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कुमार विश्वास की शायरी

1970 — वर्तमान

परिचय

डॉ. कुमार विश्वास आधुनिक हिंदी कविता के सबसे लोकप्रिय कवियों में से एक हैं। उनकी कविता "कोई दीवाना कहता है" ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई।

साहित्यिक योगदान

कुमार विश्वास ने कवि सम्मेलन की परंपरा को युवा पीढ़ी से जोड़ा। उनकी रचनाओं में प्रेम, देशभक्ति और सामाजिक चेतना के विषय प्रमुख हैं। वे अपनी ओजस्वी प्रस्तुति के लिए जाने जाते हैं।

कुमार विश्वास की शायरी

कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है

कुमार विश्वास

इश्क़ में हम जवाँ हुए ये जान कर हम यहाँ हुए कि हम न रहें तो कोई क्या जाने कि प्यार में लोग कहाँ-कहाँ हुए

कुमार विश्वास

मोहब्बत का जुनून सर पे हो तो ज़माने की परवाह कौन करता है

कुमार विश्वास

ज़िंदगी में कुछ पाने के लिए कुछ खोना भी पड़ता है ये सच है जो सबको मानना पड़ता है

कुमार विश्वास

तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो क्या ग़म है जो छुपा रहे हो

कुमार विश्वास

प्रेम की गंगा बहती है यहाँ हर किसी को नहाना है जो डर कर किनारे पर बैठा उसे भी डूबकर आना है

कुमार विश्वास

वो मेरी नज़्म का हिस्सा है मैं उसकी ग़ज़ल का मतला हूँ वो जुदा है मगर हक़ीक़त ये है कि मैं आज भी उससे जुड़ा हूँ

कुमार विश्वास

कभी-कभी लगता है कि ज़िंदगी एक अधूरी कविता है जिसका अंत कोई नहीं जानता

कुमार विश्वास

रूठ जाओ तो मनाना भी आता है मुझे बस तुम रूठो तो सही

कुमार विश्वास

मोहब्बत एक ऐसी चीज़ है जो दिल से दिल तक जाती है ज़ुबान से नहीं कही जाती

कुमार विश्वास

जो तुम आ जाते एक बार कितना नूर आ जाता इस अंधेरे में दिल की हर शाम सवेरे में बदल जाती

