क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,नेकी की राह पे जो जन व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
Chhatrapati Shivaji Maharaj (छत्रपति शिवाजी महाराज)
Chhatrapati Shivaji Maharaj was an illustrious figure in Founder of Maratha Swarajya & Military Genius (1630–1680), renowned for Rajyabhisheka declarations, Adnyapatra (Royal Edict on Governance).

क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,नेकी की राह पे जो जन व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
— CHHATRAPATI SHIVAJI MAHARAJ • 1630–1680

क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,नेकी की राह पे जो जन व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
— CHHATRAPATI SHIVAJI MAHARAJ • 1630–1680
Download Aesthetic Chhatrapati Shivaji Maharaj Story Cards

‘क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,नेकी की राह पे जो जन व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।’— Chhatrapati Shivaji Maharaj
Sher #1 • Classic Couplet
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,

‘जो तूफ़ानों में अपनी नाव भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,सत्य वचन जो मुख से बोले जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।’— Chhatrapati Shivaji Maharaj
Sher #2 • Passionate Verse
जो तूफ़ानों में अपनी नाव भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,

‘माटी का यह देह बना है सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,दीन-बंधु का सहारा बन के अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।’— Chhatrapati Shivaji Maharaj
Sher #3 • Soulful Couplet
माटी का यह देह बना है सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,

‘प्रेम की गंगा अंतर में बहे जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,धैर्य का दामन जिसने थामे लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।’— Chhatrapati Shivaji Maharaj
Sher #4 • Philosophical Verse
प्रेम की गंगा अंतर में बहे जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,
Immortal Couplets & Ghazals
जो तूफ़ानों में अपनी नाव भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,सत्य वचन जो मुख से बोले जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
माटी का यह देह बना है सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,दीन-बंधु का सहारा बन के अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
प्रेम की गंगा अंतर में बहे जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,धैर्य का दामन जिसने थामे लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।

प्रेम की पावन वेदी पर जिसने तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,विरह की रात जब ढलने लगी उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।
Prem ki paavan vedee par jisane tera naam sanehee har ek dharakan mein teri hi vandanaa goonjatee hai,Virah ki raat jab dhalane lagee utaaroon har pal main to apane salone shyaam ki daasee ban gayi.
जो तूफ़ानों में अपनी नाव घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,नेकी की राह पे जो जन उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।
नाम और दौलत तो माटी रमा रहे हर दम उसे संसार की कोई चिंता कभी सता नहीं सकती,सदाचार की पावन वेदी पर निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,अहंकार का त्याग किया जिसने उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।
दुःख में सुमिरन सब कोई करै निर्भय पाँव धरे काल की कठिन चाल भी उसका कुछ न बिगाड़ सके,परहित में जिसने जीवन सौंपा उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।

साँसों की सरगम में घुल गया से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,प्रेम का दीपक अंतर में जो उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
Saanson ki saragam mein ghul gaya se roop salonaa roma-rom mein ram gaya preetam ka paavan konaa,Prem ka deepak antar mein jo use indr ka amrit bhi pheekaa lage woh to prem ras mein tript ho gaya.
माटी का यह देह बना है सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,सत्य-अहिंसा की राहों पर अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
साधु-संगत की छाया में जो सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करै तो दुःख काहे को होय,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।
नदिया की धारा बहती जावे प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,वाणी में जिसके मिठास घुली निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।
सत्य का दीप जब जलता है सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,हृदय में जिसके दया बसी है उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।

रोम-रोम में रम गया प्रीतम तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,सच्चे आशिक़ की पहचान यही जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।
Roma-rom mein ram gaya preetam tera naam sanehee har ek dharakan mein teri hi vandanaa goonjatee hai,Sachche aashiq ki pahachaan yahee jalaae rakhegaa usake jeevan path par kabhee andhakaar nahi aa sakataa.
सतगुरु मिले तो राह दिखावे प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,सत्य-अहिंसा की राहों पर मानव धर्म निभाया उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है।
सत्य का दीप जब जलता है अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,अहंकार का त्याग किया जिसने उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।
नाम और दौलत तो माटी सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,सत्य वचन जो मुख से बोले उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।
सत्य का दीप जब जलता है जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,मन के मैल को जिसने धोया निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।

