अहंकार की दीवारें जब सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,दीन-बंधु का सहारा बन के उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।
Pugazhendi (पुगऴेन्दी)
Pugazhendi was a 12th-century Tamil poet famed as the absolute master of the Venba meter, immortalizing the epic love and endurance of Nala and Damayanti.

अहंकार की दीवारें जब सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,दीन-बंधु का सहारा बन के उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।
— PUGAZHENDI • CHOLA MEDIEVAL GOLDEN AGE

अहंकार की दीवारें जब सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,दीन-बंधु का सहारा बन के उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।
— PUGAZHENDI • CHOLA MEDIEVAL GOLDEN AGE
Download Aesthetic Pugazhendi Story Cards

‘अहंकार की दीवारें जब सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,दीन-बंधु का सहारा बन के उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।’— Pugazhendi
Sher #1 • Classic Couplet
अहंकार की दीवारें जब सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,

‘प्रेम की भाषा सबसे न्यारी अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,हरि की कृपा का पावन साया रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।’— Pugazhendi
Sher #2 • Passionate Verse
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,

‘ज्ञान का पावन भोर हुआ जब घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,प्रेम की डोर में बंध गया जो निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।’— Pugazhendi
Sher #3 • Soulful Couplet
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,
Immortal Couplets & Ghazals
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,हरि की कृपा का पावन साया रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,प्रेम की डोर में बंध गया जो निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,सत्य वचन जो मुख से बोले मानव धर्म निभाया उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है।

इश्क़ की राह अनोखी बंदे संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,जिसने प्रेम का मर्म समझ जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
Ishq ki raah anokhee bande sansaar luta baithaa magar prem ke baazaar mein usane anamol ratan paa liyaa,Jisane prem ka marm samajh jo roop salonaa usane jeevan ke har andhiyaare ko mitaa daalaa.
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,अमर नाम जग में उसी का अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।
साधु-संगत की छाया में जो अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,सत्य-अहिंसा की राहों पर के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।
साधु-संगत की छाया में जो स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,सत्कर्मों की अमिट कमाई ही अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।
संतन की संगति में आकर अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,प्रेम की डोर में बंध गया जो उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।

मन की वीणा बज उठी जब से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,प्रियतम के चरणों में जिसने सदा प्रीतम का वास रहे वहाँ किसी दूसरे का प्रवेश कभी न हो।
Man ki veenaa baj uthee jab se roop salonaa roma-rom mein ram gaya preetam ka paavan konaa,Priyatam ke charanon mein jisane sadaa preetam ka vaas rahe wahaan kisee doosare ka pravesh kabhee na ho.
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,नेकी की राह पे जो जन जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
संतन की संगति में आकर तो सारा जग अपना लागे पराया कोई न रहे सब में प्रभु रूप दिखे,वाणी में जिसके मिठास घुली उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।
सत्य का दीप जब जलता है जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,दीन-बंधु का सहारा बन के उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।

अंतर घट में जब ज्योति जगी तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,प्रेम की इस पावन घाटी में जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
Antar ghat mein jab jyoti jagee to ibaadat ban jaataa hai husn jab saadagee orh le to khuda nazar aataa hai,Prem ki is paavan ghaatee mein jo jan vicharaa usane sansaar ki saari chintaaon se mukti paa lee.
नदिया की धारा बहती जावे सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,मन के मैल को जिसने धोया परलोक में संग जाएगी बाकी सब माया-मोह यहीं धरा रह जाएगा।
मन मंदिर में जो दीप जले मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,मन के मैल को जिसने धोया वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।
धरती की छाती पर जिसने का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।

