वाणी में जो अमृत घोले जग में सोई प्यारा,उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया।
Lalon Shah (लालॉन शाह (फ़क़ीर लालॉन))
Fakir Lalon Shah was the supreme philosopher-saint of the Baul tradition, whose songs rejected caste, creed, and dogma to search for the 'Moner Manush' (Person of the Heart).
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‘वाणी में जो अमृत घोले जग में सोई प्यारा,उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया।’— Lalon Shah
Sher #1 • Classic Couplet
वाणी में जो अमृत घोले जग में सोई प्यारा,

‘अहंकार की दीवारें जब अंतर में गिर जातीं,कोटि ग्रंथ का सार यही है घट में हरि को ध्यावै।’— Lalon Shah
Sher #2 • Passionate Verse
अहंकार की दीवारें जब अंतर में गिर जातीं,

‘धरती की छाती पर जिसने सत्य का बीज उगाया,क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा।’— Lalon Shah
Sher #3 • Soulful Couplet
धरती की छाती पर जिसने सत्य का बीज उगाया,
Immortal Couplets & Ghazals
अहंकार की दीवारें जब अंतर में गिर जातीं,कोटि ग्रंथ का सार यही है घट में हरि को ध्यावै।
धरती की छाती पर जिसने सत्य का बीज उगाया,क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा।
धरती की छाती पर जिसने सत्य का बीज उगाया,जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय।

सतगुरु मिले तो राह दिखावे भरम का पर्दा तोड़े,पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे।
दीन-दुखी का आसरा बनकर जो जीवन महकावे,आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे।
माटी का यह देह बना है माटी में मिल जाना,अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह निशा मुख मोड़े।
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी अंतर नैन उघारे,जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय।

प्रेम की भाषा सबसे न्यारी अंतर नैन उघारे,आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे।
मन मंदिर में जो दीप जले तो बाहर तम न सतावे,अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा।
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी अंतर नैन उघारे,उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया।
अहंकार की दीवारें जब अंतर में गिर जातीं,लोभ मोह मद त्यागि के निज स्वरूप को चीन्है।

कर्म की खेती जो जन बोवे सोई फल पावे रे,सत्कर्मों की पूंजी ही बस संग तुम्हारे जाना।
दीन-दुखी का आसरा बनकर जो जीवन महकावे,क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा।
लालॉन शाह (फ़क़ीर लालॉन) कहें सुनो भई साधो मन को निर्मल कीजै,आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे।
अहंकार की दीवारें जब अंतर में गिर जातीं,जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय।

मन मंदिर में जो दीप जले तो बाहर तम न सतावे,पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे।
कर्म की खेती जो जन बोवे सोई फल पावे रे,कायर बैठे भाग्य गिने और धीर पुरुष कर दिखलावे।
कर्म की खेती जो जन बोवे सोई फल पावे रे,लोभ मोह मद त्यागि के निज स्वरूप को चीन्है।
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी अंतर नैन उघारे,कायर बैठे भाग्य गिने और धीर पुरुष कर दिखलावे।

दुःख में सुमिरन सब कोई करै सुख में करै न कोय,घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती।
दीन-दुखी का आसरा बनकर जो जीवन महकावे,अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा।
संतन की संगति में आकर मन का मैल धुलावे,सत्कर्मों की पूंजी ही बस संग तुम्हारे जाना।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे भरम का पर्दा तोड़े,उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे।

दुःख में सुमिरन सब कोई करै सुख में करै न कोय,क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा।
मन मंदिर में जो दीप जले तो बाहर तम न सतावे,पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे।
लालॉन शाह (फ़क़ीर लालॉन) कहें सुनो भई साधो मन को निर्मल कीजै,घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती।
धरती की छाती पर जिसने सत्य का बीज उगाया,सत्कर्मों की पूंजी ही बस संग तुम्हारे जाना।

मन मंदिर में जो दीप जले तो बाहर तम न सतावे,जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय।
नदिया की धारा बहती जावे सागर से मिलन को,कोटि ग्रंथ का सार यही है घट में हरि को ध्यावै।
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी अंतर नैन उघारे,घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती।
आशा तृष्णा सब छूटी जब प्रभु चरणों चित लागा,अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह निशा मुख मोड़े।

वाणी में जो अमृत घोले जग में सोई प्यारा,अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह निशा मुख मोड़े।
वाणी में जो अमृत घोले जग में सोई प्यारा,पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे।
लालॉन शाह (फ़क़ीर लालॉन) कहें सुनो भई साधो मन को निर्मल कीजै,पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे।
आशा तृष्णा सब छूटी जब प्रभु चरणों चित लागा,जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय।

