दीन-दुखी का आसरा बनकर भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,अमर नाम जग में उसी का उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।
Simone de Beauvoir (सिमोन द बोउवा)
Simone de Beauvoir was an illustrious figure in Pioneer of Modern Feminism & Existentialist (1908–1986), renowned for The Second Sex (Le Deuxième Sexe), The Ethics of Ambiguity.

दीन-दुखी का आसरा बनकर भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,अमर नाम जग में उसी का उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।
— SIMONE DE BEAUVOIR • 1908–1986

दीन-दुखी का आसरा बनकर भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,अमर नाम जग में उसी का उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।
— SIMONE DE BEAUVOIR • 1908–1986
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‘दीन-दुखी का आसरा बनकर भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,अमर नाम जग में उसी का उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।’— Simone de Beauvoir
Sher #1 • Classic Couplet
दीन-दुखी का आसरा बनकर भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,

‘प्रेम की गंगा अंतर में बहे सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,परहित में जिसने जीवन सौंपा अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।’— Simone de Beauvoir
Sher #2 • Passionate Verse
प्रेम की गंगा अंतर में बहे सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,

‘प्रेम की गंगा अंतर में बहे अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,प्रेम की डोर में बंध गया जो अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।’— Simone de Beauvoir
Sher #3 • Soulful Couplet
प्रेम की गंगा अंतर में बहे अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,

‘क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,सदाचार की पावन वेदी पर उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।’— Simone de Beauvoir
Sher #4 • Philosophical Verse
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,
Immortal Couplets & Ghazals
प्रेम की गंगा अंतर में बहे सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,परहित में जिसने जीवन सौंपा अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।
प्रेम की गंगा अंतर में बहे अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,प्रेम की डोर में बंध गया जो अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,सदाचार की पावन वेदी पर उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।

फासले मिट गए जब दिल से दो न समाहिं जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाहिं,प्रियतम के रंग में रंग कर जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।
Love looks not with the eyes but with the mind thy constant love shall shine with steadfast glow,Thy lovingkindness stays my fainting heart and guides my footsteps to the quiet shore.
सत्य का दीप जब जलता है सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,भवसागर की लहरों से जो उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने परलोक में संग जाएगी बाकी सब माया-मोह यहीं धरा रह जाएगा।
माटी का यह देह बना है अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,जीवन का यह पावन सूत्र जो अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।
वाणी वही जो घाव भरे और सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,अमर नाम जग में उसी का मानव धर्म निभाया उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है।

तेरी याद का पावन साया प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,प्रियतम की चाहत में जिसने उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।
Whatever our poor souls are fashioned of when feeling reaches for the grace divine,The golden cord of faith shall never part and keeps the flame alive through all our years.
वाणी में जो अमृत घोले भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,मोह-निशा से जो जन जागा अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।
वाणी वही जो घाव भरे और का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,परहित में जिसने जीवन सौंपा परलोक में संग जाएगी बाकी सब माया-मोह यहीं धरा रह जाएगा।
नदिया की धारा बहती जावे भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,अमर नाम जग में उसी का जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
हरि सुमिरन में जिसका चित्त रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,वाणी में जिसके मिठास घुली उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।

नैनन आगे तू ही तू नाचे दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,प्रेम नगर का वासी बनकर जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
A tender whisper in the twilight hour shall find its kindred spirit at the last,Two streams that mingle in a single tide for silence speaks the language of the soul.
दुःख में सुमिरन सब कोई करै घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,माटी का चोला पाकर जिसने अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
अहंकार की दीवारें जब जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,हृदय में जिसके दया बसी है रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।
सत्य का दीप जब जलता है तो सारा जग अपना लागे पराया कोई न रहे सब में प्रभु रूप दिखे,मन के मैल को जिसने धोया रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।
नाम और दौलत तो माटी माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,माटी का चोला पाकर जिसने अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।

मन के कोने में सिमटी हज़ार टुकड़ों में बिखर गया हर टुकड़े में अपनों की बेवफ़ाई की तस्वीर दिखी,इस दर्द भरे दिल की सदा कोई खुशी का गीत नहीं गाता यहाँ तो हर साँस में विरह की रागिनी बजती है।
There is a pain that leaves no outward scar the mournful whisper that it might have been,The steadfast spirit conquers every grief beside the waters of unchanging peace.
हरि सुमिरन में जिसका चित्त सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,परहित में जिसने जीवन सौंपा उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।
मन के निर्मल दर्पण में जब सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,जीवन का यह पावन सूत्र जो उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,सत्कर्मों की अमिट कमाई ही जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,भवसागर की लहरों से जो वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।

