मन के निर्मल दर्पण में जब सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
Abraham Lincoln (अब्राहम लिंकन)
Abraham Lincoln was an illustrious figure in Preserver of the Union & Liberator (1809–1865), renowned for Gettysburg Address (1863), Emancipation Proclamation.

मन के निर्मल दर्पण में जब सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
— ABRAHAM LINCOLN • 1809–1865

मन के निर्मल दर्पण में जब सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
— ABRAHAM LINCOLN • 1809–1865
Download Aesthetic Abraham Lincoln Story Cards

‘मन के निर्मल दर्पण में जब सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।’— Abraham Lincoln
Sher #1 • Classic Couplet
मन के निर्मल दर्पण में जब सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,

‘सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,परहित में जिसने जीवन सौंपा मानव धर्म निभाया उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है।’— Abraham Lincoln
Sher #2 • Passionate Verse
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,

‘प्रेम की भाषा सबसे न्यारी तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,अहंकार का त्याग किया जिसने अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।’— Abraham Lincoln
Sher #3 • Soulful Couplet
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,
Immortal Couplets & Ghazals
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,परहित में जिसने जीवन सौंपा मानव धर्म निभाया उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है।
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,अहंकार का त्याग किया जिसने अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
प्रेम की गंगा अंतर में बहे सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,माटी का चोला पाकर जिसने वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।

मन की वीणा बज उठी जब तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,प्रेम नगर का वासी बनकर उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।
Man ki veenaa baj uthee jab tera naam sanehee har ek dharakan mein teri hi vandanaa goonjatee hai,Prem nagar ka vaasee banakar usane donon jahaan bhulaa diye prem ke nashe mein woh mast kalandar hua.
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,नेकी की राह पे जो जन निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।
आशा तृष्णा सब छूटी जब का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,मन के मैल को जिसने धोया व्यर्थ नहीं जाती वह सदियों तक भटके हुओं को सही राह दिखाती है।
माटी का यह देह बना है माटी में मिल जाना लोभ मोह मद त्याग के निज स्वरूप चीन्ह ले,सत्य वचन जो मुख से बोले रखा विपदा की घड़ी में भी वह जीवन के हर संग्राम में विजयी होता है।
माटी का यह देह बना है का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,सत्कर्मों की अमिट कमाई ही अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।

साँसों की सरगम में घुल गया जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,प्रेम का दीपक अंतर में जो जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।
Saanson ki saragam mein ghul gaya jaise bin paani meen prem hi jeevan ka saar hai prem hi amrit ras,Prem ka deepak antar mein jo jisane snaan kiyaa usake saare santaap aur taap sadaa ke lie mit gaye.
धरती की छाती पर जिसने तो सारा जग अपना लागे पराया कोई न रहे सब में प्रभु रूप दिखे,साधु पुरुष की वाणी कभी जिसने सेवा का व्रत लिया उसका जीवन चंदन की तरह महक उठता है।
संतन की संगति में आकर भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,सत्संग की निर्मल गंगा में रहता है जिसने दूसरों के आँसू पोंछ कर उनके चेहरों पे मुस्कान ला दी।
धरती की छाती पर जिसने स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,परहित में जिसने जीवन सौंपा जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
धरती की छाती पर जिसने जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,साधु पुरुष की वाणी कभी उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।

प्रेम बिना सब सूना जग में उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,प्रियतम के चरणों में जिसने जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
Prem binaa sab soonaa jag mein us par doojaa rang na charhe woh to keval apane priyatam ka hokar rah gaya,Priyatam ke charanon mein jisane jisane dubakee lagaaee woh bhavasaagar ki seemaa se pare amar ho gaya.
माटी का यह देह बना है जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,प्रभु चरणों में जिसका ध्यान उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।
सत्य का दीप जब जलता है सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,अमर नाम जग में उसी का उसने निर्मल दर्पण पाया जहाँ परमात्मा का साक्षात स्वरूप दिखता है।
धरती की छाती पर जिसने जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,भवसागर की लहरों से जो जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,अमर नाम जग में उसी का उसका जनम सार्थक हुआ परोपकार ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।

तन्हाई के अँधियारे में पर दिखाई दें असली ज़ख़्म तो वो हैं जो रूह पर रिसते हैं,आँसुओं की इस भाषा को पैरों को लहूलुहान करती रहीं मगर मुसाफ़िर चलता रहा रुकना न सीखा।
Tanhaaee ke andhiyaare mein par dikhaaee den asalee zakhm to wo hain jo rooh par risate hain,Aansuon ki is bhaashaa ko pairon ko lahooluhaan karatee raheen magar musaafir chalataa raha rukanaa na seekhaa.
सतगुरु मिले तो राह दिखावे का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,सत्संग की निर्मल गंगा में वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।
सत्य के पावन पथ पर जिसने तो सारा जग अपना लागे पराया कोई न रहे सब में प्रभु रूप दिखे,सत्संग की निर्मल गंगा में अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।
प्रेम की भाषा सबसे न्यारी अंतरतम में अंधकार का हर पहरा पिघल जाता है,प्रेम की डोर में बंध गया जो के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।
प्रेम की गंगा अंतर में बहे भरम का पर्दा तोड़े अमृत रस की वर्षा होवे जब मोह मुख मोड़े,शांति और संतोष का धन जो जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।