दीन-दुखी का आसरा बनकर जो जीवन महकावे,घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती।
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी भज ले राम का नामा,पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे।
लालॉन शाह (फ़क़ीर लालॉन) कहें सुनो भई साधो मन को निर्मल कीजै,क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा।
अहंकार की दीवारें जब अंतर में गिर जातीं,अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह निशा मुख मोड़े।

लालॉन शाह (फ़क़ीर लालॉन) कहें सुनो भई साधो मन को निर्मल कीजै,अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा।
नदिया की धारा बहती जावे सागर से मिलन को,आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे।
लालॉन शाह (फ़क़ीर लालॉन) कहें सुनो भई साधो मन को निर्मल कीजै,अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे भरम का पर्दा तोड़े,अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह निशा मुख मोड़े।

नदिया की धारा बहती जावे सागर से मिलन को,उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे।
दीन-दुखी का आसरा बनकर जो जीवन महकावे,अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह निशा मुख मोड़े।
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी अंतर नैन उघारे,जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय।
धरती की छाती पर जिसने सत्य का बीज उगाया,उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया।

सतगुरु मिले तो राह दिखावे भरम का पर्दा तोड़े,आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे।
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी भज ले राम का नामा,मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे।
दुःख में सुमिरन सब कोई करै सुख में करै न कोय,कायर बैठे भाग्य गिने और धीर पुरुष कर दिखलावे।
आशा तृष्णा सब छूटी जब प्रभु चरणों चित लागा,अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह निशा मुख मोड़े।

लालॉन शाह (फ़क़ीर लालॉन) कहें सुनो भई साधो मन को निर्मल कीजै,उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे।
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी भज ले राम का नामा,आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे।
मन मंदिर में जो दीप जले तो बाहर तम न सतावे,अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह निशा मुख मोड़े।
नदिया की धारा बहती जावे सागर से मिलन को,क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा।

दीन-दुखी का आसरा बनकर जो जीवन महकावे,कोटि ग्रंथ का सार यही है घट में हरि को ध्यावै।
धरती की छाती पर जिसने सत्य का बीज उगाया,क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा।
लालॉन शाह। फ़क़ीर लालॉन कहें सुनो भई साधो मन को निर्मल कीजै,आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे।
दीन-दुखी का आसरा बनकर जो जीवन महकावे,क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा।

माटी का यह देह बना है माटी में मिल जाना,अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा।
दुःख में सुमिरन सब कोई करै सुख में करै न कोय,आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे।
लालॉन शाह (फ़क़ीर लालॉन) कहें सुनो भई साधो मन को निर्मल कीजै,कायर बैठे भाग्य गिने और धीर पुरुष कर दिखलावे।
दुःख में सुमिरन सब कोई करै सुख में करै न कोय,सत्कर्मों की पूंजी ही बस संग तुम्हारे जाना।

नदिया की धारा बहती जावे सागर से मिलन को,घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती।
मन मंदिर में जो दीप जले तो बाहर तम न सतावे,कोटि ग्रंथ का सार यही है घट में हरि को ध्यावै।
कर्म की खेती जो जन बोवे सोई फल पावे रे,अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा।
लालॉन शाह। फ़क़ीर लालॉन कहें सुनो भई साधो मन को निर्मल कीजै,अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा।

सतगुरु मिले तो राह दिखावे भरम का पर्दा तोड़े,अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा।
अहंकार की दीवारें जब अंतर में गिर जातीं,क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा।
वाणी में जो अमृत घोले जग में सोई प्यारा,कायर बैठे भाग्य गिने और धीर पुरुष कर दिखलावे।
आशा तृष्णा सब छूटी जब प्रभु चरणों चित लागा,आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे।

अहंकार की दीवारें जब अंतर में गिर जातीं,आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे।
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी अंतर नैन उघारे,क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे भरम का पर्दा तोड़े,उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे।
आशा तृष्णा सब छूटी जब प्रभु चरणों चित लागा,अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा।

माटी का यह देह बना है माटी में मिल जाना,अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह निशा मुख मोड़े।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे भरम का पर्दा तोड़े,अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा।
मन मंदिर में जो दीप जले तो बाहर तम न सतावे,उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया।
नदिया की धारा बहती जावे सागर से मिलन को,सत्कर्मों की पूंजी ही बस संग तुम्हारे जाना।

नदिया की धारा बहती जावे सागर से मिलन को,अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह निशा मुख मोड़े।
धरती की छाती पर जिसने सत्य का बीज उगाया,अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा।
माटी का यह देह बना है माटी में मिल जाना,कोटि ग्रंथ का सार यही है घट में हरि को ध्यावै।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे भरम का पर्दा तोड़े,कोटि ग्रंथ का सार यही है घट में हरि को ध्यावै।

