा,जिसने प्रेम का मर्म समझ उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।
Prem galee ati saankaree jaamen priyatam ka naam sunaa anahad naad ka sangeet antar mein goonjane lagaa,Jisane prem ka marm samajh usane donon jahaan bhulaa diye prem ke nashe mein woh mast kalandar hua.
कर्म की खेती जो जन बोवे भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,प्रेम की डोर में बंध गया जो उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,माटी का चोला पाकर जिसने उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।
माटी का यह देह बना है भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,सत्य-अहिंसा की राहों पर रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।
दुःख में सुमिरन सब कोई करै प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,माटी का चोला पाकर जिसने निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।

आँखों में जो नमी है वो सो पीर विरह की गावे अंतर घट की पीड़ा को कोई समझ न पावे,ग़म की इस आँधी ने जब ज़माने ने हँसी उड़ाई मगर यही फफोले कल ज्ञान का कमल बनेंगे।
Aankhon mein jo namee hai wo so peer virah ki gaave antar ghat ki peeraa ko koee samajh na paave,Gham ki is aandhee ne jab zamaane ne hansi uraaee magar yahee phaphole kal jnyaan ka kamal banenge.
सत्य के पावन पथ पर जिसने भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,नेकी की राह पे जो जन अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।
मन मंदिर में जो दीप जले सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।
आशा तृष्णा सब छूटी जब भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,जीवन का यह पावन सूत्र जो अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।
हरि सुमिरन में जिसका चित्त भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,हरि की कृपा का पावन साया मानव धर्म निभाया उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है।

तन्हाई के अँधियारे में भटके सूने वन में जिसका कोई घोंसला न बचा डाल-डाल रोता फिरे,अंधेरी रात के सन्नाटे में सहनशीलता ही सबसे बड़ी पूँजी बनी जिसने हर तूफ़ान से बचा लिया।
Tanhaaee ke andhiyaare mein bhatake soone van mein jisakaa koee ghonsalaa na bachaa daala-daal rotaa phire,Andheree raat ke sannaate mein sahanasheelataa hi sabase baree poonjee banee jisane har toofaan se bachaa liyaa.
जो तूफ़ानों में अपनी नाव अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,सत्य वचन जो मुख से बोले के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,साधु पुरुष की वाणी कभी जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।
नाम और दौलत तो माटी बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,माटी का चोला पाकर जिसने निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।
संतन की संगति में आकर सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,मोह-निशा से जो जन जागा अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।

उम्र भर का सफ़र और यह ख़ामोशी बख़्शी वरना कभी हमारी हँसी भी बहारों को जगाती थी,जब कोई सहारा न बचा तब प्रभु कृपा की वर्षा हुई और जलते हुए मन को शांति मिल गई।
Umr bhar ka safar aur yeh khaamoshi bakhshee varanaa kabhee hamaaree hansi bhi bahaaron ko jagaatee thi,Jab koee sahaaraa na bachaa tab prabhu kripaa ki varshaa hui aur jalate hue man ko shaanti mil gayi.
हरि सुमिरन में जिसका चित्त बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,माटी का चोला पाकर जिसने उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।
वाणी वही जो घाव भरे और रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान जिसने डुबकी लगाई उसके जन्म-जन्मांतर के सब पाप धुल जाते हैं।
प्रेम की गंगा अंतर में बहे भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,वाणी में जिसके मिठास घुली अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।
साधु-संगत की छाया में जो माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,माटी का चोला पाकर जिसने अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।

नेकी की राह पे जो जन सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,हृदय में जिसके दया और करुणा वह कभी पराजित नहीं होता समय के साथ चलने वाला ही विजेता बनता है।
Nekee ki raah pe jo jan saty ka beej ugaayaa usakee keerti amar rahegee jab tak gagan mein chhaayaa,Hriday mein jisake dayaa aur karunaa woh kabhee paraajit nahi hotaa samay ke saath chalane vaalaa hi vijetaa banataa hai.
नाम और दौलत तो माटी जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,सत्य वचन जो मुख से बोले लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।
जो तूफ़ानों में अपनी नाव निर्भय पाँव धरे काल की कठिन चाल भी उसका कुछ न बिगाड़ सके,मोह-निशा से जो जन जागा उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।
नाम और दौलत तो माटी अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,परहित में जिसने जीवन सौंपा रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।
वाणी में जो अमृत घोले स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,हृदय में जिसके दया बसी है जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।