वक़्त के थपेड़ों ने हमें सोई जाने पीर पराई दुनिया तो तमाशा देखती है कोई दर्द नहीं बाँटता,टूटे दिल की इस वीणा से चलते-चलते पाँव के छाले भी अब मंज़िल का पता पूछने लगे हैं।
Waqt ke thaperon ne hamen soee jaane peer paraaee duniya to tamaashaa dekhatee hai koee dard nahi baantataa,Toote dil ki is veenaa se chalate-chalate paanv ke chhaale bhi ab manzil ka pataa poochhane lage hain.
कर्म की खेती जो जन बोवे सोई फल पावे रे कायर बैठे भाग्य गिने धीर कर दिखलावे,सत्संग की निर्मल गंगा में उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।
नदिया की धारा बहती जावे स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,धैर्य का दामन जिसने थामे उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।
संतन की संगति में आकर बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,धैर्य का दामन जिसने थामे उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।
संतन की संगति में आकर का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,हृदय में जिसके दया बसी है उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।

उम्र भर का सफ़र और लगे तब जीवन में घोर निराशा छाए परमात्मा का ही आसरा शेष रहे,जब कोई चारासाज़ न मिला अर्श तक पहुँची जहाँ ईश्वर ने अपने बंदे के आँसू पोंछ कर शांति दी।
Umr bhar ka safar aur lage tab jeevan mein ghor niraashaa chhaae paramaatmaa ka hi aasaraa shesh rahe,Jab koee chaaraasaaz na mila arsh tak pahunchee jahaan eeshvar ne apane bande ke aansoo ponchh kar shaanti dee.
सत्य के पावन पथ पर जिसने बैठा जन निज भाव से उसका जीवन धन्य हुआ प्रभु कृपा सदा बरसती,सदाचार की पावन वेदी पर अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।
संतन की संगति में आकर सागर से मिलन को मन पावन हो जाए जब हरि गुण दिन-रात सुनावे,हरि की कृपा का पावन साया परलोक में संग जाएगी बाकी सब माया-मोह यहीं धरा रह जाएगा।
मन के निर्मल दर्पण में जब प्रभु चरणों चित लागा अमर अभय पद सोई पावे जो जग से विरक्त जागा,अमर नाम जग में उसी का उसका मान कभी घटता नहीं सत्य की शक्ति से वह पर्वत को भी झुकाता है।
सतगुरु मिले तो राह दिखावे अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,परहित में जिसने जीवन सौंपा जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।

जिसने मन को जीत लिया सत्य का बीज उगाया उसकी कीर्ति अमर रहेगी जब तक गगन में छाया,सत्संगति का पावन प्रभाव अपने भाग्य को गढ़ा उसने सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित कर दिखाए।
Jisane man ko jeet liyaa saty ka beej ugaayaa usakee keerti amar rahegee jab tak gagan mein chhaayaa,Satsangati ka paavan prabhaav apane bhaagy ko garhaa usane saphalataa ke naye keertimaan sthaapit kar dikhaae.
जो तूफ़ानों में अपनी नाव जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,वाणी में जिसके मिठास घुली अज्ञान अंधेरा मिटा के वह संसार में ज्ञान का अमर प्रकाश फैला जाता है।
सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,प्रेम की डोर में बंध गया जो निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।
ज्ञान का पावन भोर हुआ जब मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,सत्संग की निर्मल गंगा में उसे किसी तीरथ जाने की आवश्यकता नहीं प्रभु स्वयं उसके घट बसते हैं।
दुःख में सुमिरन सब कोई करै सत्य का रूप समाया जीवन की हर उलझन का सहज समाधान पाया,भवसागर की लहरों से जो उस पर सदा बना रहता है जो निष्काम भाव से सब जीवों से प्रेम करता है।