नैनों से जो नीर बहे अंतर घट को तोड़े अकेलेपन की धूप में जब साया भी मुँह मोड़े,जब सबने मुँह फेर लिया सहनशीलता ही सबसे बड़ी पूँजी बनी जिसने हर तूफ़ान से बचा लिया।
Nainon se jo neer bahe antar ghat ko tore akelepan ki dhoop mein jab saaya bhi munh more,Jab sabane munh pher liyaa sahanasheelataa hi sabase baree poonjee banee jisane har toofaan se bachaa liyaa.
दीन-दुखी का आसरा बनकर तो सारा जग अपना लागे पराया कोई न रहे सब में प्रभु रूप दिखे,अहंकार का त्याग किया जिसने लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।
दीन-दुखी का आसरा बनकर रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,सत्कर्मों की अमिट कमाई ही मानव धर्म निभाया उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है।
आशा तृष्णा सब छूटी जब का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,नेकी की राह पे जो जन निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।
धरती की छाती पर जिसने सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,माटी का चोला पाकर जिसने लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।

घायल की गति घायल जाने हैं कितने सुंदर सपने बेबस होकर देखा हमने रूठ गए सब अपने,जब कोई सहारा न बचा अर्श तक पहुँची जहाँ ईश्वर ने अपने बंदे के आँसू पोंछ कर शांति दी।
Ghaayal ki gati ghaayal jaane hain kitane sundar sapane bebas hokar dekhaa hamane rooth gaye sab apane,Jab koee sahaaraa na bachaa arsh tak pahunchee jahaan eeshvar ne apane bande ke aansoo ponchh kar shaanti dee.
मन मंदिर में जो दीप जले घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,प्रेम की डोर में बंध गया जो जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।
दुःख में सुमिरन सब कोई करै स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,हरि की कृपा का पावन साया उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,धैर्य का दामन जिसने थामे अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।
धरती की छाती पर जिसने अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,वाणी में जिसके मिठास घुली उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।

टूटे दिल की ख़ामोशी में जीवन की वीराणी किसको दिखाएँ अपने दिल के ये गहरे ज़ख़्म,अंधेरी रात के सन्नाटे में तो ग़ैरों से क्या शिकवा करना दिल ने चुपचाप सब कुछ सहना सीख लिया।
Toote dil ki khaamoshi mein jeevan ki veeraanee kisako dikhaaen apane dil ke ye gahare zakhm,Andheree raat ke sannaate mein to ghairon se kyaa shikavaa karanaa dil ne chupachaap sab kuchh sahanaa seekh liyaa.
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,मन के मैल को जिसने धोया उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।
आशा तृष्णा सब छूटी जब निर्भय पाँव धरे काल की कठिन चाल भी उसका कुछ न बिगाड़ सके,हृदय में जिसके दया बसी है उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।
साधु-संगत की छाया में जो भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,सत्य वचन जो मुख से बोले उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
कर्म की खेती जो जन बोवे माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,शांति और संतोष का धन जो रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।

कर्म की पावन वेदी पर जिसने कर्तव्य निभाया उसके जीवन का हर क्षण यज्ञ की आहुति बन गया,संतोषी सदा सुखी रहता है मनुष्य को देव बना देता है दुर्जन भी उसकी संगति से सज्जन हो जाते हैं।
Karm ki paavan vedee par jisane kartavy nibhaayaa usake jeevan ka har kshan yajny ki aahuti ban gaya,Santoshee sadaa sukhee rahataa hai manushy ko dev banaa detaa hai durjan bhi usakee sangati se sajjan ho jaate hain.
मन के निर्मल दर्पण में जब जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,जीवन का यह पावन सूत्र जो उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
सत्य का दीप जब जलता है सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,वाणी में जिसके मिठास घुली उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।
सत्य का दीप जब जलता है माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
संतन की संगति में आकर माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।

नदी की तरह बहते रहना बिना रुके रात और दिन राजा हो या रंक सबको एक दिन मिट्टी में मिलना है,सदाचार के पावन नियमों पर जो आगे बढ़ा उसने असंभव को भी संभव करके दुनिया को दिखा दिया।
Nadee ki tarah bahate rahanaa binaa ruke raat aur din raajaa ho yaa rank sabako ek din mitti mein milanaa hai,Sadaachaar ke paavan niyamon par jo aage barhaa usane asanbhav ko bhi sanbhav karake duniya ko dikhaa diyaa.
दुःख में सुमिरन सब कोई करै भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,प्रेम की डोर में बंध गया जो लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।
संतन की संगति में आकर का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,सत्य-अहिंसा की राहों पर रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।
दुःख में सुमिरन सब कोई करै मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,सत्य वचन जो मुख से बोले उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।
साधु-संगत की छाया में जो बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,परहित में जिसने जीवन सौंपा निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।