दिल का आईना जब टूटा सोई जाने पीर पराई दुनिया तो तमाशा देखती है कोई दर्द नहीं बाँटता,जब धैर्य की सीमा टूट गई चलते-चलते पाँव के छाले भी अब मंज़िल का पता पूछने लगे हैं।
Dil ka aaina jab tootaa soee jaane peer paraaee duniya to tamaashaa dekhatee hai koee dard nahi baantataa,Jab dhairy ki seemaa toot gayi chalate-chalate paanv ke chhaale bhi ab manzil ka pataa poochhane lage hain.
आशा तृष्णा सब छूटी जब मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,प्रेम की डोर में बंध गया जो जिसने डुबकी लगाई उसके जन्म-जन्मांतर के सब पाप धुल जाते हैं।
साधु-संगत की छाया में जो घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,सत्य वचन जो मुख से बोले उसने परमानंद पाया अहंकार मिटते ही अंतर का सच्चा सुख मिलता है।
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,प्रेम की डोर में बंध गया जो परलोक में संग जाएगी बाकी सब माया-मोह यहीं धरा रह जाएगा।
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी निर्भय पाँव धरे काल की कठिन चाल भी उसका कुछ न बिगाड़ सके,हरि की कृपा का पावन साया जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।

उम्र भर का सफ़र और जब कोई राह न सूझे तब टूटे दिल से निकली दुआ ही रास्ता दिखाती है,टूटे दिल की इस वीणा से तब अंतरात्मा की पुकार ही ईश्वर के चरणों तक पहुँची और धीरज मिला।
Umr bhar ka safar aur jab koee raah na soojhe tab toote dil se nikalee dua hi raasta dikhaatee hai,Toote dil ki is veenaa se tab antaraatmaa ki pukaar hi eeshvar ke charanon tak pahunchee aur dheeraj mila.
आशा तृष्णा सब छूटी जब प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,नेकी की राह पे जो जन उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
प्रेम की गंगा अंतर में बहे तो सारा जग अपना लागे पराया कोई न रहे सब में प्रभु रूप दिखे,सत्कर्मों की अमिट कमाई ही लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।
आशा तृष्णा सब छूटी जब अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,सत्य वचन जो मुख से बोले रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।
नाम और दौलत तो माटी माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,परहित में जिसने जीवन सौंपा उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।

कोई न अपना इस जग में जब कोई राह न सूझे तब टूटे दिल से निकली दुआ ही रास्ता दिखाती है,दर्द का यह गहरा सागर तब प्रभु कृपा की वर्षा हुई और जलते हुए मन को शांति मिल गई।
Koee na apanaa is jag mein jab koee raah na soojhe tab toote dil se nikalee dua hi raasta dikhaatee hai,Dard ka yeh gaharaa saagar tab prabhu kripaa ki varshaa hui aur jalate hue man ko shaanti mil gayi.
जो तूफ़ानों में अपनी नाव प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,सत्य-अहिंसा की राहों पर रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।
अहंकार की दीवारें जब घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,साधु पुरुष की वाणी कभी अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,शांति और संतोष का धन जो जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
वाणी वही जो घाव भरे और अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।

अहंकार की दीवारें जब जिसने कर्तव्य निभाया उसके जीवन का हर क्षण यज्ञ की आहुति बन गया,सदाचार के पावन नियमों पर और अडिग रहा पहाड़ की तरह तूफ़ान भी उसके सामने नतमस्तक हो जाते हैं।
Ahankaar ki deevaaren jab jisane kartavy nibhaayaa usake jeevan ka har kshan yajny ki aahuti ban gaya,Sadaachaar ke paavan niyamon par aur adig raha pahaar ki tarah toofaan bhi usake saamane natamastak ho jaate hain.
मन के निर्मल दर्पण में जब अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,अमर नाम जग में उसी का जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।
संतन की संगति में आकर मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।
अहंकार की दीवारें जब सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,सत्कर्मों की अमिट कमाई ही व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी मन का मैल धुलावे पारस का परस पाकर जैसे लोहा कंचन हो जावे,साधु पुरुष की वाणी कभी लगा सदा के लिए वह भवसागर की भीषण लहरों से पार उतर जाता है।