जीवन की इस रणभूमि में जले तो बाहर तम न सतावे आत्मज्ञान की पावन गंगा भवसागर तर जावे,सत्य और धर्म की राहों पर जिसने व्यर्थ नहीं गँवाया उसने जीवन के हर संग्राम में सफलता प्राप्त की।
Jeevan ki is ranabhoomi mein jale to baahar tam na sataave aatmajnyaan ki paavan gangaa bhavasaagar tar jaave,Saty aur dharm ki raahon par jisane vyarth nahi ganvaayaa usane jeevan ke har sangraam mein saphalataa praapt ki.
मन मंदिर में जो दीप जले का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,ज्ञान की ज्योति जलाई जिसने के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।
दीन-दुखी का आसरा बनकर का खिलौना है इंसान वही जो रोते हुए को हँसा सके,अमर नाम जग में उसी का अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
धरती की छाती पर जिसने स्वयं खेते हैं किनारा उनके स्वागत में सिर झुकाता है,सत्य वचन जो मुख से बोले अपने मन में उतारेगा वह दोनों जहाँ में आदर और सम्मान पाएगा।
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी अमृत रस की वर्षा भई जन्म-मरण का कठिन फेरा सहज ही कट गया,प्रेम की डोर में बंध गया जो परलोक में संग जाएगी बाकी सब माया-मोह यहीं धरा रह जाएगा।

धरती की छाती पर जिसने कायर मैदान छोड़ भागते हैं धीर पुरुष डटे रहते हैं और विजय का वरण करते हैं,जिसने परोपकार का दीप जलाया मनुष्य को देव बना देता है दुर्जन भी उसकी संगति से सज्जन हो जाते हैं।
Dharatee ki chhaatee par jisane kaayar maidaan chhor bhaagate hain dheer purush date rahate hain aur vijay ka varan karate hain,Jisane paropakaar ka deep jalaayaa manushy ko dev banaa detaa hai durjan bhi usakee sangati se sajjan ho jaate hain.
मन के निर्मल दर्पण में जब घट-घट में प्रगट भई अज्ञान का घोर अंधेरा पल भर में भाग गया,माटी का चोला पाकर जिसने जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी निर्भय पाँव धरे काल की कठिन चाल भी उसका कुछ न बिगाड़ सके,सत्य-अहिंसा की राहों पर वह सबके मन को भाता है कटु वचन त्याग के जो बोले वही संत कहाता है।
धरती की छाती पर जिसने मन को सीतल कर दे शब्द वही जो अमर आलोक बने,शांति और संतोष का धन जो के चरणों में शीश नवाया उसने संसार के समस्त भयों से मुक्ति पा ली।
हरि सुमिरन में जिसका चित्त अंतर नैन उघारे घट में ही परमात्मा का दीदार कराए,सत्संग की निर्मल गंगा में निर्भय होकर पार हुआ ज्ञान की नौका उसे परम किनारे पहुँचा देती है।

मैं और मेरा का भ्रम परमात्मा की आवाज़ सुनाई दे वही सच्चा उपदेश है जो मोक्ष का द्वार खोलता है,जिसने इस नश्वर शरीर का मोह त्याग दिया वह इस संसार में रहते हुए भी विदेही की तरह विचरता है।
Main aur mera ka bhram paramaatmaa ki aavaaz sunaaee de vahee sachchaa upadesh hai jo moksh ka dvaar kholataa hai,Jisane is nashvar shareer ka moh tyaag diyaa woh is sansaar mein rahate hue bhi videhee ki tarah vicharataa hai.
क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,माटी का चोला पाकर जिसने अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।
मन मंदिर में बसा जो मूरति रैन-दिना मतवारे अंग-अंग में ज्योति जलाई प्रेम के दीपक बारे,अमर प्रेम की अमर कहानी संसार की सुध-बुध बिसराई केवल प्रीतम की सूरत याद रही।
प्रेम गली अति साँकरी जामें प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,साँसों के हर तार पे जिसका नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।
इश्क़ की राह अनोखी बंदे जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,मन मंदिर की पावन आरती सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।

शाश्वत शांति का अनुभव वही है अंतरतम में अंधकार का हर पहरा स्वयं पिघल जाता है,जब द्वैत का सारा भ्रम मिट गया का दर्शन होने लगा तब कोई शत्रु न रहा और न कोई पराया बचा।
Shaashvat shaanti ka anubhav vahee hai antaratam mein andhakaar ka har paharaa svayan pighal jaataa hai,Jab dvait ka saaraa bhram mit gaya ka darshan hone lagaa tab koee shatru na raha aur na koee paraayaa bachaa.
इश्क़ जब रूह में उतरता है संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,हृदय के पावन सिंहासन पर लिया उसने सारे वेदों और शास्त्रों का सार सहज में पा लिया।
तेरे रूप की पावन झांकी जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,प्रियतम का अनुराग ही जिसका तो बाहर का सारा बैर-भाव और द्वेष पल भर में समाप्त हो गया।
इश्क़ का सौदा जिसने किया वो संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,जब से नैना रूप में उलझे नाम लिखा है वह हर श्वास में अपने प्रियतम का ही गुण गाता है।
मन की वीणा बज उठी जब तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,प्रेम नगर का वासी बनकर उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।