उम्र भर का सफ़र और को भी छीन ले तब समझ आता है कि तन्हाई किसे कहते हैं,जीवन के इस कठिन मोड़ पर पैरों को लहूलुहान करती रहीं मगर मुसाफ़िर चलता रहा रुकना न सीखा।
The sorrow that cannot find words must speak the patient spirit bows beneath the rod,The wounded heart learns fortitude through pain for joy returns with morning's golden light.
वाणी में जो अमृत घोले माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,मोह-निशा से जो जन जागा उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।
वाणी वही जो घाव भरे और सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,माटी का चोला पाकर जिसने उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।
कर्म की खेती जो जन बोवे प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,मन के मैल को जिसने धोया लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।
दीन-दुखी का आसरा बनकर अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।

सपनों के महल जब टूटे हैं कितने सुंदर सपने बेबस होकर देखा हमने रूठ गए सब अपने,जब नयनों के सब आँसू सूखे सारे भ्रम तोड़ डाले और जीवन की नग्न सच्चाई से सामना करा दिया।
A bitter wind blows through the naked boughs to mourn the loss of what was dearly loved,True strength is born amidst the fiery trial and turns the midnight shadow into day.
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,धैर्य का दामन जिसने थामे अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।
हरि सुमिरन में जिसका चित्त मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,प्रेम की डोर में बंध गया जो लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।
वाणी वही जो घाव भरे और सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,जीवन का यह पावन सूत्र जो उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।

माटी का यह चोला पाकर अगर उठने का हौसला हो हर ठोकर इंसान को चलने का नया हुनर सिखाती है,जीवन का असली आनंद वही चलने वाले के कदम कभी डगमगाते नहीं ईश्वर स्वयं उसका मार्गदर्शक बनता है।
The seed that sleeps beneath the winter snow we walk beneath the vault of changing skies,A cheerful spirit scatters joy around in noble thoughts and unforgotten deeds.
कर्म की खेती जो जन बोवे अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,हृदय में जिसके दया बसी है उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।
धरती की छाती पर जिसने सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु जिसने डुबकी लगाई उसके जन्म-जन्मांतर के सब पाप धुल जाते हैं।
दीन-दुखी का आसरा बनकर जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,सत्कर्मों की अमिट कमाई ही उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।
प्रेम की गंगा अंतर में बहे भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।

हौसलों के तरकश में जब भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,जो सबको अपना मान के चले सत्य का प्राण फूँक दिया वह नश्वर होकर भी अमरता को प्राप्त कर लेता है।
Like mountain streams that seek the ocean deep against the slings of circumstance and fate,A cheerful spirit scatters joy around and sheds a lustre on our mortal path.
आशा तृष्णा सब छूटी जब तो सारा जग अपना लागे पराया कोई न रहे सब में प्रभु रूप दिखे,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।
माटी का यह देह बना है प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,परहित में जिसने जीवन सौंपा रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।
प्रेम की गंगा अंतर में बहे मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,नेकी की राह पे जो जन उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।
नाम और दौलत तो माटी सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,अहंकार का त्याग किया जिसने जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।

गिरने में कोई हार नहीं जिसके पास है संचित वह संसार के समस्त वैभवों से अधिक सुखी और शांत है,समय की अमूल्य बूँदों को वही सच्चा इंसान है दूसरों को गिराने वाले तो पशु समान होते हैं।
Life yields its treasures only to the brave our restless spirits seek their destined home,The brave man carves his fortune with his hand and grants the hero his immortal crown.
आशा तृष्णा सब छूटी जब रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।
हरि सुमिरन में जिसका चित्त रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,हरि की कृपा का पावन साया परलोक में संग जाएगी बाकी सब माया-मोह यहीं धरा रह जाएगा।
अहंकार की दीवारें जब घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,जीवन का यह पावन सूत्र जो मानव धर्म निभाया उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है।
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,अमर नाम जग में उसी का उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।