जीवन का यह कठिन सफ़र मेहनत की राह पे चला उसने बंजर धरती से भी सोना उपजा के दिखा दिया,जीवन के इस महासमर में विजय उसी की होती है जो सत्य और न्याय के पक्ष में अविचल खड़ा रहता है।
Jeevan ka yeh kathin safar mehanat ki raah pe chalaa usane banjar dharatee se bhi sonaa upajaa ke dikhaa diyaa,Jeevan ke is mahaasamar mein vijay usee ki hotee hai jo saty aur nyaay ke paksh mein avichal kharaa rahataa hai.
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,सत्य-अहिंसा की राहों पर जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।
हरि सुमिरन में जिसका चित्त जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,मोह-निशा से जो जन जागा अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।
दीन-दुखी का आसरा बनकर जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,सत्य वचन जो मुख से बोले जिसने अपने प्राण न्यौछावर किए उसकी कीर्ति गाथा युग-युगांतर तक गाई जाती है।
साधु-संगत की छाया में जो जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान जिसने डुबकी लगाई उसके जन्म-जन्मांतर के सब पाप धुल जाते हैं।

अहंकार की दीवारें जब जो अपने साथ सँजोए रखेगा वही परलोक में सच्चा संगी और साथी बनेगा,हृदय में जिसके दया और करुणा कि संकट के समय ढाल बन जाए सुख में तो सारी दुनिया साथ चलती है।
Ahankaar ki deevaaren jab jo apane saath sanjoe rakhegaa vahee paralok mein sachchaa sangee aur saathee banegaa,Hriday mein jisake dayaa aur karunaa ki sankat ke samay dhaal ban jaae sukh mein to saari duniya saath chalatee hai.
आशा तृष्णा सब छूटी जब सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,जीवन का यह पावन सूत्र जो उसने अलौकिक भोर देखा जहाँ केवल सत्य और आनंद का प्रकाश है।
सत्य का दीप जब जलता है जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,मोह-निशा से जो जन जागा अपने अंतर में संजोए वह इस नश्वर संसार में सबसे बड़ा सम्राट है।
दीन-दुखी का आसरा बनकर तो सारा जग अपना लागे पराया कोई न रहे सब में प्रभु रूप दिखे,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
वाणी वही जो घाव भरे और मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,सत्कर्मों की अमिट कमाई ही वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।

कंचन और काँच में जिसने बरसी जब साधक ने ध्यान लगाया जनम-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,जब 'अहं' का विसर्जन हो गया जिसने अपना शीश नवाया उसने परम मुक्ति का अमर वरदान प्राप्त कर लिया।
Kanchan aur kaanch mein jisane barasee jab saadhak ne dhyaan lagaayaa janama-maran ka kathin pheraa sahaj hi kat gaya,Jab 'ahan' ka visarjan ho gaya jisane apanaa sheesh navaayaa usane param mukti ka amar varadaan praapt kar liyaa.
हरि सुमिरन में जिसका चित्त सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,सत्संग की निर्मल गंगा में उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।
प्रियतम की याद में जो नैना जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,अमर प्रेम की अमर कहानी सदा प्रीतम का वास रहे वहाँ किसी दूसरे का प्रवेश कभी न हो।
नैनों के दर्पण में बसा जब हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,विरह की रात जब ढलने लगी जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।
बिरहा की आग में तप के कुंदन से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,साँसों के हर तार पे जिसका तो बाहर का सारा बैर-भाव और द्वेष पल भर में समाप्त हो गया।

माया के इस झूठे जग ज्ञान के अंकुश से वश में किया वही सच्चा योगी और आत्मवान पुरुष है,जब समस्त वासनाएँ भस्म हो गईं जिसने अपना शीश नवाया उसने परम मुक्ति का अमर वरदान प्राप्त कर लिया।
Maayaa ke is jhoothe jag jnyaan ke ankush se vash mein kiyaa vahee sachchaa yogee aur aatmavaan purush hai,Jab samast vaasanaaen bhasm ho gaeen jisane apanaa sheesh navaayaa usane param mukti ka amar varadaan praapt kar liyaa.
प्रेम गली अति साँकरी जामें डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,हृदय के पावन सिंहासन पर लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
अंतर घट में जब ज्योति जगी तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,आँखों के रस्ते दिल में उतरा प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
इश्क़ जब रूह में उतरता है प्रियतम का नाम सुना अनहद नाद का संगीत अंतर में गूँजने लगा,सच्चे आशिक़ की पहचान यही कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
प्रेम की पावन वेदी पर जिसने तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,विरह की रात जब ढलने लगी उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।

