नाम और दौलत तो माटी मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,साधु पुरुष की वाणी कभी जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।
John F. Kennedy (जॉन एफ. कैनेडी)
John F. Kennedy was an illustrious figure in Visionary Youth Leader & 35th US President (1917–1963), renowned for Inaugural Address (1961: 'Ask not what your country can do for you'), Moon Speech (Rice University 1962).
Download Aesthetic John F. Kennedy Story Cards

‘नाम और दौलत तो माटी मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,साधु पुरुष की वाणी कभी जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।’— John F. Kennedy
Sher #1 • Classic Couplet
नाम और दौलत तो माटी मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,

‘मन मंदिर में जो दीप जले बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।’— John F. Kennedy
Sher #2 • Passionate Verse
मन मंदिर में जो दीप जले बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,

‘वाणी में जो अमृत घोले भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,सदाचार की पावन वेदी पर अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।’— John F. Kennedy
Sher #3 • Soulful Couplet
वाणी में जो अमृत घोले भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,

‘क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,मोह-निशा से जो जन जागा अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।’— John F. Kennedy
Sher #4 • Philosophical Verse
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,
Immortal Couplets & Ghazals
मन मंदिर में जो दीप जले बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।
वाणी में जो अमृत घोले भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,सदाचार की पावन वेदी पर अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,मोह-निशा से जो जन जागा अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।

बिरहा की आग में तप के कुंदन से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,साँसों के हर तार पे जिसका जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।
Birahaa ki aag mein tap ke kundan se roop salonaa roma-rom mein ram gaya preetam ka paavan konaa,Saanson ke har taar pe jisakaa jisane snaan kiyaa usake saare santaap aur taap sadaa ke lie mit gaye.
वाणी में जो अमृत घोले जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,सदाचार की पावन वेदी पर उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
सत्य का दीप जब जलता है बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,अहंकार का त्याग किया जिसने उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।
जो तूफ़ानों में अपनी नाव अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,साधु पुरुष की वाणी कभी वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,सत्य-अहिंसा की राहों पर जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।

प्रियतम की याद में जो नैना रैन-दिना मतवारे अंग-अंग में ज्योति जलाई प्रेम के दीपक बारे,साँसों के हर तार पे जिसका जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।
Priyatam ki yaad mein jo nainaa raina-dinaa matavaare anga-ang mein jyoti jalaaee prem ke deepak baare,Saanson ke har taar pe jisakaa jisane snaan kiyaa usake saare santaap aur taap sadaa ke lie mit gaye.
प्रेम की गंगा अंतर में बहे बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,सत्संग की निर्मल गंगा में उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।
अहंकार की दीवारें जब सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,सदाचार की पावन वेदी पर वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।
प्रेम की गंगा अंतर में बहे माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,मन के मैल को जिसने धोया व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,धैर्य का दामन जिसने थामे अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।

फासले मिट गए जब दिल से बरसे दिन और रात विरह की अग्नि में तपकर पावन हो गया मन का धाम,जिसने अपना सब कुछ सौंपा जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।
Phaasale mit gaye jab dil se barase din aur raat virah ki agni mein tapakar paavan ho gaya man ka dhaam,Jisane apanaa sab kuchh saunpaa jisane snaan kiyaa usake saare santaap aur taap sadaa ke lie mit gaye.
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब निर्भय पाँव धरे काल की कठिन चाल भी उसका कुछ न बिगाड़ सके,सत्कर्मों की अमिट कमाई ही अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
नाम और दौलत तो माटी का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,सत्य-अहिंसा की राहों पर उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।
नदिया की धारा बहती जावे सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,सत्कर्मों की अमिट कमाई ही रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।