अहंकार की दीवारें जब अंतर परमात्मा की आवाज़ सुनाई दे वही सच्चा उपदेश है जो मोक्ष का द्वार खोलता है,जब द्वैत का सारा भ्रम मिट गया हुआ उसे तीनों लोकों का कोई भी प्रलोभन अपनी ओर आकर्षित नहीं कर सकता।
Ahankaar ki deevaaren jab antar paramaatmaa ki aavaaz sunaaee de vahee sachchaa upadesh hai jo moksh ka dvaar kholataa hai,Jab dvait ka saaraa bhram mit gaya hua use teenon lokon ka koee bhi pralobhan apanee or aakarshit nahi kar sakataa.
प्रेम की डोरी बाँध लई जब तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,अंतर में जब प्रेम समाया जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
प्रेम की डोरी बाँध लई जब दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,प्रियतम की चाहत में जिसने उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
अंतर घट में जब ज्योति जगी तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,प्रेम की मस्ती में जो झूमा सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।
नैनों के दर्पण में बसा जब तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,प्रेम की मस्ती में जो झूमा अपनी सुध बिसराई उसने जनम-मरण के बंधन को सदा के लिए तोड़ दिया।

सत्कर्मों की अमिट ज्योति जब जो जीवन महकावे उसी मनुष्य का जनम सफल जो परपीड़ा अपनावे,परहित में जिसने जीवन सौंपा मानव धर्म निभाया उसका जनम सफल जग जाने अमर धाम को जाता है।
Satkarmon ki amit jyoti jab jo jeevan mahakaave usee manushy ka janam saphal jo parapeeraa apanaave,Parahit mein jisane jeevan saunpaa maanav dharm nibhaayaa usakaa janam saphal jag jaane amar dhaam ko jaataa hai.
मन मंदिर में बसा जो मूरति हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,सच्चे प्रेम की यही निशानी उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
प्रेम की पावन वेदी पर जिसने तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,अंतर में जब प्रेम समाया उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
तेरी याद का पावन साया डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,प्रेम की इस पावन धारा में उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।
नैनों के दर्पण में बसा जब दिल को वो चैन दिया जो सदियों की इबादत से भी मयस्सर न हुआ,साँसों के हर तार पे जिसका उसने दोनों जहाँ भुला दिए प्रेम के नशे में वह मस्त कलंदर हुआ।

धरती की छाती पर जिसने जग में सोई प्यारा क्रोध-अग्नि को शांत करे जो शील-सरोवर धारा,भवसागर की लहरों से जो जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
Dharatee ki chhaatee par jisane jag mein soee pyaaraa krodha-agni ko shaant kare jo sheela-sarovar dhaaraa,Bhavasaagar ki laharon se jo jo dheer chalaa usakaa kadam kabhee saty ke maarg se dagamagaa nahi sakataa.
प्रियतम की याद में जो नैना प्रियतम का नाम सुना अनहद नाद का संगीत अंतर में गूँजने लगा,अमर प्रेम की अमर कहानी युग-युग गाई जाएगी जो प्रेम की राह पर चले उनका नाम अमर रहेगा।
प्रेम रंग में जो रंग गया जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,प्रेम की इस पावन धारा में कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।
तेरी याद का पावन साया हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,अंतर में जब प्रेम समाया जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
तेरे रूप की पावन झांकी तो इबादत बन जाता है हुस्न जब सादगी ओढ़ ले तो ख़ुदा नज़र आता है,जिसने प्रेम का मर्म समझ जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।

सतगुरु मिले तो राह दिखावे अंतर में गिर जातीं घट-घट में तब एक अनंता ज्योति नज़र है आती,परहित में जिसने जीवन सौंपा जो धीर चला उसका कदम कभी सत्य के मार्ग से डगमगा नहीं सकता।
Sataguru mile to raah dikhaave antar mein gir jaateen ghata-ghat mein tab ek anantaa jyoti nazar hai aatee,Parahit mein jisane jeevan saunpaa jo dheer chalaa usakaa kadam kabhee saty ke maarg se dagamagaa nahi sakataa.
साँसों की सरगम में घुल गया जैसे बिन पानी मीन प्रेम ही जीवन का सार है प्रेम ही अमृत रस,प्रेम का दीपक अंतर में जो जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।
इश्क़ की राह अनोखी बंदे संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,सच्चे आशिक़ की पहचान यही मोती चमका प्रेम की सीपी में अनमोल ज्ञान का रत्न बन गया।
प्रेम बिना सब सूना जग में प्रियतम का रूप अनूप चारों ओर उसी की पावन लीला नज़र आने लगी,सच्चे प्रेम की यही निशानी जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
तेरे मिलन की आस में बीते तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,प्रेम की मस्ती में जो झूमा कि हर हाल में राज़ी रहे सुख में भी और दुःख में भी शीश नवाए।

