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बशीर बद्र की शायरी

1935 — वर्तमान

परिचय

बशीर बद्र उर्दू के प्रसिद्ध ग़ज़लकार हैं जिनकी शायरी प्रेम और रिश्तों की गहराई को बयान करती है। उनकी ग़ज़लें अपनी मधुरता के लिए जानी जाती हैं।

साहित्यिक योगदान

बशीर बद्र ने उर्दू ग़ज़ल में प्रेम और रिश्तों को बहुत ख़ूबसूरती से लिखा है। उनकी भाषा सरल किन्तु प्रभावशाली है। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार और पद्मश्री से सम्मानित किया गया है।

बशीर बद्र की शायरी

दोस्ती तोड़ दो या निभाओ हम से ये अधूरापन सहा नहीं जाता

बशीर बद्र

ज़िंदगी कम नहीं ख़ूबसूरत मगर इसको जीने का सलीक़ा चाहिए

बशीर बद्र

कोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक से ये नए मिज़ाज का शहर है ज़रा फ़ासले से मिला करो

बशीर बद्र

मैं तुम्हारे साथ हूँ हर मोड़ पर तुम मुझे अपना समझो या न समझो

बशीर बद्र

इक बार तुम्हें देखा तो यूँ लगा जैसे खिली हो कली और मुस्कुराया कोई

बशीर बद्र

हर किसी को यहाँ कुछ न कुछ चाहिए किसी को शोहरत तो किसी को सुकून

बशीर बद्र

वो मिले मुझ से ऐसे कि जैसे आईने में कोई अपना अक्स देख ले

बशीर बद्र

बहुत से लोग मिले ज़िंदगी के सफ़र में मगर कोई दिल से अपना न लगा

बशीर बद्र

ज़िंदगी क्या है एक ख़्वाब है जो कभी पूरा होता नहीं

बशीर बद्र

मैं बहुत कुछ कहना चाहता था मगर लफ़्ज़ साथ नहीं देते

बशीर बद्र

तुमने जो दर्द दिया उसके लिए शुक्रिया वरना मैं शायर कैसे बनता

बशीर बद्र

रिश्ते निभाना कोई आसान काम नहीं इसमें दोनों तरफ से लगन चाहिए

बशीर बद्र

चलो एक बार फिर से अजनबी बन जाएं हम दोनों न मैं तुम से कोई उम्मीद रखूँ न तुम मुझ से

बशीर बद्र

कुछ लोग बहुत ख़ास होते हैं उनके बिना ज़िंदगी अधूरी लगती है

बशीर बद्र

इस शहर में हर शख़्स परेशान सा क्यों है हर चेहरे पे क्यों इक उदासी छाई है

बशीर बद्र

वो जो मुझसे बिछड़ गए उनकी यादें अभी भी ताज़ा हैं

बशीर बद्र

कभी अकेले में बैठ कर सोचो कितने रिश्ते तुमने अधूरे छोड़ दिए

बशीर बद्र

ज़माना बदल गया है मगर लोग वही हैं बस चेहरे बदल गए हैं बातें वही हैं

बशीर बद्र

मैं तेरी ख़ुशबू से लिपटा हुआ हूँ तू कहीं भी हो मगर मेरे पास है

बशीर बद्र

वो जो हमसे रूठ गए उनसे कहो कि हम अभी भी वहीं हैं जहाँ से वो गए थे

बशीर बद्र

दिल की बात ज़ुबां पर आती नहीं आँखों से कह दी जाती है

बशीर बद्र

किसी को खोने का ग़म इतना नहीं जितना ये ग़म कि कोई वापस नहीं आता

बशीर बद्र

मैंने चाँद से कहा तू ख़ूबसूरत है चाँद ने कहा तुम किसको देख रहे हो

बशीर बद्र

ज़ख़्मों को सहलाना आता है मुझे मगर दिखाना नहीं आता

बशीर बद्र

मैं बहुत सादा हूँ मुझे कोई भी बेवकूफ़ बना सकता है मगर मैं किसी को बेवकूफ़ नहीं बनाता

बशीर बद्र

वो लोग ख़ुशनसीब हैं जिनके दोस्त सच्चे हैं ये दौलत किसी खजाने से कम नहीं

बशीर बद्र

मेरी तन्हाई में तू ही तू है तेरी महफ़िल में मैं कहीं नहीं

बशीर बद्र

ज़िंदगी का ये उसूल है जो बीत गया वो बीत गया जो आने वाला है उसकी तैयारी करो

बशीर बद्र

कुछ लोग मिले जो दिल से अपने लगे कुछ लोग मिले जो बस नाम के अपने थे

बशीर बद्र

ख़ामोशी भी बहुत कुछ कहती है बस सुनने वाला चाहिए

बशीर बद्र

मैंने दुनिया को बहुत क़रीब से देखा है यहाँ हर शख़्स अपनी ही धुन में है

बशीर बद्र

तेरे जाने के बाद ये कमरा बहुत ख़ामोश हो गया है

बशीर बद्र

हम तो वो हैं जो किसी से मुँह नहीं मोड़ते चाहे कोई मुँह मोड़ ले

बशीर बद्र

ये ज़िंदगी किसी इम्तिहान से कम नहीं हर रोज़ एक नया सवाल होता है

बशीर बद्र

कभी किसी की आँखों में देखो पूरी कहानी मिल जाएगी लफ़्ज़ों की ज़रूरत नहीं

बशीर बद्र

उसने कहा था कि मिलेंगे मगर वो आज तक नहीं मिले मैं अभी भी इंतज़ार में हूँ

बशीर बद्र

ज़िंदगी ने मुझे इतना सिखाया कि अब किसी सबक की ज़रूरत नहीं

बशीर बद्र

रिश्ते टूटते हैं तो आवाज़ नहीं आती बस एक ख़ामोशी छा जाती है

बशीर बद्र

मैं वो नहीं जो दिखता हूँ मैं वो हूँ जो मेरी शायरी कहती है

बशीर बद्र

किसी को खोकर ही पता चलता है कि वो कितना ज़रूरी था

बशीर बद्र

मेरे दिल में जो दर्द है वो मेरी शायरी में दिखता है ये मेरा आईना है

बशीर बद्र

बहुत मुश्किल है रिश्ते निभाना मगर जो निभाते हैं वो बहुत ख़ास होते हैं

बशीर बद्र

मैं अकेला चला था मगर लोग मिलते गए कारवाँ बनता गया

बशीर बद्र

उसकी एक मुस्कान काफ़ी है मेरी सारी थकान दूर करने के लिए

बशीर बद्र

ये शहर मुझे अजनबी लगता है यहाँ हर शख़्स भागा जा रहा है किसी को फ़ुरसत नहीं

बशीर बद्र

प्यार में कोई शर्त नहीं होती जो शर्त रखे वो प्यार नहीं सौदा है

बशीर बद्र

मैंने अपना ग़म किसी को नहीं बताया मगर मेरी आँखों ने सब कह दिया

बशीर बद्र

वक़्त के साथ सब बदल जाता है बस यादें वहीं रहती हैं जहाँ छोड़ आए थे

बशीर बद्र

कुछ रिश्ते दिल से होते हैं कुछ ज़ुबान से दिल वाले रिश्ते कभी नहीं टूटते

बशीर बद्र

मैं शायर हूँ — दर्द मेरी दवा है जितना ज़्यादा दर्द उतनी अच्छी शायरी

बशीर बद्र