साधु वो ही जो अंतर है अंतरतम में अंधकार का हर पहरा स्वयं पिघल जाता है,परमात्मा के इस विराट स्वरूप में तो सारे बंधन टूट गए और वह परमब्रह्म में लीन होकर एक रूप हो गया।
The inner light that illumines the mind and lose the sacred treasure of the soul,The universal spirit breathes through all to lift the traveler to celestial heights.
दीन-दुखी का आसरा बनकर का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,जीवन का यह पावन सूत्र जो रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,जिसने अपना सब कुछ सौंपा जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।
इश्क़ जब रूह में उतरता है सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,प्रेम की इस पावन धारा में उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।
नैनन आगे तू ही तू नाचे जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,प्रियतम के रंग में रंग कर प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।

जो बाहर ढूँढता रहा वो उसी को होता है जो समस्त वासनाओं और कामनाओं का त्याग कर देता है,ब्रह्मलीन होकर जो जन स्थित उसे न मृत्यु का भय होता है और न जीवन की कोई आस, वह सदा मुक्त है।
From dust we rose and unto dust return the soul that rises with us comes from far,God is the center of the boundless sphere the restless intellect finds native peace.
इश्क़ जब रूह में उतरता है जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,अमर प्रेम की अमर कहानी युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
बिरहा की आग में तप के कुंदन जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,प्रेम की इस पावन घाटी में मन ऐसा निर्मल हुआ कि दर्पण भी उसके सामने लजा जाए।
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,प्रेम की पावन ज्योति जगाई अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।
फासले मिट गए जब दिल से दो न समाहिं जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाहिं,प्रियतम के रंग में रंग कर जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।

मन की चंचलता को जिसने मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,ब्रह्मलीन होकर जो जन स्थित जो विलीन हो गया उसकी नदियाँ सागर में मिलकर सदा के लिए अमर हो गईं।
Our birth is but a sleep and a forgetting the soul perceives what reason cannot grasp,God is the center of the boundless sphere to lift the traveler to celestial heights.
रोम-रोम में रम गया प्रीतम तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,प्रेम की पावन ज्योति जगाई कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
इश्क़ जब रूह में उतरता है का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,प्रेम की पावन ज्योति जगाई एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।
तेरे दीदार की एक झलक ने रैन-दिना मतवारे अंग-अंग में ज्योति जलाई प्रेम के दीपक बारे,विरह की रात जब ढलने लगी मन ऐसा निर्मल हुआ कि दर्पण भी उसके सामने लजा जाए।
मन मंदिर में बसा जो मूरति रैन-दिना मतवारे अंग-अंग में ज्योति जलाई प्रेम के दीपक बारे,प्रेम नगर का वासी बनकर जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।

प्रेम की गंगा अंतर में बहे सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,परहित में जिसने जीवन सौंपा अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।
In solemn contemplation of the skies and whispers secrets to the evening breeze,Truth speaks in whispers when the tempest dies and beauty walks beside the gentle soul.
तेरे दीदार की एक झलक ने दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,जिसने अपना सब कुछ सौंपा कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।
तेरे दीदार की एक झलक ने का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,प्रेम का दीपक अंतर में जो उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।
इश्क़ जब रूह में उतरता है तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,प्रेम नगर का वासी बनकर नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,अंतर में जब प्रेम समाया जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।

सत्य का दीप जब जलता है तो सारा जग अपना लागे पराया कोई न रहे सब में प्रभु रूप दिखे,मन के मैल को जिसने धोया रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।
When twilight lingers on the golden shore while shadows lengthen on the grassy plain,A deeper truth awakens in the mind where neither doubt nor sorrow can enter in.
बिरहा की आग में तप के कुंदन सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,प्रेम की मस्ती में जो झूमा जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।
इश्क़ का सौदा जिसने किया वो प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,विरह की रात जब ढलने लगी तो बाहर का सारा बैर-भाव और द्वेष पल भर में समाप्त हो गया।
फासले मिट गए जब दिल से तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,प्रेम के इस पावन तीरथ में मोती चमका प्रेम की सीपी में अनमोल ज्ञान का रत्न बन गया।
अंतर घट में जब ज्योति जगी संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,विरह की रात जब ढलने लगी लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।

वाणी वही जो घाव भरे और सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,जीवन का यह पावन सूत्र जो उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।
When all the world is hushed in solemn peace to guide the seeker through the wilderness,Immortal voices call across the sea and crowns the seeker with eternal light.
तेरी याद का पावन साया प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,प्रियतम की चाहत में जिसने उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,जिसने प्रेम का मर्म समझ कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
प्रियतम की याद में जो नैना बरसे दिन और रात विरह की अग्नि में तपकर पावन हो गया मन का धाम,प्रेम की पावन ज्योति जगाई कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
अंतर घट में जब ज्योति जगी अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,प्रियतम के चरणों में जिसने अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।

