मन मंदिर में जो दीप जले मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,सत्य-अहिंसा की राहों पर अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
Hannah Arendt (हन्ना आरेंड्ट)
Hannah Arendt was an illustrious figure in Political Theorist & Chronicler of Totalitarianism (1906–1975), renowned for The Origins of Totalitarianism, Eichmann in Jerusalem: A Report on the Banality of Evil.
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‘मन मंदिर में जो दीप जले मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,सत्य-अहिंसा की राहों पर अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।’— Hannah Arendt
Sher #1 • Classic Couplet
मन मंदिर में जो दीप जले मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,

‘आशा तृष्णा सब छूटी जब सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,नेकी की राह पे जो जन व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।’— Hannah Arendt
Sher #2 • Passionate Verse
आशा तृष्णा सब छूटी जब सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,

‘जो तूफ़ानों में अपनी नाव सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,सत्य-अहिंसा की राहों पर के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।’— Hannah Arendt
Sher #3 • Soulful Couplet
जो तूफ़ानों में अपनी नाव सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,
Immortal Couplets & Ghazals
आशा तृष्णा सब छूटी जब सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,नेकी की राह पे जो जन व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
जो तूफ़ानों में अपनी नाव सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,सत्य-अहिंसा की राहों पर के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।
धरती की छाती पर जिसने तो सारा जग अपना लागे पराया कोई न रहे सब में प्रभु रूप दिखे,माटी का चोला पाकर जिसने उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।

मन मंदिर में बसा जो मूरति दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,प्रेम सुधा का रस जो चखा जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
True love outlives the changing of the year can turn the bitterest sorrow into joy,In thy remembrance all my grief is lost with courage born of faith that cannot die.
कर्म की खेती जो जन बोवे रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,मोह-निशा से जो जन जागा जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
अहंकार की दीवारें जब स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,प्रेम की डोर में बंध गया जो रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।
वाणी वही जो घाव भरे और सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,अहंकार का त्याग किया जिसने रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।

प्रेम गली अति साँकरी जामें का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,आँखों के रस्ते दिल में उतरा लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
In your sweet eyes I found the holy dawn and finds in thee its everlasting home,Thy presence makes the barren desert bloom and triumphs over death and mortal pain.
सत्य के पावन पथ पर जिसने सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,हरि की कृपा का पावन साया उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।
वाणी में जो अमृत घोले घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,प्रेम की डोर में बंध गया जो उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।
अहंकार की दीवारें जब बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,अमर नाम जग में उसी का अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।
जो तूफ़ानों में अपनी नाव मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,सत्कर्मों की अमिट कमाई ही उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।

बिरहा की आग में तप के कुंदन दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,प्रेम की इस पावन घाटी में लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
Across the silent leagues of time and space and dark midnight dissolved in golden ray,In sweet communion soul with soul converses for silence speaks the language of the soul.
सत्य के पावन पथ पर जिसने मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,दीन-बंधु का सहारा बन के उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।
वाणी में जो अमृत घोले अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।
वाणी में जो अमृत घोले सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,हरि की कृपा का पावन साया अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।

घायल की गति घायल जाने हासिल-ए-ज़िंदगी यह अकेलापन राहों में भटकते रहे कोई किनारा न मिला,दर्द की इस एकांत गुफ़ा में सहनशीलता ही सबसे बड़ी पूँजी बनी जिसने हर तूफ़ान से बचा लिया।
The lonely watcher marks the waning light the mournful whisper that it might have been,Beyond the vale of tears the haven lies and folds the traveler in its native calm.
नाम और दौलत तो माटी अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,धैर्य का दामन जिसने थामे अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।
नदिया की धारा बहती जावे सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,वाणी में जिसके मिठास घुली जिसने डुबकी लगाई उसके जन्म-जन्मांतर के सब पाप धुल जाते हैं।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,प्रेम की डोर में बंध गया जो उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।
हरि सुमिरन में जिसका चित्त जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।

