अहंकार की दीवारें जब सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,दीन-बंधु का सहारा बन के उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।
Mohsin Naqvi (मोहसिन नक़वी)
Mohsin Naqvi was an illustrious figure in Poet of Karbala, Resistance & Romance (1947–1996), renowned for Band-e-Qaba, Rida-e-Khab.
Download Aesthetic Mohsin Naqvi Story Cards

‘अहंकार की दीवारें जब सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,दीन-बंधु का सहारा बन के उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।’— Mohsin Naqvi
Sher #1 • Classic Couplet
अहंकार की दीवारें जब सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,

‘दीन-दुखी का आसरा बनकर घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,परहित में जिसने जीवन सौंपा मानव धर्म निभाया उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है।’— Mohsin Naqvi
Sher #2 • Passionate Verse
दीन-दुखी का आसरा बनकर घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,

‘मन के निर्मल दर्पण में जब सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,भवसागर की लहरों से जो उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।’— Mohsin Naqvi
Sher #3 • Soulful Couplet
मन के निर्मल दर्पण में जब सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,
Immortal Couplets & Ghazals
दीन-दुखी का आसरा बनकर घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,परहित में जिसने जीवन सौंपा मानव धर्म निभाया उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है।
मन के निर्मल दर्पण में जब सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,भवसागर की लहरों से जो उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,अहंकार का त्याग किया जिसने उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।

प्रेम बिना सब सूना जग में दो न समाहिं जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाहिं,विरह का हर इक आँसू बनकर उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।
Prem binaa sab soonaa jag mein do na samaahin jab main tha tab hari nahi ab hari hain main naahin,Virah ka har ik aansoo banakar utaaroon har pal main to apane salone shyaam ki daasee ban gayi.
वाणी वही जो घाव भरे और सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,मोह-निशा से जो जन जागा व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,हृदय में जिसके दया बसी है रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।
मन मंदिर में जो दीप जले प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,सदाचार की पावन वेदी पर उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।
नदिया की धारा बहती जावे सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,जीवन का यह पावन सूत्र जो उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।

तेरे रूप की पावन झांकी संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,प्रेम सुधा का रस जो चखा अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।
Tere roop ki paavan jhaankee sansaar luta baithaa magar prem ke baazaar mein usane anamol ratan paa liyaa,Prem sudhaa ka ras jo chakhaa ahankaar ki koee jagah nahi yahaan to keval samarpan ki sugandh bahatee hai.
जो तूफ़ानों में अपनी नाव अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।
कर्म की खेती जो जन बोवे जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,भवसागर की लहरों से जो व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,मोह-निशा से जो जन जागा परलोक में संग जाएगी बाकी सब माया-मोह यहीं धरा रह जाएगा।
मन के निर्मल दर्पण में जब अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।

प्रेम गली अति साँकरी जामें प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,सच्चे आशिक़ की पहचान यही जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।
Prem galee ati saankaree jaamen priyatam ka roop anoop chaaron or usee ki paavan leelaa nazar aane lagee,Sachche aashiq ki pahachaan yahee jisane ghat ke andar woh sansaar ke har praanee mein usee ka roop dekhataa hai.
वाणी वही जो घाव भरे और मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,सदाचार की पावन वेदी पर उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।
मन के निर्मल दर्पण में जब तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,दीन-बंधु का सहारा बन के अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।
नाम और दौलत तो माटी मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु जिसने डुबकी लगाई उसके जन्म-जन्मांतर के सब पाप धुल जाते हैं।
आशा तृष्णा सब छूटी जब स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।