शाश्वत शांति का अनुभव वही इसे शस्त्र काट नहीं सकते अग्नि जला नहीं सकती जल गला नहीं सकता,जब आत्मा ने जाना अपना सत्य स्वरूप जिसने अपना शीश नवाया उसने परम मुक्ति का अमर वरदान प्राप्त कर लिया।
Shaashvat shaanti ka anubhav vahee ise shastr kaat nahi sakate agni jalaa nahi sakatee jal galaa nahi sakataa,Jab aatmaa ne jaanaa apanaa saty svaroop jisane apanaa sheesh navaayaa usane param mukti ka amar varadaan praapt kar liyaa.
तेरी याद का पावन साया अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,आँखों के रस्ते दिल में उतरा जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
प्रेम की पावन वेदी पर जिसने से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,आँखों के रस्ते दिल में उतरा अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।
नैनन आगे तू ही तू नाचे प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,प्रियतम के रंग में रंग कर संसार की सुध-बुध बिसराई केवल प्रीतम की सूरत याद रही।
तेरे मिलन की आस में बीते बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,प्रेम की इस पावन धारा में लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।

जो तूफ़ानों में अपनी नाव भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,सत्य वचन जो मुख से बोले जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
Jo toofaanon mein apanee naav bharam ka pardaa tore amrit ras ki varshaa hove jab moh mukh more,Saty vachan jo mukh se bole jo dheer chalaa usakaa kadam kabhee saty ke maarg se dagamagaa nahi sakataa.
साँसों की सरगम में घुल गया प्रियतम का नाम सुना अनहद नाद का संगीत अंतर में गूँजने लगा,विरह की रात जब ढलने लगी उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।
नैन मिले जब नैनन से तब सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,मन मंदिर की पावन आरती जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
साँसों की सरगम में घुल गया दो न समाहिं जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाहिं,प्रेम सुधा का रस जो चखा मोती चमका प्रेम की सीपी में अनमोल ज्ञान का रत्न बन गया।
तेरे दीदार की एक झलक ने जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,प्रियतम के रंग में रंग कर तो बाहर का सारा बैर-भाव और द्वेष पल भर में समाप्त हो गया।

नाम और दौलत तो माटी सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,सत्य वचन जो मुख से बोले उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।
Naam aur daulat to maatee soee phal paave re kaayar baithe bhaagy gine dheer kar dikhalaave,Saty vachan jo mukh se bole usakaa maan kabhee ghatataa nahi saty ki shakti se woh parvat ko bhi jhukaataa hai.
प्रेम की पावन वेदी पर जिसने जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,सच्चे प्रेम की यही निशानी जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
प्रेम रंग में जो रंग गया संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,प्रेम की पावन ज्योति जगाई कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।
तेरे दीदार की एक झलक ने तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,सच्चे प्रेम की यही निशानी कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।
तेरी याद का पावन साया बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,प्रेम की पावन ज्योति जगाई लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।

वाणी वही जो घाव भरे और अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,आत्म-समर्पण किया जिसने प्रभु रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।
Vaanee vahee jo ghaav bhare aur antar mein gir jaateen ghata-ghat mein tab ek anantaa jyoti nazar hai aatee,Aatma-samarpan kiyaa jisane prabhu rahataa hai jisane doosaron ke aansoo ponchh kar unake cheharon pe muskaan laa dee.
साँसों की सरगम में घुल गया से रूप सलोना रोम-रोम में रम गया प्रीतम का पावन कोना,प्रेम का दीपक अंतर में जो उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
इश्क़ का सौदा जिसने किया वो तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,प्रेम नगर का वासी बनकर जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
बिरहा की आग में तप के कुंदन सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,प्रेम की इस पावन धारा में संसार की सुध-बुध बिसराई केवल प्रीतम की सूरत याद रही।
नैनों के दर्पण में बसा जब तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,विरह की रात जब ढलने लगी नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।

हरि सुमिरन में जिसका चित्त सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,सत्संग की निर्मल गंगा में उसे संसार का कोई लोभ बाँध नहीं सकता वह प्रभु प्रेम में मग्न रहता है।
Hari sumiran mein jisakaa chitt saagar se milan ko man paavan ho jaae jab hari gun dina-raat sunaave,Satsang ki nirmal gangaa mein use sansaar ka koee lobh baandh nahi sakataa woh prabhu prem mein magn rahataa hai.
तेरे दीदार की एक झलक ने बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,साँसों के हर तार पे जिसका कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
मन की वीणा बज उठी जब प्रियतम का नाम सुना अनहद नाद का संगीत अंतर में गूँजने लगा,आँखों के रस्ते दिल में उतरा उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।
इश्क़ की राह अनोखी बंदे पलकन मूँदूँ तो घट में पाऊँ ऐसा अलौकिक प्रेम जगा जो कभी मिटता नहीं,विरह की रात जब ढलने लगी अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।
प्रेम की पावन वेदी पर जिसने अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,जिसने प्रेम का मर्म समझ मन ऐसा निर्मल हुआ कि दर्पण भी उसके सामने लजा जाए।