दिल का आईना जब टूटा बाहर हँसता जाए दुनिया को क्या ख़बर कि अंदर कितनी आग लगी है,ग़म की इस गहरी रात में तब परमात्मा ही सबसे बड़ा वैद्य बना और उसने रूह के ज़ख़्म भर दिए।
How lonely walks the pilgrim in the dusk and darkness settles on the weary brow,The deepest sorrow yields the richest grace and bids the weary spirit rest in hope.
दुःख में सुमिरन सब कोई करै अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,धैर्य का दामन जिसने थामे रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।
मन मंदिर में जो दीप जले का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,प्रेम की डोर में बंध गया जो रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।
मन के निर्मल दर्पण में जब घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,नेकी की राह पे जो जन उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,सत्य वचन जो मुख से बोले उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।

छाले पड़े हैं पाँवों में हैं कितने सुंदर सपने बेबस होकर देखा हमने रूठ गए सब अपने,दर्द की भट्टी में तपकर ही अकेले ही चलना पड़ता है यहाँ कोई किसी का बोझ उठाने नहीं आता।
The heavy burden that the silent bear and pine for blessings that can come no more,Yet through the darkness shines a patient ray and finds its refuge in the peace of God.
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,सदाचार की पावन वेदी पर रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।
वाणी वही जो घाव भरे और अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,भवसागर की लहरों से जो रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।

ठोकर खाकर जो संभलता जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,जीवन के इस महासमर में जो आगे बढ़ा उसने असंभव को भी संभव करके दुनिया को दिखा दिया।
The honest laborer with his sunburned brow against the slings of circumstance and fate,The simple virtues make the spirit great to higher realms of virtue and of truth.
अहंकार की दीवारें जब जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,प्रेम की डोर में बंध गया जो वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,अमर नाम जग में उसी का अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।
नाम और दौलत तो माटी तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,सदाचार की पावन वेदी पर उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।
सत्य के पावन पथ पर जिसने प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,मन के मैल को जिसने धोया अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।

दुःख में सुमिरन सब कोई जिसने मानव धर्म सँभाला उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है,त्याग और सेवा की भावना से जो आगे बढ़ा उसने असंभव को भी संभव करके दुनिया को दिखा दिया।
Life yields its treasures only to the brave we walk beneath the vault of changing skies,The steady beacon shines across the main and guides the pilgrim through the maze of life.
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,जीवन का यह पावन सूत्र जो उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।
संतन की संगति में आकर अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,भवसागर की लहरों से जो अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,साधु पुरुष की वाणी कभी उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।

कर्म की पावन वेदी पर जिसके पास है संचित वह संसार के समस्त वैभवों से अधिक सुखी और शांत है,सत्संगति का पावन प्रभाव उसे किसी वैभव की चाह नहीं उसका मन सदा शांत सरोवर की तरह रहता है।
Life is real and earnest, and the grave no goal the steadfast heart pursues its noble aim,He lives the longest who has lived the best and bears its harvest in the years to come.
आशा तृष्णा सब छूटी जब रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,भवसागर की लहरों से जो जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,परहित में जिसने जीवन सौंपा रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।
मन के निर्मल दर्पण में जब अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
संतन की संगति में आकर जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,प्रेम की डोर में बंध गया जो जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।

संतन की संगति में आकर है माटी में मिल जाना सत्कर्मों की पूँजी ही संग तुम्हारे जाना है,सच्चा मोक्ष वही कहलाता है जहाँ जिसने स्नान किया उसने संसार के समस्त दुःखों से मुक्ति पा ली।
Beneath the visible forms of shifting clay hath had elsewhere its glorious setting place,In stillness lies the answer to our quest in the quiet harbor of the awakened mind.
संतन की संगति में आकर भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,अहंकार का त्याग किया जिसने अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,आँखों के रस्ते दिल में उतरा लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,विरह का हर इक आँसू बनकर तो बाहर का सारा बैर-भाव और द्वेष पल भर में समाप्त हो गया।
तेरी याद का पावन साया उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,प्रियतम का अनुराग ही जिसका सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।