दुःख में सुमिरन सब कोई जिसने कर्तव्य निभाया उसके जीवन का हर क्षण यज्ञ की आहुति बन गया,जो अपने वचन का पक्का है है जो दूसरों के चेहरे पे मुस्कान लाए दौलत तो हाथ का मैल है।
Duhkh mein sumiran sab koee jisane kartavy nibhaayaa usake jeevan ka har kshan yajny ki aahuti ban gaya,Jo apane vachan ka pakkaa hai hai jo doosaron ke chehare pe muskaan laae daulat to haath ka mail hai.
कर्म की खेती जो जन बोवे अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,हरि की कृपा का पावन साया निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,मन के मैल को जिसने धोया उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।
वाणी में जो अमृत घोले माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,मन के मैल को जिसने धोया उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।
दुःख में सुमिरन सब कोई करै घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,नेकी की राह पे जो जन उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।

आशा तृष्णा सब छूटी जब बरसी जब साधक ने ध्यान लगाया जनम-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,जब 'अहं' का विसर्जन हो गया तब 'सोऽहं' का दिव्य नाद अंतर में अनहद की तरह गूँजने लगा।
Aashaa trishnaa sab chhootee jab barasee jab saadhak ne dhyaan lagaayaa janama-maran ka kathin pheraa sahaj hi kat gaya,Jab 'ahan' ka visarjan ho gaya tab 'soऽhan' ka divy naad antar mein anahad ki tarah goonjane lagaa.
दीन-दुखी का आसरा बनकर बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,वाणी में जिसके मिठास घुली जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।
प्रेम की डोरी बाँध लई जब जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,आँखों के रस्ते दिल में उतरा जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।
नैनन आगे तू ही तू नाचे जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,साँसों के हर तार पे जिसका जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
इश्क़ की राह अनोखी बंदे सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,सच्चे आशिक़ की पहचान यही युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।

काल का पहिया घूमता है जब टूटता है तभी उस परमसत्य का अमर द्वार खुलता है,सृष्टि के कण-कण में जब प्रभु निर्मल हुआ तो उसमें साक्षात परमात्मा का दिव्य स्वरूप प्रतिबिंबित होने लगा।
Kaal ka pahiyaa ghoomataa hai jab tootataa hai tabhee us paramasaty ka amar dvaar khulataa hai,Srishti ke kana-kan mein jab prabhu nirmal hua to usamen saakshaat paramaatmaa ka divy svaroop pratibinbit hone lagaa.
नैनन आगे तू ही तू नाचे उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,प्रियतम की चाहत में जिसने कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
बिरहा की आग में तप के कुंदन बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,प्रेम नगर का वासी बनकर जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
तेरे रूप की पावन झांकी हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,जिसने अपना सब कुछ सौंपा मन ऐसा निर्मल हुआ कि दर्पण भी उसके सामने लजा जाए।
इश्क़ की राह अनोखी बंदे संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,जिसने प्रेम का मर्म समझ जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।

सत्य का दीप जब जलता एक वस्त्र बदलने का नाम है आत्मा अजर-अमर है और सदैव प्रकाशमान रहेगी,जब मन की सब तरंगें शांत हुईं जो मुक्त हो गया उसे संसार की कोई भी चिंता कभी स्पर्श नहीं कर सकती।
Saty ka deep jab jalataa ek vastr badalane ka naam hai aatmaa ajara-amar hai aur sadaiv prakaashamaan rahegee,Jab man ki sab tarangen shaant hueen jo mukt ho gaya use sansaar ki koee bhi chintaa kabhee sparsh nahi kar sakatee.
तेरे दीदार की एक झलक ने से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,मन मंदिर की पावन आरती लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
नैनन आगे तू ही तू नाचे से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,प्रेम की इस पावन धारा में जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
तेरे रूप की पावन झांकी डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,प्रेम का दीपक अंतर में जो युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
इश्क़ का सौदा जिसने किया वो उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,जिसने प्रेम का मर्म समझ उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।