तन्हाई के अँधियारे में चीख़ छुपी है भारी किसको अपना हाल सुनाएँ दुनिया मतलबी सारी,टूटे हुए दिल का दर्द पैरों को लहूलुहान करती रहीं मगर मुसाफ़िर चलता रहा रुकना न सीखा।
Tanhaaee ke andhiyaare mein cheekh chhupee hai bhaaree kisako apanaa haal sunaaen duniya matalabee saari,Toote hue dil ka dard pairon ko lahooluhaan karatee raheen magar musaafir chalataa raha rukanaa na seekhaa.
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,सत्कर्मों की अमिट कमाई ही अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।
आशा तृष्णा सब छूटी जब अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
दीन-दुखी का आसरा बनकर अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,सत्कर्मों की अमिट कमाई ही उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।
सत्य का दीप जब जलता है निर्भय पाँव धरे काल की कठिन चाल भी उसका कुछ न बिगाड़ सके,अमर नाम जग में उसी का उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।

ग़म का मारा पंछी जैसे सब मतलब के यार सुख में सब संग नाचते दुःख में मुँह मोड़ लेते हैं,दर्द की इस एकांत गुफ़ा में सब कुछ उजाड़ दिया तब टूटे तिनकों से ही नया घोंसला बनाना पड़ा।
Gham ka maaraa panchhee jaise sab matalab ke yaar sukh mein sab sang naachate duhkh mein munh mod lete hain,Dard ki is ekaant gufaa mein sab kuchh ujaar diyaa tab toote tinakon se hi naya ghonsalaa banaanaa paraa.
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,साधु पुरुष की वाणी कभी उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।
सत्य के पावन पथ पर जिसने सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,परहित में जिसने जीवन सौंपा उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,वाणी में जिसके मिठास घुली व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
मन मंदिर में जो दीप जले जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,सत्संग की निर्मल गंगा में उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।

वक़्त की आँधी ने तोड़े दिन-रैन तपे अंगार की तरह कोई शीतल बूँद न बरसे जो मन को ठंडक दे,जब नयनों के सब आँसू सूखे चलते-चलते पाँव के छाले भी अब मंज़िल का पता पूछने लगे हैं।
Waqt ki aandhee ne tore dina-rain tape angaar ki tarah koee sheetal boond na barase jo man ko thandak de,Jab nayanon ke sab aansoo sookhe chalate-chalate paanv ke chhaale bhi ab manzil ka pataa poochhane lage hain.
दुःख में सुमिरन सब कोई करै प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,प्रेम की डोर में बंध गया जो निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।
नदिया की धारा बहती जावे सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,धैर्य का दामन जिसने थामे अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
सत्य का दीप जब जलता है जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,अहंकार का त्याग किया जिसने उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।

कर्म की पावन वेदी पर जिसने मानव धर्म सँभाला उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है,जीवन का असली आनंद वही विजय उसी की होती है जो सत्य और न्याय के पक्ष में अविचल खड़ा रहता है।
Karm ki paavan vedee par jisane maanav dharm sanbhaalaa usakaa janam saphal jag jaane amar dhaam ko jaataa hai,Jeevan ka asalee aanand vahee vijay usee ki hotee hai jo saty aur nyaay ke paksh mein avichal kharaa rahataa hai.
धरती की छाती पर जिसने भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,दीन-बंधु का सहारा बन के मानव धर्म निभाया उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है।
साधु-संगत की छाया में जो भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
कर्म की खेती जो जन बोवे मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।
मन के निर्मल दर्पण में जब सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,सत्य वचन जो मुख से बोले उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।

धरती की छाती पर जिसने अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,जो अपने वचन का पक्का है कि संकट के समय ढाल बन जाए सुख में तो सारी दुनिया साथ चलती है।
Dharatee ki chhaatee par jisane antar mein gir jaateen ghata-ghat mein tab ek anantaa jyoti nazar hai aatee,Jo apane vachan ka pakkaa hai ki sankat ke samay dhaal ban jaae sukh mein to saari duniya saath chalatee hai.
धरती की छाती पर जिसने अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,शांति और संतोष का धन जो अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
हरि सुमिरन में जिसका चित्त मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,मोह-निशा से जो जन जागा के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।
नदिया की धारा बहती जावे अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,प्रेम की डोर में बंध गया जो उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।
जो तूफ़ानों में अपनी नाव जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,सत्संग की निर्मल गंगा में वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।

