Skip to main content

राहत इंदौरी की शायरी

1950 — 2020

परिचय

डॉ. राहत इंदौरी हिंदी-उर्दू के सबसे लोकप्रिय मुशायरा शायरों में से एक थे। उनकी तेवर वाली शायरी ने लाखों लोगों के दिलों में जगह बनाई।

साहित्यिक योगदान

राहत इंदौरी ने मुशायरे की परंपरा को नई ऊँचाई दी। उनकी शायरी में समाज, राजनीति, प्रेम और स्वाभिमान के विषय प्रमुख हैं। उनका शेर "सबसे ख़तरनाक" आज भी युवाओं में बेहद लोकप्रिय है।

राहत इंदौरी की शायरी

किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है ये सबका है यहाँ किसी का ज़ोर थोड़ी है

राहत इंदौरी

बुलाती है मगर जाने का नहीं ये दुनिया है यहाँ मरने का नहीं

राहत इंदौरी

सब ठीक हो जाएगा ऐसी उम्मीद रखना चाहे कितना भी मुश्किल वक़्त हो

राहत इंदौरी

अभी मंज़िल दूर है सफ़र में रुकना नहीं जो गिर जाएं उन्हें उठाना है मुकरना नहीं

राहत इंदौरी

ज़मीं पर रहने वालों का यही अंदाज़ होता है जो जैसा है उसे वैसा ही कबूल करते हैं

राहत इंदौरी

लहू में डूबे हैं लेकिन तेग़ उठा लेंगे जो सर कटा है वो सर वापस उगा लेंगे

राहत इंदौरी

मैं हिन्दुस्तान बोलता हूँ मेरी बात सुनो मैं सबका हूँ और सब मेरे हैं

राहत इंदौरी

ख़ुदा ने मुझको बनाया तो क्या इरादा था ज़मीन पर मैं किसी बात का खुदा तो नहीं

राहत इंदौरी

वो लोग बहुत खुशनसीब थे जिन्हें मोहब्बत दी और मोहब्बत मिली

राहत इंदौरी

आज के हालात में इतना ही कह सकता हूँ जो जागता है वो ज़िंदा है

राहत इंदौरी

अगर खिलाफ हो तो हाथ उठाना हाथ उठाना ज़रूरी है ज़माने को बताना ज़रूरी है

राहत इंदौरी

मेरे हिस्से की धूप दे दो मुझे मैं किसी और की छाँव नहीं चाहता

राहत इंदौरी

किसी की ज़ात पर बस इतना न कहना कि ये इंसान अच्छा या बुरा है

राहत इंदौरी

ज़माना भले ही ख़राब है मगर हम उम्मीद नहीं छोड़ सकते

राहत इंदौरी

मेरे लफ़्ज़ों में आग है मेरी आवाज़ में ज्वाला है मैं शायर हूँ सिपाही नहीं मगर मेरा कलम तलवार है

राहत इंदौरी

जो लोग बहुत बोलते हैं वो अक्सर कुछ करते नहीं जो चुप रहते हैं वो इतिहास बदल देते हैं

राहत इंदौरी

सरहदों पर जो सिपाही खड़े हैं उनके लिए मेरा सलाम है

राहत इंदौरी

कोई मुझे समझा नहीं मगर मैंने सबको समझा ये ज़िंदगी का सबसे बड़ा सबक है

राहत इंदौरी

सर ज़मीन-ए-हिन्द पर अक़वाम-ए-आलम के फ़िरक़ काफ़िले बसते गए हिन्दोस्ताँ बनता गया

राहत इंदौरी

ये इश्क़ नहीं आसाँ बस इतना समझ लीजे एक आग का दरिया है और डूब के जाना है

राहत इंदौरी

किसी पत्थर से न टकराना कि तू आईना है तू बिखर जाएगा और लोग तमाशा देखेंगे

राहत इंदौरी

अख़बारों में जो छपता है सच मान के चलते हो ये दुनिया एक नौटंकी है तुम तमाशा देखते हो