आँखों के आँसू जब सूखे लगे तब जीवन में घोर निराशा छाए परमात्मा का ही आसरा शेष रहे,जब नयनों के सब आँसू सूखे सहनशीलता ही सबसे बड़ी पूँजी बनी जिसने हर तूफ़ान से बचा लिया।
Aankhon ke aansoo jab sookhe lage tab jeevan mein ghor niraashaa chhaae paramaatmaa ka hi aasaraa shesh rahe,Jab nayanon ke sab aansoo sookhe sahanasheelataa hi sabase baree poonjee banee jisane har toofaan se bachaa liyaa.
दीन-दुखी का आसरा बनकर अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,दीन-बंधु का सहारा बन के अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।
आशा तृष्णा सब छूटी जब सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,मन के मैल को जिसने धोया जिसने डुबकी लगाई उसके जन्म-जन्मांतर के सब पाप धुल जाते हैं।
नाम और दौलत तो माटी जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,सदाचार की पावन वेदी पर उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।

ग़म का मारा पंछी जैसे को भी छीन ले तब समझ आता है कि तन्हाई किसे कहते हैं,ग़म के मारों की बस्ती में तब अंतरात्मा की पुकार ही ईश्वर के चरणों तक पहुँची और धीरज मिला।
Gham ka maaraa panchhee jaise ko bhi chheen le tab samajh aataa hai ki tanhaaee kise kahate hain,Gham ke maaron ki bastee mein tab antaraatmaa ki pukaar hi eeshvar ke charanon tak pahunchee aur dheeraj mila.
अहंकार की दीवारें जब का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,नेकी की राह पे जो जन वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।
नाम और दौलत तो माटी जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
प्रेम की गंगा अंतर में बहे भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।
प्रेम की गंगा अंतर में बहे सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,हरि की कृपा का पावन साया जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।

उम्र भर का सफ़र और पर दिखाई दें असली ज़ख़्म तो वो हैं जो रूह पर रिसते हैं,जब नयनों के सब आँसू सूखे सारे भ्रम तोड़ डाले और जीवन की नग्न सच्चाई से सामना करा दिया।
Umr bhar ka safar aur par dikhaaee den asalee zakhm to wo hain jo rooh par risate hain,Jab nayanon ke sab aansoo sookhe saare bhram tor daale aur jeevan ki nagn sachchaaee se saamanaa karaa diyaa.
मन के निर्मल दर्पण में जब तो सारा जग अपना लागे पराया कोई न रहे सब में प्रभु रूप दिखे,वाणी में जिसके मिठास घुली जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।
कर्म की खेती जो जन बोवे सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,साधु पुरुष की वाणी कभी के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।
मन मंदिर में जो दीप जले सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।
अहंकार की दीवारें जब मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।

संतन की संगति में आकर अगर किसी के काम आ सको तो समझो ज़िंदगी का हर क़र्ज़ अदा हो गया,सत्य और धर्म की राहों पर है जो दूसरों के चेहरे पे मुस्कान लाए दौलत तो हाथ का मैल है।
Santan ki sangati mein aakar agar kisee ke kaam aa sako to samajho zindagi ka har qarz adaa ho gaya,Saty aur dharm ki raahon par hai jo doosaron ke chehare pe muskaan laae daulat to haath ka mail hai.
नाम और दौलत तो माटी अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।
वाणी में जो अमृत घोले सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,सत्कर्मों की अमिट कमाई ही जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,धैर्य का दामन जिसने थामे उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।
दुःख में सुमिरन सब कोई करै भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,सत्य-अहिंसा की राहों पर के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।

अहंकार की दीवारें जब जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,हृदय में जिसके दया और करुणा है जो दूसरों के चेहरे पे मुस्कान लाए दौलत तो हाथ का मैल है।
Ahankaar ki deevaaren jab jag mein soee pyaaraa krodha-agni ko shaant kare jo sheela-sarovar dhaaraa,Hriday mein jisake dayaa aur karunaa hai jo doosaron ke chehare pe muskaan laae daulat to haath ka mail hai.
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,जीवन का यह पावन सूत्र जो अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।
माटी का यह देह बना है का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,शांति और संतोष का धन जो जिसने डुबकी लगाई उसके जन्म-जन्मांतर के सब पाप धुल जाते हैं।
हरि सुमिरन में जिसका चित्त भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,सत्कर्मों की अमिट कमाई ही लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।
प्रेम की गंगा अंतर में बहे सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,मन के मैल को जिसने धोया रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।