हौसलों के तरकश में जब भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,कर्मण्यता का पावन व्रत लेकर सत्य का प्राण फूँक दिया वह नश्वर होकर भी अमरता को प्राप्त कर लेता है।
Hausalon ke tarakash mein jab bhaj le raam ka naamaa ant samay jab aavegaa tab sang na aave dhaamaa,Karmanyataa ka paavan vrat lekar saty ka praan phoonk diyaa woh nashvar hokar bhi amarataa ko praapt kar letaa hai.
जो तूफ़ानों में अपनी नाव अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,वाणी में जिसके मिठास घुली रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।
धरती की छाती पर जिसने माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,धैर्य का दामन जिसने थामे उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।
जो तूफ़ानों में अपनी नाव मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,अहंकार का त्याग किया जिसने जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
मन के निर्मल दर्पण में जब घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,जीवन का यह पावन सूत्र जो वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।

संतन की संगति में आकर में जिसने मन समझाया उसने वैराग्य के पावन दीप को अंतर में जलाए रखा,परम पद की प्राप्ति उसी को होती त्याग दिया वह इस संसार में रहते हुए भी विदेही की तरह विचरता है।
Santan ki sangati mein aakar mein jisane man samajhaayaa usane vairaagy ke paavan deep ko antar mein jalaae rakhaa,Param pad ki praapti usee ko hotee tyaag diyaa woh is sansaar mein rahate hue bhi videhee ki tarah vicharataa hai.
धरती की छाती पर जिसने जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,सत्य-अहिंसा की राहों पर उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।
इश्क़ की राह अनोखी बंदे का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,प्रियतम की चाहत में जिसने जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
तेरे दीदार की एक झलक ने अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,जब से नैना रूप में उलझे जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।
प्रेम की डोरी बाँध लई जब तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,अमर प्रेम की अमर कहानी एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।

आत्मा अजर-अमर अविनाशी है मानुष की जात देखत ही छिप जाएगा ज्यों तारा परभात,जो जीवन-मुक्त होकर विचरता है जीव और ब्रह्म का भेद समाप्त हो जाए और केवल अद्वैत ही शेष रहे।
Aatmaa ajara-amar avinaashee hai maanush ki jaat dekhat hi chhip jaaegaa jyon taaraa parabhaat,Jo jeevana-mukt hokar vicharataa hai jeev aur brahm ka bhed samaapt ho jaae aur keval advait hi shesh rahe.
फासले मिट गए जब दिल से सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,सच्चे आशिक़ की पहचान यही एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।
तेरे मिलन की आस में बीते का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,विरह का हर इक आँसू बनकर नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।
इश्क़ जब रूह में उतरता है दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,जब से नैना रूप में उलझे युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
बिरहा की आग में तप के कुंदन से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,साँसों के हर तार पे जिसका जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।

आशा तृष्णा सब छूटी जब एक वस्त्र बदलने का नाम है आत्मा अजर-अमर है और सदैव प्रकाशमान रहेगी,जब प्रेम और ज्ञान का संगम हुआ जो पी लेता है उसे संसार के समस्त सुख तुच्छ और क्षणभंगुर लगने लगते हैं।
Aashaa trishnaa sab chhootee jab ek vastr badalane ka naam hai aatmaa ajara-amar hai aur sadaiv prakaashamaan rahegee,Jab prem aur jnyaan ka sangam hua jo pee letaa hai use sansaar ke samast sukh tuchchh aur kshanabhangur lagane lagate hain.
प्रेम बिना सब सूना जग में सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,अमर प्रेम की अमर कहानी एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।
मन की वीणा बज उठी जब जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,प्रेम की पावन ज्योति जगाई संसार की सुध-बुध बिसराई केवल प्रीतम की सूरत याद रही।
प्रेम रंग में जो रंग गया संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,सच्चे आशिक़ की पहचान यही मोती चमका प्रेम की सीपी में अनमोल ज्ञान का रत्न बन गया।
प्रियतम की याद में जो नैना उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,सच्चे आशिक़ की पहचान यही संसार की सुध-बुध बिसराई केवल प्रीतम की सूरत याद रही।