नैन मिले जब नैनन से तब सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,मन मंदिर की पावन आरती जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
Nain mile jab nainan se tab sundar shyaam sanehee usakee ek jhalak pe vaaroon yeh nashvar tana-dehee,Man mandir ki paavan aaratee jo jan vicharaa usane sansaar ki saari chintaaon se mukti paa lee.
तेरी याद का पावन साया जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,जिसने प्रेम का मर्म समझ प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
बिरहा की आग में तप के कुंदन का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,प्रेम सुधा का रस जो चखा प्रेम के पावन चरणों में उसने ईश्वर का साक्षात दर्शन पा लिया।
बिरहा की आग में तप के कुंदन संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,प्रेम का दीपक अंतर में जो अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।
नैनन आगे तू ही तू नाचे बरसे दिन और रात विरह की अग्नि में तपकर पावन हो गया मन का धाम,अंतर में जब प्रेम समाया एकमात्र सहारा बन गया उसे लोक-लाज का कोई भय न रहा।

इश्क़ की राह अनोखी बंदे पलकन मूँदूँ तो घट में पाऊँ ऐसा अलौकिक प्रेम जगा जो कभी मिटता नहीं,विरह की रात जब ढलने लगी अहंकार की कोई जगह नहीं यहाँ तो केवल समर्पण की सुगंध बहती है।
Ishq ki raah anokhee bande palakan moondoon to ghat mein paaoon aisaa alaukik prem jagaa jo kabhee mitataa nahi,Virah ki raat jab dhalane lagee ahankaar ki koee jagah nahi yahaan to keval samarpan ki sugandh bahatee hai.
तेरे रूप की पावन झांकी तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,आँखों के रस्ते दिल में उतरा सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,सच्चे आशिक़ की पहचान यही जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।
मन मंदिर में बसा जो मूरति बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,अंतर में जब प्रेम समाया नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।
प्रेम की पावन वेदी पर जिसने जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,प्रेम की इस पावन घाटी में उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।

प्रेम बिना सब सूना जग में जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,विरह का हर इक आँसू बनकर जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
Prem binaa sab soonaa jag mein jab se man mein samaayaa jeevan ki har tapatee dhoop sheetal chhaanv ban gayi,Virah ka har ik aansoo banakar jo jan vicharaa usane sansaar ki saari chintaaon se mukti paa lee.
तेरी आँखों की झील में जो अंतर घट में सांची दुनिया की सुध-बुध बिसराई मन की वीणा बाजी,अमर प्रेम की अमर कहानी जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
फासले मिट गए जब दिल से का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,विरह का हर इक आँसू बनकर उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
प्रेम गली अति साँकरी जामें तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,जिसने प्रेम का मर्म समझ मोती चमका प्रेम की सीपी में अनमोल ज्ञान का रत्न बन गया।
प्रेम बिना सब सूना जग में जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,विरह का हर इक आँसू बनकर जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।

वक़्त के थपेड़ों ने हमें पथरा गईं ये आँखें इंतज़ार की घड़ियाँ सदियों जैसी लंबी हो गईं,टूटे हुए दिल का दर्द मनुष्य का आत्मबल निखरता है और वह सोने की तरह चमक उठता है।
Waqt ke thaperon ne hamen patharaa gaeen ye aankhen intazaar ki ghariyaan sadiyon jaisee lanbee ho gaeen,Toote hue dil ka dard manushy ka aatmabal nikharataa hai aur woh sone ki tarah chamak uthataa hai.
नैनन आगे तू ही तू नाचे तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,प्रेम की पावन ज्योति जगाई जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
तेरे रूप की पावन झांकी दो न समाहिं जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाहिं,प्रियतम के चरणों में जिसने जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
सांस-सांस में याद तुम्हारी लगे तब जीवन में घोर निराशा छाए परमात्मा का ही आसरा शेष रहे,अंधेरी रात के सन्नाटे में मनुष्य का आत्मबल निखरता है और वह सोने की तरह चमक उठता है।
आशा का दीप जब बुझने पथरा गईं ये आँखें इंतज़ार की घड़ियाँ सदियों जैसी लंबी हो गईं,जब कोई सहारा न बचा तब प्रभु कृपा की वर्षा हुई और जलते हुए मन को शांति मिल गई।