नदी की तरह बहते रहना कायर मैदान छोड़ भागते हैं धीर पुरुष डटे रहते हैं और विजय का वरण करते हैं,जिसने समय की चाल पहचानी और अडिग रहा पहाड़ की तरह तूफ़ान भी उसके सामने नतमस्तक हो जाते हैं।
Nadee ki tarah bahate rahanaa kaayar maidaan chhor bhaagate hain dheer purush date rahate hain aur vijay ka varan karate hain,Jisane samay ki chaal pahachaanee aur adig raha pahaar ki tarah toofaan bhi usake saamane natamastak ho jaate hain.
वाणी में जो अमृत घोले माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,सत्य-अहिंसा की राहों पर उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।
सत्य के पावन पथ पर जिसने सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,नेकी की राह पे जो जन अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
वाणी में जो अमृत घोले भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,सत्संग की निर्मल गंगा में उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब तो सारा जग अपना लागे पराया कोई न रहे सब में प्रभु रूप दिखे,साधु पुरुष की वाणी कभी रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।

नेकी की राह पे जो जन करै सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,जिसने अहंकार को त्याग दिया वह कभी पराजित नहीं होता समय के साथ चलने वाला ही विजेता बनता है।
Nekee ki raah pe jo jan karai sukh mein karai na koy jo sukh mein sumiran karai to duhkh kaahe ko hoy,Jisane ahankaar ko tyaag diyaa woh kabhee paraajit nahi hotaa samay ke saath chalane vaalaa hi vijetaa banataa hai.
दीन-दुखी का आसरा बनकर तो सारा जग अपना लागे पराया कोई न रहे सब में प्रभु रूप दिखे,माटी का चोला पाकर जिसने अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
नदिया की धारा बहती जावे माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,परहित में जिसने जीवन सौंपा उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।
जो तूफ़ानों में अपनी नाव मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,सत्य-अहिंसा की राहों पर जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।

ज्ञान की पावन भोर भई व्यापक रूप से समाया हुआ है अज्ञानी बाहर ढूँढता ज्ञानी अंतर में पा लेता है,जब मन की सब तरंगें शांत हुईं वह किसी से द्वेष नहीं करता और सब जीवों के कल्याण में रत रहता है।
Jnyaan ki paavan bhor bhaee vyaapak roop se samaayaa hua hai ajnyaanee baahar dhoondhataa jnyaanee antar mein paa letaa hai,Jab man ki sab tarangen shaant hueen woh kisee se dvesh nahi karataa aur sab jeevon ke kalyaan mein rat rahataa hai.
माटी का यह देह बना है स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,सदाचार की पावन वेदी पर लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।
मन मंदिर में बसा जो मूरति पलकन मूँदूँ तो घट में पाऊँ ऐसा अलौकिक प्रेम जगा जो कभी मिटता नहीं,प्रियतम के चरणों में जिसने मोती चमका प्रेम की सीपी में अनमोल ज्ञान का रत्न बन गया।
बिरहा की आग में तप के कुंदन दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,प्रेम का दीपक अंतर में जो तो बाहर का सारा बैर-भाव और द्वेष पल भर में समाप्त हो गया।
तेरी आँखों की झील में जो का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,साँसों के हर तार पे जिसका जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।

आशा तृष्णा सब छूटी जब प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,अंतःकरण जब दर्पण की तरह तब आत्मा अनादि और अनंत काल के पार शाश्वत धाम में पहुँच गई।
Aashaa trishnaa sab chhootee jab prabhu charanon chit laagaa amar abhay pad soee paave jo jag se virakt jaagaa,Antahkaran jab darpan ki tarah tab aatmaa anaadi aur anant kaal ke paar shaashvat dhaam mein pahunch gayi.
तेरे मिलन की आस में बीते जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,प्रेम का दीपक अंतर में जो प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
तेरे दीदार की एक झलक ने जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,प्रेम की इस पावन घाटी में अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।
तेरे मिलन की आस में बीते हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,अंतर में जब प्रेम समाया सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।
बिरहा की आग में तप के कुंदन बरसे दिन और रात विरह की अग्नि में तपकर पावन हो गया मन का धाम,जिसने प्रेम का मर्म समझ कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।