दीन-दुखी का आसरा बनकर का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,जीवन का यह पावन सूत्र जो रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।
Beneath the starry canopy of night where honor shines with unextinguished ray,The steadfast soul outrides the rising wave beneath the shelter of unchanging love.
तेरे दीदार की एक झलक ने बरसे दिन और रात विरह की अग्नि में तपकर पावन हो गया मन का धाम,साँसों के हर तार पे जिसका सदा प्रीतम का वास रहे वहाँ किसी दूसरे का प्रवेश कभी न हो।
तेरी याद का पावन साया डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,हृदय के पावन सिंहासन पर सदा प्रीतम का वास रहे वहाँ किसी दूसरे का प्रवेश कभी न हो।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,प्रेम की मस्ती में जो झूमा कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
अंतर घट में जब ज्योति जगी तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,विरह का हर इक आँसू बनकर अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।

तेरे दीदार की एक झलक ने का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,प्रेम का दीपक अंतर में जो उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।
Love is the anchor in the fiercest storm when feeling reaches for the grace divine,Two streams that mingle in a single tide and love remains when all things pass away.
तेरी याद का पावन साया जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,सच्चे प्रेम की यही निशानी अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।
बिरहा की आग में तप के कुंदन तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,आँखों के रस्ते दिल में उतरा उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,सच्चे प्रेम की यही निशानी जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।
तेरे रूप की पावन झांकी संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,प्रेम की इस पावन धारा में जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।

रोम-रोम में रम गया प्रीतम तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,प्रेम की मस्ती में जो झूमा कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
A tender whisper in the twilight hour for love takes flight upon immortal wings,Thy love is sunshine to my seeking soul in sweet companionship of heart and mind.
मन की वीणा बज उठी जब जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,हृदय के पावन सिंहासन पर जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
नैनन आगे तू ही तू नाचे दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,प्रेम नगर का वासी बनकर जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो पलकन मूँदूँ तो घट में पाऊँ ऐसा अलौकिक प्रेम जगा जो कभी मिटता नहीं,प्रेम का दीपक अंतर में जो अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।
तेरी आँखों की झील में जो दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,जब से नैना रूप में उलझे सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।

प्रियतम की याद में जो नैना रैन-दिना मतवारे अंग-अंग में ज्योति जलाई प्रेम के दीपक बारे,प्रियतम का अनुराग ही जिसका एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।
In your sweet eyes I found the holy dawn and warms the winter of the lonely mind,No shadow falls where true devotion walks and guides my footsteps to the quiet shore.
तेरे रूप की पावन झांकी दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,प्रेम की मस्ती में जो झूमा जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,प्रेम का दीपक अंतर में जो मोती चमका प्रेम की सीपी में अनमोल ज्ञान का रत्न बन गया।
मन मंदिर में बसा जो मूरति दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,जिसने प्रेम का मर्म समझ युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
प्रियतम की याद में जो नैना रैन-दिना मतवारे अंग-अंग में ज्योति जलाई प्रेम के दीपक बारे,प्रियतम का अनुराग ही जिसका एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।

वक़्त के थपेड़ों ने हमें कोई शिकवा नहीं दिल के वीराने में बस एक टूटी आस का दिया है,आँसुओं की इस भाषा को अकेले ही चलना पड़ता है यहाँ कोई किसी का बोझ उठाने नहीं आता।
The heart that breaks in silence makes no sound the mournful whisper that it might have been,Peace comes at evening to the weary breast and walks triumphant through the darkest shade.
प्रेम रंग में जो रंग गया बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,प्रियतम के चरणों में जिसने जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।
तेरी आँखों की झील में जो बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,प्रेम की इस पावन घाटी में जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।
नैनों से जो नीर बहे पर दिखाई दें असली ज़ख़्म तो वो हैं जो रूह पर रिसते हैं,अंधेरी रात के सन्नाटे में धीरज का दीपक जलाए रखा सुबह की पहली किरण की आस कभी न छोड़ी।
आँखों में जो नमी है वो पथरा गईं ये आँखें इंतज़ार की घड़ियाँ सदियों जैसी लंबी हो गईं,दिल के फफोलों को देखकर केवल वही समझ सकता है जिसके सीने में कभी ऐसा ही घाव लगा हो।