क्षण-क्षण बीते आयु सुहानी भज ले राम का नामा अंत समय जब आवेगा तब संग न आवे धामा,माटी का चोला पाकर जिसने अविचल कदम बढ़ाता है उसका यश तीनों लोकों में सदा फैलता है।
Kshana-kshan beete aayu suhaanee bhaj le raam ka naamaa ant samay jab aavegaa tab sang na aave dhaamaa,Maatee ka cholaa paakar jisane avichal kadam barhaataa hai usakaa yash teenon lokon mein sadaa phailataa hai.
नैनों के दर्पण में बसा जब दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,प्रेम सुधा का रस जो चखा सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।
तेरी आँखों की झील में जो तन-मन वार दिया उसने प्रेम के अलौकिक लोक में अपना स्थान बना लिया,प्रेम का दीपक अंतर में जो संसार की सुध-बुध बिसराई केवल प्रीतम की सूरत याद रही।
तेरे दीदार की एक झलक ने दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,प्रेम की पावन ज्योति जगाई मोती चमका प्रेम की सीपी में अनमोल ज्ञान का रत्न बन गया।
तेरे रूप की पावन झांकी उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,प्रियतम का अनुराग ही जिसका जिसने स्नान किया उसके सारे संताप और ताप सदा के लिए मिट गए।

प्रेम की पावन वेदी पर जिसने तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,अंतर में जब प्रेम समाया उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
Prem ki paavan vedee par jisane tera naam sanehee har ek dharakan mein teri hi vandanaa goonjatee hai,Antar mein jab prem samaayaa use indr ka amrit bhi pheekaa lage woh to prem ras mein tript ho gaya.
फासले मिट गए जब दिल से जब से मन में समाया जीवन की हर तपती धूप शीतल छाँव बन गई,साँसों के हर तार पे जिसका जो जन विचरा उसने संसार की सारी चिंताओं से मुक्ति पा ली।
प्रेम का प्याला जिसने पिया वो तेरा नाम सनेही हर एक धड़कन में तेरी ही वंदना गूँजती है,प्रियतम की चाहत में जिसने मन ऐसा निर्मल हुआ कि दर्पण भी उसके सामने लजा जाए।
मन की वीणा बज उठी जब बना यह जीव प्रेम की अलौकिक चमक से दसों दिशाएँ जगमगा उठीं,प्रेम के इस पावन तीरथ में सदा प्रीतम का वास रहे वहाँ किसी दूसरे का प्रवेश कभी न हो।
प्रेम रंग में जो रंग गया का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,हृदय के पावन सिंहासन पर संसार की सुध-बुध बिसराई केवल प्रीतम की सूरत याद रही।

तेरे दीदार की एक झलक ने दिल का तार जुड़ा मौन में भी हर एक धड़कन तेरी पुकार बनी,प्रेम की पावन ज्योति जगाई मोती चमका प्रेम की सीपी में अनमोल ज्ञान का रत्न बन गया।
Tere deedaar ki ek jhalak ne dil ka taar juraa maun mein bhi har ek dharakan teri pukaar banee,Prem ki paavan jyoti jagaaee motee chamakaa prem ki seepee mein anamol jnyaan ka ratn ban gaya.
साँसों की सरगम में घुल गया हरदम शीश नवाना ख़ुद को खोकर प्रियतम पाना जग का भरम भुलाना,प्रियतम के रंग में रंग कर सदा प्रीतम का वास रहे वहाँ किसी दूसरे का प्रवेश कभी न हो।
प्रेम बिना सब सूना जग में उस पर दूजा रंग न चढ़े वह तो केवल अपने प्रियतम का होकर रह गया,प्रियतम के चरणों में जिसने जिसने डुबकी लगाई वह भवसागर की सीमा से परे अमर हो गया।
इश्क़ जब रूह में उतरता है दिल का भेद खुला मौन की भाषा में सब कुछ कह दिया कुछ न छुपाया,मन मंदिर की पावन आरती सुख-दुःख भुला दिया उसने जीवन के हर मोड़ पर आनंद ही पाया।
प्रेम गली अति साँकरी जामें डूब गया इक बार उसे किनारे की कोई आरज़ू बाक़ी न रही,साँसों के हर तार पे जिसका उतारूँ हर पल मैं तो अपने सलोने श्याम की दासी बन गई।

प्रेम की पावन वेदी पर जिसने सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,प्रेम की पावन ज्योति जगाई जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।
Prem ki paavan vedee par jisane sundar shyaam sanehee usakee ek jhalak pe vaaroon yeh nashvar tana-dehee,Prem ki paavan jyoti jagaaee jo roop salonaa usane jeevan ke har andhiyaare ko mitaa daalaa.
नैनों के दर्पण में बसा जब पलकन मूँदूँ तो घट में पाऊँ ऐसा अलौकिक प्रेम जगा जो कभी मिटता नहीं,प्रेम की पावन ज्योति जगाई जलाए रखेगा उसके जीवन पथ पर कभी अंधकार नहीं आ सकता।
अंतर घट में जब ज्योति जगी सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,प्रियतम के रंग में रंग कर तो बाहर का सारा बैर-भाव और द्वेष पल भर में समाप्त हो गया।
प्रेम बिना सब सूना जग में का सुंदर वास संसार की सारी माया फीकी लगने लगी उसके आगे,प्रेम नगर का वासी बनकर कि ख़ुद को मिटा के प्रियतम की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढता है।
प्रेम की पावन वेदी पर जिसने सुंदर श्याम सनेही उसकी एक झलक पे वारूँ यह नश्वर तन-देही,प्रेम की पावन ज्योति जगाई जो रूप सलोना उसने जीवन के हर अंधियारे को मिटा डाला।