साधु वो ही जो अंतर भेद मिटा के देखा उसने संसार के मिथ्या मोह से स्वयं को मुक्त कर लिया,परमात्मा के इस विराट स्वरूप में उसी को प्राप्त होता है जो सुख-दुःख, लाभ-हानि में सदा समभाव रहता है।
Saadhu wo hi jo antar bhed mitaa ke dekhaa usane sansaar ke mithyaa moh se svayan ko mukt kar liyaa,Paramaatmaa ke is viraat svaroop mein usee ko praapt hotaa hai jo sukha-duhkh, laabha-haani mein sadaa samabhaav rahataa hai.
इश्क़ जब रूह में उतरता है जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,मन मंदिर की पावन आरती अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।
नैन मिले जब नैनन से तब दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,विरह की रात जब ढलने लगी नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।
बिरहा की आग में तप के कुंदन दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,प्रेम की पावन ज्योति जगाई जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।
इश्क़ की राह अनोखी बंदे अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,विरह का हर इक आँसू बनकर जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।

मन मंदिर में जो दीप जले भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,साधु पुरुष की वाणी कभी अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।
Man mandir mein jo deep jale bhaj le raam ka naamaa ant samay jab aavegaa tab sang na aave dhaamaa,Saadhu purush ki vaanee kabhee apane antar mein sanjoe woh is nashvar sansaar mein sabase baraa samraat hai.
इश्क़ जब रूह में उतरता है सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,मन मंदिर की पावन आरती युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
प्रियतम की याद में जो नैना दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,प्रेम की इस पावन धारा में सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।
तेरी आँखों की झील में जो दो न समाहिं जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाहिं,प्रेम के इस पावन तीरथ में जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
इश्क़ जब रूह में उतरता है अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,आँखों के रस्ते दिल में उतरा जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।

माटी का यह देह बना है भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,सत्य-अहिंसा की राहों पर रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।
Maatee ka yeh deh banaa hai bhaj le raam ka naamaa ant samay jab aavegaa tab sang na aave dhaamaa,Satya-ahinsaa ki raahon par rakhaa vipadaa ki gharee mein bhi woh jeevan ke har sangraam mein vijayee hotaa hai.
नैनन आगे तू ही तू नाचे दो न समाहिं जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाहिं,प्रेम का दीपक अंतर में जो जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
प्रेम की डोरी बाँध लई जब दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,साँसों के हर तार पे जिसका जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।
प्रेम गली अति साँकरी जामें बरसे दिन और रात विरह की अग्नि में तपकर पावन हो गया मन का धाम,आँखों के रस्ते दिल में उतरा जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।
इश्क़ का सौदा जिसने किया वो अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,जिसने प्रेम का मर्म समझ युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।

साधु-संगत की छाया में जो माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,माटी का चोला पाकर जिसने अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।
Saadhu-sangat ki chhaayaa mein jo maatee mein mil jaanaa lobh moh mad tyaag ke nij svaroop cheenh le,Maatee ka cholaa paakar jisane avichal kadam barhaataa hai usakaa yash teenon lokon mein sadaa phailataa hai.
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,हृदय के पावन सिंहासन पर जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
साँसों की सरगम में घुल गया बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,सच्चे प्रेम की यही निशानी मन ऐसा निर्मल हुआ कि दर्पण भी उसके सामने लजा जाए।
प्रेम की पावन वेदी पर जिसने दो न समाहिं जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाहिं,हृदय के पावन सिंहासन पर नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।
अंतर घट में जब ज्योति जगी पलकन मूँदूँ तो घट में पाऊँ ऐसा अलौकिक प्रेम जगा जो कभी मिटता नहीं,हृदय के पावन सिंहासन पर एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।