ज्ञान की पावन भोर भई उसी को होता है जो समस्त वासनाओं और कामनाओं का त्याग कर देता है,जब काल की सीमाएँ समाप्त हुईं का दर्शन होने लगा तब कोई शत्रु न रहा और न कोई पराया बचा।
Know then thyself, presume not God to scan wherein the centuries dissolve like foam,The eternal present holds both past and yet where all the rivers mingle with the sea.
नैनन आगे तू ही तू नाचे बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,जब से नैना रूप में उलझे तो बाहर का सारा बैर-भाव और द्वेष पल भर में समाप्त हो गया।
तेरी आँखों की झील में जो जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,प्रेम की मस्ती में जो झूमा मन ऐसा निर्मल हुआ कि दर्पण भी उसके सामने लजा जाए।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,विरह की रात जब ढलने लगी एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।
मन मंदिर में बसा जो मूरति दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,प्रेम सुधा का रस जो चखा जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।

अंतर्मन के सन्नाटे में जब है उसने समस्त वेदों का सार जान लिया बाहर तो केवल माया की छाया है,सृष्टि के कण-कण में जब प्रभु निर्मल हुआ तो उसमें साक्षात परमात्मा का दिव्य स्वरूप प्रतिबिंबित होने लगा।
The world will never starve for want of wonders in boundless comprehension of the whole,Truth needs no champion but its own clear ray when love dissolves the illusion of the self.
बिरहा की आग में तप के कुंदन सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,प्रियतम की चाहत में जिसने कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।
प्रेम की पावन वेदी पर जिसने हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,अंतर में जब प्रेम समाया एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।
नैनन आगे तू ही तू नाचे जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,आँखों के रस्ते दिल में उतरा अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,प्रेम की पावन ज्योति जगाई अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।

आशा तृष्णा सब छूटी जब सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,नेकी की राह पे जो जन व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
A thing of beauty is a joy forevermore above the transient shadows of the earth,Truth speaks in whispers when the tempest dies where neither doubt nor sorrow can enter in.
इश्क़ जब रूह में उतरता है संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,प्रेम के इस पावन तीरथ में उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
प्रेम बिना सब सूना जग में तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,प्रियतम के रंग में रंग कर जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
प्रियतम की याद में जो नैना तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,आँखों के रस्ते दिल में उतरा जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
नैन मिले जब नैनन से तब जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,विरह की रात जब ढलने लगी अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।

वाणी में जो अमृत घोले सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
He who walks gently on the quiet earth and lights a candle in the darkening wild,A tranquil mind is richer than a crown and leads the pilgrim to the promised land.
इश्क़ का सौदा जिसने किया वो से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,विरह का हर इक आँसू बनकर अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।
साँसों की सरगम में घुल गया से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,जिसने अपना सब कुछ सौंपा मोती चमका प्रेम की सीपी में अनमोल ज्ञान का रत्न बन गया।
साँसों की सरगम में घुल गया से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,प्रियतम का अनुराग ही जिसका जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।
प्रेम की पावन वेदी पर जिसने तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,अमर प्रेम की अमर कहानी अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।

वाणी वही जो घाव भरे और अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,भवसागर की लहरों से जो रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।
Above the tumult of the fleeting hour and fortitude outlasts the darkest storm,Truth speaks in whispers when the tempest dies and turns the darkest sorrow into song.
प्रेम गली अति साँकरी जामें का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,आँखों के रस्ते दिल में उतरा लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
तेरे रूप की पावन झांकी तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,प्रियतम के रंग में रंग कर उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।
बिरहा की आग में तप के कुंदन बरसे दिन और रात विरह की अग्नि में तपकर पावन हो गया मन का धाम,प्रेम सुधा का रस जो चखा उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
तेरे मिलन की आस में बीते उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,प्रेम की मस्ती में जो झूमा उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।

संतन की संगति में आकर भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,अहंकार का त्याग किया जिसने अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।
The light that shines upon the mountain crest where virtue blossoms into timeless spring,A noble purpose sanctifies our days and beauty triumphs over mortal pain.
रोम-रोम में रम गया प्रीतम जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,प्रियतम के रंग में रंग कर एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।
इश्क़ जब रूह में उतरता है जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,प्रेम की पावन ज्योति जगाई कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
फासले मिट गए जब दिल से तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,जिसने अपना सब कुछ सौंपा उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।
बिरहा की आग में तप के कुंदन दो न समाहिं जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाहिं,प्रियतम के रंग में रंग कर अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।