मन मंदिर में जो दीप जले बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।
Man mandir mein jo deep jale baithaa jan nij bhaav se usakaa jeevan dhany hua prabhu kripaa sadaa barasatee,Aatma-samarpan kiyaa jisane prabhu usane alaukik bhor dekhaa jahaan keval saty aur aanand ka prakaash hai.
फासले मिट गए जब दिल से दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,प्रियतम के चरणों में जिसने प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
तेरे रूप की पावन झांकी संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,प्रियतम के चरणों में जिसने उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।
इश्क़ का सौदा जिसने किया वो प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,विरह का हर इक आँसू बनकर उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।
फासले मिट गए जब दिल से से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,प्रेम के इस पावन तीरथ में कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।

क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।
Kshana-kshan beete aayu suhaanee bharam ka pardaa tore amrit ras ki varshaa hove jab moh mukh more,Prabhu charanon mein jisakaa dhyaan woh sabake man ko bhaataa hai katu vachan tyaag ke jo bole vahee sant kahaataa hai.
प्रेम रंग में जो रंग गया से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,प्रियतम की चाहत में जिसने लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
तेरे रूप की पावन झांकी का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,प्रेम की मस्ती में जो झूमा जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।
प्रियतम की याद में जो नैना जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,अंतर में जब प्रेम समाया युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
तेरे रूप की पावन झांकी जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,आँखों के रस्ते दिल में उतरा मोती चमका प्रेम की सीपी में अनमोल ज्ञान का रत्न बन गया।

प्रेम की भाषा सबसे न्यारी मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।
Prem ki bhaashaa sabase nyaaree man ko seetal kar de shabd vahee jo amar aalok bane,Prabhu charanon mein jisakaa dhyaan apane antar mein sanjoe woh is nashvar sansaar mein sabase baraa samraat hai.
प्रियतम की याद में जो नैना रैन-दिना मतवारे अंग-अंग में ज्योति जलाई प्रेम के दीपक बारे,साँसों के हर तार पे जिसका जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,हृदय के पावन सिंहासन पर जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।
प्रेम रंग में जो रंग गया बरसे दिन और रात विरह की अग्नि में तपकर पावन हो गया मन का धाम,प्रियतम के चरणों में जिसने अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।
नैनन आगे तू ही तू नाचे अमर हो गया जग में उसे दुनिया का कोई लोभ बाँध न सका कभी,प्रेम के इस पावन तीरथ में उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।

धरती की छाती पर जिसने जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,सत्य-अहिंसा की राहों पर उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।
Dharatee ki chhaatee par jisane jo jeevan mahakaave usee manushy ka janam saphal jo parapeeraa apanaave,Satya-ahinsaa ki raahon par usane paramaanand paayaa ahankaar mitate hi antar ka sachchaa sukh milataa hai.
प्रियतम की याद में जो नैना बरसे दिन और रात विरह की अग्नि में तपकर पावन हो गया मन का धाम,प्रियतम के रंग में रंग कर उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।
प्रियतम की याद में जो नैना सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,हृदय के पावन सिंहासन पर तो बाहर का सारा बैर-भाव और द्वेष पल भर में समाप्त हो गया।
नैन मिले जब नैनन से तब दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,प्रियतम के चरणों में जिसने युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
तेरे मिलन की आस में बीते डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,प्रेम की मस्ती में जो झूमा सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।