माटी का यह देह बना है स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,सदाचार की पावन वेदी पर लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।
Maatee ka yeh deh banaa hai svayan khete hain kinaaraa unake svaagat mein sir jhukaataa hai,Sadaachaar ki paavan vedee par lagaa sadaa ke lie woh bhavasaagar ki bheeshan laharon se paar utar jaataa hai.
नैनों के दर्पण में बसा जब तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,जिसने अपना सब कुछ सौंपा सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।
प्रेम रंग में जो रंग गया जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,अमर प्रेम की अमर कहानी जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
नैनों के दर्पण में बसा जब उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,अंतर में जब प्रेम समाया कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,प्रियतम का अनुराग ही जिसका उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।

प्रियतम की याद में जो नैना दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,प्रेम की इस पावन धारा में सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।
Priyatam ki yaad mein jo nainaa dil ka taar juraa maun mein bhi har ek dharakan teri pukaar banee,Prem ki is paavan dhaaraa mein sukha-duhkh bhulaa diyaa usane jeevan ke har mod par aanand hi paayaa.
तेरे मिलन की आस में बीते प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,जब से नैना रूप में उलझे कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।
प्रेम की पावन वेदी पर जिसने दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,प्रेम के इस पावन तीरथ में अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।
नैनों के दर्पण में बसा जब बरसे दिन और रात विरह की अग्नि में तपकर पावन हो गया मन का धाम,प्रियतम का अनुराग ही जिसका सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।
नैनन आगे तू ही तू नाचे प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,अमर प्रेम की अमर कहानी और मिलन की भोर हुई तो आत्मा का परमात्मा से एकात्म हो गया।

नैनों के दर्पण में बसा जब उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,अंतर में जब प्रेम समाया कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।
Nainon ke darpan mein basaa jab us par doojaa rang na charhe woh to keval apane priyatam ka hokar rah gaya,Antar mein jab prem samaayaa ki khud ko mitaa ke priyatam ki khushee mein apanee khushee dhoondhataa hai.
तेरी आँखों की झील में जो सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,प्रेम की पावन ज्योति जगाई जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।
प्रेम गली अति साँकरी जामें प्रियतम का नाम सुना अनहद नाद का संगीत अंतर में गूँजने लगा,जिसने प्रेम का मर्म समझ उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।
नैन मिले जब नैनन से तब दो न समाहिं जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाहिं,प्रेम का दीपक अंतर में जो कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
प्रियतम की याद में जो नैना उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,प्रियतम की चाहत में जिसने लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।

तेरी आँखों की झील में जो दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,प्रियतम का अनुराग ही जिसका उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।
Teri aankhon ki jheel mein jo dil ka bhed khulaa maun ki bhaashaa mein sab kuchh kah diyaa kuchh na chhupaayaa,Priyatam ka anuraag hi jisakaa usane donon jahaan bhulaa diye prem ke nashe mein woh mast kalandar hua.
तेरी याद का पावन साया डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,अंतर में जब प्रेम समाया जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,आँखों के रस्ते दिल में उतरा जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।
मन की वीणा बज उठी जब का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,प्रियतम का अनुराग ही जिसका उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
तेरी आँखों की झील में जो दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,प्रियतम का अनुराग ही जिसका उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।

घायल की गति घायल जाने सब मतलब के यार सुख में सब संग नाचते दुःख में मुँह मोड़ लेते हैं,जब धैर्य की सीमा टूट गई कोई खुशी का गीत नहीं गाता यहाँ तो हर साँस में विरह की रागिनी बजती है।
Ghaayal ki gati ghaayal jaane sab matalab ke yaar sukh mein sab sang naachate duhkh mein munh mod lete hain,Jab dhairy ki seemaa toot gayi koee khushee ka geet nahi gaataa yahaan to har saans mein virah ki raaginee bajatee hai.
साँसों की सरगम में घुल गया तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,सच्चे प्रेम की यही निशानी तो बाहर का सारा बैर-भाव और द्वेष पल भर में समाप्त हो गया।
नैन मिले जब नैनन से तब रैन-दिना मतवारे अंग-अंग में ज्योति जलाई प्रेम के दीपक बारे,प्रियतम के चरणों में जिसने युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
विरह की अगन में जलता मन सो पीर विरह की गावे अंतर घट की पीड़ा को कोई समझ न पावे,जब धैर्य की सीमा टूट गई ज़माने ने हँसी उड़ाई मगर यही फफोले कल ज्ञान का कमल बनेंगे।
नैनों से जो नीर बहे सो पीर विरह की गावे अंतर घट की पीड़ा को कोई समझ न पावे,जब सबने मुँह फेर लिया सारे भ्रम तोड़ डाले और जीवन की नग्न सच्चाई से सामना करा दिया।