ज़ख़्म वो नहीं जो जिस्म और मंज़िल दूर सुहानी आँखों के कोने में सिमटी जीवन की वीराणी,दर्द की इस एकांत गुफ़ा में चलते-चलते पाँव के छाले भी अब मंज़िल का पता पूछने लगे हैं।
Zakhm wo nahi jo jism aur manzil door suhaanee aankhon ke kone mein simatee jeevan ki veeraanee,Dard ki is ekaant gufaa mein chalate-chalate paanv ke chhaale bhi ab manzil ka pataa poochhane lage hain.
प्रेम गली अति साँकरी जामें संसार लुटा बैठा मगर प्रेम के बाज़ार में उसने अनमोल रतन पा लिया,जिसने प्रेम का मर्म समझ जिसने घट के अंदर वह संसार के हर प्राणी में उसी का रूप देखता है।
रोम-रोम में रम गया प्रीतम जिसने इक बार लखी उसे संसार का कोई दूसरा रूप सुहाता नहीं,जब से नैना रूप में उलझे उसे इंद्र का अमृत भी फीका लगे वह तो प्रेम रस में तृप्त हो गया।
छाले पड़े हैं पाँवों में पर दिखाई दें असली ज़ख़्म तो वो हैं जो रूह पर रिसते हैं,टूटे हुए सपनों की किरचें अकेले ही चलना पड़ता है यहाँ कोई किसी का बोझ उठाने नहीं आता।
छाले पड़े हैं पाँवों में हासिल-ए-ज़िंदगी यह अकेलापन राहों में भटकते रहे कोई किनारा न मिला,अंधेरी रात के सन्नाटे में अकेले ही चलना पड़ता है यहाँ कोई किसी का बोझ उठाने नहीं आता।

छाले पड़े हैं पाँवों में को भी छीन ले तब समझ आता है कि तन्हाई किसे कहते हैं,अकेलेपन की इस राह पर तब परमात्मा ही सबसे बड़ा वैद्य बना और उसने रूह के ज़ख़्म भर दिए।
Chhaale pare hain paanvon mein ko bhi chheen le tab samajh aataa hai ki tanhaaee kise kahate hain,Akelepan ki is raah par tab paramaatmaa hi sabase baraa vaidy banaa aur usane rooh ke zakhm bhar diye.
ज़ख़्म वो नहीं जो जिस्म किनारा कहीं न सूझे प्रभु बिना इस संकट में कोई पार लगाने वाला न दिखे,वक़्त के इस क्रूर प्रहार ने केवल वही समझ सकता है जिसके सीने में कभी ऐसा ही घाव लगा हो।
छाले पड़े हैं पाँवों में और मंज़िल दूर सुहानी आँखों के कोने में सिमटी जीवन की वीराणी,दिल के फफोलों को देखकर सहनशीलता ही सबसे बड़ी पूँजी बनी जिसने हर तूफ़ान से बचा लिया।
तन्हाई के अँधियारे में पर दिखाई दें असली ज़ख़्म तो वो हैं जो रूह पर रिसते हैं,आँसुओं की इस भाषा को पैरों को लहूलुहान करती रहीं मगर मुसाफ़िर चलता रहा रुकना न सीखा।
कोई न अपना इस जग में पर दिखाई दें असली ज़ख़्म तो वो हैं जो रूह पर रिसते हैं,अंधेरी रात के सन्नाटे में केवल वही पढ़ सकता है जिसने ख़ुद रात-रात भर जाग कर दर्द सहा हो।

जिसके दिल पर बीत रही सोई जाने पीर पराई दुनिया तो तमाशा देखती है कोई दर्द नहीं बाँटता,अंधेरी रात के सन्नाटे में तब भीतर ज्ञान का अमृत झरना फूटा जिसने जीवन को तृप्त कर दिया।
Jisake dil par beet rahi soee jaane peer paraaee duniya to tamaashaa dekhatee hai koee dard nahi baantataa,Andheree raat ke sannaate mein tab bheetar jnyaan ka amrit jharanaa phootaa jisane jeevan ko tript kar diyaa.
अकेलेपन की धूप जब साए जब कोई राह न सूझे तब टूटे दिल से निकली दुआ ही रास्ता दिखाती है,ज़िंदगी की इस सूनी डगर पर मनुष्य का आत्मबल निखरता है और वह सोने की तरह चमक उठता है।
उम्र भर का सफ़र और हज़ार टुकड़ों में बिखर गया हर टुकड़े में अपनों की बेवफ़ाई की तस्वीर दिखी,टूटे हुए सपनों की किरचें कोई खुशी का गीत नहीं गाता यहाँ तो हर साँस में विरह की रागिनी बजती है।
दर्द की रात में जब कोई दिन-रैन तपे अंगार की तरह कोई शीतल बूँद न बरसे जो मन को ठंडक दे,ग़म के मारों की बस्ती में अकेले ही चलना पड़ता है यहाँ कोई किसी का बोझ उठाने नहीं आता।
जिसके दिल पर बीत रही पथरा गईं ये आँखें इंतज़ार की घड़ियाँ सदियों जैसी लंबी हो गईं,जब धैर्य की सीमा टूट गई तन्हाई ही अब संग चलती है साया भी धूप ढलते ही साथ छोड़ जाता है।