तेरे रूप की पावन झांकी संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,प्रियतम के चरणों में जिसने उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।
Tere roop ki paavan jhaankee sansaar luta baithaa magar prem ke baazaar mein usane anamol ratan paa liyaa,Priyatam ke charanon mein jisane usane donon jahaan bhulaa diye prem ke nashe mein woh mast kalandar hua.
नैनों के दर्पण में बसा जब प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,सच्चे आशिक़ की पहचान यही तो बाहर का सारा बैर-भाव और द्वेष पल भर में समाप्त हो गया।
इश्क़ की राह अनोखी बंदे जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,विरह की रात जब ढलने लगी जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
नैनन आगे तू ही तू नाचे का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,सच्चे आशिक़ की पहचान यही जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।
प्रियतम की याद में जो नैना बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,प्रेम के इस पावन तीरथ में और मिलन की भोर हुई तो आत्मा का परमात्मा से एकात्म हो गया।

नैन मिले जब नैनन से तब दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,प्रियतम के चरणों में जिसने युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
Nain mile jab nainan se tab dil ko wo chain diyaa jo sadiyon ki ibaadat se bhi mayassar na hua,Priyatam ke charanon mein jisane yuga-yug gaaee jaaegee jo prem ki raah par chale unakaa naam amar rahegaa.
प्रेम रंग में जो रंग गया प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,विरह की रात जब ढलने लगी उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
फासले मिट गए जब दिल से बरसे दिन और रात विरह की अग्नि में तपकर पावन हो गया मन का धाम,जिसने अपना सब कुछ सौंपा जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।
इश्क़ की राह अनोखी बंदे बरसे दिन और रात विरह की अग्नि में तपकर पावन हो गया मन का धाम,विरह की रात जब ढलने लगी मोती चमका प्रेम की सीपी में अनमोल ज्ञान का रत्न बन गया।
अंतर घट में जब ज्योति जगी संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,प्रियतम की चाहत में जिसने सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।

प्रेम बिना सब सूना जग में उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,जिसने प्रेम का मर्म समझ अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।
Prem binaa sab soonaa jag mein us par doojaa rang na charhe woh to keval apane priyatam ka hokar rah gaya,Jisane prem ka marm samajh apanee sudh bisaraaee usane janama-maran ke bandhan ko sadaa ke lie tor diyaa.
अंतर घट में जब ज्योति जगी प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,प्रेम नगर का वासी बनकर सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।
नैन मिले जब नैनन से तब जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,विरह का हर इक आँसू बनकर कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
प्रेम रंग में जो रंग गया संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,प्रेम का दीपक अंतर में जो युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
प्रेम बिना सब सूना जग में उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,जिसने प्रेम का मर्म समझ अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।

दिल का आईना जब टूटा हज़ार टुकड़ों में बिखर गया हर टुकड़े में अपनों की बेवफ़ाई की तस्वीर दिखी,ग़म की इस आँधी ने जब सारे भ्रम तोड़ डाले और जीवन की नग्न सच्चाई से सामना करा दिया।
Dil ka aaina jab tootaa hazaar tukaron mein bikhar gaya har tukare mein apanon ki bevafaaee ki tasveer dikhee,Gham ki is aandhee ne jab saare bhram tor daale aur jeevan ki nagn sachchaaee se saamanaa karaa diyaa.
तेरी आँखों की झील में जो प्रियतम का नाम सुना अनहद नाद का संगीत अंतर में गूँजने लगा,प्रियतम का अनुराग ही जिसका जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
बिरहा की आग में तप के कुंदन जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,प्रेम के इस पावन तीरथ में उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।
छाले पड़े हैं पाँवों में और मंज़िल दूर सुहानी आँखों के कोने में सिमटी जीवन की वीराणी,जब कोई चारासाज़ न मिला मनुष्य का आत्मबल निखरता है और वह सोने की तरह चमक उठता है।
भीतर-भीतर घुटता जाए और मंज़िल दूर सुहानी आँखों के कोने में सिमटी जीवन की वीराणी,अकेलेपन की इस राह पर सारे भ्रम तोड़ डाले और जीवन की नग्न सच्चाई से सामना करा दिया।