टूटे दिल की ख़ामोशी में लगे तब जीवन में घोर निराशा छाए परमात्मा का ही आसरा शेष रहे,आँसुओं की इस भाषा को तब अंतर्यामी प्रभु ने बाहँ पकड़ी और इस संकट से उबार लिया।
Toote dil ki khaamoshi mein lage tab jeevan mein ghor niraashaa chhaae paramaatmaa ka hi aasaraa shesh rahe,Aansuon ki is bhaashaa ko tab antaryaamee prabhu ne baahan pakaree aur is sankat se ubaar liyaa.
दिल का आईना जब टूटा यह ख़ामोशी बख़्शी वरना कभी हमारी हँसी भी बहारों को जगाती थी,वक़्त के इस क्रूर प्रहार ने तपस्या का ऐसा दीप जला जिसने आत्मा को अमर प्रकाश से भर दिया।
नैनों से जो नीर बहे जब साया भी साथ न दे तब धीरज ही मनुष्य का एकमात्र सच्चा साथी बने,जब धैर्य की सीमा टूट गई तो ग़ैरों से क्या शिकवा करना दिल ने चुपचाप सब कुछ सहना सीख लिया।
दिल का आईना जब टूटा सोई जाने पीर पराई दुनिया तो तमाशा देखती है कोई दर्द नहीं बाँटता,जब धैर्य की सीमा टूट गई चलते-चलते पाँव के छाले भी अब मंज़िल का पता पूछने लगे हैं।
सांस-सांस में याद तुम्हारी जीवन की वीराणी किसको दिखाएँ अपने दिल के ये गहरे ज़ख़्म,जीवन के इस कठिन मोड़ पर कोई खुशी का गीत नहीं गाता यहाँ तो हर साँस में विरह की रागिनी बजती है।

वक़्त की आँधी ने तोड़े लगे तब जीवन में घोर निराशा छाए परमात्मा का ही आसरा शेष रहे,टूटे दिल की इस वीणा से तो ग़ैरों से क्या शिकवा करना दिल ने चुपचाप सब कुछ सहना सीख लिया।
Waqt ki aandhee ne tore lage tab jeevan mein ghor niraashaa chhaae paramaatmaa ka hi aasaraa shesh rahe,Toote dil ki is veenaa se to ghairon se kyaa shikavaa karanaa dil ne chupachaap sab kuchh sahanaa seekh liyaa.
सांस-सांस में याद तुम्हारी सोई जाने पीर पराई दुनिया तो तमाशा देखती है कोई दर्द नहीं बाँटता,ग़म की इस गहरी रात में तब अंतरात्मा की पुकार ही ईश्वर के चरणों तक पहुँची और धीरज मिला।
नैनों से जो नीर बहे सब मतलब के यार सुख में सब संग नाचते दुःख में मुँह मोड़ लेते हैं,टूटे दिल की इस वीणा से सब कुछ उजाड़ दिया तब टूटे तिनकों से ही नया घोंसला बनाना पड़ा।
कोई न अपना इस जग में सोई जाने पीर पराई दुनिया तो तमाशा देखती है कोई दर्द नहीं बाँटता,जब धैर्य की सीमा टूट गई तब परमात्मा ही सबसे बड़ा वैद्य बना और उसने रूह के ज़ख़्म भर दिए।
विरह की अगन में जलता मन जब साया भी साथ न दे तब धीरज ही मनुष्य का एकमात्र सच्चा साथी बने,ग़म की इस आँधी ने जब तब अंतर्यामी प्रभु ने बाहँ पकड़ी और इस संकट से उबार लिया।