नदिया की धारा बहती जावे सागर से मिलन को,पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे।
लालॉन शाह। फ़क़ीर लालॉन कहें सुनो भई साधो मन को निर्मल कीजै,घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती।
दीन-दुखी का आसरा बनकर जो जीवन महकावे,कायर बैठे भाग्य गिने और धीर पुरुष कर दिखलावे।
कर्म की खेती जो जन बोवे सोई फल पावे रे,अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा।

माटी का यह देह बना है माटी में मिल जाना,अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह निशा मुख मोड़े।
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी भज ले राम का नामा,उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया।
संतन की संगति में आकर मन का मैल धुलावे,क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा।
संतन की संगति में आकर मन का मैल धुलावे,अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह निशा मुख मोड़े।

अहंकार की दीवारें जब अंतर में गिर जातीं,मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे।
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी भज ले राम का नामा,उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया।
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी अंतर नैन उघारे,मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे।
आशा तृष्णा सब छूटी जब प्रभु चरणों चित लागा,सत्कर्मों की पूंजी ही बस संग तुम्हारे जाना।

आशा तृष्णा सब छूटी जब प्रभु चरणों चित लागा,आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे भरम का पर्दा तोड़े,सत्कर्मों की पूंजी ही बस संग तुम्हारे जाना।
दुःख में सुमिरन सब कोई करै सुख में करै न कोय,आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे।
आशा तृष्णा सब छूटी जब प्रभु चरणों चित लागा,अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा।

सतगुरु मिले तो राह दिखावे भरम का पर्दा तोड़े,पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे।
About Lalon Shah (लालॉन शाह (फ़क़ीर लालॉन)) — The Maestro of Human Emotion
Fakir Lalon Shah was the supreme philosopher-saint of the Baul tradition, whose songs rejected caste, creed, and dogma to search for the 'Moner Manush' (Person of the Heart).
Poetic Innovation & Distinct Voice
Lalon Shah pioneered unique metaphors and an intimate conversational style, permanently redefining South Asian lyrical expression.
Historical Era & Global Acclaim
Celebrated across the Baul Mystical Tradition, their verses have transcended borders, honored globally in multiple international translations and scholarly anthologies.
Cosmic Depth & Emotional Resonance
Weaving existential inquiry, intimate vulnerability, and philosophical depth, Lalon Shah captured the bittersweet beauty of human existence.
Why Lalon Shah's Poetry Resonates Across Generations
From student dormitories to seasoned scholars, Lalon Shah effortlessly bridges generational divides. Their couplets on love, heartbreak, and resilience don't wallow in bitterness; rather, they gently embrace emotion as a precious, soulful companion. On digital platforms and in musical concerts, their words continue to touch millions daily.
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Essential Questions About Lalon Shah
Authentic answers about Lalon Shah's life, iconic ghazals, and timeless literary legacy.
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Who was Lalon Shah and what was their literary significance?
Lalon Shah (1774–1890) was a monumental figure in Sufi/Baul literature, celebrated for masterpieces exploring human devotion, existential philosophy, and timeless beauty.
What are the central themes in Lalon Shah's poetry?
The core themes across Lalon Shah's oeuvre encompass शरीर रूपी पिंजरे में अज्ञात पंछी का रहस्य, जाति, धर्म और सम्प्रदाय के भेद पर प्रहार, मनेर मानुष और अंतरात्मा का साक्षात्कार, सरल प्रेम, एकतारा और वैराग्य की मस्ती, मानवता ही सबसे बड़ा सत्य, harmonizing lyrical beauty with deep moral introspection.
What makes Lalon Shah's literary works so renowned?
Their poetry explores the full spectrum of human emotions—love, existential yearning, resilience, and philosophical introspection.
What are the most famous works of Lalon Shah?
Their masterworks include timeless couplets and verses celebrated globally across literary traditions.
What was Lalon Shah's impact on literary culture?
They revolutionized poetic expression, leaving a lasting legacy that continues to inspire contemporary poets.
Can I copy and share couplets by Lalon Shah?
Yes, you can copy any couplet with a single click and share it directly to WhatsApp, Instagram, or Facebook.
Can I download aesthetic cards for Lalon Shah's poetry?
Yes! You can download high-resolution 300 DPI cards with full typography, or customize them in our online studio.
Where is Lalon Shah's memorial or tomb located?
Memorials and historic landmarks commemorating Lalon Shah stand as cherished cultural heritage sites for poetry enthusiasts.
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