सपनों के महल जब टूटे किनारा कहीं न सूझे प्रभु बिना इस संकट में कोई पार लगाने वाला न दिखे,जब नयनों के सब आँसू सूखे कोई खुशी का गीत नहीं गाता यहाँ तो हर साँस में विरह की रागिनी बजती है।
Sapanon ke mahal jab toote kinaaraa kaheen na soojhe prabhu binaa is sankat mein koee paar lagaane vaalaa na dikhe,Jab nayanon ke sab aansoo sookhe koee khushee ka geet nahi gaataa yahaan to har saans mein virah ki raaginee bajatee hai.
टूटी नाव भँवर में फँसी जब कोई राह न सूझे तब टूटे दिल से निकली दुआ ही रास्ता दिखाती है,आँसुओं की इस भाषा को कोई खुशी का गीत नहीं गाता यहाँ तो हर साँस में विरह की रागिनी बजती है।
दर्द की रात में जब कोई कोई शिकवा नहीं दिल के वीराने में बस एक टूटी आस का दिया है,ग़म की इस गहरी रात में तब प्रभु कृपा की वर्षा हुई और जलते हुए मन को शांति मिल गई।
आँखों में जो नमी है वो सो पीर विरह की गावे अंतर घट की पीड़ा को कोई समझ न पावे,ग़म की इस आँधी ने जब ज़माने ने हँसी उड़ाई मगर यही फफोले कल ज्ञान का कमल बनेंगे।
दिल का आईना जब टूटा हमदर्द न मिला तकिये को सीने से लगा के सारी रात रोते रहे,ग़म के मारों की बस्ती में सारे भ्रम तोड़ डाले और जीवन की नग्न सच्चाई से सामना करा दिया।

वक़्त की आँधी ने तोड़े भटके सूने वन में जिसका कोई घोंसला न बचा डाल-डाल रोता फिरे,जब कोई सहारा न बचा तब अंतरात्मा की पुकार ही ईश्वर के चरणों तक पहुँची और धीरज मिला।
Waqt ki aandhee ne tore bhatake soone van mein jisakaa koee ghonsalaa na bachaa daala-daal rotaa phire,Jab koee sahaaraa na bachaa tab antaraatmaa ki pukaar hi eeshvar ke charanon tak pahunchee aur dheeraj mila.
आशा का दीप जब बुझने हमदर्द न मिला तकिये को सीने से लगा के सारी रात रोते रहे,टूटे हुए दिल का दर्द चलते-चलते पाँव के छाले भी अब मंज़िल का पता पूछने लगे हैं।
उम्र भर का सफ़र और किनारा कहीं न सूझे प्रभु बिना इस संकट में कोई पार लगाने वाला न दिखे,जब कोई सहारा न बचा तपस्या का ऐसा दीप जला जिसने आत्मा को अमर प्रकाश से भर दिया।
जिसके दिल पर बीत रही जब कोई राह न सूझे तब टूटे दिल से निकली दुआ ही रास्ता दिखाती है,ग़म की इस लंबी यात्रा में तो ग़ैरों से क्या शिकवा करना दिल ने चुपचाप सब कुछ सहना सीख लिया।
टूटे दिल की ख़ामोशी में सो पीर विरह की गावे अंतर घट की पीड़ा को कोई समझ न पावे,जीवन के इस कठिन मोड़ पर तब प्रभु कृपा की वर्षा हुई और जलते हुए मन को शांति मिल गई।