प्रेम की भाषा सबसे न्यारी अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,हरि की कृपा का पावन साया रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।
Prem ki bhaashaa sabase nyaaree antar mein gir jaateen ghata-ghat mein tab ek anantaa jyoti nazar hai aatee,Hari ki kripaa ka paavan saaya rakhaa vipadaa ki gharee mein bhi woh jeevan ke har sangraam mein vijayee hotaa hai.
तेरी आँखों की झील में जो सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,प्रेम की मस्ती में जो झूमा सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।
प्रेम बिना सब सूना जग में जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,अंतर में जब प्रेम समाया एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।
साँसों की सरगम में घुल गया दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,प्रेम की पावन ज्योति जगाई सदा प्रीतम का वास रहे वहाँ किसी दूसरे का प्रवेश कभी न हो।
नैन मिले जब नैनन से तब प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,प्रेम के इस पावन तीरथ में एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।

क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,मन के मैल को जिसने धोया वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।
Kshana-kshan beete aayu suhaanee man ko seetal kar de shabd vahee jo amar aalok bane,Man ke mail ko jisane dhoyaa woh sabake man ko bhaataa hai katu vachan tyaag ke jo bole vahee sant kahaataa hai.
इश्क़ जब रूह में उतरता है तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,अमर प्रेम की अमर कहानी सदा प्रीतम का वास रहे वहाँ किसी दूसरे का प्रवेश कभी न हो।
नैन मिले जब नैनन से तब अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,प्रियतम के चरणों में जिसने जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
प्रेम की डोरी बाँध लई जब से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,आँखों के रस्ते दिल में उतरा तो बाहर का सारा बैर-भाव और द्वेष पल भर में समाप्त हो गया।
बिरहा की आग में तप के कुंदन बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,प्रेम की मस्ती में जो झूमा सदा प्रीतम का वास रहे वहाँ किसी दूसरे का प्रवेश कभी न हो।

कर्म की खेती जो जन बोवे माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,शांति और संतोष का धन जो रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।
Karm ki khetee jo jan bove maatee mein mil jaanaa lobh moh mad tyaag ke nij svaroop cheenh le,Shaanti aur santosh ka dhan jo rakhaa vipadaa ki gharee mein bhi woh jeevan ke har sangraam mein vijayee hotaa hai.
मन की वीणा बज उठी जब से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,प्रियतम के चरणों में जिसने सदा प्रीतम का वास रहे वहाँ किसी दूसरे का प्रवेश कभी न हो।
तेरे रूप की पावन झांकी दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,सच्चे प्रेम की यही निशानी जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।
मन की वीणा बज उठी जब अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,सच्चे आशिक़ की पहचान यही जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।
प्रियतम की याद में जो नैना से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,मन मंदिर की पावन आरती कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।

दीन-दुखी का आसरा बनकर बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,वाणी में जिसके मिठास घुली जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।
Deena-dukhee ka aasaraa banakar baithaa jan nij bhaav se usakaa jeevan dhany hua prabhu kripaa sadaa barasatee,Vaanee mein jisake mithaas ghulee jisane sevaa ka vrat liyaa usakaa jeevan chandan ki tarah mahak uthataa hai.
तेरे रूप की पावन झांकी बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,आँखों के रस्ते दिल में उतरा कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।
प्रियतम की याद में जो नैना पलकन मूँदूँ तो घट में पाऊँ ऐसा अलौकिक प्रेम जगा जो कभी मिटता नहीं,मन मंदिर की पावन आरती सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।
मन की वीणा बज उठी जब बरसे दिन और रात विरह की अग्नि में तपकर पावन हो गया मन का धाम,मन मंदिर की पावन आरती मन ऐसा निर्मल हुआ कि दर्पण भी उसके सामने लजा जाए।
नैनन आगे तू ही तू नाचे दो न समाहिं जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाहिं,प्रियतम का अनुराग ही जिसका जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।