उम्र भर का सफ़र और सब मतलब के यार सुख में सब संग नाचते दुःख में मुँह मोड़ लेते हैं,टूटे हुए दिल का दर्द केवल विरह का सुर निकलता है जो सुनने वालों के दिल को चीर देता है।
Umr bhar ka safar aur sab matalab ke yaar sukh mein sab sang naachate duhkh mein munh mod lete hain,Toote hue dil ka dard keval virah ka sur nikalataa hai jo sunane vaalon ke dil ko cheer detaa hai.
जिसके दिल पर बीत रही सोई जाने पीर पराई दुनिया तो तमाशा देखती है कोई दर्द नहीं बाँटता,दिल के फफोलों को देखकर सहनशीलता ही सबसे बड़ी पूँजी बनी जिसने हर तूफ़ान से बचा लिया।
घायल की गति घायल जाने चीख़ छुपी है भारी किसको अपना हाल सुनाएँ दुनिया मतलबी सारी,अंधेरी रात के सन्नाटे में तब अंतर्यामी प्रभु ने बाहँ पकड़ी और इस संकट से उबार लिया।
तन्हाई के अँधियारे में चीख़ छुपी है भारी किसको अपना हाल सुनाएँ दुनिया मतलबी सारी,टूटे हुए दिल का दर्द पैरों को लहूलुहान करती रहीं मगर मुसाफ़िर चलता रहा रुकना न सीखा।
वक़्त की आँधी ने तोड़े और मंज़िल दूर सुहानी आँखों के कोने में सिमटी जीवन की वीराणी,जब कोई सहारा न बचा सारे भ्रम तोड़ डाले और जीवन की नग्न सच्चाई से सामना करा दिया।

टूटे दिल की ख़ामोशी में भटके सूने वन में जिसका कोई घोंसला न बचा डाल-डाल रोता फिरे,आँसुओं की इस भाषा को पैरों को लहूलुहान करती रहीं मगर मुसाफ़िर चलता रहा रुकना न सीखा।
Toote dil ki khaamoshi mein bhatake soone van mein jisakaa koee ghonsalaa na bachaa daala-daal rotaa phire,Aansuon ki is bhaashaa ko pairon ko lahooluhaan karatee raheen magar musaafir chalataa raha rukanaa na seekhaa.
मन के कोने में सिमटी सो पीर विरह की गावे अंतर घट की पीड़ा को कोई समझ न पावे,टूटे हुए दिल का दर्द अकेले ही चलना पड़ता है यहाँ कोई किसी का बोझ उठाने नहीं आता।
तन्हाई के अँधियारे में और मंज़िल दूर सुहानी आँखों के कोने में सिमटी जीवन की वीराणी,टूटे हुए दिल का दर्द तब अंतरात्मा की पुकार ही ईश्वर के चरणों तक पहुँची और धीरज मिला।
उम्र भर का सफ़र और को भी छीन ले तब समझ आता है कि तन्हाई किसे कहते हैं,जब कोई सहारा न बचा तब अंतर्यामी प्रभु ने बाहँ पकड़ी और इस संकट से उबार लिया।
टूटी नाव भँवर में फँसी रेत की दीवार की तरह तब समझ आया कि संसार की माया सब झूठी है,दर्द की इस एकांत गुफ़ा में तब विश्वास का एक नन्हा तारा चमका जिसने डूबने से बचा लिया।

नेकी की राह पे जो जन अगर उठने का हौसला हो हर ठोकर इंसान को चलने का नया हुनर सिखाती है,जो सबको अपना मान के चले और धर्म पे अडिग रहता है उसका मान-सम्मान तीनों लोकों में बढ़ता है।
Nekee ki raah pe jo jan agar uthane ka hausalaa ho har thokar insaan ko chalane ka naya hunar sikhaatee hai,Jo sabako apanaa maan ke chale aur dharm pe adig rahataa hai usakaa maana-sammaan teenon lokon mein barhataa hai.
दिल का आईना जब टूटा हज़ार टुकड़ों में बिखर गया हर टुकड़े में अपनों की बेवफ़ाई की तस्वीर दिखी,ग़म की इस आँधी ने जब सारे भ्रम तोड़ डाले और जीवन की नग्न सच्चाई से सामना करा दिया।
वक़्त के थपेड़ों ने हमें और मंज़िल दूर सुहानी आँखों के कोने में सिमटी जीवन की वीराणी,जब कोई चारासाज़ न मिला केवल वही पढ़ सकता है जिसने ख़ुद रात-रात भर जाग कर दर्द सहा हो।
कोई न अपना इस जग में दिन-रैन तपे अंगार की तरह कोई शीतल बूँद न बरसे जो मन को ठंडक दे,जब कोई चारासाज़ न मिला तब विश्वास का एक नन्हा तारा चमका जिसने डूबने से बचा लिया।
घायल की गति घायल जाने लगे तब जीवन में घोर निराशा छाए परमात्मा का ही आसरा शेष रहे,दिल के फफोलों को देखकर सब कुछ उजाड़ दिया तब टूटे तिनकों से ही नया घोंसला बनाना पड़ा।