जिसने मन को जीत लिया उसने सारा जग जीत लिया मन के जीते जीत है मन के हारे हार,सत्संगति का पावन प्रभाव अपना सुख त्याग देता है उसका नाम इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में लिखा जाता है।
Jisane man ko jeet liyaa usane saaraa jag jeet liyaa man ke jeete jeet hai man ke haare haar,Satsangati ka paavan prabhaav apanaa sukh tyaag detaa hai usakaa naam itihaas ke svarnim pannon mein likhaa jaataa hai.
धरती की छाती पर जिसने सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,जीवन का यह पावन सूत्र जो उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।
वाणी वही जो घाव भरे और अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,माटी का चोला पाकर जिसने अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।
मन मंदिर में जो दीप जले भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,हरि की कृपा का पावन साया उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।
नाम और दौलत तो माटी सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,सत्य वचन जो मुख से बोले निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।

आत्मा अजर-अमर अविनाशी है एक वस्त्र बदलने का नाम है आत्मा अजर-अमर है और सदैव प्रकाशमान रहेगी,परम चेतना का आलोक जब फैला का दर्शन होने लगा तब कोई शत्रु न रहा और न कोई पराया बचा।
Aatmaa ajara-amar avinaashee hai ek vastr badalane ka naam hai aatmaa ajara-amar hai aur sadaiv prakaashamaan rahegee,Param chetanaa ka aalok jab phailaa ka darshan hone lagaa tab koee shatru na raha aur na koee paraayaa bachaa.
सत्य के पावन पथ पर जिसने मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,भवसागर की लहरों से जो निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।
नैनन आगे तू ही तू नाचे बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,सच्चे आशिक़ की पहचान यही तो बाहर का सारा बैर-भाव और द्वेष पल भर में समाप्त हो गया।
इश्क़ का सौदा जिसने किया वो हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,प्रेम सुधा का रस जो चखा उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
तेरी याद का पावन साया डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,विरह का हर इक आँसू बनकर अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।

मृत्यु कोई अंत नहीं बस उम्र भर भटकता रहा जिसने भीतर झाँक लिया उसने समूचा ब्रह्मांड पा लिया,परम पद की प्राप्ति उसी को होती तब साधना पूर्ण हुई और भक्त भगवान के स्वरूप में ही विलीन हो गया।
Mrityu koee ant nahi bas umr bhar bhatakataa raha jisane bheetar jhaank liyaa usane samoochaa brahmaand paa liyaa,Param pad ki praapti usee ko hotee tab saadhanaa poorn hui aur bhakt bhagavaan ke svaroop mein hi vileen ho gaya.
प्रेम की डोरी बाँध लई जब संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,प्रेम की इस पावन घाटी में लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
साँसों की सरगम में घुल गया तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,विरह की रात जब ढलने लगी उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।
प्रेम गली अति साँकरी जामें सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,हृदय के पावन सिंहासन पर कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
प्रेम बिना सब सूना जग में दो न समाहिं जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाहिं,विरह का हर इक आँसू बनकर उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।

मैं और मेरा का भ्रम उसी को होता है जो समस्त वासनाओं और कामनाओं का त्याग कर देता है,जब 'अहं' का विसर्जन हो गया जो पी लेता है उसे संसार के समस्त सुख तुच्छ और क्षणभंगुर लगने लगते हैं।
Main aur mera ka bhram usee ko hotaa hai jo samast vaasanaaon aur kaamanaaon ka tyaag kar detaa hai,Jab 'ahan' ka visarjan ho gaya jo pee letaa hai use sansaar ke samast sukh tuchchh aur kshanabhangur lagane lagate hain.
तेरे मिलन की आस में बीते तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,विरह की रात जब ढलने लगी जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।
नैनों के दर्पण में बसा जब से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,प्रेम की पावन ज्योति जगाई जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
तेरे दीदार की एक झलक ने बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,प्रेम नगर का वासी बनकर उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
अंतर घट में जब ज्योति जगी तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,अमर प्रेम की अमर कहानी कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।