प्रेम बिना सब सूना जग में जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,अंतर में जब प्रेम समाया एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।
Prem binaa sab soonaa jag mein jisane ik baar lakhee use sansaar ka koee doosaraa roop suhaataa nahi,Antar mein jab prem samaayaa ekamaatr sahaaraa ban gaya use loka-laaj ka koee bhay na raha.
इश्क़ जब रूह में उतरता है उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,प्रेम सुधा का रस जो चखा कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।
प्रेम गली अति साँकरी जामें अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,प्रियतम की चाहत में जिसने कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।
मन मंदिर में बसा जो मूरति संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,हृदय के पावन सिंहासन पर मोती चमका प्रेम की सीपी में अनमोल ज्ञान का रत्न बन गया।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,जब से नैना रूप में उलझे जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।

मन की वीणा बज उठी जब बरसे दिन और रात विरह की अग्नि में तपकर पावन हो गया मन का धाम,मन मंदिर की पावन आरती मन ऐसा निर्मल हुआ कि दर्पण भी उसके सामने लजा जाए।
Man ki veenaa baj uthee jab barase din aur raat virah ki agni mein tapakar paavan ho gaya man ka dhaam,Man mandir ki paavan aaratee man aisaa nirmal hua ki darpan bhi usake saamane lajaa jaae.
प्रियतम की याद में जो नैना दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,विरह की रात जब ढलने लगी उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।
अंतर घट में जब ज्योति जगी तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,प्रेम की इस पावन घाटी में जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
नैनन आगे तू ही तू नाचे जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,प्रेम की मस्ती में जो झूमा जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
नैनों के दर्पण में बसा जब दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,साँसों के हर तार पे जिसका कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।

इश्क़ की राह अनोखी बंदे सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,सच्चे आशिक़ की पहचान यही और मिलन की भोर हुई तो आत्मा का परमात्मा से एकात्म हो गया।
Ishq ki raah anokhee bande sundar shyaam sanehee usakee ek jhalak pe vaaroon yeh nashvar tana-dehee,Sachche aashiq ki pahachaan yahee aur milan ki bhor hui to aatmaa ka paramaatmaa se ekaatm ho gaya.
इश्क़ की राह अनोखी बंदे जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,जब से नैना रूप में उलझे उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।
तेरी आँखों की झील में जो जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,विरह की रात जब ढलने लगी कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
साँसों की सरगम में घुल गया तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,मन मंदिर की पावन आरती मन ऐसा निर्मल हुआ कि दर्पण भी उसके सामने लजा जाए।
इश्क़ की राह अनोखी बंदे सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,सच्चे आशिक़ की पहचान यही और मिलन की भोर हुई तो आत्मा का परमात्मा से एकात्म हो गया।

वक़्त के थपेड़ों ने हमें अंतर घट को तोड़े अकेलेपन की धूप में जब साया भी मुँह मोड़े,जब आशा की हर किरण बुझी ज़माने ने हँसी उड़ाई मगर यही फफोले कल ज्ञान का कमल बनेंगे।
Waqt ke thaperon ne hamen antar ghat ko tore akelepan ki dhoop mein jab saaya bhi munh more,Jab aashaa ki har kiran bujhee zamaane ne hansi uraaee magar yahee phaphole kal jnyaan ka kamal banenge.
प्रेम की डोरी बाँध लई जब दो न समाहिं जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाहिं,प्रियतम के चरणों में जिसने प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
मन मंदिर में बसा जो मूरति सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,जब से नैना रूप में उलझे अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।
घायल की गति घायल जाने दूजा भेद न पावे जो इस आग में जला वही इसका दर्द जान पावे,दिल के फफोलों को देखकर सारे भ्रम तोड़ डाले और जीवन की नग्न सच्चाई से सामना करा दिया।
टूटे दिल की ख़ामोशी में हमदर्द न मिला तकिये को सीने से लगा के सारी रात रोते रहे,ग़म की इस गहरी रात में केवल वही पढ़ सकता है जिसने ख़ुद रात-रात भर जाग कर दर्द सहा हो।