कुमार विश्वास

किसी से प्यार करो तो बताओ छुपाने से कुछ नहीं होता जो दिल में है वो कह दो

कुमार विश्वास

हम तो अपने ही ग़मों में डूबे हुए थे किसी ने आकर और ग़म दे दिए

कुमार विश्वास

वो कहते हैं कि प्यार अंधा होता है मगर मैं कहता हूँ प्यार सबसे ज़्यादा दिखाता है

कुमार विश्वास

तुम्हारी याद में कट जाती हैं रातें सुबह होती है तो फिर तुम्हारा इंतज़ार

कुमार विश्वास

ज़िंदगी ने सिखाया बहुत कुछ मगर सबसे बड़ा सबक ये है कि अकेले चलना सीखो

कुमार विश्वास

वो मुझे भुला दे ये हो नहीं सकता मैं उसकी यादों में ज़िंदा रहूँगा हमेशा

कुमार विश्वास

मेरे मोहल्ले की वो लड़की अब शहर बदल चुकी है मगर मेरा दिल वहीं है

कुमार विश्वास

कविता बन जाती है ज़िंदगी जब कोई ख़ास मिल जाता है

कुमार विश्वास

मैंने उसे चाहा इतना कि ख़ुद को भूल गया ये प्यार था या पागलपन

कुमार विश्वास

वो कहती थी कि मुझसे बात करो मैं बात करता रहा वो सुनती कब थी

कुमार विश्वास

इश्क़ में हम ने जो खोया वो किसी दौलत से नहीं मिलता

कुमार विश्वास

ये जो दिल धड़कता है ना इसमें एक ही नाम गूंजता है

कुमार विश्वास

राधा के बिना कृष्ण अधूरे हैं मेरे बिना तू अधूरी है ये कहने का साहस मुझमें है

कुमार विश्वास

मंच पर कविता सुनाता हूँ मगर सबसे ख़ूबसूरत कविता मैंने तुम्हारे लिए लिखी है

कुमार विश्वास

कोई दीवाना कहे या पागल मुझे फ़र्क नहीं पड़ता मैं तो बस तुम्हारा हूँ

कुमार विश्वास

मोहब्बत सिखाती है जीना बिना मोहब्बत ज़िंदगी बस साँसों का खेल है

कुमार विश्वास

कवि हूँ — शब्दों का सौदागर नहीं मेरी कविता दिल से निकलती है बाज़ार के लिए नहीं

कुमार विश्वास

वो लोग क्या जानें इश्क़ क्या है जिन्होंने कभी किसी को चाहा नहीं

कुमार विश्वास

कभी-कभी लगता है कि प्यार सबसे बड़ी ताक़त है और सबसे बड़ी कमज़ोरी भी

कुमार विश्वास

तुम मिलो तो ज़माना भूल जाऊँ तुम बिछड़ो तो ज़माना याद आए

कुमार विश्वास

मेरी कविता में दर्द है क्योंकि मेरी ज़िंदगी में इश्क़ है

कुमार विश्वास

एक अरसा हो गया उसे देखे मगर चेहरा अभी भी याद है जैसे कल की बात हो

कुमार विश्वास

प्यार करना गुनाह नहीं मगर इस ज़माने में प्यार करने वालों को सज़ा मिलती है

कुमार विश्वास

कविता तब लिखता हूँ जब दिल बहुत भारी होता है ये मेरा therapy है

कुमार विश्वास

मैं उसका नाम लेता हूँ तो दुनिया हँसती है मगर मुझे परवाह नहीं

कुमार विश्वास

इश्क़ वो आग है जो जलती रहती है बुझती नहीं चाहे कितना भी वक़्त बीत जाए

कुमार विश्वास

ज़िंदगी एक कविता है कुछ पंक्तियाँ ख़ुशी की कुछ दर्द की — दोनों ज़रूरी हैं

कुमार विश्वास

वो कहती थी — तुम शायर बनोगे मैं बन गया — मगर वो मेरी किताब पढ़ने नहीं आई

कुमार विश्वास

हर मुशायरे में एक शेर उसके नाम होता है भले दुनिया न जाने

कुमार विश्वास

कृष्ण ने राधा को कभी भुलाया नहीं मैं तुम्हें कैसे भुला दूँ

कुमार विश्वास

मंच पर ताली बजती है मगर दिल में दर्द है ये शायर की ज़िंदगी है

कुमार विश्वास

इश्क़ में इज़्ज़त भी गई इज़्ज़त में इश्क़ भी गया बस एक कविता बची रह गई

कुमार विश्वास

तुम्हारी याद में रातें गुज़रती हैं सुबह होती है तो एक नई कविता तैयार मिलती है

कुमार विश्वास

मैं वो हूँ जो कह देता है दिल में जो है — चाहे कोई माने या न माने

कुमार विश्वास

प्यार की कोई उम्र नहीं होती प्यार कभी भी हो सकता है बस दिल खुला रखो

कुमार विश्वास

हिन्दी कविता की ताक़त है कि वो दिलों को जोड़ती है भाषा नहीं — एहसास है

कुमार विश्वास

मेरे अल्फ़ाज़ मेरी पहचान हैं मैं कवि हूँ — मेरी ज़ुबान ही मेरी तलवार है

कुमार विश्वास

ज़िंदगी के हर रंग में एक कविता छिपी है बस देखने की नज़र चाहिए

कुमार विश्वास

वो दिन भी आएंगे जब मेरी कविताएँ लोग गुनगुनाएंगे और मुझे याद करेंगे

कुमार विश्वास