दीन-दुखी का आसरा बनकर घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,परहित में जिसने जीवन सौंपा मानव धर्म निभाया उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है।
Deena-dukhee ka aasaraa banakar ghata-ghat mein pragat bhaee ajnyaan ka ghor andhera pal bhar mein bhaag gaya,Parahit mein jisane jeevan saunpaa maanav dharm nibhaayaa usakaa janam saphal jag jaane amar dhaam ko jaataa hai.
साँसों की सरगम में घुल गया तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,प्रियतम के चरणों में जिसने और मिलन की भोर हुई तो आत्मा का परमात्मा से एकात्म हो गया।
नैनन आगे तू ही तू नाचे डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,प्रेम की मस्ती में जो झूमा युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम प्रियतम का नाम सुना अनहद नाद का संगीत अंतर में गूँजने लगा,साँसों के हर तार पे जिसका और मिलन की भोर हुई तो आत्मा का परमात्मा से एकात्म हो गया।
प्रेम की पावन वेदी पर जिसने तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,प्रियतम की चाहत में जिसने लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।

नाम और दौलत तो माटी मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु जिसने डुबकी लगाई उसके जन्म-जन्मांतर के सब पाप धुल जाते हैं।
Naam aur daulat to maatee man ko seetal kar de shabd vahee jo amar aalok bane,Aatma-samarpan kiyaa jisane prabhu jisane dubakee lagaaee usake janma-janmaantar ke sab paap dhul jaate hain.
प्रेम की पावन वेदी पर जिसने दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,प्रियतम के रंग में रंग कर सदा प्रीतम का वास रहे वहाँ किसी दूसरे का प्रवेश कभी न हो।
प्रेम रंग में जो रंग गया दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,सच्चे प्रेम की यही निशानी प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
प्रेम की पावन वेदी पर जिसने बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,जिसने अपना सब कुछ सौंपा नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।
प्रेम की पावन वेदी पर जिसने संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,प्रियतम की चाहत में जिसने मन ऐसा निर्मल हुआ कि दर्पण भी उसके सामने लजा जाए।

अहंकार की दीवारें जब मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।
Ahankaar ki deevaaren jab man ko seetal kar de shabd vahee jo amar aalok bane,Prabhu charanon mein jisakaa dhyaan use kisee teerath jaane ki aavashyakataa nahi prabhu svayan usake ghat basate hain.
तेरे रूप की पावन झांकी संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,प्रेम सुधा का रस जो चखा अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।
तेरे दीदार की एक झलक ने डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,हृदय के पावन सिंहासन पर सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।
बिरहा की आग में तप के कुंदन दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,प्रियतम की चाहत में जिसने जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।
इश्क़ की राह अनोखी बंदे संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,प्रियतम की चाहत में जिसने उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।

सत्य के पावन पथ पर जिसने मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,भवसागर की लहरों से जो निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।
Saty ke paavan path par jisane man ko seetal kar de shabd vahee jo amar aalok bane,Bhavasaagar ki laharon se jo nirbhay hokar paar hua jnyaan ki naukaa use param kinaare pahunchaa detee hai.
तेरे रूप की पावन झांकी प्रियतम का नाम सुना अनहद नाद का संगीत अंतर में गूँजने लगा,जिसने प्रेम का मर्म समझ कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।
तेरे दीदार की एक झलक ने पलकन मूँदूँ तो घट में पाऊँ ऐसा अलौकिक प्रेम जगा जो कभी मिटता नहीं,जब से नैना रूप में उलझे उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।
बिरहा की आग में तप के कुंदन हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,मन मंदिर की पावन आरती जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।
प्रेम बिना सब सूना जग में हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,हृदय के पावन सिंहासन पर युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।