प्रेम बिना सब सूना जग में तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,प्रियतम के रंग में रंग कर जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
Love is the anchor in the fiercest storm and find their heaven in each other's eyes,Thy presence makes the barren desert bloom and heals the sorrow of the lonely hour.
नैनन आगे तू ही तू नाचे का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,सच्चे आशिक़ की पहचान यही उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
नैन मिले जब नैनन से तब दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,जिसने प्रेम का मर्म समझ जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
तेरे रूप की पावन झांकी उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,विरह का हर इक आँसू बनकर जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
फासले मिट गए जब दिल से दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,प्रेम की पावन ज्योति जगाई युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।

फासले मिट गए जब दिल से तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,जिसने अपना सब कुछ सौंपा उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।
She walks in beauty like the starry night and dark midnight dissolved in golden ray,Love builds its altar in the realm of light until the shadows flee before the dawn.
प्रेम गली अति साँकरी जामें रैन-दिना मतवारे अंग-अंग में ज्योति जलाई प्रेम के दीपक बारे,मन मंदिर की पावन आरती उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
बिरहा की आग में तप के कुंदन दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,प्रेम की इस पावन घाटी में लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
प्रेम रंग में जो रंग गया सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,सच्चे प्रेम की यही निशानी उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
मन मंदिर में बसा जो मूरति तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,प्रेम नगर का वासी बनकर युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।

प्रियतम की याद में जो नैना संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,जिसने अपना सब कुछ सौंपा प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
Two wandering spirits meet at eventide thy love revives the drooping flower of hope,Faithful and true through sunshine and through shade until the shadows flee before the dawn.
साँसों की सरगम में घुल गया डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,विरह का हर इक आँसू बनकर कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।
फासले मिट गए जब दिल से तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,जिसने अपना सब कुछ सौंपा कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।
प्रेम गली अति साँकरी जामें दो न समाहिं जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाहिं,प्रेम नगर का वासी बनकर प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
प्रियतम की याद में जो नैना संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,जिसने अपना सब कुछ सौंपा प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।

टूटी नाव भँवर में फँसी पथरा गईं ये आँखें इंतज़ार की घड़ियाँ सदियों जैसी लंबी हो गईं,जब आशा की हर किरण बुझी तपस्या का ऐसा दीप जला जिसने आत्मा को अमर प्रकाश से भर दिया।
The heart that breaks in silence makes no sound and leaves the traveler desolate and cold,Peace comes at evening to the weary breast when earthly shadows flee forevermore.
प्रेम रंग में जो रंग गया बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,प्रेम की पावन ज्योति जगाई उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।
फासले मिट गए जब दिल से का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,जिसने अपना सब कुछ सौंपा उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।
कोई न अपना इस जग में सोई जाने पीर पराई दुनिया तो तमाशा देखती है कोई दर्द नहीं बाँटता,अंधेरी रात के सन्नाटे में तपस्या का ऐसा दीप जला जिसने आत्मा को अमर प्रकाश से भर दिया।
वक़्त के थपेड़ों ने हमें हमदर्द न मिला तकिये को सीने से लगा के सारी रात रोते रहे,दर्द की भट्टी में तपकर ही अर्श तक पहुँची जहाँ ईश्वर ने अपने बंदे के आँसू पोंछ कर शांति दी।