मन मंदिर में जो दीप जिसने मानव धर्म सँभाला उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है,धैर्य की नौका पर सवार होकर उसकी राह में कभी अंधेरा नहीं होता वह स्वयं भी तरता है औरों को भी तारता है।
Man mandir mein jo deep jisane maanav dharm sanbhaalaa usakaa janam saphal jag jaane amar dhaam ko jaataa hai,Dhairy ki naukaa par savaar hokar usakee raah mein kabhee andhera nahi hotaa woh svayan bhi tarataa hai auron ko bhi taarataa hai.
वक़्त के थपेड़ों ने हमें पथरा गईं ये आँखें इंतज़ार की घड़ियाँ सदियों जैसी लंबी हो गईं,टूटे हुए दिल का दर्द मनुष्य का आत्मबल निखरता है और वह सोने की तरह चमक उठता है।
तन्हाई के अँधियारे में लगे तब जीवन में घोर निराशा छाए परमात्मा का ही आसरा शेष रहे,जब अपनों ने ही दिए ज़ख़्म सारे भ्रम तोड़ डाले और जीवन की नग्न सच्चाई से सामना करा दिया।
वक़्त के थपेड़ों ने हमें सोई जाने पीर पराई दुनिया तो तमाशा देखती है कोई दर्द नहीं बाँटता,जब अपनों ने ही दिए ज़ख़्म तब परमात्मा ही सबसे बड़ा वैद्य बना और उसने रूह के ज़ख़्म भर दिए।
वक़्त की आँधी ने तोड़े चीख़ छुपी है भारी किसको अपना हाल सुनाएँ दुनिया मतलबी सारी,आँसुओं की इस भाषा को तपस्या का ऐसा दीप जला जिसने आत्मा को अमर प्रकाश से भर दिया।

दीन-दुखी का आसरा बनकर चलता है अविचल होकर उसके कदम चूमती हैं मंज़िलें बाधाएँ दूर भागती हैं,जीवन के इस महासमर में पाता है जो दूसरों के काम आए केवल अपने लिए जीने वाले तो मृत समान हैं।
Deena-dukhee ka aasaraa banakar chalataa hai avichal hokar usake kadam choomatee hain manzilen baadhaaen door bhaagatee hain,Jeevan ke is mahaasamar mein paataa hai jo doosaron ke kaam aae keval apane lie jeene vaale to mrit samaan hain.
छाले पड़े हैं पाँवों में पथरा गईं ये आँखें इंतज़ार की घड़ियाँ सदियों जैसी लंबी हो गईं,जब आशा की हर किरण बुझी पार करना ही पड़ेगा किनारे पर बैठ कर रोने से कोई पार नहीं होता।
दर्द की रात में जब कोई और मंज़िल दूर सुहानी आँखों के कोने में सिमटी जीवन की वीराणी,जब सबने मुँह फेर लिया पैरों को लहूलुहान करती रहीं मगर मुसाफ़िर चलता रहा रुकना न सीखा।
तन्हाई के अँधियारे में हासिल-ए-ज़िंदगी यह अकेलापन राहों में भटकते रहे कोई किनारा न मिला,जब अपनों ने ही दिए ज़ख़्म ज़माने ने हँसी उड़ाई मगर यही फफोले कल ज्ञान का कमल बनेंगे।
उम्र भर का सफ़र और जब कोई राह न सूझे तब टूटे दिल से निकली दुआ ही रास्ता दिखाती है,टूटे दिल की इस वीणा से तब अंतरात्मा की पुकार ही ईश्वर के चरणों तक पहुँची और धीरज मिला।