नैनन आगे तू ही तू नाचे डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,प्रेम की मस्ती में जो झूमा युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
Nainan aage too hi too naache doob gaya ik baar use kinaare ki koee aarazoo baaqee na rahi,Prem ki mastee mein jo jhoomaa yuga-yug gaaee jaaegee jo prem ki raah par chale unakaa naam amar rahegaa.
इश्क़ की राह अनोखी बंदे रैन-दिना मतवारे अंग-अंग में ज्योति जलाई प्रेम के दीपक बारे,प्रेम के इस पावन तीरथ में नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।
प्रेम की पावन वेदी पर जिसने डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,अमर प्रेम की अमर कहानी जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
नैन मिले जब नैनन से तब दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,प्रेम सुधा का रस जो चखा संसार की सुध-बुध बिसराई केवल प्रीतम की सूरत याद रही।
मन की वीणा बज उठी जब का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,हृदय के पावन सिंहासन पर अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।

बिरहा की आग में तप के कुंदन हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,मन मंदिर की पावन आरती जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।
Birahaa ki aag mein tap ke kundan haradam sheesh navaanaa khud ko khokar priyatam paanaa jag ka bharam bhulaanaa,Man mandir ki paavan aaratee jalaae rakhegaa usake jeevan path par kabhee andhakaar nahi aa sakataa.
रोम-रोम में रम गया प्रीतम सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,प्रेम की मस्ती में जो झूमा अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।
प्रेम गली अति साँकरी जामें प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,सच्चे आशिक़ की पहचान यही जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,जब से नैना रूप में उलझे अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।
तेरी याद का पावन साया से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,हृदय के पावन सिंहासन पर नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।

तेरे रूप की पावन झांकी दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,जिसने अपना सब कुछ सौंपा युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
Tere roop ki paavan jhaankee dil ko wo chain diyaa jo sadiyon ki ibaadat se bhi mayassar na hua,Jisane apanaa sab kuchh saunpaa yuga-yug gaaee jaaegee jo prem ki raah par chale unakaa naam amar rahegaa.
बिरहा की आग में तप के कुंदन बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,अमर प्रेम की अमर कहानी उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।
प्रेम की डोरी बाँध लई जब पलकन मूँदूँ तो घट में पाऊँ ऐसा अलौकिक प्रेम जगा जो कभी मिटता नहीं,प्रेम नगर का वासी बनकर जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।
इश्क़ की राह अनोखी बंदे जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,प्रियतम के रंग में रंग कर जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।
तेरे रूप की पावन झांकी दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,जिसने अपना सब कुछ सौंपा युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।

ग़म का मारा पंछी जैसे सो पीर विरह की गावे अंतर घट की पीड़ा को कोई समझ न पावे,जब कोई चारासाज़ न मिला तब परमात्मा ही सबसे बड़ा वैद्य बना और उसने रूह के ज़ख़्म भर दिए।
Gham ka maaraa panchhee jaise so peer virah ki gaave antar ghat ki peeraa ko koee samajh na paave,Jab koee chaaraasaaz na mila tab paramaatmaa hi sabase baraa vaidy banaa aur usane rooh ke zakhm bhar diye.
तेरे मिलन की आस में बीते तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,प्रेम सुधा का रस जो चखा जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
नैनन आगे तू ही तू नाचे जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,प्रेम की इस पावन धारा में अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।
दिल का आईना जब टूटा दूजा भेद न पावे जो इस आग में जला वही इसका दर्द जान पावे,आँसुओं की इस भाषा को सारे भ्रम तोड़ डाले और जीवन की नग्न सच्चाई से सामना करा दिया।
तन्हाई के अँधियारे में यह ख़ामोशी बख़्शी वरना कभी हमारी हँसी भी बहारों को जगाती थी,ग़म की इस आँधी ने जब जो चीख़ दबी रह गई वह खुदा के दरबार में सबसे बड़ी गवाही बनी।