कर्म की पावन वेदी पर धूप-छाँव का सफ़र है आज ग़म कल उम्मीद का नया सूरज चमकेगा,कर्म की खेती में जो पसीना और अडिग रहा पहाड़ की तरह तूफ़ान भी उसके सामने नतमस्तक हो जाते हैं।
Karm ki paavan vedee par dhoopa-chhaanv ka safar hai aaj gham kal ummeed ka naya sooraj chamakegaa,Karm ki khetee mein jo paseenaa aur adig raha pahaar ki tarah toofaan bhi usake saamane natamastak ho jaate hain.
ज़ख़्म वो नहीं जो जिस्म और मंज़िल दूर सुहानी आँखों के कोने में सिमटी जीवन की वीराणी,दर्द की इस एकांत गुफ़ा में चलते-चलते पाँव के छाले भी अब मंज़िल का पता पूछने लगे हैं।
अकेलेपन की धूप जब साए और मंज़िल दूर सुहानी आँखों के कोने में सिमटी जीवन की वीराणी,दिल के फफोलों को देखकर कोई खुशी का गीत नहीं गाता यहाँ तो हर साँस में विरह की रागिनी बजती है।
दर्द की रात में जब कोई भटके सूने वन में जिसका कोई घोंसला न बचा डाल-डाल रोता फिरे,टूटे हुए सपनों की किरचें चलते-चलते पाँव के छाले भी अब मंज़िल का पता पूछने लगे हैं।
वक़्त के थपेड़ों ने हमें सोई जाने पीर पराई दुनिया तो तमाशा देखती है कोई दर्द नहीं बाँटता,दर्द का यह गहरा सागर सब कुछ उजाड़ दिया तब टूटे तिनकों से ही नया घोंसला बनाना पड़ा।

वाणी में जो अमृत घोले हँसते-हँसते तय करना सीखो जो काँटों पे मुस्कुराया वही गुलाब बना,जिसने समय की चाल पहचानी पाता है जो दूसरों के काम आए केवल अपने लिए जीने वाले तो मृत समान हैं।
Vaanee mein jo amrit ghole hansate-hansate tay karanaa seekho jo kaanton pe muskuraayaa vahee gulaab banaa,Jisane samay ki chaal pahachaanee paataa hai jo doosaron ke kaam aae keval apane lie jeene vaale to mrit samaan hain.
सपनों के महल जब टूटे जब साया भी साथ न दे तब धीरज ही मनुष्य का एकमात्र सच्चा साथी बने,ग़म की इस आँधी ने जब मनुष्य का आत्मबल निखरता है और वह सोने की तरह चमक उठता है।
तन्हाई के अँधियारे में दूजा भेद न पावे जो इस आग में जला वही इसका दर्द जान पावे,टूटे हुए सपनों की किरचें सहनशीलता ही सबसे बड़ी पूँजी बनी जिसने हर तूफ़ान से बचा लिया।
अकेलेपन की धूप जब साए दूजा भेद न पावे जो इस आग में जला वही इसका दर्द जान पावे,अकेलेपन की इस राह पर तब विश्वास का एक नन्हा तारा चमका जिसने डूबने से बचा लिया।
वक़्त के थपेड़ों ने हमें सोई जाने पीर पराई दुनिया तो तमाशा देखती है कोई दर्द नहीं बाँटता,टूटे दिल की इस वीणा से चलते-चलते पाँव के छाले भी अब मंज़िल का पता पूछने लगे हैं।