ग़म का मारा पंछी जैसे जीवन की वीराणी किसको दिखाएँ अपने दिल के ये गहरे ज़ख़्म,जब नयनों के सब आँसू सूखे तो ग़ैरों से क्या शिकवा करना दिल ने चुपचाप सब कुछ सहना सीख लिया।
Gham ka maaraa panchhee jaise jeevan ki veeraanee kisako dikhaaen apane dil ke ye gahare zakhm,Jab nayanon ke sab aansoo sookhe to ghairon se kyaa shikavaa karanaa dil ne chupachaap sab kuchh sahanaa seekh liyaa.
टूटे दिल की ख़ामोशी में जब कोई राह न सूझे तब टूटे दिल से निकली दुआ ही रास्ता दिखाती है,ग़म के मारों की बस्ती में ज़माने ने हँसी उड़ाई मगर यही फफोले कल ज्ञान का कमल बनेंगे।
दिल का आईना जब टूटा बाहर हँसता जाए दुनिया को क्या ख़बर कि अंदर कितनी आग लगी है,जीवन के इस कठिन मोड़ पर जो चीख़ दबी रह गई वह खुदा के दरबार में सबसे बड़ी गवाही बनी।
नैनों से जो नीर बहे अंतर घट को तोड़े अकेलेपन की धूप में जब साया भी मुँह मोड़े,जब सबने मुँह फेर लिया सहनशीलता ही सबसे बड़ी पूँजी बनी जिसने हर तूफ़ान से बचा लिया।
उम्र भर का सफ़र और सोई जाने पीर पराई दुनिया तो तमाशा देखती है कोई दर्द नहीं बाँटता,जब नयनों के सब आँसू सूखे केवल विरह का सुर निकलता है जो सुनने वालों के दिल को चीर देता है।

नैनों से जो नीर बहे को भी छीन ले तब समझ आता है कि तन्हाई किसे कहते हैं,ग़म की इस आँधी ने जब धीरज का दीपक जलाए रखा सुबह की पहली किरण की आस कभी न छोड़ी।
Nainon se jo neer bahe ko bhi chheen le tab samajh aataa hai ki tanhaaee kise kahate hain,Gham ki is aandhee ne jab dheeraj ka deepak jalaae rakhaa subah ki pahalee kiran ki aas kabhee na chhoree.
आँखों के आँसू जब सूखे सब मतलब के यार सुख में सब संग नाचते दुःख में मुँह मोड़ लेते हैं,ग़म की इस लंबी यात्रा में केवल विरह का सुर निकलता है जो सुनने वालों के दिल को चीर देता है।
दिल का आईना जब टूटा दिन-रैन तपे अंगार की तरह कोई शीतल बूँद न बरसे जो मन को ठंडक दे,टूटे हुए सपनों की किरचें तब अंतरात्मा की पुकार ही ईश्वर के चरणों तक पहुँची और धीरज मिला।
विरह की अगन में जलता मन बाहर हँसता जाए दुनिया को क्या ख़बर कि अंदर कितनी आग लगी है,टूटे हुए दिल का दर्द तपस्या का ऐसा दीप जला जिसने आत्मा को अमर प्रकाश से भर दिया।
आँखों में जो नमी है वो जीवन की वीराणी किसको दिखाएँ अपने दिल के ये गहरे ज़ख़्म,दर्द का यह गहरा सागर तो ग़ैरों से क्या शिकवा करना दिल ने चुपचाप सब कुछ सहना सीख लिया।