दर्द की रात में जब कोई कोई शिकवा नहीं दिल के वीराने में बस एक टूटी आस का दिया है,टूटे हुए सपनों की किरचें तन्हाई ही अब संग चलती है साया भी धूप ढलते ही साथ छोड़ जाता है।
Dard ki raat mein jab koee koee shikavaa nahi dil ke veeraane mein bas ek tootee aas ka diyaa hai,Toote hue sapanon ki kirachen tanhaaee hi ab sang chalatee hai saaya bhi dhoop dhalate hi saath chhor jaataa hai.
ग़म का मारा पंछी जैसे पर दिखाई दें असली ज़ख़्म तो वो हैं जो रूह पर रिसते हैं,अंधेरी रात के सन्नाटे में ज़माने ने हँसी उड़ाई मगर यही फफोले कल ज्ञान का कमल बनेंगे।
दर्द की रात में जब कोई दूजा भेद न पावे जो इस आग में जला वही इसका दर्द जान पावे,ग़म की इस लंबी यात्रा में ज़माने ने हँसी उड़ाई मगर यही फफोले कल ज्ञान का कमल बनेंगे।
आँखों के आँसू जब सूखे लगे तब जीवन में घोर निराशा छाए परमात्मा का ही आसरा शेष रहे,जब नयनों के सब आँसू सूखे सहनशीलता ही सबसे बड़ी पूँजी बनी जिसने हर तूफ़ान से बचा लिया।
जिसके दिल पर बीत रही जब कोई राह न सूझे तब टूटे दिल से निकली दुआ ही रास्ता दिखाती है,दिल के फफोलों को देखकर तो ग़ैरों से क्या शिकवा करना दिल ने चुपचाप सब कुछ सहना सीख लिया।

टूटे दिल की ख़ामोशी में लगे तब जीवन में घोर निराशा छाए परमात्मा का ही आसरा शेष रहे,जब नयनों के सब आँसू सूखे तो ग़ैरों से क्या शिकवा करना दिल ने चुपचाप सब कुछ सहना सीख लिया।
Toote dil ki khaamoshi mein lage tab jeevan mein ghor niraashaa chhaae paramaatmaa ka hi aasaraa shesh rahe,Jab nayanon ke sab aansoo sookhe to ghairon se kyaa shikavaa karanaa dil ne chupachaap sab kuchh sahanaa seekh liyaa.
कोई न अपना इस जग में हज़ार टुकड़ों में बिखर गया हर टुकड़े में अपनों की बेवफ़ाई की तस्वीर दिखी,जब आशा की हर किरण बुझी सारे भ्रम तोड़ डाले और जीवन की नग्न सच्चाई से सामना करा दिया।
टूटी नाव भँवर में फँसी किनारा कहीं न सूझे प्रभु बिना इस संकट में कोई पार लगाने वाला न दिखे,जब कोई सहारा न बचा केवल वही पढ़ सकता है जिसने ख़ुद रात-रात भर जाग कर दर्द सहा हो।
भीतर-भीतर घुटता जाए सब मतलब के यार सुख में सब संग नाचते दुःख में मुँह मोड़ लेते हैं,आँसुओं की इस भाषा को सारे भ्रम तोड़ डाले और जीवन की नग्न सच्चाई से सामना करा दिया।
दिल का आईना जब टूटा चीख़ छुपी है भारी किसको अपना हाल सुनाएँ दुनिया मतलबी सारी,अकेलेपन की इस राह पर अकेले ही चलना पड़ता है यहाँ कोई किसी का बोझ उठाने नहीं आता।

संतन की संगति में आकर धूप-छाँव का सफ़र है आज ग़म कल उम्मीद का नया सूरज चमकेगा,कर्म की खेती में जो पसीना जिसने व्यर्थ नहीं गँवाया उसने जीवन के हर संग्राम में सफलता प्राप्त की।
Santan ki sangati mein aakar dhoopa-chhaanv ka safar hai aaj gham kal ummeed ka naya sooraj chamakegaa,Karm ki khetee mein jo paseenaa jisane vyarth nahi ganvaayaa usane jeevan ke har sangraam mein saphalataa praapt ki.
ग़म का मारा पंछी जैसे सो पीर विरह की गावे अंतर घट की पीड़ा को कोई समझ न पावे,जब कोई चारासाज़ न मिला तब परमात्मा ही सबसे बड़ा वैद्य बना और उसने रूह के ज़ख़्म भर दिए।
आँखों के आँसू जब सूखे जब साया भी साथ न दे तब धीरज ही मनुष्य का एकमात्र सच्चा साथी बने,टूटे दिल की इस वीणा से अकेले ही चलना पड़ता है यहाँ कोई किसी का बोझ उठाने नहीं आता।
कोई न अपना इस जग में यह ख़ामोशी बख़्शी वरना कभी हमारी हँसी भी बहारों को जगाती थी,जब कोई सहारा न बचा तब भीतर ज्ञान का अमृत झरना फूटा जिसने जीवन को तृप्त कर दिया।
विरह की अगन में जलता मन हमदर्द न मिला तकिये को सीने से लगा के सारी रात रोते रहे,ग़म की इस आँधी ने जब केवल विरह का सुर निकलता है जो सुनने वालों के दिल को चीर देता है।