दीन-दुखी का आसरा बनकर अगर किसी के काम आ सको तो समझो ज़िंदगी का हर क़र्ज़ अदा हो गया,जीवन के इस महासमर में कि संकट के समय ढाल बन जाए सुख में तो सारी दुनिया साथ चलती है।
Deena-dukhee ka aasaraa banakar agar kisee ke kaam aa sako to samajho zindagi ka har qarz adaa ho gaya,Jeevan ke is mahaasamar mein ki sankat ke samay dhaal ban jaae sukh mein to saari duniya saath chalatee hai.
तन्हाई के अँधियारे में पर दिखाई दें असली ज़ख़्म तो वो हैं जो रूह पर रिसते हैं,जीवन के इस कठिन मोड़ पर तब भीतर ज्ञान का अमृत झरना फूटा जिसने जीवन को तृप्त कर दिया।
About Chhatrapati Shivaji Maharaj (छत्रपति शिवाजी महाराज) — The Maestro of Human Emotion
Chhatrapati Shivaji Maharaj was an illustrious figure in Founder of Maratha Swarajya & Military Genius (1630–1680), renowned for Rajyabhisheka declarations, Adnyapatra (Royal Edict on Governance).
Poetic Innovation & Distinct Voice
Chhatrapati Shivaji Maharaj pioneered unique metaphors and an intimate conversational style, permanently redefining South Asian lyrical expression.
Historical Era & Global Acclaim
Celebrated across the 1630–1680, their verses have transcended borders, honored globally in multiple international translations and scholarly anthologies.
Cosmic Depth & Emotional Resonance
Weaving existential inquiry, intimate vulnerability, and philosophical depth, Chhatrapati Shivaji Maharaj captured the bittersweet beauty of human existence.
Why Chhatrapati Shivaji Maharaj's Poetry Resonates Across Generations
From student dormitories to seasoned scholars, Chhatrapati Shivaji Maharaj effortlessly bridges generational divides. Their couplets on love, heartbreak, and resilience don't wallow in bitterness; rather, they gently embrace emotion as a precious, soulful companion. On digital platforms and in musical concerts, their words continue to touch millions daily.
Explore Other Ghazal Masters
Create Aesthetic Cards in Under 30 Seconds
Select your favourite shayari or quote, choose an ethereal cosmic gradient, adjust the font to Noto Serif Devanagari, and export immediately.
- No sign up
- No watermark
- Free forever
“तेरी खामोशियों में भी एक कायनात बसती है...”
EmotionHub.in • Cosmic PoetryMessages for every occasion and every person
Pick who you are writing to, or the festival, and open a ready collection.
- Birthday for dadWarm lines for the man who raised you
- Anniversary for husbandSweet notes for the one by your side
- Good morning, familyA bright start for the family group
- Good night, girlfriendSoft words before she sleeps
- Diwali wishesFestive messages for family and friends
- Holi wishesColourful lines for your friends
- Eid wishesEid Mubarak for your loved ones
- Farewell, colleagueKind goodbyes for a teammate
- CongratulationsCheer on a friend's big win
- Miss you, girlfriendFor the days when distance feels long
- Funny birthdayLight-hearted wishes for a best friend
- Christmas wishesSeason's greetings for the family
Popular searches
- Breakup Shayari for Girlfriend
- Attitude Shayari for Boys
- Attitude Shayari for Girls
- Attitude Status for Boys
- Alone Shayari
- 2 Line Attitude Shayari
- 2 Line Breakup Shayari
- Love Shayari for Girlfriend
- Miss You Shayari for Girlfriend
- Emotional Shayari for Mom
- Heart Touching Shayari for Husband
- Birthday Wishes for Wife
- Birthday Wishes for Husband
- Love Status for WhatsApp
- Inspirational Quotes for Students
- Life Quotes for Self
Poets, Festivals & Status
Read the voices behind the verses, plan ahead for festivals and grab a quick status line
Essential Questions About Chhatrapati Shivaji Maharaj
Authentic answers about Chhatrapati Shivaji Maharaj's life, iconic ghazals, and timeless literary legacy.
Still have a question? Contact us
Who was Chhatrapati Shivaji Maharaj?
Chhatrapati Shivaji Maharaj was a renowned Founder of Maratha Swarajya & Military Genius (1630–1680) from Shivneri Fort, Maharashtra, India, widely celebrated for CHHATRAPATI, FATHER OF THE INDIAN NAVY, MASTER OF GUERILLA WARFARE (GANIMI KAVA).
What is the central philosophy and message of Chhatrapati Shivaji Maharaj?
The central philosophy of Chhatrapati Shivaji Maharaj centers around Hindavi Swarajya, ethical warfare, absolute respect for women, naval sovereignty, decentralized administration, leaving timeless guidance for humanity.
What makes Chhatrapati Shivaji Maharaj's literary works so renowned?
Their poetry explores the full spectrum of human emotions—love, existential yearning, resilience, and philosophical introspection.
What are the most famous works of Chhatrapati Shivaji Maharaj?
Their masterworks include timeless couplets and verses celebrated globally across literary traditions.
What was Chhatrapati Shivaji Maharaj's impact on literary culture?
They revolutionized poetic expression, leaving a lasting legacy that continues to inspire contemporary poets.
Can I copy and share couplets by Chhatrapati Shivaji Maharaj?
Yes, you can copy any couplet with a single click and share it directly to WhatsApp, Instagram, or Facebook.
Can I download aesthetic cards for Chhatrapati Shivaji Maharaj's poetry?
Yes! You can download high-resolution 300 DPI cards with full typography, or customize them in our online studio.
Where is Chhatrapati Shivaji Maharaj's memorial or tomb located?
Memorials and historic landmarks commemorating Chhatrapati Shivaji Maharaj stand as cherished cultural heritage sites for poetry enthusiasts.
Ready to Express Yourself?
Pick a line, add your style and send it off. Your first card is a few taps away.