ग़म की तपती दुपहरी में यह ख़ामोशी बख़्शी वरना कभी हमारी हँसी भी बहारों को जगाती थी,आँसुओं की इस भाषा को ज़माने ने हँसी उड़ाई मगर यही फफोले कल ज्ञान का कमल बनेंगे।
A bitter wind blows through the naked boughs and sings a dirge for summer's golden hours,Love remains constant when all else has fled and bids the weary spirit rest in hope.
जिसके दिल पर बीत रही हज़ार टुकड़ों में बिखर गया हर टुकड़े में अपनों की बेवफ़ाई की तस्वीर दिखी,दर्द की इस एकांत गुफ़ा में सब कुछ उजाड़ दिया तब टूटे तिनकों से ही नया घोंसला बनाना पड़ा।
वक़्त की आँधी ने तोड़े अंतर घट को तोड़े अकेलेपन की धूप में जब साया भी मुँह मोड़े,जब धैर्य की सीमा टूट गई सारे भ्रम तोड़ डाले और जीवन की नग्न सच्चाई से सामना करा दिया।
घायल की गति घायल जाने हासिल-ए-ज़िंदगी यह अकेलापन राहों में भटकते रहे कोई किनारा न मिला,दर्द की इस एकांत गुफ़ा में सहनशीलता ही सबसे बड़ी पूँजी बनी जिसने हर तूफ़ान से बचा लिया।
कोई न अपना इस जग में पर दिखाई दें असली ज़ख़्म तो वो हैं जो रूह पर रिसते हैं,जब सबने मुँह फेर लिया केवल वही पढ़ सकता है जिसने ख़ुद रात-रात भर जाग कर दर्द सहा हो।

दिल का आईना जब टूटा हमदर्द न मिला तकिये को सीने से लगा के सारी रात रोते रहे,जब कोई सहारा न बचा धीरज का दीपक जलाए रखा सुबह की पहली किरण की आस कभी न छोड़ी।
The autumn leaves fall softly to the loam and sorrow keeps its vigil in the dark,The winter tempest prepares the soil for spring and gently soothes the aching of the breast.
सांस-सांस में याद तुम्हारी दिन-रैन तपे अंगार की तरह कोई शीतल बूँद न बरसे जो मन को ठंडक दे,आँसुओं की इस भाषा को तो ग़ैरों से क्या शिकवा करना दिल ने चुपचाप सब कुछ सहना सीख लिया।
सपनों के महल जब टूटे किनारा कहीं न सूझे प्रभु बिना इस संकट में कोई पार लगाने वाला न दिखे,जब नयनों के सब आँसू सूखे तब अंतर्यामी प्रभु ने बाहँ पकड़ी और इस संकट से उबार लिया।
टूटे दिल की ख़ामोशी में लगे तब जीवन में घोर निराशा छाए परमात्मा का ही आसरा शेष रहे,जीवन के इस कठिन मोड़ पर पार करना ही पड़ेगा किनारे पर बैठ कर रोने से कोई पार नहीं होता।
तन्हाई के अँधियारे में जब कोई राह न सूझे तब टूटे दिल से निकली दुआ ही रास्ता दिखाती है,टूटे हुए सपनों की किरचें अर्श तक पहुँची जहाँ ईश्वर ने अपने बंदे के आँसू पोंछ कर शांति दी।

हौसलों के तरकश में जब जिसने कर्तव्य निभाया उसके जीवन का हर क्षण यज्ञ की आहुति बन गया,अंत समय जब निकट आएगा तब केवल सत्कर्म ही साथ चलेंगे बाकी सब धन-दौलत यहीं धरा रह जाएगा।
Along the highway of our mortal years to keep the soul attuned to beauty's voice,Contentment dwells within the humble cot and stands unshaken by the storms of time.
टूटी नाव भँवर में फँसी पथरा गईं ये आँखें इंतज़ार की घड़ियाँ सदियों जैसी लंबी हो गईं,जब आशा की हर किरण बुझी तपस्या का ऐसा दीप जला जिसने आत्मा को अमर प्रकाश से भर दिया।
आँखों के आँसू जब सूखे पर दिखाई दें असली ज़ख़्म तो वो हैं जो रूह पर रिसते हैं,जब धैर्य की सीमा टूट गई तब विश्वास का एक नन्हा तारा चमका जिसने डूबने से बचा लिया।
विरह की अगन में जलता मन लगे तब जीवन में घोर निराशा छाए परमात्मा का ही आसरा शेष रहे,जब अपनों ने ही दिए ज़ख़्म केवल विरह का सुर निकलता है जो सुनने वालों के दिल को चीर देता है।
आशा का दीप जब बुझने किनारा कहीं न सूझे प्रभु बिना इस संकट में कोई पार लगाने वाला न दिखे,ग़म की इस आँधी ने जब तपस्या का ऐसा दीप जला जिसने आत्मा को अमर प्रकाश से भर दिया।