गिरने में कोई हार नहीं उसने सारा जग जीत लिया मन के जीते जीत है मन के हारे हार,अंत समय जब निकट आएगा और धर्म पे अडिग रहता है उसका मान-सम्मान तीनों लोकों में बढ़ता है।
Girane mein koee haar nahi usane saaraa jag jeet liyaa man ke jeete jeet hai man ke haare haar,Ant samay jab nikat aaegaa aur dharm pe adig rahataa hai usakaa maana-sammaan teenon lokon mein barhataa hai.
आँखों के आँसू जब सूखे यह ख़ामोशी बख़्शी वरना कभी हमारी हँसी भी बहारों को जगाती थी,दर्द की इस एकांत गुफ़ा में तन्हाई ही अब संग चलती है साया भी धूप ढलते ही साथ छोड़ जाता है।
सपनों के महल जब टूटे हासिल-ए-ज़िंदगी यह अकेलापन राहों में भटकते रहे कोई किनारा न मिला,अंधेरी रात के सन्नाटे में तपस्या का ऐसा दीप जला जिसने आत्मा को अमर प्रकाश से भर दिया।
टूटे दिल की ख़ामोशी में कोई शिकवा नहीं दिल के वीराने में बस एक टूटी आस का दिया है,टूटे हुए सपनों की किरचें तब विश्वास का एक नन्हा तारा चमका जिसने डूबने से बचा लिया।
ग़म का मारा पंछी जैसे को भी छीन ले तब समझ आता है कि तन्हाई किसे कहते हैं,ग़म के मारों की बस्ती में तब अंतरात्मा की पुकार ही ईश्वर के चरणों तक पहुँची और धीरज मिला।