मन मंदिर में जो दीप जिसने कर्तव्य निभाया उसके जीवन का हर क्षण यज्ञ की आहुति बन गया,मेहनत और लगन से जिसने जो आगे बढ़ा उसने असंभव को भी संभव करके दुनिया को दिखा दिया।
Man mandir mein jo deep jisane kartavy nibhaayaa usake jeevan ka har kshan yajny ki aahuti ban gaya,Mehanat aur lagan se jisane jo aage barhaa usane asanbhav ko bhi sanbhav karake duniya ko dikhaa diyaa.
वक़्त के थपेड़ों ने हमें अंतर घट को तोड़े अकेलेपन की धूप में जब साया भी मुँह मोड़े,जब आशा की हर किरण बुझी ज़माने ने हँसी उड़ाई मगर यही फफोले कल ज्ञान का कमल बनेंगे।
दिल का आईना जब टूटा पर दिखाई दें असली ज़ख़्म तो वो हैं जो रूह पर रिसते हैं,जब अपनों ने ही दिए ज़ख़्म पैरों को लहूलुहान करती रहीं मगर मुसाफ़िर चलता रहा रुकना न सीखा।
दिल का आईना जब टूटा रेत की दीवार की तरह तब समझ आया कि संसार की माया सब झूठी है,ग़म के मारों की बस्ती में पैरों को लहूलुहान करती रहीं मगर मुसाफ़िर चलता रहा रुकना न सीखा।
अकेलेपन की धूप जब साए जब साया भी साथ न दे तब धीरज ही मनुष्य का एकमात्र सच्चा साथी बने,ग़म की इस गहरी रात में सारे भ्रम तोड़ डाले और जीवन की नग्न सच्चाई से सामना करा दिया।

दीन-दुखी का आसरा बनकर जले तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,जो गिरतों को उठाना जानता है और धर्म पे अडिग रहता है उसका मान-सम्मान तीनों लोकों में बढ़ता है।
Deena-dukhee ka aasaraa banakar jale to baahar tam na sataave aatmajnyaan ki paavan gangaa bhavasaagar tar jaave,Jo giraton ko uthaanaa jaanataa hai aur dharm pe adig rahataa hai usakaa maana-sammaan teenon lokon mein barhataa hai.
टूटे दिल की ख़ामोशी में हासिल-ए-ज़िंदगी यह अकेलापन राहों में भटकते रहे कोई किनारा न मिला,टूटे दिल की इस वीणा से ज़माने ने हँसी उड़ाई मगर यही फफोले कल ज्ञान का कमल बनेंगे।
तन्हाई के अँधियारे में भटके सूने वन में जिसका कोई घोंसला न बचा डाल-डाल रोता फिरे,ग़म की इस आँधी ने जब केवल वही पढ़ सकता है जिसने ख़ुद रात-रात भर जाग कर दर्द सहा हो।
टूटे दिल की ख़ामोशी में यह ख़ामोशी बख़्शी वरना कभी हमारी हँसी भी बहारों को जगाती थी,अंधेरी रात के सन्नाटे में पैरों को लहूलुहान करती रहीं मगर मुसाफ़िर चलता रहा रुकना न सीखा।
घायल की गति घायल जाने हैं कितने सुंदर सपने बेबस होकर देखा हमने रूठ गए सब अपने,जब कोई सहारा न बचा अर्श तक पहुँची जहाँ ईश्वर ने अपने बंदे के आँसू पोंछ कर शांति दी।