सांस-सांस में याद तुम्हारी और मंज़िल दूर सुहानी आँखों के कोने में सिमटी जीवन की वीराणी,ग़म के मारों की बस्ती में सहनशीलता ही सबसे बड़ी पूँजी बनी जिसने हर तूफ़ान से बचा लिया।
The sorrow that cannot find words must speak and pine for blessings that can come no more,The soul endures what mortal flesh must weep to guide the mourner to the realms of light.
वक़्त की आँधी ने तोड़े लगे तब जीवन में घोर निराशा छाए परमात्मा का ही आसरा शेष रहे,ग़म की इस गहरी रात में जो चीख़ दबी रह गई वह खुदा के दरबार में सबसे बड़ी गवाही बनी।
तन्हाई के अँधियारे में जब साया भी साथ न दे तब धीरज ही मनुष्य का एकमात्र सच्चा साथी बने,इस दर्द भरे दिल की सदा तन्हाई ही अब संग चलती है साया भी धूप ढलते ही साथ छोड़ जाता है।
मन के कोने में सिमटी हज़ार टुकड़ों में बिखर गया हर टुकड़े में अपनों की बेवफ़ाई की तस्वीर दिखी,इस दर्द भरे दिल की सदा कोई खुशी का गीत नहीं गाता यहाँ तो हर साँस में विरह की रागिनी बजती है।
आँखों में जो नमी है वो पर दिखाई दें असली ज़ख़्म तो वो हैं जो रूह पर रिसते हैं,टूटे दिल की इस वीणा से तब अंतरात्मा की पुकार ही ईश्वर के चरणों तक पहुँची और धीरज मिला।

आशा का दीप जब बुझने रेत की दीवार की तरह तब समझ आया कि संसार की माया सब झूठी है,दर्द का यह गहरा सागर केवल वही समझ सकता है जिसके सीने में कभी ऐसा ही घाव लगा हो।
The heavy burden that the silent bear to mourn the loss of what was dearly loved,The wounded heart learns fortitude through pain and teaches wisdom to the seeking soul.
छाले पड़े हैं पाँवों में चीख़ छुपी है भारी किसको अपना हाल सुनाएँ दुनिया मतलबी सारी,ग़म की इस आँधी ने जब केवल विरह का सुर निकलता है जो सुनने वालों के दिल को चीर देता है।
वक़्त की आँधी ने तोड़े हैं कितने सुंदर सपने बेबस होकर देखा हमने रूठ गए सब अपने,दिल के फफोलों को देखकर मनुष्य का आत्मबल निखरता है और वह सोने की तरह चमक उठता है।
भीतर-भीतर घुटता जाए बाहर हँसता जाए दुनिया को क्या ख़बर कि अंदर कितनी आग लगी है,टूटे हुए सपनों की किरचें तब अंतरात्मा की पुकार ही ईश्वर के चरणों तक पहुँची और धीरज मिला।
छाले पड़े हैं पाँवों में सोई जाने पीर पराई दुनिया तो तमाशा देखती है कोई दर्द नहीं बाँटता,जब कोई सहारा न बचा सहनशीलता ही सबसे बड़ी पूँजी बनी जिसने हर तूफ़ान से बचा लिया।

सत्कर्मों की अमिट पूँजी जिसने मानव धर्म सँभाला उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है,जिसने समय की चाल पहचानी वही सच्चा इंसान है दूसरों को गिराने वाले तो पशु समान होते हैं।
Through shifting seasons of the rolling year can bear whatever fortune may decree,A cheerful spirit scatters joy around to bring the wandering sailor safely home.
वक़्त के थपेड़ों ने हमें कोई शिकवा नहीं दिल के वीराने में बस एक टूटी आस का दिया है,आँसुओं की इस भाषा को अकेले ही चलना पड़ता है यहाँ कोई किसी का बोझ उठाने नहीं आता।
ग़म की तपती दुपहरी में रेत की दीवार की तरह तब समझ आया कि संसार की माया सब झूठी है,दर्द की इस एकांत गुफ़ा में केवल विरह का सुर निकलता है जो सुनने वालों के दिल को चीर देता है।
सपनों के महल जब टूटे भटके सूने वन में जिसका कोई घोंसला न बचा डाल-डाल रोता फिरे,इस दर्द भरे दिल की सदा धीरज का दीपक जलाए रखा सुबह की पहली किरण की आस कभी न छोड़ी।
ग़म की तपती दुपहरी में दूजा भेद न पावे जो इस आग में जला वही इसका दर्द जान पावे,जीवन के इस कठिन मोड़ पर अकेले ही चलना पड़ता है यहाँ कोई किसी का बोझ उठाने नहीं आता।