सच्ची लगन से जो जन करै सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,हृदय में जिसके दया और करुणा कि संकट के समय ढाल बन जाए सुख में तो सारी दुनिया साथ चलती है।
Sachchee lagan se jo jan karai sukh mein karai na koy jo sukh mein sumiran karai to duhkh kaahe ko hoy,Hriday mein jisake dayaa aur karunaa ki sankat ke samay dhaal ban jaae sukh mein to saari duniya saath chalatee hai.
घायल की गति घायल जाने सब मतलब के यार सुख में सब संग नाचते दुःख में मुँह मोड़ लेते हैं,जब धैर्य की सीमा टूट गई कोई खुशी का गीत नहीं गाता यहाँ तो हर साँस में विरह की रागिनी बजती है।
आँखों में जो नमी है वो सोई जाने पीर पराई दुनिया तो तमाशा देखती है कोई दर्द नहीं बाँटता,टूटे हुए दिल का दर्द तब विश्वास का एक नन्हा तारा चमका जिसने डूबने से बचा लिया।
ग़म का मारा पंछी जैसे बाहर हँसता जाए दुनिया को क्या ख़बर कि अंदर कितनी आग लगी है,वक़्त के इस क्रूर प्रहार ने कोई खुशी का गीत नहीं गाता यहाँ तो हर साँस में विरह की रागिनी बजती है।
भीतर-भीतर घुटता जाए रेत की दीवार की तरह तब समझ आया कि संसार की माया सब झूठी है,टूटे हुए दिल का दर्द केवल वही समझ सकता है जिसके सीने में कभी ऐसा ही घाव लगा हो।

दुःख में सुमिरन सब कोई भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,हृदय में जिसके दया और करुणा तब केवल सत्कर्म ही साथ चलेंगे बाकी सब धन-दौलत यहीं धरा रह जाएगा।
Duhkh mein sumiran sab koee bhaj le raam ka naamaa ant samay jab aavegaa tab sang na aave dhaamaa,Hriday mein jisake dayaa aur karunaa tab keval satkarm hi saath chalenge baakee sab dhana-daulat yaheen dharaa rah jaaegaa.
घायल की गति घायल जाने को भी छीन ले तब समझ आता है कि तन्हाई किसे कहते हैं,जब आशा की हर किरण बुझी तपस्या का ऐसा दीप जला जिसने आत्मा को अमर प्रकाश से भर दिया।
मन के कोने में सिमटी जीवन की वीराणी किसको दिखाएँ अपने दिल के ये गहरे ज़ख़्म,दर्द की इस एकांत गुफ़ा में तपस्या का ऐसा दीप जला जिसने आत्मा को अमर प्रकाश से भर दिया।
आँखों में जो नमी है वो भटके सूने वन में जिसका कोई घोंसला न बचा डाल-डाल रोता फिरे,जब नयनों के सब आँसू सूखे तब विश्वास का एक नन्हा तारा चमका जिसने डूबने से बचा लिया।
तन्हाई के अँधियारे में भटके सूने वन में जिसका कोई घोंसला न बचा डाल-डाल रोता फिरे,अंधेरी रात के सन्नाटे में सहनशीलता ही सबसे बड़ी पूँजी बनी जिसने हर तूफ़ान से बचा लिया।