ज़िंदगी और कुछ नहीं बस जिसके पास है संचित वह संसार के समस्त वैभवों से अधिक सुखी और शांत है,हृदय में जिसके दया और करुणा जिसने जीवन जिया उसका हर दिन उत्सव और हर रात शांति की गोद बन गई।
Zindagi aur kuchh nahi bas jisake paas hai sanchit woh sansaar ke samast vaibhavon se adhik sukhee aur shaant hai,Hriday mein jisake dayaa aur karunaa jisane jeevan jiyaa usakaa har din utsav aur har raat shaanti ki god ban gayi.
आँखों के आँसू जब सूखे पर दिखाई दें असली ज़ख़्म तो वो हैं जो रूह पर रिसते हैं,जब कोई सहारा न बचा मनुष्य का आत्मबल निखरता है और वह सोने की तरह चमक उठता है।
About Abraham Lincoln (अब्राहम लिंकन) — The Maestro of Human Emotion
Abraham Lincoln was an illustrious figure in Preserver of the Union & Liberator (1809–1865), renowned for Gettysburg Address (1863), Emancipation Proclamation.
Poetic Innovation & Distinct Voice
Abraham Lincoln pioneered unique metaphors and an intimate conversational style, permanently redefining South Asian lyrical expression.
Historical Era & Global Acclaim
Celebrated across the 1809–1865, their verses have transcended borders, honored globally in multiple international translations and scholarly anthologies.
Cosmic Depth & Emotional Resonance
Weaving existential inquiry, intimate vulnerability, and philosophical depth, Abraham Lincoln captured the bittersweet beauty of human existence.
Why Abraham Lincoln's Poetry Resonates Across Generations
From student dormitories to seasoned scholars, Abraham Lincoln effortlessly bridges generational divides. Their couplets on love, heartbreak, and resilience don't wallow in bitterness; rather, they gently embrace emotion as a precious, soulful companion. On digital platforms and in musical concerts, their words continue to touch millions daily.
Explore Other Ghazal Masters
Create Aesthetic Cards in Under 30 Seconds
Select your favourite shayari or quote, choose an ethereal cosmic gradient, adjust the font to Noto Serif Devanagari, and export immediately.
- No sign up
- No watermark
- Free forever
“तेरी खामोशियों में भी एक कायनात बसती है...”
EmotionHub.in • Cosmic PoetryMessages for every occasion and every person
Pick who you are writing to, or the festival, and open a ready collection.
- Birthday for dadWarm lines for the man who raised you
- Anniversary for husbandSweet notes for the one by your side
- Good morning, familyA bright start for the family group
- Good night, girlfriendSoft words before she sleeps
- Diwali wishesFestive messages for family and friends
- Holi wishesColourful lines for your friends
- Eid wishesEid Mubarak for your loved ones
- Farewell, colleagueKind goodbyes for a teammate
- CongratulationsCheer on a friend's big win
- Miss you, girlfriendFor the days when distance feels long
- Funny birthdayLight-hearted wishes for a best friend
- Christmas wishesSeason's greetings for the family
Popular searches
- Breakup Shayari for Girlfriend
- Attitude Shayari for Boys
- Attitude Shayari for Girls
- Attitude Status for Boys
- Alone Shayari
- 2 Line Attitude Shayari
- 2 Line Breakup Shayari
- Love Shayari for Girlfriend
- Miss You Shayari for Girlfriend
- Emotional Shayari for Mom
- Heart Touching Shayari for Husband
- Birthday Wishes for Wife
- Birthday Wishes for Husband
- Love Status for WhatsApp
- Inspirational Quotes for Students
- Life Quotes for Self
Poets, Festivals & Status
Read the voices behind the verses, plan ahead for festivals and grab a quick status line
Essential Questions About Abraham Lincoln
Authentic answers about Abraham Lincoln's life, iconic ghazals, and timeless literary legacy.
Still have a question? Contact us
Who was Abraham Lincoln?
Abraham Lincoln was a renowned Preserver of the Union & Liberator (1809–1865) from Hodgenville, Kentucky, USA, widely celebrated for 16TH US PRESIDENT, THE GREAT EMANCIPATOR, PRESERVER OF THE AMERICAN UNION, HONEST ABE.
What is the central philosophy and message of Abraham Lincoln?
The central philosophy of Abraham Lincoln centers around Government of the people, by the people, for the people; abolition of slavery; healing a fractured nation without vengeance, leaving timeless guidance for humanity.
What makes Abraham Lincoln's literary works so renowned?
Their poetry explores the full spectrum of human emotions—love, existential yearning, resilience, and philosophical introspection.
What are the most famous works of Abraham Lincoln?
Their masterworks include timeless couplets and verses celebrated globally across literary traditions.
What was Abraham Lincoln's impact on literary culture?
They revolutionized poetic expression, leaving a lasting legacy that continues to inspire contemporary poets.
Can I copy and share couplets by Abraham Lincoln?
Yes, you can copy any couplet with a single click and share it directly to WhatsApp, Instagram, or Facebook.
Can I download aesthetic cards for Abraham Lincoln's poetry?
Yes! You can download high-resolution 300 DPI cards with full typography, or customize them in our online studio.
Where is Abraham Lincoln's memorial or tomb located?
Memorials and historic landmarks commemorating Abraham Lincoln stand as cherished cultural heritage sites for poetry enthusiasts.
Ready to Express Yourself?
Pick a line, add your style and send it off. Your first card is a few taps away.