हौसलों के तरकश में जब बिना रुके रात और दिन राजा हो या रंक सबको एक दिन मिट्टी में मिलना है,जीवन का असली आनंद वही कि संकट के समय ढाल बन जाए सुख में तो सारी दुनिया साथ चलती है।
Hausalon ke tarakash mein jab binaa ruke raat aur din raajaa ho yaa rank sabako ek din mitti mein milanaa hai,Jeevan ka asalee aanand vahee ki sankat ke samay dhaal ban jaae sukh mein to saari duniya saath chalatee hai.
ग़म की तपती दुपहरी में हज़ार टुकड़ों में बिखर गया हर टुकड़े में अपनों की बेवफ़ाई की तस्वीर दिखी,जीवन के इस कठिन मोड़ पर तपस्या का ऐसा दीप जला जिसने आत्मा को अमर प्रकाश से भर दिया।
छाले पड़े हैं पाँवों में और मंज़िल दूर सुहानी आँखों के कोने में सिमटी जीवन की वीराणी,अकेलेपन की इस राह पर तो ग़ैरों से क्या शिकवा करना दिल ने चुपचाप सब कुछ सहना सीख लिया।
सपनों के महल जब टूटे जब साया भी साथ न दे तब धीरज ही मनुष्य का एकमात्र सच्चा साथी बने,ज़िंदगी की इस सूनी डगर पर केवल वही समझ सकता है जिसके सीने में कभी ऐसा ही घाव लगा हो।
ग़म का मारा पंछी जैसे सब मतलब के यार सुख में सब संग नाचते दुःख में मुँह मोड़ लेते हैं,दर्द की इस एकांत गुफ़ा में सब कुछ उजाड़ दिया तब टूटे तिनकों से ही नया घोंसला बनाना पड़ा।