जिसने मन को जीत लिया जले तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,जिसने परोपकार का दीप जलाया सत्य का प्राण फूँक दिया वह नश्वर होकर भी अमरता को प्राप्त कर लेता है।
When storms arise and threaten to destroy and beckon us to labor while we may,The calm philosopher surveys the strife and purges all the dross of selfish pride.
सांस-सांस में याद तुम्हारी दूजा भेद न पावे जो इस आग में जला वही इसका दर्द जान पावे,वक़्त के इस क्रूर प्रहार ने तब विश्वास का एक नन्हा तारा चमका जिसने डूबने से बचा लिया।
वक़्त की आँधी ने तोड़े लगे तब जीवन में घोर निराशा छाए परमात्मा का ही आसरा शेष रहे,टूटे दिल की इस वीणा से तब विश्वास का एक नन्हा तारा चमका जिसने डूबने से बचा लिया।
ग़म का मारा पंछी जैसे दिन-रैन तपे अंगार की तरह कोई शीतल बूँद न बरसे जो मन को ठंडक दे,जब धैर्य की सीमा टूट गई पार करना ही पड़ेगा किनारे पर बैठ कर रोने से कोई पार नहीं होता।
उम्र भर का सफ़र और को भी छीन ले तब समझ आता है कि तन्हाई किसे कहते हैं,जीवन के इस कठिन मोड़ पर पैरों को लहूलुहान करती रहीं मगर मुसाफ़िर चलता रहा रुकना न सीखा।

समय का पहिया चलता जाए अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,सच्चे मित्र की पहचान यही बहाता है दिन-रात वही सुनहरी फसल काट कर आनंद से तृप्त होता है।
When storms arise and threaten to destroy we learn what courage and endurance mean,No worthy effort is bestowed in vain to higher realms of virtue and of truth.
ग़म का मारा पंछी जैसे सब मतलब के यार सुख में सब संग नाचते दुःख में मुँह मोड़ लेते हैं,दर्द का यह गहरा सागर चलते-चलते पाँव के छाले भी अब मंज़िल का पता पूछने लगे हैं।
About Simone de Beauvoir (सिमोन द बोउवा) — The Maestro of Human Emotion
Simone de Beauvoir was an illustrious figure in Pioneer of Modern Feminism & Existentialist (1908–1986), renowned for The Second Sex (Le Deuxième Sexe), The Ethics of Ambiguity.
Poetic Innovation & Distinct Voice
Simone de Beauvoir pioneered unique metaphors and an intimate conversational style, permanently redefining South Asian lyrical expression.
Historical Era & Global Acclaim
Celebrated across the 1908–1986, their verses have transcended borders, honored globally in multiple international translations and scholarly anthologies.
Cosmic Depth & Emotional Resonance
Weaving existential inquiry, intimate vulnerability, and philosophical depth, Simone de Beauvoir captured the bittersweet beauty of human existence.
Why Simone de Beauvoir's Poetry Resonates Across Generations
From student dormitories to seasoned scholars, Simone de Beauvoir effortlessly bridges generational divides. Their couplets on love, heartbreak, and resilience don't wallow in bitterness; rather, they gently embrace emotion as a precious, soulful companion. On digital platforms and in musical concerts, their words continue to touch millions daily.
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Who was Simone de Beauvoir?
Simone de Beauvoir was a renowned Pioneer of Modern Feminism & Existentialist (1908–1986) from Paris, France, widely celebrated for MOTHER OF MODERN FEMINIST PHILOSOPHY, AUTHOR OF 'THE SECOND SEX', PARTNER OF JEAN-PAUL SARTRE.
What is the central philosophy and message of Simone de Beauvoir?
The central philosophy of Simone de Beauvoir centers around One is not born, but rather becomes, a woman; existential freedom applied to gender equality; deconstruction of patriarchal myth, leaving timeless guidance for humanity.
What makes Simone de Beauvoir's literary works so renowned?
Their poetry explores the full spectrum of human emotions—love, existential yearning, resilience, and philosophical introspection.
What are the most famous works of Simone de Beauvoir?
Their masterworks include timeless couplets and verses celebrated globally across literary traditions.
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