दुःख में सुमिरन सब कोई अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,जो सबको अपना मान के चले और धर्म पे अडिग रहता है उसका मान-सम्मान तीनों लोकों में बढ़ता है।
Duhkh mein sumiran sab koee antar mein gir jaateen ghata-ghat mein tab ek anantaa jyoti nazar hai aatee,Jo sabako apanaa maan ke chale aur dharm pe adig rahataa hai usakaa maana-sammaan teenon lokon mein barhataa hai.
आशा का दीप जब बुझने जीवन की वीराणी किसको दिखाएँ अपने दिल के ये गहरे ज़ख़्म,ग़म की इस लंबी यात्रा में तन्हाई ही अब संग चलती है साया भी धूप ढलते ही साथ छोड़ जाता है।
About Swami Rama Tirtha (स्वामी रामतीर्थ) — The Maestro of Human Emotion
Swami Rama Tirtha was an illustrious figure in Practical Vedantin & Poet-Monk (1873–1906), renowned for In Woods of God-Realization (8 volumes), Lectures in America and Japan.
Poetic Innovation & Distinct Voice
Swami Rama Tirtha pioneered unique metaphors and an intimate conversational style, permanently redefining South Asian lyrical expression.
Historical Era & Global Acclaim
Celebrated across the 1873–1906, their verses have transcended borders, honored globally in multiple international translations and scholarly anthologies.
Cosmic Depth & Emotional Resonance
Weaving existential inquiry, intimate vulnerability, and philosophical depth, Swami Rama Tirtha captured the bittersweet beauty of human existence.
Why Swami Rama Tirtha's Poetry Resonates Across Generations
From student dormitories to seasoned scholars, Swami Rama Tirtha effortlessly bridges generational divides. Their couplets on love, heartbreak, and resilience don't wallow in bitterness; rather, they gently embrace emotion as a precious, soulful companion. On digital platforms and in musical concerts, their words continue to touch millions daily.
Explore Other Ghazal Masters
Create Aesthetic Cards in Under 30 Seconds
Select your favourite shayari or quote, choose an ethereal cosmic gradient, adjust the font to Noto Serif Devanagari, and export immediately.
- No sign up
- No watermark
- Free forever
“तेरी खामोशियों में भी एक कायनात बसती है...”
EmotionHub.in • Cosmic PoetryMessages for every occasion and every person
Pick who you are writing to, or the festival, and open a ready collection.
- Birthday for dadWarm lines for the man who raised you
- Anniversary for husbandSweet notes for the one by your side
- Good morning, familyA bright start for the family group
- Good night, girlfriendSoft words before she sleeps
- Diwali wishesFestive messages for family and friends
- Holi wishesColourful lines for your friends
- Eid wishesEid Mubarak for your loved ones
- Farewell, colleagueKind goodbyes for a teammate
- CongratulationsCheer on a friend's big win
- Miss you, girlfriendFor the days when distance feels long
- Funny birthdayLight-hearted wishes for a best friend
- Christmas wishesSeason's greetings for the family
Popular searches
- Breakup Shayari for Girlfriend
- Attitude Shayari for Boys
- Attitude Shayari for Girls
- Attitude Status for Boys
- Alone Shayari
- 2 Line Attitude Shayari
- 2 Line Breakup Shayari
- Love Shayari for Girlfriend
- Miss You Shayari for Girlfriend
- Emotional Shayari for Mom
- Heart Touching Shayari for Husband
- Birthday Wishes for Wife
- Birthday Wishes for Husband
- Love Status for WhatsApp
- Inspirational Quotes for Students
- Life Quotes for Self
Poets, Festivals & Status
Read the voices behind the verses, plan ahead for festivals and grab a quick status line
Essential Questions About Swami Rama Tirtha
Authentic answers about Swami Rama Tirtha's life, iconic ghazals, and timeless literary legacy.
Still have a question? Contact us
Who was Swami Rama Tirtha?
Swami Rama Tirtha was a renowned Practical Vedantin & Poet-Monk (1873–1906) from Muraliwala, Gujranwala (now Pakistan), widely celebrated for PROPHET OF PRACTICAL VEDANTA, PROFESSOR-MONK OF LAHORE, ECSTATIC MYSTIC.
What is the central philosophy and message of Swami Rama Tirtha?
The central philosophy of Swami Rama Tirtha centers around Practical Vedanta, boundless divine joy, unity of human soul with nature, self-reliance and intellectual freedom, leaving timeless guidance for humanity.
What makes Swami Rama Tirtha's literary works so renowned?
Their poetry explores the full spectrum of human emotions—love, existential yearning, resilience, and philosophical introspection.
What are the most famous works of Swami Rama Tirtha?
Their masterworks include timeless couplets and verses celebrated globally across literary traditions.
What was Swami Rama Tirtha's impact on literary culture?
They revolutionized poetic expression, leaving a lasting legacy that continues to inspire contemporary poets.
Can I copy and share couplets by Swami Rama Tirtha?
Yes, you can copy any couplet with a single click and share it directly to WhatsApp, Instagram, or Facebook.
Can I download aesthetic cards for Swami Rama Tirtha's poetry?
Yes! You can download high-resolution 300 DPI cards with full typography, or customize them in our online studio.
Where is Swami Rama Tirtha's memorial or tomb located?
Memorials and historic landmarks commemorating Swami Rama Tirtha stand as cherished cultural heritage sites for poetry enthusiasts.
Ready to Express Yourself?
Pick a line, add your style and send it off. Your first card is a few taps away.