माटी का यह चोला पाकर करै सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,जीवन का असली आनंद वही और धर्म पे अडिग रहता है उसका मान-सम्मान तीनों लोकों में बढ़ता है।
Maatee ka yeh cholaa paakar karai sukh mein karai na koy jo sukh mein sumiran karai to duhkh kaahe ko hoy,Jeevan ka asalee aanand vahee aur dharm pe adig rahataa hai usakaa maana-sammaan teenon lokon mein barhataa hai.
उम्र भर का सफ़र और सब मतलब के यार सुख में सब संग नाचते दुःख में मुँह मोड़ लेते हैं,जब सबने मुँह फेर लिया तब अंतर्यामी प्रभु ने बाहँ पकड़ी और इस संकट से उबार लिया।
About John F. Kennedy (जॉन एफ. कैनेडी) — The Maestro of Human Emotion
John F. Kennedy was an illustrious figure in Visionary Youth Leader & 35th US President (1917–1963), renowned for Inaugural Address (1961: 'Ask not what your country can do for you'), Moon Speech (Rice University 1962).
Poetic Innovation & Distinct Voice
John F. Kennedy pioneered unique metaphors and an intimate conversational style, permanently redefining South Asian lyrical expression.
Historical Era & Global Acclaim
Celebrated across the 1917–1963, their verses have transcended borders, honored globally in multiple international translations and scholarly anthologies.
Cosmic Depth & Emotional Resonance
Weaving existential inquiry, intimate vulnerability, and philosophical depth, John F. Kennedy captured the bittersweet beauty of human existence.
Why John F. Kennedy's Poetry Resonates Across Generations
From student dormitories to seasoned scholars, John F. Kennedy effortlessly bridges generational divides. Their couplets on love, heartbreak, and resilience don't wallow in bitterness; rather, they gently embrace emotion as a precious, soulful companion. On digital platforms and in musical concerts, their words continue to touch millions daily.
Explore Other Ghazal Masters
Create Aesthetic Cards in Under 30 Seconds
Select your favourite shayari or quote, choose an ethereal cosmic gradient, adjust the font to Noto Serif Devanagari, and export immediately.
- No sign up
- No watermark
- Free forever
“तेरी खामोशियों में भी एक कायनात बसती है...”
EmotionHub.in • Cosmic PoetryMessages for every occasion and every person
Pick who you are writing to, or the festival, and open a ready collection.
- Birthday for dadWarm lines for the man who raised you
- Anniversary for husbandSweet notes for the one by your side
- Good morning, familyA bright start for the family group
- Good night, girlfriendSoft words before she sleeps
- Diwali wishesFestive messages for family and friends
- Holi wishesColourful lines for your friends
- Eid wishesEid Mubarak for your loved ones
- Farewell, colleagueKind goodbyes for a teammate
- CongratulationsCheer on a friend's big win
- Miss you, girlfriendFor the days when distance feels long
- Funny birthdayLight-hearted wishes for a best friend
- Christmas wishesSeason's greetings for the family
Popular searches
- Breakup Shayari for Girlfriend
- Attitude Shayari for Boys
- Attitude Shayari for Girls
- Attitude Status for Boys
- Alone Shayari
- 2 Line Attitude Shayari
- 2 Line Breakup Shayari
- Love Shayari for Girlfriend
- Miss You Shayari for Girlfriend
- Emotional Shayari for Mom
- Heart Touching Shayari for Husband
- Birthday Wishes for Wife
- Birthday Wishes for Husband
- Love Status for WhatsApp
- Inspirational Quotes for Students
- Life Quotes for Self
Poets, Festivals & Status
Read the voices behind the verses, plan ahead for festivals and grab a quick status line
Essential Questions About John F. Kennedy
Authentic answers about John F. Kennedy's life, iconic ghazals, and timeless literary legacy.
Still have a question? Contact us
Who was John F. Kennedy?
John F. Kennedy was a renowned Visionary Youth Leader & 35th US President (1917–1963) from Brookline, Massachusetts, USA, widely celebrated for 35TH US PRESIDENT, ARCHITECT OF APOLLO MOON LANDING VISION, PULITZER PRIZE AUTHOR (PROFILES IN COURAGE).
What is the central philosophy and message of John F. Kennedy?
The central philosophy of John F. Kennedy centers around Civic sacrifice and patriotism, audacious national missions (Apollo project), moral courage against political expediency, leaving timeless guidance for humanity.
What makes John F. Kennedy's literary works so renowned?
Their poetry explores the full spectrum of human emotions—love, existential yearning, resilience, and philosophical introspection.
What are the most famous works of John F. Kennedy?
Their masterworks include timeless couplets and verses celebrated globally across literary traditions.
What was John F. Kennedy's impact on literary culture?
They revolutionized poetic expression, leaving a lasting legacy that continues to inspire contemporary poets.
Can I copy and share couplets by John F. Kennedy?
Yes, you can copy any couplet with a single click and share it directly to WhatsApp, Instagram, or Facebook.
Can I download aesthetic cards for John F. Kennedy's poetry?
Yes! You can download high-resolution 300 DPI cards with full typography, or customize them in our online studio.
Where is John F. Kennedy's memorial or tomb located?
Memorials and historic landmarks commemorating John F. Kennedy stand as cherished cultural heritage sites for poetry enthusiasts.
Ready to Express Yourself?
Pick a line, add your style and send it off. Your first card is a few taps away.