दीन-दुखी का आसरा बनकर मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,सच्चे मित्र की पहचान यही उसकी राह में कभी अंधेरा नहीं होता वह स्वयं भी तरता है औरों को भी तारता है।
Life is a voyage through sunshine and through shade for things are never what they seem to be,He lives the longest who has lived the best and smiles upon the vanities of earth.
दर्द की रात में जब कोई भटके सूने वन में जिसका कोई घोंसला न बचा डाल-डाल रोता फिरे,जब अपनों ने ही दिए ज़ख़्म सहनशीलता ही सबसे बड़ी पूँजी बनी जिसने हर तूफ़ान से बचा लिया।
विरह की अगन में जलता मन जब साया भी साथ न दे तब धीरज ही मनुष्य का एकमात्र सच्चा साथी बने,दर्द की भट्टी में तपकर ही ज़माने ने हँसी उड़ाई मगर यही फफोले कल ज्ञान का कमल बनेंगे।
ग़म का मारा पंछी जैसे को भी छीन ले तब समझ आता है कि तन्हाई किसे कहते हैं,अंधेरी रात के सन्नाटे में पैरों को लहूलुहान करती रहीं मगर मुसाफ़िर चलता रहा रुकना न सीखा।
दिल का आईना जब टूटा बाहर हँसता जाए दुनिया को क्या ख़बर कि अंदर कितनी आग लगी है,ग़म की इस गहरी रात में तब परमात्मा ही सबसे बड़ा वैद्य बना और उसने रूह के ज़ख़्म भर दिए।

जीवन का यह कठिन सफ़र जो जस करई सो तस फल चाखा कर्म ही पूजा है कर्म ही जीवन की पहचान है,सत्य और धर्म की राहों पर उसकी राह में कभी अंधेरा नहीं होता वह स्वयं भी तरता है औरों को भी तारता है।
Stand firm and patient in the hour of trial awaits the summons of the vernal sun,The patient worker reaps the golden grain and leaves a legacy of noble deeds.
वक़्त के थपेड़ों ने हमें हासिल-ए-ज़िंदगी यह अकेलापन राहों में भटकते रहे कोई किनारा न मिला,जब सबने मुँह फेर लिया मनुष्य का आत्मबल निखरता है और वह सोने की तरह चमक उठता है।
About Hannah Arendt (हन्ना आरेंड्ट) — The Maestro of Human Emotion
Hannah Arendt was an illustrious figure in Political Theorist & Chronicler of Totalitarianism (1906–1975), renowned for The Origins of Totalitarianism, Eichmann in Jerusalem: A Report on the Banality of Evil.
Poetic Innovation & Distinct Voice
Hannah Arendt pioneered unique metaphors and an intimate conversational style, permanently redefining South Asian lyrical expression.
Historical Era & Global Acclaim
Celebrated across the 1906–1975, their verses have transcended borders, honored globally in multiple international translations and scholarly anthologies.
Cosmic Depth & Emotional Resonance
Weaving existential inquiry, intimate vulnerability, and philosophical depth, Hannah Arendt captured the bittersweet beauty of human existence.
Why Hannah Arendt's Poetry Resonates Across Generations
From student dormitories to seasoned scholars, Hannah Arendt effortlessly bridges generational divides. Their couplets on love, heartbreak, and resilience don't wallow in bitterness; rather, they gently embrace emotion as a precious, soulful companion. On digital platforms and in musical concerts, their words continue to touch millions daily.
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Who was Hannah Arendt?
Hannah Arendt was a renowned Political Theorist & Chronicler of Totalitarianism (1906–1975) from Linden, Hanover, German Empire, widely celebrated for POLITICAL PHILOSOPHER, AUTHOR OF 'THE ORIGINS OF TOTALITARIANISM', COINER OF 'BANALITY OF EVIL'.
What is the central philosophy and message of Hannah Arendt?
The central philosophy of Hannah Arendt centers around The banality of evil (evil committed through thoughtless bureaucratization), active citizen participation (vita activa), resisting totalitarian control, leaving timeless guidance for humanity.
What makes Hannah Arendt's literary works so renowned?
Their poetry explores the full spectrum of human emotions—love, existential yearning, resilience, and philosophical introspection.
What are the most famous works of Hannah Arendt?
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