जिसने मन को जीत लिया अगर उठने का हौसला हो हर ठोकर इंसान को चलने का नया हुनर सिखाती है,कर्मण्यता का पावन व्रत लेकर और धर्म पे अडिग रहता है उसका मान-सम्मान तीनों लोकों में बढ़ता है।
Jisane man ko jeet liyaa agar uthane ka hausalaa ho har thokar insaan ko chalane ka naya hunar sikhaatee hai,Karmanyataa ka paavan vrat lekar aur dharm pe adig rahataa hai usakaa maana-sammaan teenon lokon mein barhataa hai.
ग़म का मारा पंछी जैसे रेत की दीवार की तरह तब समझ आया कि संसार की माया सब झूठी है,दिल के फफोलों को देखकर तब परमात्मा ही सबसे बड़ा वैद्य बना और उसने रूह के ज़ख़्म भर दिए।
About Mohsin Naqvi (मोहसिन नक़वी) — The Maestro of Human Emotion
Mohsin Naqvi was an illustrious figure in Poet of Karbala, Resistance & Romance (1947–1996), renowned for Band-e-Qaba, Rida-e-Khab.
Poetic Innovation & Distinct Voice
Mohsin Naqvi pioneered unique metaphors and an intimate conversational style, permanently redefining South Asian lyrical expression.
Historical Era & Global Acclaim
Celebrated across the 1947–1996, their verses have transcended borders, honored globally in multiple international translations and scholarly anthologies.
Cosmic Depth & Emotional Resonance
Weaving existential inquiry, intimate vulnerability, and philosophical depth, Mohsin Naqvi captured the bittersweet beauty of human existence.
Why Mohsin Naqvi's Poetry Resonates Across Generations
From student dormitories to seasoned scholars, Mohsin Naqvi effortlessly bridges generational divides. Their couplets on love, heartbreak, and resilience don't wallow in bitterness; rather, they gently embrace emotion as a precious, soulful companion. On digital platforms and in musical concerts, their words continue to touch millions daily.
Explore Other Ghazal Masters
Create Aesthetic Cards in Under 30 Seconds
Select your favourite shayari or quote, choose an ethereal cosmic gradient, adjust the font to Noto Serif Devanagari, and export immediately.
- No sign up
- No watermark
- Free forever
“तेरी खामोशियों में भी एक कायनात बसती है...”
EmotionHub.in • Cosmic PoetryMessages for every occasion and every person
Pick who you are writing to, or the festival, and open a ready collection.
- Birthday for dadWarm lines for the man who raised you
- Anniversary for husbandSweet notes for the one by your side
- Good morning, familyA bright start for the family group
- Good night, girlfriendSoft words before she sleeps
- Diwali wishesFestive messages for family and friends
- Holi wishesColourful lines for your friends
- Eid wishesEid Mubarak for your loved ones
- Farewell, colleagueKind goodbyes for a teammate
- CongratulationsCheer on a friend's big win
- Miss you, girlfriendFor the days when distance feels long
- Funny birthdayLight-hearted wishes for a best friend
- Christmas wishesSeason's greetings for the family
Popular searches
- Breakup Shayari for Girlfriend
- Attitude Shayari for Boys
- Attitude Shayari for Girls
- Attitude Status for Boys
- Alone Shayari
- 2 Line Attitude Shayari
- 2 Line Breakup Shayari
- Love Shayari for Girlfriend
- Miss You Shayari for Girlfriend
- Emotional Shayari for Mom
- Heart Touching Shayari for Husband
- Birthday Wishes for Wife
- Birthday Wishes for Husband
- Love Status for WhatsApp
- Inspirational Quotes for Students
- Life Quotes for Self
Poets, Festivals & Status
Read the voices behind the verses, plan ahead for festivals and grab a quick status line
Essential Questions About Mohsin Naqvi
Authentic answers about Mohsin Naqvi's life, iconic ghazals, and timeless literary legacy.
Still have a question? Contact us
Who was Mohsin Naqvi?
Mohsin Naqvi was a renowned Poet of Karbala, Resistance & Romance (1947–1996) from Dera Ghazi Khan, Punjab, Pakistan, widely celebrated for POET OF THE OPPRESSED, MASTER OF MARSIYA & ROMANTIC GHAZAL, PRIDE OF PERFORMANCE.
What is the central philosophy and message of Mohsin Naqvi?
The central philosophy of Mohsin Naqvi centers around Karbala as universal archetype of resistance against tyranny, intense romantic surrender, supreme vocal courage in Lahore, leaving timeless guidance for humanity.
What makes Mohsin Naqvi's literary works so renowned?
Their poetry explores the full spectrum of human emotions—love, existential yearning, resilience, and philosophical introspection.
What are the most famous works of Mohsin Naqvi?
Their masterworks include timeless couplets and verses celebrated globally across literary traditions.
What was Mohsin Naqvi's impact on literary culture?
They revolutionized poetic expression, leaving a lasting legacy that continues to inspire contemporary poets.
Can I copy and share couplets by Mohsin Naqvi?
Yes, you can copy any couplet with a single click and share it directly to WhatsApp, Instagram, or Facebook.
Can I download aesthetic cards for Mohsin Naqvi's poetry?
Yes! You can download high-resolution 300 DPI cards with full typography, or customize them in our online studio.
Where is Mohsin Naqvi's memorial or tomb located?
Memorials and historic landmarks commemorating Mohsin Naqvi stand as cherished cultural heritage sites for poetry enthusiasts.
Ready to Express Yourself?
Pick a line, add your style and send it off. Your first card is a few taps away.