राहत इंदौरी

वो लोग बड़े ख़ुशनसीब हैं जिनके घर में पढ़ने वाला कोई होता है

राहत इंदौरी

मैं किसी का मोहताज नहीं मेरी अपनी रोशनी है मेरा अपना सूरज है

राहत इंदौरी

जो ज़मीं की ख़ातिर लड़ते हैं उनको ज़मीं मिलती है जो किस्मत के भरोसे बैठते हैं उनको सिर्फ़ आसमाँ मिलता है

राहत इंदौरी

सब याद रखना — ये बारिश की बूँदें एक दिन समुंदर बन जाएंगी

राहत इंदौरी

गर तुमने ज़ुबां खोली तो मैं समझ जाऊँगा मगर ख़ामोशी से बोलो तो मैं सुन लूँगा

राहत इंदौरी

मेरा नाम इतिहास में लिख दो मैं इस ज़माने का गवाह हूँ

राहत इंदौरी

तुम ने अगर ख़ामोशी ओढ़ ली तो ये ज़माना तुम्हें मुर्दा समझेगा

राहत इंदौरी

जो कहते हैं कि मंज़िल दूर है उनसे कहो के रास्ते चलने से कटते हैं

राहत इंदौरी

दिल में उतरना बहुत मुश्किल है हर शख़्स हर शख़्स को दिल में नहीं उतारता

राहत इंदौरी

ज़िंदगी जीने की कला सीखो सिर्फ़ साँस लेना ज़िंदगी नहीं

राहत इंदौरी

कभी-कभी वो हार के भी जीत जाता है जो हारने के बाद भी मुस्कुराता है

राहत इंदौरी

अपनी क़लम से इंक़लाब लाओ तलवारों की ज़रूरत नहीं

राहत इंदौरी

ग़ालिब ने शराब पी मीर ने ग़म पिया मैंने दोनों पिए और ज़माने से जूझता रहा

राहत इंदौरी

मत पूछो कि मैं कैसा हूँ बस इतना समझ लो कि अभी ज़िंदा हूँ

राहत इंदौरी

माँ की दुआ और बाप का साया इनसे बड़ी कोई दौलत नहीं

राहत इंदौरी

वो शहर है मेरा जहाँ हर शाम को होता है मुशायरा लफ़्ज़ों की बारिश होती है

राहत इंदौरी

मुश्किलें तो आएंगी मगर डटकर खड़े रहो वक़्त बदलेगा

राहत इंदौरी

मैंने ज़माने से कहा — मुझे आज़माओ मैं हारूँगा नहीं

राहत इंदौरी

वो लोग बड़े बदनसीब हैं जो कभी मुशायरे में नहीं गए शायरी की दुनिया अलग है

राहत इंदौरी

मेरी शायरी मेरा हथियार है मैं इससे ज़माना बदलूँगा

राहत इंदौरी

जब तक ये सांस चल रही है कुछ न कुछ करते रहो रुकना मौत है

राहत इंदौरी

किसी से नफ़रत मत करो नफ़रत इंसान को अंदर से खा जाती है

राहत इंदौरी

अगर तुम्हारे पास सपने हैं तो रास्ते भी मिल जाएंगे बस चलते रहो

राहत इंदौरी

ये दुनिया बड़ी अजीब है यहाँ रोने वाले को कोई नहीं पूछता और हँसने वाले पे सब फ़िदा हैं

राहत इंदौरी

मुझे अपनी ज़ुबान में बोलने दो मैं किसी और की भाषा में बात नहीं करता

राहत इंदौरी

जो लोग ज़मीन से जुड़े हैं वो कभी गिरते नहीं गिरते वो हैं जो हवा में उड़ते हैं

राहत इंदौरी

मैं अपने ख़्वाबों का मालिक हूँ मुझे कोई सपने बेचने न आए

राहत इंदौरी

हर इंसान एक किताब है बस पढ़ने वाला चाहिए

राहत इंदौरी