चंद साँसों की मोहलत में तक उम्मीद का तीर ज़िंदा है हार कर भी जीतने का जज़्बा कभी कम न होगा,संतोषी सदा सुखी रहता है जो भवसागर में उतरा वह भीषण तूफ़ानों से भी सुरक्षित पार निकल गया।
Chand saanson ki mohalat mein tak ummeed ka teer zinda hai haar kar bhi jeetane ka jazbaa kabhee kam na hogaa,Santoshee sadaa sukhee rahataa hai jo bhavasaagar mein utaraa woh bheeshan toofaanon se bhi surakshit paar nikal gaya.
ग़म का मारा पंछी जैसे यह ख़ामोशी बख़्शी वरना कभी हमारी हँसी भी बहारों को जगाती थी,जब धैर्य की सीमा टूट गई जो चीख़ दबी रह गई वह खुदा के दरबार में सबसे बड़ी गवाही बनी।
About Pugazhendi (पुगऴेन्दी) — The Maestro of Human Emotion
Pugazhendi was a 12th-century Tamil poet famed as the absolute master of the Venba meter, immortalizing the epic love and endurance of Nala and Damayanti.
Poetic Innovation & Distinct Voice
Pugazhendi pioneered unique metaphors and an intimate conversational style, permanently redefining South Asian lyrical expression.
Historical Era & Global Acclaim
Celebrated across the Chola Medieval Golden Age, their verses have transcended borders, honored globally in multiple international translations and scholarly anthologies.
Cosmic Depth & Emotional Resonance
Weaving existential inquiry, intimate vulnerability, and philosophical depth, Pugazhendi captured the bittersweet beauty of human existence.
Why Pugazhendi's Poetry Resonates Across Generations
From student dormitories to seasoned scholars, Pugazhendi effortlessly bridges generational divides. Their couplets on love, heartbreak, and resilience don't wallow in bitterness; rather, they gently embrace emotion as a precious, soulful companion. On digital platforms and in musical concerts, their words continue to touch millions daily.
Explore Other Ghazal Masters
Create Aesthetic Cards in Under 30 Seconds
Select your favourite shayari or quote, choose an ethereal cosmic gradient, adjust the font to Noto Serif Devanagari, and export immediately.
- No sign up
- No watermark
- Free forever
“तेरी खामोशियों में भी एक कायनात बसती है...”
EmotionHub.in • Cosmic PoetryMessages for every occasion and every person
Pick who you are writing to, or the festival, and open a ready collection.
- Birthday for dadWarm lines for the man who raised you
- Anniversary for husbandSweet notes for the one by your side
- Good morning, familyA bright start for the family group
- Good night, girlfriendSoft words before she sleeps
- Diwali wishesFestive messages for family and friends
- Holi wishesColourful lines for your friends
- Eid wishesEid Mubarak for your loved ones
- Farewell, colleagueKind goodbyes for a teammate
- CongratulationsCheer on a friend's big win
- Miss you, girlfriendFor the days when distance feels long
- Funny birthdayLight-hearted wishes for a best friend
- Christmas wishesSeason's greetings for the family
Popular searches
- Breakup Shayari for Girlfriend
- Attitude Shayari for Boys
- Attitude Shayari for Girls
- Attitude Status for Boys
- Alone Shayari
- 2 Line Attitude Shayari
- 2 Line Breakup Shayari
- Love Shayari for Girlfriend
- Miss You Shayari for Girlfriend
- Emotional Shayari for Mom
- Heart Touching Shayari for Husband
- Birthday Wishes for Wife
- Birthday Wishes for Husband
- Love Status for WhatsApp
- Inspirational Quotes for Students
- Life Quotes for Self
Poets, Festivals & Status
Read the voices behind the verses, plan ahead for festivals and grab a quick status line
Essential Questions About Pugazhendi
Authentic answers about Pugazhendi's life, iconic ghazals, and timeless literary legacy.
Still have a question? Contact us
Who was Pugazhendi and what was their literary significance?
Pugazhendi (12th Century CE–12th Century CE) was a monumental figure in Tamil/Classical literature, celebrated for masterpieces exploring human devotion, existential philosophy, and timeless beauty.
What are the central themes in Pugazhendi's poetry?
The core themes across Pugazhendi's oeuvre encompass प्रेम, विरह और कठिन परीक्षा, सत्य, निष्ठा और धर्म-पालन, वेण्बा छंद का अनुपम माधुर्य, विपत्ति में धैर्य का संबल, पातिव्रत्य और दाम्पत्य मर्यादा, harmonizing lyrical beauty with deep moral introspection.
What makes Pugazhendi's literary works so renowned?
Their poetry explores the full spectrum of human emotions—love, existential yearning, resilience, and philosophical introspection.
What are the most famous works of Pugazhendi?
Their masterworks include timeless couplets and verses celebrated globally across literary traditions.
What was Pugazhendi's impact on literary culture?
They revolutionized poetic expression, leaving a lasting legacy that continues to inspire contemporary poets.
Can I copy and share couplets by Pugazhendi?
Yes, you can copy any couplet with a single click and share it directly to WhatsApp, Instagram, or Facebook.
Can I download aesthetic cards for Pugazhendi's poetry?
Yes! You can download high-resolution 300 DPI cards with full typography, or customize them in our online studio.
Where is Pugazhendi's memorial or tomb located?
Memorials and historic landmarks commemorating Pugazhendi stand as cherished cultural heritage sites for poetry enthusiasts.
Ready to Express Yourself?
Pick a line, add your style and send it off. Your first card is a few taps away.






